गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग प्रोटीन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन फाइबर को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग रोजाना जितना फाइबर लेना चाहिए, उससे काफी कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं। फाइबर न सिर्फ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है, बल्कि दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करने में मदद करता है। फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे शरीर में सूजन कम होती है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। फाइबर क्यों है जरूरी? पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है कब्ज की समस्या कम करता है ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है वजन नियंत्रण में सहायक होता है हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है विशेषज्ञों के मुताबिक एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। फाइबर से भरपूर 13 बेहतरीन खाद्य पदार्थ 1. हरी मटर (Green Peas) उबली हुई एक कप मटर में लगभग 9 ग्राम फाइबर और 8.5 ग्राम प्रोटीन होता है। यह शाकाहारियों के लिए शानदार विकल्प है। 2. नाशपाती (Pear) एक मध्यम आकार की नाशपाती में 6 ग्राम से अधिक फाइबर होता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज से राहत देने में मदद कर सकती है। 3. सेब (Apple) सेब को छिलके सहित खाने से अधिक फाइबर मिलता है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। 4. मसूर दाल (Lentils) एक कप पकी हुई मसूर दाल में लगभग 15.5 ग्राम फाइबर और 18 ग्राम प्रोटीन होता है। 5. प्रीबायोटिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ लहसुन, प्याज, लीक, शतावरी (Asparagus), आर्टिचोक और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थ आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। 6. राई ब्रेड (Pumpernickel Rye Bread) इसकी एक स्लाइस में लगभग 6 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। 7. ब्लैक बीन्स फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत। यह आंतों के माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में मदद करता है। 8. रास्पबेरी (Raspberries) फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल पाचन और इम्युनिटी दोनों के लिए लाभकारी है। 9. साबुत अनाज (Whole Grains) क्विनोआ, जौ, बाजरा, बकव्हीट और स्पेल्ट जैसे साबुत अनाज फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत हैं। 10. एवोकाडो (Avocado) स्वस्थ वसा और फाइबर से भरपूर एवोकाडो लंबे समय तक पेट भरा रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है। 11. चिया सीड्स (Chia Seeds) 100 ग्राम चिया सीड्स में लगभग 34 ग्राम फाइबर पाया जाता है। यह वजन नियंत्रण और पाचन दोनों के लिए फायदेमंद है। 12. क्रूसिफेरस सब्जियां ब्रोकली, फूलगोभी, पत्ता गोभी, केल और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्जियां घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर से भरपूर होती हैं। 13. पॉपकॉर्न बिना ज्यादा तेल के बनाया गया पॉपकॉर्न एक हेल्दी होल ग्रेन स्नैक है और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। क्या फाइबर सप्लीमेंट लेना चाहिए? अगर आपकी डाइट में पर्याप्त फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल नहीं हैं, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर फाइबर सप्लीमेंट लिया जा सकता है। हालांकि प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला फाइबर हमेशा बेहतर माना जाता है।
आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों के बीच चिया सीड्स और सब्जा के बीज (तुलसी के बीज) काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। दोनों ही फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इनके फायदे और उपयोग अलग-अलग हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एसिडिटी, कब्ज, वजन घटाने या फिटनेस के लिए आखिर कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर है? चिया और सब्जा में क्या है अंतर? चिया सीड्स चिया सीड्स Salvia Hispanica पौधे से प्राप्त होते हैं और इनमें भरपूर मात्रा में: ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रोटीन कैल्शियम मैग्नीशियम फाइबर पाया जाता है। ये शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने और मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। सब्जा सीड्स सब्जा या तुलसी के बीज पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा रहे हैं। इनमें: भरपूर फाइबर एंटीऑक्सीडेंट कम कैलोरी पाई जाती है। इन्हें विशेष रूप से शरीर को ठंडक पहुंचाने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। एसिडिटी और कब्ज में कौन ज्यादा फायदेमंद? दोनों बीज पानी में भिगोने पर जेल जैसी परत बना लेते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करती है। सब्जा सीड्स एसिडिटी, पेट की जलन, गैस और कब्ज से राहत दिलाने के लिए अधिक प्रभावी माने जाते हैं। चिया सीड्स गट हेल्थ सुधारने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। अगर आपकी मुख्य समस्या एसिडिटी या कब्ज है, तो सब्जा के बीज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वजन घटाने में कौन मददगार? दोनों ही बीज फाइबर से भरपूर होते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। चिया सीड्स में प्रोटीन और हेल्दी फैट अधिक होते हैं, जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। सब्जा सीड्स कम कैलोरी वाले होते हैं, इसलिए कैलोरी कंट्रोल करने वालों के लिए उपयोगी हैं। वजन घटाने के लिए दोनों अच्छे हैं, लेकिन कम कैलोरी डाइट में सब्जा और हाई-प्रोटीन डाइट में चिया अधिक फायदेमंद हो सकता है। शरीर को ठंडक पहुंचाने में कौन आगे? गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सब्जा के बीज लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। शरबत, नींबू पानी और फालूदा में सब्जा का उपयोग आम है। शरीर की गर्मी कम करने और हाइड्रेशन बनाए रखने में सब्जा अधिक प्रभावी माना जाता है। फिटनेस और जिम करने वालों के लिए क्या बेहतर? अगर आपका लक्ष्य फिटनेस, मसल रिकवरी और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखना है, तो: चिया सीड्स में मौजूद प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक लाभदायक हैं। नियमित एक्सरसाइज करने वालों के लिए चिया बेहतर विकल्प माना जाता है। सेवन का सही तरीका सब्जा सीड्स 5 से 10 मिनट पानी में भिगोएं। शरबत, दूध, फालूदा या नींबू पानी में मिलाकर सेवन करें। चिया सीड्स कम से कम 30 मिनट पानी में भिगोएं। स्मूदी, दही, ओट्स, सलाद या हेल्दी ड्रिंक्स में मिलाएं।
गर्मियों का पसंदीदा फल सिर्फ स्वाद ही नहीं, दिल की सेहत भी सुधार सकता है गर्मियों में तरबूज खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है। पानी से भरपूर और मीठा स्वाद वाला यह फल शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। अब हालिया शोधों में यह बात सामने आई है कि तरबूज का नियमित सेवन हृदय रोगों के खतरे को कम करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज में मौजूद कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ रक्तचाप और रक्त संचार को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। दिल की सेहत के लिए क्यों फायदेमंद है तरबूज? हालिया अध्ययनों के अनुसार तरबूज में एल-सिट्रुलीन (L-Citrulline) नामक अमीनो एसिड पाया जाता है। यह तत्व शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे रक्त वाहिकाएं बेहतर तरीके से काम कर पाती हैं और रक्त प्रवाह सुचारु बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एल-सिट्रुलीन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और धमनियों की कठोरता कम करने में भी मददगार हो सकता है। यही कारण है कि तरबूज को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी फल माना जा रहा है। पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से तरबूज का सेवन करते हैं, उनके शरीर में कई आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बेहतर पाई जाती है। इनमें शामिल हैं: फाइबर पोटैशियम मैग्नीशियम विटामिन C विटामिन A लाइकोपीन कैरोटेनॉयड्स ये सभी पोषक तत्व शरीर को स्वस्थ रखने, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनाने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शरीर को रखता है हाइड्रेटेड तरबूज का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है। पर्याप्त हाइड्रेशन हृदय, किडनी और पाचन तंत्र के बेहतर कामकाज के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। तरबूज खाने के अन्य फायदे विशेषज्ञों के अनुसार तरबूज का सेवन कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी दे सकता है: रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने में सहायक मांसपेशियों के दर्द में राहत पाचन तंत्र को बेहतर बनाना त्वचा की सेहत सुधारना सूजन कम करने में मदद 100 ग्राम तरबूज में क्या-क्या होता है? 100 ग्राम ताजे तरबूज में लगभग: कैलोरी: 30 पानी: 91.4 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 7.55 ग्राम प्रोटीन: 0.61 ग्राम फाइबर: 0.4 ग्राम शुगर: 6.2 ग्राम फैट: 0.2 ग्राम डाइट में ऐसे करें शामिल अगर आप तरबूज के फायदे बढ़ाना चाहते हैं, तो इसे सिर्फ फल के रूप में खाने के अलावा कई अन्य तरीकों से भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं: फ्रूट स्मूदी में मिलाकर फेटा चीज और पुदीने के साथ सलाद में ग्रीक योगर्ट के साथ फ्रूट स्क्यूअर्स बनाकर तरबूज पॉप्सिकल तैयार करके ठंडा गजपाचो सूप बनाकर संतुलित आहार भी है जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज दिल की सेहत के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन केवल एक फल खाने से हृदय रोगों का खतरा पूरी तरह कम नहीं हो सकता। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग अपनी डाइट में सुपरफूड्स को शामिल कर रहे हैं और इन्हीं में से एक है मोरिंगा। मोरिंगा की पत्तियों को कई जगहों पर सहजन के पत्ते भी कहा जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मोरिंगा पोषक तत्वों का खजाना है और इसे रोजाना के भोजन में शामिल करने से शरीर को कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिल सकते हैं। खासकर सुबह के नाश्ते में मोरिंगा के पत्तों का परांठा खाना बेहद फायदेमंद माना जा रहा है। विटामिन और मिनरल्स का पावरहाउस विशेषज्ञों के अनुसार, मोरिंगा की पत्तियों में विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन बी6 भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और फाइबर जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। यही वजह है कि इसे नेचुरल न्यूट्रिशन का पावरहाउस कहा जाता है। मोरिंगा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। वहीं इसके एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन कम करने में सहायक माने जाते हैं। यही कारण है कि जोड़ों के दर्द और शरीर में सूजन की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी मोरिंगा लाभदायक माना जाता है। इम्यूनिटी और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद डॉक्टर्स का कहना है कि मोरिंगा की पत्तियां इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं। इनमें मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है, जिससे संक्रमण से लड़ने की ताकत बेहतर होती है। इसके अलावा कई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि मोरिंगा शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी सहायक होता है। कब्ज, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी यह राहत पहुंचा सकता है। ऐसे बनाएं हेल्दी मोरिंगा परांठा मोरिंगा परांठा बनाना बेहद आसान है। इसके लिए गेहूं के आटे में बारीक कटी मोरिंगा की पत्तियां, हरी मिर्च, अजवाइन, हल्दी और स्वादानुसार नमक मिलाएं। फिर थोड़ा तेल डालकर नरम आटा गूंथ लें। इसके बाद लोइयां बनाकर परांठे बेलें और तवे पर हल्का घी या तेल लगाकर सुनहरा होने तक सेंक लें। यह हेल्दी परांठा दही, अचार या चाय के साथ खाया जा सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सुबह के नाश्ते में मोरिंगा परांठा खाने से शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और दिनभर एक्टिव महसूस करने में मदद मिल सकती है।
आजकल “फाइबर” सिर्फ पोषण से जुड़ा शब्द नहीं रह गया है, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को स्वस्थ रखने और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में पर्याप्त फाइबर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद ज्यादातर लोग अपनी रोजाना की जरूरत के अनुसार फाइबर का सेवन नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त फाइबर लेने से: पाचन तंत्र बेहतर रहता है ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिलती है दिल स्वस्थ रहता है लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो सकता है US Food and Drug Administration के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना लगभग 28 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। लेकिन कई शोध बताते हैं कि अधिकतर लोग इस लक्ष्य से काफी पीछे हैं। आइए जानते हैं रोजाना फाइबर बढ़ाने के 7 आसान और असरदार तरीके। 1. फलों और सब्जियों का छिलका न हटाएं विशेषज्ञों का कहना है कि कई फलों और सब्जियों के छिलकों में अंदरूनी हिस्से से ज्यादा फाइबर होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर सेब को छिलके सहित खाया जाए तो लगभग 2 ग्राम अतिरिक्त फाइबर मिलता है। जहां संभव हो, पूरे फल खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। 2. दाल और बीन्स को भोजन में शामिल करें मसूर दाल, राजमा, चना और दूसरी दालें फाइबर का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं। इन्हें: सलाद सूप चावल पास्ता जैसे भोजन में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है। इससे खाना ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला बनता है। 3. बीज और मेवे का सेवन बढ़ाएं Chia seed, अलसी के बीज और दूसरे पौष्टिक बीज फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक: चिया सीड्स में लगभग 10 ग्राम फाइबर अलसी में करीब 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इन्हें दही, दलिया, सलाद या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है। 4. मिठाई के साथ फल खाएं अगर आपको मीठा पसंद है तो मिठाई के साथ ताजे फल खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। कुछ ज्यादा फाइबर वाले फल: नाशपाती सेब रसभरी ये शरीर को विटामिन और खनिज भी प्रदान करते हैं। 5. ज्यादा फाइबर वाले स्नैक्स चुनें तले-भुने और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह ऐसे विकल्प चुनें जिनमें प्राकृतिक फाइबर ज्यादा हो, जैसे: भुना चना पॉपकॉर्न मेवे बीज उदाहरण के तौर पर, बिना ज्यादा तेल वाला पॉपकॉर्न फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। 6. “पकाएं और ठंडा करें” तरीका अपनाएं विशेषज्ञों के अनुसार आलू, चावल, पास्ता और कुछ दालों को पकाकर ठंडा करने से उनमें “रेजिस्टेंट स्टार्च” बनता है। यह तरीका: ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करता है कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक हो सकता है पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है 7. जूस की बजाय पूरा फल खाएं फलों के रस की तुलना में पूरा फल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि उसमें फाइबर सुरक्षित रहता है। पूरा फल: पाचन को धीमा करता है ज्यादा देर तक पेट भरा रखता है अचानक शुगर बढ़ने की संभावना कम करता है इसीलिए विशेषज्ञ जूस की जगह पूरे फल खाने की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलाव करके भी रोजाना फाइबर का सेवन काफी बढ़ाया जा सकता है। संतुलित आहार के साथ फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।
क्यों बढ़ रही है शरीर में inflammation की समस्या? आजकल खराब लाइफस्टाइल, तनाव, कम नींद, ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड फूड की वजह से शरीर में inflammation यानी अंदरूनी सूजन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके शुरुआती संकेत अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे लगातार थकान, पेट फूलना, स्किन पर पिंपल्स, सुस्ती या शरीर में भारीपन महसूस होना। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोजमर्रा की छोटी हेल्दी आदतें शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं। ऐसे में anti-inflammatory drinks शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ सूजन कम करने में भी सहायक मानी जाती हैं। 1. हल्दी और काली मिर्च की चाय हल्दी में मौजूद curcumin शरीर की सूजन कम करने में मदद करता है। वहीं काली मिर्च इसके असर को बढ़ाने का काम करती है। कैसे बनाएं? एक कप पानी में आधा चम्मच हल्दी, थोड़ा अदरक और एक चुटकी काली मिर्च डालकर 5-7 मिनट तक उबालें। चाहें तो इसमें शहद या थोड़ा दूध मिला सकते हैं। 2. अदरक और नींबू पानी अदरक को प्राकृतिक anti-inflammatory माना जाता है, जबकि नींबू शरीर को detox करने और hydration बनाए रखने में मदद करता है। कैसे बनाएं? पानी में अदरक उबालें और फिर उसमें नींबू का रस मिलाएं। स्वाद के लिए थोड़ा शहद भी डाल सकते हैं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 3. ग्रीन टी और पुदीना ग्रीन टी में antioxidants भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। पुदीना इसे refreshing बनाता है और पाचन में मदद करता है। कैसे बनाएं? गर्म पानी में ग्रीन टी और पुदीने की पत्तियां डालकर 2-3 मिनट तक छोड़ दें। चाहें तो नींबू भी मिला सकते हैं। गर्मियों में इसे chilled drink की तरह भी पिया जा सकता है। 4. Tart Cherry Spritzer टार्ट चेरी में ऐसे compounds पाए जाते हैं जो शरीर की सूजन और muscle soreness कम करने में मदद कर सकते हैं। कैसे बनाएं? एक गिलास में बिना शक्कर वाला tart cherry juice लें और उसमें sparkling water मिलाएं। ऊपर से थोड़ा नींबू निचोड़ें और बर्फ डालकर सर्व करें। 5. खीरा, पुदीना और चिया सीड्स वाला पानी यह ड्रिंक गर्मियों में शरीर को ठंडक और hydration देने के साथ digestion में भी मदद कर सकता है। Chia seeds में fiber और omega-3 fatty acids पाए जाते हैं। कैसे बनाएं? पानी में खीरे के टुकड़े, पुदीने की पत्तियां और चिया सीड्स डालें। 15-20 मिनट बाद इसमें नींबू का रस मिलाकर पिएं। रोजाना की छोटी आदतें दे सकती हैं बड़ा फायदा विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी ड्रिंक अकेले चमत्कार नहीं कर सकती, लेकिन रोजाना sugary beverages की जगह हेल्दी drinks अपनाने से शरीर को फायदा मिल सकता है। सही खानपान, पर्याप्त नींद और hydration के साथ ये drinks overall health बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पोषण की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है, और इन्हीं में से एक है मैग्नीशियम की कमी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह जरूरी मिनरल हमारे शरीर में 300 से अधिक बायोकेमिकल प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है–जिसमें मसल और नर्व फंक्शन, ब्लड प्रेशर कंट्रोल, एनर्जी प्रोडक्शन, मेटाबॉलिज्म और हड्डियों का विकास शामिल है। पोषण विशेषज्ञ सामंथा डिएरास के मुताबिक, लगभग 60 प्रतिशत वयस्क रोजाना आवश्यक 320 से 420 मिलीग्राम मैग्नीशियम की मात्रा पूरी नहीं कर पाते। इसकी कमी से मूड स्विंग, मसल क्रैम्प्स, थकान और मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, सही डाइट अपनाकर इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है। ये हैं 13 मैग्नीशियम से भरपूर फूड्स 1. कीवी (Kiwi) छोटा सा फल लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर। इसमें विटामिन C, E, K, फाइबर और लगभग 31 mg मैग्नीशियम पाया जाता है। 2. खीरा (Cucumber) 95% पानी से भरपूर खीरा भी मैग्नीशियम (लगभग 16 mg) और अन्य जरूरी मिनरल्स का अच्छा स्रोत है। 3. स्क्वैश (Squash) बटरनट और एकॉर्न स्क्वैश में 60-65 mg तक मैग्नीशियम होता है, साथ ही फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी। 4. डार्क चॉकलेट (Dark Chocolate) स्वाद के साथ सेहत भी–यह मैग्नीशियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद है। 5. एवोकाडो (Avocado) हेल्दी फैट, फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर यह फल ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करता है। 6. नट्स (Nuts) बादाम, काजू जैसे नट्स मैग्नीशियम, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। 7. दालें (Legumes) चना, राजमा, ब्लैक बीन्स जैसी दालों में मैग्नीशियम के साथ आयरन और विटामिन B भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। 8. बादाम (Almonds) एक सर्विंग बादाम से लगभग 20% दैनिक मैग्नीशियम की जरूरत पूरी हो सकती है। 9. हरी पत्तेदार सब्जियां (Leafy Greens) पालक, केल जैसी सब्जियां मैग्नीशियम के साथ फाइबर और ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करती हैं। 10. बीज (Seeds) चिया, फ्लैक्स और कद्दू के बीज मैग्नीशियम के पावरहाउस हैं, जो हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हैं। 11. साबुत अनाज (Whole Grains) ये फाइबर और मिनरल्स से भरपूर होते हैं और डायबिटीज व हार्ट डिजीज के खतरे को कम करते हैं। 12. केला (Banana) मैग्नीशियम के साथ-साथ पोटैशियम से भरपूर, जो ब्लड प्रेशर कंट्रोल में सहायक है। 13. सैल्मन (Salmon) 100 ग्राम सैल्मन में लगभग 30 mg मैग्नीशियम होता है और यह सूजन कम करने में मदद करता है। क्या हैं इसके नुकसान? विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक फूड्स से मिलने वाला मैग्नीशियम आमतौर पर सुरक्षित होता है। लेकिन सप्लीमेंट्स का अधिक सेवन डायरिया और पाचन समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। कैसे करें मैग्नीशियम ट्रैक? एक वयस्क को रोजाना 310 से 420 mg मैग्नीशियम की जरूरत होती है, जो उम्र, लिंग और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करती है। अगर आपको थकान, सिरदर्द या मसल क्रैम्प्स जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
Apple, Beetroot और Carrot का कॉम्बिनेशन यानी ABC आजकल हेल्थ ट्रेंड बन चुका है। लेकिन सवाल वही है - जूस बेहतर या अचार? आइए आसान भाषा में समझते हैं 1. ABC Juice क्या है? ABC Juice ताजे सेब, चुकंदर और गाजर को ब्लेंड करके बनाया जाता है। फायदे: विटामिन A, B, C से भरपूर बॉडी को हाइड्रेट करता है स्किन ग्लो बढ़ाता है ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद सुबह खाली पेट पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है ध्यान दें: इसमें नैचुरल शुगर होती है, इसलिए डायबिटीज वालों को सीमित मात्रा में लेना चाहिए 2. ABC Achar क्या है? ABC Achar वही तीन चीजों से बनता है, लेकिन इसमें नमक, तेल, मसाले और सिरका मिलाकर तैयार किया जाता है। फायदे: प्रोबायोटिक्स (अच्छे बैक्टीरिया) मिलते हैं डाइजेशन बेहतर करता है खाने का स्वाद बढ़ाता है नुकसान: ज्यादा नमक और तेल → BP और पानी रुकने की समस्या ज्यादा खाने से हेल्थ पर असर 3. मुख्य अंतर पहलू ABC Juice ABC Achar पोषण विटामिन और मिनरल्स ज्यादा प्रोबायोटिक्स ज्यादा असर डिटॉक्स और एनर्जी डाइजेशन सुधार सेवन समय सुबह खाली पेट खाने के साथ रिस्क शुगर कंट्रोल जरूरी नमक-तेल कंट्रोल जरूरी 4. कैसे और कब लें? ABC Juice: सुबह खाली पेट (1 ग्लास) ABC Achar: लंच/डिनर के साथ (1 छोटा चम्मच) दोनों का ओवरयूज नुकसानदायक हो सकता है 5. कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आपका लक्ष्य है: डिटॉक्स, ग्लोइंग स्किन, ब्लड हेल्थ तो ABC Juice बेहतर अगर आप चाहते हैं: अच्छा डाइजेशन और गट हेल्थ तो ABC Achar बेहतर
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।