Healthy Diet

Person experiencing lower back pain radiating to the legs, highlighting nerve compression and sciatica symptoms.
पीठ से पैरों तक बिजली जैसा दर्द और झनझनाहट? हो सकता है नस दबने का संकेत, जानें डॉक्टर कैसे करते हैं पहचान

Nerve Compression Symptoms: अगर आपकी कमर से शुरू होकर दर्द कूल्हों, जांघ, पिंडली या पैरों तक पहुंचता है और इसके साथ झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होती है, तो इसे सामान्य कमर दर्द या मांसपेशियों का खिंचाव समझकर नजरअंदाज न करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षण कई बार नस दबने (Nerve Compression) या साइटिका (Sciatica) जैसी समस्या का संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और सही इलाज न मिलने पर नस को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है। आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पॉश्चर, भारी वजन उठाना और बढ़ती उम्र के कारण रीढ़ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि सामान्य मांसपेशियों के दर्द और नस के दर्द में क्या अंतर होता है। नस दबने की समस्या क्या होती है? विशेषज्ञों के अनुसार जब रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद डिस्क, हड्डी, लिगामेंट या अन्य टिशू किसी नस पर दबाव डालने लगते हैं, तो उसे नस दबना या Nerve Compression कहा जाता है। इससे नस मस्तिष्क और शरीर के बीच सामान्य रूप से संदेश नहीं पहुंचा पाती, जिसके कारण दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें? यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है— कमर से शुरू होकर पैरों तक फैलने वाला तेज दर्द बिजली के झटके जैसा दर्द या झनझनाहट पैरों में सुन्नपन या जलन चलने या लंबे समय तक खड़े रहने में परेशानी पैरों में कमजोरी महसूस होना आराम करने के बाद भी दर्द का बने रहना नस के दर्द और मांसपेशियों के दर्द में अंतर नस दबने के दर्द के संकेत दर्द कमर से पैरों तक फैलता है। झनझनाहट और सुन्नपन महसूस होता है। बिजली के झटके जैसा दर्द हो सकता है। जलन और कमजोरी महसूस हो सकती है। आराम करने पर भी दर्द पूरी तरह कम नहीं होता। मांसपेशियों के दर्द के संकेत दर्द एक सीमित हिस्से में रहता है। दबाने पर दर्द बढ़ सकता है। झनझनाहट या सुन्नपन नहीं होता। आराम करने और हल्की स्ट्रेचिंग से धीरे-धीरे राहत मिलती है। नस दबने के सामान्य कारण स्लिप डिस्क (Slip Disc): रीढ़ की डिस्क बाहर निकलकर नस पर दबाव डाल सकती है। साइटिका (Sciatica): साइटिक नस दबने पर दर्द कमर से पैरों तक फैल सकता है। स्पाइनल स्टेनोसिस: उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की नलिका संकरी होने से नसों पर दबाव बढ़ सकता है। बोन स्पर: हड्डियों की अतिरिक्त वृद्धि नसों को दबा सकती है। चोट या दुर्घटना: गिरने या किसी चोट के कारण नस पर दबाव पड़ सकता है। डॉक्टर कैसे करते हैं पहचान? नस दबने की पुष्टि के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर निम्न जांच कराई जा सकती हैं— MRI Scan CT Scan X-ray Electromyography (EMG) Neurological Examination बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें। सही पॉश्चर में बैठें और काम करें। नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज करें। भारी वजन सही तकनीक से उठाएं। शरीर का वजन नियंत्रित रखें। पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें। योग और स्ट्रेचिंग से मिल सकती है मदद रीढ़ की सेहत बेहतर रखने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह से भुजंगासन, मकरासन, मार्जरी-व्याघ्रासन (Cat-Cow Pose), ताड़ासन और बालासन जैसे योगासन किए जा सकते हैं। इसके अलावा अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम तनाव कम करने और शरीर को रिलैक्स रखने में मदद कर सकते हैं। यदि दर्द तेज हो तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के कोई भी व्यायाम न करें। हेल्दी डाइट भी है जरूरी नसों और हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार लेना भी बेहद जरूरी है। अपनी डाइट में विटामिन B12, विटामिन D, कैल्शियम, मैग्नीशियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड, हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, दही, अंडे, दालें, मेवे और मौसमी फल शामिल करें। पर्याप्त पानी पीना भी शरीर की रिकवरी में मदद करता है। कब तुरंत डॉक्टर से मिलें? अगर दर्द लगातार बढ़ रहा हो, पैरों में कमजोरी आ रही हो, चलने में कठिनाई हो, पेशाब या मल पर नियंत्रण कम हो जाए या सुन्नपन लगातार बना रहे, तो तुरंत ऑर्थोपेडिक, स्पाइन विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। ध्यान रखें: कमर से पैरों तक फैलने वाला दर्द हर बार सामान्य नहीं होता। समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित योग, सही पॉश्चर और उचित इलाज से नस दबने की समस्या को गंभीर होने से काफी हद तक रोका जा सकता है।  

anmol जुलाई 28, 2026 0
Healthy bottle gourd recipes including lauki chilla, soup, raita and sabzi for natural weight loss.
वजन कम करना हुआ आसान! लौकी की ये 4 हेल्दी रेसिपी करें ट्राई, स्वाद के साथ मिलेगी फिटनेस

Weight Loss Tips: वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन बेस्वाद डाइट की वजह से बार-बार हार मान जाते हैं? अगर हां, तो लौकी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। ज्यादातर लोग लौकी का नाम सुनते ही मुंह बना लेते हैं, लेकिन सही तरीके से बनाई गई लौकी की रेसिपीज न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि वजन घटाने में भी मददगार साबित हो सकती हैं। लौकी में लगभग 92 प्रतिशत पानी, कम कैलोरी और भरपूर फाइबर होता है। यही कारण है कि इसे वेट लॉस डाइट का अहम हिस्सा माना जाता है। फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग की संभावना कम हो सकती है। क्यों फायदेमंद है लौकी? कम कैलोरी और हाई फाइबर लगभग 92% पानी, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद पाचन को बेहतर बनाने में सहायक हेल्दी वेट मैनेजमेंट में मददगार 1. लौकी का चीला तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी ½ कप बेसन ¼ चम्मच हल्दी ½ चम्मच अजवाइन 1 बारीक कटी हरी मिर्च स्वादानुसार नमक थोड़ा पानी 1 चम्मच तेल बनाने की विधि कद्दूकस की हुई लौकी में बेसन, हल्दी, अजवाइन, हरी मिर्च और नमक मिलाएं। जरूरत अनुसार पानी डालकर गाढ़ा बैटर तैयार करें। तवे पर हल्का तेल लगाकर बैटर फैलाएं और दोनों तरफ सुनहरा व कुरकुरा होने तक सेंक लें। 2. लौकी का रायता तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 8 मिनट सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी 1 कप ताजा दही ½ चम्मच भुना जीरा पाउडर काला नमक हरा धनिया बनाने की विधि लौकी को हल्का उबालकर ठंडा करें। अब दही में उबली हुई लौकी मिलाएं। ऊपर से भुना जीरा, काला नमक और हरा धनिया डालकर सर्व करें। 3. लौकी का सूप तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 1 कप कटी हुई लौकी 1 टमाटर 1 छोटा टुकड़ा अदरक 2–3 लहसुन की कलियां काली मिर्च नींबू का रस बनाने की विधि लौकी, टमाटर, अदरक और लहसुन को कुकर में एक सीटी आने तक पकाएं। ठंडा होने पर पीस लें। मिश्रण को उबालें और ऊपर से काली मिर्च व नींबू का रस मिलाकर गर्मागर्म पिएं। 4. जीरा लौकी की सब्जी तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 2 कप कटी हुई लौकी 1 चम्मच जीरा चुटकीभर हींग 1 हरी मिर्च ½ चम्मच हल्दी स्वादानुसार नमक 1 चम्मच तेल या देसी घी बनाने की विधि पैन में तेल या घी गर्म करें। जीरा, हींग और हरी मिर्च का तड़का लगाएं। अब लौकी, हल्दी और नमक डालकर ढक दें। लौकी अपने ही पानी में पक जाएगी। कम मसालों वाली यह सब्जी वेट लॉस डाइट के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। वजन घटाने के लिए रखें ये बातें ध्यान रोजाना संतुलित आहार लें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नियमित एक्सरसाइज या वॉक करें। जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों से बचें। पर्याप्त नींद लें। ध्यान दें: केवल लौकी खाने से वजन कम नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है या विशेष डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।  

anmol जुलाई 25, 2026 0
Gallbladder stones illustration with healthy diet and exercise tips to reduce metabolic disease risk.
गॉल ब्लैडर स्टोन को हल्के में न लें! बढ़ा सकता है फैटी लिवर, डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा

Gallbladder Stone Health Tips: गॉल ब्लैडर में स्टोन (पित्ताशय की पथरी) को अक्सर लोग एक सामान्य समस्या मानते हैं और ऑपरेशन के बाद इसे पूरी तरह खत्म हुई बीमारी समझ लेते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गॉल ब्लैडर में स्टोन केवल पित्ताशय की समस्या नहीं, बल्कि शरीर के बिगड़ते मेटाबॉलिज्म, बढ़ते वजन और फैटी लिवर का संकेत भी हो सकता है। समय रहते इस पर ध्यान न देने से भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। क्यों बनती है गॉल ब्लैडर में स्टोन? गॉल ब्लैडर शरीर में लिवर द्वारा बनने वाले बाइल (पित्त) को स्टोर करने का काम करता है। जब शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है, तो बाइल में मौजूद कोलेस्ट्रॉल और अन्य तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। धीरे-धीरे यही असंतुलन पथरी बनने का कारण बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गॉल ब्लैडर स्टोन कई बार यह संकेत देता है कि शरीर का मेटाबॉलिज्म सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। ऐसे लोगों में आगे चलकर कई मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। किन बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा? यदि गॉल ब्लैडर स्टोन के साथ मोटापा या फैटी लिवर भी मौजूद है, तो भविष्य में इन समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है— फैटी लिवर हाई ब्लड प्रेशर टाइप-2 डायबिटीज हृदय रोग किडनी से जुड़ी समस्याएं मेटाबॉलिक सिंड्रोम ऑपरेशन के बाद भी क्यों जरूरी है सावधानी? गॉल ब्लैडर निकालने की सर्जरी के बाद अधिकांश लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि समस्या की जड़ खत्म हो गई। यदि वजन, खानपान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो फैटी लिवर और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बना रह सकता है। इसलिए ऑपरेशन के बाद भी हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। फैमिली हिस्ट्री भी बढ़ा सकती है जोखिम यदि परिवार में माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों को गॉल ब्लैडर स्टोन की समस्या रही है, तो अगली पीढ़ी में भी इसका खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बचपन से ही संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन बनाए रखना जरूरी है। किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें? पेट के दाईं ओर तेज दर्द तैलीय भोजन के बाद पेट दर्द मतली या उल्टी अपच और गैस पीठ या दाएं कंधे तक फैलने वाला दर्द यदि ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। क्या खाएं? स्वस्थ गॉल ब्लैडर और लिवर के लिए इन चीजों को आहार में शामिल करें— हरी पत्तेदार सब्जियां मौसमी फल ओट्स और साबुत अनाज दालें और बीन्स लो-फैट दही ब्राउन राइस पर्याप्त पानी सीमित मात्रा में ड्राई फ्रूट्स किन चीजों से बचें? डीप फ्राइड फूड फास्ट फूड अधिक घी और मक्खन मीठे पेय और सॉफ्ट ड्रिंक्स अत्यधिक चीनी प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड कौन-सी एक्सरसाइज करें? रोजाना कम से कम 30–45 मिनट शारीरिक गतिविधि अपनाएं— तेज चाल से वॉक साइकिलिंग स्विमिंग योग सूर्य नमस्कार हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज एक्सपर्ट टिप्स वजन को नियंत्रित रखें। अचानक बहुत तेजी से वजन कम करने की कोशिश न करें। संतुलित और कम वसा वाला भोजन लें। रोजाना पर्याप्त पानी पिएं। नियमित हेल्थ चेकअप कराएं। लंबे समय तक पेट दर्द या पाचन संबंधी परेशानी को नजरअंदाज न करें। ध्यान रखें: गॉल ब्लैडर स्टोन केवल सर्जरी तक सीमित समस्या नहीं है। यह शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य का संकेत भी हो सकता है। यदि समय रहते स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। किसी भी लक्षण या परेशानी की स्थिति में स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है.  

anmol जुलाई 23, 2026 0
Fresh garlic cloves and bulbs highlighting their potential immune-supporting benefits and traditional Ayurvedic health uses.
सच या झूठ: क्या वाकई लहसुन खाने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है? आयुर्वेदाचार्य से जानें खाली पेट खाना कितना सही

Garlic for Immunity: भारतीय रसोई में लहसुन केवल स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं, बल्कि पारंपरिक घरेलू नुस्खों का भी अहम हिस्सा माना जाता है। सर्दी, जुकाम और संक्रमण के मौसम में कई लोग सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद में लहसुन को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है, जबकि आधुनिक शोध भी इसके कुछ स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि करते हैं। लेकिन क्या वास्तव में सिर्फ लहसुन खाने से इम्यूनिटी मजबूत हो जाती है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय। क्या लहसुन सच में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है? आयुर्वेदाचार्य डॉ. राजेश बयारी (एमडी, चित्रकूटा आयुर्वेद चिकित्सालय, कुंडापुरा) के अनुसार, लहसुन में मौजूद एलिसिन (Allicin), सल्फर यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। ये तत्व एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा लहसुन: पाचन शक्ति को बेहतर बनाने में मदद करता है। रक्त संचार को सुधारने में सहायक होता है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में योगदान दे सकता है। हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद में लहसुन का महत्व आयुर्वेद में लहसुन को 'लशुन' कहा गया है। चरक संहिता और भावप्रकाश निघंटु जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसे औषधीय पौधे के रूप में वर्णित किया गया है। आयुर्वेद के अनुसार लहसुन: पाचन शक्ति (अग्नि) को मजबूत करता है। वात और कफ दोष को संतुलित करता है। शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है। संक्रमण से लड़ने की क्षमता को समर्थन देता है। हृदय और रक्त संचार को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। आधुनिक शोध क्या कहते हैं? वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, लहसुन में एलिसिन, डायलिल सल्फाइड (Diallyl Sulfide), एजोइन (Ajoene) और अन्य ऑर्गेनोसल्फर यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में एंटीऑक्सीडेंट और हल्के एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव दिखा सकते हैं। कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि नियमित मात्रा में लहसुन का सेवन प्रतिरक्षा कोशिकाओं के सामान्य कार्य को समर्थन दे सकता है और सामान्य सर्दी-जुकाम की संभावना कुछ हद तक कम कर सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल लहसुन खाने से इम्यूनिटी चमत्कारिक रूप से नहीं बढ़ती। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और समय पर टीकाकरण भी बेहद जरूरी हैं। क्या खाली पेट लहसुन खाना सही है? आयुर्वेद के अनुसार इसका जवाब व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति पर निर्भर करता है। यदि: कफ या वात दोष अधिक है, पाचन शक्ति कमजोर है, तो सुबह गुनगुने पानी के साथ 1–2 कली कच्चा लहसुन लेना लाभकारी माना जा सकता है। लेकिन यदि: पित्त प्रकृति है, एसिडिटी रहती है, गैस्ट्राइटिस या पेट के अल्सर की समस्या है, तो खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए भोजन में पकाकर या हल्का भूनकर लहसुन खाना अधिक सुरक्षित माना जाता है।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Healthy Indian foods including ragi, sesame seeds and ghee that support children's growth and bone health.
बच्चों की बेहतर ग्रोथ के लिए महंगे हेल्थ ड्रिंक नहीं, रोज डाइट में शामिल करें ये 3 पौष्टिक चीजें

Child Growth Diet Tips: बच्चों की लंबाई और हड्डियों के बेहतर विकास के लिए सिर्फ हेल्थ ड्रिंक पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और कैल्शियम, जिंक व विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थ बच्चों की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाते हैं। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ रहे, उसकी हड्डियां मजबूत हों और उसकी लंबाई उम्र के अनुसार अच्छी तरह बढ़े। इसी चिंता में कई लोग बाजार में मिलने वाले हेल्थ ड्रिंक और सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की ग्रोथ का आधार केवल किसी एक पाउडर या ड्रिंक पर नहीं, बल्कि संतुलित पोषण, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और आनुवंशिक (Genetic) कारकों पर भी निर्भर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि बच्चों के भोजन में कैल्शियम, जिंक, विटामिन D, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स पर्याप्त मात्रा में शामिल किए जाएं, तो यह हड्डियों के विकास और शरीर की सामान्य वृद्धि में मदद कर सकते हैं। ऐसे कई पोषक तत्व घर की रसोई में मौजूद सामान्य खाद्य पदार्थों से भी मिल सकते हैं। 1. रागी (Finger Millet) रागी को कैल्शियम से भरपूर अनाज माना जाता है। इसमें फाइबर, आयरन और कई जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं, जो बच्चों की हड्डियों और शरीर के विकास के लिए उपयोगी हो सकते हैं। कैसे खिलाएं? रागी डोसा रागी चीला रागी रोटी रागी पोरिज रागी इडली 2. तिल (Sesame Seeds) तिल कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। जिंक शरीर की सामान्य वृद्धि और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। कैसे खिलाएं? तिल की रोटी तिल का पराठा तिल की चटनी तिल-गुड़ के लड्डू सलाद या दही में मिलाकर 3. शुद्ध देसी घी विशेषज्ञों के अनुसार सीमित मात्रा में शुद्ध देसी घी हेल्दी फैट्स प्रदान करता है, जो फैट-सॉल्युबल विटामिन्स (जैसे विटामिन D) के अवशोषण में मदद कर सकते हैं। हालांकि इसका सेवन उम्र और जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। कैसे खिलाएं? दाल-चावल पर रोटी पर हल्का घी लगाकर खिचड़ी में दूध में सीमित मात्रा में (यदि डॉक्टर या डाइटिशियन उचित समझें) बच्चों की ग्रोथ के लिए सिर्फ खाना ही नहीं, ये बातें भी जरूरी रोज कम से कम 8–10 घंटे की अच्छी नींद लें। आउटडोर खेल और नियमित एक्सरसाइज करें। सुबह की धूप से प्राकृतिक विटामिन D प्राप्त करें। प्रोटीन युक्त भोजन जैसे दूध, दाल, पनीर, अंडा (यदि खाते हों) भी शामिल करें। जंक फूड और अत्यधिक शुगर वाले पेय सीमित रखें। बच्चों के लिए हेल्दी रेसिपी: रागी-तिल एनर्जी चीला सामग्री 1 कप रागी का आटा 1 बड़ा चम्मच भुना तिल 2 बड़े चम्मच दही बारीक कद्दूकस गाजर बारीक पालक थोड़ा हरा धनिया स्वादानुसार नमक थोड़ा जीरा सेंकने के लिए थोड़ा देसी घी बनाने की विधि सभी सामग्री को मिलाकर गाढ़ा बैटर तैयार करें। 10 मिनट के लिए ढककर रख दें। गर्म तवे पर हल्का घी लगाकर चीले की तरह फैलाएं। दोनों तरफ सुनहरा होने तक सेंक लें। दही या हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें। अनुमानित पोषण (प्रति सर्विंग) कैलोरी: 220–260 kcal प्रोटीन: 7–9 ग्राम कैल्शियम: अच्छी मात्रा फाइबर: 4–6 ग्राम ध्यान रखें :- किसी भी एक खाद्य पदार्थ से बच्चों की लंबाई बढ़ने की गारंटी नहीं दी जा सकती। बच्चे की ग्रोथ आनुवंशिक कारकों, संतुलित पोषण, हार्मोन, शारीरिक गतिविधि और संपूर्ण स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। यदि बच्चे की लंबाई या विकास को लेकर चिंता हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह जरूर लें।

anmol जुलाई 22, 2026 0
Person showing unexplained bruises on arm with healthy foods supporting platelet-friendly nutrition and vitamins.
कुछ विटामिन की कमी से हो सकता है Thrombocytopenia, शरीर पर दिखने लगते हैं नीले निशान, जानें कारण, लक्षण और डाइट

Low Platelet Count सिर्फ डेंगू की वजह से नहीं होता। विटामिन B12, फोलेट (B9), कॉपर की कमी, वायरल संक्रमण, ऑटोइम्यून बीमारियां और कुछ दवाएं भी Thrombocytopenia का कारण बन सकती हैं। सही पोषण और समय पर जांच से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। Thrombocytopenia: केवल डेंगू नहीं, पोषण की कमी भी बन सकती है प्लेटलेट्स घटने की वजह शरीर में प्लेटलेट्स खून का थक्का बनाने और अत्यधिक रक्तस्राव रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य स्तर से कम हो जाती है, तो इस स्थिति को Thrombocytopenia (लो प्लेटलेट काउंट) कहा जाता है। अक्सर लोग इसे सिर्फ डेंगू से जोड़ते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार वायरल संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग, बोन मैरो से जुड़ी समस्याएं, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, लिवर या तिल्ली से संबंधित बीमारियां और पोषण की कमी भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में 1.5 लाख से 4.5 लाख प्लेटलेट्स प्रति माइक्रोलिटर होते हैं। यदि यह संख्या 1.5 लाख से कम हो जाए, तो जांच की जरूरत पड़ सकती है। बहुत कम प्लेटलेट्स होने पर मामूली चोट में भी ज्यादा खून बह सकता है और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। Thrombocytopenia के प्रमुख कारण वायरल संक्रमण (डेंगू, चिकनगुनिया, हेपेटाइटिस, HIV, EBV) ऑटोइम्यून बीमारियां बोन मैरो से जुड़ी समस्याएं विटामिन B12, फोलेट (B9) और कॉपर की कमी कुछ एंटीबायोटिक्स, कीमोथेरेपी और अन्य दवाओं के दुष्प्रभाव लिवर या बढ़ी हुई तिल्ली से जुड़ी समस्याएं इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें बिना चोट के शरीर पर नीले निशान पड़ना त्वचा पर लाल या बैंगनी छोटे धब्बे मसूड़ों या नाक से बार-बार खून आना मामूली चोट पर देर तक रक्तस्राव महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म पेशाब या मल में खून गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव प्लेटलेट्स को सपोर्ट करने वाली डाइट संतुलित आहार प्लेटलेट्स के उत्पादन में मदद करने वाले पोषक तत्व उपलब्ध करा सकता है। अपनी डाइट में शामिल करें— पालक, मेथी और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां चुकंदर दालें और राजमा अंडे दूध, दही और पनीर मछली और लीन मीट (यदि नॉन-वेज खाते हैं) संतरा, आंवला, अमरूद जैसे विटामिन C युक्त फल बादाम, काजू, कद्दू और सूरजमुखी के बीज साबुत अनाज पर्याप्त मात्रा में पानी ध्यान रखें यदि प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहे हों, बिना वजह शरीर पर नीले निशान पड़ रहे हों या बार-बार खून आने जैसी समस्या हो रही हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। सही कारण की पहचान और समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।   

anmol जुलाई 20, 2026 0
Healthy high-protein breakfast with scrambled egg bread and tofu bread served on a plate.
Breakfast Protein Special: सुबह की शुरुआत करें हाई-प्रोटीन ब्रेकफास्ट से, ट्राई करें स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड और टोफू ब्रेड, जानें कितनी कैलोरी और क्यों है हेल्दी

Healthy High Protein Breakfast Recipe: अगर आप ऐसा नाश्ता चाहते हैं जो 15 मिनट से भी कम समय में तैयार हो जाए, स्वादिष्ट भी हो और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद करे, तो स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड और टोफू ब्रेड बेहतरीन विकल्प हैं। एक सर्विंग में लगभग 270–340 कैलोरी मिलती है, जो संतुलित और एनर्जी देने वाला नाश्ता बन सकती है। Breakfast Protein Special: हाई-प्रोटीन नाश्ते के लिए ट्राई करें ये 2 आसान रेसिपीज दिन की अच्छी शुरुआत पौष्टिक नाश्ते से होती है। अगर सुबह का भोजन प्रोटीन से भरपूर हो, तो लंबे समय तक पेट भरा रहने में मदद मिल सकती है और अनहेल्दी स्नैकिंग की संभावना कम हो सकती है। यही वजह है कि न्यूट्रिशन एक्सपर्ट भी दिन की शुरुआत हाई-प्रोटीन ब्रेकफास्ट से करने की सलाह देते हैं। अगर आप रोजाना पोहा, पराठा या ब्रेड-बटर खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड और हाई-प्रोटीन टोफू ब्रेड ट्राई करें। ये दोनों रेसिपीज स्वादिष्ट होने के साथ-साथ अच्छी मात्रा में प्रोटीन और संतुलित कैलोरी भी प्रदान करती हैं। 1. स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड (10–12 मिनट) आवश्यक सामग्री 2 अंडे 2 मल्टीग्रेन या ब्राउन ब्रेड स्लाइस 1 छोटा प्याज 1 छोटा टमाटर 1 हरी मिर्च नमक और काली मिर्च 1 छोटा चम्मच ऑलिव ऑयल या घी हरा धनिया बनाने की विधि हल्के तेल में प्याज, टमाटर और हरी मिर्च भूनें। फेंटे हुए अंडे डालकर स्क्रैम्बल तैयार करें। ऊपर से काली मिर्च और हरा धनिया डालें और टोस्टेड ब्राउन ब्रेड के साथ परोसें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 310–340 kcal प्रोटीन: 18–20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 28 ग्राम फैट: 12–15 ग्राम 2. हाई-प्रोटीन टोफू ब्रेड (12–15 मिनट) आवश्यक सामग्री 100 ग्राम फर्म टोफू 2 ब्राउन ब्रेड स्लाइस 1 छोटा प्याज शिमला मिर्च नमक काली मिर्च चिली फ्लेक्स 1 छोटा चम्मच ऑलिव ऑयल ओरिगेनो (वैकल्पिक) बनाने की विधि टोफू को क्रम्बल करें। हल्के तेल में प्याज और शिमला मिर्च भूनें। टोफू और मसाले डालकर 3–4 मिनट पकाएं। तैयार मिश्रण को टोस्टेड ब्रेड पर रखें और गर्मागर्म परोसें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 270–300 kcal प्रोटीन: 16–18 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 26 ग्राम फैट: 9–11 ग्राम हाई-प्रोटीन नाश्ता क्यों है जरूरी? लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। बार-बार भूख लगने और ओवरईटिंग को कम करने में सहायक हो सकता है। मांसपेशियों की रिकवरी और विकास में मदद करता है। दिनभर के लिए स्थिर ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है। संतुलित और एक्टिव लाइफस्टाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। किसे कौन-सी रेसिपी चुननी चाहिए? स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड नॉन-वेज खाने वालों के लिए बेहतर विकल्प। वर्कआउट के बाद भी खाया जा सकता है। टोफू ब्रेड शाकाहारी लोगों के लिए हाई-प्रोटीन विकल्प। हल्का और लो-फैट नाश्ता पसंद करने वालों के लिए उपयुक्त। कब खाएं? सुबह नाश्ते में वर्कआउट के 30–60 मिनट बाद शाम के हेल्दी स्नैक के रूप में ध्यान दें: केवल हाई-प्रोटीन नाश्ता खाने से वजन कम या मसल्स नहीं बनते। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद भी जरूरी है। यदि आपको किडनी, लिवर या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह लें।  

anmol जुलाई 20, 2026 0
Freshly cooked moringa paratha served with yogurt and pickle for a healthy, vitamin-rich breakfast.
नाश्ते में खाएं मोरिंगा परांठा, भरपूर मिलेंगे विटामिन A, C और आयरन, जानें आसान रेसिपी, सामग्री और कैलोरी

Moringa Paratha Recipe: गेहूं के आटे और मोरिंगा (सहजन) की पत्तियों से तैयार यह हेल्दी परांठा विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर है। जानें सामग्री, बनाने की आसान विधि, प्रति सर्विंग कैलोरी और सेहत के फायदे। नाश्ते में क्यों खाएं मोरिंगा परांठा? अगर आप दिन की शुरुआत हेल्दी और पौष्टिक नाश्ते से करना चाहते हैं, तो मोरिंगा (सहजन) के पत्तों का परांठा बेहतरीन विकल्प हो सकता है। मोरिंगा की पत्तियां विटामिन A, C, B6, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में इसका सेवन इम्यूनिटी, पाचन, हड्डियों और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। आवश्यक सामग्री  2 कप गेहूं का आटा  1 कप बारीक कटी मोरिंगा (सहजन) की पत्तियां 1–2 हरी मिर्च (बारीक कटी)  ½ छोटा चम्मच अजवाइन  ¼ छोटा चम्मच हल्दी  नमक स्वादानुसार 1 छोटा चम्मच तेल (आटे के लिए)  सेंकने के लिए थोड़ा घी या तेल अनुमानित कैलोरी प्रति परांठा (मध्यम आकार): लगभग 180–220 kcal (घी या तेल की मात्रा के अनुसार) ऐसे बनाएं मोरिंगा परांठा एक बाउल में गेहूं का आटा, बारीक कटी मोरिंगा की पत्तियां, हरी मिर्च, अजवाइन, हल्दी और नमक मिलाएं। इसमें थोड़ा तेल और जरूरत के अनुसार पानी डालकर नरम आटा गूंध लें। आटे को 10 मिनट ढककर रखें। फिर लोई बनाकर परांठा बेलें और गर्म तवे पर दोनों तरफ हल्का घी या तेल लगाकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। सेहत के फायदे   विटामिन A, C और B6 का अच्छा स्रोत आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर  इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में सहायक  पाचन और आंतों की सेहत के लिए लाभदायक  हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देने में मददगार लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक किसके साथ करें सर्व? दही हरी चटनी अचार रायता मसाला चाय निष्कर्ष :- अगर आप रोजाना के नाश्ते में पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प तलाश रहे हैं, तो मोरिंगा परांठा जरूर ट्राई करें। यह कम समय में बनने वाली हेल्दी रेसिपी है, जो स्वाद के साथ शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर भी प्रदान करती है।  

anmol जुलाई 14, 2026 0
Healthy high-protein yogurt bowl with oats, fruits, chia seeds and nuts to support smoking cessation diet.
सिगरेट छोड़ना चाहते हैं? रोजाना खाएं ये हाई-प्रोटीन हेल्दी बाउल, निकोटीन क्रेविंग कंट्रोल करने में मिल सकती है मदद

Healthy Diet For Smoking Cessation: अगर आप धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो सही खानपान आपकी इस यात्रा को थोड़ा आसान बना सकता है। हालांकि कोई भी एक रेसिपी या खाद्य पदार्थ अकेले सिगरेट की लत नहीं छुड़ा सकता, लेकिन हाई-प्रोटीन, फाइबर और विटामिन-सी से भरपूर डाइट निकोटीन की क्रेविंग को मैनेज करने और शरीर को बेहतर पोषण देने में मदद कर सकती है। धूम्रपान छोड़ने के दौरान क्यों जरूरी है सही डाइट? सिगरेट छोड़ने की शुरुआत में कई लोगों को बार-बार भूख लगना, चिड़चिड़ापन और कुछ खाने की इच्छा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पौष्टिक और संतुलित भोजन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है और अनहेल्दी स्नैकिंग की आदत भी कम हो सकती है। ट्राई करें हाई-प्रोटीन एंटी-क्रेविंग बाउल यह आसान रेसिपी शरीर को प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट्स देने के साथ लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकती है। आवश्यक सामग्री 1 कप दही (लो-फैट या ग्रीक योगर्ट) 3–4 बड़े चम्मच ओट्स 1 छोटा केला (कटा हुआ) 1 छोटा सेब (कटा हुआ) 1 बड़ा चम्मच चिया सीड्स 1 बड़ा चम्मच अलसी का पाउडर 5–6 बादाम (कटे हुए) 1 छोटा चम्मच कद्दू के बीज दालचीनी पाउडर (चुटकी भर) बनाने की विधि एक बाउल में दही लें और उसमें ओट्स मिलाएं। अब कटे हुए फल, चिया सीड्स, अलसी, बादाम और कद्दू के बीज डालें। ऊपर से दालचीनी पाउडर छिड़ककर अच्छी तरह मिलाएं। इसे नाश्ते या शाम के हेल्दी स्नैक के रूप में खाया जा सकता है। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 320–360 kcal प्रोटीन: 16–20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 35–40 ग्राम फाइबर: 10–12 ग्राम हेल्दी फैट: 10–12 ग्राम संभावित फायदे लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। धूम्रपान छोड़ने के दौरान बार-बार कुछ खाने की इच्छा को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। शरीर को प्रोटीन, फाइबर और विटामिन-सी जैसे जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। एनर्जी लेवल बनाए रखने में मदद कर सकता है। संतुलित और हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन सकता है। ध्यान दें :कोई भी खाद्य पदार्थ या रेसिपी अकेले धूम्रपान की लत नहीं छुड़ा सकती। यदि आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं, तो संतुलित आहार के साथ डॉक्टर की सलाह, निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी, काउंसलिंग या अन्य प्रमाणित उपचार विकल्पों का सहारा लेना अधिक प्रभावी हो सकता है। 

anmol जुलाई 14, 2026 0
Bowl of fresh yogurt with chia seeds, flaxseeds, bottle gourd raita and jaggery for Vitamin B12 supportive diet.
Fitness Freaks Alert! हर उम्र के लोग दही के साथ खाएं ये 4 चीजें, Vitamin B12 सपोर्ट के लिए डाइट में जरूर करें शामिल

Vitamin B12 Rich Diet: अगर आप फिटनेस को लेकर गंभीर हैं या हर उम्र में एक्टिव और हेल्दी रहना चाहते हैं, तो दही के साथ ये 4 हेल्दी कॉम्बिनेशन आपकी डेली डाइट को ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए दही Vitamin B12 के प्राकृतिक स्रोतों में से एक माना जाता है। हर उम्र के Fitness Freaks के लिए क्यों जरूरी है Vitamin B12? आज की व्यस्त जिंदगी में सिर्फ एक्सरसाइज करना ही काफी नहीं है, बल्कि सही पोषण भी उतना ही जरूरी है। Vitamin B12 शरीर में रेड ब्लड सेल्स के निर्माण, नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज और ऊर्जा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर थकान, कमजोरी और शरीर में सुस्ती महसूस हो सकती है। अगर आप शाकाहारी हैं और अपनी डाइट को ज्यादा न्यूट्रिशियस बनाना चाहते हैं, तो दही के साथ ये 4 हेल्दी कॉम्बिनेशन ट्राई कर सकते हैं। 1. दही और लौकी का रायता उबली हुई लौकी में ताजा दही, भुना जीरा, काली मिर्च और हल्का तड़का मिलाकर हेल्दी रायता तैयार करें। यह पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है। 2. दही और चिया सीड्स भीगे हुए चिया सीड्स को दही में मिलाकर खाने से फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। 3. दही और अलसी के बीज भुनी और पिसी हुई अलसी को दही में मिलाने से हेल्दी फैट, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं, जो संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। 4. दही और गुड़ अगर मीठा पसंद है, तो चीनी की जगह थोड़ी मात्रा में गुड़ मिलाकर दही खाएं। इससे स्वाद के साथ कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व भी मिल सकते हैं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 140–180 kcal प्रोटीन: 6–8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 15–18 ग्राम फैट: 4–6 ग्राम कैल्शियम: अच्छी मात्रा में डाइट में शामिल करने के फायदे दही Vitamin B12 के प्राकृतिक डेयरी स्रोतों में शामिल है। शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है। प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को सपोर्ट करते हैं। हेल्दी और फिट लाइफस्टाइल बनाए रखने में मदद मिल सकती है। रोजमर्रा की संतुलित डाइट का अच्छा हिस्सा बन सकता है। ध्यान दें: Vitamin B12 की कमी की पुष्टि केवल ब्लड टेस्ट से होती है। यदि लगातार थकान, कमजोरी या अन्य लक्षण महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच और उचित सलाह जरूर लें।  

anmol जुलाई 13, 2026 0
Afghan Agriculture Minister Mawlawi Ataullah Omari meets Indian officials during his visit to India, highlighting growing cooperation between the two countries.
भारत दौरे पर अफगान मंत्री ओमारी बोले- 'भारत अपना देश लगता है, हमारा DNA एक है', रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत

नई दिल्ली: भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने भारत में मिले स्वागत की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही लोगों के बीच हैं। ओमारी ने कहा, "भारत मुझे अपना देश लगता है, हमारा DNA एक ही है।" उनके इस बयान को दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत में मिला गर्मजोशी भरा स्वागत एएनआई के अनुसार, मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने कहा कि यह उनकी भारत की पहली यात्रा है। उन्होंने भारत सरकार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारतीय जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें यहां बेहद सम्मान और अपनापन मिला। उनके मुताबिक, यह स्वागत केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान के लोगों के प्रति भारत की सद्भावना को दर्शाता है। अफगान जनता के लिए उम्मीद का संदेश ओमारी ने कहा कि भारत की मेहमाननवाजी अफगानिस्तान के लोगों के लिए उम्मीद का संदेश है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद विकास, सहयोग और बेहतर भविष्य की नई संभावनाएं खोल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मजबूत संबंध अफगानिस्तान के लिए लाभकारी साबित होंगे। इन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— कृषि और आधुनिक खेती सिंचाई एवं जल प्रबंधन पशुपालन और डेयरी विकास खाद्य सुरक्षा शिक्षा और क्षमता निर्माण स्वास्थ्य सेवाएं मानवीय सहायता और तकनीकी सहयोग भारत पहले भी अफगान किसानों के प्रशिक्षण, गेहूं और दवाइयों की आपूर्ति तथा कई विकास परियोजनाओं में सहयोग करता रहा है। पुराने रिश्तों को फिर मजबूत करने की कोशिश भारत और अफगानिस्तान के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों की गति धीमी हुई थी, लेकिन भारत ने मानवीय सहायता जारी रखी और काबुल में अपना तकनीकी मिशन भी दोबारा सक्रिय किया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौलवी अताउल्लाह ओमारी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और व्यावहारिक सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Fresh Rohu, Katla, Hilsa, Tuna and Sardine fish displayed as healthy protein choices for senior citizens.
60 की उम्र के बाद डाइट में शामिल करें ये 5 हेल्दी मछलियां, बढ़ेगी एनर्जी, मजबूत होंगे दिल, दिमाग और हड्डियां

Healthy Diet For Senior Citizens: रोहू, कतला, हिल्सा, टूना और सार्डिन जैसी मछलियां प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D और B12 का बेहतरीन स्रोत हैं। जानें इनके स्वास्थ्य लाभ, अनुमानित कैलोरी, हेल्दी कुकिंग टिप्स और सेवन का सही तरीका। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें बदलने लगती हैं। 60 वर्ष के बाद मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे में संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह में दो से तीन बार सीमित मात्रा में मछली का सेवन बुजुर्गों के लिए लाभदायक हो सकता है। मछली में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन D, विटामिन B12, आयोडीन और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हृदय, मस्तिष्क, हड्डियों और इम्यून सिस्टम के बेहतर कार्य में मदद कर सकते हैं। 1. रोहू (Rohu) अनुमानित कैलोरी: लगभग 170 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- रोहू को हल्दी, नमक, अदरक-लहसुन पेस्ट और नींबू के रस के साथ 20 मिनट मेरिनेट करें। इसके बाद नॉन-स्टिक पैन में हल्के सरसों के तेल के साथ दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें। फायदे :- हाई क्वालिटी प्रोटीन का अच्छा स्रोत हड्डियों और मांसपेशियों के लिए लाभदायक पाचन में अपेक्षाकृत हल्की दिल की सेहत को सपोर्ट करती है 2. कतला (Katla) अनुमानित कैलोरी: लगभग 160 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- हल्के मसालों में मेरिनेट करें। प्याज और टमाटर की हल्की ग्रेवी तैयार कर उसमें मछली को धीमी आंच पर 10–12 मिनट पकाएं। फायदे विटामिन B12 से भरपूर शरीर को ऊर्जा देने में सहायक मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मददगार प्रोटीन का अच्छा स्रोत 3. हिल्सा (Hilsa/इलिश) अनुमानित कैलोरी: लगभग 210 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :-  सरसों के पेस्ट, हल्दी और नमक के साथ मेरिनेट कर 15 मिनट तक स्टीम करें। फायदे ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभदायक आंखों और त्वचा की सेहत को सपोर्ट करती है 4. टूना (Tuna) अनुमानित कैलोरी: लगभग 132 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- नींबू, लहसुन, काली मिर्च और थोड़ा ऑलिव ऑयल लगाकर 8–10 मिनट तक ग्रिल करें। फायदे कम फैट और हाई प्रोटीन हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर विटामिन D और B12 का अच्छा स्रोत वजन नियंत्रित रखने में सहायक 5. सार्डिन (Sardine) अनुमानित कैलोरी: लगभग 200 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- हल्के मसालों के साथ मेरिनेट कर एयर फ्रायर, ग्रिल या स्टीम में पकाएं। फायदे कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है क्या मछली कैंसर से बचाती है? वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछलियां शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकती हैं। स्वस्थ आहार का हिस्सा होने के कारण ये कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, कोई भी मछली कैंसर की रोकथाम या इलाज की गारंटी नहीं देती। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। बुजुर्गों के लिए सबसे हेल्दी कुकिंग स्टाइल स्टीम फिश ग्रिल्ड फिश एयर फ्राइड फिश हल्की ग्रेवी वाली फिश करी कम तेल में पैन-सीयर फिश डीप फ्राई मछली का सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है। किसके साथ करें सर्व? ब्राउन राइस मल्टीग्रेन रोटी दलिया स्टीम सब्जियां हरी सलाद दाल का सूप नींबू हरी चटनी जरूरी कुकिंग टिप्स हमेशा ताजी मछली का चयन करें। पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करें। हल्दी और नींबू से मेरिनेट करने पर गंध कम होती है। कम तेल और हल्के मसालों का इस्तेमाल करें। सप्ताह में 2–3 बार 100–150 ग्राम मछली पर्याप्त मानी जाती है (व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार)। यदि फिश एलर्जी, किडनी रोग या कोई गंभीर बीमारी है तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। निष्कर्ष:- रोहू, कतला, हिल्सा, टूना और सार्डिन जैसी भारत में आसानी से मिलने वाली मछलियां बुजुर्गों के लिए प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D और B12 का बेहतरीन स्रोत हैं। इन्हें स्टीम, ग्रिल या कम तेल में पका कर खाने से बेहतर पोषण मिलता है और यह हृदय, हड्डियों, मांसपेशियों तथा संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।  

anmol जुलाई 11, 2026 0
Fermented bamboo shoot pickle served in a glass jar with spices, a healthy probiotic-rich monsoon recipe.
मानसून में ट्राई करें प्रोबायोटिक से भरपूर Bamboo Shoot Pickle, जानें क्यों बन रहा है हेल्दी डाइट का हिस्सा

  बारिश के मौसम में लोग अक्सर गरमा-गरम दाल-चावल, खिचड़ी, पराठे या सादा खाने के साथ कुछ चटपटा परोसना पसंद करते हैं। ऐसे में अगर आप पारंपरिक अचार से हटकर कोई हल्का और हेल्दी विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो फर्मेंटेड बांस की कोंपल (Bamboo Shoot) का अचार आपकी डाइट का हिस्सा बन सकता है। पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से लोकप्रिय यह पारंपरिक अचार अब देश के अन्य हिस्सों में भी तेजी से पसंद किया जा रहा है। इसका हल्का खट्टा स्वाद, कुरकुरा टेक्सचर और प्राकृतिक फर्मेंटेशन इसे सामान्य अचार से अलग बनाते हैं। खासकर मानसून के दौरान इसे दाल-चावल, खिचड़ी और रोटी के साथ परोसा जा सकता है। क्या होती है बांस की कोंपल? बांस की कोंपल (Bamboo Shoot) बांस के पौधे का कोमल और खाने योग्य हिस्सा होता है। इसका स्वाद हल्का मिट्टी जैसा और टेक्सचर कुरकुरा होता है। इसे नमक और चुनिंदा मसालों के साथ कुछ दिनों तक प्राकृतिक रूप से फर्मेंट किया जाता है। फर्मेंटेशन के दौरान इसमें लाभकारी बैक्टीरिया विकसित होते हैं, जो इसे प्राकृतिक प्रोबायोटिक फूड बनाते हैं। यही कारण है कि यह अचार स्वाद के साथ-साथ गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। साधारण अचार से क्यों है अलग? सामान्य अचारों में अक्सर तेल और सिरके की मात्रा अधिक होती है, जबकि बांस की कोंपल का फर्मेंटेड अचार कम तेल में तैयार किया जाता है। प्राकृतिक फर्मेंटेशन की वजह से यह हल्का माना जाता है और इसे पचाना भी अपेक्षाकृत आसान होता है। इसका हल्का खट्टा स्वाद भारतीय भोजन के साथ आसानी से मेल खाता है और मानसून में रोजमर्रा के खाने का स्वाद बढ़ा सकता है। बांस की कोंपल का अचार बनाने के लिए सामग्री 500 ग्राम ताजी बांस की कोंपल 2 बड़े चम्मच नमक 1 छोटा चम्मच हल्दी 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 छोटा चम्मच सरसों के दाने ½ छोटा चम्मच मेथी दाना 2–3 हरी मिर्च (वैकल्पिक) 1–2 बड़े चम्मच सरसों का तेल (वैकल्पिक) ऐसे बनाएं फर्मेंटेड Bamboo Shoot Pickle सबसे पहले बांस की कोंपलों को अच्छी तरह धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें और हल्का उबाल लें। पानी पूरी तरह निकालने के बाद इन्हें नमक और मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाएं। अब इस मिश्रण को साफ और सूखे कांच के जार में भर दें। चाहें तो ऊपर से थोड़ा सरसों का तेल डाल सकते हैं। जार को 2–3 दिनों तक कमरे के तापमान पर रखें ताकि प्राकृतिक फर्मेंटेशन हो सके। इसके बाद अचार खाने के लिए तैयार हो जाएगा। परफेक्ट अचार बनाने की कुकिंग टिप्स हमेशा ताजी और कोमल बांस की कोंपलों का इस्तेमाल करें। कांच के साफ और सूखे जार का ही उपयोग करें। गीले चम्मच से अचार न निकालें। सीधी धूप से बचाकर रखें। स्वाद के अनुसार मसालों की मात्रा कम या ज्यादा कर सकते हैं। किसके साथ करें सर्व? दाल-चावल खिचड़ी पराठा रोटी सादा चावल मिलेट रोटी प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 40–60 kcal कार्बोहाइड्रेट: 6–8 ग्राम प्रोटीन: 1–2 ग्राम फैट: 1–2 ग्राम फाइबर: 2–3 ग्राम संभावित फायदे प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत। पाचन और गट हेल्थ को सपोर्ट करने में मददगार। कम कैलोरी वाला विकल्प। फाइबर से भरपूर। भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ हल्का महसूस कराने में सहायक। मानसून के मौसम में दाल-चावल और खिचड़ी के साथ बेहतरीन कॉम्बिनेशन। ध्यान दें: यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर, नमक सीमित करने की सलाह या फर्मेंटेड फूड से एलर्जी है, तो इसका सेवन सीमित मात्रा में करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।  

anmol जुलाई 8, 2026 0
Fresh sliced dragon fruit served in a bowl, highlighting its vibrant color and nutritional health benefits.
Dragon Fruit Benefits: रोजाना ड्रैगन फ्रूट खाने से मिल सकते हैं ये 7 फायदे, जानें कितना खाना है सही

ड्रैगन फ्रूट अपनी आकर्षक गुलाबी रंगत और अनोखे स्वाद के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह केवल देखने में ही खूबसूरत नहीं, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें फाइबर, विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और पानी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर स्वास्थ्य को कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी भी एक फल को चमत्कारी इलाज नहीं माना जाना चाहिए। इसके फायदे संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ ही बेहतर रूप से मिलते हैं। 1. शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद ड्रैगन फ्रूट में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिल सकती है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम मात्रा में मौजूद होते हैं। 2. पाचन और आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद इसमें मौजूद फाइबर प्रीबायोटिक की तरह काम करता है, जो आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देने में मदद कर सकता है। इससे पाचन बेहतर रहने और कब्ज जैसी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। 3. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ड्रैगन फ्रूट में बेटालेन्स, फ्लेवोनॉयड्स और अन्य एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने और कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं। 4. त्वचा की सेहत को मिल सकता है समर्थन विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा में कोलेजन बनने की प्रक्रिया को समर्थन देते हैं। साथ ही, पर्याप्त पानी त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है, जिससे त्वचा स्वस्थ दिख सकती है। 5. ब्लड शुगर संतुलित रखने में सहायक ड्रैगन फ्रूट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर ग्लूकोज के अवशोषण की गति को धीमा करने में मदद कर सकता है। हालांकि, मधुमेह के मरीज इसे दवा का विकल्प न मानें और डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही सेवन करें। 6. आयरन के अवशोषण में मदद ड्रैगन फ्रूट में मौजूद विटामिन C शरीर को पौधों से मिलने वाले आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद कर सकता है। इसे दाल, हरी पत्तेदार सब्जियों या बीन्स जैसे आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ खाया जा सकता है। 7. रोग प्रतिरोधक क्षमता को मिल सकता है समर्थन फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सामान्य रूप से बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर यह लंबे समय तक स्वास्थ्य को समर्थन दे सकता है। एक दिन में कितना ड्रैगन फ्रूट खाना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए 150 से 200 ग्राम (लगभग एक कप) ड्रैगन फ्रूट प्रतिदिन संतुलित आहार के हिस्से के रूप में खाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी या पाचन संबंधी समस्या है, तो इसे धीरे-धीरे आहार में शामिल करना बेहतर माना जाता है। इन बातों का रखें ध्यान ड्रैगन फ्रूट वजन घटाने या शरीर को "डिटॉक्स" करने का कोई चमत्कारी उपाय नहीं है। इसे किसी बीमारी की दवा का विकल्प न समझें। अधिकतम लाभ के लिए इसे संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ शामिल करें।

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Two boiled eggs served with a healthy breakfast, highlighting the nutritional benefits of eating eggs daily for overall wellness.
30 दिन तक रोज़ 2 अंडे खाने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं? जानिए डाइटिशियन गिन्नी कालरा की सलाह

नई दिल्ली: अंडे को दुनिया के सबसे संपूर्ण और पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट्स और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों और कार्यों को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि संतुलित आहार के साथ लगातार 30 दिनों तक रोज़ाना दो अंडे खाए जाएं, तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। डाइटिशियन गिन्नी कालरा के अनुसार, अंडे कोई जादुई भोजन नहीं हैं, लेकिन नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है, जिससे मांसपेशियों, दिमाग, आंखों, हड्डियों और त्वचा की सेहत में सुधार देखने को मिल सकता है। मसल्स होंगे मजबूत, रिकवरी होगी तेज दो अंडों से लगभग 12–13 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी नौ अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, जो मांसपेशियों के विकास, टिश्यू रिपेयर और रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित व्यायाम करने वाले, बुजुर्ग और बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है। देर तक नहीं लगेगी भूख अंडे में मौजूद प्रोटीन और हेल्दी फैट्स धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है। अगर नाश्ते में दो अंडे शामिल किए जाएं तो बार-बार स्नैकिंग की आदत कम हो सकती है और वजन नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। दिमाग रहेगा अधिक सक्रिय अंडों में कोलीन (Choline) नामक पोषक तत्व पाया जाता है, जो मस्तिष्क, याददाश्त और नर्वस सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। यह एसिटाइलकोलीन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जिससे सीखने की क्षमता, एकाग्रता और मानसिक सतर्कता बेहतर हो सकती है। आंखों की सेहत को मिलेगा फायदा अंडे में मौजूद ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट आंखों की रेटिना की सुरक्षा करते हैं। ये बढ़ती उम्र और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक माने जाते हैं। हड्डियां होंगी मजबूत अंडे प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी का स्रोत हैं, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इससे हड्डियों और दांतों की मजबूती के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी समर्थन मिलता है। हालांकि, केवल अंडों से पूरी विटामिन-डी की आवश्यकता पूरी नहीं होती, लेकिन यह कुल पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। त्वचा, बाल और नाखूनों में दिख सकता है सुधार अंडों में बायोटिन, सेलेनियम, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स और प्रोटीन मौजूद होते हैं, जो बालों, त्वचा और नाखूनों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। संतुलित आहार के साथ नियमित सेवन करने पर कुछ सप्ताह में सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। क्या अंडे खाने से बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल? यह सबसे आम सवालों में से एक है। हाल के वर्षों में हुई कई रिसर्च बताती हैं कि अधिकांश स्वस्थ लोगों में सीमित मात्रा में अंडे खाने से हृदय रोग का खतरा नहीं बढ़ता। शरीर स्वयं कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को नियंत्रित करता है और अंडों से मिलने वाला डाइटरी कोलेस्ट्रॉल पहले की तुलना में कम प्रभाव डालता है। हालांकि, जिन लोगों को अनियंत्रित डायबिटीज, फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया या पहले से हृदय संबंधी गंभीर बीमारी है, उन्हें नियमित रूप से अंडे खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। क्या रोज़ दो अंडे पर्याप्त हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए रोज़ाना दो अंडे पर्याप्त माने जाते हैं। इससे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और हेल्दी फैट्स की संतुलित मात्रा मिल जाती है। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए अंडों के साथ फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल करना जरूरी है। ध्यान रहे कि 30 दिनों में कोई चमत्कारी परिवर्तन नहीं होता, लेकिन नियमित और संतुलित जीवनशैली के साथ दो अंडों का सेवन शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में निश्चित रूप से सहायक हो सकता है।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Different cooking oils including mustard, coconut, sesame, sunflower, and palm oil displayed with healthy food ingredients.
सिर्फ सरसों के तेल में खाना बनाना सही नहीं! ICMR ने बताया कौन-सा तेल कब करें इस्तेमाल, पाम ऑयल को भी बताया फायदेमंद

भारतीय रसोई में खाना बनाने के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। उत्तर भारत में जहां सरसों का तेल सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, वहीं दक्षिण भारत में नारियल तेल का उपयोग अधिक होता है। लेकिन अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने सलाह दी है कि लंबे समय तक सिर्फ एक ही प्रकार के तेल का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प नहीं है। ICMR की नई डाइटरी गाइडलाइंस के मुताबिक, बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाना बनाने में समय-समय पर अलग-अलग खाद्य तेलों का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के आवश्यक फैटी एसिड और पोषक तत्व मिलते हैं। क्यों बदल-बदलकर इस्तेमाल करना चाहिए कुकिंग ऑयल? ICMR और FSSAI के अनुसार, कोई भी एक कुकिंग ऑयल सभी जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध नहीं कराता। हर खाद्य तेल की अपनी अलग पोषण संबंधी विशेषताएं होती हैं। ऐसे में यदि लोग अलग-अलग तेलों का संतुलित उपयोग करते हैं, तो शरीर को विभिन्न प्रकार के हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्दी डाइट का मतलब तेल पूरी तरह छोड़ देना नहीं, बल्कि सही मात्रा और सही तरीके से उसका इस्तेमाल करना है। ICMR की हेल्दी ऑयल गाइडलाइन स्वस्थ रहने के लिए ICMR ने कुछ आसान सुझाव दिए हैं— एक ही तेल का लगातार इस्तेमाल करने के बजाय समय-समय पर तेल बदलें। तेल का उपयोग सीमित मात्रा में करें। एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा गर्म करने से बचें। ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। डीप फ्राई की बजाय स्टीम, ग्रिल या रोस्टेड भोजन को प्राथमिकता दें। कौन-सा तेल किसलिए फायदेमंद है? सरसों का तेल सरसों का तेल मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड और ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है और इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं। तिल का तेल तिल के तेल में ओमेगा-6 फैटी एसिड और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। यह शरीर में सूजन कम करने और कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद कर सकता है। नारियल तेल नारियल तेल में मीडियम चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs) पाए जाते हैं, जो शरीर को जल्दी ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। हालांकि इसका सेवन भी सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। पाम ऑयल ICMR के अनुसार, पाम ऑयल में टोकोफेरॉल्स, टोकोट्रिएनोल्स (विटामिन E के रूप) और कैरोटेनॉयड्स जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। संतुलित मात्रा में उपयोग करने पर यह भी आहार का हिस्सा हो सकता है। हालांकि इसका अत्यधिक सेवन किसी भी अन्य तेल की तरह उचित नहीं माना जाता। सूरजमुखी का तेल सूरजमुखी का तेल विटामिन-E और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड से भरपूर होता है। यह त्वचा और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। तेल की मात्रा कैसे करें कम? FSSAI के मुताबिक, यदि आप रोजाना इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा में लगभग 10 प्रतिशत की कमी कर दें, तो इससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा— डीप फ्राइड फूड्स कम खाएं। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। घर में कम तेल वाले भोजन को प्राथमिकता दें। भोजन में फल, सब्जियां और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएं। क्या है विशेषज्ञों की सलाह? विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए किसी एक तेल को 'सबसे बेहतर' मानने के बजाय संतुलित और विविधतापूर्ण आहार अपनाना ज्यादा जरूरी है। अलग-अलग कुकिंग ऑयल का सीमित मात्रा में उपयोग, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि मिलकर हृदय और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

surbhi जून 29, 2026 0
Fresh guava, avocado, jackfruit, blackberries and apricots displayed as healthy fruits rich in nutrients and protein.
कभी सोचा नहीं होगा, अमरूद से भी मिलता है प्रोटीन! जानिए ताकत बढ़ाने वाले 5 फलों के बारे में

आज के दौर में फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ी है। ऐसे में प्रोटीन को शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में गिना जाता है। मांसपेशियों की मजबूती से लेकर इम्यून सिस्टम, त्वचा, बाल और शरीर की मरम्मत तक, प्रोटीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, शाकाहारी और वीगन डाइट अपनाने वाले लोगों के सामने अक्सर यह चुनौती रहती है कि वे अपनी दैनिक प्रोटीन जरूरत को कैसे पूरा करें। अधिकतर लोग दाल, दूध, पनीर या सोया को ही प्रोटीन का मुख्य स्रोत मानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ फलों में भी प्रोटीन पाया जाता है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की क्लिनिकल डाइटीशियन फियोना संपत के अनुसार, कुछ फल ऐसे हैं जो विटामिन, मिनरल्स और फाइबर के साथ-साथ शरीर को अतिरिक्त प्रोटीन भी प्रदान करते हैं। 1. अमरूद: विटामिन C के साथ प्रोटीन का भी खजाना अमरूद को आमतौर पर विटामिन C का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन इसमें प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। लगभग 150 ग्राम (एक कप) अमरूद में करीब 2 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर होते हैं। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करता है। नियमित सेवन से ब्लड शुगर और हृदय स्वास्थ्य को भी लाभ मिल सकता है। 2. एवोकाडो: हेल्दी फैट और प्रोटीन का शानदार कॉम्बिनेशन एवोकाडो बाकी फलों की तुलना में थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन पोषण के मामले में बेहद समृद्ध माना जाता है। एक मीडियम एवोकाडो में लगभग 4 से 5 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इसमें हेल्दी मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स मौजूद होते हैं। पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर यह फल लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है। ब्लड प्रेशर और डाइजेशन को बेहतर रखने में मदद करता है। 3. कटहल: वीगन डाइट वालों की पसंद हाल के वर्षों में कटहल यानी जैकफ्रूट की लोकप्रियता काफी बढ़ी है। एक कप कच्चे कटहल में लगभग 3 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसमें पोटैशियम और फाइबर भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। यह शरीर को ऊर्जा देने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक माना जाता है। गट हेल्थ को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। 4. ब्लैकबेरी: छोटा फल, बड़े फायदे ब्लैकबेरी केवल स्वाद में ही नहीं, पोषण के मामले में भी काफी फायदेमंद है। 150 ग्राम ब्लैकबेरी में करीब 1.5 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें एंथोसायनिन्स नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। यह सूजन कम करने, दिमागी कार्यक्षमता बढ़ाने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। विटामिन C की मौजूदगी त्वचा और इम्यूनिटी के लिए भी लाभकारी है। 5. खुबानी (Apricot): आंखों और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद खुबानी पोषण से भरपूर फल है, जिसमें प्रोटीन के साथ कई जरूरी विटामिन भी मौजूद होते हैं। 150 ग्राम खुबानी में लगभग 1.5 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इसमें विटामिन A, विटामिन C और पोटैशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह आंखों की सेहत, मांसपेशियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए लाभकारी माना जाता है। क्या फल प्रोटीन का पूरा विकल्प हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, फल कभी भी दाल, डेयरी उत्पाद, अंडे, मछली या लीन मीट जैसे मुख्य प्रोटीन स्रोतों का विकल्प नहीं बन सकते। लेकिन इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाने से शरीर को अतिरिक्त पोषण, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और थोड़ी मात्रा में प्रोटीन जरूर मिलता है। इसलिए अगर आप अपनी डाइट को और ज्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो इन फलों को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।  

surbhi जून 20, 2026 0
Fresh watermelon slices served in summer, known for supporting digestion and gut health.
गर्मियों में गट हेल्थ के लिए वरदान है तरबूज, पाचन सुधारने के साथ देता है कई बड़े फायदे

गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।  

surbhi जून 9, 2026 0
Assortment of fiber-rich foods including fruits, vegetables, legumes, seeds and whole grains
फाइबर से भरपूर 13 सुपरफूड्स: बेहतर पाचन, वजन नियंत्रण और स्वस्थ आंतों के लिए डाइट में करें शामिल

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग प्रोटीन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन फाइबर को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग रोजाना जितना फाइबर लेना चाहिए, उससे काफी कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं। फाइबर न सिर्फ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है, बल्कि दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करने में मदद करता है। फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे शरीर में सूजन कम होती है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। फाइबर क्यों है जरूरी? पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है कब्ज की समस्या कम करता है ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है वजन नियंत्रण में सहायक होता है हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है विशेषज्ञों के मुताबिक एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। फाइबर से भरपूर 13 बेहतरीन खाद्य पदार्थ 1. हरी मटर (Green Peas) उबली हुई एक कप मटर में लगभग 9 ग्राम फाइबर और 8.5 ग्राम प्रोटीन होता है। यह शाकाहारियों के लिए शानदार विकल्प है। 2. नाशपाती (Pear) एक मध्यम आकार की नाशपाती में 6 ग्राम से अधिक फाइबर होता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज से राहत देने में मदद कर सकती है। 3. सेब (Apple) सेब को छिलके सहित खाने से अधिक फाइबर मिलता है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। 4. मसूर दाल (Lentils) एक कप पकी हुई मसूर दाल में लगभग 15.5 ग्राम फाइबर और 18 ग्राम प्रोटीन होता है। 5. प्रीबायोटिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ लहसुन, प्याज, लीक, शतावरी (Asparagus), आर्टिचोक और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थ आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। 6. राई ब्रेड (Pumpernickel Rye Bread) इसकी एक स्लाइस में लगभग 6 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। 7. ब्लैक बीन्स फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत। यह आंतों के माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में मदद करता है। 8. रास्पबेरी (Raspberries) फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल पाचन और इम्युनिटी दोनों के लिए लाभकारी है। 9. साबुत अनाज (Whole Grains) क्विनोआ, जौ, बाजरा, बकव्हीट और स्पेल्ट जैसे साबुत अनाज फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत हैं। 10. एवोकाडो (Avocado) स्वस्थ वसा और फाइबर से भरपूर एवोकाडो लंबे समय तक पेट भरा रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है। 11. चिया सीड्स (Chia Seeds) 100 ग्राम चिया सीड्स में लगभग 34 ग्राम फाइबर पाया जाता है। यह वजन नियंत्रण और पाचन दोनों के लिए फायदेमंद है। 12. क्रूसिफेरस सब्जियां ब्रोकली, फूलगोभी, पत्ता गोभी, केल और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्जियां घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर से भरपूर होती हैं। 13. पॉपकॉर्न बिना ज्यादा तेल के बनाया गया पॉपकॉर्न एक हेल्दी होल ग्रेन स्नैक है और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। क्या फाइबर सप्लीमेंट लेना चाहिए? अगर आपकी डाइट में पर्याप्त फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल नहीं हैं, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर फाइबर सप्लीमेंट लिया जा सकता है। हालांकि प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला फाइबर हमेशा बेहतर माना जाता है।  

surbhi जून 5, 2026 0
Chia seeds and sabja seeds in bowls highlighting their health benefits for digestion and weight loss
चिया सीड्स या सब्जा के बीज: एसिडिटी, कब्ज और वजन घटाने के लिए कौन है बेहतर?

आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों के बीच चिया सीड्स और सब्जा के बीज (तुलसी के बीज) काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। दोनों ही फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इनके फायदे और उपयोग अलग-अलग हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एसिडिटी, कब्ज, वजन घटाने या फिटनेस के लिए आखिर कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर है? चिया और सब्जा में क्या है अंतर? चिया सीड्स चिया सीड्स Salvia Hispanica पौधे से प्राप्त होते हैं और इनमें भरपूर मात्रा में: ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रोटीन कैल्शियम मैग्नीशियम फाइबर पाया जाता है। ये शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने और मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। सब्जा सीड्स सब्जा या तुलसी के बीज पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा रहे हैं। इनमें: भरपूर फाइबर एंटीऑक्सीडेंट कम कैलोरी पाई जाती है। इन्हें विशेष रूप से शरीर को ठंडक पहुंचाने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। एसिडिटी और कब्ज में कौन ज्यादा फायदेमंद? दोनों बीज पानी में भिगोने पर जेल जैसी परत बना लेते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करती है। सब्जा सीड्स एसिडिटी, पेट की जलन, गैस और कब्ज से राहत दिलाने के लिए अधिक प्रभावी माने जाते हैं। चिया सीड्स गट हेल्थ सुधारने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। अगर आपकी मुख्य समस्या एसिडिटी या कब्ज है, तो सब्जा के बीज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वजन घटाने में कौन मददगार? दोनों ही बीज फाइबर से भरपूर होते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। चिया सीड्स में प्रोटीन और हेल्दी फैट अधिक होते हैं, जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। सब्जा सीड्स कम कैलोरी वाले होते हैं, इसलिए कैलोरी कंट्रोल करने वालों के लिए उपयोगी हैं। वजन घटाने के लिए दोनों अच्छे हैं, लेकिन कम कैलोरी डाइट में सब्जा और हाई-प्रोटीन डाइट में चिया अधिक फायदेमंद हो सकता है। शरीर को ठंडक पहुंचाने में कौन आगे? गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सब्जा के बीज लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। शरबत, नींबू पानी और फालूदा में सब्जा का उपयोग आम है। शरीर की गर्मी कम करने और हाइड्रेशन बनाए रखने में सब्जा अधिक प्रभावी माना जाता है। फिटनेस और जिम करने वालों के लिए क्या बेहतर? अगर आपका लक्ष्य फिटनेस, मसल रिकवरी और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखना है, तो: चिया सीड्स में मौजूद प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक लाभदायक हैं। नियमित एक्सरसाइज करने वालों के लिए चिया बेहतर विकल्प माना जाता है। सेवन का सही तरीका सब्जा सीड्स 5 से 10 मिनट पानी में भिगोएं। शरबत, दूध, फालूदा या नींबू पानी में मिलाकर सेवन करें। चिया सीड्स कम से कम 30 मिनट पानी में भिगोएं। स्मूदी, दही, ओट्स, सलाद या हेल्दी ड्रिंक्स में मिलाएं।

surbhi जून 5, 2026 0
Fresh watermelon slices highlighting heart health benefits and hydration properties in summer diet
दिल को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है तरबूज, नई रिसर्च में सामने आए कई बड़े फायदे

गर्मियों का पसंदीदा फल सिर्फ स्वाद ही नहीं, दिल की सेहत भी सुधार सकता है गर्मियों में तरबूज खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है। पानी से भरपूर और मीठा स्वाद वाला यह फल शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। अब हालिया शोधों में यह बात सामने आई है कि तरबूज का नियमित सेवन हृदय रोगों के खतरे को कम करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज में मौजूद कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ रक्तचाप और रक्त संचार को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। दिल की सेहत के लिए क्यों फायदेमंद है तरबूज? हालिया अध्ययनों के अनुसार तरबूज में एल-सिट्रुलीन (L-Citrulline) नामक अमीनो एसिड पाया जाता है। यह तत्व शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे रक्त वाहिकाएं बेहतर तरीके से काम कर पाती हैं और रक्त प्रवाह सुचारु बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एल-सिट्रुलीन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और धमनियों की कठोरता कम करने में भी मददगार हो सकता है। यही कारण है कि तरबूज को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी फल माना जा रहा है। पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से तरबूज का सेवन करते हैं, उनके शरीर में कई आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बेहतर पाई जाती है। इनमें शामिल हैं: फाइबर पोटैशियम मैग्नीशियम विटामिन C विटामिन A लाइकोपीन कैरोटेनॉयड्स ये सभी पोषक तत्व शरीर को स्वस्थ रखने, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनाने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शरीर को रखता है हाइड्रेटेड तरबूज का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है। पर्याप्त हाइड्रेशन हृदय, किडनी और पाचन तंत्र के बेहतर कामकाज के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। तरबूज खाने के अन्य फायदे विशेषज्ञों के अनुसार तरबूज का सेवन कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी दे सकता है: रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने में सहायक मांसपेशियों के दर्द में राहत पाचन तंत्र को बेहतर बनाना त्वचा की सेहत सुधारना सूजन कम करने में मदद 100 ग्राम तरबूज में क्या-क्या होता है? 100 ग्राम ताजे तरबूज में लगभग: कैलोरी: 30 पानी: 91.4 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 7.55 ग्राम प्रोटीन: 0.61 ग्राम फाइबर: 0.4 ग्राम शुगर: 6.2 ग्राम फैट: 0.2 ग्राम डाइट में ऐसे करें शामिल अगर आप तरबूज के फायदे बढ़ाना चाहते हैं, तो इसे सिर्फ फल के रूप में खाने के अलावा कई अन्य तरीकों से भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं: फ्रूट स्मूदी में मिलाकर फेटा चीज और पुदीने के साथ सलाद में ग्रीक योगर्ट के साथ फ्रूट स्क्यूअर्स बनाकर तरबूज पॉप्सिकल तैयार करके ठंडा गजपाचो सूप बनाकर संतुलित आहार भी है जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज दिल की सेहत के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन केवल एक फल खाने से हृदय रोगों का खतरा पूरी तरह कम नहीं हो सकता। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।  

surbhi जून 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0