स्वास्थ्य

5 Fruits That Can Add Protein to Your Diet

कभी सोचा नहीं होगा, अमरूद से भी मिलता है प्रोटीन! जानिए ताकत बढ़ाने वाले 5 फलों के बारे में

surbhi जून 20, 2026 0
Fresh guava, avocado, jackfruit, blackberries and apricots displayed as healthy fruits rich in nutrients and protein.
Protein Rich Fruits for a Healthy Diet

आज के दौर में फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ी है। ऐसे में प्रोटीन को शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में गिना जाता है। मांसपेशियों की मजबूती से लेकर इम्यून सिस्टम, त्वचा, बाल और शरीर की मरम्मत तक, प्रोटीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

हालांकि, शाकाहारी और वीगन डाइट अपनाने वाले लोगों के सामने अक्सर यह चुनौती रहती है कि वे अपनी दैनिक प्रोटीन जरूरत को कैसे पूरा करें। अधिकतर लोग दाल, दूध, पनीर या सोया को ही प्रोटीन का मुख्य स्रोत मानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ फलों में भी प्रोटीन पाया जाता है।

कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की क्लिनिकल डाइटीशियन फियोना संपत के अनुसार, कुछ फल ऐसे हैं जो विटामिन, मिनरल्स और फाइबर के साथ-साथ शरीर को अतिरिक्त प्रोटीन भी प्रदान करते हैं।

1. अमरूद: विटामिन C के साथ प्रोटीन का भी खजाना

अमरूद को आमतौर पर विटामिन C का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन इसमें प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है।

  • लगभग 150 ग्राम (एक कप) अमरूद में करीब 2 ग्राम प्रोटीन होता है।
  • इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर होते हैं।
  • यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करता है।
  • नियमित सेवन से ब्लड शुगर और हृदय स्वास्थ्य को भी लाभ मिल सकता है।

2. एवोकाडो: हेल्दी फैट और प्रोटीन का शानदार कॉम्बिनेशन

एवोकाडो बाकी फलों की तुलना में थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन पोषण के मामले में बेहद समृद्ध माना जाता है।

  • एक मीडियम एवोकाडो में लगभग 4 से 5 ग्राम प्रोटीन मिलता है।
  • इसमें हेल्दी मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स मौजूद होते हैं।
  • पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर यह फल लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है।
  • ब्लड प्रेशर और डाइजेशन को बेहतर रखने में मदद करता है।

3. कटहल: वीगन डाइट वालों की पसंद

हाल के वर्षों में कटहल यानी जैकफ्रूट की लोकप्रियता काफी बढ़ी है।

  • एक कप कच्चे कटहल में लगभग 3 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।
  • इसमें पोटैशियम और फाइबर भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • यह शरीर को ऊर्जा देने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक माना जाता है।
  • गट हेल्थ को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।

4. ब्लैकबेरी: छोटा फल, बड़े फायदे

ब्लैकबेरी केवल स्वाद में ही नहीं, पोषण के मामले में भी काफी फायदेमंद है।

  • 150 ग्राम ब्लैकबेरी में करीब 1.5 ग्राम प्रोटीन होता है।
  • इसमें एंथोसायनिन्स नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं।
  • यह सूजन कम करने, दिमागी कार्यक्षमता बढ़ाने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • विटामिन C की मौजूदगी त्वचा और इम्यूनिटी के लिए भी लाभकारी है।

5. खुबानी (Apricot): आंखों और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद

खुबानी पोषण से भरपूर फल है, जिसमें प्रोटीन के साथ कई जरूरी विटामिन भी मौजूद होते हैं।

  • 150 ग्राम खुबानी में लगभग 1.5 ग्राम प्रोटीन मिलता है।
  • इसमें विटामिन A, विटामिन C और पोटैशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है।
  • यह आंखों की सेहत, मांसपेशियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए लाभकारी माना जाता है।

क्या फल प्रोटीन का पूरा विकल्प हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, फल कभी भी दाल, डेयरी उत्पाद, अंडे, मछली या लीन मीट जैसे मुख्य प्रोटीन स्रोतों का विकल्प नहीं बन सकते। लेकिन इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाने से शरीर को अतिरिक्त पोषण, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और थोड़ी मात्रा में प्रोटीन जरूर मिलता है।

इसलिए अगर आप अपनी डाइट को और ज्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो इन फलों को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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क्या कैंसर के फैलाव को रोक सकती है वियाग्रा? नई स्टडी में सामने आए उम्मीद जगाने वाले संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (Erectile Dysfunction) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा वियाग्रा (Viagra) अब कैंसर रिसर्च में भी चर्चा का विषय बन गई है। हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि वियाग्रा का सक्रिय तत्व सिल्डेनाफिल (Sildenafil) कैंसर कोशिकाओं के शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने यानी मेटास्टेसिस (Metastasis) की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकता है। यह अध्ययन इजराइल के वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस और क्लैलिट हेल्थ सर्विसेज के वैज्ञानिकों ने किया है। हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह शुरुआती शोध है और इसे कैंसर का नया इलाज नहीं माना जाना चाहिए।   कैसे काम कर सकता है सिल्डेनाफिल?   शोध के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं शरीर में फैलने के लिए काफी हद तक कोलेस्ट्रॉल पर निर्भर रहती हैं। सिल्डेनाफिल कोशिकाओं के भीतर कोलेस्ट्रॉल पहुंचाने वाले प्रोटीन की गतिविधि को बाधित करता है। इससे कैंसर कोशिकाओं को अपनी बाहरी झिल्ली (मेम्ब्रेन) बनाए रखने के लिए पर्याप्त कोलेस्ट्रॉल नहीं मिल पाता और उनका दूसरे अंगों तक फैलना कठिन हो सकता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि यदि सिल्डेनाफिल को स्टैटिन (कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा) के साथ दिया जाए तो इसका प्रभाव और बेहतर हो सकता है, क्योंकि यह संयोजन कैंसर कोशिकाओं को नया कोलेस्ट्रॉल बनाने और उपलब्ध कोलेस्ट्रॉल का उपयोग करने से भी रोक सकता है।   50 लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण, लेकिन निष्कर्ष अभी अंतिम नहीं   शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में कैंसर कोशिकाओं और चूहों पर अध्ययन करने के अलावा करीब 50 लाख लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिसमें 40 हजार से अधिक कैंसर मरीज भी शामिल थे। अध्ययन में पाया गया कि जिन पुरुषों ने कैंसर का पता चलने से पहले सिल्डेनाफिल का इस्तेमाल किया था, उनमें जीवित रहने की दर अपेक्षाकृत बेहतर थी। जिन मरीजों ने सिल्डेनाफिल के साथ स्टैटिन भी ली थी, उनमें परिणाम और अधिक सकारात्मक दिखाई दिए। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि इस अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि बेहतर परिणाम केवल वियाग्रा की वजह से ही मिले।   विशेषज्ञों की सलाह- डॉक्टर की सलाह के बिना न लें वियाग्रा   स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस शोध के नतीजे उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन इन्हें अभी कैंसर के उपचार के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। सिल्डेनाफिल को कैंसर के मानक इलाज का हिस्सा बनने से पहले बड़े स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल और अतिरिक्त वैज्ञानिक प्रमाणों की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि कैंसर की रोकथाम या इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह के बिना वियाग्रा का सेवन बिल्कुल न करें। फिलहाल कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई गई मानक चिकित्सा ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक का उद्देश्य माताओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों के अनुसार, मां का दूध शिशु के लिए सबसे संपूर्ण आहार है, जो पोषण के साथ-साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत करता है।   संतुलित आहार और पर्याप्त पानी है जरूरी     डॉक्टरों का कहना है कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर भोजन करना चाहिए। दूध, दही, दाल, हरी सब्जियां, अंडे, मेवे और मौसमी फलों के साथ रोजाना 2.5 से 3 लीटर पानी पीना भी जरूरी है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।     आराम, तनाव से दूरी और दवाओं में बरतें सावधानी     विशेषज्ञों के मुताबिक पर्याप्त नींद और तनावमुक्त रहना स्तनपान की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। साथ ही धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसका असर शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।     स्वच्छता और परिवार का सहयोग निभाता है अहम भूमिका     बच्चे को दूध पिलाने से पहले हाथ धोना और स्तनों की सामान्य साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार को भी मां को पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और भावनात्मक सहयोग देना चाहिए, ताकि वह बिना तनाव के शिशु की देखभाल कर सके।     मां और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद है स्तनपान     डॉक्टरों के अनुसार, स्तनपान से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है और उसका मानसिक व शारीरिक विकास बेहतर होता है। वहीं मां के लिए यह प्रसव के बाद रिकवरी में मददगार साबित होता है और स्तन व अंडाशय के कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम भी कम कर सकता है।  

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Woman drinking aloe vera juice daily while learning about potential health benefits and safety precautions
30 दिन रोज एलोवेरा जूस पीने से क्या होगा? फायदे से ज्यादा जरूरी है ये सावधानी

एलोवेरा को आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। आजकल इसे लेकर सोशल मीडिया और हेल्थ कंटेंट में कई तरह के दावे किए जाते हैं। वजन घटाने से लेकर पाचन सुधारने, त्वचा में निखार लाने और इम्यूनिटी मजबूत करने तक, एलोवेरा जूस को कई फायदे से जोड़ा जाता है। लेकिन सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक रोज एलोवेरा जूस पीता है, तो वास्तव में शरीर पर क्या असर पड़ सकता है? इसका जवाब इतना सीधा नहीं है। एलोवेरा के कुछ मौखिक उपयोगों पर सीमित वैज्ञानिक शोध उपलब्ध है, लेकिन त्वचा चमकाने, शरीर से 'टॉक्सिन' निकालने या तेजी से फैट कम करने जैसे लोकप्रिय दावों के लिए पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए एलोवेरा जूस को किसी बीमारी का इलाज या वजन घटाने का शॉर्टकट मानना सही नहीं होगा। एलोवेरा जूस में क्या पाया जाता है? एलोवेरा के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग यौगिक पाए जाते हैं। इसके अंदरूनी जेल और पत्ते की बाहरी परत से मिलने वाला लेटेक्स एक जैसे नहीं होते। यही वजह है कि किसी एलोवेरा ड्रिंक की सुरक्षा इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे किस हिस्से से तैयार किया गया है और उसमें एलोइन जैसे एंथ्राक्विनोन यौगिक कितनी मात्रा में मौजूद हैं। NCCIH के अनुसार बाजार में मिलने वाले एलो उत्पादों में जेल, लेटेक्स या पूरे पत्ते के अर्क का इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए सिर्फ 'एलोवेरा जूस' लिखा होना उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की गारंटी नहीं है। 30 दिन पीने पर पाचन में क्या असर हो सकता है? कुछ लोगों को एलोवेरा जूस लेने के बाद पाचन बेहतर महसूस हो सकता है। लेकिन इसे कब्ज, गैस या IBS का पक्का इलाज मानने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसके उलट, अगर किसी उत्पाद में एलो लेटेक्स मौजूद है, तो पेट में दर्द, ऐंठन और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए पेट साफ करने के लिए एलोवेरा जूस का ज्यादा सेवन करना उल्टा नुकसान पहुंचा सकता है। क्या एलोवेरा जूस से त्वचा चमक सकती है? एलोवेरा में मौजूद कुछ यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि देखी गई है। लेकिन रोज एलोवेरा जूस पीने से एक महीने में त्वचा चमकने लगेगी या मुंहासे खत्म हो जाएंगे, ऐसा दावा करने के लिए पर्याप्त मजबूत मानव-आधारित प्रमाण नहीं हैं। एलोवेरा के त्वचा संबंधी संभावित फायदे पर शोध मुख्य रूप से इसके बाहरी इस्तेमाल को लेकर भी हुआ है। इसलिए जूस को 'स्किन ग्लो' का निश्चित उपाय बताना सही नहीं होगा। क्या इम्यूनिटी मजबूत करता है? एलोवेरा में मौजूद कुछ जैव सक्रिय यौगिकों को लेकर रिसर्च जरूर हुई है, लेकिन रोज एलोवेरा जूस पीने से इम्यूनिटी में निश्चित और बड़ा सुधार होगा, यह साबित नहीं हुआ है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और आवश्यक टीकाकरण जैसी चीजों की भूमिका कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। क्या वजन तेजी से कम होगा? एलोवेरा जूस को वजन घटाने वाले पेय के तौर पर काफी प्रचारित किया जाता है, लेकिन इसे फैट बर्नर या 'डिटॉक्स ड्रिंक' मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। कुछ सीमित शोध में खास एलो उत्पादों के सेवन के बाद वजन या फैट मास में मामूली बदलाव देखे गए हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सामान्य एलोवेरा जूस 30 दिनों में वजन तेजी से कम कर देगा। वजन घटाने के लिए कैलोरी संतुलन, पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। सबसे जरूरी बात: हर एलोवेरा जूस सुरक्षित नहीं एलोवेरा का सेवन करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी संरचना है। एलो लेटेक्स मुंह से लेने पर दस्त और पेट में ऐंठन पैदा कर सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक कुछ एलो लीफ एक्सट्रैक्ट के सेवन को लिवर की चोट के मामलों से भी जोड़ा गया है। Mayo Clinic भी एलोवेरा को उन हर्बल सप्लीमेंट्स में शामिल करता है जो कुछ परिस्थितियों में लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गर्भावस्था और दवाइयां लेने वालों को विशेष सावधानी गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मुंह से एलोवेरा लेना सुरक्षित नहीं माना जाता है और ऐसे समय में डॉक्टर से सलाह जरूरी है। इसी तरह यदि आप नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं, तो एलोवेरा जूस या किसी हर्बल सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि हर्बल उत्पाद कुछ दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं। तो क्या 30 दिन रोज एलोवेरा जूस पीना चाहिए? सिर्फ 30 दिन लगातार पीने से शरीर 'डिटॉक्स' हो जाएगा, खून साफ हो जाएगा या तेजी से वजन कम हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं है। कुछ लोगों को सीमित लाभ महसूस हो सकते हैं, लेकिन इसके फायदे व्यक्ति, उत्पाद और उसकी मात्रा पर निर्भर करते हैं। अगर आप एलोवेरा जूस लेना चाहते हैं, तो लेबल पर सामग्री और एलोइन की जानकारी जरूर देखें और बिना सलाह के ज्यादा मात्रा में सेवन न करें। किसी बीमारी का इलाज चल रहा है, गर्भावस्था या स्तनपान की स्थिति है, या नियमित दवाएं चल रही हैं तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।  

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