लोकसभा में लोक परीक्षा (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को "कैमरे का एंगल नहीं, बल्कि दिल का एंगल बदलना पड़ेगा" और युवाओं से जुड़े सवालों का जवाब देना होगा। युवाओं पर कार्रवाई को लेकर सरकार से सवाल प्रियंका गांधी ने कहा कि देशभर में छात्रों के आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पैलेट गन और AK-47 जैसे हथियारों के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया। उन्होंने पूछा कि क्या यह फैसला प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के स्तर पर लिया गया था और कहा कि पूरे देश के युवा इसका जवाब चाहते हैं। पेपर लीक और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरा कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद पेपर लीक माफिया के खिलाफ कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तथा किसी बड़े आरोपी को सजा नहीं मिली। उनके मुताबिक, इससे युवाओं का सरकार पर भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। शिक्षा व्यवस्था पर लगाए गंभीर आरोप प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के जरिए परीक्षा प्रणाली का अत्यधिक केंद्रीकरण किया गया, जिससे कई नई समस्याएं सामने आईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिक्षा संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ा है और शिक्षा का बजट वास्तविक रूप से घटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है तो केवल सख्त कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना होगा। पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का भी किया जिक्र प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख करते हुए कहा कि जब देश के कई छात्र पेपर लीक से प्रभावित थे और कुछ परिवार गहरे संकट से गुजर रहे थे, तब सरकार का रवैया संवेदनशील नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि सरकार को आत्ममंथन करने की जरूरत है ताकि छात्र दोबारा परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कर सकें। एंटी पेपर लीक बिल पर जारी है चर्चा लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा जारी है। सरकार का कहना है कि नए कानून से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा और पेपर लीक जैसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी। वहीं विपक्ष का आरोप है कि केवल कड़ी सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और युवाओं के भरोसे की बहाली भी उतनी ही जरूरी है।
NEET Protest: NEET-UG पेपर लीक के विरोध में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार (27 जुलाई) को सुनवाई करेगा। अदालत ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती की न्यायिक जांच और कार्रवाई की मांग की है। संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को दी चुनौती यह मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायणन ने याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। याचिकाओं में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई है। उस दिन CJP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और युवा कथित NEET पेपर लीक के विरोध में तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। परीक्षा सुधारों पर केंद्र और NTA से रिपोर्ट तलब इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे सुधारों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से इन प्रमुख बिंदुओं पर प्रगति रिपोर्ट मांगी है: परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुरक्षा व्यवस्था प्रशासनिक सुधार मानव संसाधन प्रबंधन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली यह निर्देश फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। स्थायी सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट का जोर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठा रही है तथा जल्द ही विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी। इस पर जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि सुधार केवल अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी और संस्थागत बदलाव जरूरी हैं। NTA से 10 क्षेत्रों में मांगी जानकारी सुप्रीम कोर्ट ने NEET सुधारों के लिए गठित उच्चाधिकार समिति (HPC) की सिफारिशों को लागू करने की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। अदालत ने परीक्षा के तीनों चरणों से जुड़े सुधारों पर जानकारी देने को कहा है— परीक्षा से पहले की व्यवस्था परीक्षा के दौरान सुरक्षा और निगरानी परीक्षा के बाद की प्रक्रिया इसके अलावा प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था तथा राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। डिजिटल सुरक्षा और पहचान सत्यापन पर भी सवाल सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्नपत्रों और परीक्षा डेटा की सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक पूरी परीक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने डेटा ट्रांसफर, स्टोरेज, साइबर सुरक्षा और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही, उम्मीदवारों की पहचान सत्यापन के लिए डिजियात्रा जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है। सुधार प्रक्रिया पर रहेगी सुप्रीम कोर्ट की नजर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह NEET परीक्षा प्रणाली में सुधार की पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी करेगा। अदालत का कहना है कि उद्देश्य केवल वर्तमान विवाद का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। यह कार्रवाई NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के बाद परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में NTA की कार्यप्रणाली में और भी बड़े सुधार किए जाएंगे। 47 अधिकारियों पर गिरी गाज, कुछ पर होगी कानूनी कार्रवाई सरकारी सूत्रों के अनुसार, हटाए गए 47 अधिकारियों में से कुछ के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आंतरिक जांच के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की गई है। सरकार का कहना है कि परीक्षा में लापरवाही या अनियमितता के लिए किसी भी स्तर पर जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। NTA में होगी विशेषज्ञ अधिकारियों की नई नियुक्ति सुधार प्रक्रिया के तहत NTA में 4 जनरल मैनेजर (General Managers) और 16 यंग प्रोफेशनल्स (Young Professionals) की भर्ती की जाएगी। इन नियुक्तियों में साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, परीक्षा केंद्र संचालन और असेसमेंट रिसर्च जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। आउटसोर्सिंग और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में भी होंगे बदलाव सरकार NTA की आउटसोर्सिंग व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा प्रणाली की भी समीक्षा कर रही है। नई तकनीकों, डिजिटल मॉनिटरिंग और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा। छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिकता केंद्र सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना और छात्रों का विश्वास मजबूत करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार का अभियान आगे भी जारी रहेगा और भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त प्रशासनिक एवं कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई ने विशेष अदालत में बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे ने एक छात्र के परिवार से 5 लाख रुपये लेकर परीक्षा से पहले ही उसे लीक हुआ केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र दिखाया था। यह जानकारी सीबीआई ने आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने रखी। दो अन्य डॉक्टरों को भी नेटवर्क से जोड़ने का आरोप सीबीआई का कहना है कि डॉ. शिरुरे ने इस कथित पेपर लीक नेटवर्क में दो अन्य डॉक्टरों की मुलाकात सह-आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से कराई थी। जांच के अनुसार, इन दोनों डॉक्टरों के बच्चों को भी लीक हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला और परीक्षा से पहले उन्हें पेपर उपलब्ध कराया गया था। अप्रैल में ही दिखाया गया था प्रश्नपत्र जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉ. शिरुरे ने सह-आरोपी शिवराज मोटेगांवकर के बेटे आदित्य मोटेगांवकर को मई में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा से पहले, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही केमिस्ट्री का मूल प्रश्नपत्र दिखाया था। सीबीआई का आरोप है कि छात्रों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर परीक्षा की तैयारी कराई गई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिल सके। जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा की स्कैन की गई OMR उत्तर पुस्तिका (OMR Answer Sheet) और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स जारी कर दिए हैं। अभ्यर्थी अब अपनी OMR शीट का मिलान कर सकते हैं और किसी भी त्रुटि की स्थिति में निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हुई OMR शीट NTA ने NEET UG 2026 की स्कैन की गई OMR उत्तर पुस्तिका और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स को आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर अपलोड कर दिया है। इसके अलावा, OMR शीट की स्कैन कॉपी उम्मीदवारों के पंजीकृत ईमेल आईडी पर भी भेजी गई है। उम्मीदवारों को आवेदन संख्या और पासवर्ड के जरिए लॉगिन करना होगा। सुरक्षा के लिए OTP आधारित टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी लागू किया गया है। कब तक कर सकते हैं आपत्ति दर्ज? रिकॉर्डेड OMR रिस्पॉन्स पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया 13 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि: 15 जुलाई 2026 प्रति प्रश्न शुल्क: ₹200 भुगतान का माध्यम: डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग निर्धारित समय सीमा के बाद या शुल्क जमा किए बिना भेजी गई किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। किन मामलों में दर्ज कर सकते हैं चुनौती? NTA ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह सुविधा केवल रिकॉर्डेड OMR रिस्पॉन्स में किसी त्रुटि को चुनौती देने के लिए उपलब्ध है। उत्तर कुंजी (Answer Key) पर आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी है। इसलिए अब उत्तर कुंजी से संबंधित कोई नया दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे करें OMR रिस्पॉन्स चैलेंज उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन कर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकते हैं- NTA की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं। आवेदन संख्या और पासवर्ड से लॉगिन करें। मोबाइल नंबर या ईमेल पर प्राप्त OTP से सत्यापन पूरा करें। "View/Challenge OMR Sheet & Recorded Responses" विकल्प पर क्लिक करें। स्कैन की गई OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स का मिलान करें। यदि कोई त्रुटि मिले तो संबंधित प्रश्न चुनकर आपत्ति दर्ज करें। प्रत्येक चुनौती के लिए ₹200 का ऑनलाइन शुल्क जमा करें। भुगतान के बाद Submit Challenge पर क्लिक करें। भविष्य के लिए आवेदन की रसीद डाउनलोड कर सुरक्षित रखें। सही आपत्ति होने पर क्या मिलेगा रिफंड? यदि उम्मीदवार द्वारा दर्ज की गई आपत्ति जांच के दौरान सही पाई जाती है, तो संबंधित ₹200 प्रोसेसिंग शुल्क वापस (Refund) कर दिया जाएगा। कब हुई थी NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा? NTA ने NEET UG 2026 Re-Exam का आयोजन 21 जून 2026 को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक कराया था। इससे पहले 3 मई 2026 को आयोजित मूल परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। पुनर्परीक्षा में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।
Rahul Gandhi on UGC-NET: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UGC-NET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा से पहले एक पीडीएफ वायरल हुई थी, जिसमें शामिल कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे। सरकार या राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से राहुल गांधी के इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। UGC-NET को लेकर राहुल गांधी का दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि हाल ही में आयोजित UGC-NET परीक्षा को लेकर सामने आए आरोप बेहद गंभीर हैं। उनका दावा है कि परीक्षा से पहले करीब 100 पन्नों की एक पीडीएफ प्रसारित हुई थी, जिसमें ऐसे प्रश्न थे जो बाद में परीक्षा में पूछे गए सवालों से काफी हद तक मेल खाते थे। राहुल गांधी के मुताबिक, यह पीडीएफ प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी थी और इसकी जानकारी केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पास होनी चाहिए थी। '90 सवाल असली पेपर से मेल खाते थे' राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वायरल पीडीएफ में मौजूद लगभग 90 प्रश्न UGC-NET के समाजशास्त्र (Sociology) विषय के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि यही प्रश्नपत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में करीब 2.25 लाख रुपये में बेचे जाने की बात सामने आई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अन्य परीक्षाओं को लेकर भी लगाए आरोप कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर इसी नेटवर्क ने CSIR-NET, HTET और ADA जैसी आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया था। उन्होंने कहा कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। केंद्र सरकार पर साधा निशाना राहुल गांधी ने कहा कि NEET और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आने के बावजूद सरकार प्रभावी कदम उठाती नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोप उनकी मेहनत और भविष्य दोनों पर असर डालते हैं। छात्रों से एकजुट होने की अपील अपने संदेश के अंत में राहुल गांधी ने छात्रों से एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए छात्रों और युवाओं की सामूहिक आवाज सबसे महत्वपूर्ण है। आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल राहुल गांधी के लगाए गए आरोपों पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), शिक्षा मंत्रालय या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि इस मामले में कोई नई जानकारी या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, तो उसके बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
7 जुलाई रात 11:50 बजे तक मिलेगा मौका, समय रहते पूरी करें प्रक्रिया नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 के उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है, जो रिफंड के पात्र हैं। एजेंसी ने कहा है कि जिन अभ्यर्थियों ने अब तक अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट या सत्यापित नहीं की है, वे 7 जुलाई 2026 रात 11:50 बजे तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। समय सीमा के भीतर सही बैंक विवरण दर्ज करने से रिफंड मिलने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। NTA ने क्या कहा? NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी सूचना में बताया कि जिन उम्मीदवारों ने पहले ही अपने बैंक खाते की जानकारी की पुष्टि कर दी है, उनके रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी के अनुसार, अब तक 8,29,510 उम्मीदवार अपने बैंक विवरण को अपडेट या संशोधित कर चुके हैं। बैंक डिटेल कैसे अपडेट करें? रिफंड के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित आसान चरणों का पालन कर सकते हैं: NEET UG की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Application Number और Password या Date of Birth की सहायता से लॉगिन करें। Refund/Bank Details सेक्शन में जाकर अपने बैंक खाते की जानकारी जांचें। यदि कोई त्रुटि हो तो Account Number, IFSC Code और अन्य आवश्यक विवरण सही करें। सभी जानकारी की पुष्टि करने के बाद Submit पर क्लिक करें। भविष्य के संदर्भ के लिए Confirmation Page डाउनलोड या प्रिंट करके सुरक्षित रख लें। NTA की उम्मीदवारों को सलाह एजेंसी ने सभी पात्र अभ्यर्थियों से अपील की है कि यदि उनके बैंक खाते की जानकारी में किसी भी प्रकार की गलती है, तो अंतिम तिथि से पहले उसे अवश्य सुधार लें। गलत बैंक विवरण के कारण रिफंड मिलने में देरी या अन्य तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं। NEET UG री-एग्जाम का रिजल्ट कब आएगा? NEET UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून 2026 को देशभर के निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित किया गया था। परीक्षा की प्रोविजनल आंसर की पहले ही जारी की जा चुकी है। अब उम्मीदवारों को परिणाम का इंतजार है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, NEET UG री-एग्जाम का रिजल्ट 20 जुलाई 2026 तक या उससे पहले घोषित किया जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद और सुधारों को लेकर आज 1 जुलाई को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), उच्च शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया है। समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा करेगी। री-एग्जाम और परीक्षा प्रणाली की होगी समीक्षा समिति 21 जून को आयोजित NEET-UG री-एग्जाम के संचालन, पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई कमियों की समीक्षा करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से सुधार लागू किए जा सकते हैं। NTA अधिकारियों से मांगा जाएगा जवाब बैठक में NTA अधिकारियों से परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र प्रबंधन और अभ्यर्थियों की शिकायतों पर जवाब मांगा जाएगा। समिति यह जानना चाहती है कि एजेंसी ने पिछले विवादों के बाद क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। के. राधाकृष्णन पेश करेंगे सुधार रिपोर्ट पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन, जो NTA सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं, अपनी सिफारिशें भी प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के सुझाव शामिल हैं। बड़े फैसलों की उम्मीद शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के संचालन, NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इससे लाखों छात्रों और अभिभावकों को भविष्य में अधिक भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद और दोबारा आयोजित परीक्षा के बाद अब 1 जुलाई को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक में उच्च शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया है। परीक्षा सुधारों पर होगा मंथन बैठक में 21 जून को आयोजित NEET-UG री-एग्जाम से मिले अनुभवों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा होगी। समिति NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की भी समीक्षा करेगी। के. राधाकृष्णन भी देंगे प्रस्तुति पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन, जो NTA सुधारों की निगरानी के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं, बैठक में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे। इन सुझावों के आधार पर NTA की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में आगे की रणनीति तय की जाएगी। CBI जांच और रिजल्ट पर भी रहेगी नजर समिति को NEET-UG पेपर लीक मामले की CBI जांच की प्रगति से भी अवगत कराया जाएगा। साथ ही री-एग्जाम के बाद उत्तर कुंजी, परिणाम जारी करने की प्रक्रिया और भविष्य के सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा के सुरक्षित, पारदर्शी और सुचारू संचालन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। परीक्षा से एक दिन पहले, 20 जून को देशभर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, ताकि परीक्षा के दिन सुरक्षा, प्रश्नपत्र वितरण और परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा सके। एनटीए अधिकारियों के अनुसार, 21 जून को आयोजित होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए देशभर में दो लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों और परीक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थी देंगे परीक्षा नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा रविवार, 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक पारंपरिक पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित होगी। परीक्षा के लिए भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में कुल 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त समय की सुविधा दी जाएगी। ऐसे उम्मीदवार शाम 6:20 बजे तक परीक्षा दे सकेंगे। सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम पुनर्परीक्षा को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। गोपनीय प्रश्नपत्रों और परीक्षा सामग्री के परिवहन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन, पुलिस बलों और विशेष एस्कॉर्ट टीमों को सौंपी गई है। एनटीए ने परीक्षा प्रबंधन के लिए: 674 सिटी कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए हैं। 6,669 स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर अधीक्षक, निरीक्षक और सुरक्षा कर्मियों की अलग से तैनाती की गई है। मेडिकल कॉलेजों को एनएमसी का निर्देश इस बीच, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने में सहयोग करने का निर्देश दिया है। एनएमसी ने डीन और प्राचार्यों को भेजे नोटिस में कहा है कि 20 और 21 जून को विद्यार्थियों को सामान्य अवकाश नहीं दिया जाए। केवल विशेष परिस्थितियों और उचित कारणों में ही छुट्टी प्रदान की जाए। पेपर लीक विवाद के बाद हो रही पुनर्परीक्षा गौरतलब है कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। पूरे मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। इसी विवाद के बाद एनटीए ने 21 जून को पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। एजेंसी का दावा है कि इस बार परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय निगरानी और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। अभ्यर्थियों के लिए अहम सलाह एनटीए ने अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने, एडमिट कार्ड और वैध पहचान पत्र साथ रखने तथा परीक्षा से संबंधित दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 21 जून को आयोजित होने वाली NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए ड्रेस कोड और परीक्षा केंद्र से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी अभ्यर्थियों को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। ड्रेस कोड का उल्लंघन करने या प्रतिबंधित वस्तुएं साथ लाने पर परीक्षा केंद्र में प्रवेश रोका जा सकता है। हल्के कपड़े पहनने की सलाह, धार्मिक वस्त्रों को अनुमति NTA के अनुसार, अभ्यर्थियों को हल्के और साधारण कपड़े पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर पूरी आस्तीन या ऊनी कपड़े पहनने की अनुमति रहेगी। धार्मिक आस्था से जुड़े वस्त्र और प्रतीक, जैसे हिजाब, पगड़ी या कलावा पहनने वाले उम्मीदवारों को भी प्रवेश मिलेगा, लेकिन उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा जांच के लिए निर्धारित समय से पहले केंद्र पर पहुंचना होगा। ये सामान ले जाने की है अनुमति परीक्षार्थी अपने साथ पारदर्शी पानी की बोतल और एडमिट कार्ड को सुरक्षित रखने के लिए पारदर्शी प्लास्टिक पाउच ले जा सकते हैं। एजेंसी ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचें ताकि जांच प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सके। इन वस्तुओं पर रहेगा पूरी तरह प्रतिबंध परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा भारी आभूषण, धातु की वस्तुएं, बड़े बेल्ट बकल और ऊंची हील वाले जूते भी सुरक्षा जांच के दायरे में होंगे। उम्मीदवारों को चप्पल या कम हील वाले जूते पहनने की सलाह दी गई है। सहायता के लिए हेल्पडेस्क उपलब्ध यदि किसी अभ्यर्थी को री-एग्जाम से संबंधित कोई जानकारी या समस्या हो, तो वह NTA हेल्पडेस्क के नंबर 011-40759000 या 011-69227700 पर संपर्क कर सकता है। इसके अलावा neetug2026@nta.ac.in पर ईमेल भेजकर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है। NTA ने सभी उम्मीदवारों से परीक्षा से पहले दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ने और उनका पालन करने की अपील की है।
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। यह प्रतिबंध नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले लागू किया गया है। हाई कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई को गुरुवार तक के लिए स्थगित करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान टेलीग्राम की ओर से दलील दी गई कि यह प्रतिबंध अवैध है और इससे भारत के करीब 15 करोड़ उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। सरकार ने टेलीग्राम के दुरुपयोग का दिया तर्क सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने अदालत में कहा कि एक चैनल बंद होने पर दूसरा तुरंत शुरू हो जाता है और QR कोड के जरिए अवैध भुगतान किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस समस्या से मई महीने से निपटने का प्रयास कर रही है और यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी रोक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत आदेश जारी कर टेलीग्राम की सेवाओं पर 22 जून 2026 तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। इसमें नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा की तारीख और उसके आसपास की अवधि शामिल है। एडिट फीचर पर भी रोक सरकारी आदेश के तहत टेलीग्राम को 30 जून 2026 तक भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के एडिट फीचर को निष्क्रिय करने का निर्देश भी दिया गया है। एनटीए का कहना है कि इस फीचर का इस्तेमाल कथित तौर पर परीक्षा के बाद फर्जी पेपर लीक के सबूत गढ़ने में किया जा रहा था। नीट-यूजी परीक्षा को लेकर सुरक्षा कड़ी एनटीए के अनुसार, ये कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा को सुरक्षित एवं निष्पक्ष तरीके से कराने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को ठगने वाले संगठित गिरोहों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मामले पर अगली सुनवाई गुरुवार को होगी दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की है।
नीट पेपर लीक मामले के आरोपी यश यादव को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उसे 21 जून को होने वाली दोबारा आयोजित NEET-UG परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने यश यादव को अपनी बहन की शादी में शामिल होने की भी इजाजत प्रदान की है। कोर्ट ने शिक्षा को बताया मौलिक अधिकार मामले की सुनवाई के दौरान राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और किसी भी व्यक्ति को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने यश यादव को परीक्षा देने की अनुमति प्रदान की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यश यादव को पुलिस हिरासत और सुरक्षा निगरानी में परीक्षा केंद्र ले जाया जाएगा। पढ़ाई के लिए किताबें रखने की भी मिली थी अनुमति यश यादव ने इससे पहले अदालत से पढ़ाई के लिए किताबें अपने पास रखने की अनुमति मांगी थी। 2 जून को कोर्ट ने उसकी इस मांग को स्वीकार कर लिया था, ताकि वह आगामी परीक्षा की तैयारी कर सके। यश यादव की वकील अंबिका यादव ने अदालत में कहा था कि वह एक मेधावी छात्र है और उसने 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा दी थी। परीक्षा स्थगित होने के बाद अब 21 जून को दोबारा आयोजित की जा रही है, इसलिए उसे परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। नीट पेपर लीक मामले में आरोपी है यश यादव यश यादव नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में से एक है। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है। अदालत ने माना कि आपराधिक मामले में आरोपी होने मात्र से किसी छात्र के शिक्षा के अधिकार को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार का सख्त कदम राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और नकल रैकेट पर कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि Telegram का इस्तेमाल संगठित गिरोहों द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा के उम्मीदवारों को धोखा देने और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है। आईटी कानून के तहत जारी हुआ आदेश सरकार ने Telegram पर यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून के एक विशेष प्रावधान के तहत लगाया है। यह प्रावधान देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित करने की अनुमति देता है। सरकारी बयान के मुताबिक यह कदम सीमित अवधि और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। NEET 2026 पेपर लीक के बाद बढ़ी सख्ती पिछले महीने NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जब जांच एजेंसियों को प्रश्नपत्र लीक होने के संकेत मिले थे। इस घटना के बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। अब सरकार ने 21 जून 2026 को पुनर्परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। NTA ने बताया क्यों उठाना पड़ा यह कदम शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली National Testing Agency (NTA) ने कहा कि Telegram का उपयोग कुछ संगठित नकल गिरोहों द्वारा NEET पुनर्परीक्षा के अभ्यर्थियों को गुमराह करने और धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। एजेंसी के अनुसार, प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसके बाद अस्थायी प्रतिबंध को "अंतिम विकल्प" के रूप में लागू किया गया। लाखों उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा असर भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और यहां करोड़ों लोग इस ऐप का उपयोग करते हैं। शिक्षा, व्यवसाय, समाचार, ऑनलाइन समुदाय और व्यक्तिगत संचार के लिए Telegram व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने स्वीकार किया है कि इस कदम से बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को असुविधा होगी, लेकिन परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी बताया गया है। टेलीकॉम और टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल प्रमुख दूरसंचार कंपनियों और टेक प्लेटफॉर्म्स की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां जैसे Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea (Vi) इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया में हैं या नहीं, इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं Google Play Store और Apple App Store की ओर से भी फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है। 21 जून की परीक्षा पर टिकी निगाहें अब छात्रों और अभिभावकों की नजर 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा पर है। सरकार का कहना है कि परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। Telegram पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध हाल के वर्षों में किसी बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के खिलाफ उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है।
बोकारो। बोकारो जिले में होने वाली NEET-UG 2026 री-एग्जाम को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए जिले के सभी आठ परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। प्रत्येक केंद्र पर दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट), पुलिस पदाधिकारी और वरीय प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता को रोका जा सके। हर परीक्षा केंद्र पर रहेगी प्रशासन की निगरानी जिला प्रशासन के अनुसार, परीक्षा शुरू होने से पहले सभी केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वरीय अधिकारियों को अलग-अलग परीक्षा केंद्रों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि परीक्षा केंद्रों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा, जिससे अनधिकृत लोगों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। समय से पहुंचने की अपील प्रशासन ने अभ्यर्थियों से परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंचने की अपील की है। प्रवेश के समय एडमिट कार्ड और वैध पहचान पत्र की गहन जांच की जाएगी। निर्धारित समय के बाद पहुंचने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। नकल और गड़बड़ी पर होगी सख्त कार्रवाई जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान नकल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग या किसी भी प्रकार की अनियमित गतिविधि पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी परीक्षा केंद्रों पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही परीक्षार्थियों से भी नियमों का पालन करने और परीक्षा प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की गई है, ताकि री-एग्जाम पूरी तरह निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
नई दिल्ली: NEET UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पेपर लीक में शामिल दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो भविष्य में दूसरों के लिए मिसाल बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है ताकि जल्द फैसला हो सके। 21 जून को होने वाले NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। मंगलवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NTA मुख्यालय पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा संचालन और रिजल्ट प्रक्रिया का जायजा लिया। दोषियों पर होगी सबसे कड़ी कार्रवाई धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पेपर तैयार करने और अनुवाद प्रक्रिया से जुड़े जिन लोगों ने देश के करोड़ों छात्रों का भरोसा तोड़ा है, उनके खिलाफ न केवल आपराधिक कार्रवाई होगी बल्कि नागरिक दायित्व (Civil Liability) के तहत भी कार्रवाई की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई को निर्देश दिया गया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई सुनिश्चित की जाए ताकि जल्द फैसला सामने आ सके। शिक्षा मंत्री ने कहा, "दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो आने वाले समय में किसी के लिए भी चेतावनी और मिसाल बने।" PM मोदी भी कर रहे हैं निगरानी धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि NTA कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है ताकि उन संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया। री-एग्जाम की तैयारियां अंतिम चरण में NTA पहले ही NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर चुका है। अब जल्द ही एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। कुछ छात्रों द्वारा परीक्षा केंद्र बदलने की मांग की गई है, जिस पर एजेंसी विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी फैसले छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। संसदीय समिति ने अधिकारियों को तलब किया बुधवार को संसद की स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, NTA और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की सुधार योजनाओं पर सवाल-जवाब करेगी। CUET-UG रिजल्ट भी जल्द NTA CUET-UG 2026 का रिजल्ट भी जल्द जारी करने की तैयारी में है। 7 जून को परीक्षा समाप्त होने के बाद 9 जून को प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी गई थी। छात्र 11 जून तक प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क देकर आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इस वर्ष 243 विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET स्कोर के आधार पर होगा। साइबर सुरक्षा पर विशेष फोकस सरकार ने NTA के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर के नए अधिकारियों की नियुक्ति की है। इसके अलावा IB, CBI और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को भी सक्रिय किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने केंद्र सरकार से पिछले आठ वर्षों में NTA द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुई पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर एक विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि पिछले पेपर लीक मामलों की जांच किस प्रकार हुई और उसके परिणाम क्या रहे। जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होने के कारण छात्रों में असमंजस और अविश्वास का माहौल बना हुआ है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई सार्वजनिक करने की मांग संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष ने कहा कि फिलहाल पेपर लीक मामलों में सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई का कोई समेकित सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें प्रत्येक मामले का विवरण, गिरफ्तार आरोपियों के नाम, आरोपपत्र या क्लोजर रिपोर्ट की स्थिति और मुकदमों की वर्तमान प्रगति का उल्लेख हो। 2024 के मामलों का भी किया जिक्र दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में 2024 के नीट-यूजी पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्य आरोपी संजीव कुमार उर्फ मुखिया के जमानत पर होने और कुछ मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने को लेकर छात्रों के बीच सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों में स्पष्ट जानकारी न मिलने से अफवाहों को बढ़ावा मिल रहा है। 21 जून को होगी पुनर्परीक्षा गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा, जो 3 मई को आयोजित होनी थी, पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दी गई थी। मामले की जांच सीबीआई कर रही है और परीक्षा की पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है। दिग्विजय सिंह का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ाने से छात्रों का परीक्षा व्यवस्था और सरकारी संस्थानों पर विश्वास दोबारा मजबूत हो सकेगा।
NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी और इसके लिए शिक्षा मंत्रालय तथा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। इस बार सबसे बड़ा फोकस छात्रों को उनके गृह क्षेत्र या पसंदीदा शहर के नजदीक परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने पर है। इसी उद्देश्य से देशभर में नए परीक्षा केंद्रों की पहचान की जा रही है। 3.5 लाख छात्रों ने बदला परीक्षा शहर NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए करीब साढ़े तीन लाख छात्रों ने अपने परीक्षा शहर में बदलाव के लिए आवेदन किया है। छात्रों को दो शहरों का विकल्प देने का मौका मिला था। NTA सूत्रों के अनुसार, कोशिश की जा रही है कि अधिकतम छात्रों को उनकी पहली पसंद वाले शहर में परीक्षा देने का अवसर मिले। हालांकि, यदि किसी शहर में अभ्यर्थियों की संख्या अधिक हो जाती है तो उसी क्षेत्र के नजदीकी शहर में सेंटर आवंटित किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी छात्र ने देहरादून को परीक्षा शहर चुना है और वहां सीटों की उपलब्धता कम है, तो उसे नजदीकी शहर जैसे रुड़की में केंद्र दिया जा सकता है। कब जारी होगी एग्जाम सिटी स्लिप? NTA की योजना के अनुसार 14 जून से पहले सभी उम्मीदवारों को उनकी परीक्षा सिटी की जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी। इससे छात्रों को यह पता चल जाएगा कि उन्हें किस शहर में परीक्षा देनी है। एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी होने के बाद छात्र अपनी यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी समय रहते कर सकेंगे। एडमिट कार्ड कब मिलेगा? री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड 16 जून तक जारी किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। एडमिट कार्ड में छात्रों को परीक्षा केंद्र का पूरा पता, रिपोर्टिंग समय और परीक्षा संबंधी महत्वपूर्ण निर्देश दिए जाएंगे। छात्रों को सलाह दी गई है कि एडमिट कार्ड जारी होते ही उसमें दर्ज सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक जांच कर लें। किन राज्यों में सबसे ज्यादा सेंटर? सूत्रों के मुताबिक इस बार उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, क्योंकि यहां से सबसे ज्यादा उम्मीदवार आवेदन करते हैं। इसके बाद महाराष्ट्र और राजस्थान उन राज्यों में शामिल हैं जहां बड़ी संख्या में परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि छात्रों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। अफवाहों और फर्जी दावों पर NTA की सख्ती NEET UG 2026 को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और दावों की भी जांच की जा रही है। NTA के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा से जुड़ी हर सूचना पर नजर रखी जा रही है और छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। एजेंसी ने अभ्यर्थियों से केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। CUET-UG 2026 पर भी बड़ा अपडेट इस बीच CUET-UG 2026 परीक्षा कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। लगभग 60 हजार छात्रों की परीक्षा अब 6 और 7 जून को आयोजित होगी। 6 जून: सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक 7 जून: दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक NTA ने इन परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए हैं। कई छात्रों के अन्य परीक्षाओं के साथ टकराव को देखते हुए शेड्यूल में यह बदलाव किया गया है। NEET UG 2026 री-एग्जाम में इस बार लगभग 22.79 लाख अभ्यर्थी शामिल होने वाले हैं। ऐसे में NTA की सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा को सुचारु, निष्पक्ष और विवाद-मुक्त तरीके से आयोजित करना होगी।
NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच 21 जून को होने वाले री-टेस्ट को लेकर केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने का फैसला लिया है। गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई हाईलेवल बैठक में तय किया गया कि अब परीक्षा के प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षा में सेना और भारतीय वायुसेना की मदद ली जाएगी। बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का उद्देश्य इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। यूपीएससी जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर मजबूत बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को मल्टी-लेयर निगरानी में रखा जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए सेना और वायुसेना की सहायता देने पर सहमति जताई है। अब एयरफोर्स की मदद से प्रश्नपत्रों को संवेदनशील और दूरस्थ परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षा मंत्री बोले- छात्रों का भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बैठक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछली परीक्षाओं में डाक विभाग और गृह मंत्रालय की भूमिका प्रमुख थी, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों और अभिभावकों का भरोसा वापस जीतना है। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी निगरानी में रखा जाएगा। फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल जमा करने की तारीख बढ़ी NEET री-टेस्ट को लेकर NTA ने छात्रों को राहत देते हुए फीस रिफंड प्रक्रिया की डेडलाइन भी बढ़ा दी है। अब उम्मीदवार 22 जून रात तक अपने बैंक खाते की जानकारी जमा कर सकेंगे। पहले यह अंतिम तिथि 27 मई निर्धारित की गई थी। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों की मांग के बाद एजेंसी ने समय सीमा बढ़ाने का फैसला लिया। प्रधानमंत्री खुद रख रहे तैयारियों पर नजर सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET री-टेस्ट की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई जा रही है। सरकार इस बार किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहती है, क्योंकि पेपर लीक विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। कोएम्प्ट एजूटेक कंपनी पर भी उठे सवाल विवाद के बीच सीबीएसई की ओर से OSM कॉन्ट्रैक्ट पाने वाली कंपनी Coempt Edutech भी जांच के घेरे में आ गई है। यह कंपनी पहले Globarena नाम से जानी जाती थी और तेलंगाना बोर्ड परीक्षा से जुड़े विवादों में उसका नाम सामने आया था। बताया जा रहा है कि 2019 और 2023 में परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विवादों के दौरान कई छात्रों ने आत्महत्या की थी। अब विपक्ष इस कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने छात्र के परिवार से मुलाकात कर सरकार पर साधा निशाना कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को NEET की तैयारी कर रहे छात्र प्रदीप मेघवाल के परिवार से मुलाकात की। प्रदीप ने कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और ‘क्वेश्चन बैंक’ लीक की खबरों के बाद आत्महत्या कर ली थी। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और टूट चुकी परीक्षा व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “मोदी-प्रधान की जोड़ी इस परिवार के सामने जवाबदेह है।” CBI की जांच तेज, अब तक 13 गिरफ्तार NEET पेपर लीक मामले की जांच कर रही CBI ने कार्रवाई तेज कर दी है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस हर्षद कुमार शाह को 1 जून तक CBI हिरासत में भेज दिया है। वहीं प्रह्लाद कुलकर्णी और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को 10 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। CBI ने देशभर में अब तक 49 स्थानों पर छापेमारी की है और कई अहम दस्तावेज, लैपटॉप तथा मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इस मामले में अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द करना पड़ा NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। NTA के अनुसार, 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया और 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। अब 21 जून को री-टेस्ट आयोजित किया जाएगा।
Central Bureau of Investigation ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए NTA पैनलिस्ट और वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ Manisha Mandhare को गिरफ्तार किया है। दिल्ली की Rouse Avenue Court ने रविवार को उन्हें 14 दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। अदालत ने आरोपी को 30 मई 2026 को दोबारा पेश करने का निर्देश दिया है। पेपर लीक साजिश में शामिल होने का आरोप सीबीआई के अनुसार, मनीषा मंधारे ने आरोपी मनीषा वाघमारे और प्रह्लाद विट्ठल राव कुलकर्णी समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र और परीक्षा सामग्री छात्रों तक पहुंचाने की साजिश रची। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में भारी रकम का लेन-देन हुआ। मंधारे NTA के विशेषज्ञ पैनल का हिस्सा थीं और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल थीं। इसी दौरान उन्हें अंतिम प्रश्न सेट तक पहुंच मिली, जिसे कथित तौर पर बाद में लीक किया गया। मथुरा के होटल से हुई गिरफ्तारी सीबीआई ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद डिप्टी एसपी पवन कुमार कौशिक ने उन्हें अदालत में पेश किया। सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके पाठक और लोक अभियोजक दर्शन लाल ने अदालत में दलील दी कि यह मामला एक बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा है और कई आरोपी अभी भी फरार हैं। एजेंसी ने कहा कि नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने के लिए 14 दिनों की हिरासत जरूरी है। अदालत ने माना गंभीर साजिश का मामला विशेष न्यायाधीश कोलेट रश्मी कुजूर ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच से यह एक बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा प्रतीत होता है। अदालत ने माना कि कई अन्य सदस्य अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं और उनकी पहचान के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने आदेश में कहा कि “तथ्यों, परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए आरोपी को चिकित्सा परीक्षण के अधीन 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा जाता है।” डिजिटल सबूत और पैसों के लेन-देन की जांच सीबीआई ने अदालत को बताया कि अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि आरोपी को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाकर पूछताछ करनी होगी ताकि पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। बचाव पक्ष ने हिरासत का किया विरोध मनीषा मंधारे की ओर से अधिवक्ता करण मान, आकाश चौहान और निखिल सरोहा अदालत में पेश हुए। बचाव पक्ष ने 14 दिन की हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी 57 वर्ष की हैं, पेशे से लेक्चरर हैं और जांच में सहयोग कर रही हैं। वकीलों ने कहा कि आरोपी पहले ही दो बार जांच में शामिल हो चुकी हैं और उनके घर से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि केवल पुणे ले जाकर पूछताछ करनी है तो इतनी लंबी हिरासत की जरूरत नहीं है। CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग बचाव पक्ष ने अदालत में मामले से संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई है। अदालत ने इस पर सीबीआई से जवाब मांगा है। देशभर में जारी है जांच NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहल्यानगर से कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई इस पूरे संगठित नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लाखों छात्रों के भविष्य से ऊपर “तुच्छ राजनीति” को तरजीह दी है। दरअसल, राहुल गांधी ने NEET-UG पेपर लीक विवाद, CBSE मूल्यांकन प्रक्रिया और तीन-भाषा नीति को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan पर छात्रों को “विफल” करने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री Narendra Modi से लाखों छात्रों का भविष्य “बर्बाद” करने के लिए माफी मांगने की मांग की थी। बीजेपी का जवाब- “छात्रों के भविष्य पर राजनीति” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Gaurav Bhatia ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों की चिंता करने के बजाय राजनीतिक अवसरवाद में लगा हुआ है। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर छात्रों के भविष्य के बजाय तुच्छ राजनीति को चुना है।” भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस रचनात्मक सुझाव देने की बजाय केवल राजनीतिक नैरेटिव मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दूसरों को जवाबदेही का पाठ पढ़ाने से पहले कांग्रेस को अपने शासनकाल में हुए पेपर लीक, परीक्षा घोटालों और संस्थागत विफलताओं का जवाब देना चाहिए। “मोदी सरकार ने की त्वरित कार्रवाई” भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि मोदी सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में तेजी से कार्रवाई की है और जांच एजेंसियों ने कथित मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में चल रही कार्रवाई यह साबित करती है कि सरकार अपराधियों को संरक्षण नहीं देती। गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कांग्रेस की रणनीति छात्रों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना है।” उन्होंने आगे कहा, “यह कोई लीपापोती नहीं है, न ही चुप्पी। यह निर्णायक और संस्थागत कार्रवाई है।” शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा राजनीतिक दबाव NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बनी हुई है। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, जबकि केंद्र सरकार और भाजपा दावा कर रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों में बड़ा बहस का विषय बना रह सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।