भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में Ather Energy का Ather Rizta तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। फैमिली-फ्रेंडली डिजाइन, लंबी रेंज और आधुनिक फीचर्स के कारण यह इलेक्ट्रिक स्कूटर ग्राहकों की पसंद बनता जा रहा है। अगर आप भी इसे खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अच्छी बात यह है कि इसे सिर्फ ₹10,000 के डाउन पेमेंट पर भी घर लाया जा सकता है। आइए जानते हैं Ather Rizta की संभावित EMI, बैटरी, रेंज और फीचर्स से जुड़ी पूरी जानकारी। ₹10,000 डाउन पेमेंट पर कितनी बनेगी EMI? Ather Rizta S की शुरुआती एक्स-शोरूम (दिल्ली) कीमत लगभग ₹1,21,499 है। यदि आप ₹10,000 का डाउन पेमेंट करते हैं और शेष राशि पर बैंक या फाइनेंस कंपनी से 8% वार्षिक ब्याज दर पर 36 महीनों के लिए लोन लेते हैं, तो अनुमानित मासिक EMI करीब ₹3,715 हो सकती है। ध्यान रखें कि वास्तविक EMI आपके शहर की ऑन-रोड कीमत, डाउन पेमेंट, ब्याज दर, लोन अवधि और आपके क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर अलग हो सकती है। बैटरी और रेंज Ather Rizta दो बैटरी विकल्पों के साथ उपलब्ध है— 2.9kWh बैटरी पैक – लगभग 123 किलोमीटर की IDC रेंज। 3.7kWh बैटरी पैक – लगभग 160 किलोमीटर की IDC रेंज। स्कूटर की टॉप स्पीड 80 किमी/घंटा है और यह 0 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार केवल 4.7 सेकंड में पकड़ सकता है। लगभग 15 डिग्री ग्रेडेबिलिटी के साथ यह चढ़ाई वाले रास्तों पर भी बेहतर प्रदर्शन करता है। Ather Rizta के प्रमुख फीचर्स Ather Rizta S में कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— 17.7 सेमी (लगभग 7 इंच) का कलर TFT डिस्प्ले ब्लूटूथ कनेक्टिविटी टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन स्मार्टफोन कनेक्टिविटी WhatsApp नोटिफिकेशन सपोर्ट लाइव लोकेशन ट्रैकिंग डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर फैमिली-फ्रेंडली बड़ी और आरामदायक सीट बेहतर अंडर-सीट स्टोरेज क्या Ather Rizta खरीदना सही रहेगा? अगर आपकी प्राथमिकता लंबी रेंज, कम रनिंग कॉस्ट, आरामदायक सीट और स्मार्ट फीचर्स वाला फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर है, तो Ather Rizta एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, खरीदने से पहले अपने शहर की ऑन-रोड कीमत, उपलब्ध ऑफर्स, चार्जिंग सुविधाओं और फाइनेंस विकल्पों की जानकारी जरूर लें। कम डाउन पेमेंट और आसान EMI विकल्प इसे उन ग्राहकों के लिए भी आकर्षक बनाते हैं, जो बिना एकमुश्त बड़ी रकम खर्च किए इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं।
नई दिल्ली: अगर आप रोजाना स्कूल, कॉलेज, ऑफिस, कोचिंग या आसपास के छोटे-छोटे कामों के लिए एक किफायती इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं जिन्हें चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और RTO रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होती। ये लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर कम दूरी की यात्रा के लिए डिजाइन किए गए हैं और कम खर्च में सुविधाजनक सफर का विकल्प प्रदान करते हैं। स्टूडेंट्स, वरिष्ठ नागरिकों और शहर के भीतर नियमित यात्रा करने वाले लोगों के बीच इन स्कूटर्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। क्यों नहीं चाहिए ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन? भारतीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार जिन इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की अधिकतम गति 25 किमी/घंटा तक होती है और जिनकी मोटर निर्धारित सीमा के भीतर रहती है, उन्हें लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे वाहनों के लिए सामान्यतः: ड्राइविंग लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती। RTO रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, ये स्कूटर मुख्य रूप से शहर के भीतर कम दूरी की यात्रा के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। लंबी दूरी या हाईवे पर इनका उपयोग उपयुक्त नहीं माना जाता। बिना DL और रजिस्ट्रेशन वाले लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर 1. Komaki X-One Komaki X-One इस सेगमेंट का सबसे किफायती विकल्पों में से एक है। शुरुआती कीमत: लगभग ₹34,999 अनुमानित रेंज: 60 किमी (सिंगल चार्ज) उपयुक्त: स्टूडेंट्स और रोजमर्रा की छोटी दूरी 2. Zelio Gracy Zelio Gracy शहर के भीतर आरामदायक सफर के लिए लोकप्रिय लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर है। अधिकतम स्पीड: 25 किमी/घंटा लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं उपयुक्त: बाजार, स्कूल और स्थानीय आवागमन 3. Kinetic Zing Kinetic Zing बेहतर रेंज के साथ आने वाला एक मजबूत विकल्प है। एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹67,990 अनुमानित रेंज: 70 किमी (सिंगल चार्ज) 4. Okinawa R30 Okinawa R30 भी कम दूरी की यात्रा के लिए लोकप्रिय मॉडल है। शुरुआती कीमत: लगभग ₹61,998 अनुमानित रेंज: 60 किमी (सिंगल चार्ज) 5. Yulu Wynn हल्के वजन और कम ऑपरेटिंग कॉस्ट की वजह से Yulu Wynn भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। शुरुआती कीमत: लगभग ₹55,555 (ऑन-रोड, स्थान के अनुसार बदलाव संभव) मासिक मोबिलिटी प्लान का विकल्प उपलब्ध शहर के भीतर दैनिक आवागमन के लिए उपयुक्त खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान सिर्फ कीमत देखकर इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का फैसला न करें। खरीदारी से पहले इन पहलुओं की भी जांच करें: बैटरी वारंटी चार्जिंग में लगने वाला समय सर्विस सेंटर की उपलब्धता आफ्टर-सेल्स सर्विस स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता यदि आपकी रोजाना की यात्रा 20 से 40 किलोमीटर के बीच है, तो ये लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर किफायती और सुविधाजनक विकल्प साबित हो सकते हैं। वहीं, यदि आपको लंबी दूरी तय करनी है या अधिक स्पीड की जरूरत है, तो हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर अधिक उपयुक्त रहेंगे।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता Oben Electric ने अपनी नई Rorr Evo इलेक्ट्रिक बाइक की डिलीवरी शुरू कर दी है। पहले चरण में बेंगलुरु के ग्राहकों को 'First to Rorr' इवेंट के दौरान बाइक सौंपी गई। कंपनी का कहना है कि आने वाले हफ्तों में देश के अन्य शहरों में भी इसकी डिलीवरी शुरू की जाएगी। ₹1.25 लाख (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत वाली यह इलेक्ट्रिक बाइक लंबी रेंज, दमदार परफॉर्मेंस और स्मार्ट फीचर्स के साथ बाजार में उतारी गई है। कंपनी के अनुसार, लॉन्च के सिर्फ 15 दिनों में इसे 25,000 से अधिक बुकिंग मिल चुकी हैं। 180KM तक की रेंज का दावा Oben Rorr Evo में 3.4kWh LFP बैटरी पैक और 9kW इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है। कंपनी का दावा है कि यह बाइक एक बार फुल चार्ज होने पर 180 किलोमीटर तक की IDC रेंज देती है। वहीं, सामान्य उपयोग में इसकी करीब 150 किलोमीटर की रियल-वर्ल्ड रेंज मिलने का दावा किया गया है। बाइक में SmartIQ AI आधारित राइड ऑप्टिमाइजेशन तकनीक भी दी गई है, जो कंपनी के अनुसार रेंज को लगभग 15 प्रतिशत तक बेहतर बनाने में मदद करती है। 110kmph की टॉप स्पीड परफॉर्मेंस के मामले में Oben Rorr Evo की अधिकतम गति 110 किमी/घंटा है। कंपनी के मुताबिक, यह बाइक 0 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार सिर्फ 3 सेकंड में पकड़ सकती है। फास्ट चार्जिंग की मदद से इसकी बैटरी 90 मिनट में 0 से 80 प्रतिशत तक चार्ज हो जाती है। साथ ही कंपनी बैटरी पर 8 साल की वारंटी भी दे रही है। स्मार्ट फीचर्स से लैस Oben Rorr Evo में कई आधुनिक कनेक्टेड फीचर्स दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— 5-इंच TFT डिस्प्ले OTA (Over-the-Air) अपडेट टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन जियो-फेंसिंग रिमोट इमोबिलाइजेशन फॉल डिटेक्शन ARGUS कनेक्टेड प्लेटफॉर्म इमरजेंसी SOS फीचर ये फीचर्स राइडिंग अनुभव को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने में मदद करते हैं। देशभर में बढ़ रहा नेटवर्क कंपनी के अनुसार, उसका सेल्स और सर्विस नेटवर्क अब 18 राज्यों के 90 से अधिक शहरों तक पहुंच चुका है। Oben Electric के पास 150 शोरूम और सर्विस के लिए Oben Care सेंटर भी उपलब्ध हैं। लंबी रेंज, तेज रफ्तार, फास्ट चार्जिंग और आधुनिक तकनीक के साथ Oben Rorr Evo भारतीय इलेक्ट्रिक बाइक बाजार में एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आई है।
नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का विकल्प चुन रहे हैं। बाजार में 80 हजार रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले कई इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध हैं, जिनमें लंबी रेंज, स्मार्ट फीचर्स और आकर्षक डिजाइन का दावा किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कंपनी द्वारा बताई गई रेंज, कीमत या फीचर्स के आधार पर इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना सही फैसला नहीं है। कई खरीदार बाद में बैटरी, चार्जिंग, सर्विस और ऐप सपोर्ट जैसी समस्याओं का सामना करते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च और असुविधा बढ़ सकती है। अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन पांच महत्वपूर्ण बातों पर जरूर ध्यान दें। 1. कंपनी की बताई रेंज पर पूरी तरह भरोसा न करें अधिकांश कंपनियां इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज नियंत्रित परीक्षण (Test Conditions) के आधार पर बताती हैं। वास्तविक परिस्थितियों में ट्रैफिक, सड़क की स्थिति, मौसम, वाहन पर लोड और ड्राइविंग स्टाइल के कारण यह रेंज काफी कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी स्कूटर की आधिकारिक रेंज 120 किलोमीटर बताई गई है, तो सामान्य उपयोग में वह लगभग 75 से 90 किलोमीटर तक ही चल सकता है। इसलिए स्कूटर खरीदने से पहले वास्तविक उपयोगकर्ताओं के अनुभव पढ़ें, वीडियो रिव्यू देखें और संभव हो तो मौजूदा मालिकों से बात करें। 2. बैटरी वारंटी की शर्तें ध्यान से पढ़ें बैटरी किसी भी इलेक्ट्रिक स्कूटर का सबसे महंगा हिस्सा होती है। कई कंपनियां 3 से 5 वर्ष तक की वारंटी देती हैं, लेकिन हर वारंटी की अपनी अलग शर्तें होती हैं। खरीदने से पहले यह जरूर जान लें कि किन परिस्थितियों में बैटरी मुफ्त बदली जाएगी और किन मामलों में वारंटी लागू नहीं होगी। इससे भविष्य में होने वाले बड़े खर्च से बचा जा सकता है। 3. घर पर चार्जिंग की सुविधा पहले जांच लें इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके घर या अपार्टमेंट में सुरक्षित चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। पुराने मकानों या कुछ सोसायटी में बिजली की वायरिंग, लोड क्षमता या चार्जिंग की अनुमति से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। यदि सही चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध नहीं होगा, तो रोजाना स्कूटर चार्ज करना मुश्किल हो सकता है। फ्लैट में रहने वाले लोगों को सोसायटी के नियम भी पहले से जान लेने चाहिए। 4. नजदीकी सर्विस सेंटर की उपलब्धता जरूर देखें इलेक्ट्रिक स्कूटर की मरम्मत हर सामान्य मैकेनिक नहीं कर सकता। इसके लिए कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर की जरूरत होती है। यदि सर्विस सेंटर आपके घर से काफी दूर है, तो छोटी-सी तकनीकी खराबी में भी समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। खरीदारी से पहले कंपनी की वेबसाइट या डीलर से अपने शहर के सर्विस नेटवर्क की पूरी जानकारी जरूर लें। 5. कंपनी और उसके मोबाइल ऐप की विश्वसनीयता जांचें आज के अधिकांश इलेक्ट्रिक स्कूटर मोबाइल ऐप से जुड़े होते हैं। इन ऐप्स के जरिए वाहन की लोकेशन, बैटरी स्टेटस, लॉक- अनलॉक, डायग्नोस्टिक्स और कई स्मार्ट फीचर्स का उपयोग किया जाता है। यदि भविष्य में कंपनी ऐप का सपोर्ट बंद कर दे या नियमित अपडेट न दे, तो कई स्मार्ट सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए यह भी देखें कि कंपनी कितने समय से बाजार में मौजूद है, उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है, सर्विस नेटवर्क कितना मजबूत है और ऐप को नियमित अपडेट मिलते हैं या नहीं। सिर्फ रेंज नहीं, पूरी तस्वीर देखें इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना एक लंबी अवधि का निवेश है। ऐसे में केवल अधिक रेंज या कम कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। अगर आप रेंज के साथ बैटरी की गुणवत्ता, वारंटी, चार्जिंग सुविधा, सर्विस नेटवर्क और कंपनी की विश्वसनीयता जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखेंगे, तो भविष्य में होने वाली परेशानियों और अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला न केवल आपके पैसे बचाएगा बल्कि बेहतर ओनरशिप अनुभव भी देगा।
भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और इसी बढ़ते बाजार पर अब वैश्विक कंपनियों की भी नजर है। वियतनाम की प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी VinFast ने भारत में अपने नए इलेक्ट्रिक स्कूटर का डिजाइन पेटेंट कराया है। इस कदम को कंपनी की भारतीय ईवी टू-व्हीलर बाजार में एंट्री की मजबूत तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। अगर VinFast भारतीय बाजार में इस स्कूटर को लॉन्च करती है, तो इसका सीधा मुकाबला OLA Electric, TVS Motor, Bajaj Auto, Ather Energy और अन्य स्थापित कंपनियों के इलेक्ट्रिक स्कूटरों से होगा। कंपनी ने फिलहाल लॉन्च डेट और कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन पेटेंट दाखिल होने के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही इससे जुड़े और बड़े अपडेट सामने आ सकते हैं। भारत बना VinFast की रणनीति का अहम हिस्सा VinFast की पैरेंट कंपनी Vingroup भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शामिल कर रही है। कंपनी पहले ही भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों को लेकर अपनी योजनाओं का ऐलान कर चुकी है और हाल ही में अपनी Green SM इलेक्ट्रिक कैब सेवा के जरिए भी भारतीय बाजार में मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। अब इलेक्ट्रिक स्कूटर का डिजाइन पेटेंट यह संकेत देता है कि कंपनी सिर्फ चार पहिया वाहनों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में भी अपनी मजबूत हिस्सेदारी बनाना चाहती है। प्रीमियम डिजाइन के साथ मिलेगा नया लुक पेटेंट इमेज के अनुसार नया इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी के मौजूदा VinFast Viper मॉडल से काफी मिलता-जुलता दिखाई देता है, लेकिन इसमें कई नए डिजाइन अपडेट किए गए हैं। संभावित डिजाइन फीचर्स में शामिल हैं— नया एलईडी हेडलाइट सेटअप इंटीग्रेटेड एलईडी डीआरएल नया फ्रंट फेंडर नीचे की ओर शिफ्ट किया गया VinFast लोगो बैट-विंग स्टाइल एलईडी टेललाइट 14 इंच के अलॉय व्हील स्टेप-अप सीट फ्लैट फ्लोरबोर्ड फुट पेग इन बदलावों के चलते स्कूटर का लुक पहले से अधिक मॉडर्न और प्रीमियम नजर आता है। फीचर्स में मिलेगी एडवांस टेक्नोलॉजी रिपोर्ट्स के अनुसार नए इलेक्ट्रिक स्कूटर में कई आधुनिक फीचर्स देखने को मिल सकते हैं। इनमें शामिल हैं— TFT डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर स्मार्ट-की सिस्टम कीलेस-गो फीचर स्मार्टफोन कनेक्टिविटी डिजिटल डिस्प्ले टेलीस्कोपिक फ्रंट फोर्क गैस-चार्ज्ड ट्विन रियर शॉक एब्जॉर्बर फ्रंट डिस्क ब्रेक इन फीचर्स के साथ VinFast का यह स्कूटर प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में मजबूत दावेदारी पेश कर सकता है। 150 किलोमीटर तक की रेंज का दावा कंपनी के मौजूदा VinFast Viper मॉडल में 1.5kWh की फिक्स्ड बैटरी मिलती है, जिससे लगभग 82 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज प्राप्त होती है। इसके अलावा इसमें 1.15kWh की अतिरिक्त बैटरी लगाने का विकल्प भी दिया जाता है। दोनों बैटरियों के साथ कुल संभावित रेंज लगभग 150 किलोमीटर तक पहुंच जाती है, जो रोजाना शहर में आने-जाने वाले ग्राहकों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि भारत में आने वाले मॉडल में यही बैटरी सेटअप मिलेगा या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मोटर और परफॉर्मेंस मौजूदा VinFast Viper में 3000W पीक पावर वाला रियर हब मोटर मिलता है, जो लगभग 4bhp की पावर जनरेट करता है। इसकी टॉप स्पीड करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है। यदि भारतीय मॉडल इसी पावरट्रेन के साथ लॉन्च होता है, तो यह शहरों में रोजमर्रा की यात्रा के लिए एक संतुलित और किफायती विकल्प बन सकता है। कब होगा लॉन्च? फिलहाल VinFast ने भारत में इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की लॉन्च डेट, कीमत और आधिकारिक स्पेसिफिकेशन का खुलासा नहीं किया है। हालांकि डिजाइन पेटेंट दाखिल होने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि कंपनी जल्द ही भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में अपनी नई पेशकश के साथ दस्तक दे सकती है। यदि ऐसा होता है तो आने वाले समय में भारतीय ईवी बाजार में प्रतिस्पर्धा और भी तेज होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। शहरी परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार, जीसीसी मॉडल पर चलेगी योजना सरकार ने बसों के संचालन के लिए ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल को मंजूरी दी है। इसके तहत निजी कंपनियां बसों की खरीद, संचालन, रखरखाव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी संभालेंगी। आगरा से वाराणसी तक 18 शहर होंगे योजना का हिस्सा योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा-जेवर में इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। यात्रियों को मिलेगी एसी, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा सुविधा नई बसों के संचालन से यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। सरकार का लक्ष्य यात्रा को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और समयनिष्ठ बनाना है। निजी कंपनियां करेंगी संचालन, 12 साल का होगा अनुबंध जीसीसी मॉडल के तहत चयनित ऑपरेटरों को बसों के संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी दी जाएगी। वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से अनुबंध की अवधि 12 वर्ष तय की गई है। ई-बस खरीद पर सरकार देगी करोड़ों का अनुदान योजना के तहत 12 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर बस पर 35 लाख रुपये प्रति वाहन की दर से अनुदान दिया जाएगा। नगर निगम मुफ्त देंगे डिपो की जमीन बस डिपो और चार्जिंग सुविधाओं के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदूषण घटाने और हरित परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सरकारी खजाने पर कम पड़ेगा बोझ, निजी निवेश से होगा विकास इस परियोजना में निजी निवेश को शामिल करने से सरकार पर वित्तीय दबाव कम होगा, जबकि आधुनिक परिवहन सुविधाओं का तेजी से विस्तार संभव हो सकेगा। पहले से चल रहीं 743 ई-बसें, अब होगा बड़ा विस्तार वर्तमान में प्रदेश के 15 नगर निगम क्षेत्रों में 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है। नई योजना के लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े शहरी इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।
नई दिल्ली: भारत की प्रतिष्ठित दोपहिया निर्माता Royal Enfield ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपनी पहली इलेक्ट्रिक बाइक Flying Flea C6 की झलक पेश कर दी है। यह लॉन्च कंपनी के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि दशकों से पेट्रोल इंजन वाली बाइक्स के लिए मशहूर ब्रांड अब EV सेगमेंट में प्रवेश कर चुका है। 1 रुपये में 3 Km: बेहद किफायती रनिंग कॉस्ट Flying Flea C6 की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम रनिंग कॉस्ट है। कंपनी के मुताबिक यह बाइक लगभग 1 रुपये में 3 किलोमीटर चल सकती है। IDC के अनुसार इसकी रेंज 154 किलोमीटर बताई जा रही है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा भी संभव होगी। बैटरी और चार्जिंग: फास्ट और किफायती इस इलेक्ट्रिक बाइक में 3.91 kWh की बैटरी दी गई है, जिसे लगभग 2 घंटे 16 मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है। चार्जिंग के दौरान करीब 4.6 kWh बिजली खर्च होती है। अगर बिजली की कीमत 10 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए, तो एक फुल चार्ज में 50 रुपये से भी कम खर्च आएगा–जो इसे बेहद किफायती बनाता है। कीमत और BaaS मॉडल का विकल्प Royal Enfield ने इस बाइक की एक्स-शोरूम कीमत ₹2.79 लाख तय की है। साथ ही कंपनी ने Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल भी पेश किया है, जिसके तहत ग्राहक इसे करीब ₹1.99 लाख में खरीद सकते हैं। इस मॉडल में बैटरी उपयोग और चार्जिंग विकल्पों को कस्टमाइज करने की सुविधा भी दी गई है। क्लासिक डिजाइन, मॉडर्न टेक्नोलॉजी Flying Flea C6 का डिजाइन कंपनी की क्लासिक विरासत को दर्शाता है, लेकिन इसमें आधुनिक तकनीक का भी बेहतरीन समावेश किया गया है। यह बाइक उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो स्टाइल के साथ-साथ किफायत और पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं। EV सेगमेंट में बड़ा दांव Royal Enfield की यह पहल भारतीय EV बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है। Flying Flea C6 न सिर्फ पारंपरिक बाइक्स को चुनौती देगी, बल्कि इलेक्ट्रिक सेगमेंट में भी नई दिशा तय करने की क्षमता रखती है।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई रफ्तार देते हुए Bajaj Auto ने अपना नया इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पोर्टफोलियो WEGO लॉन्च कर दिया है। यह रेंज खास तौर पर पैसेंजर और कार्गो–दोनों सेगमेंट को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और एक बार चार्ज में 149Km से लेकर 296Km तक की रेंज देने का दावा करती है। बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के बीच यह लॉन्च ऑटो ड्राइवरों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। हर जरूरत के लिए अलग मॉडल Bajaj की WEGO रेंज को देश का सबसे व्यापक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पोर्टफोलियो बताया जा रहा है। इसमें: पैसेंजर सेगमेंट: 50, 70 और 90 सीरीज कार्गो सेगमेंट: C9009 और C9012 मॉडल इनकी कीमत करीब ₹3.11 लाख से ₹3.87 लाख के बीच रखी गई है, जिससे यह अलग-अलग बजट और उपयोग के हिसाब से विकल्प देता है। दमदार रेंज और स्मार्ट फीचर्स WEGO EV सिर्फ रेंज में ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी में भी आगे है। इसमें मिलते हैं: दो-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन रीजनरेटिव ब्रेकिंग हिल-होल्ड असिस्ट क्लाइंब मोड Bluetooth कनेक्टिविटी डिजिटल LCD डिस्प्ले पैसेंजर वेरिएंट्स में आरामदायक सीटिंग और ज्यादा लेगरूम दिया गया है, जबकि कार्गो मॉडल्स को भारी लोड और टिकाऊ उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। ऑटो और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और लंबी रेंज के कारण यह EV रेंज खासतौर पर: ऑटो ड्राइवर्स डिलीवरी और ई-कॉमर्स बिजनेस के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। Bajaj का मजबूत सर्विस नेटवर्क इस सेगमेंट में भरोसा भी बढ़ाएगा। EV मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा अब तक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बाजार में छोटे और मिड-लेवल प्लेयर्स का दबदबा था, लेकिन Bajaj की एंट्री से प्रतिस्पर्धा तेज होगी। इससे ग्राहकों को बेहतर विकल्प और तकनीक मिलने की उम्मीद है। WEGO EV का लॉन्च यह संकेत देता है कि भारत में कमर्शियल वाहनों का भविष्य तेजी से इलेक्ट्रिक की ओर बढ़ रहा है। खासकर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और डिलीवरी सेक्टर में यह एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए Ola Electric ने नई Ola S1 X+ 5.2 kWh को भारत में लॉन्च कर दिया है। यह स्कूटर दमदार परफॉर्मेंस, लंबी रेंज और एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ मिड-प्राइस सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत ₹1,29,999 (एक्स-शोरूम) रखी है, जो 15 अप्रैल 2026 के बाद बढ़ सकती है। 4680 Bharat Cell: Ola की बड़ी टेक्नोलॉजी पहल इस स्कूटर की सबसे खास बात है इसका इन-हाउस विकसित 4680 Bharat Cell बैटरी सिस्टम। Ola Electric का दावा है कि यह तकनीक: ज्यादा लंबी रेंज देती है बैटरी एफिशिएंसी बढ़ाती है EV को आम लोगों के लिए ज्यादा सुलभ बनाती है यह कदम भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परफॉर्मेंस में नहीं कोई समझौता Ola S1 X+ 5.2 kWh को पावर देने के लिए 11 kW का मिड-ड्राइव मोटर दिया गया है, जो शानदार स्पीड और स्मूद राइडिंग अनुभव देता है। मुख्य फीचर्स: टॉप स्पीड: 125 किमी/घंटा रेंज: 320 किमी (सिंगल चार्ज) ब्रेकिंग सिस्टम: Brake-by-Wire + फ्रंट डिस्क ब्रेक इन स्पेसिफिकेशंस के साथ यह स्कूटर अपने सेगमेंट में सबसे पावरफुल विकल्पों में शामिल हो जाती है। Ola के पोर्टफोलियो को मिला नया बूस्ट नई S1 X+ 5.2 kWh के साथ Ola Electric ने अपने प्रोडक्ट लाइनअप को और मजबूत कर दिया है। कंपनी पहले से: S1 Pro+ और S1 Pro जैसे प्रीमियम मॉडल S1 X सीरीज के मास मार्केट स्कूटर्स और Roadster बाइक रेंज ऑफर कर रही है। इस नए मॉडल के आने से मिड-रेंज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। EV मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और Ola की यह नई पेशकश ग्राहकों को ज्यादा विकल्प देगी। लंबी रेंज, हाई स्पीड और एडवांस फीचर्स के साथ यह स्कूटर खासतौर पर उन यूजर्स को आकर्षित कर सकती है, जो पेट्रोल वाहनों से EV की ओर शिफ्ट करना चाहते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।