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Jharkhand to Get 400 Electric Buses in 4 Cities

झारखंड के 4 शहरों में जल्द दौड़ेंगी 400 इलेक्ट्रिक बसें, रांची-जमशेदपुर समेत इन शहरों को मिलेगा फायदा

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Electric buses proposed for public transport in Ranchi, Jamshedpur, Dhanbad and Bokaro
Jharkhand Plans 400 Electric Buses for Ranchi, Jamshedpur, Dhanbad and Bokaro

रांची: झारखंड में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की तैयारी तेज हो गई है. राज्य के रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो शहरों में जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन शुरू करने की योजना है. सरकार ने चारों शहरों के लिए कुल 400 ई-बसों का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत प्रत्येक शहर में 100-100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है.

इन बसों की खरीद केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत किए जाने का प्रस्ताव है. राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और वित्त विभाग की मंजूरी के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद बसों की खरीद और परिचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

रांची समेत चार बड़े शहरों को मिलेगा फायदा

प्रस्तावित योजना के तहत रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में 100-100 ई-बसें चलाने की तैयारी है. यात्रियों की संख्या और अलग-अलग मार्गों की जरूरत के अनुसार स्टैंडर्ड, मिडी और मिनी इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

इस योजना का उद्देश्य शहरों में लोगों को बेहतर, सुविधाजनक और नियमित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है. खासकर उन यात्रियों को इसका फायदा मिलेगा, जो रोजाना काम, पढ़ाई और अन्य जरूरी कार्यों के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में आवागमन करते हैं.

बसें चलाने से पहले तैयार होगा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर

इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन शुरू करने से पहले चारों शहरों में जरूरी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके तहत चार्जिंग स्टेशन, बस संचालन केंद्र और अन्य आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.

इसके अलावा बसों के लिए रूट का चयन यात्रियों की जरूरत और शहर में यातायात के दबाव को ध्यान में रखकर किया जाएगा. कोशिश होगी कि अधिक यात्रियों वाले प्रमुख मार्गों को सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाए.

निजी वाहनों का दबाव कम करने की कोशिश

सरकार का मानना है कि शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने से लोगों को निजी वाहन के बजाय सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा. इससे सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.

खासकर रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में बढ़ती आबादी के साथ यातायात का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में ई-बसों का नेटवर्क सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

प्रदूषण कम करने में भी मिलेगी मदद

इलेक्ट्रिक बसों का एक बड़ा फायदा प्रदूषण कम करने से जुड़ा है. डीजल बसों की तुलना में ई-बसें स्थानीय स्तर पर धुआं और उत्सर्जन नहीं करतीं. इससे शहरों में वायु प्रदूषण कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

इसके साथ ही आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा, कम शोर और बेहतर यात्रा अनुभव पर भी ध्यान दिया जाता है.

अब केंद्र की मंजूरी का इंतजार

राज्य सरकार की योजना के अनुसार पहले वित्त विभाग से प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी. इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद ही 400 ई-बसों की खरीद और परिचालन की अगली प्रक्रिया शुरू होगी.

यानी फिलहाल योजना प्रस्ताव के चरण में है, लेकिन अगर इसे मंजूरी मिलती है तो आने वाले समय में झारखंड के चार बड़े शहरों की सड़कों पर 400 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आ सकती हैं.

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Selected JSSC-CGL candidates protest in Ranchi after the exam was cancelled by the Jharkhand government
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने पर फूट-फूटकर रोए चयनित अभ्यर्थी, बोले- एक झटके में बेरोजगार हो गए

रांची: झारखंड सरकार के JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद अब मामला दो अलग-अलग पक्षों में बंटता नजर आ रहा है. एक ओर परीक्षा में कथित गड़बड़ी की शिकायत को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने फैसले का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर इसी परीक्षा के जरिए चयनित होकर सरकारी नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है. कई चयनित अभ्यर्थी सरकार के फैसले के खिलाफ प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं और अब अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं. चयनित अभ्यर्थियों का छलका दर्द प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नौकरी ज्वाइन की थी. एक अभ्यर्थी ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद उनकी नियुक्ति हुई थी और मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख भी सामने आ चुका था. इसके बावजूद सरकार ने अचानक परीक्षा रद्द करने का फैसला ले लिया. अभ्यर्थी ने भावुक होकर कहा कि एक पल में वे बेरोजगार हो गए. उनका कहना है कि कई उम्मीदवारों ने JSSC-CGL में चयन के बाद अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं. अब परीक्षा रद्द होने के बाद उनके सामने दोबारा रोजगार हासिल करने का संकट खड़ा हो गया है. बोले- सरकार फैसले पर दोबारा करे विचार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी अभ्यर्थियों या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा और सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है. एक अभ्यर्थी ने कहा कि अगर जांच में कुछ लोगों की भूमिका सामने आती है तो केवल उन्हीं पर कार्रवाई की जानी चाहिए. चयनित अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति मिलने के बाद सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कोर्ट जाने की तैयारी में चयनित अभ्यर्थी सरकार के फैसले से नाराज चयनित अभ्यर्थियों ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है. उनका कहना है कि वे पहले भी अदालत के माध्यम से अपनी नियुक्ति के चरण तक पहुंचे हैं और अब परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले को भी न्यायालय में चुनौती देंगे. अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका भविष्य सीधे तौर पर इस फैसले से प्रभावित हुआ है. खासकर उन उम्मीदवारों की परेशानी ज्यादा बढ़ गयी है, जिन्होंने JSSC-CGL में चयन के बाद दूसरी नौकरियां छोड़कर सरकारी सेवा ज्वाइन की थी. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनकारी छात्रों में खुशी इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों ने फैसले का स्वागत किया. छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की पहली बड़ी जीत बताया. छात्र नेता पीयूष कुमार ने कहा कि परीक्षा रद्द करना उनकी मांगों की दिशा में पहला कदम है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. छात्रों की CBI जांच और अन्य मांगें अभी बाकी हैं. उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति पर छात्र नेता बैठक कर फैसला लेंगे. CBI जांच और अन्य मांगों पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ परीक्षा रद्द होने से उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं. वे JSSC-CGL मामले की निष्पक्ष CBI जांच समेत अन्य विवादित मुद्दों पर भी सरकार से स्पष्ट कार्रवाई चाहते हैं. इस वजह से एक ही फैसले के बाद JSSC-CGL विवाद में दो अलग तस्वीरें सामने आई हैं. एक तरफ आंदोलनकारी छात्र परीक्षा रद्द होने को जीत मान रहे हैं, तो दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थी इसी फैसले को अपने रोजगार और भविष्य के लिए बड़ा झटका बता रहे हैं. अब इस पूरे मामले में सरकार के अगले कदम और अदालत की संभावित कार्रवाई पर सबकी नजर है.  

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JPSC-JSSC exam scam investigation into alleged remote access and solver network
JPSC-JSSC मामला: अभय तिवारी का बड़ा दावा- ‘सेटिंग से मैं भी पास हुआ’, रिमोट एक्सेस से सॉल्वर हल करते थे पेपर

रांची: JPSC-JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान सीआईडी के सामने TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने परीक्षा में सेटिंग और रिमोट एक्सेस के जरिए पेपर हल कराने को लेकर कई अहम दावे किए हैं. तिवारी के अनुसार, एजेंट अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें पास कराने के लिए मोटी रकम लेते थे. इसके बाद पहले से तय परीक्षा केंद्रों पर सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर सिस्टम के जरिए बाहर बैठे सॉल्वर प्रश्नपत्र हल करते थे. अभय तिवारी ने सीआईडी को बताया कि वह खुद भी कथित सेटिंग के जरिए परीक्षा पास हुआ था. उसके बयान के बाद जांच एजेंसियों ने परीक्षा केंद्रों और इसमें कथित रूप से शामिल लोगों की भूमिका की जांच तेज कर दी है. ऐसे काम करता था कथित सॉल्वर नेटवर्क अभय तिवारी के मुताबिक, एजेंट पहले उन अभ्यर्थियों की पहचान करते थे जो कथित तौर पर सेटिंग के जरिए परीक्षा पास करना चाहते थे. इसके बाद उन्हें तय परीक्षा केंद्र पर भेजा जाता था. तिवारी ने दावा किया कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को फोन कर उनके कपड़ों के रंग और केंद्र पर किस लाइन में खड़ा होना है, जैसी जानकारी दी जाती थी. केंद्र पर पहचान होने के बाद उन्हें एक निर्धारित कंप्यूटर पर बैठाया जाता था. इसके बाद कथित तौर पर उस कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस दूसरे कमरे में बैठे सॉल्वर ग्रुप को दे दिया जाता था. सॉल्वर वहां से प्रश्नपत्र हल करते थे, जबकि परीक्षा दे रहा अभ्यर्थी सिर्फ माउस चलाता रहता था. बूटी मोड़ समेत कई केंद्रों का जिक्र सीआईडी को दिए बयान में अभय तिवारी ने रांची के भव्या, सरला-बिरला के पास संस्कार आईटी, बूटी मोड़ स्थित एक केंद्र और बोकारो के दो केंद्रों का जिक्र किया है. उसके अनुसार, इन केंद्रों पर कथित तौर पर सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने की व्यवस्था की जाती थी. तिवारी ने बूटी मोड़ स्थित परीक्षा केंद्र के संचालक अजय संग्राम का नाम भी लिया है. उसके मुताबिक अजय संग्राम सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले जरूरी जानकारी देता था और केंद्र पर उनकी व्यवस्था कराता था. अभय तिवारी ने एजेंटों के नाम भी बताए पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने कथित तौर पर कई एजेंटों के नाम भी सीआईडी को बताए. इनमें पटना के इमरान और अली, गिरिडीह के राजेश, बोकारो के शंकर और मनोज तथा हजारीबाग के सुनील कुमार के नाम शामिल बताए गए हैं. तिवारी के अनुसार, शंकर अजय संग्राम का करीबी था. उसने यह भी दावा किया कि अजय संग्राम कई परीक्षा केंद्रों को कथित तौर पर मैनेज करता था. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. फिलहाल सामने आए बयान को जांच का हिस्सा माना जा रहा है. PGTTCE 2023 परीक्षा को लेकर भी खुलासा अभय तिवारी ने PGTTCE 2023 परीक्षा में भी कथित सेटिंग के जरिए पास कराने का दावा किया है. उसके अनुसार, बूटी मोड़ स्थित केंद्र पर अभ्यर्थियों को पहले से तय व्यवस्था के तहत कंप्यूटर उपलब्ध कराया जाता था और फिर रिमोट एक्सेस के माध्यम से बाहर बैठे सॉल्वर प्रश्न हल करते थे. तिवारी ने सीआईडी को यह भी बताया कि उसने खुद अजय संग्राम के संपर्क के जरिए कथित सेटिंग कर परीक्षा पास की थी. इस बयान के बाद जांच एजेंसी परीक्षा केंद्रों, एजेंटों और सॉल्वर नेटवर्क के बीच संभावित कनेक्शन की पड़ताल कर रही है. JSSC CGL परीक्षा से भी जुड़ रहे तार जांच के दौरान JSSC CGL परीक्षा को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं. जनवरी 2024 में आयोजित सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द की गई थी. अब परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी और विभिन्न परीक्षा केंद्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. कुछ दस्तावेजों के आधार पर कुछ परीक्षा केंद्रों से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के सफल होने का दावा भी सामने आया है. इस मामले में जेएसएससी की ओर से नामकुम थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. जांच आगे बढ़ने के साथ बढ़ रही मुश्किलें अभय तिवारी के बयान के बाद अब सीआईडी कथित नेटवर्क में शामिल लोगों, परीक्षा केंद्रों, एजेंटों और तकनीकी व्यवस्था की भूमिका की जांच कर रही है. संस्था के सचिव से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. JPSC-JSSC परीक्षा विवाद में पहले से छात्रों की ओर से परीक्षा में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है. ऐसे में अभय तिवारी के दावों ने मामले को और गंभीर बना दिया है. अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि उसके आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित सॉल्वर नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था.  

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JPSC JSSC Exams Cancelled
JPSC-JSSC परीक्षा रद्द, छात्रों का अनशन खत्म; मंत्रियों ने पिलाया जूस

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की विवादित परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने अनशन खत्म कर दिया। मंगलवार देर रात राज्य सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और इरफान अंसारी विधायक जयराम महतो के साथ रांची सदर अस्पताल पहुंचे। यहां ICU-HDU वार्ड में भर्ती छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, हबीबा और राहुल क्रांतिकारी को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया गया।   15 दिन से भूख हड़ताल पर थीं हबीबा   बोकारो के कसमार की रहने वाली हबीबा पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थीं। लगातार अनशन के कारण उन्हें रांची सदर अस्पताल के ICU-HDU वार्ड में भर्ती कराया गया था। सरकार की ओर से छात्रों की प्रमुख मांगें मानने की जानकारी मिलने के बाद हबीबा भावुक हो गईं। सोशल मीडिया पर सरकार के फैसले की खबर देखने के बाद उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। उन्होंने अपने भाई और सहयोगियों के साथ बनाए गए वीडियो में कहा कि ये खुशी के आंसू हैं।   'मां ने कहा था लड़ाई जीतकर ही घर आना'   हबीबा ने अपनी मां की कही बात को याद करते हुए कहा कि उनकी मां ने उनसे कहा था कि लड़ाई जीतकर ही घर लौटना। उन्होंने कहा कि आमतौर पर मां अपने बच्चों से ऐसी बात नहीं कहतीं, लेकिन उनकी मां ने उन्हें यही हौसला दिया था।   सरकार द्वारा JPSC के साथ-साथ JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद हबीबा ने कहा कि अब उन्हें महसूस हो रहा है कि वह अपनी लड़ाई जीतकर ही घर लौटेंगी।   मंत्रियों ने कराया अनशन समाप्त   सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर बड़ा फैसला लिए जाने के बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और इरफान अंसारी अस्पताल पहुंचे। विधायक जयराम महतो भी उनके साथ मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने अनशनकारी छात्रों से मुलाकात की और उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इस दौरान अस्पताल में आंदोलन से जुड़े अन्य छात्र और समर्थक भी मौजूद रहे।   सरकार ने रद्द की कई भर्ती परीक्षाएं   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में JSSC-CGL के साथ 14वीं JPSC PT और अन्य विवादित परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया। सरकार ने TDPL द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की है।   इसके अलावा सरकार ने 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने और JPSC-JSSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए रिफॉर्म कमेटी के गठन की बात कही है। सरकार के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन में बड़ा मोड़ आया है। अनशन समाप्त होने के बाद अब छात्रों की नजर सरकार द्वारा किए गए फैसलों के क्रियान्वयन और आगे की जांच प्रक्रिया पर है।

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