हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के सरकारी स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रह गए हैं। यहां शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को जीवन से जुड़े जरूरी कौशल भी सिखाए जा रहे हैं। इस पहल का मकसद बच्चों को शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाना है। जीवन कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष फोकस जिले के स्कूलों में चल रहे इस अभियान के तहत किशोर-किशोरियों को 16 से अधिक महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जा रही है। इनमें स्वास्थ्य, पोषण, व्यक्तिगत स्वच्छता, लिंग समानता, नशामुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा बाल विवाह, बाल तस्करी, हिंसा से बचाव और भावनात्मक संतुलन जैसे संवेदनशील विषयों पर भी छात्रों को जागरूक किया जा रहा है। 160 शिक्षकों को मिला सम्मान सोमवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में 80 स्कूलों के 160 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। यह आयोजन शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (C3) के संयुक्त प्रयास से किया गया था। सम्मानित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर उनके योगदान की सराहना की गई। नगर भवन में हुआ जिला स्तरीय कार्यक्रम यह कार्यक्रम नगर भवन में आयोजित जिला स्तरीय साथिया (पीयर एजुकेटर) सम्मेलन और स्वास्थ्य आरोग्य दूत सम्मान समारोह के तहत हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधीक्षक आकाश कुमार, राज्य समन्वयक रफत फरजाना और सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार समेत कई अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने किशोर स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी और इस पहल को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। नाटक के जरिए जागरूकता का संदेश कार्यक्रम के दौरान पीयर एजुकेटर छात्रों ने लघु नाटिका प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से महावारी स्वच्छता, नशामुक्ति और बीमारियों से बचाव जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से सामने रखा गया। जिले में शिक्षा का व्यापक विस्तार हजारीबाग जिले में शिक्षा का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। यहां कक्षा 1 से 12वीं तक करीब 1800 स्कूल संचालित हैं। जिले के 16 प्रखंडों और 1300 से अधिक गांवों में यह पहल बच्चों तक पहुंच रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य का बेहतर समन्वय यह पहल शिक्षा और स्वास्थ्य के समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आई है। इससे छात्र न सिर्फ पढ़ाई में बेहतर हो रहे हैं, बल्कि जीवन के अहम फैसले लेने में भी सक्षम बन रहे हैं। आगे और मजबूत होगी पहल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के कार्यक्रम लगातार जारी रहे, तो इसका सकारात्मक असर पूरे झारखंड में देखने को मिलेगा। इससे बच्चों में जागरूकता बढ़ेगी और वे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित हो सकेंगे।
एडमिशन-रजिस्टर से लेकर साफ-सफाई तक प्रभावित, करीब एक लाख बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी स्कूलों की हालत नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही चिंताजनक हो गई है। जिले के 1457 प्रारंभिक विद्यालयों को अब तक विद्यालय विकास कोष की राशि नहीं मिल पाई है, जिससे स्कूलों की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। नए सत्र से पहले बढ़ी परेशानी राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में 1 अप्रैल 2026 से नया सत्र शुरू होना है, लेकिन मार्च खत्म होने को है और अब तक फंड जारी नहीं किया गया है। आमतौर पर हर साल झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा मार्च की शुरुआत में ही यह राशि उपलब्ध करा दी जाती है, ताकि स्कूल समय रहते तैयारी पूरी कर सकें। इस बार देरी से स्कूल प्रबंधन और शिक्षक दोनों चिंतित हैं। एडमिशन और अटेंडेंस रजिस्टर की कमी फंड नहीं मिलने का सबसे बड़ा असर एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ रहा है। स्कूलों में नामांकन और छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए जरूरी रजिस्टर तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा चॉक, डस्टर जैसी सामान्य शैक्षणिक सामग्री भी स्कूलों में नहीं पहुंच पाई है। कई शिक्षक अपने स्तर पर व्यवस्था कर किसी तरह पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। एक लाख छात्रों की पढ़ाई पर असर इस वित्तीय संकट का सीधा प्रभाव जिले के करीब एक लाख छात्रों पर पड़ रहा है। बुनियादी संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द फंड नहीं मिला तो सत्र की शुरुआत अव्यवस्थित तरीके से होगी। स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित विद्यालय विकास कोष का एक हिस्सा साफ-सफाई और स्वच्छता पर खर्च किया जाता है, लेकिन फंड के अभाव में स्कूलों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है और पेयजल की देखरेख भी प्रभावित हो रही है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। छात्रों की संख्या के आधार पर मिलती है राशि सरकारी प्रावधान के अनुसार, स्कूलों को छात्रों की संख्या के आधार पर फंड दिया जाता है- 100 तक छात्र: 25 हजार रुपये 101 से 200 छात्र: 50 हजार रुपये 201 से 300 छात्र: 75 हजार रुपये यह राशि विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के खाते में भेजी जाती है, जहां से स्कूल के विकास कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है। विभाग की चुप्पी से बढ़े सवाल फंड जारी करने में हो रही देरी को लेकर शिक्षा विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। जमीनी स्तर पर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। क्या बोले अधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने बताया कि माध्यमिक स्कूलों को फंड मिल चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रारंभिक विद्यालयों के लिए भी जल्द ही राशि जारी कर दी जाएगी, जिससे स्कूलों में जरूरी व्यवस्थाएं बहाल हो सकें।
रांची: झारखंड के रांची जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां एक सरकारी स्कूल की छात्रा ने अपनी प्रतिभा से सबको चौंका दिया है। चान्हो स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की 9वीं कक्षा की छात्रा Khushi Kumari ने लगभग 5 किलोमीटर तक काम करने वाला ऑडियो ट्रांसमीटर तैयार किया है। यह डिवाइस एक साथ सैकड़ों लोगों तक जानकारी पहुंचाने में सक्षम है, जो खासकर ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और सूचना प्रसार के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। STEM लैब ने बदली पढ़ाई की दिशा खास बात यह है कि Khushi Kumari पहले विज्ञान विषय को समझने में कठिनाई महसूस करती थीं। लेकिन स्कूल में शुरू हुई STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) लैब में प्रैक्टिकल तरीके से पढ़ाई ने उनकी सोच और समझ दोनों को बदल दिया। उन्होंने अपने विज्ञान शिक्षक के मार्गदर्शन में यह डिवाइस तैयार किया, जो अब ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना साझा करने का मजबूत माध्यम बन सकता है। 36 हजार से ज्यादा छात्राओं को मिल रहा फायदा खुशी अकेली नहीं हैं। झारखंड के 7 जिलों में चल रहे इस प्रोजेक्ट के तहत 36,000 से ज्यादा छात्राएं अब किताबों की बजाय प्रैक्टिकल के जरिए विज्ञान सीख रही हैं। 82 सरकारी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) और झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय (JBAV) की छात्राएं अब रटने की बजाय प्रयोग करके विज्ञान के सिद्धांत समझ रही हैं और रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान खोज रही हैं। ‘प्रोजेक्ट ब्रिज’ से मिला नया प्लेटफॉर्म यह पहल ‘प्रोजेक्ट ब्रिज’ के तहत शुरू की गई है, जो राज्य के शिक्षा विभाग, UNICEF India और BMW Group के सहयोग से संचालित हो रही है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में STEM शिक्षा को मजबूत करना और छात्राओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। विशेषज्ञों ने सराहा प्रयास हाल ही में इन संस्थाओं की टीम ने रांची के कुछ स्कूलों का दौरा किया और प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की। Saadhna Panday ने कहा कि भारत में शुरुआती शिक्षा में सुधार हुआ है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर STEM विषयों में प्रदर्शन अभी भी चुनौती है। ऐसे प्रोजेक्ट इस अंतर को भरने में मदद कर रहे हैं। वहीं Vinod Pandey ने बताया कि शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक हैं और इससे छात्रों की समझ में स्पष्ट सुधार देखा गया है। पूरे राज्य में विस्तार की तैयारी राज्य सरकार भी इस पहल को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है। Shashi Ranjan ने बताया कि झारखंड के करीब 2,800 माध्यमिक स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से STEM लैब स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे खासकर लड़कियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
जमशेदपुर। झारखंड में बी.एड, एम.एड और बी.पी.एड जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा 2026 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और कदाचार मुक्त कराने के लिए विशेष व्यवस्था कर रहे हैं। जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में इस परीक्षा के लिए कुल 9 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर 6,104 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और जरूरी सुविधाएं जैसे पेयजल, बिजली और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। महत्वपूर्ण जानकारी आवेदन की अंतिम तिथि: 25 मार्च 2026 परीक्षा तिथि: 26 अप्रैल 2026 (रविवार) समय: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक प्रशासन की अभ्यर्थियों से अपील प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें और परीक्षा के दिन कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंचें, ताकि जांच प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। कड़े सुरक्षा इंतजामों और बेहतर सुविधाओं के साथ इस परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है ।
हजारीबाग: झारखंड के Hazaribagh जिले में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 मार्च को नव साक्षरों की पहली आकलन परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में जिले के करीब 26 हजार नव साक्षर महिला और पुरुष भाग लेंगे। परीक्षा के सफल संचालन को लेकर जिला शिक्षा विभाग ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। 26 हजार नव साक्षर देंगे परीक्षा जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) सह साक्षरता कार्यक्रम के सचिव Akash Kumar ने बताया कि यह आकलन परीक्षा नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य नव साक्षरों के ज्ञान और सीखने की प्रगति का मूल्यांकन करना है। उन्होंने बताया कि परीक्षा में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों को बाद में प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें आगे की शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों में लाभ मिल सकेगा। 4143 स्कूल बनाए गए परीक्षा केंद्र परीक्षा के आयोजन के लिए जिले भर में 4143 स्कूलों का चयन किया गया है। इन स्कूलों के एक-एक कक्षा कक्ष को जन चेतना केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। 15 मार्च को नव साक्षर इन केंद्रों पर पहुंचकर आकलन परीक्षा देंगे। व्यवस्था इस तरह की गई है कि प्रतिभागियों को अपने नजदीकी केंद्र पर ही परीक्षा देने की सुविधा मिल सके। 16 प्रखंडों में एक साथ होगी परीक्षा जिले के सभी 16 प्रखंडों में एक ही दिन यह परीक्षा आयोजित की जाएगी। इनमें सदर, दारू, टाटीझरिया, इचाक, विष्णुगढ़, पदमा, बरही, बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग, कटकमसांडी, चौपारण, चलकुसा, बरकट्ठा, डाडी और चुरचू प्रखंड शामिल हैं। इन सभी प्रखंडों में बनाए गए जन चेतना केंद्रों पर नव साक्षर निर्धारित समय पर परीक्षा में शामिल होंगे। तैयारी को लेकर हुई समीक्षा बैठक परीक्षा की तैयारियों को लेकर गुरुवार को राज्य स्तर पर ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य स्तरीय कार्यक्रम पदाधिकारी Manoj Kumar ने जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। यह बैठक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आयोजित की गई, जिसमें परीक्षा की व्यवस्था और जिम्मेदारियों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में शामिल हुए कई अधिकारी समीक्षा बैठक में साक्षरता कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी नागेश्वर सिंह, बीईईओ बिजय राम, राकेश कुमार, बीपीओ रश्मि सिंह और जिला समन्वयक निसार खान वारसी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा जिले के सभी 16 प्रखंडों के बीपीओ, डीआरजी, एसआरजी, बीआरपी, सीआरपी और अन्य शिक्षाकर्मी भी शामिल हुए। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस परीक्षा के माध्यम से नव साक्षरों की शैक्षणिक प्रगति का आकलन किया जाएगा और भविष्य में साक्षरता कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री योजना को लेकर महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत चयनित स्कूलों के विकास और बेहतर क्रियान्वयन को लेकर 13 मार्च को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में जिले के 19 चयनित स्कूलों के प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापक भाग लेंगे, जहां उन्हें योजना के प्रभावी संचालन और स्कूल विकास से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। 13 प्रखंडों में चुने गए पीएम श्री स्कूल हजारीबाग जिले के 16 प्रखंडों में से 13 प्रखंडों में एक-एक पीएम श्री स्कूल का चयन किया गया है। इसके अलावा सदर, बड़कागांव और चलकुसा प्रखंड में दो-दो स्कूलों को इस योजना में शामिल किया गया है। इस प्रकार जिले में कुल 19 स्कूलों को पीएम श्री योजना के तहत विकसित किया जा रहा है, जिनमें आधुनिक शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 2024 में शुरू हुई पीएम श्री योजना पीएम श्री योजना की शुरुआत वर्ष 2024 में की गई थी। इसका उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है। इस योजना के तहत चयनित स्कूलों को शैक्षणिक गतिविधियों को मजबूत करने, भवन निर्माण, डिजिटल सुविधाएं, शिक्षण सामग्री और अन्य बुनियादी संसाधनों के लिए हर साल एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि देने का प्रावधान है। यह राशि सामान्यतः मार्च माह के अंत तक स्कूलों को उपलब्ध कराई जाती है। डायट में होगी उन्मुखीकरण कार्यशाला जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने बताया कि 13 मार्च को आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शुरू होगा। कार्यशाला में प्रधानाध्यापकों को पीएम श्री योजना के उद्देश्यों, इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया और इससे जुड़े प्रशासनिक व शैक्षणिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला पर 50 हजार रुपये खर्च डीईओ प्रवीण रंजन के अनुसार, इस एक दिवसीय कार्यशाला के आयोजन पर लगभग 50 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। कार्यक्रम में पीएम श्री योजना से जुड़े प्रशिक्षित शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे, जो स्कूल प्रबंधन, वित्तीय व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने के उपायों पर मार्गदर्शन देंगे। स्कूलों को मिल सकता है एक-एक करोड़ रुपये शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस महीने के अंत तक जिले के सभी 19 पीएम श्री स्कूलों को केंद्र सरकार की ओर से एक-एक करोड़ रुपये की राशि जारी की जा सकती है। इस धनराशि का उपयोग स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने में किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस योजना से हजारीबाग जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।