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MBBS Student Named in NEET Solver Scam

NEET UG 2026 रद्द: बिहार में 60 लाख की सेटिंग का खुलासा, MBBS छात्र निकला सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड

surbhi मई 13, 2026 0
Bihar Police investigating NEET UG 2026 solver gang linked to paper leak and MBBS student mastermind.
NEET UG 2026 Solver Gang Busted in Bihar

National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। एजेंसी ने कहा कि जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया। अब परीक्षा दोबारा कराई जाएगी, जिसकी नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी।

इस बीच बिहार और राजस्थान से सामने आए खुलासों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। बिहार में एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें एक MBBS छात्र को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

बिहार में सक्रिय था सॉल्वर गैंग

Bihar के Nalanda जिले में पुलिस ने NEET परीक्षा से पहले एक संगठित सॉल्वर गैंग का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पास कराने के नाम पर 50 से 60 लाख रुपये तक की डील करता था। पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्य आरोपी विम्स मेडिकल कॉलेज का MBBS छात्र अवधेश कुमार है। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

गाड़ी चेकिंग के दौरान खुला पूरा नेटवर्क

3 मई की रात पावापुरी थाना पुलिस वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान स्कॉर्पियो-एन और ब्रेजा जैसी दो लग्जरी गाड़ियों को रोका गया।

तलाशी के दौरान पुलिस को कई संदिग्ध दस्तावेज, पहचान पत्र और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री मिली। इसके बाद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।

मुख्य आरोपी अवधेश कुमार के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम चैट, कॉन्टैक्ट और पैसों के लेन-देन से जुड़े सबूत मिले। इसके बाद पुलिस ने Muzaffarpur, Jamui और Aurangabad समेत कई जिलों में छापेमारी की।

50-60 लाख रुपये में तय होती थी डील

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह असली उम्मीदवार की जगह सॉल्वर बैठाने की तैयारी करता था। इसके लिए पहले 1.5 से 2 लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे, जबकि पूरी डील 50 से 60 लाख रुपये तक में तय होती थी।

जांच एजेंसियों के मुताबिक उज्ज्वल राज उर्फ राजा बाबू, अवधेश कुमार और अमन कुमार सिंह इस नेटवर्क के प्रमुख सदस्य थे।

डॉक्टर का बेटा समेत कई आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों में Sitamarhi के डॉक्टर नरेश कुमार दास का बेटा हर्षराज भी शामिल है।

इसके अलावा मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार समेत कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े कई लोग अब भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

राजस्थान से भी मिले पेपर लीक के संकेत

Rajasthan में भी NEET पेपर लीक को लेकर बड़े संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों को कुछ छात्रों के पास हाथ से लिखे गए सवाल मिले, जो कथित तौर पर असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे।

Rajasthan Special Operations Group (SOG) ने Dehradun, Sikar और Jhunjhunu में कार्रवाई करते हुए 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

बताया जा रहा है कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल छात्रों तक पहुंच गए थे। जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कथित क्वेश्चन बैंक केरल के एक मेडिकल छात्र के जरिए राजस्थान तक कैसे पहुंचा।

NTA ने क्यों लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला?

NTA के अनुसार 8 मई से ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट में परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।

एजेंसी ने कहा कि लाखों छात्रों के हित और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए री-एग्जाम जरूरी था।

छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा

NTA ने साफ किया है कि छात्रों को फिर से रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने परीक्षा केंद्रों को ही बरकरार रखा जाएगा और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे।

साथ ही परीक्षा शुल्क वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। एजेंसी जल्द ही नई परीक्षा तिथि और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी जारी करेगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Independence Day 2026: आजादी की कहानी बयां करती हैं भारत की ये 17 ऐतिहासिक जगहें, इस स्वतंत्रता दिवस जरूर करें सैर

नई दिल्ली, एजेंसियां। 15 अगस्त भारत के इतिहास का बेहद खास दिन है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अगर आप घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इस बार ऐसी जगहों का रुख कर सकते हैं, जिनका सीधा संबंध देश के स्वतंत्रता आंदोलन से रहा है। इन ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा आपको पर्यटन के साथ-साथ आजादी की लड़ाई और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को करीब से समझने का मौका भी देगी।   1. लाल किला, दिल्ली   दिल्ली का लाल किला स्वतंत्रता दिवस का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री यहीं से देश को संबोधित करते हैं। आजादी के जश्न के दौरान लाल किले का माहौल खास आकर्षण का केंद्र रहता है।   2. जलियांवाला बाग, अमृतसर   अमृतसर का जलियांवाला बाग 13 अप्रैल 1919 की भयावह घटना की याद दिलाता है। ब्रिटिश सैनिकों की गोलीबारी में बड़ी संख्या में निहत्थे लोग मारे गए थे। आज यह स्थल उन शहीदों की स्मृति में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्मारक है।   3. सेल्युलर जेल, अंडमान   ‘काला पानी’ के नाम से प्रसिद्ध सेल्युलर जेल में अंग्रेजों ने कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद रखा था। आज यह राष्ट्रीय स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों के कठिन संघर्ष और बलिदान की कहानी बताता है।   4. साबरमती आश्रम, अहमदाबाद   महात्मा गांधी से जुड़ा साबरमती आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण जगहों में शामिल है। 1930 में गांधीजी ने यहीं से ऐतिहासिक दांडी मार्च की शुरुआत की थी। आश्रम में उनके जीवन और सत्याग्रह से जुड़ी कई यादें मौजूद हैं।   5. दांडी, गुजरात   दांडी मार्च का अंतिम पड़ाव रहा दांडी नमक सत्याग्रह के इतिहास से जुड़ा है। यहां स्थित नेशनल साल्ट सत्याग्रह मेमोरियल 1930 के आंदोलन और ब्रिटिश नमक कानून के विरोध की कहानी को सामने रखता है।   6. अगस्त क्रांति मैदान, मुंबई   1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से अगस्त क्रांति मैदान का गहरा संबंध है। इसी आंदोलन के दौरान देशभर में ‘करो या मरो’ का संदेश गूंजा था।   7. आगा खान पैलेस, पुणे   भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी समेत कई नेताओं को आगा खान पैलेस में नजरबंद रखा गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इस जगह का विशेष महत्व है।   8. झांसी का किला, उत्तर प्रदेश   झांसी का किला वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी की याद दिलाता है। 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ उनके संघर्ष ने उन्हें भारतीय इतिहास की सबसे प्रसिद्ध वीरांगनाओं में शामिल कर दिया।   9. काकोरी, उत्तर प्रदेश   काकोरी का नाम 1925 की काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़ा है। इस घटना ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन को नई पहचान दी और कई क्रांतिकारियों के नाम इतिहास में दर्ज हुए।   10. चंपारण, बिहार   चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी के शुरुआती प्रमुख आंदोलनों में शामिल था। किसानों की समस्याओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में गांधीवादी सत्याग्रह की ताकत का महत्वपूर्ण उदाहरण बना।   11. बैरकपुर, पश्चिम बंगाल   बैरकपुर का नाम मंगल पांडे और 1857 के विद्रोह से जुड़ा हुआ है। यहां की ऐतिहासिक घटनाओं ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ शुरुआती विद्रोह की कहानी को मजबूत किया।   12. चौरी चौरा, उत्तर प्रदेश   1922 की चौरी चौरा घटना ने असहयोग आंदोलन की दिशा को प्रभावित किया था। यह स्थान स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर की महत्वपूर्ण घटनाओं को समझने का अवसर देता है।   13. मणि भवन, मुंबई   मुंबई का मणि भवन महात्मा गांधी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जगह है। यहां गांधीजी के मुंबई प्रवास और उनके राजनीतिक-सामाजिक कार्यों से जुड़े इतिहास को देखा जा सकता है।   14. सेवाग्राम आश्रम, महाराष्ट्र   वर्धा स्थित सेवाग्राम आश्रम गांधीजी के जीवन और विचारों से जुड़ा रहा है। यहां गांधीजी की सादगी और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को करीब से समझा जा सकता है।   15. राजघाट, दिल्ली   दिल्ली का राजघाट महात्मा गांधी की समाधि है। शांत वातावरण वाला यह स्थल गांधीजी के सत्य और अहिंसा के विचारों को याद करने का महत्वपूर्ण स्थान है।   16. आनंद भवन, प्रयागराज   प्रयागराज का आनंद भवन नेहरू परिवार और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ा है। यहां स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुए राजनीतिक घटनाक्रम और नेहरू परिवार से जुड़ी कई ऐतिहासिक यादें देखने को मिलती हैं।   17. नेताजी भवन, कोलकाता   कोलकाता का नेताजी भवन सुभाष चंद्र बोस के जीवन और संघर्ष की यादों से जुड़ा है। नेताजी और आजाद हिंद फौज के इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है।   इस स्वतंत्रता दिवस इतिहास से जुड़ने का मौका   भारत की आजादी केवल 15 अगस्त 1947 की एक तारीख नहीं, बल्कि दशकों तक चले आंदोलनों, संघर्षों और बलिदानों का परिणाम थी। देशभर में मौजूद ये ऐतिहासिक स्थल उस संघर्ष की अलग-अलग कहानियां आज भी लोगों तक पहुंचाते हैं। इस Independence Day इन जगहों की यात्रा करके देश के इतिहास को करीब से जानना एक यादगार अनुभव हो सकता है।

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Air India flight experiences severe turbulence over Odisha, causing a sudden 425-foot drop in altitude within 30 seconds.
Air India Flight Turbulence: 30 सेकेंड में 425 फीट नीचे आया विमान, जांच में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

नई दिल्ली: फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 को उड़ान के दौरान बेहद तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि विमान कुछ ही सेकेंड में तेजी से नीचे आया। करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान की ऊंचाई में 30 सेकेंड के भीतर लगभग 425 फीट की कमी दर्ज की गई। इस दौरान विमान की वर्टिकल स्पीड करीब माइनस 1600 फीट प्रति मिनट तक पहुंच गई। अचानक विमान के नीचे आने से सीट बेल्ट नहीं लगाए बैठे कई यात्री अपनी सीट से उछल गए और छत से जा टकराए। कुछ यात्रियों के सीटों और गलियारे में गिरने की भी जानकारी सामने आई। ओडिशा के ऊपर हुआ तेज झटका प्राथमिक जांच के अनुसार, घटना के समय विमान ओडिशा के रेंगाली जलाशय के ऊपर लगभग 36 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 480 नॉट की रफ्तार से उड़ रहा था। सुबह करीब 9:33:17 बजे विमान को अचानक तेज झटका लगा। इसके बाद विमान लगभग 175 फीट नीचे आया। अगले करीब 30 सेकेंड में इसकी कुल ऊंचाई में लगभग 425 फीट की कमी दर्ज की गई। इसी दौरान विमान की गति भी करीब 22 नॉट कम हो गई। जांच में दर्ज आंकड़े बताते हैं कि टर्बुलेंस का असर कुछ ही क्षणों में विमान की ऊंचाई और गति दोनों पर पड़ा। यात्रियों को क्यों लगा ऐसा झटका? विमान की लंबवत गति माइनस 1600 फीट प्रति मिनट तक पहुंचने के कारण केबिन में कुछ समय के लिए यात्रियों को भारहीनता जैसी स्थिति महसूस हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में जो यात्री सीट बेल्ट नहीं लगाए होते हैं, उनके शरीर को अचानक ऊपर की ओर उछाल मिल सकता है। यही वजह है कि घटना के दौरान कई यात्री सीटों से उठकर छत से टकरा गए और कुछ नीचे गिर पड़े। टर्बुलेंस के दौरान केबिन में अफरातफरी की स्थिति बन गई थी। कई यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि विमान बाद में सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया। मानसून में टर्बुलेंस क्यों बढ़ जाता है? एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान हल्का और मध्यम टर्बुलेंस आम स्थिति हो सकती है। लेकिन क्यूम्यलोनिंबस यानी सीबी बादलों के आसपास हवा के बेहद तेज ऊपर-नीचे प्रवाह के कारण गंभीर टर्बुलेंस भी पैदा हो सकता है। ऐसे एयर करंट में विमान को अचानक ऊपर-नीचे होने वाली तेज गति का सामना करना पड़ सकता है। इससे विमान की ऊंचाई और एयरस्पीड में कुछ समय के लिए तेजी से बदलाव संभव है। विशेषज्ञ ऐसी स्थिति को तेज रफ्तार कार के अचानक गहरे गड्ढे में जाने जैसा बताते हैं। हालांकि विमान के लिए ऐसी स्थिति अलग तरह की होती है और पायलट इसके लिए निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। सीट बेल्ट ने फिर साबित की अपनी अहमियत इस घटना से एक बार फिर विमान में सीट बेल्ट लगाए रखने की जरूरत सामने आई है। टर्बुलेंस कब और कितनी तेजी से आएगा, इसका सटीक अनुमान हमेशा संभव नहीं होता। इसी कारण यात्रियों को सीट बेल्ट संकेत बंद होने के बाद भी अपनी सीट पर बेल्ट बांधे रखने की सलाह दी जाती है, खासकर लंबी उड़ानों के दौरान। अचानक टर्बुलेंस की स्थिति में यही छोटा-सा सुरक्षा उपाय गंभीर चोट से बचा सकता है। जांच में सामने आए अहम आंकड़े प्राथमिक जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार: विमान करीब 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। घटना के दौरान विमान की ऊंचाई में करीब 425 फीट की कमी आई। यह बदलाव लगभग 30 सेकेंड में दर्ज हुआ। वर्टिकल स्पीड करीब -1600 फीट प्रति मिनट तक पहुंची। विमान की गति में लगभग 22 नॉट की कमी दर्ज हुई। सीट बेल्ट नहीं लगाए कुछ यात्री उछलकर छत से टकराए। विमान बाद में सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया। प्राथमिक जांच के ये आंकड़े बताते हैं कि घटना के दौरान टर्बुलेंस काफी तेज था। हालांकि अंतिम जांच के बाद ही घटना की पूरी तकनीकी तस्वीर और उसके कारणों को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।  

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Ghaziabad paneer adulteration
गाजियाबाद में पनीर में मिलाया जा रहा था कपड़े का वाइटनर, रोज 300-400 किलो सप्लाई; तीन फैक्ट्रियों पर छापा

गाजियाबाद, एजेंसियां। त्योहारों के सीजन से पहले गाजियाबाद में खाद्य विभाग की छापेमारी में नकली पनीर बनाने के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। भोजपुर थाना क्षेत्र के नाहली गांव में तीन फैक्ट्रियों में पनीर को सफेद और वजनदार बनाने के लिए कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाला वाइटनर, पामोलीन ऑयल, दूध पाउडर और अन्य रसायनों के इस्तेमाल की बात सामने आई है।   खाद्य विभाग ने कार्रवाई के दौरान 868 किलो पनीर और 170 किलो खोया मौके पर नष्ट कराया। विभिन्न रसायनों समेत कुल 20 नमूने जांच के लिए लखनऊ की लैब भेजे गए हैं।   रोज 300 से 400 किलो पनीर तैयार कर भेजते थे बाजार   पूछताछ में सामने आया कि तीनों फैक्ट्रियों में त्योहारों के दौरान रोजाना करीब 300 से 400 किलो पनीर तैयार किया जा रहा था। यह पनीर गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ तक सप्लाई किए जाने की जानकारी मिली है।   सस्ता होने के कारण यह पनीर बाजार में करीब 200 से 250 रुपये प्रति किलो की कीमत पर बेचा जा रहा था। खाद्य विभाग के मुताबिक त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के कारण उत्पादन भी बढ़ा दिया गया था।   तीन फैक्टरी संचालकों पर केस दर्ज   सहायक आयुक्त खाद्य-2 सुरेश कुमार मिश्रा के अनुसार, नाहली निवासी फैक्टरी संचालकों कलवा, सकील और कफील के खिलाफ भोजपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोपियों पर BNS की धारा 123, 275 समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।   लखनऊ लैब से नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस भी पूरे मामले की जांच कर रही है।   सामान्य तरीके से पहचानना मुश्किल   मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशुतोष राय ने बताया कि फैक्ट्रियों में पनीर तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल आरोपी खुद तैयार कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, इन रसायनों के इस्तेमाल के बाद मिलावटी पनीर को सामान्य घरेलू तरीकों से पहचानना मुश्किल हो सकता है।   दिखने और स्वाद में यह पनीर असली जैसा लग सकता है, जिससे आम लोगों के लिए इसकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाती है।   सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं रसायन   विशेषज्ञों के अनुसार वाइटनर और अन्य हानिकारक रसायनों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। लंबे समय तक ऐसे रसायनों के संपर्क या सेवन से चक्कर, बेहोशी और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।   बच्चों और बुजुर्गों पर ऐसे हानिकारक पदार्थों का असर अधिक गंभीर हो सकता है।   खाद्य विभाग ने लोगों से की अपील   खाद्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद ब्रांडेड तथा FSSAI लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खरीदें। विभाग ने लोगों को सस्ते पनीर के लालच में स्वास्थ्य से समझौता नहीं करने की सलाह दी है।   त्योहारों को देखते हुए जिले में मिठाई और डेयरी उत्पाद बनाने वाली इकाइयों के खिलाफ जांच अभियान जारी रखने की बात भी कही गई है।

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