मुंबई, एजेंसियां। टीवी का लोकप्रिय सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' अपने नए ट्विस्ट और पारिवारिक ड्रामे को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा में बना हुआ है। शो के हालिया एपिसोड में करण के फैसले और मिहिर से जुड़े पुराने राज़ कहानी को नया मोड़ दे रहे हैं, जिससे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।
नए एपिसोड में करण के कुछ फैसलों ने परिवार के रिश्तों में हलचल पैदा कर दी है। कहानी में करण और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच मतभेद देखने को मिल रहे हैं। दर्शक यह जानने के लिए उत्साहित हैं कि आने वाले एपिसोड में करण का फैसला परिवार को किस दिशा में ले जाएगा।
सीरियल में मिहिर और तुलसी की कहानी एक बार फिर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पुराने रिश्तों और छिपे हुए सच को लेकर कहानी में लगातार नए खुलासे किए जा रहे हैं। मिहिर से जुड़े राज़ और परिवार पर उसके असर को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता है।
'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में स्मृति ईरानी और अमर उपाध्याय की वापसी के बाद से ही शो को लेकर फैंस में काफी उत्साह देखा जा रहा है। मेकर्स लगातार कहानी में नए ट्विस्ट जोड़ रहे हैं, ताकि दर्शकों की दिलचस्पी बनी रहे।
शो की कहानी अब ऐसे मोड़ पर पहुंच रही है जहां रिश्तों, पुराने विवादों और नए फैसलों का असर पूरे परिवार पर दिखाई देगा। दर्शकों को उम्मीद है कि आने वाले एपिसोड में मिहिर से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिनेता विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' रिलीज से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज से एक दिन पहले ही 20 करोड़ रुपये से अधिक की एडवांस बुकिंग दर्ज कर ली है। वहीं, ब्लॉक सीट्स को हटाने के बाद भी फिल्म की एडवांस टिकट बिक्री करीब 14 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। अब तक फिल्म के 7 लाख से ज्यादा टिकट बिक चुके हैं, जिससे दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु और कर्नाटक से मिला सबसे बड़ा रिस्पॉन्स एडवांस बुकिंग में सबसे ज्यादा योगदान तमिलनाडु का रहा, जहां से फिल्म ने करीब 7.90 करोड़ रुपये की टिकट बिक्री की। इसके बाद कर्नाटक से लगभग 6.03 करोड़ रुपये की एडवांस बुकिंग हुई, जिसमें बेंगलुरु का सबसे बड़ा योगदान रहा। केरल से भी फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला और वहां से करीब 1.91 करोड़ रुपये की एडवांस बुकिंग दर्ज की गई। बेंगलुरु बना एडवांस बुकिंग का सबसे बड़ा केंद्र शहरों के हिसाब से बेंगलुरु एडवांस बुकिंग में सबसे आगे रहा, जहां से लगभग 5.99 करोड़ रुपये की टिकट बिक्री हुई। इसके बाद चेन्नई, कोयंबटूर, हैदराबाद, मदुरै, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों से भी शानदार बुकिंग के आंकड़े सामने आए हैं। तमिल वर्जन का दबदबा भाषाई आधार पर फिल्म का तमिल वर्जन सबसे आगे है, जिसने 14 करोड़ रुपये से अधिक की एडवांस कमाई की है। तेलुगु संस्करण को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, जबकि हिंदी वर्जन की बुकिंग फिलहाल अपेक्षाकृत सीमित रही है। फिल्म की अधिकांश टिकटें 2D स्क्रीनिंग के लिए बुक हुई हैं। विजय की आखिरी फिल्म होने से बढ़ी उत्सुकता ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि रिलीज के करीब आते-आते फिल्म की एडवांस बुकिंग में और तेजी आ सकती है। 'जन नायकन' को लेकर फैंस में खास उत्साह इसलिए भी है क्योंकि इसे अभिनेता विजय के 33 साल लंबे फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। फिल्मों से विदाई के बाद विजय अब तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय हैं, जिससे इस फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है।
मुंबई, एजेंसियां। हॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित सुपरहीरो फिल्म 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' को लेकर भारत में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। टॉम हॉलैंड स्टारर इस फिल्म की एडवांस बुकिंग को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है और ट्रेड विशेषज्ञों का अनुमान है कि फिल्म भारत में पहले दिन करीब ₹50–60 करोड़ की कमाई कर सकती है। मार्वल फैंस में जबरदस्त क्रेज फिल्म की एडवांस टिकट बिक्री शुरू होते ही प्रीमियम स्क्रीनिंग फॉर्मेट्स में भारी मांग देखने को मिली है। PLF, 4DX और अन्य प्रीमियम फॉर्मेट्स के लिए दर्शकों की दिलचस्पी काफी ज्यादा बताई जा रही है। भारत में 30 जुलाई को रिलीज होगी फिल्म सोनी पिक्चर्स ने पुष्टि की है कि 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' भारत में 30 जुलाई 2026 को रिलीज होगी। फिल्म अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में भी रिलीज की जाएगी। बॉक्स ऑफिस पर बड़ा रिकॉर्ड बनाने की उम्मीद ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि टॉम हॉलैंड की लोकप्रियता और मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (MCU) की मजबूत फैन फॉलोइंग के कारण यह फिल्म भारत में हॉलीवुड की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में शामिल हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे 'एवेंजर्स: एंडगेम' जैसे बड़े रिकॉर्ड को चुनौती देने वाली फिल्म बताया जा रहा है। फैंस की नजर पीटर पार्कर की वापसी पर फिल्म में टॉम हॉलैंड एक बार फिर पीटर पार्कर यानी स्पाइडर-मैन के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा है और दर्शक इसके बड़े एक्शन सीक्वेंस और कहानी को लेकर उत्साहित हैं।
चंडीगढ़, एजेंसियां। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी एनकाउंटरों पर आधारित फिल्म 'सतलुज' ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद अब पंजाब के कई गांवों में बड़े पर्दे पर दिखाई जा रही है। गुरुद्वारों और सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार शामिल हो रहे हैं। कई दर्शकों का कहना है कि फिल्म ने उन्हें उस दौर की घटनाओं और पीड़ितों के संघर्ष को समझने का अवसर दिया, जबकि कुछ परिवारों का दावा है कि वास्तविक घटनाएं फिल्म में दिखाए गए दृश्यों से भी अधिक भयावह थीं। पीड़ित परिवारों ने सुनाई अपनी आपबीती फिरोजपुर और तरनतारन के कई परिवारों ने आरोप लगाया कि 1990 के दशक में उनके परिजनों की कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों में मौत हुई थी। कुछ लोगों ने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्यों को हिरासत में प्रताड़ित किया गया, लेकिन आज तक न तो शव मिले और न ही मौत से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज। कई पीड़ितों ने कहा कि फिल्म देखने के बाद नई पीढ़ी को उस दौर की घटनाओं का अंदाजा हुआ। गांव-गांव में हो रही स्क्रीनिंग सामाजिक संगठनों और स्थानीय समूहों का कहना है कि अब तक पंजाब के सैकड़ों गांवों में फिल्म की स्क्रीनिंग कराई जा चुकी है। आयोजकों का दावा है कि इसका उद्देश्य युवाओं को पंजाब के इतिहास और जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष से परिचित कराना है। उनका कहना है कि इस अभियान का किसी राजनीतिक दल या फिल्म निर्माताओं से सीधा संबंध नहीं है। कानूनी विवाद भी तेज फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग को लेकर विवाद भी बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के एक अधिवक्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म की स्क्रीनिंग और सार्वजनिक प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म को आवश्यक प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रदर्शित किया जा रहा है और इसकी सामग्री पर भी सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल इस मामले में अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।