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Radiation Fibrosis Explained

कैंसर ठीक होने के बाद भी दर्द नहीं हो रहा खत्म? जानिए क्या है रेडिएशन फाइब्रोसिस, इसके लक्षण और बचाव के उपाय

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Cancer survivor experiencing stiffness after radiation therapy, highlighting radiation fibrosis symptoms, pain management and rehabilitation.
Radiation Fibrosis After Cancer Treatment

कैंसर का सफल इलाज होने के बाद अधिकांश मरीज सामान्य जीवन की ओर लौटने लगते हैं। लेकिन कुछ लोगों में इलाज के महीनों या वर्षों बाद भी शरीर के किसी हिस्से में दर्द, अकड़न, सूजन या हरकत करने में परेशानी बनी रह सकती है। ऐसे लक्षणों को सामान्य रिकवरी समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह रेडिएशन फाइब्रोसिस (Radiation Fibrosis) का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार रेडिएशन थेरेपी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में प्रभावी होती है, लेकिन इसका असर आसपास के स्वस्थ ऊतकों (Healthy Tissues) पर भी पड़ सकता है। कुछ मरीजों में यही असर लंबे समय बाद रेडिएशन फाइब्रोसिस के रूप में सामने आता है।

क्या है रेडिएशन फाइब्रोसिस?

रेडिएशन फाइब्रोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें रेडिएशन दिए गए हिस्से के सामान्य टिशू धीरे-धीरे कठोर (Scar Tissue) बनने लगते हैं। शरीर मरम्मत की प्रक्रिया के दौरान जरूरत से ज्यादा कोलेजन बनाने लगता है, जिससे मांसपेशियां, त्वचा और अन्य नरम ऊतक अपनी लचक खोने लगते हैं।

यह समस्या गर्दन, छाती, स्तन, सिर, पेल्विक क्षेत्र या शरीर के किसी भी उस हिस्से में हो सकती है जहां रेडिएशन थेरेपी दी गई हो। कई मरीजों में इसके लक्षण इलाज के छह महीने बाद दिखाई देते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह वर्षों बाद भी विकसित हो सकता है।

रेडिएशन थेरेपी के बाद यह समस्या क्यों होती है?

रेडिएशन थेरेपी कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाकर उन्हें खत्म करती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में आसपास के स्वस्थ ऊतक भी प्रभावित हो सकते हैं।

कुछ मरीजों में लगातार सूजन और फाइब्रोब्लास्ट कोशिकाओं की अधिक सक्रियता के कारण जरूरत से ज्यादा कोलेजन बनने लगता है। यही अतिरिक्त कोलेजन धीरे-धीरे टिशू को कठोर बना देता है। कुछ आनुवंशिक (Genetic) कारण भी इस जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

रेडिएशन फाइब्रोसिस के शुरुआती लक्षण

प्रभावित हिस्से में अकड़न

शुरुआत में केवल सुबह या लंबे समय तक बैठे रहने के बाद अकड़न महसूस हो सकती है। धीरे-धीरे यह समस्या लगातार बनी रहती है और मांसपेशियों की लचक कम होने लगती है।

लगातार दर्द रहना

अगर रेडिएशन थेरेपी खत्म होने के काफी समय बाद भी दर्द बना रहे या धीरे-धीरे बढ़ने लगे, तो इसे सामान्य रिकवरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नसों और मांसपेशियों पर दबाव बढ़ने से दर्द और खिंचाव महसूस हो सकता है।

त्वचा का सख्त और मोटा होना

रेडिएशन वाले हिस्से की त्वचा पहले की तुलना में अधिक कठोर, मोटी और कम लचीली महसूस हो सकती है। कई बार त्वचा का रंग भी बदल जाता है।

हाथ-पैर या गर्दन हिलाने में परेशानी

यदि रेडिएशन कंधे, गर्दन, हाथ, पैर या पेल्विक हिस्से में दिया गया था, तो जोड़ों की मूवमेंट कम हो सकती है। हाथ ऊपर उठाने, गर्दन घुमाने, चलने या सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई महसूस हो सकती है।

सूजन या लिम्फेडेमा

कुछ मरीजों में लिम्फेटिक सिस्टम प्रभावित होने के कारण हाथ, पैर या प्रभावित हिस्से में लगातार सूजन, भारीपन और कपड़े तंग महसूस होने जैसी समस्या हो सकती है।

किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार इन मरीजों में रेडिएशन फाइब्रोसिस का खतरा अधिक होता है—

  • हाई-डोज रेडिएशन थेरेपी लेने वाले मरीज
  • जिनका सर्जरी और रेडिएशन दोनों हुआ हो
  • डायबिटीज से पीड़ित मरीज
  • जिनमें घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो

क्या इसका इलाज संभव है?

रेडिएशन फाइब्रोसिस को पूरी तरह खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से इसके प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञ आमतौर पर इन उपायों की सलाह देते हैं—

  • नियमित फिजियोथेरेपी
  • स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज
  • दर्द और सूजन नियंत्रित करने वाली दवाएं
  • नियमित फॉलो-अप
  • ऑन्कोलॉजिस्ट और फिजिकल मेडिसिन विशेषज्ञ की निगरानी

यदि रेडिएशन थेरेपी के बाद दर्द, अकड़न, सूजन या शरीर के किसी हिस्से को हिलाने में लगातार परेशानी महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर उपचार शुरू करने से जीवन की गुणवत्ता और शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और मरीजों के अनुकूल बनाने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए हैं। रिम्स की 64वीं शासी परिषद (गवर्निंग बॉडी) की बैठक में अस्पताल के बुनियादी ढांचे, चिकित्सा सुविधाओं और मेडिकल शिक्षा को नई तकनीकों से लैस करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की।   बैठक का सबसे बड़ा फैसला बैठक का सबसे बड़ा फैसला रिम्स में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू करने का रहा। इस तकनीक के लागू होने से जटिल ऑपरेशन अधिक सटीक, सुरक्षित और कम समय में किए जा सकेंगे, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा। इसके साथ ही मेडिकल छात्रों की पढ़ाई को आधुनिक बनाने के लिए संस्थान में स्मार्ट क्लासरूम भी शुरू किए जाएंगे।   आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए 200 नए वेंटिलेटर खरीदने का निर्णय लिया गया है। इन वेंटिलेटरों को इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में स्थापित किया जाएगा, ताकि गंभीर मरीजों का समय पर बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके।   मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों की आवासीय सुविधा को बेहतर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल पर नए हॉस्टल के निर्माण और संचालन को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा 100 बेड के नए पेइंग वार्ड के निर्माण, रेडियोथेरेपी विभाग के लिए अतिरिक्त बजट, सुपर स्पेशियलिटी सीटों में वृद्धि और मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी सहमति बनी।   बैठक में कर्मचारियों की सेवा नियमावली, चयन समिति के गठन, दैनिक मजदूरों के सेवा विस्तार, आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ मिशन से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। साथ ही हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन और लंबित प्रशासनिक मामलों के समाधान पर भी निर्णय लिए गए।   रिम्स प्रबंधन का मानना है रिम्स प्रबंधन का मानना है कि इन फैसलों से न केवल मरीजों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि मेडिकल शिक्षा, शोध और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी नई तकनीक और बेहतर संसाधनों के साथ अधिक प्रभावी बन सकेगी।

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मानसून में हर बुखार को वायरल समझने की गलती न करें! जानें किस गंभीर बीमारी का हो सकता है खतरा

Illustration of a human liver and bile ducts highlighting Primary Sclerosing Cholangitis (PSC) and common digestive symptoms.

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Close-up of a spider bite on skin with redness, swelling, and first aid treatment guidance.
मकड़ी काट ले तो घबराएं नहीं! WHO के Technical Advisor ने बताए सही फर्स्ट एड टिप्स और खतरे के संकेत

Spider Bite First Aid: बरसात के मौसम में मकड़ी के काटने पर दर्द, खुजली और सूजन होना आम बात है। WHO के Technical Advisor के अनुसार सही फर्स्ट एड अपनाने और गंभीर लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। मानसून के दौरान घरों और आसपास मकड़ियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यदि मकड़ी काट ले, तो अधिकांश मामलों में हल्का दर्द, खुजली, लालपन या सूजन हो सकती है। हालांकि घबराने या बिना सलाह के घरेलू इलाज करने की बजाय सही फर्स्ट एड अपनाना जरूरी है। WHO के Technical Advisor और हेल्थ एजुकेटर डॉ. जेम्स ओ'डोनोवन के अनुसार, मकड़ी के काटने के बाद सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साफ पानी और हल्के साबुन से धोएं ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके। यदि दर्द या सूजन हो, तो साफ कपड़े में बर्फ लपेटकर 10–15 मिनट तक सिकाई करें। बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं और खुजली होने पर उस जगह को बार-बार न खुजलाएं, क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ सकता है। मकड़ी के काटने के सामान्य लक्षण दर्द या जलन खुजली हल्की सूजन लालपन छोटे धब्बे या फफोले इन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाएं सांस लेने में परेशानी चेहरे, होंठ या गले में सूजन तेज बुखार या ठंड लगना पूरे शरीर में एलर्जी या चकत्ते काटी गई जगह पर तेज दर्द या पस चक्कर आना, उल्टी या बेहोशी महसूस होना ध्यान रखें ज्यादातर मकड़ी के काटने के मामले गंभीर नहीं होते, लेकिन यदि लक्षण तेजी से बढ़ें या एलर्जिक रिएक्शन दिखाई दे, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। समय पर सही इलाज गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है।  

anmol जुलाई 21, 2026 0
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