स्वास्थ्य

Does Garlic Really Boost Immunity?

सच या झूठ: क्या वाकई लहसुन खाने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है? आयुर्वेदाचार्य से जानें खाली पेट खाना कितना सही

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Fresh garlic cloves and bulbs highlighting their potential immune-supporting benefits and traditional Ayurvedic health uses.
Garlic for Immunity Benefits Explained

Garlic for Immunity: भारतीय रसोई में लहसुन केवल स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं, बल्कि पारंपरिक घरेलू नुस्खों का भी अहम हिस्सा माना जाता है। सर्दी, जुकाम और संक्रमण के मौसम में कई लोग सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद में लहसुन को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है, जबकि आधुनिक शोध भी इसके कुछ स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि करते हैं। लेकिन क्या वास्तव में सिर्फ लहसुन खाने से इम्यूनिटी मजबूत हो जाती है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय।

क्या लहसुन सच में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है?

आयुर्वेदाचार्य डॉ. राजेश बयारी (एमडी, चित्रकूटा आयुर्वेद चिकित्सालय, कुंडापुरा) के अनुसार, लहसुन में मौजूद एलिसिन (Allicin), सल्फर यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। ये तत्व एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

इसके अलावा लहसुन:

  • पाचन शक्ति को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • रक्त संचार को सुधारने में सहायक होता है।
  • कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में योगदान दे सकता है।
  • हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में लाभकारी माना जाता है।

आयुर्वेद में लहसुन का महत्व

आयुर्वेद में लहसुन को 'लशुन' कहा गया है। चरक संहिता और भावप्रकाश निघंटु जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसे औषधीय पौधे के रूप में वर्णित किया गया है।

आयुर्वेद के अनुसार लहसुन:

  • पाचन शक्ति (अग्नि) को मजबूत करता है।
  • वात और कफ दोष को संतुलित करता है।
  • शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।
  • संक्रमण से लड़ने की क्षमता को समर्थन देता है।
  • हृदय और रक्त संचार को स्वस्थ रखने में सहायक होता है।

आधुनिक शोध क्या कहते हैं?

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, लहसुन में एलिसिन, डायलिल सल्फाइड (Diallyl Sulfide), एजोइन (Ajoene) और अन्य ऑर्गेनोसल्फर यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में एंटीऑक्सीडेंट और हल्के एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव दिखा सकते हैं।

कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि नियमित मात्रा में लहसुन का सेवन प्रतिरक्षा कोशिकाओं के सामान्य कार्य को समर्थन दे सकता है और सामान्य सर्दी-जुकाम की संभावना कुछ हद तक कम कर सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल लहसुन खाने से इम्यूनिटी चमत्कारिक रूप से नहीं बढ़ती। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और समय पर टीकाकरण भी बेहद जरूरी हैं।

क्या खाली पेट लहसुन खाना सही है?

आयुर्वेद के अनुसार इसका जवाब व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति पर निर्भर करता है।

यदि:

  • कफ या वात दोष अधिक है,
  • पाचन शक्ति कमजोर है,

तो सुबह गुनगुने पानी के साथ 1–2 कली कच्चा लहसुन लेना लाभकारी माना जा सकता है।

लेकिन यदि:

  • पित्त प्रकृति है,
  • एसिडिटी रहती है,
  • गैस्ट्राइटिस या पेट के अल्सर की समस्या है,

तो खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए भोजन में पकाकर या हल्का भूनकर लहसुन खाना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Woman consulting a doctor for Hashimoto’s thyroiditis symptoms, highlighting thyroid health, autoimmune disease and hormone imbalance.
महिलाओं में क्यों ज्यादा होता है Hashimoto’s Thyroiditis? जानिए थायरॉइड की इस ऑटोइम्यून बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज

थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं महिलाओं में आम हैं, लेकिन उनमें Hashimoto’s Thyroiditis (हाशिमोटो थायरॉइडिटिस) सबसे अधिक पाई जाने वाली ऑटोइम्यून थायरॉइड बीमारी मानी जाती है। इस बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि पर ही हमला करने लगता है, जिससे धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता कम होने लगती है और हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) विकसित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 7 से 10 गुना अधिक देखी जाती है। इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक कारण और इम्यून सिस्टम की कार्यप्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्या है Hashimoto’s Thyroiditis? Hashimoto’s Thyroiditis एक क्रोनिक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉइड ग्रंथि के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती है। ये एंटीबॉडी धीरे-धीरे थायरॉइड कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन कम होने लगता है। शुरुआत में कई मरीजों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ यह बीमारी हाइपोथायरॉइडिज्म का कारण बन सकती है। महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा क्यों होती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन इम्यून सिस्टम को अधिक सक्रिय बनाते हैं। यही वजह है कि महिलाओं में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक होता है। इन परिस्थितियों में जोखिम और बढ़ सकता है— गर्भावस्था के दौरान प्रसव के बाद मेनोपॉज के समय हार्मोनल बदलाव के दौरान Hashimoto’s Thyroiditis होने के प्रमुख कारण यह बीमारी किसी एक कारण से नहीं होती, बल्कि कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से विकसित होती है। मुख्य कारणों में शामिल हैं— परिवार में थायरॉइड या ऑटोइम्यून बीमारी का इतिहास हार्मोनल बदलाव वायरल संक्रमण अत्यधिक आयोडीन का सेवन (कुछ मामलों में) विटामिन D या सेलेनियम की कमी पर्यावरणीय कारण आनुवंशिक संवेदनशीलता इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें Hashimoto’s Thyroiditis के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इनमें शामिल हैं— हर समय थकान महसूस होना बिना कारण वजन बढ़ना ठंड अधिक लगना बालों का झड़ना त्वचा का रूखा होना कब्ज की समस्या चेहरे या गर्दन में सूजन ध्यान लगाने में कठिनाई याददाश्त कमजोर होना महिलाओं में अनियमित पीरियड्स मूड में बदलाव या अवसाद किन लोगों में ज्यादा रहता है खतरा? इन लोगों में Hashimoto’s Thyroiditis होने का जोखिम अधिक माना जाता है— 30 से 60 वर्ष की महिलाएं परिवार में थायरॉइड रोग का इतिहास टाइप-1 डायबिटीज के मरीज रूमेटाइड आर्थराइटिस से पीड़ित लोग सीलिएक डिजीज के मरीज विटिलिगो या अन्य ऑटोइम्यून बीमारी वाले लोग हाल ही में मां बनी महिलाएं क्या यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है? विशेषज्ञों के अनुसार Hashimoto’s Thyroiditis को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही इलाज और नियमित निगरानी से इसे प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो डॉक्टर थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा देते हैं, जिससे हार्मोन की कमी पूरी होती है और अधिकांश लक्षणों में सुधार आता है। कुछ मरीजों में थायरॉइड ग्रंथि बड़ी होकर गोइटर (Goiter) का रूप ले सकती है। यदि इससे निगलने, बोलने या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह भी दे सकते हैं। कब डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि लंबे समय तक— लगातार थकान बनी रहे, बिना वजह वजन बढ़ने लगे, बाल तेजी से झड़ने लगें, ठंड अधिक महसूस हो, पीरियड्स अनियमित हो जाएं, तो बिना देरी किए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लें और थायरॉइड की जांच कराएं। समय पर पहचान और नियमित उपचार से इस बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
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