कैंसर का सफल इलाज होने के बाद अधिकांश मरीज सामान्य जीवन की ओर लौटने लगते हैं। लेकिन कुछ लोगों में इलाज के महीनों या वर्षों बाद भी शरीर के किसी हिस्से में दर्द, अकड़न, सूजन या हरकत करने में परेशानी बनी रह सकती है। ऐसे लक्षणों को सामान्य रिकवरी समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह रेडिएशन फाइब्रोसिस (Radiation Fibrosis) का संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार रेडिएशन थेरेपी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में प्रभावी होती है, लेकिन इसका असर आसपास के स्वस्थ ऊतकों (Healthy Tissues) पर भी पड़ सकता है। कुछ मरीजों में यही असर लंबे समय बाद रेडिएशन फाइब्रोसिस के रूप में सामने आता है।
रेडिएशन फाइब्रोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें रेडिएशन दिए गए हिस्से के सामान्य टिशू धीरे-धीरे कठोर (Scar Tissue) बनने लगते हैं। शरीर मरम्मत की प्रक्रिया के दौरान जरूरत से ज्यादा कोलेजन बनाने लगता है, जिससे मांसपेशियां, त्वचा और अन्य नरम ऊतक अपनी लचक खोने लगते हैं।
यह समस्या गर्दन, छाती, स्तन, सिर, पेल्विक क्षेत्र या शरीर के किसी भी उस हिस्से में हो सकती है जहां रेडिएशन थेरेपी दी गई हो। कई मरीजों में इसके लक्षण इलाज के छह महीने बाद दिखाई देते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह वर्षों बाद भी विकसित हो सकता है।
रेडिएशन थेरेपी कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाकर उन्हें खत्म करती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में आसपास के स्वस्थ ऊतक भी प्रभावित हो सकते हैं।
कुछ मरीजों में लगातार सूजन और फाइब्रोब्लास्ट कोशिकाओं की अधिक सक्रियता के कारण जरूरत से ज्यादा कोलेजन बनने लगता है। यही अतिरिक्त कोलेजन धीरे-धीरे टिशू को कठोर बना देता है। कुछ आनुवंशिक (Genetic) कारण भी इस जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
शुरुआत में केवल सुबह या लंबे समय तक बैठे रहने के बाद अकड़न महसूस हो सकती है। धीरे-धीरे यह समस्या लगातार बनी रहती है और मांसपेशियों की लचक कम होने लगती है।
अगर रेडिएशन थेरेपी खत्म होने के काफी समय बाद भी दर्द बना रहे या धीरे-धीरे बढ़ने लगे, तो इसे सामान्य रिकवरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नसों और मांसपेशियों पर दबाव बढ़ने से दर्द और खिंचाव महसूस हो सकता है।
रेडिएशन वाले हिस्से की त्वचा पहले की तुलना में अधिक कठोर, मोटी और कम लचीली महसूस हो सकती है। कई बार त्वचा का रंग भी बदल जाता है।
यदि रेडिएशन कंधे, गर्दन, हाथ, पैर या पेल्विक हिस्से में दिया गया था, तो जोड़ों की मूवमेंट कम हो सकती है। हाथ ऊपर उठाने, गर्दन घुमाने, चलने या सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई महसूस हो सकती है।
कुछ मरीजों में लिम्फेटिक सिस्टम प्रभावित होने के कारण हाथ, पैर या प्रभावित हिस्से में लगातार सूजन, भारीपन और कपड़े तंग महसूस होने जैसी समस्या हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन मरीजों में रेडिएशन फाइब्रोसिस का खतरा अधिक होता है—
रेडिएशन फाइब्रोसिस को पूरी तरह खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से इसके प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञ आमतौर पर इन उपायों की सलाह देते हैं—
यदि रेडिएशन थेरेपी के बाद दर्द, अकड़न, सूजन या शरीर के किसी हिस्से को हिलाने में लगातार परेशानी महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर उपचार शुरू करने से जीवन की गुणवत्ता और शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Yoga for Nose Blockage: मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं बढ़ी हुई नमी, मौसम में बदलाव और एलर्जी के कारण कई लोगों को बंद नाक, साइनस, जुकाम और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में हर बार दवा लेने की बजाय कुछ आसान योगासन और प्राणायाम अपनाकर प्राकृतिक रूप से राहत पाने की कोशिश की जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योग और सही श्वास अभ्यास (Breathing Exercises) श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने, नाक के मार्ग को साफ रखने और साइनस से जुड़ी परेशानियों को कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। 1. नाड़ी शोधन प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) अनुलोम-विलोम नाक के दोनों मार्गों को संतुलित करने में मदद करता है। यह श्वास प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और बंद नाक की समस्या में राहत दिलाने वाला लोकप्रिय प्राणायाम माना जाता है। कैसे करें? सुखासन में आराम से बैठें। दाएं अंगूठे से दाईं नासिका बंद करें। बाईं नासिका से गहरी सांस लें। अब बाईं नासिका बंद कर दाईं ओर से सांस छोड़ें। इसी प्रक्रिया को दूसरी ओर से दोहराएं। 5 से 10 मिनट तक अभ्यास करें। 2. भ्रामरी प्राणायाम भौंरे जैसी गूंजती ध्वनि के साथ किया जाने वाला यह प्राणायाम नाक और गले में हल्का कंपन पैदा करता है, जिससे सांस लेने में आराम महसूस हो सकता है। यह तनाव कम करने में भी मददगार माना जाता है। कैसे करें? आंखें बंद करके आराम से बैठें। अंगूठों से कान बंद करें। बाकी उंगलियां हल्के से आंखों और माथे पर रखें। गहरी सांस लें। सांस छोड़ते समय "ऊं..." जैसी गूंजती आवाज निकालें। 5 से 7 बार दोहराएं। 3. भुजंगासन (Cobra Pose) भुजंगासन छाती को खोलने और फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। इससे सीने में जकड़न और सांस लेने में होने वाली असहजता कम हो सकती है। कैसे करें? पेट के बल सीधे लेट जाएं। हथेलियां कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए धीरे-धीरे सिर और छाती ऊपर उठाएं। कुछ सेकंड रुकें। फिर सामान्य स्थिति में लौट आएं। 5–8 बार दोहराएं। 4. अधो मुख श्वानासन इस योगासन में शरीर उल्टे "V" आकार में होता है, जिससे सिर और चेहरे की ओर रक्त संचार बेहतर हो सकता है। यह साइनस और बंद नाक की समस्या में आराम दिलाने में सहायक माना जाता है। कैसे करें? हाथों और घुटनों के बल आएं। सांस छोड़ते हुए कमर को ऊपर उठाएं। शरीर को उल्टे "V" आकार में रखें। 20–30 सेकंड तक सामान्य सांस लें। धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आएं। 5. जलनेति (योग क्रिया) जलनेति एक पारंपरिक योग क्रिया है, जो नाक के अंदर जमा धूल, एलर्जी पैदा करने वाले कण और अतिरिक्त म्यूकस को साफ करने में मदद कर सकती है। साइनस की समस्या वाले लोगों के लिए इसे उपयोगी माना जाता है। कैसे करें? गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाएं। नेति पॉट की मदद से पानी एक नासिका में डालें। पानी दूसरी नासिका से बाहर निकलने दें। प्रक्रिया के बाद नाक को अच्छी तरह साफ और सुखा लें। योग करते समय इन बातों का रखें ध्यान सभी योगासन खाली पेट या भोजन के 2–3 घंटे बाद करें। यदि तेज बुखार, गंभीर साइनस संक्रमण या सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो, तो केवल योग पर निर्भर न रहें और डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी आसन के दौरान चक्कर आए या असहज महसूस हो, तो तुरंत अभ्यास रोक दें। शुरुआती लोग प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करें। ध्यान रखें: योग स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का विकल्प नहीं है। लगातार बंद नाक, सांस लेने में दिक्कत या बार-बार होने वाले संक्रमण की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और मरीजों के अनुकूल बनाने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए हैं। रिम्स की 64वीं शासी परिषद (गवर्निंग बॉडी) की बैठक में अस्पताल के बुनियादी ढांचे, चिकित्सा सुविधाओं और मेडिकल शिक्षा को नई तकनीकों से लैस करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की। बैठक का सबसे बड़ा फैसला बैठक का सबसे बड़ा फैसला रिम्स में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू करने का रहा। इस तकनीक के लागू होने से जटिल ऑपरेशन अधिक सटीक, सुरक्षित और कम समय में किए जा सकेंगे, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा। इसके साथ ही मेडिकल छात्रों की पढ़ाई को आधुनिक बनाने के लिए संस्थान में स्मार्ट क्लासरूम भी शुरू किए जाएंगे। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए 200 नए वेंटिलेटर खरीदने का निर्णय लिया गया है। इन वेंटिलेटरों को इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में स्थापित किया जाएगा, ताकि गंभीर मरीजों का समय पर बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों की आवासीय सुविधा को बेहतर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल पर नए हॉस्टल के निर्माण और संचालन को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा 100 बेड के नए पेइंग वार्ड के निर्माण, रेडियोथेरेपी विभाग के लिए अतिरिक्त बजट, सुपर स्पेशियलिटी सीटों में वृद्धि और मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी सहमति बनी। बैठक में कर्मचारियों की सेवा नियमावली, चयन समिति के गठन, दैनिक मजदूरों के सेवा विस्तार, आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ मिशन से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। साथ ही हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन और लंबित प्रशासनिक मामलों के समाधान पर भी निर्णय लिए गए। रिम्स प्रबंधन का मानना है रिम्स प्रबंधन का मानना है कि इन फैसलों से न केवल मरीजों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि मेडिकल शिक्षा, शोध और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी नई तकनीक और बेहतर संसाधनों के साथ अधिक प्रभावी बन सकेगी।
Spider Bite First Aid: बरसात के मौसम में मकड़ी के काटने पर दर्द, खुजली और सूजन होना आम बात है। WHO के Technical Advisor के अनुसार सही फर्स्ट एड अपनाने और गंभीर लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। मानसून के दौरान घरों और आसपास मकड़ियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यदि मकड़ी काट ले, तो अधिकांश मामलों में हल्का दर्द, खुजली, लालपन या सूजन हो सकती है। हालांकि घबराने या बिना सलाह के घरेलू इलाज करने की बजाय सही फर्स्ट एड अपनाना जरूरी है। WHO के Technical Advisor और हेल्थ एजुकेटर डॉ. जेम्स ओ'डोनोवन के अनुसार, मकड़ी के काटने के बाद सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साफ पानी और हल्के साबुन से धोएं ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके। यदि दर्द या सूजन हो, तो साफ कपड़े में बर्फ लपेटकर 10–15 मिनट तक सिकाई करें। बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं और खुजली होने पर उस जगह को बार-बार न खुजलाएं, क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ सकता है। मकड़ी के काटने के सामान्य लक्षण दर्द या जलन खुजली हल्की सूजन लालपन छोटे धब्बे या फफोले इन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाएं सांस लेने में परेशानी चेहरे, होंठ या गले में सूजन तेज बुखार या ठंड लगना पूरे शरीर में एलर्जी या चकत्ते काटी गई जगह पर तेज दर्द या पस चक्कर आना, उल्टी या बेहोशी महसूस होना ध्यान रखें ज्यादातर मकड़ी के काटने के मामले गंभीर नहीं होते, लेकिन यदि लक्षण तेजी से बढ़ें या एलर्जिक रिएक्शन दिखाई दे, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। समय पर सही इलाज गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है।