नई दिल्ली, एजेंसियां। Free Fire MAX खेलने वाले गेमर्स के लिए अच्छी खबर है। 14 अगस्त 2026 के लिए कुछ Redeem Codes उपलब्ध बताए जा रहे हैं। इन कोड्स के जरिए प्लेयर्स बिना पैसे खर्च किए स्किन, बंडल, इमोट्स, गन क्रेट्स और दूसरे इन-गेम रिवॉर्ड हासिल कर सकते हैं। हालांकि, Redeem Codes सीमित समय और सीमित संख्या में ही काम करते हैं, इसलिए इन्हें जल्द रिडीम करना बेहतर रहेगा।
आज के लिए बताए गए Redeem Codes में शामिल हैं:
FFSGT7KNFQ2X
FPSTQ7MXNPY5
4N8M2XL9R1G3
H8YC4TN6VKQ9
FF6YH3BFD7VT
B1RK7C5ZL8YT
4ST1ZTBZBRP9
BR43FMAPYEZZ
UPQ7X5NMJ64V
S9QK2L6VP3MR
FFR4G3HM5YJN
6KWMFJVMQQYG
FZ5X1C7V9B2N
FT4E9Y5U1I3O
FP9O1I5U3Y2T
FM6N1B8V3C4X
FA3S7D5F1G9H
ध्यान रखें कि हर कोड हर अकाउंट पर काम करे, यह जरूरी नहीं है। कुछ कोड रीजन, सर्वर या इस्तेमाल की सीमा के कारण पहले ही एक्सपायर हो सकते हैं।
Redeem Codes के जरिए प्लेयर्स को अलग-अलग तरह के इन-गेम रिवॉर्ड मिल सकते हैं। इनमें वेपन स्किन, कैरेक्टर बंडल, इमोट्स, गन क्रेट्स, डायमंड वाउचर और बैकपैक स्किन शामिल हो सकते हैं। मिलने वाला रिवॉर्ड कोड और Garena के रिवॉर्ड सिस्टम पर निर्भर करता है।
सबसे पहले Free Fire MAX की Rewards Redemption वेबसाइट पर जाएं।
अपने गेम अकाउंट से जुड़े Google, Facebook, Apple ID, X, VK या Huawei ID से लॉगिन करें।
Redeem Code वाले बॉक्स में 12 कैरेक्टर का कोड दर्ज करें।
Confirm पर क्लिक करें।
कोड वैध होने पर रिवॉर्ड आपके गेम अकाउंट के In-Game Mail में भेज दिया जाएगा।
Free Fire MAX खोलकर Mail सेक्शन में जाएं और रिवॉर्ड क्लेम कर लें।
Redeem Codes की वैधता सीमित होती है और कई बार एक कोड को तय संख्या में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए अगर कोई कोड काम करता है तो उसे जल्द रिडीम करना बेहतर है। अगर कोड एक्सपायर हो चुका है या उसकी रिडेम्पशन लिमिट पूरी हो गई है, तो रिवॉर्ड नहीं मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Free Fire MAX खेलने वाले गेमर्स के लिए अच्छी खबर है। 14 अगस्त 2026 के लिए कुछ Redeem Codes उपलब्ध बताए जा रहे हैं। इन कोड्स के जरिए प्लेयर्स बिना पैसे खर्च किए स्किन, बंडल, इमोट्स, गन क्रेट्स और दूसरे इन-गेम रिवॉर्ड हासिल कर सकते हैं। हालांकि, Redeem Codes सीमित समय और सीमित संख्या में ही काम करते हैं, इसलिए इन्हें जल्द रिडीम करना बेहतर रहेगा। 14 अगस्त के Redeem Codes आज के लिए बताए गए Redeem Codes में शामिल हैं: FFSGT7KNFQ2X FPSTQ7MXNPY5 4N8M2XL9R1G3 H8YC4TN6VKQ9 FF6YH3BFD7VT B1RK7C5ZL8YT 4ST1ZTBZBRP9 BR43FMAPYEZZ UPQ7X5NMJ64V S9QK2L6VP3MR FFR4G3HM5YJN 6KWMFJVMQQYG FZ5X1C7V9B2N FT4E9Y5U1I3O FP9O1I5U3Y2T FM6N1B8V3C4X FA3S7D5F1G9H ध्यान रखें कि हर कोड हर अकाउंट पर काम करे, यह जरूरी नहीं है। कुछ कोड रीजन, सर्वर या इस्तेमाल की सीमा के कारण पहले ही एक्सपायर हो सकते हैं। क्या-क्या मिल सकते हैं रिवॉर्ड? Redeem Codes के जरिए प्लेयर्स को अलग-अलग तरह के इन-गेम रिवॉर्ड मिल सकते हैं। इनमें वेपन स्किन, कैरेक्टर बंडल, इमोट्स, गन क्रेट्स, डायमंड वाउचर और बैकपैक स्किन शामिल हो सकते हैं। मिलने वाला रिवॉर्ड कोड और Garena के रिवॉर्ड सिस्टम पर निर्भर करता है। ऐसे करें Redeem Code रिडीम सबसे पहले Free Fire MAX की Rewards Redemption वेबसाइट पर जाएं। अपने गेम अकाउंट से जुड़े Google, Facebook, Apple ID, X, VK या Huawei ID से लॉगिन करें। Redeem Code वाले बॉक्स में 12 कैरेक्टर का कोड दर्ज करें। Confirm पर क्लिक करें। कोड वैध होने पर रिवॉर्ड आपके गेम अकाउंट के In-Game Mail में भेज दिया जाएगा। Free Fire MAX खोलकर Mail सेक्शन में जाएं और रिवॉर्ड क्लेम कर लें। कोड जल्दी क्यों रिडीम करें? Redeem Codes की वैधता सीमित होती है और कई बार एक कोड को तय संख्या में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए अगर कोई कोड काम करता है तो उसे जल्द रिडीम करना बेहतर है। अगर कोड एक्सपायर हो चुका है या उसकी रिडेम्पशन लिमिट पूरी हो गई है, तो रिवॉर्ड नहीं मिलेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकप्रिय डेटिंग ऐप Bumble ने अपने सबसे चर्चित फीचर में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने करीब 12 साल से चली आ रही ‘महिलाएं पहले मैसेज करें’ व्यवस्था को खत्म कर दिया है। अब मैच होने के बाद महिला या पुरुष, दोनों में से कोई भी बातचीत की शुरुआत कर सकता है। अब पुरुष भी भेज सकेंगे पहला मैसेज Bumble की पहचान लंबे समय से इस नियम से रही है कि खासकर पुरुष-महिला मैच में बातचीत की शुरुआत महिला करती थी। कंपनी का कहना है कि अब यूजर्स को बातचीत शुरू करने के मामले में ज्यादा स्वतंत्रता देने के लिए यह नियम बदला गया है। इस बदलाव के बाद मैच बनने पर पुरुषों को भी महिला के पहले मैसेज करने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यानी दोनों पक्ष अपनी पसंद के अनुसार बातचीत शुरू कर सकेंगे। जवाब देने की समयसीमा भी 24 से बढ़कर 72 घंटे Bumble ने केवल पहला मैसेज भेजने का नियम ही नहीं बदला है। कंपनी ने रिप्लाई करने की समयसीमा 24 घंटे से बढ़ाकर 72 घंटे कर दी है। इससे यूजर्स को मैच के बाद बातचीत शुरू करने और उसका जवाब देने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। कंपनी का यह बदलाव उन यूजर्स के लिए भी महत्वपूर्ण है जो 24 घंटे की समयसीमा के कारण कई मैच गंवा देते थे। Bumble की पहचान बदलने वाला फैसला ‘महिलाएं पहले कदम उठाएं’ वाला नियम Bumble की सबसे बड़ी पहचान रहा है। इसलिए इसे खत्म करना कंपनी की डेटिंग रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सोशल मीडिया और Bumble यूजर्स के बीच इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स इसे ज्यादा स्वतंत्रता देने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे Bumble और दूसरे डेटिंग ऐप्स के बीच अंतर कम हो जाएगा। Bumble ने इसे अपनी मूल सोच से पूरी तरह पीछे हटना नहीं बताया है। कंपनी का कहना है कि वह यूजर्स को ज्यादा लचीला और कम दबाव वाला अनुभव देना चाहती है। क्यों किया गया बदलाव? Bumble के अनुसार, कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को नए तरीके से तैयार कर रही है और यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है। कंपनी ने पहले भी संकेत दिया था कि वह अपने ऐप के अनुभव को दोबारा डिजाइन कर रही है और AI-सक्षम प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स को ज्यादा सहज तरीके से कनेक्ट करने पर काम कर रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Motorola ने अपने स्मार्टफोन के लिए Android 17 का स्टेबल अपडेट रोलआउट शुरू कर दिया है। कंपनी की ओर से 50 से ज्यादा स्मार्टफोन को Android 17 के लिए योग्य बताया गया है। हालांकि, सभी डिवाइसों पर अपडेट एक साथ नहीं आएगा और इसे चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। Motorola Edge 2025 को मिला पहला स्टेबल अपडेट रिपोर्ट के मुताबिक Motorola Edge 2025 को Android 17 का स्टेबल अपडेट मिलना शुरू हो गया है। इसके बाद कंपनी अन्य चुनिंदा Razr, Edge और Moto G सीरीज के स्मार्टफोन में अपडेट पहुंचाएगी। नए मॉडल को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। यह अपडेट पहले चल रहे Android 17 Beta प्रोग्राम से अलग है। इससे पहले Motorola Signature, Moto G57 Power और Motorola Edge 70 जैसे कुछ फोन पर Android 17 Beta उपलब्ध कराया गया था। 50 से ज्यादा Motorola फोन होंगे अपडेट Motorola की अपडेट सूची में 50 से ज्यादा स्मार्टफोन शामिल हैं। इनमें Razr फोल्डेबल फोन, Edge सीरीज, Moto G सीरीज और Motorola Signature जैसे मॉडल शामिल हैं। हालांकि, किसी फोन का योग्य सूची में होना यह गारंटी नहीं देता कि उसे उसी समय अपडेट मिल जाएगा। Motorola की आधिकारिक सपोर्ट वेबसाइट भी बताती है कि अपडेट की उपलब्धता डिवाइस और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। Android 17 में क्या मिलेगा? Android 17 के साथ Motorola के फोन में नए Android फीचर्स के अलावा कंपनी के Hello UI इंटरफेस से जुड़े बदलाव मिलने की उम्मीद है। Beta संस्करण में नए लॉक-स्क्रीन क्लॉक स्टाइल, नोटिफिकेशन और कंट्रोल सेंटर में बदलाव, अपडेटेड वॉल्यूम मिक्सर, बेहतर ऐप ड्रॉअर और ज्यादा स्मूद सिस्टम एनिमेशन जैसे बदलाव देखे गए हैं। हालांकि, हर Motorola फोन में सभी फीचर्स समान रूप से उपलब्ध होंगे, यह जरूरी नहीं है। हार्डवेयर और क्षेत्र के आधार पर कुछ सुविधाएं अलग हो सकती हैं। फोन में अपडेट कैसे चेक करें? Motorola यूजर्स अपने फोन में Settings > System Updates > Check for Updates पर जाकर Android 17 की उपलब्धता जांच सकते हैं। अगर आपके मॉडल के लिए अपडेट जारी हो चुका है लेकिन अभी दिखाई नहीं दे रहा है, तो चरणबद्ध रोलआउट के कारण कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है।