रूस ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव को अंतरराष्ट्रीय वांटेड सूची (International Wanted List) में शामिल कर दिया है। रूस की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा एजेंसी फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) ने उन पर आतंकवाद, तोड़फोड़ और साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे टेलीग्राम चैनलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। FSB ने क्या लगाए आरोप? रूसी सुरक्षा एजेंसी FSB ने बुधवार (29 जुलाई) को जारी बयान में कहा कि टेलीग्राम प्रशासन ने ऐसे कई चैनल, चैट और बॉट नहीं हटाए, जिनका कथित तौर पर यूक्रेन की खुफिया एजेंसियां, आतंकवादी और चरमपंथी संगठन इस्तेमाल कर रहे हैं। FSB के अनुसार, इन प्लेटफॉर्मों का उपयोग रूस के खिलाफ तोड़फोड़, आतंकवादी गतिविधियों, सामूहिक हमलों और साइबर धोखाधड़ी जैसी घटनाओं की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए किया जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ा विवाद रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान टेलीग्राम दोनों देशों में सूचना साझा करने और संचार का प्रमुख माध्यम बन गया है। युद्ध से जुड़े अपडेट, सैन्य गतिविधियां और आधिकारिक संदेश बड़ी संख्या में इसी प्लेटफॉर्म के जरिए साझा किए जाते हैं। इसी कारण हाल के वर्षों में रूस ने टेलीग्राम के उपयोग पर नियंत्रण बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं। टेलीग्राम के 1 अरब से अधिक यूजर्स साल 2013 में लॉन्च हुए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम का दावा है कि दुनिया भर में उसके 1 अरब से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। रूस इसे देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स में से एक मानता है, लेकिन सरकार लंबे समय से इसके संचालन और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर सवाल उठाती रही है। अपनी मैसेजिंग सेवा को बढ़ावा दे रहा रूस रूस हाल के वर्षों में टेलीग्राम पर निर्भरता कम करने और अपनी सरकारी मैसेजिंग सेवा 'MAX' को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसी रणनीति के तहत सरकार टेलीग्राम पर कई प्रतिबंधात्मक कदम उठा चुकी है। डुरोव ने पहले लगाए थे ये आरोप 41 वर्षीय पावेल डुरोव ने इस वर्ष की शुरुआत में दावा किया था कि रूसी अधिकारियों ने उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की है। उनका आरोप था कि सरकार निजता (Privacy) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) को सीमित करने के लिए टेलीग्राम पर दबाव बना रही है और झूठे आरोपों का सहारा ले रही है। डुरोव का जन्म रूस में हुआ था, लेकिन उनके पास फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की नागरिकता भी है। फिलहाल वह फ्रांस में रह रहे हैं। बढ़ सकता है विवाद रूस द्वारा डुरोव को इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डालने के बाद मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और तूल पकड़ सकता है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर वैश्विक बहस तेज है।
नई दिल्ली: क्या भविष्य में ऐसा कंप्यूटर आ सकता है जो बैंक, सरकार और सेना की मौजूदा डिजिटल सुरक्षा को कुछ ही सेकंड में तोड़ दे? इजराइल के वरिष्ठ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रोफेसर मेजर-जनरल आइजैक बेन-इजरायल ने इसी संभावना को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब पूरी तरह सक्षम क्वांटम कंप्यूटर विकसित हो जाएंगे, तब आज इस्तेमाल होने वाले कई पारंपरिक एन्क्रिप्शन सिस्टम सुरक्षित नहीं रहेंगे। उन्होंने यह टिप्पणी साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक पॉडकास्ट में की। क्या है क्वांटम कंप्यूटर? सामान्य कंप्यूटर बिट (0 और 1) के आधार पर काम करते हैं, जहां एक समय में केवल एक स्थिति संभव होती है। वहीं, क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट (Qubit) का उपयोग करते हैं। क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों के कारण क्यूबिट एक समय में कई संभावित अवस्थाओं में काम कर सकते हैं। इसी वजह से कुछ जटिल गणनाएं पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से की जा सकती हैं। क्यों जताई गई है चिंता? प्रोफेसर बेन-इजरायल के अनुसार, यदि भविष्य में पर्याप्त क्षमता वाले क्वांटम कंप्यूटर विकसित हो जाते हैं, तो वे आज उपयोग में आने वाले कई एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म को बहुत तेजी से तोड़ सकते हैं। इसका असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है— बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सरकारी डेटा सैन्य संचार ऑनलाइन पहचान और पासवर्ड आधारित सुरक्षा संवेदनशील व्यावसायिक जानकारी हालांकि, यह खतरा भविष्य में पूरी तरह विकसित क्वांटम कंप्यूटरों से जुड़ा है, न कि आज उपलब्ध सामान्य कंप्यूटरों से। क्या सचमुच "एक सेकंड में हर पासवर्ड" टूट जाएगा? विशेषज्ञ की टिप्पणी भविष्य की संभावित क्षमता को दर्शाती है। व्यवहार में यह कई बातों पर निर्भर करेगा, जैसे— कौन-सा एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म इस्तेमाल हो रहा है। क्वांटम कंप्यूटर की वास्तविक क्षमता कितनी है। संबंधित सिस्टम पहले से पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी अपनाते हैं या नहीं। इसलिए यह कहना कि हर पासवर्ड हर परिस्थिति में एक सेकंड में टूट जाएगा, तकनीकी रूप से एक सामान्यीकृत दावा होगा। हालांकि, मौजूदा एन्क्रिप्शन मानकों के लिए भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग एक गंभीर चुनौती मानी जा रही है। क्यों है इसकी स्पीड इतनी अलग? क्वांटम कंप्यूटर कुछ विशेष प्रकार की गणनाओं में पारंपरिक कंप्यूटरों से कहीं अधिक तेज हो सकते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक और तकनीकी कंपनियां इस तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं। इनका उपयोग भविष्य में इन क्षेत्रों में भी हो सकता है— दवा अनुसंधान जलवायु मॉडलिंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैज्ञानिक अनुसंधान जटिल वित्तीय मॉडलिंग अभी कितनी दूर है यह तकनीक? प्रोफेसर बेन-इजरायल का मानना है कि पूरी तरह सक्षम क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने में अभी कई तकनीकी चुनौतियां बाकी हैं। इनमें प्रमुख हैं— बड़ी संख्या में स्थिर क्यूबिट तैयार करना। क्वांटम त्रुटियों (Quantum Errors) को नियंत्रित करना। अत्यधिक ठंडे तापमान पर सिस्टम को संचालित करना। भारी ऊर्जा और विशेष बुनियादी ढांचे की आवश्यकता। उनके अनुसार, ऐसी मशीनें बेहद बड़ी और महंगी होंगी तथा फिलहाल केवल चुनिंदा संस्थानों या बड़ी तकनीकी कंपनियों तक ही सीमित रहने की संभावना है। दुनिया क्या कर रही है? संभावित क्वांटम खतरे को देखते हुए दुनिया भर की सरकारें और तकनीकी संस्थान पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (Post-Quantum Cryptography) पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसे नए एन्क्रिप्शन मानक विकसित करना है जो भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के सामने भी सुरक्षित रह सकें।
Best Trending Courses After 12th: 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आगे कौन-सा कोर्स चुना जाए, जिससे अच्छी नौकरी, बेहतर सैलरी और भविष्य में ग्रोथ की मजबूत संभावनाएं मिलें। आज के डिजिटल दौर में केवल पारंपरिक करियर विकल्पों तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। टेक्नोलॉजी, इंटरनेट और डिजिटल इकोनॉमी के तेजी से बढ़ने के साथ कई ऐसे प्रोफेशन सामने आए हैं, जिनकी मांग भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रही है। अगर आप 12वीं के बाद ऐसा करियर चुनना चाहते हैं जिसमें फुल-टाइम नौकरी के साथ-साथ फ्रीलांस काम करने का भी मौका मिले, तो ये पांच कोर्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) डिजिटल मार्केटिंग आज सबसे तेजी से बढ़ते करियर सेक्टरों में से एक है। लगभग हर कंपनी अपने बिजनेस को ऑनलाइन बढ़ाने के लिए SEO एक्सपर्ट, सोशल मीडिया मैनेजर, कंटेंट मार्केटर और परफॉर्मेंस मार्केटिंग प्रोफेशनल्स की तलाश कर रही है। क्या काम करना होता है? SEO के जरिए वेबसाइट की Google रैंकिंग बढ़ाना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मैनेज करना Google Ads और Meta Ads चलाना ईमेल मार्केटिंग और ऑनलाइन ब्रांडिंग करना कंटेंट और डिजिटल कैंपेन तैयार करना फ्रीलांस कहां करें? Upwork Fiverr Freelancer PeoplePerHour LinkedIn Contra Toptal (अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए) कमाई फुल-टाइम: ₹3 लाख से ₹18 लाख+ प्रति वर्ष (अनुभव और स्किल के अनुसार) पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: लगभग ₹15,000 से ₹2 लाख+ प्रति माह 2. जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) यदि आपको न्यूज़, वीडियो, कैमरा, लेखन या डिजिटल कंटेंट में रुचि है, तो BJMC एक शानदार विकल्प हो सकता है। डिजिटल मीडिया के विस्तार के साथ कंटेंट क्रिएटर्स, रिपोर्टर्स, वीडियो एडिटर्स और कॉपीराइटर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। क्या काम करना होता है? न्यूज़ रिपोर्टिंग वीडियो एडिटिंग एंकरिंग डिजिटल कंटेंट क्रिएशन कॉपीराइटिंग पब्लिक रिलेशंस (PR) फ्रीलांस कहां करें? Upwork Fiverr LinkedIn Contra Medium Substack YouTube (स्वतंत्र कंटेंट क्रिएशन) कमाई फुल-टाइम: ₹2.5 लाख से ₹12 लाख+ प्रति वर्ष पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: ₹10,000 से ₹1.5 लाख+ प्रति माह 3. डेटा साइंस और डेटा एनालिटिक्स अगर आपकी रुचि गणित, लॉजिक और डेटा एनालिसिस में है, तो यह वर्तमान समय के सबसे हाई-डिमांड करियर में से एक है। लगभग हर बड़ी कंपनी डेटा के आधार पर बिजनेस निर्णय ले रही है। क्या काम करना होता है? डेटा का विश्लेषण करना रिपोर्ट और डैशबोर्ड तैयार करना बिजनेस ट्रेंड पहचानना मशीन लर्निंग और प्रेडिक्टिव एनालिसिस में सहायता करना फ्रीलांस कहां करें? Upwork Toptal Freelancer Kaggle LinkedIn कमाई फुल-टाइम: ₹6 लाख से ₹35 लाख+ प्रति वर्ष पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: ₹30,000 से ₹4 लाख+ प्रति माह 4. UI/UX और ग्राफिक डिजाइनिंग यदि आप क्रिएटिव हैं और डिजाइनिंग में रुचि रखते हैं, तो UI/UX और ग्राफिक डिजाइनिंग आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। वेबसाइट, मोबाइल ऐप और डिजिटल ब्रांडिंग में इन प्रोफेशनल्स की भारी मांग है। क्या काम करना होता है? वेबसाइट और ऐप इंटरफेस डिजाइन करना लोगो डिजाइन सोशल मीडिया क्रिएटिव बनाना ब्रांडिंग और विजुअल आइडेंटिटी तैयार करना फ्रीलांस कहां करें? Fiverr Upwork 99designs Dribbble Behance Contra कमाई फुल-टाइम: ₹4 लाख से ₹20 लाख+ प्रति वर्ष पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: ₹20,000 से ₹3 लाख+ प्रति माह 5. साइबर सिक्योरिटी डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ साइबर हमलों और डेटा चोरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है। क्या काम करना होता है? नेटवर्क सिक्योरिटी एथिकल हैकिंग सिक्योरिटी ऑडिट सर्वर और वेबसाइट सुरक्षा साइबर अटैक रोकना फ्रीलांस कहां करें? HackerOne Bugcrowd Synack Upwork Freelancer कमाई फुल-टाइम: ₹5 लाख से ₹40 लाख+ प्रति वर्ष पार्ट-टाइम/फ्रीलांस: ₹30,000 से ₹5 लाख+ प्रति माह (स्किल और प्रोजेक्ट के आधार पर) क्या ये कोर्स पार्ट-टाइम भी किए जा सकते हैं? इन पांचों क्षेत्रों में ऑनलाइन सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स उपलब्ध हैं। पढ़ाई के दौरान ही इंटर्नशिप, पार्ट-टाइम जॉब और फ्रीलांस प्रोजेक्ट लेकर अनुभव और कमाई दोनों शुरू की जा सकती है। करियर चुनने से पहले रखें इन बातों का ध्यान अपनी रुचि और स्किल के अनुसार कोर्स चुनें। केवल सैलरी देखकर निर्णय न लें। लगातार नई टेक्नोलॉजी और टूल्स सीखते रहें। मजबूत पोर्टफोलियो और LinkedIn प्रोफाइल तैयार करें। इंटर्नशिप और लाइव प्रोजेक्ट्स पर जरूर काम करें। आज के समय में सही स्किल, निरंतर सीखने की इच्छा और व्यावहारिक अनुभव आपको भारत ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी बेहतरीन करियर दिला सकते हैं। यदि आप 12वीं के बाद भविष्य सुरक्षित करने वाला करियर तलाश रहे हैं, तो ये पांचों विकल्प आने वाले वर्षों में सबसे अधिक अवसर देने वाले क्षेत्रों में शामिल माने जा रहे हैं।
भारत सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के तहत नए नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों के अनुसार अब देश में संचालित सभी टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं, मोबाइल टॉवर कंपनियों, सैटेलाइट गेटवे ऑपरेटरों और क्लाउड नेटवर्क कंपनियों के लिए भारतीय टेलीकॉम डेटा को देश के भीतर ही स्टोर करना अनिवार्य होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कॉल, मैसेज, नेटवर्क लॉग और अन्य टेलीकॉम डेटा को न तो विदेश भेजा जा सकेगा और न ही विदेशी सर्वरों पर साझा किया जा सकेगा। इस फैसले का उद्देश्य भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित, मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। कॉल, मैसेज और नेटवर्क डेटा रहेगा भारत में नए नियमों के तहत सभी संबंधित कंपनियों को अपना नेटवर्क डेटा, कॉल रिकॉर्ड, मैसेज लॉग और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड भारत में स्थित सर्वरों या डेटा सेंटर्स में ही सुरक्षित रखना होगा। विदेशी सर्वरों पर इसकी कोई कॉपी रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा बेहतर होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में निगरानी और जांच अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। सरकार कभी भी कर सकेगी ऑडिट और निरीक्षण नई गाइडलाइन के अनुसार दूरसंचार विभाग को किसी भी समय टेलीकॉम नेटवर्क, डेटा स्टोरेज और सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण या ऑडिट करने का अधिकार होगा। यदि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा पाया जाता है, तो सरकार बिना पूर्व सूचना के भी जांच और आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। कंपनियों को ऐसे सभी निरीक्षणों में पूरा सहयोग देना होगा। डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के लागू होने के बाद भारत में डेटा सेंटर उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा। देश में अधिक लोकल डेटा स्टोरेज की आवश्यकता बढ़ने से नए डेटा सेंटर स्थापित होंगे और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा। इसी के साथ सरकार ने Cloud-Hosted Telecom Network Provider की नई श्रेणी भी शुरू की है। इसमें केवल ₹10 लाख की एंट्री फीस रखी गई है और कोई वार्षिक शुल्क नहीं होगा। इससे छोटी और नई कंपनियों के लिए भी टेलीकॉम नेटवर्क से जुड़ना आसान हो सकता है। देरी का बहाना अब नहीं चलेगा अक्सर टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क विस्तार में देरी का कारण सरकारी मंजूरियों को बताती रही हैं। लेकिन DoT ने स्पष्ट कर दिया है कि आवश्यक अनुमतियों में देरी को नियमों के उल्लंघन का बहाना नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि सभी टेलीकॉम और क्लाउड सेवा प्रदाताओं को तय समयसीमा के भीतर भारतीय डेटा को स्थानीय सर्वरों में स्थानांतरित करना होगा और नए नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा। यूजर्स पर क्या होगा असर? इन नए नियमों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं की कॉल, मैसेज और नेटवर्क डेटा की सुरक्षा को मजबूत करना है। साथ ही, देश के भीतर डेटा स्टोरेज बढ़ने से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और भविष्य में क्लाउड व टेलीकॉम सेवाओं का विस्तार भी तेज हो सकता है।
Google Selfie Video Feature: अगर आप अपने Google अकाउंट का पासवर्ड भूल गए हैं और आपके पास रिकवरी फोन नंबर, ईमेल या टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का एक्सेस भी नहीं है, तो अब घबराने की जरूरत नहीं होगी। Google ने अकाउंट रिकवरी को पहले से ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाने के लिए नया 'Selfie Video' फीचर पेश किया है। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपनी पहचान एक छोटे सेल्फी वीडियो के जरिए सत्यापित कर सकेंगे और अकाउंट का एक्सेस वापस पा सकेंगे। क्या है Google का नया Selfie Video फीचर? Google का नया Selfie Video Recovery फीचर एक वैकल्पिक (Optional) अकाउंट रिकवरी सिस्टम है। इसका उद्देश्य उन यूजर्स की मदद करना है जो पासवर्ड भूल जाने या अकाउंट लॉक होने की स्थिति में पारंपरिक रिकवरी विकल्पों का उपयोग नहीं कर पाते। इस फीचर के तहत यूजर को पहले से अपने Google अकाउंट में एक छोटा रेफरेंस सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करके सुरक्षित रखना होगा। बाद में यदि पासवर्ड भूल जाएं, तो Google नया लाइव सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कहेगा और दोनों वीडियो का मिलान करके पहचान सत्यापित करेगा। ऐसे काम करेगा नया फीचर इस फीचर का उपयोग करने के लिए पहले इसे Google अकाउंट में सेटअप करना होगा। सेटअप के दौरान Google यूजर से कैमरे के सामने देखकर कुछ आसान निर्देशों का पालन करने के लिए कहेगा, जैसे— कैमरे की ओर सीधे देखना। सिर को दाएं-बाएं घुमाना। चेहरे की हल्की गतिविधियां करना। स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करना। इसी रिकॉर्डिंग को भविष्य के लिए रेफरेंस वीडियो के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। अगर भविष्य में अकाउंट रिकवरी की जरूरत पड़ती है, तो Google दोबारा लाइव सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड कराएगा और उसकी तुलना पहले सेव किए गए वीडियो से करेगा। फोटो या पुराना वीडियो क्यों नहीं चलेगा? Google ने इस फीचर में Liveness Detection तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसका मतलब है कि केवल फोटो या पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो दिखाकर अकाउंट एक्सेस नहीं किया जा सकेगा। यूजर को लाइव वीडियो रिकॉर्ड करते समय स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा। इससे सिस्टम यह सुनिश्चित कर सकेगा कि वीडियो वास्तविक समय में रिकॉर्ड किया गया है और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा फर्जी तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। यूजर्स के पास रहेगा पूरा कंट्रोल Google का कहना है कि चेहरा एक संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा है, इसलिए इसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। कंपनी के अनुसार— सेल्फी वीडियो केवल यूजर की अनुमति से रिकॉर्ड होगा। वीडियो एन्क्रिप्टेड फॉर्म में सुरक्षित रखा जाएगा। यूजर किसी भी समय Google अकाउंट सेटिंग्स में जाकर इस वीडियो को डिलीट कर सकता है। यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक है और इसे उपयोग करना या न करना यूजर के हाथ में होगा। कब मिलेगा नया फीचर? Google ने जानकारी दी है कि Selfie Video Recovery फीचर को दुनिया भर के Google अकाउंट यूजर्स के लिए चरणबद्ध तरीके से रोल आउट किया जा रहा है। आने वाले समय में यह फीचर अधिक से अधिक यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा और अकाउंट रिकवरी को पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए मालवेयर साइबर हमले की जांच के बाद की गई, जिसमें CDSL की साइबर सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं। 2022 के मालवेयर हमले के बाद हुई कार्रवाई SEBI की जांच में पाया गया कि CDSL की सुरक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं, जिनके कारण मालवेयर हमला सफल हुआ। इस साइबर हमले की वजह से डिपॉजिटरी की कई अहम सेवाएं बाधित हुईं और शेयर बाजार के सेटलमेंट सिस्टम पर भी असर पड़ा। 46 घंटे से ज्यादा प्रभावित रहीं सेवाएं नियामक के अनुसार, साइबर हमले के कारण CDSL की कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं करीब 46 घंटे तक प्रभावित रहीं, जबकि इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर जैसी सुविधाओं में भी लंबा व्यवधान आया। SEBI ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण बाजार अवसंरचना से जुड़ी संस्था के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य है। SEBI ने गिनाईं कई सुरक्षा खामियां जांच में कमजोर एक्सेस कंट्रोल, सुरक्षा अलर्ट की अपर्याप्त निगरानी, पासवर्ड प्रबंधन में लापरवाही और नियामकीय साइबर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने जैसी कमियां सामने आईं। SEBI ने कहा कि इन खामियों के कारण हमले का जोखिम बढ़ा और बाजार संचालन प्रभावित हुआ। वित्तीय संस्थानों को दिया सख्त संदेश SEBI ने स्पष्ट किया कि पूंजी बाजार से जुड़ी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। नियामक ने कहा कि डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा में लापरवाही निवेशकों के हितों और पूरे वित्तीय बाजार की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
नई दिल्ली: अगर आप WhatsApp Web या WhatsApp Desktop का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा एजेंसी CyberDost (I4C) ने व्हाट्सऐप यूजर्स को एक नए और खतरनाक साइबर स्कैम को लेकर चेतावनी जारी की है। इस नए फ्रॉड में हैकर्स फर्जी डॉक्यूमेंट, फोटो या जरूरी फाइल का झांसा देकर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही आपका सिस्टम और व्हाट्सऐप सेशन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला खासतौर पर उन लोगों को निशाना बना रहा है जो लैपटॉप या कंप्यूटर पर WhatsApp Web या Desktop App का उपयोग करते हैं। क्या है नया WhatsApp Scam? साइबर अपराधी अनजान नंबरों से यूजर्स को PDF, फोटो, इनवॉइस, रिज्यूमे, ऑफिस डॉक्यूमेंट या अन्य जरूरी फाइल का नाम देकर .exe और .dll जैसी एक्सिक्यूटेबल फाइलें भेज रहे हैं। पहली नजर में ये फाइलें सामान्य डॉक्यूमेंट जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन इन्हें डाउनलोड कर ओपन करते ही इनमें मौजूद खतरनाक कोड एक्टिव हो जाता है। इसके बाद हमलावर आपके सिस्टम और WhatsApp सेशन तक पहुंच बना सकते हैं। कैसे काम करता है यह साइबर फ्रॉड? स्कैमर्स बेहद चालाकी से यूजर्स को फंसाते हैं। अनजान नंबर से फर्जी डॉक्यूमेंट या फोटो भेजते हैं। फाइल का नाम इस तरह रखा जाता है कि वह असली लगे। फाइल डाउनलोड और ओपन करते ही सिस्टम में मैलवेयर एक्टिव हो सकता है। इसके बाद हमलावर WhatsApp Web या Desktop Session पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। चैट हिस्ट्री, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच बनाई जा सकती है। कई मामलों में अपराधी आपके अकाउंट से आपके दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज भेजकर पैसों की ठगी भी करते हैं। किन फाइलों से सबसे ज्यादा खतरा? Cyber सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इन फाइल एक्सटेंशन से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। .exe .dll .zip .bat यदि किसी फाइल का नाम document.pdf.exe या photo.jpg.exe जैसा दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी डाउनलोड या ओपन न करें। कई बार फाइल का असली एक्सटेंशन छिपा होता है, जिससे यूजर धोखा खा जाता है। खुद को ऐसे रखें सुरक्षित साइबर हमलों से बचने के लिए इन बातों का हमेशा ध्यान रखें। किसी भी अनजान नंबर से आई फाइल डाउनलोड न करें। फाइल का पूरा नाम और एक्सटेंशन जरूर जांचें। WhatsApp के Linked Devices सेक्शन को नियमित रूप से चेक करें। कोई अनजान डिवाइस दिखाई दे तो तुरंत Log Out करें। अपने WhatsApp पर Two-Step Verification (2FA) हमेशा चालू रखें। कंप्यूटर और एंटीवायरस को नियमित रूप से अपडेट रखें। संदिग्ध फाइल मिलने पर उसे तुरंत डिलीट करें और भेजने वाले नंबर को ब्लॉक करें। अगर ठगी का शिकार हो जाएं तो क्या करें? यदि आपको लगता है कि आपका WhatsApp या सिस्टम हैक हो गया है, तो तुरंत कार्रवाई करें। सभी Linked Devices से लॉग आउट करें। WhatsApp का Two-Step Verification सक्रिय करें। अपने महत्वपूर्ण पासवर्ड बदलें। तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें। cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
तमिलनाडु स्थित देश के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ा एक बड़ा साइबर सुरक्षा मामला सामने आया है. दावा किया गया है कि रैंसमवेयर समूह 'वर्ल्ड लीक्स' ने संयंत्र से संबंधित 19 हजार से अधिक संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर लीक कर दिए हैं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह डेटा सीधे परमाणु संयंत्र के मुख्य सिस्टम से नहीं, बल्कि उसके थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर प्रदाता योट्टा के सर्वर से चोरी किया गया है. मामले की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं. 14.3 जीबी डेटा लीक होने का दावा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, डार्क वेब पर उपलब्ध कराए गए डेटा का आकार करीब 14.3 जीबी बताया जा रहा है. इसमें यूनिट-3 और यूनिट-4 से जुड़े इंजीनियरिंग ब्लूप्रिंट, वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम के लेआउट, निरीक्षण रिपोर्ट तथा उपकरण आपूर्तिकर्ताओं की सूची जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल होने का दावा किया गया है. बताया जा रहा है कि यह डेटा 11 जून से ऑनलाइन उपलब्ध है. थर्ड-पार्टी सर्वर बना निशाना प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि साइबर हमला सीधे परमाणु संयंत्र के ऑपरेशनल नेटवर्क पर नहीं, बल्कि उससे जुड़े थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर प्रदाता योट्टा के सर्वर पर हुआ. संबंधित कंपनी ने भी सर्वर पर संदिग्ध गतिविधियों की आंशिक पुष्टि की है. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने मामले की जांच तेज कर दी है. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण परमाणु परियोजनाओं में शामिल है. यहां यूनिट-3 और यूनिट-4 का निर्माण कार्य जारी है, जिनके 2027 तक चालू होने की संभावना है. ऐसे में इन परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी दस्तावेजों के कथित लीक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है. जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां सुरक्षा एजेंसियां सर्वर लॉग, डेटा एक्सेस रिकॉर्ड और साइबर गतिविधियों की विस्तृत जांच कर रही हैं. फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि डेटा किस तरह चोरी हुआ, कितनी जानकारी वास्तव में लीक हुई और इससे सुरक्षा व्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ सकता है. मामले को लेकर संबंधित एजेंसियों की निगरानी लगातार जारी है.
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। रक्षा साझेदारी को मिलेगा नया आयाम शिखर वार्ता के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की है। इसके तहत रक्षा संबंधों को और व्यावहारिक बनाया जाएगा तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। समझौते के तहत नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा मामलों पर रणनीतिक परामर्श और दोनों सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी (साझा संचालन क्षमता) को मजबूत करने पर सहमति बनी है। परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ेगा सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है। दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन के विकास पर मिलकर काम करेंगे। दोनों नेताओं ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन भविष्य की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ होंगे। समुद्री सुरक्षा और साइबर क्षेत्र पर भी जोर बैठक में हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंथनी अल्बनीज ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में नई साझेदारियों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद, सहयोग और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाकर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता को नई दिशा दी जा सकती है।
हाल ही में आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया— "Reverse Ageing With Your Breath!"। इसके बाद सुदर्शन क्रिया (Sudarshan Kriya) एक बार फिर चर्चा में आ गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उम्र को वास्तव में पीछे नहीं ले जाती, लेकिन तनाव कम करके स्वस्थ जीवन और बेहतर उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) में सहायक हो सकती है। क्या है सुदर्शन क्रिया? सुदर्शन क्रिया एक विशेष लयबद्ध श्वास (Rhythmic Breathing) तकनीक है, जिसे श्री श्री रविशंकर ने वर्ष 1981 में विकसित किया था। इस अभ्यास में धीमी, मध्यम और तेज गति से सांस लेने की निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस तकनीक को प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा सिखाया जाता है और इसका उद्देश्य शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करना माना जाता है। सांस और भावनाओं का क्या है संबंध? श्री श्री रविशंकर के अनुसार, हर भावना का संबंध सांस लेने के तरीके से होता है। तनाव, चिंता और गुस्से की स्थिति में सांस तेज और छोटी हो जाती है, जबकि शांत मन की अवस्था में सांस स्वतः गहरी और धीमी होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर माना जाता है कि यदि सांसों की गति को नियंत्रित किया जाए, तो मानसिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तनाव का उम्र बढ़ने से क्या संबंध है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला तनाव (Chronic Stress) केवल मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लगातार तनाव रहने से— नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है। शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है। उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ सकता है। हृदय और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। शरीर की जैविक उम्र (Biological Ageing) पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में तनाव कम करने वाली तकनीकें शरीर को बेहतर तरीके से रिकवर करने में मदद कर सकती हैं। शोध क्या कहते हैं? अब तक हुए कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सुदर्शन क्रिया से: तनाव और चिंता कम हो सकती है। मूड बेहतर हो सकता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। भावनात्मक संतुलन मजबूत हो सकता है। समग्र मानसिक स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके दीर्घकालिक प्रभावों को पूरी तरह समझने के लिए बड़े स्तर पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। क्या सुदर्शन क्रिया वास्तव में उम्र कम कर सकती है? विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि सुदर्शन क्रिया या कोई भी ब्रीदिंग तकनीक वास्तविक (Chronological) उम्र को कम या उल्टा कर सकती है। लेकिन नियमित श्वास अभ्यास तनाव कम करने, मानसिक शांति बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मददगार हो सकता है। यही कारण है कि इसे स्वस्थ उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) का एक सहायक अभ्यास माना जा रहा है। बेहतर उम्रदराज़ी के लिए क्या जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए केवल ब्रीदिंग एक्सरसाइज ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ इन बातों का पालन भी जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक भोजन नियमित व्यायाम पर्याप्त और अच्छी नींद तनाव का प्रभावी प्रबंधन सकारात्मक सामाजिक संबंध नियमित स्वास्थ्य जांच सुदर्शन क्रिया इन आदतों के साथ मिलकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक भूमिका निभा सकती है।
नई दिल्ली: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी चिंता जताई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस मामले में Meta को विस्तृत जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का समय दिया है। पहले कंपनी से 6 जुलाई तक जवाब मांगा गया था, लेकिन अब तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। सरकार का कहना है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम से पहचान होने की सुविधा का गलत इस्तेमाल साइबर अपराधी कर सकते हैं। ऐसे में इस फीचर के सुरक्षा पहलुओं और संभावित जोखिमों पर स्पष्ट जानकारी मांगी गई है। क्या है WhatsApp का नया यूजरनेम फीचर? WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसा फीचर ला रहा है, जिसके तहत यूजर अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना दूसरे लोगों से चैट कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार— हर यूजर के लिए एक यूनिक यूजरनेम होगा। डिस्प्ले नेम और यूजरनेम अलग-अलग होंगे। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम प्रत्येक अकाउंट के लिए अलग होगा। इसका उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी को बेहतर बनाना है। सरकार को क्यों है चिंता? MeitY का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा तो इससे कानून-व्यवस्था और साइबर सुरक्षा से जुड़े नए खतरे पैदा हो सकते हैं। सरकार की प्रमुख चिंताएं हैं— अपराधी फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को निशाना बना सकते हैं। किसी की पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और साइबर अपराध को अंजाम देना आसान हो सकता है। फर्जी प्रोफाइल और तस्वीरों का दुरुपयोग बढ़ सकता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Meta से क्या जानकारी मांगी गई है? सरकार ने Meta से यूजरनेम फीचर के कई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें शामिल हैं— फीचर का तकनीकी ढांचा। यूजर की पहचान सत्यापित करने की प्रक्रिया। फर्जी अकाउंट और दुरुपयोग रोकने के उपाय। साइबर अपराध की स्थिति में जांच एजेंसियों को मिलने वाली सहायता। प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की व्यवस्था। फिलहाल फीचर लागू न करने की सलाह सरकार ने Meta से कहा है कि जब तक इस फीचर पर समीक्षा और आवश्यक चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से बचा जाए। सरकार पहले यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नया फीचर उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी प्रभावी समाधान उपलब्ध कराए। अब इस मामले में सभी की नजर Meta के जवाब पर है, जिसे कंपनी को 9 जुलाई तक केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रस्तावित और मौजूदा 'यूजरनेम फीचर' को लेकर सख्त रुख अपनाया है। WhatsApp को नोटिस जारी करने के बाद अब सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Telegram और Signal को भी नोटिस भेजकर उनके यूजरनेम सिस्टम और उससे जुड़े सुरक्षा उपायों पर जवाब मांगा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली धोखाधड़ी, फर्जी पहचान (Impersonation) और साइबर अपराधों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं। Telegram और Signal से मांगा जवाब सरकार ने नोटिस में पूछा है कि दोनों प्लेटफॉर्म अपने यूजरनेम फीचर को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क देते हैं और यह फीचर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस तरह काम करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, Telegram को भेजे गए नोटिस में सरकार ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि उसे यूजरनेम फीचर बनाए रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि Telegram और Signal पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है, जिससे बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी यूजर्स एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं। WhatsApp को भी भेजा गया था नोटिस इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा था कि जब तक इस विषय पर विस्तृत चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च नहीं किया जाए। सरकार की चिंता है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम आधारित पहचान से ऑनलाइन ठगी, फर्जी प्रोफाइल और पहचान छिपाकर अपराध करने के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। आईटी नियमों के तहत मांगा जवाब सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि प्रस्तावित फीचर को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। नोटिस में कहा गया है कि यदि यह फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना लागू किया जाता है, तो इससे साइबर अपराध और ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है। WhatsApp ने किया फीचर का बचाव WhatsApp ने सरकार की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रस्तावित यूजरनेम फीचर में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। कंपनी का दावा है कि इसमें फर्जी पहचान, प्रतिरूपण (Impersonation) और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय पहले से शामिल किए गए हैं। भारत है सबसे बड़ा बाजार भारत WhatsApp के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। देश में WhatsApp के करीब 50 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। वहीं, Telegram और Signal के भी लाखों सक्रिय यूजर्स हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन पहचान और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर रोक लगाए जाने के बाद स्वदेशी टेक कंपनी Zoho ने भी बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने घोषणा की है कि उनका मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Arattai भी यूजरनेम आधारित अकाउंट फीचर को बंद करेगा। इस कदम के साथ Arattai सरकार के निर्देशों का समर्थन करने वाला पहला भारतीय मैसेजिंग ऐप बन गया है। श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के नए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए Arattai में यूजरनेम आधारित अकाउंट की सुविधा समाप्त की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बदलाव कब तक लागू होगा, लेकिन स्पष्ट किया कि कंपनी नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन करेगी। पहले से मौजूद था यूजरनेम फीचर Arattai में यूजरनेम के आधार पर अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने की सुविधा पहले से उपलब्ध थी। इस फीचर के जरिए यूजर बिना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से जुड़ सकते थे। लेकिन अब कंपनी इसे चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी कर रही है। वेम्बु के इस फैसले को भारत सरकार की डिजिटल सुरक्षा और साइबर फ्रॉड रोकने की नीति के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। WhatsApp को सरकार ने क्यों रोका? हाल ही में Meta ने WhatsApp के लिए यूजरनेम फीचर पेश करने की घोषणा की थी। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना चैट करने की सुविधा देना था। कंपनी का दावा था कि इससे प्राइवेसी और सुरक्षा बेहतर होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फीचर को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं जताईं। सरकार का मानना है कि यदि यूजरनेम सिस्टम बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू किया गया, तो साइबर अपराधी बैंक, सरकारी संस्थानों, कंपनियों और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम से फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। इससे फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन स्कैम जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। Meta से मांगी गई तकनीकी जानकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta से इस फीचर की विस्तृत तकनीकी जानकारी मांगी है। इसमें यूजरनेम सिस्टम का आर्किटेक्चर, सुरक्षा व्यवस्था, पहचान सत्यापन और धोखाधड़ी रोकने के उपायों की जानकारी शामिल है। जब तक सरकार और Meta के बीच इस विषय पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के रोलआउट पर रोक रहेगी। Meta ने क्या दी सफाई? Meta का कहना है कि उसने कई महत्वपूर्ण यूजरनेम पहले से ही सुरक्षित (Reserved) रखे हैं। इनमें सरकारी संस्थान, प्रमुख कंपनियां, मशहूर हस्तियां और Meta Verified अकाउंट शामिल हैं। यदि कोई सामान्य यूजर ऐसे नाम से यूजरनेम बनाने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे बताएगा कि वह नाम उपलब्ध नहीं है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी अकाउंट और पहचान की चोरी को रोकना है। डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ा फोकस WhatsApp और Arattai से जुड़े हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन से जुड़े नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। सरकार चाहती है कि नए फीचर्स लॉन्च करने से पहले कंपनियां पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर इस फीचर के रोलआउट पर सवाल उठाए हैं और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके सभी सुरक्षा संबंधी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। नोटिस में क्या कहा गया? सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान वाले साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है। नोटिस के अनुसार, यदि लोग केवल यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेंगे, तो साइबर अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाकर लोगों को निशाना बनाना अधिक आसान हो जाएगा। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी सरकार ने मेटा से पूछा है कि जब कंपनी को इस फीचर से संभावित साइबर अपराधों का अंदेशा है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मेटा को इस संबंध में लिखित और विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। सरकार की प्रमुख चिंताएं सरकार ने नोटिस में कई संभावित जोखिमों का उल्लेख किया है। डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन स्कैम: सरकार का मानना है कि बिना फोन नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क की सुविधा मिलने पर साइबर अपराधियों के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है। फर्जी पहचान का खतरा: धोखेबाज किसी व्यक्ति, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल: आशंका जताई गई है कि अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर सकते हैं। यूजरनेम फीचर क्या है? WhatsApp जिस फीचर पर काम कर रहा है, उसके तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर के बजाय एक यूजरनेम के जरिए दूसरों से जुड़ सकेंगे। इससे फोन नंबर साझा किए बिना बातचीत करने का विकल्प मिलेगा। यह सुविधा पहले से कई अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। भारत सरकार का मानना है कि इस फीचर को लागू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय और पहचान सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। फिलहाल मेटा की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के जवाब की समीक्षा के बाद ही भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।
जामताड़ा, एजेंसियां। साइबर अपराध के लिए बदनाम जामताड़ा से ठगी का एक और नया तरीका सामने आया है। पुलिस ने तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कैशबैक ऑफर और फर्जी बैंक कॉल के जरिए लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे थे। आरोपियों के खुलासों ने साइबर ठगी के नए और खतरनाक तरीकों की जानकारी दी है। गिरिडीह के साइबर डीएसपी अमित रविदास ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर करमाटाड़ थाना क्षेत्र में छापेमारी कर समीम अंसारी (24), कैफ अंसारी (19) और मुस्तकीम अंसारी (38) को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान उनके पास से छह मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। कैशबैक ऑफर के नाम पर ठगी पुलिस पूछताछ में सामने आया कि समीम और कैफ अंसारी ‘Ease My Deal’ नामक ऐप का इस्तेमाल कर लोगों के PhonePe खातों पर ₹1999 कैशबैक का आकर्षक संदेश भेजते थे। संदेश देखकर कई लोग इसे असली ऑफर समझकर लिंक पर क्लिक कर देते थे। जैसे ही पीड़ित लिंक पर क्लिक करता, उसके खाते से रकम ट्रांसफर हो जाती। ठग इस पैसे से ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड खरीदते और बाद में उन्हें कमीशन पर बेचकर नकदी हासिल करते थे। पुलिस का कहना है कि यह तरीका तेजी से लोगों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। फर्जी SBI अधिकारी बनकर करता था कॉल गिरफ्तार तीसरा आरोपी मुस्तकीम अंसारी खुद को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करता था। वह पीड़ितों को डराता था कि उनका क्रेडिट कार्ड जल्द बंद होने वाला है और उसे चालू रखने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद वह मोबाइल में एक APK फाइल डाउनलोड करवाता था। यह फाइल जासूसी सॉफ्टवेयर की तरह काम करती थी और इंस्टॉल होते ही कार्ड नंबर, ओटीपी तथा अन्य गोपनीय जानकारियां अपराधियों तक पहुंच जाती थीं। इसके बाद खाते से रकम निकाल ली जाती थी। पुराने नेटवर्क की तलाश में पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मुस्तकीम अंसारी पहले भी साइबर ठगी के मामलों में शामिल रह चुका है। पुलिस अब उसके पुराने नेटवर्क, सहयोगियों और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कैशबैक लिंक, अज्ञात ऐप या APK फाइल पर भरोसा न करें और बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया के सबसे प्रभावशाली खुफिया गठबंधनों में से एक Five Eyes intelligence alliance ने गंभीर चेतावनी जारी की है। गठबंधन का कहना है कि AI की अगली पीढ़ी के मॉडल आने वाले कुछ ही महीनों में वैश्विक साइबर सुरक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकते हैं। इससे साइबर हमलों की रफ्तार, दायरा और जटिलता कई गुना बढ़ सकती है। फाइव आइज की निगरानी संस्था FIORC (Five Eyes Intelligence Oversight and Review Council) ने सरकारों, व्यवसायों और कॉर्पोरेट नेतृत्व से अपील की है कि वे साइबर सुरक्षा और साइबर रेजिलिएंस (Cyber Resilience) को तत्काल प्राथमिकता दें। AI बढ़ाएगा साइबर हमलों का खतरा संयुक्त बयान में कहा गया है कि "फ्रंटियर AI सिस्टम" मौजूदा उद्योग की अपेक्षाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली साबित हो सकते हैं और साइबर हमलों तथा उनके बचाव दोनों में बुनियादी बदलाव ला सकते हैं। यह बदलाव वर्षों में नहीं, बल्कि कुछ महीनों में देखने को मिल सकता है। गठबंधन के अनुसार, AI किसी डिजिटल कमजोरी की पहचान होने और साइबर अपराधियों द्वारा उसका फायदा उठाने के बीच के समय को तेजी से कम कर रहा है, जिससे साइबर खतरों का जोखिम बढ़ रहा है। अमेरिकी फैसले के बाद जारी हुई चेतावनी यह बयान उस समय आया है, जब अमेरिका ने Anthropic द्वारा विकसित कुछ उन्नत AI सिस्टम तक विदेशी नागरिकों की पहुंच सीमित करने का फैसला किया है। यह कदम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर उठाया गया है। फाइव आइज ने अपने बयान में किसी विशेष कंपनी या AI मॉडल का नाम नहीं लिया, लेकिन उसने स्पष्ट संकेत दिया कि अत्याधुनिक AI मॉडल वैश्विक साइबर सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। केवल खतरा नहीं, सुरक्षा का अवसर भी फाइव आइज ने यह भी स्वीकार किया कि AI साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शक्तिशाली उपकरण भी उपलब्ध करा सकता है। संगठन का कहना है कि यदि AI का उपयोग रणनीतिक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से किया जाए तो यह साइबर हमलों की पहचान, निगरानी और प्रतिक्रिया को पहले से अधिक प्रभावी बना सकता है। नेताओं को दी ये सलाह गठबंधन ने कंपनियों के बोर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों से कहा है कि वे: साइबर जोखिम को केवल तकनीकी समस्या न मानें। साइबर सुरक्षा को व्यापारिक जोखिम और नेतृत्व की जिम्मेदारी के रूप में देखें। सुरक्षा टीमों को पर्याप्त संसाधन और अधिकार दें। बदलते AI-आधारित खतरों के अनुसार अपनी रणनीतियों को लगातार अपडेट करें। सुरक्षा उपायों का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण करें। 'AI भविष्य नहीं, वर्तमान की चुनौती' बयान में कहा गया, "AI भविष्य की तकनीक नहीं है, यह पहले से मौजूद है। फ्रंटियर AI के तेजी से विकास का अर्थ है कि साइबर जोखिमों को लेकर हमारी धारणाएं वर्षों नहीं, बल्कि महीनों में पुरानी पड़ सकती हैं।" फाइव आइज ने चेतावनी दी कि दुनिया को बदलते साइबर खतरों का सामना करने के लिए अभी से तैयार होना होगा, क्योंकि AI आने वाले समय में वैश्विक डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नया रूप देने जा रहा है।
ICANN Domestic Root Servers: डिजिटल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने वैश्विक इंटरनेट संस्था ICANN (Internet Corporation for Assigned Names and Numbers) से भारत में मुख्य रूट सर्वर स्थापित करने की मांग की है। इस कदम का उद्देश्य देश की इंटरनेट सुरक्षा को मजबूत करना और विदेशी नेटवर्क पर निर्भरता को कम करना है। भारत ने क्यों उठाई रूट सर्वर की मांग? इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार वाले देशों में शामिल भारत के पास अपना मजबूत और सुरक्षित इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। उनका मानना है कि घरेलू रूट सर्वर से देश की डिजिटल संप्रभुता को और मजबूती मिलेगी। क्या होते हैं रूट सर्वर? रूट सर्वर इंटरनेट की बुनियादी संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। जब कोई यूजर किसी वेबसाइट को खोलता है या ईमेल भेजता है, तो डोमेन नेम सिस्टम (DNS) के जरिए रूट सर्वर उस वेबसाइट का सही पता खोजने में मदद करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो रूट सर्वर इंटरनेट की "डायरेक्टरी" की तरह काम करते हैं, जो यूजर्स को सही वेबसाइट तक पहुंचाने में सहायता करते हैं। फिलहाल कहां मौजूद हैं ये सर्वर? वर्तमान में ICANN के नेटवर्क से जुड़े प्रमुख रूट सर्वरों की मौजूदगी अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर, मिस्र और केन्या जैसे देशों में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और ICANN के बीच इस विषय पर बातचीत जारी है। बताया जा रहा है कि भारत को सभी 13 मुख्य रूट सर्वरों को मिरर करने वाले करीब 18 सर्वरों का एक पूरा क्लस्टर मिल सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल और लंबी मानी जा रही है। क्या होंगे इसके फायदे? यदि भारत में रूट सर्वर स्थापित होते हैं, तो इसके कई महत्वपूर्ण लाभ सामने आ सकते हैं: इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी। साइबर हमलों और मैलवेयर खतरों से निपटने में तेजी आएगी। इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के स्तर पर ही संभावित खतरों को रोका जा सकेगा। देश के महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी। तकनीकी निवेश और डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा। भारत डिजिटल रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा। वैश्विक स्तर पर संतुलित इंटरनेट ढांचे की जरूरत रिपोर्ट्स के मुताबिक, सचिव एस. कृष्णन ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इंटरनेट का बुनियादी ढांचा दुनिया भर में संतुलित तरीके से वितरित होना चाहिए। उनका मानना है कि भारत में रूट सर्वर स्थापित होने से न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि तकनीकी नवाचार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो इसे भारत की डिजिटल संप्रभुता और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा सकता है।
नई दिल्ली: देश में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को तकनीक के जरिए और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को 'अभिज्ञान (Abhigyan) ऐप' लॉन्च किया, जो पुलिसकर्मियों को रियल टाइम में संदिग्धों की पहचान करने और उनके आपराधिक रिकॉर्ड तक तुरंत पहुंचने की सुविधा देगा। यह नया सिस्टम राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा विकसित किया गया है और इसे देश के विशाल फिंगरप्रिंट डेटाबेस NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) से जोड़ा गया है। अंगूठे का निशान लगाते ही सामने आएगा पूरा रिकॉर्ड अभिज्ञान ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पुलिसकर्मी अब किसी संदिग्ध व्यक्ति के फिंगरप्रिंट लेकर सीधे अपने स्मार्टफोन पर उसका आपराधिक इतिहास जांच सकेंगे। इसके लिए व्यक्ति को थाने ले जाने की जरूरत नहीं होगी। यह सिस्टम करीब 1.3 करोड़ आरोपियों, दोषियों और संदिग्धों के राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा हुआ है, जिससे कुछ ही सेकंड में जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। सड़क पर ही हो सकेगी जांच नई तकनीक के जरिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सड़क पर, चेकिंग के दौरान या किसी अभियान में मौके पर ही बायोमेट्रिक सत्यापन कर सकेंगी। डेमो के दौरान यह दिखाया गया कि फिंगरप्रिंट का मिलान मात्र 35 सेकंड में हो जाता है। इससे फरार अपराधियों और वांटेड आरोपियों की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से की जा सकेगी। पहले सिर्फ थानों तक सीमित थी सुविधा अब तक फिंगरप्रिंट मिलान की सुविधा देशभर के पुलिस थानों और जिला मुख्यालयों में स्थापित लगभग 1,556 वर्कस्टेशनों तक सीमित थी। किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट की जांच के लिए उसे संबंधित केंद्र तक ले जाना पड़ता था। अभिज्ञान ऐप आने के बाद यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल आधारित और रियल टाइम हो जाएगी। इसके अलावा ऐप में टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा व्यवस्था भी दी गई है। NAFIS डेटाबेस में मौजूद हैं लाखों अपराधियों के रिकॉर्ड राष्ट्रीय फिंगरप्रिंट डेटाबेस में विभिन्न प्रकार के अपराधों से जुड़े लाखों रिकॉर्ड मौजूद हैं। इनमें नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और जेल रिकॉर्ड से संबंधित बड़ी संख्या में डेटा शामिल है। टेक्नोलॉजी से अपराधियों को सजा दिलाने पर जोर अभिज्ञान ऐप लॉन्च करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केवल अपराधियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध तरीके से उन्हें सजा दिलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि फिंगरप्रिंट, डीएनए, मोबाइल टावर डेटा, फेस रिकॉग्निशन और आईरिस स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने से मजबूत चार्जशीट तैयार करने और अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने में मदद मिलेगी। यह पहल देश की पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
डिजिटल दुनिया में साइबर हमलों के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब एक नया खतरा सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का कारण बन गया है। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने “Kali365” नाम के एक खतरनाक फिशिंग प्लेटफॉर्म को लेकर चेतावनी जारी की है। यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से Microsoft 365 यूजर्स को निशाना बना रहा है और सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह पारंपरिक मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सुरक्षा को भी बायपास करने में सक्षम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस हमले को अंजाम देने के लिए किसी व्यक्ति का साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ होना भी जरूरी नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह तैयार फिशिंग टूल्स के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। क्या है Kali365? Kali365 एक “फिशिंग-एज-ए-सर्विस” (PhaaS) प्लेटफॉर्म है, जिसे साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। यह सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल पर काम करता है और हमलावरों को फिशिंग अभियान चलाने के लिए तैयार टूल्स उपलब्ध कराता है। इस प्लेटफॉर्म में कई उन्नत सुविधाएं शामिल हैं, जैसे: एआई आधारित ईमेल टेम्पलेट्स ऑटोमेटेड फिशिंग कैंपेन रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम संभावित शिकारों की निगरानी इन सुविधाओं की मदद से साइबर हमले पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावी और आसान हो गए हैं। कैसे काम करता है यह हमला? Kali365 पारंपरिक फिशिंग तकनीकों से थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। यूजर्स को ऐसा ईमेल भेजा जाता है जो किसी भरोसेमंद क्लाउड सर्विस या डॉक्यूमेंट शेयरिंग प्लेटफॉर्म जैसा दिखाई देता है। ईमेल में एक डिवाइस कोड दिया जाता है और यूजर को Microsoft लॉगिन पेज पर जाकर उसे दर्ज करने के लिए कहा जाता है। जब यूजर ऐसा करता है, तो वह अनजाने में हमलावर के डिवाइस को अपने अकाउंट तक पहुंच की अनुमति दे देता है। इसके बाद हमलावर OAuth टोकन हासिल कर लेते हैं और Outlook, Teams, OneDrive जैसी सेवाओं तक पहुंच बना सकते हैं, वह भी बिना दोबारा पासवर्ड या MFA की आवश्यकता के। MFA होने के बावजूद क्यों खतरनाक है यह हमला? आमतौर पर लोग मानते हैं कि मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन उनके अकाउंट को पूरी तरह सुरक्षित बना देता है, लेकिन Kali365 सीधे पासवर्ड चुराने की बजाय OAuth टोकन को निशाना बनाता है। इसी कारण कई मामलों में पासवर्ड बदलने के बाद भी हमलावर अकाउंट तक पहुंच बनाए रख सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे हमलों की पहचान करना पारंपरिक फिशिंग की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो सकता है। FBI ने यूजर्स को क्या सलाह दी? FBI ने Microsoft 365 उपयोगकर्ताओं और संगठनों को अपनी सुरक्षा सेटिंग्स की समीक्षा करने की सलाह दी है। एजेंसी ने कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सिफारिश की है: डिवाइस कोड आधारित ऑथेंटिकेशन को सीमित करें। Conditional Access Policy लागू करें। लॉगिन गतिविधियों की नियमित निगरानी करें। संदिग्ध ईमेल और अनजान डिवाइस लॉगिन पर नजर रखें। असामान्य अकाउंट गतिविधियों को तुरंत जांचें। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और नियमित सुरक्षा ऑडिट ही ऐसे हमलों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। साइबर अपराध का नया बिजनेस मॉडल बन रहा है PhaaS Kali365 का मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि साइबर अपराध अब एक संगठित उद्योग का रूप ले रहा है। “Phishing-as-a-Service” मॉडल के तहत जटिल हैकिंग टूल्स को आसान सब्सक्रिप्शन सेवाओं में बदला जा रहा है। इससे कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी बड़े स्तर पर साइबर हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पहचान आधारित साइबर हमलों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
आज के डिजिटल दौर में WhatsApp हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग अलर्ट से लेकर निजी बातचीत तक, लगभग हर जरूरी जानकारी इसी प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहती है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp अकाउंट हैक हो जाए, तो यह बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस की IFSO (Intelligence Fusion and Strategic Operations) यूनिट के जॉइंट सीपी रजनीश गुप्ता ने एक वीडियो के जरिए हैक हुए WhatsApp अकाउंट को वापस पाने का तरीका बताया है। क्यों जरूरी है ##21# कोड? दिल्ली पुलिस के अनुसार, अगर किसी हैकर ने कॉल या मैसेज फॉरवर्डिंग के जरिए आपके OTP अपने डिवाइस पर प्राप्त करने की व्यवस्था कर रखी है, तो सबसे पहले उस फॉरवर्डिंग को बंद करना जरूरी है। इसके लिए अपने फोन में: ##21# डायल करने की सलाह दी गई है। यह USSD कोड कई मामलों में सक्रिय कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग्स को बंद करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अलग-अलग ऑपरेटर और डिवाइस के अनुसार इसका प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए इसे सुरक्षा के अतिरिक्त कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। WhatsApp अकाउंट वापस पाने के लिए अपनाएं ये स्टेप्स 1. सबसे पहले ##21# डायल करें इससे संभावित कॉल या मैसेज फॉरवर्डिंग बंद हो सकती है और OTP गलत व्यक्ति तक पहुंचने का खतरा कम हो सकता है। 2. Meta के शिकायत फॉर्म पर जाएं WhatsApp सपोर्ट फॉर्म खोलें। 3. "Are you a law enforcement officer?" पर "No" चुनें 4. अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें देश के कोड के साथ अपना WhatsApp नंबर दो बार भरें। 5. "My account has been hacked" विकल्प चुनें 6. समस्या का विवरण लिखें बताएं कि आपका अकाउंट हैक हो गया है और आप लॉगिन नहीं कर पा रहे हैं। 7. अपना नाम और ईमेल आईडी भरें 8. Electronic Signature में अपना नाम दर्ज कर फॉर्म सबमिट करें इसके बाद क्या होगा? फॉर्म सबमिट करने के बाद Meta आपकी शिकायत की समीक्षा करेगा। सत्यापन पूरा होने पर हैकर के डिवाइस से आपका WhatsApp अकाउंट लॉगआउट किया जा सकता है। इसके बाद आप OTP की मदद से दोबारा अपने अकाउंट में लॉगिन कर सकेंगे। Facebook और Instagram के लिए भी उपलब्ध है सुविधा अगर आपका Facebook या Instagram अकाउंट हैक हो गया है, तो Meta इन प्लेटफॉर्म्स के लिए भी अलग रिकवरी फॉर्म उपलब्ध कराता है। सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान WhatsApp में टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर ऑन करें। किसी के साथ OTP साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत सतर्क हो जाएं। अपने ईमेल अकाउंट की सुरक्षा भी मजबूत रखें।
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकिंग, यूपीआई, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपने मोबाइल नंबर बदल लिया है, लेकिन अपने जरूरी अकाउंट्स में नया नंबर अपडेट नहीं किया, तो यह एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकता है। दरअसल, टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय तक बंद पड़े नंबरों को स्थायी रूप से निष्क्रिय नहीं रखतीं। निर्धारित अवधि के बाद वही नंबर किसी नए ग्राहक को जारी कर दिया जाता है। ऐसे में आपका पुराना नंबर किसी और के पास पहुंच सकता है और इससे आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। पुराना नंबर किसी और को मिलने पर क्या हो सकता है? अगर आपके बैंक खाते, ईमेल, यूपीआई ऐप या सोशल मीडिया प्रोफाइल अभी भी पुराने नंबर से जुड़े हुए हैं, तो नए नंबर धारक को आपके लिए आने वाले OTP, पासवर्ड रीसेट लिंक और अन्य महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त हो सकते हैं। इससे कोई व्यक्ति आपके अकाउंट तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है और आपकी संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी बन सकता है जोखिम अधिकांश लोग अकाउंट सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करते हैं। इसमें लॉगिन के समय मोबाइल नंबर पर एक सुरक्षा कोड भेजा जाता है। लेकिन अगर वह नंबर अब आपके पास नहीं है और किसी दूसरे व्यक्ति को जारी हो चुका है, तो वही कोड उसके मोबाइल पर पहुंच सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल SMS आधारित सुरक्षा पर निर्भर रहना अब पहले जितना सुरक्षित नहीं माना जाता। अकाउंट हैकिंग का बढ़ रहा खतरा हर साल दुनिया भर में लाखों मोबाइल नंबर दोबारा जारी किए जाते हैं। ऐसे में पुराने नंबरों से जुड़े अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास आपका पुराना नंबर पहुंच गया और उसने आपके ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की, तो जरूरी सुरक्षा संदेश उसी के फोन पर जा सकते हैं। नंबर बदलने के बाद तुरंत करें ये काम यदि आपने हाल ही में नया मोबाइल नंबर लिया है, तो इन प्लेटफॉर्म पर तुरंत नंबर अपडेट करें— बैंक खाते और नेट बैंकिंग सेवाएं यूपीआई और डिजिटल पेमेंट ऐप्स ईमेल अकाउंट व्हाट्सऐप इंस्टाग्राम फेसबुक अन्य जरूरी ऑनलाइन सेवाएं ध्यान रखें कि केवल नया नंबर जोड़ना काफी नहीं है। पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है। SMS OTP के बजाय अपनाएं सुरक्षित विकल्प साइबर विशेषज्ञ अब ऑथेंटिकेटर ऐप्स के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। ये ऐप मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं होते और डिवाइस के भीतर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं। इसके साथ ही अकाउंट रिकवरी सेटिंग्स की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि कई बार पुराना नंबर बैकअप संपर्क के रूप में सेव रह जाता है। अभी जांच करना क्यों है जरूरी? मोबाइल नंबर का दोबारा आवंटन टेलीकॉम कंपनियों की सामान्य प्रक्रिया है और यह भविष्य में भी जारी रहेगी। इसलिए अगर आपने कभी नंबर बदला है, तो एक बार सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स की जांच जरूर करें। एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खाते, निजी जानकारी और सोशल मीडिया प्रोफाइल की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।