बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा 51 साल की हो चुकी हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और एनर्जी आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। 1993 में फिल्म बाजीगर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शिल्पा ने वर्षों से योग, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया हुआ है। शिल्पा का मानना है कि फिटनेस केवल शरीर को आकार देने का जरिया नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का भी माध्यम है। वह हमेशा समग्र स्वास्थ्य (Holistic Wellness) पर जोर देती हैं और साफ-सुथरे खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधियों को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। प्लैंक एक्सरसाइज से बनाती हैं मजबूत कोर हाल ही में शिल्पा शेट्टी ने सोशल मीडिया पर अपने वर्कआउट रूटीन की झलक साझा की थी। इस रूटीन में उन्होंने कई तरह की प्लैंक एक्सरसाइज शामिल की हैं, जिनमें— एक्सटेंडेड आर्म प्लैंक विद हिप एक्सटेंशन साइड एल्बो प्लैंक विद हिप डिप्स एल्बो प्लैंक विद हिप एब्डक्शन और एडडक्शन इन सभी एक्सरसाइज को वह 15-20 रेपिटेशन के तीन सेट में करती हैं। यह रूटीन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ कंधों, हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियों की सहनशक्ति भी बढ़ाता है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरे वर्कआउट के लिए केवल एक योगा मैट और करीब 20 मिनट का समय चाहिए। शिल्पा इसे अपनी "वॉशबोर्ड एब्स की रेसिपी" बताती हैं। हालांकि, वह नए लोगों को सलाह देती हैं कि शुरुआत आसान एक्सरसाइज से करें और धीरे-धीरे एडवांस रूटीन की तरफ बढ़ें। योग और मेडिटेशन भी हैं फिटनेस का अहम हिस्सा शिल्पा शेट्टी केवल जिम वर्कआउट पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि योग और मेडिटेशन को भी अपनी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनका कहना है कि योग शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को भी संतुलित करता है। सेतु बंधासन से मिलता है मानसिक और शारीरिक लाभ सेतु बंधासन (ब्रिज पोज) गर्दन, कंधों और पीठ को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ तनाव कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक माना जाता है। अर्ध हलासन और नौकासन से मजबूत होती हैं पेट की मांसपेशियां अर्ध हलासन और नौकासन दोनों ही कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले प्रमुख योगासन माने जाते हैं। इनसे— पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। पाचन तंत्र बेहतर होता है। रीढ़ की लचक बढ़ती है। शरीर का पोश्चर सुधरता है। आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती में भी वृद्धि होती है। शिल्पा शेट्टी की फिटनेस फिलॉसफी यही संदेश देती है कि नियमित व्यायाम, योग और संतुलित जीवनशैली के जरिए किसी भी उम्र में स्वस्थ और फिट रहा जा सकता है।
एक समय था जब कमर और पीठ दर्द को बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह परेशानी युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, वर्क फ्रॉम होम कल्चर, घंटों मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र में ही लोग कमर दर्द से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहना, गलत पोश्चर अपनाना और बढ़ता मोटापा रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे पीठ और कमर में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो यह दैनिक जीवन और कार्यक्षमता दोनों को प्रभावित कर सकती है। युवाओं में कमर दर्द बढ़ने के प्रमुख कारण गलत पोश्चर में बैठना या खड़े रहना ऑफिस में काम करते समय या मोबाइल-लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे गर्दन, कंधों और पीठ के निचले हिस्से में दर्द शुरू हो सकता है। सुस्त जीवनशैली आज अधिकांश लोग दिन का बड़ा हिस्सा कुर्सी पर बैठकर बिताते हैं। पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न होने से रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे अकड़न और दर्द की समस्या बढ़ जाती है। तनाव और मानसिक दबाव मानसिक तनाव का असर केवल दिमाग पर ही नहीं, बल्कि शरीर पर भी पड़ता है। तनाव के कारण गर्दन, कंधे और पीठ की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, जिससे दर्द और थकान बढ़ सकती है। बढ़ता स्क्रीन टाइम मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप के लंबे इस्तेमाल से "टेक नेक" और लोअर बैक पेन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लगातार स्क्रीन देखने की आदत रीढ़ की प्राकृतिक स्थिति को प्रभावित करती है। मोटापा और कसरत की कमी शरीर का अतिरिक्त वजन रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर अधिक दबाव डालता है। पेट और पीठ की कमजोर मांसपेशियां रीढ़ के संतुलन को प्रभावित करती हैं, जिससे दर्द की संभावना बढ़ जाती है। कमर दर्द से बचने के आसान उपाय बैठने और खड़े होने का सही तरीका अपनाएं। हर 30 से 40 मिनट में कुछ देर के लिए उठकर चलें। नियमित रूप से योग, स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज करें। मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल सीमित रखें। आरामदायक और सपोर्ट देने वाली कुर्सी का उपयोग करें। वजन को नियंत्रित रखें। रीढ़ को सहारा देने वाले अच्छे गद्दे पर सोएं। भारी सामान उठाते समय सही तकनीक अपनाएं। कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है? अगर कमर दर्द कई दिनों तक लगातार बना रहे, दर्द के साथ सुन्नपन महसूस हो, चलने-फिरने में परेशानी होने लगे या दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाए, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।
आजकल बदलती जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं में से एक है खाना खाने के बाद हल्की सैर करना। कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. आशीष मेहरोत्रा के अनुसार, भोजन के बाद 10 से 20 मिनट तक टहलना ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। खाना खाने के बाद शरीर में क्या होता है? भोजन करने के बाद शरीर कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलता है, जो खून में पहुंचता है। यदि भोजन में कार्बोहाइड्रेट या मीठी चीजें अधिक हों तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में हल्की वॉक करने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं और वे ग्लूकोज का उपयोग ऊर्जा के रूप में करने लगती हैं। इससे खून में मौजूद अतिरिक्त शुगर कम होने लगती है और ब्लड शुगर का स्तर संतुलित रहता है। खाना खाने के बाद टहलने के फायदे 1. ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी को रोकता है भोजन के बाद होने वाले शुगर स्पाइक को कम करने में मदद मिलती है, जो डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। 2. इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार नियमित वॉक करने से शरीर इंसुलिन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देता है, जिससे ग्लूकोज आसानी से कोशिकाओं तक पहुंच पाता है। 3. पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत खाने के बाद टहलने से बाउल मूवमेंट बेहतर होता है और पेट फूलना, भारीपन तथा अपच जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। 4. वजन नियंत्रित रखने में मददगार हल्की शारीरिक गतिविधि कैलोरी बर्न करने में मदद करती है, जिससे मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है। 5. हार्ट और मेटाबॉलिज्म को फायदा ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है, जिससे समग्र स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये आदतें खाना खाने के बाद 10-20 मिनट तक टहलें। ज्यादा मीठा और ओवरईटिंग से बचें। भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शुगरी ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें। प्रोटीन, हेल्दी फैट और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वाला संतुलित आहार लें। नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें। भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें। यदि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज है तो नियमित ब्लड शुगर जांच करवाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने के बाद की छोटी-सी सैर लंबे समय में ब्लड शुगर नियंत्रण, बेहतर पाचन और अच्छी नींद जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभ पहुंचा सकती है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब खानपान और धूप से दूरी के कारण विटामिन डी की कमी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक इस जरूरी विटामिन की कमी केवल हड्डियों को ही नहीं, बल्कि शरीर के शुगर मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम विटामिन डी स्तर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। इंसुलिन के लिए क्यों जरूरी है विटामिन डी? विटामिन डी केवल कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की मजबूती तक सीमित नहीं है। यह इंसुलिन के उत्पादन और उसके प्रभावी कार्य में भी मदद करता है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो रक्त में मौजूद शुगर को नियंत्रित करता है। अध्ययनों के अनुसार, जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। डायबिटीज के साथ बढ़ सकता है अन्य बीमारियों का खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को विटामिन डी की कमी और डायबिटीज दोनों हैं, तो माइक्रोवैस्कुलर जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसका असर शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं पर पड़ता है, जिससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं: डायबिटिक रेटिनोपैथी (आंखों की बीमारी) डायबिटिक नेफ्रोपैथी (किडनी को नुकसान) डायबिटिक न्यूरोपैथी (नसों की कमजोरी) विटामिन डी की कमी से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जो रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाकर ब्लड फ्लो को प्रभावित कर सकती है। विटामिन डी की कमी के संकेत लगातार थकान और कमजोरी मांसपेशियों में दर्द हड्डियों में दर्द बार-बार बीमार पड़ना ऊर्जा की कमी ब्लड शुगर नियंत्रण में परेशानी विटामिन डी की कमी कैसे दूर करें? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान उपाय अपनाकर विटामिन डी के स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है: रोज सुबह 20 से 30 मिनट धूप में समय बिताएं। आहार में अंडा, मशरूम, फैटी फिश, दूध और दही शामिल करें। नियमित रूप से व्यायाम, योग और वॉक करें। डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी सप्लीमेंट लें। जरूरत पड़ने पर 25(OH)D टेस्ट करवाएं। क्या केवल विटामिन डी की कमी से डायबिटीज होती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि डायबिटीज एक बहु-कारक बीमारी है। केवल विटामिन डी की कमी को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। हालांकि, पर्याप्त विटामिन डी स्तर बनाए रखना बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
गर्मियों के मौसम में शरीर से पसीने के रूप में बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकलता है। यदि इस दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पिया जाए, तो शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है, जिसका सीधा असर किडनी की सेहत पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में किडनी स्टोन के मामलों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण शरीर में पानी की कमी है। कानपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सिंह सोमवंशी के मुताबिक, जब शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है तो पेशाब अधिक गाढ़ा हो जाता है। इससे उसमें मौजूद कैल्शियम, ऑक्सालेट और यूरिक एसिड जैसे तत्वों की सांद्रता बढ़ जाती है, जो आपस में मिलकर क्रिस्टल बनाते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल किडनी स्टोन का रूप ले लेते हैं। कैसे बनती है किडनी स्टोन? गर्म मौसम में अत्यधिक पसीना आने से शरीर से पानी तेजी से निकलता है। यदि इस पानी की भरपाई नहीं की जाती, तो पेशाब की मात्रा कम हो जाती है और उसमें मौजूद खनिज पदार्थ घुलने के बजाय जमा होने लगते हैं। यही जमा हुए कण धीरे-धीरे पथरी का रूप ले लेते हैं। किन लोगों को अधिक खतरा? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों में किडनी स्टोन का जोखिम अधिक होता है, जैसे: लंबे समय तक धूप या गर्म वातावरण में काम करने वाले लोग पर्याप्त पानी पिए बिना ज्यादा व्यायाम करने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, कैफीन और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने वाले बार-बार डिहाइड्रेशन का शिकार होने वाले पहले किडनी स्टोन की समस्या झेल चुके लोग खानपान भी बढ़ा सकता है जोखिम गर्मियों में प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक वाले स्नैक्स और शुगर युक्त पेय पदार्थों का सेवन किडनी स्टोन बनने की संभावना बढ़ा सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर के मिनरल संतुलन को प्रभावित करते हैं और पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। किडनी स्टोन के प्रमुख लक्षण किडनी स्टोन होने पर शरीर कई संकेत देता है, जिन पर ध्यान देना जरूरी है: पीठ, पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द पेशाब करते समय जलन या दर्द पेशाब में खून आना या रंग बदलना बार-बार पेशाब की इच्छा होना मतली, उल्टी, बुखार या कंपकंपी पेशाब की मात्रा कम होना यदि इन लक्षणों के साथ बुखार भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। किडनी स्टोन से बचाव के आसान उपाय रोजाना कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं। तरबूज, खीरा, खरबूजा और खट्टे फलों का सेवन बढ़ाएं। नमकीन, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से दूरी बनाएं। सॉफ्ट ड्रिंक्स, शराब और कैफीन का सीमित सेवन करें। प्यास लगने का इंतजार न करें, समय-समय पर पानी पीते रहें। धूप में काम करने या बाहर रहने पर पानी की मात्रा और बढ़ाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी स्टोन से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका शरीर को हाइड्रेटेड रखना है। गर्मियों में पानी पीने की आदत को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
आजकल “फाइबर” सिर्फ पोषण से जुड़ा शब्द नहीं रह गया है, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को स्वस्थ रखने और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में पर्याप्त फाइबर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद ज्यादातर लोग अपनी रोजाना की जरूरत के अनुसार फाइबर का सेवन नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त फाइबर लेने से: पाचन तंत्र बेहतर रहता है ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिलती है दिल स्वस्थ रहता है लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो सकता है US Food and Drug Administration के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना लगभग 28 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। लेकिन कई शोध बताते हैं कि अधिकतर लोग इस लक्ष्य से काफी पीछे हैं। आइए जानते हैं रोजाना फाइबर बढ़ाने के 7 आसान और असरदार तरीके। 1. फलों और सब्जियों का छिलका न हटाएं विशेषज्ञों का कहना है कि कई फलों और सब्जियों के छिलकों में अंदरूनी हिस्से से ज्यादा फाइबर होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर सेब को छिलके सहित खाया जाए तो लगभग 2 ग्राम अतिरिक्त फाइबर मिलता है। जहां संभव हो, पूरे फल खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। 2. दाल और बीन्स को भोजन में शामिल करें मसूर दाल, राजमा, चना और दूसरी दालें फाइबर का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं। इन्हें: सलाद सूप चावल पास्ता जैसे भोजन में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है। इससे खाना ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला बनता है। 3. बीज और मेवे का सेवन बढ़ाएं Chia seed, अलसी के बीज और दूसरे पौष्टिक बीज फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक: चिया सीड्स में लगभग 10 ग्राम फाइबर अलसी में करीब 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इन्हें दही, दलिया, सलाद या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है। 4. मिठाई के साथ फल खाएं अगर आपको मीठा पसंद है तो मिठाई के साथ ताजे फल खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। कुछ ज्यादा फाइबर वाले फल: नाशपाती सेब रसभरी ये शरीर को विटामिन और खनिज भी प्रदान करते हैं। 5. ज्यादा फाइबर वाले स्नैक्स चुनें तले-भुने और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह ऐसे विकल्प चुनें जिनमें प्राकृतिक फाइबर ज्यादा हो, जैसे: भुना चना पॉपकॉर्न मेवे बीज उदाहरण के तौर पर, बिना ज्यादा तेल वाला पॉपकॉर्न फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। 6. “पकाएं और ठंडा करें” तरीका अपनाएं विशेषज्ञों के अनुसार आलू, चावल, पास्ता और कुछ दालों को पकाकर ठंडा करने से उनमें “रेजिस्टेंट स्टार्च” बनता है। यह तरीका: ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करता है कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक हो सकता है पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है 7. जूस की बजाय पूरा फल खाएं फलों के रस की तुलना में पूरा फल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि उसमें फाइबर सुरक्षित रहता है। पूरा फल: पाचन को धीमा करता है ज्यादा देर तक पेट भरा रखता है अचानक शुगर बढ़ने की संभावना कम करता है इसीलिए विशेषज्ञ जूस की जगह पूरे फल खाने की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलाव करके भी रोजाना फाइबर का सेवन काफी बढ़ाया जा सकता है। संतुलित आहार के साथ फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।
फिटनेस और ब्यूटी की दुनिया में अब एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है-“फेस वर्कआउट” या फेसजिम। हाल ही में यूके से शुरू हुए इस कॉन्सेप्ट FaceGym ने भारत में भी एंट्री कर ली है, और मुंबई में इसके अनुभव को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। इस अनोखे स्किनकेयर और फिटनेस कॉम्बिनेशन में दावा किया जाता है कि चेहरे की मांसपेशियों को एक्सरसाइज देकर उसे ज्यादा टोन, रिलैक्स और ग्लोइंग बनाया जा सकता है। 60 मिनट का “फेस वर्कआउट” कैसा होता है? रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनुभव में पूरा सेशन लगभग एक घंटे का होता है, जिसमें चेहरे की सफाई से शुरुआत होती है और फिर गहरी मसाज तकनीकों के जरिए चेहरे की मांसपेशियों पर काम किया जाता है। इस दौरान: गालों, जबड़े और माथे पर स्ट्रॉन्ग मसाज लिम्फैटिक ड्रेनेज तकनीक स्किन को रिलैक्स करने वाले स्ट्रोक्स टेंशन रिलीज पर फोकस उद्देश्य यह बताया गया है कि चेहरे की उन मांसपेशियों को एक्टिव किया जाए जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में नजरअंदाज कर देते हैं। क्या सच में चेहरा “ट्रेन” हो सकता है? ब्यूटी एक्सपर्ट्स और डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि चेहरे की एक्सरसाइज से तुरंत बदलाव तो दिख सकता है, लेकिन यह स्थायी नहीं होता। डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार: चेहरे की संरचना (bone structure) नहीं बदलती लेकिन सूजन (puffiness) कम हो सकती है ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है जबड़े और चेहरे की टाइटनेस में राहत मिलती है इसका मतलब यह है कि यह “स्कल्प्टिंग” से ज्यादा “रिलैक्सेशन थेरेपी” जैसा असर देता है। अनुभव: ग्लो तो मिला, लेकिन असली असर क्या था? रिपोर्ट में बताया गया कि 60 मिनट के सेशन के बाद चेहरा ज्यादा ब्राइट, फ्रेश और रिलैक्स महसूस हुआ। खासकर जबड़े की टाइटनेस में कमी महसूस हुई, जो तनाव और लंबे समय तक स्क्रीन के उपयोग से आम समस्या बन चुकी है। हालांकि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यह असर अस्थायी होता है और इसे बनाए रखने के लिए नियमित सेशन की जरूरत होती है। विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों के अनुसार, फेस वर्कआउट से: चेहरे की ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होती है लिम्फैटिक ड्रेनेज से सूजन कम हो सकती है फेस मसल्स में रिलैक्सेशन मिलता है लेकिन “परमानेंट चीकबोन ट्रांसफॉर्मेशन” संभव नहीं है
भीषण गर्मी, पसीना और डिहाइड्रेशन के बीच नारियल पानी एक नेचुरल एनर्जी ड्रिंक बनकर उभर रहा है। इलेक्ट्रोलाइट्स, पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन और स्किन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। अब एक्सपर्ट्स ने बताया है कि इसे किस समय पीना सबसे ज्यादा असरदार हो सकता है। सुबह खाली पेट पीना क्यों फायदेमंद? इंटीग्रेटिव न्यूट्रिशनिस्ट्स के मुताबिक, सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से शरीर को नेचुरल डिटॉक्स सपोर्ट मिलता है। यह पाचन को बेहतर बनाने, शरीर का pH बैलेंस बनाए रखने और दिनभर की हाइड्रेशन जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है। क्लिनिकल डाइटिशियन वेदिका प्रेमानी के अनुसार, गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए तेजी से इलेक्ट्रोलाइट्स निकलते हैं। ऐसे में नारियल पानी उन्हें प्राकृतिक तरीके से रिप्लेस करने में मदद करता है। इससे स्किन हाइड्रेटेड रहती है और थकान भी कम महसूस होती है। वर्कआउट और गर्मी के बाद भी असरदार एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेज धूप, लंबे सफर या वर्कआउट के बाद नारियल पानी पीना शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है। यह बाजार में मिलने वाले शुगर-लोडेड ड्रिंक्स की तुलना में हल्का और ज्यादा हेल्दी विकल्प माना जाता है। कितना नारियल पानी पीना सही? विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में दिन में 1 से 2 गिलास यानी करीब 200-300ml नारियल पानी पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, ज्यादा गर्मी या भारी फिजिकल एक्टिविटी के दौरान इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। खासकर किडनी रोग या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही नियमित सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसमें पोटैशियम और नेचुरल शुगर मौजूद होती है। स्वाद और फायदे बढ़ाने के आसान तरीके एक्सपर्ट्स नारियल पानी में चिया सीड्स, नींबू या खीरा मिलाने की सलाह भी देते हैं। इससे फाइबर, विटामिन C और अतिरिक्त हाइड्रेशन का फायदा मिल सकता है। नारियल पानी के प्रमुख फायदे शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद पाचन और पेट की समस्याओं में राहत स्किन हेल्थ को सपोर्ट वर्कआउट के बाद रिकवरी में मदद गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाता है शुगर ड्रिंक्स का हेल्दी विकल्प
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में फिट रहने के लिए लोग जिम और वेट ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ भारी वजन उठाना ही पर्याप्त नहीं है। Yoga और Pilates जैसे लो-इम्पैक्ट वर्कआउट्स भी उतने ही अहम हैं, खासकर अगर आप लंबी और स्वस्थ जिंदगी चाहते हैं। फिटनेस का सही फॉर्मूला: बैलेंस जरूरी लॉन्गेविटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक संतुलित फिटनेस रूटीन में तीन प्रमुख हिस्से होने चाहिए: कार्डियो (जैसे दौड़ना, तैराकी) स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वेट्स, बॉडीवेट एक्सरसाइज) स्ट्रेचिंग और माइंडफुलनेस (योग और पिलाटेस) विशेषज्ञ Vicente Mera का मानना है कि शरीर को पूरी तरह फिट रखने के लिए इन तीनों का संयोजन जरूरी है। 2:2:1 रूटीन: हफ्ते का स्मार्ट प्लान स्पोर्ट्स साइंस एक्सपर्ट David de la Fuente Franco एक आसान फॉर्मूला सुझाते हैं: 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग 2 दिन कार्डियो 1 दिन योग या स्ट्रेचिंग यह संतुलन शरीर को ओवरलोड किए बिना बेहतर रिजल्ट देता है। योग और पिलाटेस क्यों हैं जरूरी फिटनेस ट्रेनर Cristina Merino के अनुसार, योग और पिलाटेस: बैलेंस और स्टेबिलिटी सुधारते हैं बॉडी अवेयरनेस बढ़ाते हैं सही तकनीक और फॉर्म बनाए रखने में मदद करते हैं इससे वेट ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने का खतरा कम हो जाता है और परफॉर्मेंस बेहतर होती है। लॉन्गेविटी के लिए योग का योगदान विशेषज्ञ Nigma Talib बताती हैं कि हफ्ते में दो बार 90 मिनट का योग: शरीर में सूजन (inflammation) को 20% तक कम कर सकता है ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है मानसिक स्वास्थ्य और सेल्फ-अवेयरनेस को मजबूत बनाता है स्ट्रेचिंग: बेहतर वर्कआउट का आधार ओस्टियोपैथ Francisco Moreno के अनुसार, नियमित स्ट्रेचिंग: मसल्स को लचीला और मजबूत बनाती है चोट का जोखिम कम करती है ब्लड सर्कुलेशन और रिकवरी बेहतर करती है रोजमर्रा के दर्द और जकड़न को कम करती है
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग फिटनेस और डाइट पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन सबसे जरूरी चीज़—पानी पीना—अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। सही हाइड्रेशन सिर्फ प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के हर महत्वपूर्ण कार्य—डाइजेशन, ब्रेन फंक्शन, स्किन हेल्थ और एनर्जी लेवल—को सीधे प्रभावित करता है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे आप सुबह की शुरुआत से लेकर रात तक छोटी-छोटी आदतों के जरिए खुद को पूरी तरह हाइड्रेटेड रख सकते हैं। क्यों जरूरी है रोज़ हाइड्रेटेड रहना? पानी शरीर के लिए एक “नेचुरल फ्यूल” की तरह काम करता है। इसके नियमित सेवन से: शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनती है टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं दिमाग तेज़ और फोकस बेहतर होता है थकान और मांसपेशियों में ऐंठन से बचाव होता है पाचन बेहतर रहता है कितना पानी पीना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, औसतन: पुरुष: लगभग 3.7 लीटर प्रतिदिन महिलाएं: लगभग 2.7 लीटर प्रतिदिन हालांकि, भारत जैसे गर्म देशों में या अगर आप एक्सरसाइज करते हैं, तो यह मात्रा और बढ़ सकती है। डिहाइड्रेशन के संकेत पहचानें अगर आप इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो समझिए शरीर को पानी की जरूरत है: मुंह सूखना और होंठ फटना थकान और चिड़चिड़ापन गहरे रंग का यूरिन सिरदर्द या चक्कर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई सुबह की शुरुआत ऐसे करें रातभर बिना पानी के रहने के बाद शरीर को तुरंत हाइड्रेशन की जरूरत होती है। उठते ही 1–2 गिलास पानी पिएं नींबू पानी लें—यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है बेड के पास पानी रखें ताकि याद रहे दिनभर हाइड्रेट रहने के स्मार्ट तरीके 1. सिर्फ पानी ही नहीं, ये ड्रिंक्स भी हैं फायदेमंद नारियल पानी नींबू पानी (निंबू पानी) छाछ हर्बल टी ORS (खासकर गर्मियों में) कैफीन और ज्यादा मीठे ड्रिंक्स से दूरी बनाएं। 2. खाने से भी बढ़ाएं हाइड्रेशन कुछ फल और सब्जियां पानी से भरपूर होती हैं: फल: तरबूज, संतरा, अंगूर, खरबूजा सब्जियां: खीरा, टमाटर, लौकी 3. वर्कआउट के दौरान ध्यान रखें एक्सरसाइज से पहले, दौरान और बाद में पानी पिएं इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करें केला, नारियल पानी अच्छे विकल्प हैं 4. ऑफिस में अपनाएं ये आसान टिप्स डेस्क पर पानी की बोतल रखें हर ब्रेक में पानी पिएं मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं बार-बार कॉफी की जगह पानी लें गर्मी और सर्दी—दोनों में जरूरी है हाइड्रेशन गर्मियों में: थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पानी पिएं धूप से बचें हल्के कपड़े पहनें सर्दियों में: प्यास कम लगती है, फिर भी पानी पिएं सूप और हर्बल टी लें स्किन ड्रायनेस से बचाव होता है स्किन और एनर्जी के लिए हाइड्रेशन अगर आपकी त्वचा डल लगती है या बार-बार थकान महसूस होती है, तो पानी की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। फायदे: स्किन में नेचुरल ग्लो ड्रायनेस कम एनर्जी लेवल बेहतर फाइन लाइन्स कम नजर आती हैं
आज के समय में फिटनेस को अक्सर एक ही चीज़ से मापा जाता है-वजन मशीन पर दिखने वाला नंबर। कई बार एक सप्ताह की छुट्टी, एक भारी भोजन या दिनचर्या में थोड़ा बदलाव भी उस नंबर को बदल देता है और लोगों को लगता है कि उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई। यही कारण है कि वजन मशीन का आंकड़ा कई लोगों के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति को प्रभावित करने लगता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस और स्वास्थ्य को केवल वजन से नहीं आंका जा सकता। असल में शरीर की सेहत कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है, जिन्हें समझना अधिक जरूरी है। वजन ही फिटनेस का सही पैमाना नहीं हमारे शरीर का कुल वजन कई चीजों से मिलकर बना होता है। इसमें हड्डियों का वजन, मांसपेशियां, शरीर में मौजूद वसा, अंग, कोशिकाएं और अन्य ऊतक शामिल होते हैं। इसी वजह से दो अलग-अलग व्यक्ति का वजन समान हो सकता है, लेकिन उनका शरीर पूरी तरह अलग दिख सकता है। उदाहरण के तौर पर एक व्यक्ति के शरीर में मांसपेशियों की मात्रा ज्यादा और वसा कम हो सकती है, जबकि दूसरे व्यक्ति में वसा अधिक और मांसपेशियां कम हो सकती हैं। ऐसे में दोनों का वजन भले ही एक जैसा हो, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से पहला व्यक्ति ज्यादा फिट माना जाएगा। मसल्स और बॉडी कंपोजिशन का महत्व जो लोग नियमित व्यायाम करते हैं, उनके शरीर में मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हड्डियों की घनत्व भी बेहतर होता है। इससे शरीर कई बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी बॉडी कंपोजिशन-यानी कम फैट और ज्यादा मसल्स-डायबिटीज, थायरॉयड और हाई ब्लड प्रेशर जैसी पुरानी बीमारियों के खतरे को कम कर सकती है। साथ ही इससे शरीर की फुर्ती, संतुलन और चलने-फिरने की क्षमता भी बेहतर रहती है। डॉक्टर जब वजन कम करने को कहते हैं, तो उसका मतलब क्या होता है? अक्सर डॉक्टर जब वजन कम करने की सलाह देते हैं, तो उनका मतलब केवल शरीर का कुल वजन कम करना नहीं होता। असल में उनका उद्देश्य शरीर में मौजूद अतिरिक्त वसा को कम करना होता है। इसे फैट लॉस कहा जाता है, जिसे केवल साधारण वजन मशीन से सही तरीके से मापा नहीं जा सकता। बॉडी कंपोजिशन जांच के विकल्प शरीर की सही संरचना जानने के लिए DEXA (Dual-Energy X-Ray Absorptiometry) स्कैन जैसे टेस्ट किए जाते हैं, जिनसे हड्डियों की घनत्व और शरीर में फैट व मसल्स की मात्रा का सही अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि यह जांच काफी महंगी होती है। इसके अलावा कई फिटनेस सेंटर भी बॉडी कंपोजिशन रिपोर्ट देते हैं, लेकिन ये कई बार बाहरी कारकों पर निर्भर होने के कारण पूरी तरह सटीक नहीं होती। फिटनेस की असली पहचान क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार असली फिटनेस केवल वजन से नहीं बल्कि शरीर की कार्यक्षमता से पहचानी जाती है। यदि आपका शरीर आसानी से सांस लेता है, आप बिना थकान के चल-फिर सकते हैं, व्यायाम के बाद जल्दी रिकवरी हो जाती है और दिल की धड़कन सामान्य रहती है-तो यह स्वस्थ शरीर की निशानी है। इसलिए फिटनेस जर्नी में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है निरंतरता, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।