झारखंड

Santali Language to Be Introduced in Jharkhand Private Schools

झारखंड के निजी स्कूलों में अब पढ़ाई जाएगी संताली भाषा, डीपीएस रांची से होगी शुरुआत

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Students at a private school in Jharkhand as Santali language education is set to begin
Santali Language Classes to Begin in Jharkhand Private Schools from 2026-27

रांची: झारखंड के निजी स्कूलों में अब संताली भाषा की पढ़ाई का रास्ता साफ हो गया है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 से आर-वन, आर-टू और आर-थ्री स्तर पर संताली भाषा को शामिल करने की तैयारी की जा रही है. इस पहल की शुरुआत डीपीएस रांची से होगी. इसे राज्य के निजी स्कूलों में संताली भाषा की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

सीबीएसई के निर्देश पर शुरू होगी पढ़ाई

संताली भाषा को लेकर संबद्ध निजी स्कूलों से जानकारी जुटाई जा रही है. सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय, रांची के निर्देश के अनुसार स्कूलों से यह जानकारी मांगी जा रही है कि कितने विद्यार्थी संताली भाषा पढ़ने में रुचि रखते हैं.

डीपीएस रांची में इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा चुकी है. स्कूल प्रबंधन की ओर से विद्यार्थियों और अभिभावकों से संताली भाषा की पढ़ाई में रुचि रखने वाले छात्रों की जानकारी मांगी गई है. प्राप्त जानकारी को संकलित कर निर्धारित समय-सीमा में सीबीएसई को भेजा जाएगा.

संताली भाषा के लिए बनाई गई विशेष कमेटी

डीपीएस रांची की प्राचार्या डॉ. जया चौहान के अनुसार, स्कूल में संताली भाषा की पढ़ाई शुरू करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है. कमेटी को पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है.

संताली भाषा पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी. स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के लिए एक अतिरिक्त विषय उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें बहुभाषिक शिक्षा, अपनी संस्कृति से जुड़ाव और समग्र विकास का अवसर देना भी है.

विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार की संताली भाषा की पुस्तक

संताली भाषा की पाठ्यपुस्तक तैयार करने के लिए डीपीएस रांची परिसर में विशेषज्ञों की एक टीम ने काम किया है. इस कमेटी में झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े नौ विशेषज्ञ और शिक्षक शामिल रहे.

कमेटी में सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू बिरसा विश्वविद्यालय, एसकेएम विश्वविद्यालय, डीएसपीएमयू रांची समेत विभिन्न स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं. इन विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के स्तर को ध्यान में रखते हुए संताली भाषा की अध्ययन सामग्री और पुस्तक तैयार करने में योगदान दिया है.

विद्यार्थियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ने का मिलेगा मौका

संताली भाषा को निजी स्कूलों में पढ़ाए जाने से विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा. खासकर संताली समुदाय के विद्यार्थियों के लिए यह पहल अपनी भाषा को औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

डीपीएस रांची से इसकी शुरुआत होने के बाद आने वाले समय में राज्य के अन्य निजी स्कूलों में भी संताली भाषा की पढ़ाई शुरू होने की संभावना है. इससे स्कूल शिक्षा में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Road construction and strengthening work underway in rural areas of Madhupur, Jharkhand
मधुपुर में सड़कों की बदलेगी तस्वीर, 11 करोड़ से 7 प्रमुख मार्गों का होगा कायाकल्प

मधुपुर: मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से सात महत्वपूर्ण सड़कों के सुदृढ़ीकरण कार्य का शिलान्यास किया गया. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने के साथ लोगों को जर्जर सड़कों से राहत मिलने की उम्मीद है. प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजनाओं का शिलान्यास किया. वहीं, फौजी मोड़ स्थित शिलापट्ट का अनावरण विधायक प्रतिनिधि शब्बीर हसन ने किया. ग्रामीण इलाकों में बेहतर होगा सड़क संपर्क शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. ग्रामीण इलाकों में अच्छी सड़कें होने से लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और बाजार, स्कूल, अस्पताल समेत अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंच आसान होगी. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान ग्रामीणों से सड़क निर्माण और सुदृढ़ीकरण को लेकर जो वादे किये गये थे, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है. आने वाले समय में विधानसभा क्षेत्र के अन्य मार्गों को भी बेहतर करने की दिशा में काम किया जायेगा. इन सात सड़कों का होगा सुदृढ़ीकरण मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत मधुपुर विधानसभा क्षेत्र की सात प्रमुख सड़कों को शामिल किया गया है. फौजी मोड़ से करीकादो: पटवाबाद मुख्य सड़क से करीकादो तक करीब 5 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण होगा. मीना बाजार मार्ग: पीडब्ल्यूडी सड़क से मीना बाजार, भाया टिटहियाटांड़ तक सड़क को बेहतर किया जायेगा. लालगढ़ से देन: करीब 1.52 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा. कानो मदरसा मोड़ से धावाटांड़: मारनी मोड़ से इस मार्ग तक करीब 1.260 किलोमीटर सड़क का काम होगा. मदनकट्टा से बुड़ीकुरा मोड़: करीब 5 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा. करौं से चोरबदिया: पीडब्ल्यूडी पथ के इस हिस्से में करीब 2.18 किलोमीटर सड़क को बेहतर किया जायेगा. तारापुर मोड़ से दुमरबाद सीमा: जौत नीच टोला होते हुए करीब 2 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण होगा. ग्रामीणों को मिलेगी जर्जर सड़कों से राहत इन सड़कों के सुदृढ़ीकरण के बाद मधुपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है. खासकर बारिश के मौसम में खराब सड़क और आवागमन की परेशानी झेलने वाले ग्रामीणों को राहत मिल सकती है. बेहतर सड़क बनने से रोजाना आने-जाने वाले लोगों के साथ किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को भी सुविधा होगी. कार्यक्रम में मौजूद रहे जनप्रतिनिधि शिलान्यास कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य फारूक अंसारी, जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि इमरान अंसारी, दिनेश्वर किस्कू, प्रकाश मंडल, अबूतालिब अंसारी, गुलाम अशरफ, पवन यादव, रौशन झा, नेमूल रबीउल्लाह, करौं जिला परिषद सदस्य ललन सिंह, भागीरथ गोस्वामी, मुन्ना रवानी, प्रहलाद दास, मिट्ठू सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे.  

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JPSC-JSSC Protest: सदर अस्पताल में भर्ती सभी छात्रों की हालत बेहतर, आज हो सकते हैं डिस्चार्ज

रांची: JPSC-JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान घायल होकर रांची सदर अस्पताल में भर्ती छात्रों की हालत अब बेहतर है. अस्पताल प्रबंधन ने इलाजरत सभी छात्रों को मंगलवार को डिस्चार्ज करने की तैयारी की है. अस्पताल में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य छात्रों का इलाज चल रहा था. डॉक्टरों के अनुसार सभी छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ है और अब उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है. धरना-प्रदर्शन के दौरान बिगड़ी थी तबीयत JPSC और JSSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में रांची में छात्र आंदोलन कर रहे थे. इसी दौरान कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने और चोट लगने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाजरत छात्रों में पलामू निवासी राहुल क्रांति, मनीष कुमार सिंह और छात्रा उम्मे हबीबा शामिल थीं. उम्मे हबीबा को पिछले मंगलवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने किया स्वास्थ्य परीक्षण सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने सोमवार देर रात अस्पताल में भर्ती छात्रों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली. उन्होंने छात्रों की स्थिति का जायजा लेने के बाद बताया कि सभी की हालत पहले की तुलना में काफी बेहतर है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार डॉक्टरों की निगरानी में इलाज के बाद अब छात्रों की स्थिति स्थिर है. इसी आधार पर सभी को अस्पताल से छुट्टी देने की तैयारी की जा रही है. आंदोलन के बीच छात्रों की सेहत पर रही नजर JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान कई छात्रों की तबीयत बिगड़ी थी. अनशन और धरना-प्रदर्शन के कारण आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा. फिलहाल अस्पताल में भर्ती छात्रों की हालत में सुधार के बाद उनके डिस्चार्ज का रास्ता साफ हो गया है. वहीं, परीक्षा विवाद और छात्रों की मांगों को लेकर सरकार के अगले कदम पर भी सभी की नजर बनी हुई है.  

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BSO Tejnarayan Pandit detained in Chatra in connection with the JSSC CGL irregularities case
JSSC CGL मामला: पत्थलगड्डा के BSO तेजनारायण पंडित हिरासत में, CID के निर्देश पर पूछताछ जारी

चतरा: JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में पत्थलगड्डा के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) तेजनारायण पंडित को स्थानीय पुलिस ने हिरासत में लिया है. बताया जा रहा है कि CID के निर्देश पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है. हिरासत में लेने के बाद उनसे परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है. परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में नाम सामने आया था जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान तेजनारायण पंडित का नाम सामने आया था. इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए CID के निर्देश पर स्थानीय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. पुलिस उनसे परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम, संभावित संपर्क और अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटा रही है. हालांकि, अभी तक पुलिस या संबंधित अधिकारियों की ओर से तेजनारायण पंडित की भूमिका को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. पूछताछ के बाद साफ होगी भूमिका हिरासत में लिए गए BSO से लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित परीक्षा गड़बड़ी में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं और यदि थी तो उसका स्वरूप क्या था. फिलहाल सिर्फ हिरासत और पूछताछ की कार्रवाई हुई है. तेजनारायण पंडित की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी. 17 अगस्त को सरकार ने JSSC CGL रद्द करने का किया ऐलान गौरतलब है कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर रांची में अभ्यर्थियों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा था. इसी बीच 17 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया था. सरकार ने इसके साथ ही TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की है. वहीं CGL परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी की जांच की बात भी कही गई है. अब पत्थलगड्डा के BSO को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने के बाद JSSC CGL मामले की जांच को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं. जांच में आगे और क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.  

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