Cyber Security

Google Layoffs
Google में फिर छंटनी: क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी टीम पर गिरी गाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google ने एक बार फिर कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो सप्ताह के दौरान कंपनी ने अपने क्लाउड डिवीजन और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कई टीमों में कर्मचारियों की संख्या घटाई है। इस कदम ने टेक सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। क्लाउड और थ्रेट इंटेलिजेंस टीम हुई प्रभावित मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, छंटनी का असर गूगल क्लाउड की कई इकाइयों पर पड़ा है। इनमें कंपनी का गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप (GTIG) भी शामिल है, जो वैश्विक साइबर हमलों और हैकिंग गतिविधियों पर शोध कर रिपोर्ट तैयार करता है। यह टीम साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में गूगल की महत्वपूर्ण इकाइयों में गिनी जाती है। इसके अलावा, साइबर सिक्योरिटी कंपनी Mandiant से जुड़े कुछ कर्मचारियों को भी नौकरी गंवानी पड़ी है। गूगल ने वर्ष 2022 में Mandiant का लगभग 5.4 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था, जिससे कंपनी ने साइबर सुरक्षा क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की थी। कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव छंटनी की पुष्टि उस समय और मजबूत हुई जब प्रभावित कर्मचारियों में से कुछ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर पोस्ट साझा की। एक कर्मचारी ने बताया कि उनकी पूरी टीम में कई लोगों को नौकरी से निकाला गया है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ समय का ब्रेक लेने के बाद वे नई नौकरी की तलाश शुरू करेंगे। AI पर बढ़ा फोकस, बदले जा रहे संसाधन सूत्रों के अनुसार, गूगल अपने संसाधनों को तेजी से विकसित हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की ओर स्थानांतरित कर रहा है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI उसके कारोबार का प्रमुख आधार बनने वाला है। इसी कारण कुछ विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम कर संसाधनों का पुनर्गठन किया जा रहा है। कंपनी ने क्या कहा? गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी समय-समय पर अपने आंतरिक ढांचे की समीक्षा करती है ताकि ग्राहकों और व्यवसाय की बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को बेहतर बना सके। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि कुल कितने कर्मचारियों को निकाला गया है। टेक सेक्टर में जारी है पुनर्गठन विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के कारण दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अपने कार्यबल और निवेश रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं। गूगल की यह ताजा छंटनी भी उसी व्यापक बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है, जहां कंपनियां पारंपरिक क्षेत्रों से संसाधन हटाकर AI और ऑटोमेशन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Five Eyes alliance warns of alleged Chinese espionage through fake online job recruitment schemes.
फर्जी जॉब ऑफर बना जासूसी का हथियार? ‘फाइव आइज’ ने चीन पर लगाए गंभीर आरोप

  दुनिया के सबसे प्रभावशाली खुफिया गठबंधन ‘फाइव आइज’ ने चीन पर एक नए प्रकार के जासूसी अभियान चलाने का आरोप लगाया है। गठबंधन का दावा है कि चीनी एजेंट पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी नौकरी के विज्ञापन पोस्ट कर पश्चिमी देशों के सरकारी अधिकारियों, सैन्य कर्मियों और विशेषज्ञों से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। क्या है ‘फाइव आइज’ गठबंधन? Five Eyes दुनिया का प्रमुख खुफिया सहयोग मंच माना जाता है, जिसमें United States, United Kingdom, Australia, Canada और New Zealand शामिल हैं। इन देशों की सुरक्षा एजेंसियां आपस में खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करती हैं। हाल ही में जारी संयुक्त सुरक्षा चेतावनी में गठबंधन ने कहा कि चीन की खुफिया इकाइयां ऑनलाइन भर्ती अभियानों के जरिए संवेदनशील जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही हैं। फर्जी कंपनियों और नकली भर्तियों का कथित नेटवर्क खुफिया एजेंसियों के अनुसार, चीनी एजेंट खुद को मानव संसाधन सलाहकार, रिसर्च फर्म या थिंक टैंक के प्रतिनिधि के रूप में पेश करते हैं। ये संस्थाएं पहली नजर में पूरी तरह वैध दिखाई देती हैं और अक्सर खुद को चीन से बाहर स्थित संगठन बताती हैं। उनका उद्देश्य भरोसा जीतकर संभावित लक्ष्यों तक पहुंच बनाना होता है। इंटरव्यू और रिसर्च असाइनमेंट के नाम पर जुटाई जाती है जानकारी रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के दौरान विश्लेषणात्मक रिपोर्ट या रिसर्च नोट तैयार करने को कहा जाता है। शुरुआत में इसके बदले मामूली भुगतान किया जाता है, लेकिन बाद में अधिक संवेदनशील जानकारियों के लिए बड़ी रकम की पेशकश की जाती है। वर्चुअल इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों से सरकारी नीतियों, सैन्य गतिविधियों, सुरक्षा ढांचे और रणनीतिक मामलों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। आगे चलकर बातचीत एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर स्थानांतरित कर दी जाती है। किन लोगों को बनाया जा रहा है लक्ष्य? फाइव आइज के अनुसार, इस कथित अभियान के प्रमुख निशाने हैं: सुरक्षा मंजूरी प्राप्त अधिकारी सैन्य और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी पत्रकार और मीडिया पेशेवर शिक्षाविद एवं शोधकर्ता थिंक टैंक विशेषज्ञ सरकारी संस्थानों से जुड़े कर्मचारी एजेंसियों का कहना है कि सामान्य दिखने वाली जानकारी भी व्यापक खुफिया विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कई मामलों में जांच और कार्रवाई का दावा गठबंधन ने कहा कि कई लोग अनजाने में ऐसे नेटवर्क के संपर्क में आ चुके हैं। कुछ मामलों में सुरक्षा जांच शुरू हुई, सुरक्षा मंजूरी रद्द की गई और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई। ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री Dan Jarvis ने सरकारी और सैन्य कर्मचारियों से ऑनलाइन संपर्कों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। चीन ने आरोपों को बताया निराधार इन आरोपों पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। China के अधिकारियों ने फाइव आइज के दावों को झूठा और राजनीतिक प्रेरित बताया है। चीन का कहना है कि उस पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और पश्चिमी देश उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। चीनी पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि फाइव आइज स्वयं दुनिया के सबसे बड़े खुफिया नेटवर्कों में से एक है। पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल यह पहली बार नहीं है जब चीन पर पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए जानकारी जुटाने के आरोप लगे हैं। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी MI5 पहले भी चेतावनी दे चुकी है कि संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को ऑनलाइन भर्ती अभियानों के माध्यम से निशाना बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में जासूसी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं और नौकरी के प्रस्ताव, शोध सहयोग तथा परामर्श कार्य जैसे साधन अब खुफिया गतिविधियों के नए माध्यम बनते जा रहे हैं।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Anthropic AI cybersecurity project Mythos being tested in India as part of a global technology initiative
एंथ्रोपिक के सीक्रेट AI ‘मायथॉस’ की टेस्टिंग के लिए चुना गया भारत, चीन बाहर; विशेषज्ञों के बीच छिड़ी नई बहस

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक अवसर मिला है। अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने अपने अत्याधुनिक और बेहद गोपनीय साइबर सुरक्षा मॉडल ‘मायथॉस’ (Mythos) की टेस्टिंग के लिए भारत को चुना है। खास बात यह है कि इस परियोजना में शामिल 15 देशों में भारत एकमात्र ऐसा देश है जो अमेरिका का औपचारिक सैन्य संधि सहयोगी नहीं है, जबकि चीन को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इस फैसले को लेकर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ इसे भारत की तकनीकी ताकत और वैश्विक भरोसे का प्रमाण मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे भारत को एक बड़े टेस्टिंग ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बता रहे हैं। क्या है प्रोजेक्ट ग्लासविंग? मायथॉस को एंथ्रोपिक की महत्वाकांक्षी पहल ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ के तहत विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम में मौजूद कमजोरियों और सुरक्षा खामियों को साइबर अपराधियों से पहले पहचानना है। दावा किया जा रहा है कि मायथॉस जटिल सॉफ्टवेयर सिस्टम में छिपी कमियों को इंसानी विशेषज्ञों की तुलना में कहीं अधिक तेजी और सटीकता से खोज सकता है। शुरुआती परीक्षणों में इस AI ने कई प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजरों में मौजूद सुरक्षा खामियों की पहचान की है। क्यों खास है मायथॉस? मायथॉस को सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसकी पहुंच केवल— सरकारी संस्थानों बड़ी तकनीकी कंपनियों प्रमुख वित्तीय संस्थानों तक सीमित रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित बना सकती है। हालांकि दूसरी ओर यह चिंता भी जताई जा रही है कि यदि ऐसी तकनीक गलत हाथों में पहुंच जाए तो इसका दुरुपयोग भी संभव है। किन देशों को मिला टेस्टिंग का मौका? भारत के अलावा जिन देशों को मायथॉस की टेस्टिंग में शामिल किया गया है, उनमें शामिल हैं— फ्रांस जर्मनी इटली स्विट्जरलैंड नीदरलैंड स्पेन बेल्जियम स्वीडन कनाडा जापान दक्षिण कोरिया ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड इनमें अधिकांश देश अमेरिका के औपचारिक सुरक्षा सहयोगी हैं। ऐसे में भारत का इस सूची में शामिल होना विशेष महत्व रखता है। भारत को क्यों चुना गया? विशेषज्ञों के अनुसार भारत के चयन के पीछे कई बड़े कारण हैं— दुनिया का विशाल सॉफ्टवेयर टैलेंट पूल तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल भुगतान नेटवर्क बड़ा बैंकिंग और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर विशाल डिजिटल उपभोक्ता आधार भारत में मिलने वाला व्यावहारिक अनुभव वैश्विक स्तर पर AI मॉडल को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों की दो अलग-अलग राय इस फैसले पर तकनीकी जगत दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। पहला पक्ष: भारत के लिए बड़ी उपलब्धि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की सबसे उन्नत AI और साइबर सुरक्षा परियोजनाओं में शामिल होना भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और वैश्विक भरोसे को दर्शाता है। उनका कहना है कि इससे भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों को अत्याधुनिक AI सिस्टम के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। दूसरा पक्ष: क्या भारत सिर्फ टेस्टिंग ग्राउंड है? दूसरी ओर कुछ आलोचकों का मानना है कि एंथ्रोपिक भारत के विशाल डिजिटल इकोसिस्टम और डेटा वातावरण का उपयोग अपने AI मॉडल को और बेहतर बनाने के लिए कर सकता है। उनके अनुसार भारत को केवल एक परीक्षण बाजार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे तकनीक के विकास और स्वामित्व में भी अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए। एंथ्रोपिक में भारतीय प्रतिभा की बड़ी भूमिका भारत और एंथ्रोपिक के संबंध केवल इस परियोजना तक सीमित नहीं हैं। कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) Rahul Patil भारतीय मूल के हैं। कंपनी ने टोक्यो के बाद अपना दूसरा वैश्विक कार्यालय Bengaluru में स्थापित किया है। एंथ्रोपिक के सीईओ Dario Amodei ने पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर विभिन्न क्षेत्रों में AI के उपयोग पर चर्चा की थी। हाल के महीनों में भारत में डेवलपर्स के बीच Claude Code जैसे AI टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। क्या मायथॉस भारत के लिए अवसर है या चुनौती? मायथॉस की टेस्टिंग में भारत की भागीदारी निश्चित रूप से देश की तकनीकी क्षमता और वैश्विक महत्व को दर्शाती है। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, तकनीकी स्वायत्तता और विदेशी AI कंपनियों की भूमिका जैसे सवाल भी जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस अवसर को केवल टेस्टिंग तक सीमित रखता है या इसे अपनी AI रणनीति को मजबूत बनाने के लिए इस्तेमाल करता है।  

surbhi जून 4, 2026 0
Jamshid Ghomi accused of exporting sensitive US technology to Iran in sanctions case
अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

  अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान को संवेदनशील तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप में अमेरिकी-ईरानी कारोबारी जमशीद घोमी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने वर्षों तक अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए नेटवर्किंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े उपकरण ईरान तक पहुंचाए। संघीय अधिकारियों के अनुसार, 63 वर्षीय घोमी कैलिफोर्निया के न्यूपोर्ट कोस्ट के निवासी हैं और तेहरान स्थित तकनीकी कंपनी फराज परदाज रायानेह (FPR) के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। निर्यात प्रतिबंधों को दरकिनार करने का आरोप अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, घोमी पर इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) समेत कई संघीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने बिना आवश्यक सरकारी अनुमति के संवेदनशील अमेरिकी तकनीक ईरान भेजने के लिए एक संगठित तंत्र तैयार किया था। यूएई बना कथित ट्रांजिट हब अभियोजन पक्ष के अनुसार, उपकरणों को सीधे ईरान भेजने के बजाय पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित कंपनियों और बिचौलियों तक पहुंचाया जाता था। वहां से उन्हें आगे ईरान भेजा जाता था। अधिकारियों का मानना है कि इस तरीके का इस्तेमाल वास्तविक खरीदारों और अंतिम उपयोगकर्ताओं की पहचान छिपाने के लिए किया गया। ऑनलाइन खरीदारी से शुरू हुआ ऑपरेशन जांच में सामने आया है कि शुरुआती दौर में कथित तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान सेवाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में तकनीकी उपकरण खरीदे गए। बाद में अमेरिकी सप्लायरों से सीधे खरीदारी की गई और कई कंपनियों का उपयोग कर लेनदेन की वास्तविक प्रकृति को छिपाने का प्रयास किया गया। भारी मात्रा में हार्डवेयर भेजने का दावा संघीय जांच एजेंसियों का आरोप है कि कई वर्षों के दौरान बड़ी मात्रा में तकनीकी हार्डवेयर दुबई के रास्ते ईरान पहुंचाया गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, शिपिंग रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कथित रूप से गलत जानकारी दर्ज कर अंतिम गंतव्य को छिपाया गया। रक्षा और परमाणु संस्थानों तक पहुंचे उपकरण अदालती दस्तावेजों में दावा किया गया है कि भेजे गए कुछ उपकरण ईरान के परमाणु और रक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों तक पहुंचे। अभियोजकों के अनुसार, इन संस्थाओं को नेटवर्किंग, संचार और एन्क्रिप्शन तकनीक उपलब्ध कराई गई हो सकती है। इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। पैसों के लेनदेन की भी जांच अमेरिकी एजेंसियां इस मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही हैं। आरोप है कि धन के प्रवाह को छिपाने के लिए शेल कंपनियों, जटिल कारोबारी संरचनाओं और कथित फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया। साथ ही आय और कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को लेकर भी जांच जारी है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया है। विभाग का कहना है कि संवेदनशील तकनीक को प्रतिबंधित देशों तक पहुंचने से रोकना उसकी प्राथमिकता है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत में साबित होंगे आरोप जमशीद घोमी के खिलाफ आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। यदि अदालत में आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो उन्हें अमेरिकी संघीय कानूनों के तहत लंबी जेल की सजा हो सकती है। कानूनी सिद्धांतों के अनुसार अदालत में दोष साबित होने तक उन्हें निर्दोष माना जाएगा।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Whatsapp Account Hacked
WhatsApp Account Hack हुआ है या नहीं, कैसे पता करें?

रांची। आजकल के डिजिटल ज़माने में WhatsApp सिर्फ chatting app नहीं, बल्कि personal chats, photos, documents और banking OTP तक का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp account hack हो जाए, तो privacy और security दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। सवाल यह है कि WhatsApp hack हुआ है या नहीं, इसका पता कैसे लगाएं? आइए आसान भाषा में इसे समझते हैं। WhatsApp Account Hack होने के क्या संकेत हैं? 1. Unknown Devices Logged In दिखना अगर WhatsApp Web या linked devices में कोई अनजान device दिखाई दे, तो यह एक warning sign हो सकता है। 2. OTP Message बिना वजह आना अगर बार-बार आपको verification code या OTP message आ रहे हैं, तो इससे यह पता चलता है कि कोई आपका account access करने की कोशिश कर रहा है। 3. Messages अपने आप Read या Send होना अगर आपने message नहीं भेजा लेकिन chat में activity दिख रही है, तो account compromise हो सकता है। 4. अचानक Logout हो जाना WhatsApp अगर बार-बार logout हो रहा है या re-login मांग रहा है, तो सावधानी बरतने की जरूरत है। 5. Unknown Status या Profile Changes Profile photo, about section या status अपने आप बदलना suspicious activity का एक संकेत हो सकता है। WhatsApp Account Hack हुआ है तो क्या करें? तुरंत सभी linked devices logout करें Two-step verification ON करें WhatsApp PIN सेट करें Password और email security check करें Suspicious apps uninstall करें Account access वापस पाने के लिए re-verify करें Linked Devices कैसे Check करें? WhatsApp खोलें → Settings → Linked Devices → Unknown devices remove करें। Two-Step Verification क्यों जरूरी है? यह extra security layer जोड़ता है, जिससे सिर्फ OTP मिलने से account access करना मुश्किल हो जाता है। WhatsApp Account को Hack होने से कैसे बचायें ? OTP किसी  अंजान व्यक्ति से share न करें Unknown links पर click न करें Fake APK files install न करें Public Wi-Fi पर login करने से बचे   App को regularly update करें

Unknown जून 4, 2026 0
Cybersecurity concept showing hacker targeting open-source software supply chains and developer platforms.
GitHub से OpenAI तक मचा हड़कंप! कौन है TeamPCP, ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर को निशाना बनाने वाला खतरनाक हैकर ग्रुप?

TeamPCP Hacker Group: दुनिया भर में साइबर सुरक्षा एजेंसियों और टेक कंपनियों की चिंता बढ़ाने वाला हैकर समूह TeamPCP तेजी से सुर्खियों में आ रहा है। पिछले कुछ महीनों में इस समूह ने सैकड़ों ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर और डेवलपर टूल्स को संक्रमित कर बड़े पैमाने पर सप्लाई चेन हमले किए हैं। हाल ही में GitHub पर हुए डेटा ब्रीच के पीछे भी इसी समूह का हाथ माना जा रहा है, जिसने टेक इंडस्ट्री में नई चिंता पैदा कर दी है। GitHub डेटा ब्रीच के बाद चर्चा में आया TeamPCP कोड होस्टिंग प्लेटफॉर्म GitHub ने हाल ही में पुष्टि की कि उसके हजारों आंतरिक रिपॉजिटरी साइबर हमले की चपेट में आ गए। जांच में सामने आया कि एक डेवलपर ने VS Code का संक्रमित एक्सटेंशन इंस्टॉल कर लिया था, जिसके जरिए हैकर्स को सिस्टम तक पहुंच मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 3,800 आंतरिक रिपॉजिटरी प्रभावित हुईं। हालांकि कंपनी का कहना है कि ग्राहकों का डेटा सुरक्षित रहा, लेकिन इस घटना ने ओपन-सोर्स इकोसिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कौन है TeamPCP? TeamPCP की शुरुआत 2025 के अंत में हुई थी। शुरुआत में यह समूह क्लाउड सिस्टम की कमजोरियों और वेब डेवलपमेंट टूल्स में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर बॉटनेट नेटवर्क तैयार करता था। बाद में इसने अपनी गतिविधियों का विस्तार करते हुए सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन अटैक को मुख्य हथियार बना लिया। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह समूह मुख्य रूप से आर्थिक लाभ के लिए काम करता है। हैकर्स डेटा चोरी करने, फिरौती मांगने और संवेदनशील जानकारी बेचने जैसे कामों में शामिल बताए जाते हैं। कैसे काम करता है TeamPCP का नेटवर्क? TeamPCP का तरीका बेहद खतरनाक और जटिल माना जाता है। यह सबसे पहले किसी लोकप्रिय ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर या डेवलपर टूल तक पहुंच बनाता है। इसके बाद उस सॉफ्टवेयर में मालवेयर कोड जोड़ दिया जाता है। जब डेवलपर्स या कंपनियां उस संक्रमित सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करती हैं, तो उनके सिस्टम में भी मालवेयर पहुंच जाता है। इसके जरिए हैकर्स लॉगिन क्रेडेंशियल, एक्सेस टोकन और अन्य संवेदनशील जानकारी चुरा लेते हैं। बाद में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल करके और अधिक सॉफ्टवेयर को संक्रमित किया जाता है। 'Mini Shai-Hulud' वर्म बना सबसे बड़ा हथियार रिपोर्ट्स के अनुसार TeamPCP ने अपने कई हमलों को ऑटोमेट करने के लिए "Mini Shai-Hulud" नामक सेल्फ-प्रोपेगेटिंग वर्म का इस्तेमाल किया है। यह वर्म एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक खुद फैल सकता है और संक्रमित नेटवर्क का दायरा लगातार बढ़ाता रहता है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तकनीक की वजह से TeamPCP बहुत कम समय में सैकड़ों सॉफ्टवेयर पैकेज को प्रभावित करने में सफल रहा। OpenAI, GitHub और कई बड़ी कंपनियां बन चुकी हैं शिकार TeamPCP का नाम कई हाई-प्रोफाइल साइबर हमलों से जोड़ा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह समूह GitHub के अलावा OpenAI, Mercor, Mistral, Checkmarx और TanStack जैसी तकनीकी कंपनियों को भी निशाना बना चुका है। साइबर सुरक्षा फर्मों का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में TeamPCP ने 20 से अधिक बड़े सप्लाई चेन अटैक किए हैं, जिनमें 500 से ज्यादा सॉफ्टवेयर पैकेज संक्रमित हुए। इन हमलों का असर दुनिया भर की सैकड़ों कंपनियों पर पड़ा है। संगठनों को कैसे रहना चाहिए सुरक्षित? विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को अपने सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना होगा। नियमित रूप से एक्सेस टोकन बदलना, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करना और किसी भी नए सॉफ्टवेयर अपडेट को जांच के बाद ही इंस्टॉल करना जरूरी है। इसके अलावा ओपन-सोर्स पैकेज डाउनलोड करते समय स्रोत की विश्वसनीयता की जांच करना और संदिग्ध गतिविधियों की लगातार निगरानी करना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बढ़ता खतरा, बढ़ती चुनौती TeamPCP ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक साइबर हमले केवल किसी एक कंपनी को नहीं बल्कि पूरे सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। जैसे-जैसे दुनिया ओपन-सोर्स तकनीकों पर अधिक निर्भर होती जा रही है, वैसे-वैसे ऐसे सप्लाई चेन हमलों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में TeamPCP जैसी संगठित हैकर टीमों से निपटना टेक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल होगा।  

surbhi मई 26, 2026 0
Cyber police investigate a digital arrest scam after a Bengaluru woman lost ₹24 crore to fraudsters.
बेंगलुरु में बुजुर्ग महिला से 24 करोड़ की साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट रैकेट का भंडाफोड़

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में “डिजिटल अरेस्ट” के जरिए 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला से 24 करोड़ रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। Karnataka State Cyber Command ने इस बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी खुद को Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) के वरिष्ठ अधिकारी बताकर महिला को लगातार डराते रहे और करीब दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा। दो महीने तक डराकर वसूले करोड़ों रुपये जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 10 फरवरी से 24 अप्रैल 2026 के बीच महिला को बार-बार पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इस दौरान महिला ने 26 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 24 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। पुलिस के अनुसार, यह रकम देशभर के 10 बैंकों में मौजूद 23 फर्जी बैंक खातों में भेजी गई थी। ये आरोपी हुए गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है: N. Shivagnanam - इरोड, तमिलनाडु Akkach Mallik - मुंबई Palak Bhai Patel - अहमदाबाद Amit Narendra Patel - अहमदाबाद Om Prakash Rajput - नई दिल्ली Gaurav Kumar - बिहार बैंक अलर्ट से खुला मामला धोखाधड़ी का खुलासा 24 अप्रैल को हुआ, जब एक बैंक ने संदिग्ध लेनदेन की जानकारी साइबर कमांड यूनिट को दी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर पीड़िता को समझाया और आगे रकम ट्रांसफर होने से रोका। कार्रवाई के दौरान करीब 3 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ठगी रोकी गई। पुलिस ने कई बैंक खातों को फ्रीज भी किया। 4 करोड़ रुपये बचाए, कई खाते फ्रीज बेंगलुरु स्थित साइबर कमांड के पुलिस महानिदेशक Pranab Mohanty ने बताया कि जांच के दौरान एनआरसीपी पोर्टल की मदद से कई खातों को फ्रीज किया गया। उन्होंने कहा कि अब तक 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सुरक्षित की गई है और अदालत के आदेशों के जरिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की रिकवरी भी हुई है। क्या होता है डिजिटल अरेस्ट? पुलिस के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का तेजी से बढ़ता तरीका है। इसमें जालसाज खुद को पुलिस, CBI, ED या अदालत के अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो या ऑडियो कॉल पर डराते हैं। आरोपी पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर कानूनी मामले में फंस चुका है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने होंगे। कई मामलों में पीड़ितों को घंटों या दिनों तक लगातार निगरानी में रखा जाता है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Map showing submarine internet cables near Strait of Hormuz amid rising Iran digital control concerns.
ईरान का नया ‘डिजिटल हथियार’  होर्मुज की इंटरनेट केबलों पर नियंत्रण की कोशिश से दुनिया में बढ़ी चिंता

Iran अब केवल तेल और समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को भी रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी समुद्री इंटरनेट और डेटा केबलों पर नियंत्रण और शुल्क लगाने के संकेत दिए हैं। इस कदम ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन केबलों पर किसी तरह का असर पड़ा तो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन कारोबार और वित्तीय लेनदेन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। गूगल-माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों पर शुल्क लगाने की तैयारी ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google, Microsoft, Meta और Amazon जैसी कंपनियों को भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट के नीचे गुजरने वाली इंटरनेट केबलों के इस्तेमाल के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqhari ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संकेत दिए कि समुद्री इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाया जा सकता है। डिजिटल युद्ध की तरफ बढ़ रहा ईरान? विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब अपनी भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की पश्चिम एशिया विशेषज्ञ दीना एसफंदियारी के अनुसार, तेहरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। समुद्र के नीचे बिछी सबसी केबलें वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती हैं। यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों के बीच डेटा ट्रांसफर, बैंकिंग सिस्टम, क्लाउड कंप्यूटिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और AI सेवाओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं केबलों के जरिए संचालित होता है। भारत समेत एशियाई देशों पर पड़ सकता है असर रिपोर्ट्स के अनुसार, Strait of Hormuz एशिया और यूरोप के बीच एक अहम डिजिटल कॉरिडोर बन चुका है। अगर यहां इंटरनेट केबलों में बाधा आती है तो भारत की IT और आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों के तेल और गैस निर्यात से जुड़े डिजिटल सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क और शेयर बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इंटरनेट स्पीड कम होने से कहीं बड़ा खतरा वित्तीय लेनदेन और वैश्विक डेटा ट्रैफिक में रुकावट का हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दे रहा ईरान ईरानी मीडिया का दावा है कि यह योजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून UNCLOS के तहत तैयार की जा रही है। इस कानून के मुताबिक, कोई भी तटीय देश अपनी समुद्री सीमा में आने वाली केबलों पर कुछ नियम लागू कर सकता है। ईरान स्वेज नहर का उदाहरण देकर यह तर्क दे रहा है कि रणनीतिक जलमार्गों से आर्थिक लाभ कमाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर की कानूनी स्थिति पूरी तरह समान नहीं है। पहले भी निशाने पर आ चुकी हैं समुद्री केबलें समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने जर्मनी की टेलीग्राफ केबल काट दी थी। हाल ही में 2024 में Houthi Movement से जुड़े हमलों में लाल सागर की तीन इंटरनेट केबल क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे क्षेत्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का करीब 25 प्रतिशत प्रभावित हुआ था। हालांकि आधुनिक नेटवर्क में वैकल्पिक रूट मौजूद होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर किसी केबल नेटवर्क को नुकसान पहुंचने पर वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।  

surbhi मई 18, 2026 0
WhatsApp introduces Incognito Chat feature for secure and private AI conversations with disappearing messages
WhatsApp का नया Incognito Chat फीचर: अब AI चैट्स होंगी ज्यादा प्राइवेट और सुरक्षित

Meta Platforms ने WhatsApp यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर पेश किया है, जिसका नाम Incognito Chat रखा गया है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को Meta AI के साथ ज्यादा सुरक्षित और निजी बातचीत का अनुभव देना है। कंपनी के CEO Mark Zuckerberg ने हाल ही में इस फीचर की घोषणा की। Meta का दावा है कि यह नया मोड AI चैट्स को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाएगा और बातचीत खत्म होते ही मैसेज अपने आप गायब हो जाएंगे। चैट खत्म होते ही डिलीट हो जाएंगे मैसेज Meta के अनुसार, Incognito Chat में की गई बातचीत सामान्य क्लाउड सर्वर पर प्रोसेस नहीं होगी। इसके बजाय, इसे एक सिक्योर और एन्क्रिप्टेड सिस्टम के जरिए संभाला जाएगा। कंपनी का कहना है कि न तो Meta और न ही कोई बाहरी व्यक्ति इन चैट्स को पढ़ सकेगा। सबसे अहम बात यह है कि AI से हुई बातचीत सेशन खत्म होते ही अपने आप डिलीट हो जाएगी और सर्वर पर स्टोर नहीं होगी। यह फीचर उन यूजर्स के लिए खास माना जा रहा है जो AI चैट्स के दौरान अपनी निजी जानकारी को लेकर चिंतित रहते हैं। क्या है Private Processing टेक्नोलॉजी? Meta ने बताया कि Incognito Chat फीचर उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस तकनीक को पिछले साल WhatsApp के AI फीचर्स के साथ पेश किया गया था। इस सिस्टम में यूजर्स की रिक्वेस्ट सामान्य सर्वर पर प्रोसेस होने के बजाय Trusted Execution Environments (TEE) नाम के एन्क्रिप्टेड और आइसोलेटेड सिस्टम में प्रोसेस होती है। इसका फायदा यह है कि किसी भी थर्ड पार्टी को यूजर डेटा तक पहुंच नहीं मिल पाती और चैट की गोपनीयता बनी रहती है। Meta का दावा है कि यह फीचर दूसरे AI प्लेटफॉर्म्स से अलग है, क्योंकि कई AI सेवाएं यूजर्स की बातचीत को लंबे समय तक स्टोर करके रखती हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? कंपनी के मुताबिक, Incognito Chat फीचर को फिलहाल धीरे-धीरे Android और iOS यूजर्स के लिए रोलआउट किया जा रहा है। इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपना WhatsApp ऐप लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करना होगा। हालांकि शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल चुनिंदा अकाउंट्स पर उपलब्ध होगी। Meta ने यह भी कहा है कि फीचर की उपलब्धता यूजर के क्षेत्र और अकाउंट टाइप के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। जिन यूजर्स को यह अपडेट मिलेगा, उन्हें Meta AI के साथ प्राइवेट बातचीत के लिए अलग विकल्प दिखाई देगा। सुरक्षा को लेकर Meta का दावा Meta का कहना है कि उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी की जांच कई स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी कंपनियों ने की है। इनमें NCC Group और Trail of Bits जैसी कंपनियां शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इन सुरक्षा परीक्षणों में यह पाया गया कि सिस्टम यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत सिक्योरिटी मानकों का पालन करता है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Finance Minister Nirmala Sitharaman meeting bank officials on AI cyber threat Claude Mythos security concerns
Claude Mythos पर सरकार अलर्ट: निर्मला सीतारमण ने बैंकों को साइबर हमलों से बचने के दिए निर्देश

देश के बैंकिंग सेक्टर की साइबर सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर Anthropic के अत्याधुनिक AI मॉडल Claude Mythos से उत्पन्न संभावित खतरों पर चर्चा की। क्या है Claude Mythos? Anthropic द्वारा विकसित Claude Mythos को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली AI मॉडल माना जा रहा है। दावा है कि यह हजारों ऐसी सुरक्षा खामियों का पता लगा सकता है, जिन्हें मानव विशेषज्ञ भी नहीं खोज पाए। इसकी क्षमताओं को देखते हुए कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं कराया है। क्यों बढ़ी चिंता? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ अनधिकृत यूजर्स Claude Mythos तक पहुंच बनाने में सफल रहे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इसका दुरुपयोग कर साइबर अपराधी बैंकिंग नेटवर्क, वित्तीय संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम को निशाना बना सकते हैं। वित्त मंत्री ने क्या कहा? बैठक में निर्मला सीतारमण ने कहा कि Claude Mythos से उत्पन्न खतरा अभूतपूर्व है और इससे निपटने के लिए उच्च स्तर की सतर्कता, तैयारी और समन्वय आवश्यक है। उन्होंने बैंकों को अपने आईटी सिस्टम मजबूत करने और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस पर जोर वित्त मंत्रालय ने बैंकों, Indian Computer Emergency Response Team और अन्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस साझा करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की सलाह दी है। इससे किसी भी संभावित साइबर हमले का तेजी से पता लगाया जा सकेगा। RBI और IBA भी सक्रिय भारतीय रिजर्व बैंक और Indian Banks' Association को भी इस जोखिम का आकलन करने को कहा गया है। साथ ही, IBA को सभी बैंकों के लिए एक समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। वैश्विक स्तर पर भी चिंता Claude Mythos को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका समेत कई देशों में भी चिंता बढ़ी है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन और वॉल स्ट्रीट के बड़े बैंक भी इस AI मॉडल से जुड़े जोखिमों का आकलन कर रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Gmail mobile app displaying end-to-end encryption lock icon for secure email communication.
Gmail में आया बड़ा सिक्योरिटी अपडेट: अब एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से पूरी तरह सुरक्षित होंगे आपके ईमेल

टेक्नोलॉजी दिग्गज Google ने अपने लोकप्रिय ईमेल प्लेटफॉर्म Gmail को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब Gmail में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) का सपोर्ट Android और iPhone दोनों पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे यूजर्स अपने ईमेल को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित तरीके से भेज और पढ़ सकेंगे। क्या है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है जिसमें ईमेल का डेटा भेजने वाले के डिवाइस पर ही एन्क्रिप्ट (कोडेड) हो जाता है और केवल प्राप्तकर्ता ही उसे डिक्रिप्ट (पढ़) कर सकता है। इसका मतलब यह है कि बीच में कोई भी–यहां तक कि सर्वर या कंपनी भी–उस ईमेल को नहीं पढ़ सकती। Gmail में यह फीचर कैसे काम करता है? नए अपडेट के बाद जब यूजर ईमेल लिखेंगे, तो उन्हें एक ‘लॉक’ आइकन दिखाई देगा। इस आइकन पर क्लिक करके एन्क्रिप्शन ऑन किया जा सकता है ईमेल भेजने से पहले ही डिवाइस पर एन्क्रिप्ट हो जाता है रिसीवर के पास पहुंचने के बाद ही यह डिक्रिप्ट होता है अगर सामने वाला व्यक्ति Gmail यूज करता है, तो उसे ईमेल सामान्य थ्रेड की तरह दिखाई देगा। वहीं, अन्य ईमेल यूजर्स इसे सुरक्षित वेब लिंक के जरिए एक्सेस कर सकते हैं। मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ा फायदा अब तक इस तरह की सिक्योरिटी के लिए अलग टूल या प्लेटफॉर्म की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब यह सुविधा सीधे मोबाइल ऐप में ही मिल रही है। इससे यूजर्स कहीं से भी अपने संवेदनशील और जरूरी ईमेल सुरक्षित तरीके से भेज और पढ़ सकते हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? फिलहाल यह फीचर Google Workspace के एंटरप्राइज यूजर्स के लिए उपलब्ध है। एडमिन को पहले इसे Admin Console से एक्टिव करना होगा इसके बाद ही यूजर्स इस सुविधा का उपयोग कर पाएंगे धीरे-धीरे इसे सभी यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा क्यों है यह अपडेट खास? डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरे और डेटा लीक के मामलों को देखते हुए यह अपडेट बेहद अहम माना जा रहा है। यह फीचर खासकर बिजनेस, प्रोफेशनल और संवेदनशील जानकारी शेयर करने वाले यूजर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Students learning AI, data science, coding and futuristic tech careers on computers
टेक इंडस्ट्री में करियर बनाना है? जानें BTech की सबसे डिमांडिंग ब्रांच और भविष्य के बड़े मौके

आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में करियर का सही चुनाव करना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। हर साल नई-नई टेक्नोलॉजी सामने आ रही हैं, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि किस फील्ड में भविष्य सुरक्षित और मजबूत होगा। अगर आप भी BTech करने की सोच रहे हैं और कन्फ्यूज हैं कि कौन-सी ब्रांच चुनें, तो यह रिपोर्ट आपके लिए बेहद काम की है। AI और Data Science: टेक इंडस्ट्री का भविष्य वर्तमान समय में Artificial Intelligence (AI) और Data Science टेक सेक्टर के सबसे तेजी से उभरते और हाई-डिमांड क्षेत्रों में शामिल हैं। हेल्थकेयर, बैंकिंग, ई-कॉमर्स से लेकर एंटरटेनमेंट तक, हर इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। AI मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और निर्णय लेने की क्षमता देता है, जबकि Data Science बड़े डेटा का विश्लेषण करके कंपनियों को बेहतर रणनीति बनाने में मदद करता है। यही कारण है कि कंपनियां इन स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। क्यों बढ़ रही है इनकी डिमांड? ऑटोमेशन का बढ़ता ट्रेंड: कंपनियां मैन्युअल काम को कम करके ऑटोमेशन अपना रही हैं बिग डेटा का विस्तार: हर दिन भारी मात्रा में डेटा तैयार हो रहा है, जिसे समझने के लिए एक्सपर्ट्स की जरूरत है स्मार्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग: Chatbots, Self-driving Cars और Recommendation Systems जैसी तकनीकें AI पर आधारित हैं जरूरी स्किल्स क्या हैं? AI और Data Science में करियर बनाने के लिए छात्रों को कुछ प्रमुख स्किल्स सीखनी होंगी: Python जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज Machine Learning और Deep Learning Data Analysis और Visualization Statistics और Mathematics की मजबूत समझ करियर ऑप्शन और सैलरी इस फील्ड में करियर के कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं: Data Scientist Machine Learning Engineer AI Engineer Business Analyst शुरुआती स्तर पर सैलरी लगभग 6 से 10 लाख रुपये सालाना हो सकती है, जो अनुभव के साथ 20 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। अन्य उभरती हुई BTech ब्रांच AI के अलावा भी कई टेक ब्रांच तेजी से आगे बढ़ रही हैं: Cyber Security: डेटा सुरक्षा के लिए Cloud Computing: ऑनलाइन सर्वर और स्टोरेज मैनेजमेंट Blockchain Technology: सुरक्षित डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 8, 2026 0