Weight Loss Tips: वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन बेस्वाद डाइट की वजह से बार-बार हार मान जाते हैं? अगर हां, तो लौकी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। ज्यादातर लोग लौकी का नाम सुनते ही मुंह बना लेते हैं, लेकिन सही तरीके से बनाई गई लौकी की रेसिपीज न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि वजन घटाने में भी मददगार साबित हो सकती हैं। लौकी में लगभग 92 प्रतिशत पानी, कम कैलोरी और भरपूर फाइबर होता है। यही कारण है कि इसे वेट लॉस डाइट का अहम हिस्सा माना जाता है। फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग की संभावना कम हो सकती है। क्यों फायदेमंद है लौकी? कम कैलोरी और हाई फाइबर लगभग 92% पानी, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद पाचन को बेहतर बनाने में सहायक हेल्दी वेट मैनेजमेंट में मददगार 1. लौकी का चीला तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी ½ कप बेसन ¼ चम्मच हल्दी ½ चम्मच अजवाइन 1 बारीक कटी हरी मिर्च स्वादानुसार नमक थोड़ा पानी 1 चम्मच तेल बनाने की विधि कद्दूकस की हुई लौकी में बेसन, हल्दी, अजवाइन, हरी मिर्च और नमक मिलाएं। जरूरत अनुसार पानी डालकर गाढ़ा बैटर तैयार करें। तवे पर हल्का तेल लगाकर बैटर फैलाएं और दोनों तरफ सुनहरा व कुरकुरा होने तक सेंक लें। 2. लौकी का रायता तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 8 मिनट सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी 1 कप ताजा दही ½ चम्मच भुना जीरा पाउडर काला नमक हरा धनिया बनाने की विधि लौकी को हल्का उबालकर ठंडा करें। अब दही में उबली हुई लौकी मिलाएं। ऊपर से भुना जीरा, काला नमक और हरा धनिया डालकर सर्व करें। 3. लौकी का सूप तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 1 कप कटी हुई लौकी 1 टमाटर 1 छोटा टुकड़ा अदरक 2–3 लहसुन की कलियां काली मिर्च नींबू का रस बनाने की विधि लौकी, टमाटर, अदरक और लहसुन को कुकर में एक सीटी आने तक पकाएं। ठंडा होने पर पीस लें। मिश्रण को उबालें और ऊपर से काली मिर्च व नींबू का रस मिलाकर गर्मागर्म पिएं। 4. जीरा लौकी की सब्जी तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 2 कप कटी हुई लौकी 1 चम्मच जीरा चुटकीभर हींग 1 हरी मिर्च ½ चम्मच हल्दी स्वादानुसार नमक 1 चम्मच तेल या देसी घी बनाने की विधि पैन में तेल या घी गर्म करें। जीरा, हींग और हरी मिर्च का तड़का लगाएं। अब लौकी, हल्दी और नमक डालकर ढक दें। लौकी अपने ही पानी में पक जाएगी। कम मसालों वाली यह सब्जी वेट लॉस डाइट के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। वजन घटाने के लिए रखें ये बातें ध्यान रोजाना संतुलित आहार लें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नियमित एक्सरसाइज या वॉक करें। जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों से बचें। पर्याप्त नींद लें। ध्यान दें: केवल लौकी खाने से वजन कम नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है या विशेष डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
Weight Loss Healthy Sandwich Recipe: अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं और बार-बार लगने वाली भूख से परेशान हैं, तो अपनी डाइट में हाई-फाइबर और हाई-प्रोटीन सैंडविच शामिल कर सकते हैं। सही सामग्री से तैयार किया गया सैंडविच लंबे समय तक पेट भरा रखने, अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाने और शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे लंबे समय तक तृप्ति (Satiety) बनी रहती है। हालांकि, केवल किसी एक रेसिपी से वजन कम नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और कैलोरी नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। वजन घटाने के लिए 4 हेल्दी सैंडविच रेसिपी 1. चना और पालक सैंडविच सामग्री 1 कप उबले हुए चने 1 कप उबला हुआ पालक 1 छोटा चम्मच नींबू का रस काली मिर्च स्वादानुसार नमक 2 स्लाइस मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं उबले हुए चनों को हल्का मैश करें। इसमें बारीक कटा या उबला हुआ पालक, नींबू का रस, काली मिर्च और थोड़ा नमक मिलाएं। इस मिश्रण को मल्टीग्रेन ब्रेड पर फैलाकर ग्रिल करें। अनुमानित कैलोरी: 260–300 kcal 2. एवोकाडो और चुकंदर सैंडविच सामग्री आधा एवोकाडो ½ कप कद्दूकस किया हुआ चुकंदर काली मिर्च नींबू का रस मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं एवोकाडो को मैश करें और उसमें चुकंदर, नींबू का रस तथा काली मिर्च मिलाकर ब्रेड पर लगाएं। चाहें तो हल्का टोस्ट कर सकते हैं। अनुमानित कैलोरी: 240–280 kcal 3. चना-एवोकाडो प्रोटीन सैंडविच सामग्री ½ कप मैश किए हुए चने ½ एवोकाडो टमाटर के स्लाइस लेट्यूस या पालक काली मिर्च मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं चने और एवोकाडो को मिलाकर स्प्रेड तैयार करें। इसमें टमाटर और पालक की लेयर लगाकर सैंडविच तैयार करें। अनुमानित कैलोरी: 290–330 kcal 4. पालक-चुकंदर हेल्दी सैंडविच सामग्री उबला हुआ पालक कद्दूकस किया हुआ चुकंदर दही (लो-फैट) काली मिर्च मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं लो-फैट दही में पालक और चुकंदर मिलाकर स्टफिंग तैयार करें और ब्रेड में भरकर हल्का टोस्ट करें। अनुमानित कैलोरी: 220–260 kcal इन चीजों से क्या मिलेगा फायदा? चना: प्रोटीन और फाइबर से भरपूर, लंबे समय तक भूख कम महसूस होती है। एवोकाडो: हेल्दी फैट और फाइबर का अच्छा स्रोत। चुकंदर: फाइबर, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर। पालक: आयरन, फाइबर और विटामिन A, C और K का अच्छा स्रोत। वजन घटाने के लिए एक्सपर्ट टिप्स सफेद ब्रेड की जगह मल्टीग्रेन या होल व्हीट ब्रेड चुनें। मेयोनीज की जगह हंग कर्ड या ग्रीक योगर्ट का इस्तेमाल करें। सैंडविच के साथ शुगर युक्त ड्रिंक्स की बजाय छाछ, ग्रीन टी या सादा पानी लें। रोजाना 30–45 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें। कुल कैलोरी सेवन का ध्यान रखें। ध्यान रखें :- यह सैंडविच वजन घटाने वाली संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अकेले इसे खाने से वजन कम होने की गारंटी नहीं है। यदि आपको डायबिटीज, किडनी रोग या किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।
Garlic for Immunity: भारतीय रसोई में लहसुन केवल स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं, बल्कि पारंपरिक घरेलू नुस्खों का भी अहम हिस्सा माना जाता है। सर्दी, जुकाम और संक्रमण के मौसम में कई लोग सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद में लहसुन को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है, जबकि आधुनिक शोध भी इसके कुछ स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि करते हैं। लेकिन क्या वास्तव में सिर्फ लहसुन खाने से इम्यूनिटी मजबूत हो जाती है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय। क्या लहसुन सच में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है? आयुर्वेदाचार्य डॉ. राजेश बयारी (एमडी, चित्रकूटा आयुर्वेद चिकित्सालय, कुंडापुरा) के अनुसार, लहसुन में मौजूद एलिसिन (Allicin), सल्फर यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। ये तत्व एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा लहसुन: पाचन शक्ति को बेहतर बनाने में मदद करता है। रक्त संचार को सुधारने में सहायक होता है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में योगदान दे सकता है। हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद में लहसुन का महत्व आयुर्वेद में लहसुन को 'लशुन' कहा गया है। चरक संहिता और भावप्रकाश निघंटु जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसे औषधीय पौधे के रूप में वर्णित किया गया है। आयुर्वेद के अनुसार लहसुन: पाचन शक्ति (अग्नि) को मजबूत करता है। वात और कफ दोष को संतुलित करता है। शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है। संक्रमण से लड़ने की क्षमता को समर्थन देता है। हृदय और रक्त संचार को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। आधुनिक शोध क्या कहते हैं? वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, लहसुन में एलिसिन, डायलिल सल्फाइड (Diallyl Sulfide), एजोइन (Ajoene) और अन्य ऑर्गेनोसल्फर यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में एंटीऑक्सीडेंट और हल्के एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव दिखा सकते हैं। कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि नियमित मात्रा में लहसुन का सेवन प्रतिरक्षा कोशिकाओं के सामान्य कार्य को समर्थन दे सकता है और सामान्य सर्दी-जुकाम की संभावना कुछ हद तक कम कर सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल लहसुन खाने से इम्यूनिटी चमत्कारिक रूप से नहीं बढ़ती। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और समय पर टीकाकरण भी बेहद जरूरी हैं। क्या खाली पेट लहसुन खाना सही है? आयुर्वेद के अनुसार इसका जवाब व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति पर निर्भर करता है। यदि: कफ या वात दोष अधिक है, पाचन शक्ति कमजोर है, तो सुबह गुनगुने पानी के साथ 1–2 कली कच्चा लहसुन लेना लाभकारी माना जा सकता है। लेकिन यदि: पित्त प्रकृति है, एसिडिटी रहती है, गैस्ट्राइटिस या पेट के अल्सर की समस्या है, तो खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए भोजन में पकाकर या हल्का भूनकर लहसुन खाना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
नई दिल्ली: डायबिटीज (मधुमेह) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित खानपान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय भोजन में दालें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ दालें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) होने के कारण ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देतीं और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती हैं। अगर आप टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं, तो मूंग, मसूर, चना, उड़द और अरहर जैसी दालों को अपनी डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। डायबिटीज में दालें क्यों हैं फायदेमंद? दालों में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट, पौध-आधारित प्रोटीन और भरपूर फाइबर भोजन के पाचन को धीमा करते हैं। इससे ग्लूकोज धीरे-धीरे रक्त में पहुंचता है और ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। साथ ही दालें लंबे समय तक पेट भरा रखती हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या भी कम होती है। 1. मूंग दाल मूंग दाल सबसे हल्की और आसानी से पचने वाली दालों में गिनी जाती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। फायदे ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाती है। भोजन के बाद शुगर स्पाइक कम करने में मदद करती है। पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखती है। वजन नियंत्रित रखने में सहायक हो सकती है। 2. मसूर दाल मसूर दाल में प्रोटीन और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। यह धीरे-धीरे पचती है, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता। फायदे ग्लूकोज नियंत्रण में मददगार। आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर। लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करती है। 3. चना दाल चना दाल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम से मध्यम श्रेणी में माना जाता है, इसलिए यह डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा विकल्प है। फायदे ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद। इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर बनाने में सहायक। फाइबर और प्रोटीन से भरपूर। वजन नियंत्रण में मददगार। 4. उड़द दाल उड़द दाल में प्रोटीन, आयरन, फाइबर और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। फायदे ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद। ब्लड शुगर नियंत्रण में सहायक। शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करती है। मांसपेशियों के लिए लाभदायक। 5. अरहर दाल अरहर दाल भारतीय घरों में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दालों में से एक है। फायदे ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद। पोटैशियम और फोलेट से भरपूर। हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक। संतुलित भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा। डायबिटीज मरीज दाल खाते समय रखें ये बातें दाल का सेवन सीमित मात्रा में करें। दाल के साथ हरी सब्जियां और सलाद जरूर लें। ज्यादा तेल और घी का इस्तेमाल न करें। सफेद चावल की जगह मल्टीग्रेन रोटी या ब्राउन राइस के साथ दाल खाएं। व्यक्तिगत डाइट प्लान के लिए डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लें।
Low Platelet Count सिर्फ डेंगू की वजह से नहीं होता। विटामिन B12, फोलेट (B9), कॉपर की कमी, वायरल संक्रमण, ऑटोइम्यून बीमारियां और कुछ दवाएं भी Thrombocytopenia का कारण बन सकती हैं। सही पोषण और समय पर जांच से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। Thrombocytopenia: केवल डेंगू नहीं, पोषण की कमी भी बन सकती है प्लेटलेट्स घटने की वजह शरीर में प्लेटलेट्स खून का थक्का बनाने और अत्यधिक रक्तस्राव रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य स्तर से कम हो जाती है, तो इस स्थिति को Thrombocytopenia (लो प्लेटलेट काउंट) कहा जाता है। अक्सर लोग इसे सिर्फ डेंगू से जोड़ते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार वायरल संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग, बोन मैरो से जुड़ी समस्याएं, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, लिवर या तिल्ली से संबंधित बीमारियां और पोषण की कमी भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में 1.5 लाख से 4.5 लाख प्लेटलेट्स प्रति माइक्रोलिटर होते हैं। यदि यह संख्या 1.5 लाख से कम हो जाए, तो जांच की जरूरत पड़ सकती है। बहुत कम प्लेटलेट्स होने पर मामूली चोट में भी ज्यादा खून बह सकता है और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। Thrombocytopenia के प्रमुख कारण वायरल संक्रमण (डेंगू, चिकनगुनिया, हेपेटाइटिस, HIV, EBV) ऑटोइम्यून बीमारियां बोन मैरो से जुड़ी समस्याएं विटामिन B12, फोलेट (B9) और कॉपर की कमी कुछ एंटीबायोटिक्स, कीमोथेरेपी और अन्य दवाओं के दुष्प्रभाव लिवर या बढ़ी हुई तिल्ली से जुड़ी समस्याएं इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें बिना चोट के शरीर पर नीले निशान पड़ना त्वचा पर लाल या बैंगनी छोटे धब्बे मसूड़ों या नाक से बार-बार खून आना मामूली चोट पर देर तक रक्तस्राव महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म पेशाब या मल में खून गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव प्लेटलेट्स को सपोर्ट करने वाली डाइट संतुलित आहार प्लेटलेट्स के उत्पादन में मदद करने वाले पोषक तत्व उपलब्ध करा सकता है। अपनी डाइट में शामिल करें— पालक, मेथी और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां चुकंदर दालें और राजमा अंडे दूध, दही और पनीर मछली और लीन मीट (यदि नॉन-वेज खाते हैं) संतरा, आंवला, अमरूद जैसे विटामिन C युक्त फल बादाम, काजू, कद्दू और सूरजमुखी के बीज साबुत अनाज पर्याप्त मात्रा में पानी ध्यान रखें यदि प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहे हों, बिना वजह शरीर पर नीले निशान पड़ रहे हों या बार-बार खून आने जैसी समस्या हो रही हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। सही कारण की पहचान और समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Moringa Paratha Recipe: गेहूं के आटे और मोरिंगा (सहजन) की पत्तियों से तैयार यह हेल्दी परांठा विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर है। जानें सामग्री, बनाने की आसान विधि, प्रति सर्विंग कैलोरी और सेहत के फायदे। नाश्ते में क्यों खाएं मोरिंगा परांठा? अगर आप दिन की शुरुआत हेल्दी और पौष्टिक नाश्ते से करना चाहते हैं, तो मोरिंगा (सहजन) के पत्तों का परांठा बेहतरीन विकल्प हो सकता है। मोरिंगा की पत्तियां विटामिन A, C, B6, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में इसका सेवन इम्यूनिटी, पाचन, हड्डियों और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। आवश्यक सामग्री 2 कप गेहूं का आटा 1 कप बारीक कटी मोरिंगा (सहजन) की पत्तियां 1–2 हरी मिर्च (बारीक कटी) ½ छोटा चम्मच अजवाइन ¼ छोटा चम्मच हल्दी नमक स्वादानुसार 1 छोटा चम्मच तेल (आटे के लिए) सेंकने के लिए थोड़ा घी या तेल अनुमानित कैलोरी प्रति परांठा (मध्यम आकार): लगभग 180–220 kcal (घी या तेल की मात्रा के अनुसार) ऐसे बनाएं मोरिंगा परांठा एक बाउल में गेहूं का आटा, बारीक कटी मोरिंगा की पत्तियां, हरी मिर्च, अजवाइन, हल्दी और नमक मिलाएं। इसमें थोड़ा तेल और जरूरत के अनुसार पानी डालकर नरम आटा गूंध लें। आटे को 10 मिनट ढककर रखें। फिर लोई बनाकर परांठा बेलें और गर्म तवे पर दोनों तरफ हल्का घी या तेल लगाकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। सेहत के फायदे विटामिन A, C और B6 का अच्छा स्रोत आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में सहायक पाचन और आंतों की सेहत के लिए लाभदायक हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देने में मददगार लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक किसके साथ करें सर्व? दही हरी चटनी अचार रायता मसाला चाय निष्कर्ष :- अगर आप रोजाना के नाश्ते में पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प तलाश रहे हैं, तो मोरिंगा परांठा जरूर ट्राई करें। यह कम समय में बनने वाली हेल्दी रेसिपी है, जो स्वाद के साथ शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर भी प्रदान करती है।
Hair Growth Diet During Monsoon: मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं बढ़ती नमी और स्कैल्प में पसीना बालों से जुड़ी कई समस्याओं को भी बढ़ा सकता है। इस मौसम में हेयर फॉल, डैंड्रफ और बालों की कमजोर जड़ों की शिकायत आम हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल हेयर केयर प्रोडक्ट्स ही नहीं बल्कि संतुलित और पोषक आहार भी बालों की सेहत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। प्रोटीन, आयरन, बायोटिन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, जिंक और विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ बालों को अंदर से पोषण देने में मदद कर सकते हैं। अगर आप मानसून में अपने बालों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं, तो इन 5 हेल्दी रेसिपीज को अपनी डेली डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। 1. मूंग दाल और पालक चीला आवश्यक सामग्री 1 कप भीगी हुई मूंग दाल 1 कप बारीक कटा पालक अदरक हरी मिर्च जीरा नमक बनाने की विधि : भीगी हुई मूंग दाल को पीस लें। इसमें पालक और बाकी सामग्री मिलाकर बैटर तैयार करें। नॉन-स्टिक तवे पर हल्का तेल लगाकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें। अनुमानित पोषण (2 चीला) कैलोरी: 220–250 kcal प्रोटीन: 14–16 ग्राम आयरन: अच्छी मात्रा फाइबर: 7–8 ग्राम संभावित फायदे प्रोटीन और आयरन से भरपूर बालों की जड़ों को पोषण देने में सहायक लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार 2. दही, अलसी और मिक्स सीड्स बाउल आवश्यक सामग्री 1 कप दही 1 बड़ा चम्मच अलसी 1 बड़ा चम्मच कद्दू के बीज 1 बड़ा चम्मच सूरजमुखी के बीज मौसमी फल बनाने की विधि : दही में सभी बीज और कटे हुए फल मिलाकर तुरंत सर्व करें। अनुमानित पोषण कैलोरी: 240–280 kcal प्रोटीन: 10–12 ग्राम हेल्दी फैट: 12–15 ग्राम संभावित फायदे ओमेगा-3 और जिंक का अच्छा स्रोत स्कैल्प हेल्थ को सपोर्ट करने में मददगार पाचन के लिए भी लाभदायक 3. चना स्प्राउट्स सलाद आवश्यक सामग्री 1 कप अंकुरित काला चना खीरा टमाटर गाजर नींबू काला नमक हरा धनिया बनाने की विधि : सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर ताजा सलाद तैयार करें। अनुमानित पोषण कैलोरी: 180–220 kcal प्रोटीन: 11–13 ग्राम फाइबर: 8–10 ग्राम संभावित फायदे प्रोटीन और आयरन से भरपूर इम्यूनिटी और बालों की मजबूती में सहायक 4. बाजरा-ओट्स वेज उपमा आवश्यक सामग्री बाजरा ओट्स गाजर मटर शिमला मिर्च करी पत्ता राई बनाने की विधि : हल्के तेल में तड़का लगाकर सब्जियां भूनें और बाजरा व ओट्स डालकर पकाएं। अनुमानित पोषण कैलोरी: 260–300 kcal फाइबर: 8–10 ग्राम प्रोटीन: 8–10 ग्राम संभावित फायदे ऊर्जा देने वाला हेल्दी नाश्ता फाइबर और मिनरल्स से भरपूर 5. पालक-पनीर बेसन चीला आवश्यक सामग्री 1 कप बेसन पालक पनीर अदरक जीरा हरी मिर्च बनाने की विधि : सभी सामग्री मिलाकर बैटर तैयार करें और हल्का तेल लगाकर तवे पर सेंक लें। अनुमानित पोषण कैलोरी: 250–300 kcal प्रोटीन: 15–18 ग्राम कैल्शियम: अच्छी मात्रा संभावित फायदे प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत बालों और हड्डियों के लिए लाभदायक मानसून में बालों की सेहत के लिए अपनाएं ये आदतें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोजाना प्रोटीन युक्त भोजन लें। मौसमी फल और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। अधिक तला-भुना और जंक फूड सीमित रखें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम करें। ध्यान दें: बालों का झड़ना कई कारणों से हो सकता है, जैसे पोषण की कमी, हार्मोनल बदलाव, तनाव या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं। केवल किसी एक रेसिपी से बालों की वृद्धि की गारंटी नहीं दी जा सकती। यदि अत्यधिक हेयर फॉल हो रहा है, तो त्वचा विशेषज्ञ या योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
Healthy Homemade Paneer Recipe: अगर बच्चे हरी सब्जियां खाने से कतराते हैं, तो यह आसान और हेल्दी रेसिपी जरूर ट्राई करें। चना दाल और एक हरी सब्जी से तैयार यह देसी 'पनीर' स्वाद के साथ पोषण भी देता है। हरी सब्जी से बनाएं हेल्दी देसी 'पनीर', स्वाद ऐसा कि कोई पहचान नहीं पाएगा अगर आपके घर में भी बच्चे हरी सब्जियों का नाम सुनते ही मुंह बनाने लगते हैं, तो यह आसान रेसिपी उनकी पसंद बदल सकती है। इस अनोखी डिश में एक हरी सब्जी और चना दाल की मदद से पनीर जैसी टेक्सचर वाली हेल्दी रेसिपी तैयार की जाती है। यह स्वादिष्ट होने के साथ प्रोटीन और फाइबर से भी भरपूर होती है। इस रेसिपी की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए ज्यादा सामग्री या लंबा समय नहीं चाहिए। अगर आप बच्चों को बिना नखरे के पौष्टिक खाना खिलाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी जरूर ट्राई करें। आवश्यक सामग्री 1 कप चना दाल (4 घंटे भीगी हुई) 1 मध्यम आकार की लौकी 1 इंच अदरक 2 हरी मिर्च 2–3 बड़े चम्मच हरा धनिया स्वादानुसार नमक ½ छोटा चम्मच हल्दी (वैकल्पिक) ½ छोटा चम्मच काली मिर्च या लाल मिर्च (वैकल्पिक) बनाने की विधि सबसे पहले चना दाल को लगभग 4 घंटे तक भिगो दें। अब लौकी को धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें। भीगी हुई दाल, लौकी, अदरक, हरी मिर्च और हरा धनिया को बिना ज्यादा पानी मिलाए मिक्सर में पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। अब इसमें नमक और मसाले मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें। तैयार मिश्रण को मनचाहे आकार में स्टीम करें या धीमी आंच पर पकाएं। पकने के बाद इसे चौकोर टुकड़ों में काट लें। चाहें तो हल्का तवे पर सेंककर या एयर फ्राई करके चटनी या सॉस के साथ सर्व करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 150–180 kcal प्रोटीन: 8–10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 20–24 ग्राम फैट: 2–4 ग्राम फाइबर: 6–8 ग्राम खाने के संभावित फायदे प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। पाचन को सपोर्ट करने में सहायक। बच्चों को हरी सब्जियां खिलाने का आसान तरीका। वजन प्रबंधन वाली डाइट में शामिल किया जा सकता है। कम तेल में बनने वाली हेल्दी स्नैक रेसिपी। ध्यान दें: यह रेसिपी संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है। यदि आपको किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या एलर्जी है, तो डाइट में बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
ऑकलैंड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक उत्तराखंडी टोपी भेंट की। यह पारंपरिक पहाड़ी टोपी उत्तराखंड की पहचान, सम्मान और हिमालयी संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। उत्तराखंडी टोपी क्यों है खास? उत्तराखंडी टोपी उच्च गुणवत्ता वाली ऊन से हाथ से तैयार की जाती है। यह केवल ठंड से बचाने का साधन नहीं, बल्कि अपनी रंगीन बुनी हुई पट्टियों और पारंपरिक डिजाइन के कारण उत्तराखंड की लोक कला और शिल्पकला को भी दर्शाती है। इस टोपी का उपयोग विशेष रूप से त्योहारों, धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों और सामाजिक कार्यक्रमों में किया जाता है। सम्मान और मेहमाननवाजी का प्रतीक उत्तराखंड की संस्कृति में इस टोपी को सम्मान, आदर और मेहमाननवाजी का प्रतीक माना जाता है। किसी विशिष्ट अतिथि का स्वागत पारंपरिक पहाड़ी टोपी पहनाकर करना आज भी राज्य की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। स्थानीय कारीगरों की आजीविका से जुड़ी उत्तराखंडी टोपी का निर्माण स्थानीय कारीगरों द्वारा पारंपरिक बुनाई तकनीकों से किया जाता है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और बुनकरों को भी रोजगार और आर्थिक सहयोग प्रदान करती है। हिमालयी संस्कृति की पहचान यह पारंपरिक टोपी उत्तराखंड के प्राकृतिक परिवेश, लोक जीवन और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। वर्षों से चली आ रही इसकी निर्माण कला आज भी राज्य की पहचान बनी हुई है और नई पीढ़ी तक पारंपरिक शिल्प को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सांस्कृतिक कूटनीति का संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को उत्तराखंडी टोपी भेंट करना केवल एक औपचारिक उपहार नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर सम्मान देने का भी संदेश माना जा रहा है। यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और स्थानीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 13 जुलाई को देश के सभी सरकारी बैंकों (पीएसबी) और आईडीबीआई बैंक के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाना, बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा जमा (एफसीएनआर-बी) जुटाने की प्रगति की समीक्षा करना और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल में घोषित रियायती उपायों के प्रभाव का आकलन करना है। सरकार का लक्ष्य प्रवासी भारतीयों और विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए अधिक आकर्षित करना है। तीन प्रमुख मुद्दों पर रहेगा फोकस बैठक में विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR-B) खातों में जमा राशि बढ़ाने, सरकारी बैंकों द्वारा विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले विदेशी बॉन्ड तथा भारतीय कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इन तीनों माध्यमों से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। आरबीआई की रियायतों की होगी समीक्षा पिछले महीने आरबीआई ने 30 सितंबर तक के लिए कई राहत उपाय लागू किए थे। इनमें 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा को अस्थायी रूप से हटाना शामिल है, जिससे बैंक विदेशी जमाकर्ताओं को अधिक आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर सकते हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम कम करने के लिए बैंकों और सरकारी कंपनियों को रियायती दर पर फॉरेक्स स्वैप सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। विदेशी निवेश में तेजी की उम्मीद बैंकिंग क्षेत्र के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, नई रियायतों के बाद 3 जुलाई तक एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से करीब 3 से 4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की भागीदारी बढ़ने से आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। अनुमान है कि इन उपायों से भविष्य में 40 से 50 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सकता है, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलने के साथ-साथ देश की विदेशी मुद्रा स्थिति भी और सुदृढ़ होगी।
रोजाना कॉफी पीने वालों में गंभीर लिवर रोगों का खतरा कम पाया गया अगर आप रोजाना कॉफी पीते हैं, तो यह आदत सिर्फ आपको तरोताजा ही नहीं रखती, बल्कि आपके लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि नियमित रूप से कॉफी का सेवन करने वाले लोगों में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम कम देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन नतीजों के आधार पर हर किसी को अचानक ज्यादा कॉफी पीना शुरू नहीं कर देना चाहिए। करीब साढ़े तीन लाख लोगों पर किया गया अध्ययन यह शोध मेडिकल जर्नल Clinical Gastroenterology and Hepatology में प्रकाशित हुआ है। इसमें ब्रिटेन के यूके बायोबैंक (UK Biobank) के लगभग 3.55 लाख वयस्कों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का 10 वर्षों से अधिक समय तक विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की कॉफी पीने की आदत, लिवर की स्कैन रिपोर्ट, रक्त जांच और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके बाद कॉफी के सेवन और लिवर स्वास्थ्य के बीच महत्वपूर्ण संबंध सामने आए। 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीने वालों को मिला सबसे ज्यादा लाभ अध्ययन के अनुसार, जो लोग प्रतिदिन 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीते थे, उनमें लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा उल्लेखनीय रूप से कम पाया गया। शोध में सामने आए प्रमुख निष्कर्ष: लिवर सिरोसिस का खतरा 32% तक कम लिवर कैंसर का जोखिम 47% तक घटा लिवर संबंधी कारणों से मृत्यु का खतरा 42% कम हालांकि, रोजाना 1 से 2 कप कॉफी पीने वालों में भी कुछ हद तक सकारात्मक प्रभाव देखा गया। कैफीन नहीं, कॉफी के प्राकृतिक तत्व भी हैं असरदार शोध की एक दिलचस्प बात यह रही कि कैफीनयुक्त (Regular) और डिकैफ (Decaffeinated) दोनों तरह की कॉफी पीने वालों में लगभग समान लाभ देखने को मिले। इससे वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल कैफीन ही नहीं, बल्कि कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, पॉलीफेनॉल और अन्य प्राकृतिक यौगिक भी लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कैसे पहुंचाती है कॉफी लिवर को फायदा? विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में सूजन कम करने, कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाने और लिवर में अतिरिक्त वसा जमा होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि लंबे समय में लिवर को होने वाले नुकसान का जोखिम कम हो सकता है। ज्यादा चीनी मिलाने से घट सकते हैं फायदे शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कॉफी में अधिक मात्रा में चीनी, आर्टिफिशियल स्वीटनर या अत्यधिक प्रोसेस्ड क्रीमर मिलाने से लिवर को मिलने वाले कुछ फायदे कम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि कॉफी पीनी हो तो कम या बिना चीनी वाली कॉफी बेहतर विकल्प हो सकती है। क्या अब सभी लोगों को 5 कप कॉफी पीनी चाहिए? इस अध्ययन के बावजूद वैज्ञानिकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह शोध केवल कॉफी और बेहतर लिवर स्वास्थ्य के बीच संबंध दिखाता है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि कॉफी सीधे लिवर रोगों को रोकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, शराब का सेवन, वजन, खानपान और जीवनशैली जैसे कई अन्य कारक भी लिवर की सेहत को प्रभावित करते हैं। अधिक कॉफी पीने के हो सकते हैं नुकसान हर व्यक्ति का शरीर कैफीन को अलग-अलग तरीके से सहन करता है। जरूरत से ज्यादा कॉफी पीने पर कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं— बेचैनी और घबराहट नींद में बाधा दिल की धड़कन तेज होना पेट संबंधी परेशानियां गर्भवती महिलाओं और कुछ विशेष स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कैफीन का सेवन करना चाहिए। क्या कहता है यह अध्ययन? यह शोध संकेत देता है कि नियमित और संतुलित मात्रा में कॉफी पीना लिवर की सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, केवल कॉफी के भरोसे स्वस्थ रहने की बजाय संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
भारत में विटामिन D की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के पहले प्लांट-बेस्ड Vitamin D3 सप्लीमेंट को मंजूरी दे दी है। इसे Fermenta Biotech ने विकसित किया है और अब इसका उपयोग सप्लीमेंट्स, फोर्टिफाइड फूड और पेय पदार्थों में किया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बड़ी आबादी विटामिन D की कमी से प्रभावित है। ऐसे में यह नया विकल्प खासकर शाकाहारी और वीगन लोगों के लिए राहत लेकर आ सकता है। क्या है प्लांट-बेस्ड Vitamin D3? यह Vitamin D3 पौधों से प्राप्त फाइटोस्टेरॉल (Phytosterols) से तैयार किया जाता है। फाइटोस्टेरॉल ऐसे प्राकृतिक यौगिक हैं जो पौधों में पाए जाते हैं और इनसे Vitamin D3 बनाया जा सकता है। चूंकि यह पूरी तरह पौधों पर आधारित है, इसलिए यह उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है जो पशु-आधारित उत्पादों का सेवन नहीं करते। सामान्य Vitamin D3 से कैसे अलग है? बाजार में उपलब्ध अधिकांश Vitamin D3 सप्लीमेंट लैनोलिन (Lanolin) से बनाए जाते हैं। लैनोलिन भेड़ की ऊन से प्राप्त एक प्राकृतिक पदार्थ है, जिससे Vitamin D3 तैयार किया जाता है। इसके विपरीत, नया प्लांट-बेस्ड Vitamin D3 किसी भी पशु स्रोत पर निर्भर नहीं है। यही वजह है कि इसे शाकाहारी, वीगन और जैन समुदाय के लोगों के लिए अधिक उपयुक्त माना जा रहा है। क्या असर में भी उतना ही प्रभावी है? विशेषज्ञों का कहना है कि प्लांट-बेस्ड Vitamin D3 की रासायनिक संरचना और शरीर में अवशोषित होने की क्षमता (Bioavailability) पारंपरिक Vitamin D3 के समान है। यानी यह शरीर में Vitamin D के स्तर को बढ़ाने में उतना ही प्रभावी हो सकता है। हालांकि, इसका असर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और शरीर की जरूरत के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। Vitamin D2 और Vitamin D3 में क्या अंतर है? Vitamin D के दो प्रमुख रूप होते हैं— Vitamin D2 (Ergocalciferol): आमतौर पर पौधों से प्राप्त होता है। Vitamin D3 (Cholecalciferol): पारंपरिक रूप से पशु स्रोतों से बनाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, Vitamin D3 शरीर में Vitamin D का स्तर बढ़ाने में Vitamin D2 की तुलना में अधिक प्रभावी माना जाता है। यही कारण है कि डॉक्टर अक्सर Vitamin D3 सप्लीमेंट की सलाह देते हैं। किन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है? यह नया प्लांट-बेस्ड Vitamin D3 विशेष रूप से इन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है— शाकाहारी और वीगन लोग जैन समुदाय के लोग जिनमें Vitamin D की कमी पाई गई हो ऐसे लोग जो पशु-आधारित सप्लीमेंट का इस्तेमाल नहीं करना चाहते क्या इसे खाने-पीने की चीजों में मिलाया जा सकेगा? इस नए Vitamin D3 को पाउडर और ऑयल दोनों रूपों में तैयार किया गया है। इसकी मदद से दूध, पेय पदार्थ, हेल्थ ड्रिंक, गमीज़ और अन्य फोर्टिफाइड खाद्य उत्पादों में Vitamin D मिलाया जा सकेगा। इससे लोगों तक Vitamin D पहुंचाना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकता है। Vitamin D की कमी के क्या हैं लक्षण? यदि शरीर में लंबे समय तक Vitamin D की कमी बनी रहे तो कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं— हड्डियों में दर्द मांसपेशियों की कमजोरी लगातार थकान बार-बार फ्रैक्चर होना बच्चों में विकास की धीमी गति रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करानी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना सप्लीमेंट न लें हालांकि प्लांट-बेस्ड Vitamin D3 एक नया और बेहतर विकल्प माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी प्रकार का Vitamin D सप्लीमेंट शुरू करने से पहले जांच कराना और डॉक्टर से उचित मात्रा (Dose) व अवधि के बारे में सलाह लेना जरूरी है। नई मंजूरी के बाद उम्मीद की जा रही है कि यह विकल्प भारत में Vitamin D की कमी से जूझ रहे लाखों लोगों, खासकर शाकाहारी समुदाय, के लिए एक सुलभ और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।
मुंहासों (Acne) की समस्या से छुटकारा पाने के लिए लोग अक्सर फेसवॉश, सीरम और क्रीम का सहारा लेते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ त्वचा के लिए शरीर को अंदर से भी पोषण मिलना जरूरी है। कुछ हर्बल ड्रिंक्स एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती हैं, जो त्वचा को स्वस्थ रखने और मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद कर सकती हैं। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि ज्यादा चीनी वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। कुछ लोगों में डेयरी उत्पाद भी मुंहासों को बढ़ा सकते हैं। 1. स्पीयरमिंट टी (Spearmint Tea) स्पीयरमिंट टी को मुंहासों के लिए सबसे लोकप्रिय हर्बल ड्रिंक्स में से एक माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा को शांत रखने में मदद कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से 1 से 2 कप स्पीयरमिंट टी पीने से कुछ लोगों में मुंहासों की समस्या कम हो सकती है। 2. ग्रीन टी और नींबू ग्रीन टी में कैटेचिन (Catechins) जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो त्वचा की सुरक्षा और इम्यूनिटी को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसमें नींबू का रस मिलाने से विटामिन C की मात्रा बढ़ जाती है, जो त्वचा को चमकदार बनाए रखने और कोलेजन बनने में सहायक होता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, ग्रीन टी त्वचा में अतिरिक्त तेल (Sebum) बनने की प्रक्रिया को भी कम करने में मदद कर सकती है। 3. नीम और शहद का पेय नीम अपने एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों के लिए जाना जाता है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर पीने से इसका स्वाद बेहतर हो सकता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यह शरीर को साफ रखने और त्वचा संबंधी समस्याओं में मददगार माना जाता है। 4. आंवला और अदरक का शॉट आंवला विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। वहीं अदरक में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। दोनों का मिश्रण इम्यूनिटी मजबूत करने के साथ त्वचा को भी अंदर से पोषण देने में सहायक माना जाता है। 5. लेमनग्रास और हल्दी की चाय लेमनग्रास और हल्दी दोनों में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) त्वचा की सूजन कम करने में मदद कर सकता है। कुछ विशेषज्ञ पीसीओडी (PCOD) से जुड़ी मुंहासों की समस्या में लेमनग्रास, हल्दी और काली मिर्च से बनी हर्बल चाय को लाभकारी मानते हैं। सिर्फ ड्रिंक पर न रहें निर्भर ध्यान रखें कि ये हर्बल ड्रिंक्स मुंहासों का इलाज नहीं हैं। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और सही स्किनकेयर रूटीन के साथ इनका सेवन करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। यदि मुंहासे लंबे समय तक बने रहें या गंभीर हों, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
ड्रैगन फ्रूट अपनी आकर्षक गुलाबी रंगत और अनोखे स्वाद के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह केवल देखने में ही खूबसूरत नहीं, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें फाइबर, विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और पानी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर स्वास्थ्य को कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी भी एक फल को चमत्कारी इलाज नहीं माना जाना चाहिए। इसके फायदे संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ ही बेहतर रूप से मिलते हैं। 1. शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद ड्रैगन फ्रूट में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिल सकती है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम मात्रा में मौजूद होते हैं। 2. पाचन और आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद इसमें मौजूद फाइबर प्रीबायोटिक की तरह काम करता है, जो आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देने में मदद कर सकता है। इससे पाचन बेहतर रहने और कब्ज जैसी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। 3. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ड्रैगन फ्रूट में बेटालेन्स, फ्लेवोनॉयड्स और अन्य एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने और कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं। 4. त्वचा की सेहत को मिल सकता है समर्थन विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा में कोलेजन बनने की प्रक्रिया को समर्थन देते हैं। साथ ही, पर्याप्त पानी त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है, जिससे त्वचा स्वस्थ दिख सकती है। 5. ब्लड शुगर संतुलित रखने में सहायक ड्रैगन फ्रूट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर ग्लूकोज के अवशोषण की गति को धीमा करने में मदद कर सकता है। हालांकि, मधुमेह के मरीज इसे दवा का विकल्प न मानें और डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही सेवन करें। 6. आयरन के अवशोषण में मदद ड्रैगन फ्रूट में मौजूद विटामिन C शरीर को पौधों से मिलने वाले आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद कर सकता है। इसे दाल, हरी पत्तेदार सब्जियों या बीन्स जैसे आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ खाया जा सकता है। 7. रोग प्रतिरोधक क्षमता को मिल सकता है समर्थन फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सामान्य रूप से बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर यह लंबे समय तक स्वास्थ्य को समर्थन दे सकता है। एक दिन में कितना ड्रैगन फ्रूट खाना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए 150 से 200 ग्राम (लगभग एक कप) ड्रैगन फ्रूट प्रतिदिन संतुलित आहार के हिस्से के रूप में खाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी या पाचन संबंधी समस्या है, तो इसे धीरे-धीरे आहार में शामिल करना बेहतर माना जाता है। इन बातों का रखें ध्यान ड्रैगन फ्रूट वजन घटाने या शरीर को "डिटॉक्स" करने का कोई चमत्कारी उपाय नहीं है। इसे किसी बीमारी की दवा का विकल्प न समझें। अधिकतम लाभ के लिए इसे संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ शामिल करें।
नई दिल्ली: अंडे को दुनिया के सबसे संपूर्ण और पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट्स और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों और कार्यों को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि संतुलित आहार के साथ लगातार 30 दिनों तक रोज़ाना दो अंडे खाए जाएं, तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। डाइटिशियन गिन्नी कालरा के अनुसार, अंडे कोई जादुई भोजन नहीं हैं, लेकिन नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है, जिससे मांसपेशियों, दिमाग, आंखों, हड्डियों और त्वचा की सेहत में सुधार देखने को मिल सकता है। मसल्स होंगे मजबूत, रिकवरी होगी तेज दो अंडों से लगभग 12–13 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी नौ अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, जो मांसपेशियों के विकास, टिश्यू रिपेयर और रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित व्यायाम करने वाले, बुजुर्ग और बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है। देर तक नहीं लगेगी भूख अंडे में मौजूद प्रोटीन और हेल्दी फैट्स धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है। अगर नाश्ते में दो अंडे शामिल किए जाएं तो बार-बार स्नैकिंग की आदत कम हो सकती है और वजन नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। दिमाग रहेगा अधिक सक्रिय अंडों में कोलीन (Choline) नामक पोषक तत्व पाया जाता है, जो मस्तिष्क, याददाश्त और नर्वस सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। यह एसिटाइलकोलीन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जिससे सीखने की क्षमता, एकाग्रता और मानसिक सतर्कता बेहतर हो सकती है। आंखों की सेहत को मिलेगा फायदा अंडे में मौजूद ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट आंखों की रेटिना की सुरक्षा करते हैं। ये बढ़ती उम्र और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक माने जाते हैं। हड्डियां होंगी मजबूत अंडे प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी का स्रोत हैं, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इससे हड्डियों और दांतों की मजबूती के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी समर्थन मिलता है। हालांकि, केवल अंडों से पूरी विटामिन-डी की आवश्यकता पूरी नहीं होती, लेकिन यह कुल पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। त्वचा, बाल और नाखूनों में दिख सकता है सुधार अंडों में बायोटिन, सेलेनियम, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स और प्रोटीन मौजूद होते हैं, जो बालों, त्वचा और नाखूनों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। संतुलित आहार के साथ नियमित सेवन करने पर कुछ सप्ताह में सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। क्या अंडे खाने से बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल? यह सबसे आम सवालों में से एक है। हाल के वर्षों में हुई कई रिसर्च बताती हैं कि अधिकांश स्वस्थ लोगों में सीमित मात्रा में अंडे खाने से हृदय रोग का खतरा नहीं बढ़ता। शरीर स्वयं कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को नियंत्रित करता है और अंडों से मिलने वाला डाइटरी कोलेस्ट्रॉल पहले की तुलना में कम प्रभाव डालता है। हालांकि, जिन लोगों को अनियंत्रित डायबिटीज, फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया या पहले से हृदय संबंधी गंभीर बीमारी है, उन्हें नियमित रूप से अंडे खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। क्या रोज़ दो अंडे पर्याप्त हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए रोज़ाना दो अंडे पर्याप्त माने जाते हैं। इससे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और हेल्दी फैट्स की संतुलित मात्रा मिल जाती है। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए अंडों के साथ फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल करना जरूरी है। ध्यान रहे कि 30 दिनों में कोई चमत्कारी परिवर्तन नहीं होता, लेकिन नियमित और संतुलित जीवनशैली के साथ दो अंडों का सेवन शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में निश्चित रूप से सहायक हो सकता है।
भारतीय रसोई में खाना बनाने के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। उत्तर भारत में जहां सरसों का तेल सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, वहीं दक्षिण भारत में नारियल तेल का उपयोग अधिक होता है। लेकिन अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने सलाह दी है कि लंबे समय तक सिर्फ एक ही प्रकार के तेल का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प नहीं है। ICMR की नई डाइटरी गाइडलाइंस के मुताबिक, बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाना बनाने में समय-समय पर अलग-अलग खाद्य तेलों का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के आवश्यक फैटी एसिड और पोषक तत्व मिलते हैं। क्यों बदल-बदलकर इस्तेमाल करना चाहिए कुकिंग ऑयल? ICMR और FSSAI के अनुसार, कोई भी एक कुकिंग ऑयल सभी जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध नहीं कराता। हर खाद्य तेल की अपनी अलग पोषण संबंधी विशेषताएं होती हैं। ऐसे में यदि लोग अलग-अलग तेलों का संतुलित उपयोग करते हैं, तो शरीर को विभिन्न प्रकार के हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्दी डाइट का मतलब तेल पूरी तरह छोड़ देना नहीं, बल्कि सही मात्रा और सही तरीके से उसका इस्तेमाल करना है। ICMR की हेल्दी ऑयल गाइडलाइन स्वस्थ रहने के लिए ICMR ने कुछ आसान सुझाव दिए हैं— एक ही तेल का लगातार इस्तेमाल करने के बजाय समय-समय पर तेल बदलें। तेल का उपयोग सीमित मात्रा में करें। एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा गर्म करने से बचें। ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। डीप फ्राई की बजाय स्टीम, ग्रिल या रोस्टेड भोजन को प्राथमिकता दें। कौन-सा तेल किसलिए फायदेमंद है? सरसों का तेल सरसों का तेल मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड और ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है और इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं। तिल का तेल तिल के तेल में ओमेगा-6 फैटी एसिड और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। यह शरीर में सूजन कम करने और कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद कर सकता है। नारियल तेल नारियल तेल में मीडियम चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs) पाए जाते हैं, जो शरीर को जल्दी ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। हालांकि इसका सेवन भी सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। पाम ऑयल ICMR के अनुसार, पाम ऑयल में टोकोफेरॉल्स, टोकोट्रिएनोल्स (विटामिन E के रूप) और कैरोटेनॉयड्स जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। संतुलित मात्रा में उपयोग करने पर यह भी आहार का हिस्सा हो सकता है। हालांकि इसका अत्यधिक सेवन किसी भी अन्य तेल की तरह उचित नहीं माना जाता। सूरजमुखी का तेल सूरजमुखी का तेल विटामिन-E और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड से भरपूर होता है। यह त्वचा और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। तेल की मात्रा कैसे करें कम? FSSAI के मुताबिक, यदि आप रोजाना इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा में लगभग 10 प्रतिशत की कमी कर दें, तो इससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा— डीप फ्राइड फूड्स कम खाएं। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। घर में कम तेल वाले भोजन को प्राथमिकता दें। भोजन में फल, सब्जियां और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएं। क्या है विशेषज्ञों की सलाह? विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए किसी एक तेल को 'सबसे बेहतर' मानने के बजाय संतुलित और विविधतापूर्ण आहार अपनाना ज्यादा जरूरी है। अलग-अलग कुकिंग ऑयल का सीमित मात्रा में उपयोग, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि मिलकर हृदय और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।
गर्मी बढ़ते ही ज्यादातर लोग फ्रिज का ठंडा या बर्फ वाला पानी पीकर राहत महसूस करते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक ठंडा पानी, खासकर भोजन के तुरंत बाद पीना, पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इससे कुछ लोगों को गैस, अपच, पेट भारी लगना या असहजता जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ठंडा पानी पाचन पर कैसे असर डालता है? विशेषज्ञों के अनुसार शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस होता है। जब बहुत ठंडा पानी पेट में पहुंचता है, तो कुछ समय के लिए पाचन तंत्र का तापमान कम हो सकता है। इससे भोजन को पचाने वाले एंजाइमों की कार्यक्षमता अस्थायी रूप से धीमी पड़ सकती है, जिसके कारण भोजन को पचने में अधिक समय लग सकता है। फैट पचाने में हो सकती है दिक्कत पाचन विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत ठंडा पानी वसायुक्त (फैटी) भोजन के बाद पीने से कुछ लोगों में फैट के टूटने और पाचन की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। हालांकि यह कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अपच और भारीपन की शिकायत बढ़ सकती है। ब्लड सर्कुलेशन पर भी पड़ सकता है असर अत्यधिक ठंडा पानी पीने से पेट और आंतों के आसपास की रक्त वाहिकाएं कुछ समय के लिए सिकुड़ सकती हैं। इससे पाचन अंगों तक रक्त प्रवाह अस्थायी रूप से कम हो सकता है, जिसके कारण पाचन की गति प्रभावित हो सकती है। किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत? एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) से पीड़ित लोग Irritable Bowel Syndrome (IBS) के मरीज बार-बार अपच की समस्या वाले लोग भोजन के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने वाले लोग भारी वर्कआउट के तुरंत बाद बर्फ वाला पानी पीने वाले लोग क्या करें? सामान्य तापमान का पानी पीने की आदत डालें। भोजन के तुरंत बाद बहुत ठंडा पानी पीने से बचें। गर्मियों में घड़े का पानी बेहतर विकल्प हो सकता है। अदरक, पुदीना और सौंफ जैसी हर्बल ड्रिंक्स पाचन में मदद कर सकती हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर पिएं, लेकिन अत्यधिक बर्फ वाला पानी नियमित आदत न बनाएं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब खानपान और धूप से दूरी के कारण विटामिन डी की कमी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक इस जरूरी विटामिन की कमी केवल हड्डियों को ही नहीं, बल्कि शरीर के शुगर मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम विटामिन डी स्तर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। इंसुलिन के लिए क्यों जरूरी है विटामिन डी? विटामिन डी केवल कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की मजबूती तक सीमित नहीं है। यह इंसुलिन के उत्पादन और उसके प्रभावी कार्य में भी मदद करता है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो रक्त में मौजूद शुगर को नियंत्रित करता है। अध्ययनों के अनुसार, जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। डायबिटीज के साथ बढ़ सकता है अन्य बीमारियों का खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को विटामिन डी की कमी और डायबिटीज दोनों हैं, तो माइक्रोवैस्कुलर जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसका असर शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं पर पड़ता है, जिससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं: डायबिटिक रेटिनोपैथी (आंखों की बीमारी) डायबिटिक नेफ्रोपैथी (किडनी को नुकसान) डायबिटिक न्यूरोपैथी (नसों की कमजोरी) विटामिन डी की कमी से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जो रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाकर ब्लड फ्लो को प्रभावित कर सकती है। विटामिन डी की कमी के संकेत लगातार थकान और कमजोरी मांसपेशियों में दर्द हड्डियों में दर्द बार-बार बीमार पड़ना ऊर्जा की कमी ब्लड शुगर नियंत्रण में परेशानी विटामिन डी की कमी कैसे दूर करें? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान उपाय अपनाकर विटामिन डी के स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है: रोज सुबह 20 से 30 मिनट धूप में समय बिताएं। आहार में अंडा, मशरूम, फैटी फिश, दूध और दही शामिल करें। नियमित रूप से व्यायाम, योग और वॉक करें। डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी सप्लीमेंट लें। जरूरत पड़ने पर 25(OH)D टेस्ट करवाएं। क्या केवल विटामिन डी की कमी से डायबिटीज होती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि डायबिटीज एक बहु-कारक बीमारी है। केवल विटामिन डी की कमी को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। हालांकि, पर्याप्त विटामिन डी स्तर बनाए रखना बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
भीषण गर्मी, पसीना और डिहाइड्रेशन के बीच नारियल पानी एक नेचुरल एनर्जी ड्रिंक बनकर उभर रहा है। इलेक्ट्रोलाइट्स, पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन और स्किन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। अब एक्सपर्ट्स ने बताया है कि इसे किस समय पीना सबसे ज्यादा असरदार हो सकता है। सुबह खाली पेट पीना क्यों फायदेमंद? इंटीग्रेटिव न्यूट्रिशनिस्ट्स के मुताबिक, सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से शरीर को नेचुरल डिटॉक्स सपोर्ट मिलता है। यह पाचन को बेहतर बनाने, शरीर का pH बैलेंस बनाए रखने और दिनभर की हाइड्रेशन जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है। क्लिनिकल डाइटिशियन वेदिका प्रेमानी के अनुसार, गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए तेजी से इलेक्ट्रोलाइट्स निकलते हैं। ऐसे में नारियल पानी उन्हें प्राकृतिक तरीके से रिप्लेस करने में मदद करता है। इससे स्किन हाइड्रेटेड रहती है और थकान भी कम महसूस होती है। वर्कआउट और गर्मी के बाद भी असरदार एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेज धूप, लंबे सफर या वर्कआउट के बाद नारियल पानी पीना शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है। यह बाजार में मिलने वाले शुगर-लोडेड ड्रिंक्स की तुलना में हल्का और ज्यादा हेल्दी विकल्प माना जाता है। कितना नारियल पानी पीना सही? विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में दिन में 1 से 2 गिलास यानी करीब 200-300ml नारियल पानी पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, ज्यादा गर्मी या भारी फिजिकल एक्टिविटी के दौरान इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। खासकर किडनी रोग या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही नियमित सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसमें पोटैशियम और नेचुरल शुगर मौजूद होती है। स्वाद और फायदे बढ़ाने के आसान तरीके एक्सपर्ट्स नारियल पानी में चिया सीड्स, नींबू या खीरा मिलाने की सलाह भी देते हैं। इससे फाइबर, विटामिन C और अतिरिक्त हाइड्रेशन का फायदा मिल सकता है। नारियल पानी के प्रमुख फायदे शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद पाचन और पेट की समस्याओं में राहत स्किन हेल्थ को सपोर्ट वर्कआउट के बाद रिकवरी में मदद गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाता है शुगर ड्रिंक्स का हेल्दी विकल्प
गर्मियों में ज्यादा फल खाना भी बन सकता है परेशानी गर्मी का मौसम आते ही बाजार आम, तरबूज, लीची और पपीते जैसे फलों से भर जाते हैं। लोग इन्हें हेल्दी मानकर बिना सोचे-समझे खूब खाते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा फल खाना शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है, खासकर डायबिटीज, मोटापा और फैटी लिवर से जूझ रहे लोगों के लिए। विशेषज्ञों के मुताबिक फलों में प्राकृतिक शुगर यानी फ्रक्टोज होता है। सीमित मात्रा में यह फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा सेवन करने पर यह लिवर पर दबाव बढ़ा सकता है और ब्लड शुगर भी बढ़ा सकता है। आम खाते समय रखें मात्रा का ध्यान आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल माना जाता है, लेकिन इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग एक दिन में आधा मध्यम आकार का आम ही खाएं। सामान्य लोग एक छोटा या मध्यम आकार का आम खा सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आम को भोजन के तुरंत बाद खाने के बजाय स्नैक की तरह खाएं। इसके साथ दही, पनीर, भुना चना या ड्राई फ्रूट्स लेने से शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। मैंगो शेक, आमरस और पैकेज्ड जूस से बचने की सलाह दी गई है। तरबूज ज्यादा खाने से भी बढ़ सकती है शुगर तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए लोग इसे बड़ी मात्रा में खा लेते हैं। हालांकि यह हल्का फल माना जाता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए 100-150 ग्राम तरबूज पर्याप्त माना गया है। अन्य लोग करीब 200 ग्राम तक खा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तरबूज का जूस पीने से बचना चाहिए, क्योंकि उसमें फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है। लीची खाते समय बरतें सावधानी लीची स्वादिष्ट जरूर होती है, लेकिन इसमें फ्रक्टोज की मात्रा काफी ज्यादा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग 3-4 लीची तक सीमित रहें। सामान्य लोग 7-8 लीची खा सकते हैं। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कच्ची लीची खाली पेट खाना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। बिहार में पहले भी इससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ चुके हैं। पपीता और आड़ू बेहतर विकल्प पपीता अपेक्षाकृत हल्का और सुरक्षित फल माना जाता है। डायबिटीज मरीज 100 ग्राम तक पपीता खा सकते हैं। अन्य लोग 150-200 ग्राम तक सेवन कर सकते हैं। वहीं आड़ू और आलूबुखारा जैसे फल भी सीमित मात्रा में अच्छे विकल्प माने जाते हैं। फ्रूट प्लेटर भी बन सकता है खतरा डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग एक साथ आम, तरबूज, लीची, खरबूजा और पपीता मिलाकर बड़ा फ्रूट बाउल खा लेते हैं। देखने में यह हेल्दी लगता है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: अलग-अलग फल खाने पर भी कुल मात्रा नियंत्रित रखें। डायबिटीज वाले लोग कुल मिलाकर करीब 100 ग्राम फल ही लें। सामान्य लोग 200 ग्राम तक फल खा सकते हैं। कब खाना चाहिए फल? डॉक्टरों के मुताबिक फल खाने का सही समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। फलों को भोजन के बीच में खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है। रात में भारी मात्रा में फल खाने से बचना चाहिए। सुबह या दिन में फल खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है। जूस नहीं, साबुत फल खाएं विशेषज्ञों का कहना है कि ताजे और साबुत फल हमेशा जूस से बेहतर होते हैं। जूस में फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।