wellness

Fresh garlic cloves and bulbs highlighting their potential immune-supporting benefits and traditional Ayurvedic health uses.
सच या झूठ: क्या वाकई लहसुन खाने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है? आयुर्वेदाचार्य से जानें खाली पेट खाना कितना सही

Garlic for Immunity: भारतीय रसोई में लहसुन केवल स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं, बल्कि पारंपरिक घरेलू नुस्खों का भी अहम हिस्सा माना जाता है। सर्दी, जुकाम और संक्रमण के मौसम में कई लोग सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद में लहसुन को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है, जबकि आधुनिक शोध भी इसके कुछ स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि करते हैं। लेकिन क्या वास्तव में सिर्फ लहसुन खाने से इम्यूनिटी मजबूत हो जाती है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय। क्या लहसुन सच में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है? आयुर्वेदाचार्य डॉ. राजेश बयारी (एमडी, चित्रकूटा आयुर्वेद चिकित्सालय, कुंडापुरा) के अनुसार, लहसुन में मौजूद एलिसिन (Allicin), सल्फर यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। ये तत्व एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा लहसुन: पाचन शक्ति को बेहतर बनाने में मदद करता है। रक्त संचार को सुधारने में सहायक होता है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में योगदान दे सकता है। हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद में लहसुन का महत्व आयुर्वेद में लहसुन को 'लशुन' कहा गया है। चरक संहिता और भावप्रकाश निघंटु जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसे औषधीय पौधे के रूप में वर्णित किया गया है। आयुर्वेद के अनुसार लहसुन: पाचन शक्ति (अग्नि) को मजबूत करता है। वात और कफ दोष को संतुलित करता है। शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है। संक्रमण से लड़ने की क्षमता को समर्थन देता है। हृदय और रक्त संचार को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। आधुनिक शोध क्या कहते हैं? वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, लहसुन में एलिसिन, डायलिल सल्फाइड (Diallyl Sulfide), एजोइन (Ajoene) और अन्य ऑर्गेनोसल्फर यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में एंटीऑक्सीडेंट और हल्के एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव दिखा सकते हैं। कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि नियमित मात्रा में लहसुन का सेवन प्रतिरक्षा कोशिकाओं के सामान्य कार्य को समर्थन दे सकता है और सामान्य सर्दी-जुकाम की संभावना कुछ हद तक कम कर सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल लहसुन खाने से इम्यूनिटी चमत्कारिक रूप से नहीं बढ़ती। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और समय पर टीकाकरण भी बेहद जरूरी हैं। क्या खाली पेट लहसुन खाना सही है? आयुर्वेद के अनुसार इसका जवाब व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति पर निर्भर करता है। यदि: कफ या वात दोष अधिक है, पाचन शक्ति कमजोर है, तो सुबह गुनगुने पानी के साथ 1–2 कली कच्चा लहसुन लेना लाभकारी माना जा सकता है। लेकिन यदि: पित्त प्रकृति है, एसिडिटी रहती है, गैस्ट्राइटिस या पेट के अल्सर की समस्या है, तो खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए भोजन में पकाकर या हल्का भूनकर लहसुन खाना अधिक सुरक्षित माना जाता है।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Illustration of a human liver and bile ducts highlighting Primary Sclerosing Cholangitis (PSC) and common digestive symptoms.
खाना पचाने में हो रही है दिक्कत? लिवर की गंभीर बीमारी PSC हो सकती है वजह, जानें लक्षण, कारण और बचाव

नई दिल्ली: अगर घर का सामान्य खाना खाने के बाद भी आपको बार-बार गैस, पेट फूलना, भारीपन, एसिडिटी या खाना ठीक से न पचने जैसी समस्या होती है, तो इसे केवल पाचन संबंधी परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञों के अनुसार ये लक्षण प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस (Primary Sclerosing Cholangitis - PSC) जैसी गंभीर लिवर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। यह एक दुर्लभ लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जिसमें लिवर के अंदर और बाहर मौजूद पित्त नलिकाओं (Bile Ducts) में सूजन और फाइब्रोसिस (स्कार टिश्यू) बनने लगता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और बाइल डक्ट कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। क्या है प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस (PSC)? विशेषज्ञों के अनुसार PSC एक क्रॉनिक कोलेस्टेटिक लिवर डिजीज है। इस बीमारी में पित्त नलिकाओं में लगातार सूजन बनी रहती है, जिससे वे धीरे-धीरे संकरी और कठोर होने लगती हैं। इस कारण पित्त (Bile) का सामान्य प्रवाह रुक जाता है। चूंकि पित्त वसा (Fat) को पचाने और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इसका प्रवाह बाधित होने पर लिवर को नुकसान पहुंचने लगता है। हालांकि इस बीमारी का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसे ऑटोइम्यून बीमारी माना जाता है। PSC होने पर शरीर में क्या होता है? जब पित्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, तो— लिवर में सूजन बढ़ने लगती है। धीरे-धीरे फाइब्रोसिस और सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। वसा के पाचन में परेशानी होती है। विटामिन A, D, E और K जैसे फैट-सॉल्युबल विटामिन का अवशोषण कम हो सकता है। शरीर में कमजोरी और पोषण की कमी होने लगती है। PSC के शुरुआती लक्षण शुरुआती चरण में कई लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार इसका पता केवल ब्लड टेस्ट में लिवर एंजाइम बढ़ने से चलता है। समय के साथ ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं— खाना ठीक से न पचना गैस और पेट में भारीपन लगातार थकान त्वचा में खुजली पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द भूख कम लगना बिना वजह वजन घटना आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया) संक्रमण होने पर बुखार या ठंड लगना यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या हेपेटोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए। किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा? विशेषज्ञों के अनुसार निम्न परिस्थितियों में PSC का जोखिम बढ़ सकता है— परिवार में पहले किसी को यह बीमारी होना इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (विशेषकर Ulcerative Colitis) 30 से 50 वर्ष की आयु पुरुषों में अपेक्षाकृत अधिक जोखिम कुछ आनुवंशिक (HLA) जीन परिवर्तन प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) की असामान्य प्रतिक्रिया क्या इसका इलाज संभव है? फिलहाल PSC का ऐसा कोई इलाज उपलब्ध नहीं है जिससे बीमारी पूरी तरह समाप्त हो सके। उपचार का मुख्य उद्देश्य होता है— लक्षणों को नियंत्रित करना संक्रमण से बचाना लिवर को और अधिक नुकसान होने से रोकना जटिलताओं के जोखिम को कम करना गंभीर मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता भी पड़ सकती है। कब डॉक्टर से संपर्क करें? यदि आपको लंबे समय से— खाना पचाने में परेशानी, लगातार गैस और पेट फूलना, त्वचा में खुजली, बार-बार थकान, पीलिया, या लिवर एंजाइम बढ़े होने की जानकारी मिले, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच और उपचार से बीमारी की प्रगति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।  

surbhi जुलाई 21, 2026 0
Person showing unexplained bruises on arm with healthy foods supporting platelet-friendly nutrition and vitamins.
कुछ विटामिन की कमी से हो सकता है Thrombocytopenia, शरीर पर दिखने लगते हैं नीले निशान, जानें कारण, लक्षण और डाइट

Low Platelet Count सिर्फ डेंगू की वजह से नहीं होता। विटामिन B12, फोलेट (B9), कॉपर की कमी, वायरल संक्रमण, ऑटोइम्यून बीमारियां और कुछ दवाएं भी Thrombocytopenia का कारण बन सकती हैं। सही पोषण और समय पर जांच से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। Thrombocytopenia: केवल डेंगू नहीं, पोषण की कमी भी बन सकती है प्लेटलेट्स घटने की वजह शरीर में प्लेटलेट्स खून का थक्का बनाने और अत्यधिक रक्तस्राव रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य स्तर से कम हो जाती है, तो इस स्थिति को Thrombocytopenia (लो प्लेटलेट काउंट) कहा जाता है। अक्सर लोग इसे सिर्फ डेंगू से जोड़ते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार वायरल संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग, बोन मैरो से जुड़ी समस्याएं, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, लिवर या तिल्ली से संबंधित बीमारियां और पोषण की कमी भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में 1.5 लाख से 4.5 लाख प्लेटलेट्स प्रति माइक्रोलिटर होते हैं। यदि यह संख्या 1.5 लाख से कम हो जाए, तो जांच की जरूरत पड़ सकती है। बहुत कम प्लेटलेट्स होने पर मामूली चोट में भी ज्यादा खून बह सकता है और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। Thrombocytopenia के प्रमुख कारण वायरल संक्रमण (डेंगू, चिकनगुनिया, हेपेटाइटिस, HIV, EBV) ऑटोइम्यून बीमारियां बोन मैरो से जुड़ी समस्याएं विटामिन B12, फोलेट (B9) और कॉपर की कमी कुछ एंटीबायोटिक्स, कीमोथेरेपी और अन्य दवाओं के दुष्प्रभाव लिवर या बढ़ी हुई तिल्ली से जुड़ी समस्याएं इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें बिना चोट के शरीर पर नीले निशान पड़ना त्वचा पर लाल या बैंगनी छोटे धब्बे मसूड़ों या नाक से बार-बार खून आना मामूली चोट पर देर तक रक्तस्राव महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म पेशाब या मल में खून गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव प्लेटलेट्स को सपोर्ट करने वाली डाइट संतुलित आहार प्लेटलेट्स के उत्पादन में मदद करने वाले पोषक तत्व उपलब्ध करा सकता है। अपनी डाइट में शामिल करें— पालक, मेथी और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां चुकंदर दालें और राजमा अंडे दूध, दही और पनीर मछली और लीन मीट (यदि नॉन-वेज खाते हैं) संतरा, आंवला, अमरूद जैसे विटामिन C युक्त फल बादाम, काजू, कद्दू और सूरजमुखी के बीज साबुत अनाज पर्याप्त मात्रा में पानी ध्यान रखें यदि प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहे हों, बिना वजह शरीर पर नीले निशान पड़ रहे हों या बार-बार खून आने जैसी समस्या हो रही हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। सही कारण की पहचान और समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।   

anmol जुलाई 20, 2026 0
Person checking blood sugar with a glucometer while healthy food and daily lifestyle habits are highlighted.
Diabetes Care: सिर्फ मीठा ही नहीं, आपकी ये रोजमर्रा की आदतें भी बढ़ा सकती हैं ब्लड शुगर, जानें कैसे करें बचाव

डायबिटीज (मधुमेह) आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। अक्सर लोग मानते हैं कि केवल मीठा खाने से ही ब्लड शुगर बढ़ता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई ऐसी दैनिक आदतें भी हैं जो शुगर लेवल को असंतुलित कर सकती हैं और बीमारी को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकती हैं। डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी बेहद जरूरी है। सिर्फ चीनी नहीं, फास्ट फूड भी बढ़ा सकता है परेशानी डायबिटीज में केवल मिठाइयों से दूरी बनाना पर्याप्त नहीं होता। कई फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भी ब्लड शुगर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इनमें शामिल हैं: बर्गर और पिज्जा फ्रेंच फ्राइज पैकेज्ड स्नैक्स प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड इन खाद्य पदार्थों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अस्वास्थ्यकर वसा और अतिरिक्त शर्करा अधिक हो सकती है। इनके नियमित सेवन से वजन बढ़ने, इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होने और ब्लड शुगर नियंत्रण में कठिनाई आ सकती है। लंबे समय तक बैठे रहना भी हो सकता है नुकसानदायक शारीरिक निष्क्रियता डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक मानी जाती है। जब शरीर सक्रिय रहता है, तो मांसपेशियां ग्लूकोज का बेहतर उपयोग करती हैं और इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) में सुधार होता है। वहीं लंबे समय तक बैठे रहने से ब्लड शुगर नियंत्रित रखना कठिन हो सकता है। विशेषज्ञ आमतौर पर रोज कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करने की सलाह देते हैं। अनियमित दिनचर्या बढ़ा सकती है जोखिम समय पर भोजन न करना, देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या अपनाना भी ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इन आदतों से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (Body Clock) प्रभावित होती है, जिससे ग्लूकोज नियंत्रण पर असर पड़ सकता है। तनाव को नजरअंदाज न करें लगातार तनाव रहने पर शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। तनाव कम करने के लिए: पर्याप्त नींद लें। योग और ध्यान करें। नियमित व्यायाम करें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। डायबिटीज में अपनाएं ये अच्छी आदतें संतुलित और पौष्टिक भोजन करें। नियमित समय पर खाना खाएं। रोजाना शारीरिक गतिविधि करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और जांच समय पर कराएं। ब्लड शुगर की नियमित मॉनिटरिंग करें। ध्यान रखें डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल मीठे से दूरी बनाना काफी नहीं है। स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है। यदि ब्लड शुगर बार-बार बढ़ रहा हो या कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Person experiencing painful mouth ulcers while applying a soothing home remedy for relief and oral care.
Mouth Ulcers: मुंह के छालों से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय, जल्द मिल सकती है राहत

मुंह के छाले (Mouth Ulcers) एक आम समस्या है, लेकिन इनके कारण खाना, पानी पीना और बोलना तक मुश्किल हो सकता है। ये छोटे-छोटे घाव जीभ, होंठों के अंदर, मसूड़ों या गालों की अंदरूनी सतह पर हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर मामलों में ये 7 से 14 दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि सही देखभाल और कुछ घरेलू उपाय दर्द कम करने और घाव भरने की प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं। नोट: घरेलू उपाय केवल सामान्य और हल्के छालों में राहत के लिए हैं। यदि समस्या गंभीर या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। मुंह में छाले क्यों होते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, मुंह के छालों के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे: विटामिन B12, आयरन या फोलिक एसिड की कमी मानसिक तनाव हार्मोनल बदलाव बहुत मसालेदार या खट्टा भोजन मुंह के अंदर चोट लगना कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली छाले होने पर सबसे पहले क्या करें? अगर मुंह में छाले हो गए हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: मसालेदार, ज्यादा गर्म और खट्टे भोजन से बचें। दिन में 3–4 बार गुनगुने नमक वाले पानी से कुल्ला करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखें। मुलायम और ठंडा भोजन खाएं। मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करें। ज्यादा दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह से ओरल जेल का उपयोग करें। मुंह के छालों के लिए घरेलू उपाय 1. नमक वाले गुनगुने पानी से कुल्ला आधा चम्मच नमक गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है और दर्द में राहत मिल सकती है। 2. शहद शहद में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। दिन में 2–3 बार प्रभावित स्थान पर थोड़ा शहद लगाने से आराम मिल सकता है। 3. नारियल तेल नारियल तेल सूजन कम करने और घाव भरने में सहायक माना जाता है। इसे साफ उंगली या कॉटन की मदद से प्रभावित हिस्से पर लगाया जा सकता है। 4. बेकिंग सोडा थोड़ा-सा बेकिंग सोडा पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुंह का pH संतुलित रखने में मदद मिल सकती है, जिससे जलन कम हो सकती है। 5. ठंडी चीजों का सेवन बर्फ का छोटा टुकड़ा या ठंडा पानी दर्द और सूजन कम करने में राहत दे सकता है। किन चीजों से बचना चाहिए? छालों के दौरान इन चीजों से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है: बहुत तीखा और मसालेदार भोजन अधिक खट्टे फल धूम्रपान और तंबाकू शराब बहुत गर्म चाय या कॉफी डॉक्टर से कब संपर्क करें? अगर निम्न में से कोई स्थिति हो, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें: छाले 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें। बार-बार छाले निकलते हों। तेज बुखार के साथ छाले हों। खाना या पानी निगलने में परेशानी हो। छाले बहुत बड़े या अत्यधिक दर्दनाक हों। अधिकांश सामान्य छाले कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी ओरल हाइजीन और समय पर देखभाल से इस समस्या से जल्दी राहत पाने में मदद मिल सकती है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and Australian Prime Minister Anthony Albanese exchange agreements during the India-Australia leaders' summit in Melbourne.
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच कई अहम समझौते, परमाणु ऊर्जा से रक्षा तक बढ़ेगा सहयोग; पीएम मोदी-अल्बनीज ने दिए बड़े संकेत

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। रक्षा साझेदारी को मिलेगा नया आयाम शिखर वार्ता के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की है। इसके तहत रक्षा संबंधों को और व्यावहारिक बनाया जाएगा तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। समझौते के तहत नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा मामलों पर रणनीतिक परामर्श और दोनों सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी (साझा संचालन क्षमता) को मजबूत करने पर सहमति बनी है। परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ेगा सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है। दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन के विकास पर मिलकर काम करेंगे। दोनों नेताओं ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन भविष्य की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ होंगे। समुद्री सुरक्षा और साइबर क्षेत्र पर भी जोर बैठक में हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंथनी अल्बनीज ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में नई साझेदारियों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद, सहयोग और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाकर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता को नई दिशा दी जा सकती है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Sri Sri Ravi Shankar demonstrates Sudarshan Kriya breathing technique for stress management and healthy ageing.
क्या है सुदर्शन क्रिया? श्री श्री रविशंकर ने बताया सांसों से तनाव कम कर कैसे मिल सकती है बेहतर उम्रदराज़ी की राह

हाल ही में आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया— "Reverse Ageing With Your Breath!"। इसके बाद सुदर्शन क्रिया (Sudarshan Kriya) एक बार फिर चर्चा में आ गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उम्र को वास्तव में पीछे नहीं ले जाती, लेकिन तनाव कम करके स्वस्थ जीवन और बेहतर उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) में सहायक हो सकती है। क्या है सुदर्शन क्रिया? सुदर्शन क्रिया एक विशेष लयबद्ध श्वास (Rhythmic Breathing) तकनीक है, जिसे श्री श्री रविशंकर ने वर्ष 1981 में विकसित किया था। इस अभ्यास में धीमी, मध्यम और तेज गति से सांस लेने की निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस तकनीक को प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा सिखाया जाता है और इसका उद्देश्य शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करना माना जाता है। सांस और भावनाओं का क्या है संबंध? श्री श्री रविशंकर के अनुसार, हर भावना का संबंध सांस लेने के तरीके से होता है। तनाव, चिंता और गुस्से की स्थिति में सांस तेज और छोटी हो जाती है, जबकि शांत मन की अवस्था में सांस स्वतः गहरी और धीमी होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर माना जाता है कि यदि सांसों की गति को नियंत्रित किया जाए, तो मानसिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तनाव का उम्र बढ़ने से क्या संबंध है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला तनाव (Chronic Stress) केवल मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लगातार तनाव रहने से— नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है। शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है। उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ सकता है। हृदय और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। शरीर की जैविक उम्र (Biological Ageing) पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में तनाव कम करने वाली तकनीकें शरीर को बेहतर तरीके से रिकवर करने में मदद कर सकती हैं। शोध क्या कहते हैं? अब तक हुए कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सुदर्शन क्रिया से: तनाव और चिंता कम हो सकती है। मूड बेहतर हो सकता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। भावनात्मक संतुलन मजबूत हो सकता है। समग्र मानसिक स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके दीर्घकालिक प्रभावों को पूरी तरह समझने के लिए बड़े स्तर पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। क्या सुदर्शन क्रिया वास्तव में उम्र कम कर सकती है? विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि सुदर्शन क्रिया या कोई भी ब्रीदिंग तकनीक वास्तविक (Chronological) उम्र को कम या उल्टा कर सकती है। लेकिन नियमित श्वास अभ्यास तनाव कम करने, मानसिक शांति बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मददगार हो सकता है। यही कारण है कि इसे स्वस्थ उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) का एक सहायक अभ्यास माना जा रहा है। बेहतर उम्रदराज़ी के लिए क्या जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए केवल ब्रीदिंग एक्सरसाइज ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ इन बातों का पालन भी जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक भोजन नियमित व्यायाम पर्याप्त और अच्छी नींद तनाव का प्रभावी प्रबंधन सकारात्मक सामाजिक संबंध नियमित स्वास्थ्य जांच सुदर्शन क्रिया इन आदतों के साथ मिलकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक भूमिका निभा सकती है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Five herbal drinks including spearmint tea, green tea, neem, amla, and lemongrass turmeric tea for healthy skin.
मुंहासों से हैं परेशान? स्किन को अंदर से हेल्दी बनाने में मदद कर सकते हैं ये 5 हर्बल ड्रिंक्स

मुंहासों (Acne) की समस्या से छुटकारा पाने के लिए लोग अक्सर फेसवॉश, सीरम और क्रीम का सहारा लेते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ त्वचा के लिए शरीर को अंदर से भी पोषण मिलना जरूरी है। कुछ हर्बल ड्रिंक्स एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती हैं, जो त्वचा को स्वस्थ रखने और मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद कर सकती हैं। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि ज्यादा चीनी वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। कुछ लोगों में डेयरी उत्पाद भी मुंहासों को बढ़ा सकते हैं। 1. स्पीयरमिंट टी (Spearmint Tea) स्पीयरमिंट टी को मुंहासों के लिए सबसे लोकप्रिय हर्बल ड्रिंक्स में से एक माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा को शांत रखने में मदद कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से 1 से 2 कप स्पीयरमिंट टी पीने से कुछ लोगों में मुंहासों की समस्या कम हो सकती है। 2. ग्रीन टी और नींबू ग्रीन टी में कैटेचिन (Catechins) जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो त्वचा की सुरक्षा और इम्यूनिटी को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसमें नींबू का रस मिलाने से विटामिन C की मात्रा बढ़ जाती है, जो त्वचा को चमकदार बनाए रखने और कोलेजन बनने में सहायक होता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, ग्रीन टी त्वचा में अतिरिक्त तेल (Sebum) बनने की प्रक्रिया को भी कम करने में मदद कर सकती है। 3. नीम और शहद का पेय नीम अपने एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों के लिए जाना जाता है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर पीने से इसका स्वाद बेहतर हो सकता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यह शरीर को साफ रखने और त्वचा संबंधी समस्याओं में मददगार माना जाता है। 4. आंवला और अदरक का शॉट आंवला विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। वहीं अदरक में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। दोनों का मिश्रण इम्यूनिटी मजबूत करने के साथ त्वचा को भी अंदर से पोषण देने में सहायक माना जाता है। 5. लेमनग्रास और हल्दी की चाय लेमनग्रास और हल्दी दोनों में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) त्वचा की सूजन कम करने में मदद कर सकता है। कुछ विशेषज्ञ पीसीओडी (PCOD) से जुड़ी मुंहासों की समस्या में लेमनग्रास, हल्दी और काली मिर्च से बनी हर्बल चाय को लाभकारी मानते हैं। सिर्फ ड्रिंक पर न रहें निर्भर ध्यान रखें कि ये हर्बल ड्रिंक्स मुंहासों का इलाज नहीं हैं। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और सही स्किनकेयर रूटीन के साथ इनका सेवन करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। यदि मुंहासे लंबे समय तक बने रहें या गंभीर हों, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Maheep Kapoor shares her Type 1 diabetes journey after sudden 15 kg weight loss and delayed diagnosis.
टाइप 1 डायबिटीज ने घटाया 15 किलो वजन, महीप कपूर ने सुनाई अपनी दर्दभरी कहानी; जानिए क्यों तेजी से कम होने लगता है वेट

नई दिल्ली: अभिनेता अनिल कपूर की भाभी और बिजनेसमैन संजय कपूर की पत्नी महीप कपूर ने पहली बार खुलकर बताया कि कैसे टाइप 1 डायबिटीज की वजह से उनका वजन अचानक 15 किलोग्राम तक कम हो गया और शुरुआत में उन्होंने इसे कोविड-19 का असर समझ लिया। अभिनेत्री सोहा अली खान के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान महीप ने अपनी बीमारी, गलतफहमी और समय पर इलाज न मिलने से जुड़ी पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि बीमारी का पता चलने से पहले उनका शरीर लगातार संकेत दे रहा था, लेकिन कोविड महामारी के दौरान डॉक्टर के पास जाने से बचने और लक्षणों को वायरस का प्रभाव मान लेने के कारण सही समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो सकी। हालात इतने गंभीर हो गए कि एक यात्रा के दौरान दिल्ली पहुंचते ही वह अचानक गिर पड़ीं और उन्हें तुरंत अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। कोविड का असर समझती रहीं, लेकिन वजह थी डायबिटीज महीप कपूर ने बताया कि डायबिटीज का पता चलने से पहले उन्हें टाइफाइड भी हुआ था। इसके साथ ही उनके पीरियड्स अनियमित होने लगे, वजन तेजी से घटने लगा और उन्हें महसूस हो रहा था कि शरीर पहले जैसा नहीं रहा। उस समय वह पेरीमेनोपॉज के दौर से भी गुजर रही थीं, इसलिए कई बदलाव सामान्य हार्मोनल परिवर्तन जैसे लगे। कोविड-19 संक्रमण के बाद उनका वजन लगभग 15 किलोग्राम कम हो गया। उन्होंने इसे कोविड का साइड इफेक्ट समझ लिया और करीब तीन महीने तक लगातार काम और यात्रा करती रहीं। इस दौरान उनकी वास्तविक बीमारी लगातार बढ़ती रही। दिल्ली पहुंचते ही बिगड़ी तबीयत महीप ने बताया कि लगातार यात्रा के बाद जैसे ही वह दिल्ली पहुंचीं, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह गिर पड़ीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाकर आईसीयू में भर्ती किया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने टाइप 1 डायबिटीज की पुष्टि की और इंसुलिन थेरेपी शुरू की। उन्होंने कहा कि अब वह अपनी सेहत को लेकर बेहद सतर्क रहती हैं और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करती हैं ताकि किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके। उन्हें वर्ष 2022 में टाइप 1 डायबिटीज का निदान हुआ था। टाइप 1 डायबिटीज में वजन तेजी से क्यों घटता है? टाइप 1 डायबिटीज में शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता। इंसुलिन का काम रक्त में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर उसे ऊर्जा में बदलना होता है। जब इंसुलिन की कमी होती है, तो शरीर ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पाता। ऐसे में शरीर ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए फैट और मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है। यही वजह है कि मरीज का वजन तेजी से कम होने लगता है। इसके अलावा, रक्त में बढ़ी हुई शुगर को बाहर निकालने के लिए किडनी अधिक मेहनत करती है, जिससे शरीर की ऊर्जा और तेजी से खर्च होती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति में कमजोरी, थकान और तेजी से वजन घटने जैसी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं। क्या है टाइप 1 डायबिटीज? टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अग्न्याशय (Pancreas) की उन बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देता है जो इंसुलिन बनाती हैं। जब ये कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, तो शरीर में इंसुलिन का उत्पादन लगभग बंद हो जाता है और मरीज को जीवनभर इंसुलिन पर निर्भर रहना पड़ सकता है। क्या केवल बच्चों को होती है टाइप 1 डायबिटीज? आम धारणा है कि टाइप 1 डायबिटीज केवल बच्चों या किशोरों में होती है, लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी के कई मामले वयस्कों में भी सामने आते हैं। कई बार डॉक्टर भी शुरुआती लक्षणों को टाइप 2 डायबिटीज समझ लेते हैं, जिससे सही इलाज में देरी हो सकती है। कुछ मामलों में 70–80 वर्ष की उम्र में भी टाइप 1 डायबिटीज का पता चलता है। किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें? बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन कम होना बार-बार प्यास लगना बार-बार पेशाब आना अत्यधिक थकान और कमजोरी धुंधला दिखाई देना लगातार भूख लगना यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Person experiences shortness of breath and rapid heartbeat after stepping out of an air-conditioned room into extreme summer heat.
AC से बाहर निकलते ही फूलने लगती है सांस या तेज हो जाती है धड़कन? डॉक्टरों की चेतावनी, इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली: गर्मियों में घंटों एयर कंडीशनर (AC) में रहने के बाद जब अचानक 40 डिग्री या उससे अधिक तापमान वाली तेज धूप में निकलते हैं, तो शरीर को कुछ ही सेकंड में खुद को नए तापमान के अनुसार ढालना पड़ता है। इस दौरान कई लोगों को सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना, कमजोरी या सीने में बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ लोगों में यह बदलाव अक्सर कुछ समय के लिए होता है, लेकिन हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, अस्थमा और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे लक्षणों को हल्के में लेना सही नहीं है। AC से निकलते ही दिल पर क्यों बढ़ता है दबाव? जब कोई व्यक्ति 22–24°C तापमान वाले कमरे से निकलकर 40°C या उससे अधिक गर्म वातावरण में पहुंचता है, तो शरीर तुरंत खुद को ठंडा रखने की कोशिश शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में: त्वचा की रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं। शरीर पसीने के जरिए तापमान कम करने की कोशिश करता है। हृदय को त्वचा तक ज्यादा रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे कुछ समय के लिए हार्ट रेट बढ़ सकती है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्म मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए हृदय को सामान्य से ज्यादा काम करना पड़ता है। क्यों फूलने लगती है सांस? तेज गर्मी और उमस में शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ जाती है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से हार्ट डिजीज, अस्थमा, COPD या अन्य श्वसन संबंधी बीमारी है, तो अचानक तापमान बदलने पर सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है। ब्लड प्रेशर पर भी पड़ सकता है असर तापमान बदलने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने और फैलने लगती हैं। इसका असर ब्लड प्रेशर पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों में इसके कारण: चक्कर आना कमजोरी सिर भारी लगना घबराहट दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत? इन लोगों में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है: बुजुर्ग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर का इतिहास रखने वाले लोग डायबिटीज के मरीज अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति खुद को कैसे रखें सुरक्षित? AC से बाहर निकलने से पहले कुछ मिनट सामान्य तापमान वाले स्थान पर रहें। AC का तापमान 24–26°C के बीच रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो। धूप में निकलते समय टोपी, छाता और हल्के रंग के कपड़े पहनें। दोपहर की तेज धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि AC से बाहर आने के बाद बार-बार ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें: सीने में दर्द या दबाव लगातार सांस फूलना बहुत तेज या अनियमित धड़कन चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना अत्यधिक कमजोरी या पसीना आना ये लक्षण केवल गर्मी की वजह से ही नहीं, बल्कि किसी गंभीर हृदय समस्या का संकेत भी हो सकते हैं।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Rugda Recipe
रुगड़ा का स्वाद चखा है? झारखंड के देसी मशरूम के आगे फैल हो जाएंगे  चिकन-मटन

रांची। मानसून शुरू होते ही झारखंड के जंगलों में मिलने वाला रुगड़ा (पुटू) मशरूम बाजारों की रौनक बढ़ा देता है। यह देसी जंगली मशरूम केवल बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता है और स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। स्वाद और पौष्टिकता के कारण इसे झारखंड का पारंपरिक खजाना माना जाता है। सीमित समय के लिए मिलने वाला यह मशरूम हर साल लोगों को बेसब्री से इंतजार कराता है।   साल के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है रुगड़ा रुगड़ा मुख्य रूप से झारखंड के साल के जंगलों में मिट्टी के अंदर उगता है। इसे स्थानीय भाषा में पुटू भी कहा जाता है। सफेद और गोल आकार वाले इस मशरूम को मिट्टी हटाकर सावधानी से निकाला जाता है। इसकी प्राकृतिक उपलब्धता सीमित होने के कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा अधिक रहती है।   स्वाद और पोषण का अनोखा मेल रुगड़ा का स्वाद इतना अलग और लाजवाब होता है कि कई लोग इसकी तुलना चिकन और मटन से करते हैं। पकने के बाद इसका बाहरी हिस्सा हल्का कुरकुरा और अंदर का भाग बेहद मुलायम हो जाता है। सावन के दौरान मांसाहार से परहेज करने वाले लोगों के लिए यह स्वादिष्ट और पौष्टिक शाकाहारी विकल्प माना जाता है।   खरीदते और साफ करते समय रखें सावधानी चूंकि रुगड़ा मिट्टी के अंदर उगता है, इसलिए इसे पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी होता है। खरीदते समय एक-दो रुगड़ा काटकर देख लेना चाहिए ताकि वह अंदर से ताजा और सुरक्षित हो। अच्छी गुणवत्ता वाला रुगड़ा स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।   ऐसे बनाएं स्वादिष्ट रुगड़ा करी रुगड़ा करी बनाने के लिए सबसे पहले मशरूम को अच्छी तरह धोकर बीच से काट लें और हल्का भून लें। इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म कर जीरा, प्याज और टमाटर भूनें। फिर हल्दी, धनिया, लाल मिर्च और नमक जैसे मसाले डालकर अच्छी तरह पकाएं। अब इसमें भुना हुआ रुगड़ा मिलाकर धीमी आंच पर कुछ मिनट पकाएं। अंत में गरम मसाला और हरा धनिया डालकर इसे गर्मागर्म चावल या रोटी के साथ परोसें। स्वाद और पोषण से भरपूर यह पारंपरिक झारखंडी व्यंजन मानसून का आनंद कई गुना बढ़ा देता है।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Carom seeds (ajwain) with warm water as a natural home remedy that may help relieve migraine symptoms.
माइग्रेन के दर्द में अजवाइन का सहारा? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ और कैसे करें सही इस्तेमाल

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता तनाव, नींद की कमी और अनियमित खानपान ने माइग्रेन की समस्या को आम बना दिया है। यह केवल साधारण सिरदर्द नहीं, बल्कि एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो कई घंटों तक व्यक्ति की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित कर सकती है। माइग्रेन के दौरान सिर के एक हिस्से में तेज दर्द, मतली, उल्टी, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। दवाओं के अलावा कुछ घरेलू उपाय भी माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है अजवाइन, जो लगभग हर भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाती है। आयुर्वेद में लंबे समय से अजवाइन का उपयोग पाचन, गैस, सर्दी-जुकाम और सिरदर्द जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है। क्यों होता है माइग्रेन? विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें सिर के एक हिस्से में बार-बार तेज दर्द होता है। यह दर्द 4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी बना रह सकता है। इसके साथ कई लोगों को मतली, उल्टी, धुंधला दिखाई देना और चिड़चिड़ापन भी महसूस होता है। माइग्रेन के सामान्य ट्रिगर हैं: लगातार मानसिक तनाव पर्याप्त नींद न लेना हार्मोनल बदलाव लंबे समय तक भूखे रहना कुछ विशेष खाद्य पदार्थ तेज रोशनी और तेज आवाज माइग्रेन में कैसे फायदेमंद है अजवाइन? अजवाइन में थाइमोल (Thymol) नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है। शोध के अनुसार इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और दर्द कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन में: पाचन शक्ति बढ़ाने वाले गुण वात और कफ को संतुलित करने की क्षमता गैस और अपच कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से माइग्रेन के कुछ ट्रिगर्स को कम करने में मदद कर सकते हैं। माइग्रेन में अजवाइन के संभावित फायदे 1. तनाव कम करने में मदद अजवाइन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक माने जाते हैं। तनाव कम होने से माइग्रेन के एपिसोड की तीव्रता भी कम हो सकती है। 2. पाचन सुधारकर राहत कई लोगों में गैस, अपच और पेट की गड़बड़ी माइग्रेन का कारण बनती है। अजवाइन पाचन को बेहतर बनाकर इस ट्रिगर को कम करने में मदद कर सकती है। 3. सूजन कम करने में सहायक शरीर में सूजन भी माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ा सकती है। अजवाइन के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। माइग्रेन में अजवाइन का इस्तेमाल कैसे करें? 1. अजवाइन की गर्म पोटली 2 से 4 चम्मच अजवाइन को तवे पर हल्का गर्म करें। इसे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। समय-समय पर इसकी हल्की सुगंध लें। इससे बंद नाक खुलने, रक्त संचार बेहतर होने और सिरदर्द में कुछ राहत महसूस हो सकती है। 2. अजवाइन का पानी 2 कप पानी में 2 चम्मच अजवाइन डालें। इसे कुछ मिनट तक उबालें। छानकर सुबह और शाम हल्का गुनगुना पी सकते हैं। यह पाचन बेहतर रखने में मदद कर सकता है, जिससे माइग्रेन के कुछ ट्रिगर्स कम हो सकते हैं। माइग्रेन से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोज 7-8 घंटे की नींद लें। तेज रोशनी और तेज आवाज से बचें। लंबे समय तक खाली पेट न रहें। प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक कैफीन से दूरी बनाएं। योग, मेडिटेशन और नियमित व्यायाम करें। अपने माइग्रेन ट्रिगर्स की पहचान कर उनसे बचने की कोशिश करें।

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Swollen feet and ankles highlighting edema, a possible warning sign of heart, kidney, liver, or circulation-related health conditions.
पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज! किडनी, हार्ट और लिवर की गंभीर बीमारी का हो सकता है संकेत

नई दिल्ली: लंबे समय तक खड़े रहने, अधिक चलने या हल्की चोट लगने के बाद पैरों में सूजन आना आम बात है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के पैरों, टखनों या तलवों में लगातार सूजन बनी रहती है, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह हार्ट फेलियर, किडनी की बीमारी, लिवर संबंधी समस्याओं या रक्त संचार में गड़बड़ी जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। सीनियर इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एलेक्स मैथ्यू के अनुसार, जब शरीर के टिश्यू में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगता है, तो पैरों में सूजन यानी एडिमा (Edema) की समस्या होती है। यदि सूजन वाली जगह पर उंगली दबाने के बाद कुछ समय तक गड्ढा बना रहे, तो इसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा संकेत हो सकता है। हार्ट फेलियर का शुरुआती संकेत हो सकती है सूजन जब हृदय शरीर में पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता, तो अतिरिक्त तरल पदार्थ पैरों और टखनों में जमा होने लगता है। इसे कंजेस्टिव हार्ट फेलियर कहा जाता है। इस स्थिति में आमतौर पर दोनों पैरों में सूजन के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं: सांस फूलना जल्दी थक जाना सीने में भारीपन रात में सांस लेने में परेशानी किडनी ठीक से काम न करे तो भी फूल सकते हैं पैर किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले तत्व बाहर निकालने का काम करती है। जब इसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है। ऐसे मामलों में मरीज को दिखाई दे सकते हैं: पैरों और टखनों में सूजन चेहरे पर सूजन पेशाब में बदलाव लगातार थकान क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीजों में यह लक्षण काफी आम माना जाता है। लिवर की बीमारी भी बन सकती है वजह लिवर एल्ब्यूमिन नामक महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं में तरल पदार्थ को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यदि लिवर सिरोसिस या अन्य गंभीर बीमारी से प्रभावित हो जाए, तो एल्ब्यूमिन कम बनने लगता है, जिससे: पैरों में सूजन पेट में पानी भरना शरीर में भारीपन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नसों में खून का थक्का भी हो सकता है कारण यदि किसी एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, गर्माहट या लालिमा दिखाई दे, तो यह डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) यानी नस में रक्त का थक्का बनने का संकेत हो सकता है। यह स्थिति गंभीर होती है और तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए क्योंकि थक्का फेफड़ों तक पहुंचकर जानलेवा भी बन सकता है। शरीर में प्रोटीन की कमी से भी आती है सूजन कुपोषण, किडनी रोग या लिवर की बीमारी के कारण शरीर में एल्ब्यूमिन का स्तर कम हो सकता है। ऐसे में रक्त से तरल पदार्थ बाहर निकलकर टिश्यू में जमा होने लगता है, जिससे पैरों में सूजन दिखाई देती है। कुछ दवाएं भी बढ़ा सकती हैं परेशानी विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं के सेवन से भी पैरों में सूजन हो सकती है: हाई ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं स्टेरॉयड हार्मोनल दवाएं कुछ दर्द निवारक दवाएं डायबिटीज की कुछ दवाएं यदि नई दवा शुरू करने के बाद सूजन आने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। पैरों की सूजन से बचने के आसान उपाय लंबे समय तक लगातार खड़े या बैठे न रहें। नमक का सेवन सीमित करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नियमित व्यायाम करें। वजन नियंत्रित रखें। बैठते समय पैरों को हल्का ऊंचा रखें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं में बदलाव न करें। कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि पैरों की सूजन के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें: अचानक दोनों या एक पैर में तेज सूजन सांस लेने में तकलीफ सीने में दर्द तेज दर्द या लालिमा पेशाब कम होना कई दिनों तक सूजन का बने रहना  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Two boiled eggs served with a healthy breakfast, highlighting the nutritional benefits of eating eggs daily for overall wellness.
30 दिन तक रोज़ 2 अंडे खाने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं? जानिए डाइटिशियन गिन्नी कालरा की सलाह

नई दिल्ली: अंडे को दुनिया के सबसे संपूर्ण और पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट्स और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों और कार्यों को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि संतुलित आहार के साथ लगातार 30 दिनों तक रोज़ाना दो अंडे खाए जाएं, तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। डाइटिशियन गिन्नी कालरा के अनुसार, अंडे कोई जादुई भोजन नहीं हैं, लेकिन नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है, जिससे मांसपेशियों, दिमाग, आंखों, हड्डियों और त्वचा की सेहत में सुधार देखने को मिल सकता है। मसल्स होंगे मजबूत, रिकवरी होगी तेज दो अंडों से लगभग 12–13 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी नौ अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, जो मांसपेशियों के विकास, टिश्यू रिपेयर और रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित व्यायाम करने वाले, बुजुर्ग और बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है। देर तक नहीं लगेगी भूख अंडे में मौजूद प्रोटीन और हेल्दी फैट्स धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है। अगर नाश्ते में दो अंडे शामिल किए जाएं तो बार-बार स्नैकिंग की आदत कम हो सकती है और वजन नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। दिमाग रहेगा अधिक सक्रिय अंडों में कोलीन (Choline) नामक पोषक तत्व पाया जाता है, जो मस्तिष्क, याददाश्त और नर्वस सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। यह एसिटाइलकोलीन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जिससे सीखने की क्षमता, एकाग्रता और मानसिक सतर्कता बेहतर हो सकती है। आंखों की सेहत को मिलेगा फायदा अंडे में मौजूद ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट आंखों की रेटिना की सुरक्षा करते हैं। ये बढ़ती उम्र और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक माने जाते हैं। हड्डियां होंगी मजबूत अंडे प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी का स्रोत हैं, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इससे हड्डियों और दांतों की मजबूती के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी समर्थन मिलता है। हालांकि, केवल अंडों से पूरी विटामिन-डी की आवश्यकता पूरी नहीं होती, लेकिन यह कुल पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। त्वचा, बाल और नाखूनों में दिख सकता है सुधार अंडों में बायोटिन, सेलेनियम, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स और प्रोटीन मौजूद होते हैं, जो बालों, त्वचा और नाखूनों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। संतुलित आहार के साथ नियमित सेवन करने पर कुछ सप्ताह में सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। क्या अंडे खाने से बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल? यह सबसे आम सवालों में से एक है। हाल के वर्षों में हुई कई रिसर्च बताती हैं कि अधिकांश स्वस्थ लोगों में सीमित मात्रा में अंडे खाने से हृदय रोग का खतरा नहीं बढ़ता। शरीर स्वयं कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को नियंत्रित करता है और अंडों से मिलने वाला डाइटरी कोलेस्ट्रॉल पहले की तुलना में कम प्रभाव डालता है। हालांकि, जिन लोगों को अनियंत्रित डायबिटीज, फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया या पहले से हृदय संबंधी गंभीर बीमारी है, उन्हें नियमित रूप से अंडे खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। क्या रोज़ दो अंडे पर्याप्त हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए रोज़ाना दो अंडे पर्याप्त माने जाते हैं। इससे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और हेल्दी फैट्स की संतुलित मात्रा मिल जाती है। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए अंडों के साथ फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल करना जरूरी है। ध्यान रहे कि 30 दिनों में कोई चमत्कारी परिवर्तन नहीं होता, लेकिन नियमित और संतुलित जीवनशैली के साथ दो अंडों का सेवन शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में निश्चित रूप से सहायक हो सकता है।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Woman washing her face with a gentle cleanser during a morning skincare routine for healthy, glowing skin.
क्या सुबह सिर्फ पानी से चेहरा धोना काफी है? स्किन एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका

सुबह उठते ही अधिकांश लोग सिर्फ पानी से चेहरा धो लेते हैं और मानते हैं कि रात में अच्छी तरह चेहरा साफ करने के बाद सुबह दोबारा फेसवॉश की जरूरत नहीं होती। लेकिन स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। रातभर त्वचा पर पसीना, अतिरिक्त तेल (सीबम), स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के अवशेष और धूल-मिट्टी के सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं, जिन्हें केवल पानी से हटाया नहीं जा सकता। फेशियलिस्ट क्रिस्टीना गालमिशे के अनुसार, सुबह त्वचा की सही तरीके से सफाई करना स्वस्थ और दमकती त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ त्वचा साफ रहती है, बल्कि बाद में लगाए जाने वाले सीरम, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन भी बेहतर तरीके से काम करते हैं। क्या रातभर में त्वचा गंदी हो जाती है? भले ही सुबह उठने पर चेहरे पर गंदगी दिखाई न दे, लेकिन रातभर के दौरान त्वचा पर कई तरह के अवशेष जमा हो जाते हैं, जैसे— पसीना अतिरिक्त सीबम (तेल) नाइट क्रीम या सीरम के अवशेष बालों से आने वाला तेल मृत त्वचा कोशिकाएं यदि इन्हें साफ नहीं किया जाए तो रोमछिद्र (पोर्स) बंद हो सकते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स, मुंहासे और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सुबह फेस क्लींजिंग करने के फायदे नियमित रूप से सुबह फेसवॉश करने से कई लाभ मिलते हैं— त्वचा से पसीना, तेल और रातभर के अवशेष हटते हैं। ब्लैकहेड्स और मुंहासों का खतरा कम होता है। त्वचा में ऑक्सीजन का प्रवाह और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। स्किन टेक्सचर और प्राकृतिक निखार में सुधार आता है। विटामिन C, हायलूरोनिक एसिड और अन्य एक्टिव इंग्रीडिएंट्स बेहतर तरीके से काम करते हैं। त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत (स्किन बैरियर) मजबूत होती है। सुबह चेहरा धोने का सही तरीका 1. अपनी स्किन टाइप के अनुसार फेस क्लींजर चुनें ऑयली या कॉम्बिनेशन स्किन: नियासिनामाइड या सैलिसिलिक एसिड युक्त जेल या फोम क्लींजर चुनें। ड्राई या सेंसिटिव स्किन: सल्फेट-फ्री या क्रीम-बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें। 2. हाथों से करें मसाज कॉटन पैड की बजाय अपनी उंगलियों से लगभग 30 सेकंड तक हल्के गोलाकार (सर्कुलर) मोशन में चेहरे की मसाज करें। इससे त्वचा अच्छी तरह साफ होती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है। 3. गुनगुने पानी से धोएं बहुत गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी और लिपिड बैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि बहुत ठंडा पानी क्लींजर को पूरी तरह हटाने में प्रभावी नहीं होता। 4. साफ तौलिये से हल्के हाथों से सुखाएं चेहरे को रगड़ने की बजाय हल्के-हल्के थपथपाकर सुखाएं। बेहतर होगा कि रोजाना साफ तौलिये का इस्तेमाल करें। सिर्फ पानी से चेहरा धोना क्यों पर्याप्त नहीं है? सिर्फ पानी त्वचा पर मौजूद तेल, पसीना और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के अवशेषों को पूरी तरह नहीं हटा पाता। ऐसे में बाद में लगाए जाने वाले सीरम, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन त्वचा में सही तरीके से अवशोषित नहीं हो पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि साफ त्वचा ही स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के लिए सबसे बेहतर आधार होती है। इसलिए सुबह फेस क्लींजर और पानी दोनों का इस्तेमाल करना त्वचा को स्वस्थ, साफ और चमकदार बनाए रखने का आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है।  

surbhi जून 29, 2026 0
Doctor checking a patient's blood pressure while explaining the connection between hypertension and thyroid disorders.
बार-बार बढ़ रहा है BP? सिर्फ नमक नहीं, थायरॉइड की गड़बड़ी भी हो सकती है वजह, जानिए डॉक्टर की सलाह

भारत में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आमतौर पर लोग हाई बीपी की वजह अधिक नमक, मोटापा, तनाव, धूम्रपान या खराब लाइफस्टाइल को मानते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बार-बार बढ़ता ब्लड प्रेशर किसी हार्मोनल समस्या, खासकर थायरॉइड डिसऑर्डर का भी संकेत हो सकता है। कार्डियक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्लड प्रेशर दवाइयों के बावजूद बार-बार बढ़ रहा है या नियंत्रित नहीं हो रहा, तो थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। कैसे जुड़ा है थायरॉइड और हाई ब्लड प्रेशर? थायरॉइड ग्रंथि शरीर में बनने वाले T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन और रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है, तब रक्त वाहिकाएं धीरे-धीरे सख्त होने लगती हैं। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर, विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (निचला स्तर), बढ़ सकता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है? हाइपोथायरॉइडिज्म में दिल की धड़कन सामान्य से धीमी हो जाती है। साथ ही रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम होने लगता है। यही कारण है कि शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए दबाव बढ़ सकता है, जिससे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई बीपी और थायरॉइड के बीच संबंध को देखते हुए दोनों स्थितियों की जांच एक साथ करना बेहतर माना जाता है। कब करानी चाहिए थायरॉइड जांच? यदि आपको— बार-बार हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, दवा लेने के बावजूद बीपी नियंत्रित न हो, लगातार थकान महसूस हो, वजन बढ़ रहा हो, ठंड ज्यादा लगती हो, दिल की धड़कन धीमी रहती हो, तो डॉक्टर की सलाह पर TSH, T3 और T4 टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। हाइपोथायरॉइडिज्म में किन दवाओं में बरतें सावधानी? विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों में पहले से ही दिल की धड़कन धीमी हो सकती है। ऐसे में कुछ बीपी की दवाएं, जैसे बीटा-ब्लॉकर्स और कुछ कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, धड़कन को और धीमा कर सकती हैं। इसलिए कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के आसान उपाय हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड दोनों स्थितियों में स्वस्थ जीवनशैली काफी मददगार साबित होती है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। योग और कार्डियो एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। नमक का सेवन सीमित रखें। फल, सब्जियां और साबुत अनाज से भरपूर DASH डाइट अपनाएं। पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की जांच कराते रहें। डॉक्टर की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की समस्या कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए जिन लोगों को लगातार हाई बीपी की शिकायत रहती है, उन्हें थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। वहीं थायरॉइड के मरीजों को भी समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना चाहिए ताकि किसी गंभीर हृदय संबंधी समस्या से बचा जा सके।  

surbhi जून 29, 2026 0
Person practicing deep breathing and relaxation techniques to reduce stress and control cortisol levels.
सिर्फ 3 मिनट का तनाव भी पहुंचा सकता है नुकसान, बढ़ सकता है बीपी और कॉर्टिसोल लेवल, जानें कैसे करें स्ट्रेस मैनेज

Stress Side Effects: तनाव हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, यह बात लगभग हर कोई जानता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि केवल लंबे समय तक बना रहने वाला स्ट्रेस ही नहीं, बल्कि सिर्फ 3 से 5 मिनट का तनाव भी शरीर में कई नकारात्मक बदलाव पैदा कर सकता है। बार-बार होने वाला छोटा तनाव धीरे-धीरे दिल, दिमाग, इम्यूनिटी और पाचन तंत्र पर गहरा असर डाल सकता है। गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. तुषार तायल के अनुसार, शरीर हर प्रकार के तनाव को एक खतरे की तरह लेता है और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देता है। तनाव के दौरान शरीर में क्या होता है? जब मस्तिष्क किसी चुनौती या खतरे को महसूस करता है, तो ब्रेन का एमिग्डाला सक्रिय हो जाता है। इसके बाद शरीर में एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप: हार्ट रेट बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। शरीर अधिक सतर्क हो जाता है। ऊर्जा मांसपेशियों की ओर केंद्रित हो जाती है। इस प्रक्रिया को "फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स" कहा जाता है। असली खतरा कब शुरू होता है? कुछ मिनटों का तनाव सामान्य रूप से खत्म हो जाता है, लेकिन यदि दिनभर में बार-बार तनाव की स्थिति पैदा होती रहे, तो शरीर सामान्य अवस्था में लौट नहीं पाता। लगातार: काम का दबाव मोबाइल नोटिफिकेशन छोटी-छोटी बहसें डेडलाइन का तनाव इन सबकी वजह से कोर्टिसोल का स्तर लगातार ऊंचा बना रह सकता है। दिल पर पड़ता है असर शोध के अनुसार, बार-बार सक्रिय होने वाला स्ट्रेस रिस्पॉन्स: हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाता है। धमनियों में प्लाक जमने की संभावना बढ़ाता है। हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकता है। वजन और नींद भी होती है प्रभावित कॉर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर: भूख बढ़ा सकता है। मोटापे का कारण बन सकता है। नींद की गुणवत्ता खराब कर सकता है। व्यायाम करने की इच्छा कम कर सकता है। कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी लगातार तनाव इम्यून सिस्टम की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों में: बार-बार संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। बीमारी से रिकवरी में अधिक समय लग सकता है। गट हेल्थ पर भी पड़ता है असर बार-बार होने वाला तनाव: गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगाड़ सकता है। एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकता है। IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है प्रभाव लगातार छोटे-छोटे तनाव के एपिसोड से: एंग्जायटी बढ़ सकती है। भावनात्मक सहनशक्ति कम हो सकती है। डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। तनाव से राहत पाने के आसान उपाय विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे-छोटे रिलैक्सेशन ब्रेक तनाव के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। अपनाएं ये आदतें गहरी डायाफ्रामिक ब्रीदिंग करें। 5 मिनट शांत बैठें। थोड़ी देर बाहर टहलें। स्क्रीन से कुछ समय का ब्रेक लें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम करें। इन छोटे प्रयासों से कोर्टिसोल का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है और शरीर को अगली तनावपूर्ण स्थिति से पहले सामान्य होने का मौका मिलता है।  

surbhi जून 23, 2026 0
Blood sugar testing and healthy lifestyle habits explained for better diabetes management.
मीठा छोड़ने के बाद भी कंट्रोल नहीं हो रहा ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज मैनेज करने का सही तरीका

आज के समय में डायबिटीज भारत में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुकी है। मोटापा, अनियमित खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि डायबिटीज सिर्फ ज्यादा चीनी या मिठाई खाने से होती है और अगर चीनी खाना बंद कर दिया जाए तो ब्लड शुगर पूरी तरह नियंत्रित हो जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल है। क्या सिर्फ चीनी खाने से होती है डायबिटीज? विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज केवल चीनी खाने से नहीं होती। यह एक मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, आनुवंशिक कारण और असंतुलित आहार जैसी कई चीजें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। लंबे समय तक यही स्थिति टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है? इंसुलिन एक हार्मोन है, जो पैंक्रियाज द्वारा बनाया जाता है और शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इस स्थिति में पैंक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। परिणामस्वरूप ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। डायबिटीज के प्रमुख कारण मोटापा और बढ़ा हुआ वजन पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ा सकती है। वजन कम करने से डायबिटीज के जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है। शारीरिक गतिविधियों की कमी नियमित व्यायाम न करने से शरीर ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर प्रभावित होता है। पारिवारिक इतिहास यदि माता-पिता, दादा-दादी या अन्य करीबी रिश्तेदारों को डायबिटीज है, तो इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। तनाव और नींद की कमी लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न लेने से शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का जोखिम रहता है। सिर्फ चीनी नहीं, इन चीजों से भी बनाएं दूरी ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए केवल मिठाई छोड़ना पर्याप्त नहीं है। इन चीजों का सेवन भी सीमित करना चाहिए— व्हाइट ब्रेड मैदा और उससे बनी चीजें प्रोसेस्ड फूड केक, पेस्ट्री और बेकरी उत्पाद अत्यधिक नमक शुगरी ड्रिंक्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स ब्लड शुगर कंट्रोल करने का सही तरीका डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए इन बातों का पालन जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक आहार लें। रोजाना नियमित व्यायाम करें। वजन को नियंत्रित रखें। पर्याप्त नींद लें। तनाव कम करने की कोशिश करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें। समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहें। डायबिटीज एक बहुआयामी बीमारी है और इसका इलाज सिर्फ चीनी छोड़ने तक सीमित नहीं है। सही जीवनशैली अपनाकर और डॉक्टर की सलाह का पालन करके ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में होने वाली जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।  

surbhi जून 22, 2026 0
Shilpa Shetty performing plank exercises and yoga poses as part of her fitness routine.
51 की उम्र में भी सुपरफिट हैं शिल्पा शेट्टी, प्लैंक और योग का यह कॉम्बिनेशन है उनकी फिटनेस का राज

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा 51 साल की हो चुकी हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और एनर्जी आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। 1993 में फिल्म बाजीगर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शिल्पा ने वर्षों से योग, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया हुआ है। शिल्पा का मानना है कि फिटनेस केवल शरीर को आकार देने का जरिया नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का भी माध्यम है। वह हमेशा समग्र स्वास्थ्य (Holistic Wellness) पर जोर देती हैं और साफ-सुथरे खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधियों को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। प्लैंक एक्सरसाइज से बनाती हैं मजबूत कोर हाल ही में शिल्पा शेट्टी ने सोशल मीडिया पर अपने वर्कआउट रूटीन की झलक साझा की थी। इस रूटीन में उन्होंने कई तरह की प्लैंक एक्सरसाइज शामिल की हैं, जिनमें— एक्सटेंडेड आर्म प्लैंक विद हिप एक्सटेंशन साइड एल्बो प्लैंक विद हिप डिप्स एल्बो प्लैंक विद हिप एब्डक्शन और एडडक्शन इन सभी एक्सरसाइज को वह 15-20 रेपिटेशन के तीन सेट में करती हैं। यह रूटीन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ कंधों, हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियों की सहनशक्ति भी बढ़ाता है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरे वर्कआउट के लिए केवल एक योगा मैट और करीब 20 मिनट का समय चाहिए। शिल्पा इसे अपनी "वॉशबोर्ड एब्स की रेसिपी" बताती हैं। हालांकि, वह नए लोगों को सलाह देती हैं कि शुरुआत आसान एक्सरसाइज से करें और धीरे-धीरे एडवांस रूटीन की तरफ बढ़ें। योग और मेडिटेशन भी हैं फिटनेस का अहम हिस्सा शिल्पा शेट्टी केवल जिम वर्कआउट पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि योग और मेडिटेशन को भी अपनी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनका कहना है कि योग शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को भी संतुलित करता है। सेतु बंधासन से मिलता है मानसिक और शारीरिक लाभ सेतु बंधासन (ब्रिज पोज) गर्दन, कंधों और पीठ को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ तनाव कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक माना जाता है। अर्ध हलासन और नौकासन से मजबूत होती हैं पेट की मांसपेशियां अर्ध हलासन और नौकासन दोनों ही कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले प्रमुख योगासन माने जाते हैं। इनसे— पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। पाचन तंत्र बेहतर होता है। रीढ़ की लचक बढ़ती है। शरीर का पोश्चर सुधरता है। आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती में भी वृद्धि होती है। शिल्पा शेट्टी की फिटनेस फिलॉसफी यही संदेश देती है कि नियमित व्यायाम, योग और संतुलित जीवनशैली के जरिए किसी भी उम्र में स्वस्थ और फिट रहा जा सकता है।  

surbhi जून 9, 2026 0
Young professional experiencing lower back pain while working on a laptop at a desk.
कम उम्र में ही क्यों बढ़ रहा है कमर दर्द? मोटापा ही नहीं, बदलती लाइफस्टाइल भी बन रही बड़ी वजह

एक समय था जब कमर और पीठ दर्द को बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह परेशानी युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, वर्क फ्रॉम होम कल्चर, घंटों मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र में ही लोग कमर दर्द से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहना, गलत पोश्चर अपनाना और बढ़ता मोटापा रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे पीठ और कमर में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो यह दैनिक जीवन और कार्यक्षमता दोनों को प्रभावित कर सकती है। युवाओं में कमर दर्द बढ़ने के प्रमुख कारण गलत पोश्चर में बैठना या खड़े रहना ऑफिस में काम करते समय या मोबाइल-लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे गर्दन, कंधों और पीठ के निचले हिस्से में दर्द शुरू हो सकता है। सुस्त जीवनशैली आज अधिकांश लोग दिन का बड़ा हिस्सा कुर्सी पर बैठकर बिताते हैं। पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न होने से रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे अकड़न और दर्द की समस्या बढ़ जाती है। तनाव और मानसिक दबाव मानसिक तनाव का असर केवल दिमाग पर ही नहीं, बल्कि शरीर पर भी पड़ता है। तनाव के कारण गर्दन, कंधे और पीठ की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, जिससे दर्द और थकान बढ़ सकती है। बढ़ता स्क्रीन टाइम मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप के लंबे इस्तेमाल से "टेक नेक" और लोअर बैक पेन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लगातार स्क्रीन देखने की आदत रीढ़ की प्राकृतिक स्थिति को प्रभावित करती है। मोटापा और कसरत की कमी शरीर का अतिरिक्त वजन रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर अधिक दबाव डालता है। पेट और पीठ की कमजोर मांसपेशियां रीढ़ के संतुलन को प्रभावित करती हैं, जिससे दर्द की संभावना बढ़ जाती है। कमर दर्द से बचने के आसान उपाय बैठने और खड़े होने का सही तरीका अपनाएं। हर 30 से 40 मिनट में कुछ देर के लिए उठकर चलें। नियमित रूप से योग, स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज करें। मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल सीमित रखें। आरामदायक और सपोर्ट देने वाली कुर्सी का उपयोग करें। वजन को नियंत्रित रखें। रीढ़ को सहारा देने वाले अच्छे गद्दे पर सोएं। भारी सामान उठाते समय सही तकनीक अपनाएं। कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है? अगर कमर दर्द कई दिनों तक लगातार बना रहे, दर्द के साथ सुन्नपन महसूस हो, चलने-फिरने में परेशानी होने लगे या दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाए, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।  

surbhi जून 9, 2026 0
Fresh watermelon slices served in summer, known for supporting digestion and gut health.
गर्मियों में गट हेल्थ के लिए वरदान है तरबूज, पाचन सुधारने के साथ देता है कई बड़े फायदे

गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।  

surbhi जून 9, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
दुनिया

ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0