Sleep Health

Person holding their head after waking up, highlighting morning headache causes and prevention tips.
सुबह का सिरदर्द कहीं शरीर का अलर्ट तो नहीं? जानें 6 कारण और बचाव के आसान तरीके

Morning Headache Causes: अगर आपकी सुबह की शुरुआत अक्सर सिरदर्द के साथ होती है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। सुबह उठते ही होने वाला सिरदर्द कई बार शरीर की किसी अंदरूनी समस्या या बिगड़ती जीवनशैली का संकेत हो सकता है। खराब नींद, शरीर में पानी की कमी, तनाव, ब्लड प्रेशर में बदलाव और कुछ अन्य स्वास्थ्य कारण इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सुबह का सिरदर्द बार-बार हो रहा है, तो केवल दर्द निवारक दवा लेने के बजाय इसकी असली वजह जानना और समय रहते सुधार करना जरूरी है। सुबह उठते ही सिरदर्द होने के 6 बड़े कारण 1. पर्याप्त और अच्छी नींद न लेना अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती या रात में बार-बार टूटती है, तो सुबह उठने पर सिरदर्द महसूस हो सकता है। अच्छी गुणवत्ता वाली 7–8 घंटे की नींद शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए जरूरी है। 2. डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) रातभर पानी न पीने या दिनभर पर्याप्त पानी न लेने से शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है। इसका असर सुबह सिर भारी लगने और सिरदर्द के रूप में दिखाई दे सकता है। 3. नींद में दांत पीसना या जबड़ा कसना कुछ लोगों को नींद के दौरान दांत पीसने (Bruxism) या जबड़ा कसकर रखने की आदत होती है। इससे सिर और चेहरे की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जो सुबह दर्द का कारण बन सकता है। 4. तनाव और मानसिक दबाव लगातार तनाव, चिंता और मानसिक थकान भी सुबह के सिरदर्द का एक प्रमुख कारण हो सकते हैं। तनाव शरीर की मांसपेशियों और नसों पर असर डालता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है। 5. ब्लड प्रेशर में बदलाव कुछ लोगों में सुबह के समय ब्लड प्रेशर बढ़ने या असंतुलित रहने के कारण भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है। यदि यह समस्या बार-बार हो, तो नियमित जांच कराना जरूरी है। 6. दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन बार-बार पेनकिलर लेने से रिबाउंड हेडेक (Rebound Headache) की समस्या हो सकती है, जिसमें दवा का असर खत्म होने के बाद सिरदर्द फिर शुरू हो जाता है। सुबह के सिरदर्द से बचने के आसान उपाय रोजाना 7–8 घंटे की अच्छी और पर्याप्त नींद लें। हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद करें। रात में अत्यधिक कैफीन और शराब के सेवन से बचें। तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएं। अगर खर्राटे, नींद में सांस रुकने या दांत पीसने की समस्या हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लें। कौन-से योग और प्राणायाम मददगार हो सकते हैं? सुबह नियमित रूप से अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, बालासन, शशांकासन और मार्जरी-व्याघ्रासन (Cat-Cow Pose) करने से तनाव कम करने, शरीर को रिलैक्स रखने और बेहतर नींद में मदद मिल सकती है। हालांकि, यदि सिरदर्द लगातार बना रहे या तेज हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें और डॉक्टर से जांच जरूर कराएं। कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें? यदि सुबह का सिरदर्द रोजाना हो, बहुत तेज हो, इसके साथ चक्कर, धुंधला दिखना, उल्टी, बोलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। ध्यान रखें: सुबह का सिरदर्द कई बार शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। समय पर कारण की पहचान, संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त नींद, नियमित योग और सही खानपान अपनाकर इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।  

anmol जुलाई 24, 2026 0
Person experiencing sleep apnea symptoms as interrupted breathing affects sleep quality and brain health
रात में बार-बार खुलती है नींद? हो सकता है दिमाग को नहीं मिल रही पर्याप्त ऑक्सीजन, जानिए स्लीप एपनिया कितना खतरनाक

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग रात में बार-बार नींद टूटने, खर्राटे आने या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस करने जैसी समस्याओं से जूझते हैं। अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। स्लीप एपनिया केवल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे दिमाग की कार्यक्षमता, याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह ब्रेन टिश्यू को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ स्ट्रोक और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है। क्या है स्लीप एपनिया? ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय श्वसन मार्ग बार-बार आंशिक या पूरी तरह बंद हो जाता है। इसके कारण सांस लेने में रुकावट आती है और व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती रहती है। कई बार मरीज को इसका एहसास भी नहीं होता, लेकिन उसका शरीर पूरी रात इस समस्या से जूझता रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुकावट एक रात में दर्जनों या यहां तक कि सैकड़ों बार भी हो सकती है। दिमाग को कैसे पहुंचता है नुकसान? ऑक्सीजन की कमी बनती है सबसे बड़ा खतरा स्लीप एपनिया के दौरान शरीर और दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इस स्थिति को "इंटरमिटेंट हाइपोक्सिया" कहा जाता है। दिमाग को लगातार ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जब बार-बार ऑक्सीजन की कमी होती है, तो मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं। खासकर वे हिस्से जो याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक बिना इलाज वाले स्लीप एपनिया से हिप्पोकैम्पस और फ्रंटल कॉर्टेक्स जैसे महत्वपूर्ण ब्रेन क्षेत्रों में बदलाव हो सकते हैं। याददाश्त और सोचने की क्षमता पर असर स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों में अक्सर ये समस्याएं देखी जाती हैं— चीजें भूलना ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई निर्णय लेने में परेशानी मानसिक प्रतिक्रिया की गति धीमी होना पढ़ाई और काम में प्रदर्शन प्रभावित होना नींद की रिकवरी प्रक्रिया हो जाती है प्रभावित हर बार सांस रुकने पर शरीर हल्की अवस्था में जाग जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में "अराउजल" कहा जाता है। इससे गहरी नींद और REM Sleep बार-बार बाधित होती है। यही वे चरण हैं जिनमें— दिमाग खुद की मरम्मत करता है यादें मजबूत होती हैं भावनात्मक संतुलन बनता है सीखने की क्षमता बेहतर होती है जब ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो पातीं, तो व्यक्ति दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और सुस्ती महसूस करता है। बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा विशेषज्ञों के अनुसार स्लीप एपनिया केवल नींद की बीमारी नहीं है, बल्कि यह रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित करता है। बार-बार ऑक्सीजन की कमी और फिर अचानक ऑक्सीजन मिलने की प्रक्रिया से— सूजन बढ़ती है ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ता है हृदय रोगों की संभावना बढ़ती है इन सभी कारणों से स्ट्रोक और मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। अल्जाइमर और डिमेंशिया से भी जुड़ सकता है संबंध हाल के शोध बताते हैं कि लंबे समय तक अनुपचारित स्लीप एपनिया अल्जाइमर और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। नींद में लगातार व्यवधान आने से दिमाग में जमा होने वाले हानिकारक प्रोटीन, जैसे बीटा-एमिलॉयड, ठीक तरह से साफ नहीं हो पाते। यही प्रोटीन आगे चलकर डिमेंशिया और अल्जाइमर से जुड़े पाए गए हैं। किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें? यदि आपको इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है— तेज खर्राटे आना रात में बार-बार नींद खुलना सोते समय सांस रुकने जैसा महसूस होना सुबह सिरदर्द होना दिनभर अत्यधिक नींद आना लगातार थकान महसूस होना ध्यान और याददाश्त कमजोर होना क्या है इसका इलाज? अच्छी बात यह है कि स्लीप एपनिया का इलाज संभव है। विशेषज्ञ इसके लिए कई उपाय सुझाते हैं— CPAP (Continuous Positive Airway Pressure) थेरेपी वजन नियंत्रित करना नियमित व्यायाम धूम्रपान और शराब से दूरी ओरल डिवाइस का उपयोग सोने की सही पोजीशन अपनाना समय पर पहचान और उपचार से न केवल नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि दिमाग को होने वाले लंबे समय के नुकसान से भी बचा जा सकता है।  

surbhi जून 25, 2026 0
Person practicing deep breathing and relaxation techniques to reduce stress and control cortisol levels.
सिर्फ 3 मिनट का तनाव भी पहुंचा सकता है नुकसान, बढ़ सकता है बीपी और कॉर्टिसोल लेवल, जानें कैसे करें स्ट्रेस मैनेज

Stress Side Effects: तनाव हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, यह बात लगभग हर कोई जानता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि केवल लंबे समय तक बना रहने वाला स्ट्रेस ही नहीं, बल्कि सिर्फ 3 से 5 मिनट का तनाव भी शरीर में कई नकारात्मक बदलाव पैदा कर सकता है। बार-बार होने वाला छोटा तनाव धीरे-धीरे दिल, दिमाग, इम्यूनिटी और पाचन तंत्र पर गहरा असर डाल सकता है। गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. तुषार तायल के अनुसार, शरीर हर प्रकार के तनाव को एक खतरे की तरह लेता है और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देता है। तनाव के दौरान शरीर में क्या होता है? जब मस्तिष्क किसी चुनौती या खतरे को महसूस करता है, तो ब्रेन का एमिग्डाला सक्रिय हो जाता है। इसके बाद शरीर में एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप: हार्ट रेट बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। शरीर अधिक सतर्क हो जाता है। ऊर्जा मांसपेशियों की ओर केंद्रित हो जाती है। इस प्रक्रिया को "फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स" कहा जाता है। असली खतरा कब शुरू होता है? कुछ मिनटों का तनाव सामान्य रूप से खत्म हो जाता है, लेकिन यदि दिनभर में बार-बार तनाव की स्थिति पैदा होती रहे, तो शरीर सामान्य अवस्था में लौट नहीं पाता। लगातार: काम का दबाव मोबाइल नोटिफिकेशन छोटी-छोटी बहसें डेडलाइन का तनाव इन सबकी वजह से कोर्टिसोल का स्तर लगातार ऊंचा बना रह सकता है। दिल पर पड़ता है असर शोध के अनुसार, बार-बार सक्रिय होने वाला स्ट्रेस रिस्पॉन्स: हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाता है। धमनियों में प्लाक जमने की संभावना बढ़ाता है। हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकता है। वजन और नींद भी होती है प्रभावित कॉर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर: भूख बढ़ा सकता है। मोटापे का कारण बन सकता है। नींद की गुणवत्ता खराब कर सकता है। व्यायाम करने की इच्छा कम कर सकता है। कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी लगातार तनाव इम्यून सिस्टम की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों में: बार-बार संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। बीमारी से रिकवरी में अधिक समय लग सकता है। गट हेल्थ पर भी पड़ता है असर बार-बार होने वाला तनाव: गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगाड़ सकता है। एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकता है। IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है प्रभाव लगातार छोटे-छोटे तनाव के एपिसोड से: एंग्जायटी बढ़ सकती है। भावनात्मक सहनशक्ति कम हो सकती है। डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। तनाव से राहत पाने के आसान उपाय विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे-छोटे रिलैक्सेशन ब्रेक तनाव के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। अपनाएं ये आदतें गहरी डायाफ्रामिक ब्रीदिंग करें। 5 मिनट शांत बैठें। थोड़ी देर बाहर टहलें। स्क्रीन से कुछ समय का ब्रेक लें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम करें। इन छोटे प्रयासों से कोर्टिसोल का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है और शरीर को अगली तनावपूर्ण स्थिति से पहले सामान्य होने का मौका मिलता है।  

surbhi जून 23, 2026 0
Person using a smartphone and laptop for long hours, showing the effects of excessive screen time on mental health.
ऑनलाइन रहने की आदत दिमाग को बुरी तरह थका सकती है, अकेले नींद से नहीं मिलता आराम: डॉक्टर

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट जहां नई चीजें सीखने और दुनिया से जुड़े रहने का अवसर देते हैं, वहीं इनका अत्यधिक इस्तेमाल शरीर और दिमाग पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार ऑनलाइन रहने की आदत मानसिक थकान को बढ़ा रही है और सिर्फ नींद लेने से इस समस्या से पूरी तरह राहत नहीं मिलती। कैलाश दीपक हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. बिपिन कुमार शर्मा के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने से मस्तिष्क को लगातार भारी मात्रा में जानकारी प्रोसेस करनी पड़ती है, जिससे मानसिक ऊर्जा तेजी से खत्म होने लगती है। क्यों थकने लगता है दिमाग? विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने से मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स प्रभावित होता है। यह हिस्सा निर्णय लेने, ध्यान केंद्रित करने और भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होता है। जब यह हिस्सा लगातार ओवरलोड रहता है, तो व्यक्ति में निम्न समस्याएं दिखाई देने लगती हैं— ध्यान लगाने में कठिनाई चिड़चिड़ापन भावनात्मक सुन्नता लगातार थकान महसूस होना मानसिक तनाव बढ़ना डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की मानसिक थकान केवल अच्छी नींद से पूरी तरह दूर नहीं होती, बल्कि दिमाग को डिजिटल आराम (Digital Detox) की भी जरूरत होती है। कैसे बदल रहा है इंटरनेट हमारे दिमाग को? लगातार स्क्रॉलिंग और बार-बार ऐप्स बदलने की आदत मस्तिष्क को तेज उत्तेजनाओं का आदी बना देती है। इससे किसी एक काम पर लंबे समय तक फोकस बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा— नोटिफिकेशन और लाइक्स डोपामाइन को बार-बार सक्रिय करते हैं। धीरे-धीरे डिजिटल कंटेंट पर निर्भरता बढ़ने लगती है। आत्म-नियंत्रण और निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है। रिसर्च के अनुसार, अत्यधिक इंटरनेट उपयोग मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में ग्रे मैटर के घनत्व को भी प्रभावित कर सकता है। सिर्फ दिमाग ही नहीं, शरीर के अन्य अंग भी होते हैं प्रभावित आंखों पर असर लगातार स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है। इसके लक्षण हैं— आंखों में सूखापन जलन धुंधला दिखाई देना सिरदर्द गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दबाव लंबे समय तक झुककर मोबाइल देखने से "टेक नेक" की समस्या हो सकती है, जिससे गर्दन और ऊपरी रीढ़ में दर्द बढ़ सकता है। मांसपेशियों में तनाव कीबोर्ड और टचस्क्रीन के लगातार उपयोग से कंधों, हाथों और कलाइयों में दर्द या रिपिटिटिव स्ट्रेन इंजरी की समस्या हो सकती है। दिल और वजन पर असर अधिक स्क्रीन टाइम शारीरिक गतिविधियों को कम कर देता है, जिससे— मोटापे का खतरा बढ़ता है ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है नींद और इम्यूनिटी पर प्रभाव स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, जिससे हार्मोनल संतुलन, मेटाबॉलिज्म और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। क्या करें? विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि— स्क्रीन टाइम सीमित करें। हर 30-40 मिनट में छोटा ब्रेक लें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद करें। नियमित व्यायाम और आउटडोर गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का संतुलित उपयोग ही बेहतर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की कुंजी है।  

surbhi जून 10, 2026 0
Unhealthy lifestyle habits like stress, poor sleep and screen time causing premature ageing signs
Causes Of Premature Ageing: ये 8 आदतें बना रही हैं आपको समय से पहले बूढ़ा

आजकल लोग फिट रहने के लिए जिम, डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें ऐसी हैं, जो चुपचाप एजिंग प्रोसेस को तेज कर रही हैं। उम्र बढ़ना सिर्फ चेहरे की झुर्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर सेल्स के स्तर पर भी असर डालता है। आइए जानते हैं वो 8 आदतें, जो आपको समय से पहले बूढ़ा बना रही हैं- 1. लंबे समय तक बैठे रहना रोज 8 घंटे से ज्यादा बैठना स्मोकिंग जितना खतरनाक हो सकता है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा होता है और एजिंग तेजी से बढ़ती है। 2. नींद की कमी कम नींद लेने से शरीर सही से रिपेयर नहीं हो पाता, जिससे स्किन, इम्यूनिटी और दिमाग पर असर पड़ता है। 3. लगातार तनाव में रहना लंबे समय तक तनाव रहने से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो झुर्रियों और कई बीमारियों का कारण बनता है। 4. ज्यादा स्क्रीन टाइम मोबाइल और लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल नींद के चक्र को बिगाड़ता है और स्किन को नुकसान पहुंचाता है। 5. पानी कम पीना डिहाइड्रेशन से स्किन ड्राई और बेजान हो जाती है और शरीर के जरूरी फंक्शन धीमे पड़ जाते हैं। 6. ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड अधिक शुगर से शरीर में ग्लाइकेशन बढ़ता है, जिससे स्किन की इलास्टिसिटी कम होती है और झुर्रियां जल्दी आती हैं। 7. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से दूरी मसल्स उम्र के साथ कम होते हैं। एक्सरसाइज न करने से शरीर कमजोर और सुस्त हो जाता है। 8. सोशल कनेक्शन की कमी अकेलापन और सामाजिक दूरी मेंटल हेल्थ पर असर डालती है और समय से पहले एजिंग का कारण बन सकती है। कैसे बचें इन आदतों से? रोजाना 60 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करें 7–8 घंटे की नींद लें स्ट्रेस मैनेज करें (योग/मेडिटेशन) पानी ज्यादा पिएं हेल्दी डाइट अपनाएं स्क्रीन टाइम सीमित करें दोस्तों और परिवार से जुड़े रहें

surbhi मार्च 31, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0