नई दिल्ली, एजेंसियां। 15 अगस्त भारत के इतिहास का बेहद खास दिन है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अगर आप घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इस बार ऐसी जगहों का रुख कर सकते हैं, जिनका सीधा संबंध देश के स्वतंत्रता आंदोलन से रहा है। इन ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा आपको पर्यटन के साथ-साथ आजादी की लड़ाई और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को करीब से समझने का मौका भी देगी।
दिल्ली का लाल किला स्वतंत्रता दिवस का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री यहीं से देश को संबोधित करते हैं। आजादी के जश्न के दौरान लाल किले का माहौल खास आकर्षण का केंद्र रहता है।
अमृतसर का जलियांवाला बाग 13 अप्रैल 1919 की भयावह घटना की याद दिलाता है। ब्रिटिश सैनिकों की गोलीबारी में बड़ी संख्या में निहत्थे लोग मारे गए थे। आज यह स्थल उन शहीदों की स्मृति में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्मारक है।
‘काला पानी’ के नाम से प्रसिद्ध सेल्युलर जेल में अंग्रेजों ने कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद रखा था। आज यह राष्ट्रीय स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों के कठिन संघर्ष और बलिदान की कहानी बताता है।
महात्मा गांधी से जुड़ा साबरमती आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण जगहों में शामिल है। 1930 में गांधीजी ने यहीं से ऐतिहासिक दांडी मार्च की शुरुआत की थी। आश्रम में उनके जीवन और सत्याग्रह से जुड़ी कई यादें मौजूद हैं।
दांडी मार्च का अंतिम पड़ाव रहा दांडी नमक सत्याग्रह के इतिहास से जुड़ा है। यहां स्थित नेशनल साल्ट सत्याग्रह मेमोरियल 1930 के आंदोलन और ब्रिटिश नमक कानून के विरोध की कहानी को सामने रखता है।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से अगस्त क्रांति मैदान का गहरा संबंध है। इसी आंदोलन के दौरान देशभर में ‘करो या मरो’ का संदेश गूंजा था।
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी समेत कई नेताओं को आगा खान पैलेस में नजरबंद रखा गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इस जगह का विशेष महत्व है।
झांसी का किला वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी की याद दिलाता है। 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ उनके संघर्ष ने उन्हें भारतीय इतिहास की सबसे प्रसिद्ध वीरांगनाओं में शामिल कर दिया।
काकोरी का नाम 1925 की काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़ा है। इस घटना ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन को नई पहचान दी और कई क्रांतिकारियों के नाम इतिहास में दर्ज हुए।
चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी के शुरुआती प्रमुख आंदोलनों में शामिल था। किसानों की समस्याओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में गांधीवादी सत्याग्रह की ताकत का महत्वपूर्ण उदाहरण बना।
बैरकपुर का नाम मंगल पांडे और 1857 के विद्रोह से जुड़ा हुआ है। यहां की ऐतिहासिक घटनाओं ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ शुरुआती विद्रोह की कहानी को मजबूत किया।
1922 की चौरी चौरा घटना ने असहयोग आंदोलन की दिशा को प्रभावित किया था। यह स्थान स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर की महत्वपूर्ण घटनाओं को समझने का अवसर देता है।
मुंबई का मणि भवन महात्मा गांधी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जगह है। यहां गांधीजी के मुंबई प्रवास और उनके राजनीतिक-सामाजिक कार्यों से जुड़े इतिहास को देखा जा सकता है।
वर्धा स्थित सेवाग्राम आश्रम गांधीजी के जीवन और विचारों से जुड़ा रहा है। यहां गांधीजी की सादगी और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को करीब से समझा जा सकता है।
दिल्ली का राजघाट महात्मा गांधी की समाधि है। शांत वातावरण वाला यह स्थल गांधीजी के सत्य और अहिंसा के विचारों को याद करने का महत्वपूर्ण स्थान है।
प्रयागराज का आनंद भवन नेहरू परिवार और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ा है। यहां स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुए राजनीतिक घटनाक्रम और नेहरू परिवार से जुड़ी कई ऐतिहासिक यादें देखने को मिलती हैं।
कोलकाता का नेताजी भवन सुभाष चंद्र बोस के जीवन और संघर्ष की यादों से जुड़ा है। नेताजी और आजाद हिंद फौज के इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है।
भारत की आजादी केवल 15 अगस्त 1947 की एक तारीख नहीं, बल्कि दशकों तक चले आंदोलनों, संघर्षों और बलिदानों का परिणाम थी। देशभर में मौजूद ये ऐतिहासिक स्थल उस संघर्ष की अलग-अलग कहानियां आज भी लोगों तक पहुंचाते हैं। इस Independence Day इन जगहों की यात्रा करके देश के इतिहास को करीब से जानना एक यादगार अनुभव हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यांती के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत और लाइबेरिया के संबंधों की व्यापक समीक्षा करते हुए व्यापार, निवेश, खनन, कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। व्यापार और निवेश पर बढ़ेगा सहयोग बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। खनन, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग की संभावनाओं पर विचार हुआ। भारत और लाइबेरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भी हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है। लाइबेरिया के नए दूतावास का स्वागत जयशंकर ने नई दिल्ली में लाइबेरिया के नए दूतावास के उद्घाटन का स्वागत किया। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। नए दूतावास से व्यापारिक और राजनयिक संवाद को और बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य, कृषि और तकनीक पर भी चर्चा दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन, तकनीक और प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत की विकास योजनाओं और क्षमता निर्माण के अनुभवों को लाइबेरिया के साथ साझा करने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, वैश्विक दक्षिण की भूमिका और क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। भारत ने ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
ग्रेटर नोएडा, एजेंसियां। गौतमबुद्ध नगर के शाहबेरी इलाके में शुक्रवार को एक CNC वुड-कटिंग दुकान में भीषण आग लग गई। हादसे में दुकान के अंदर मौजूद एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि एक अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गया। घायल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दुकान में काम के दौरान लगी आग प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शाहबेरी स्थित CNC वुड-कटिंग की दुकान में अचानक आग भड़क उठी। लकड़ी और अन्य ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। आग लगने के बाद दुकान में काम कर रहे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। एक कर्मचारी की मौके पर मौत आग की चपेट में आने से एक कर्मचारी की जान चली गई। वहीं दूसरे कर्मचारी को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है और चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। दमकल की टीम ने आग पर पाया काबू सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद दुकान के अंदर तलाशी अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया गया कि कोई अन्य व्यक्ति अंदर फंसा न हो। आग लगने के कारण की जांच जारी फिलहाल आग लगने की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है। पुलिस और दमकल विभाग की टीम घटना की जांच कर रही है। शॉर्ट सर्किट समेत आग लगने के अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद हादसे के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
जयपुर, एजेंसियां। राजस्थान की राजधानी जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में स्कूल की कैंटीन में पैटी खाने के बाद 12वीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र प्रिंस सोनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर छात्र को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं देने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है। पैटी खाने के बाद बिगड़ी तबीयत पुलिस के मुताबिक, प्रिंस बुधवार को अपना लंच बॉक्स लेकर स्कूल नहीं गया था। उसने स्कूल की कैंटीन में दोस्तों के साथ पैटी खाई। इसके कुछ समय बाद उसे उल्टी हुई और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। छात्र ने अपनी खराब हालत के बारे में शिक्षक को बताया और बाद में कक्षा में ही बेहोश होकर गिर पड़ा। परिजनों ने स्कूल पर लगाया देरी का आरोप परिवार का आरोप है कि छात्र की हालत गंभीर होने के बावजूद उसे तुरंत अस्पताल नहीं ले जाया गया। परिजनों के अनुसार, स्कूल की ओर से उन्हें सूचना दी गई और उन्हें वाहन लेकर स्कूल आने के लिए कहा गया। परिवार के पहुंचने के बाद छात्र को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि कैंटीन में बासी पैटी परोसी गई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी इस दावे की पुष्टि नहीं की है और यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र की मौत सीधे तौर पर पैटी खाने के कारण हुई या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण था। पुलिस ने शुरू की जांच घटना के बाद बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग स्कूल के बाहर पहुंच गए और विरोध जताया। झोटवाड़ा थाना पुलिस ने स्कूल पहुंचकर छात्रों और शिक्षकों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल मौत के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।