उन्होंने यह टिप्पणी साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक पॉडकास्ट में की।
सामान्य कंप्यूटर बिट (0 और 1) के आधार पर काम करते हैं, जहां एक समय में केवल एक स्थिति संभव होती है।
वहीं, क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट (Qubit) का उपयोग करते हैं। क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों के कारण क्यूबिट एक समय में कई संभावित अवस्थाओं में काम कर सकते हैं। इसी वजह से कुछ जटिल गणनाएं पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से की जा सकती हैं।
प्रोफेसर बेन-इजरायल के अनुसार, यदि भविष्य में पर्याप्त क्षमता वाले क्वांटम कंप्यूटर विकसित हो जाते हैं, तो वे आज उपयोग में आने वाले कई एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म को बहुत तेजी से तोड़ सकते हैं।
इसका असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है—
हालांकि, यह खतरा भविष्य में पूरी तरह विकसित क्वांटम कंप्यूटरों से जुड़ा है, न कि आज उपलब्ध सामान्य कंप्यूटरों से।
विशेषज्ञ की टिप्पणी भविष्य की संभावित क्षमता को दर्शाती है। व्यवहार में यह कई बातों पर निर्भर करेगा, जैसे—
इसलिए यह कहना कि हर पासवर्ड हर परिस्थिति में एक सेकंड में टूट जाएगा, तकनीकी रूप से एक सामान्यीकृत दावा होगा। हालांकि, मौजूदा एन्क्रिप्शन मानकों के लिए भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग एक गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
क्वांटम कंप्यूटर कुछ विशेष प्रकार की गणनाओं में पारंपरिक कंप्यूटरों से कहीं अधिक तेज हो सकते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक और तकनीकी कंपनियां इस तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं।
इनका उपयोग भविष्य में इन क्षेत्रों में भी हो सकता है—
प्रोफेसर बेन-इजरायल का मानना है कि पूरी तरह सक्षम क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने में अभी कई तकनीकी चुनौतियां बाकी हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
उनके अनुसार, ऐसी मशीनें बेहद बड़ी और महंगी होंगी तथा फिलहाल केवल चुनिंदा संस्थानों या बड़ी तकनीकी कंपनियों तक ही सीमित रहने की संभावना है।
संभावित क्वांटम खतरे को देखते हुए दुनिया भर की सरकारें और तकनीकी संस्थान पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (Post-Quantum Cryptography) पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसे नए एन्क्रिप्शन मानक विकसित करना है जो भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के सामने भी सुरक्षित रह सकें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारत का टेलीकॉम सेक्टर तेजी से डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रहा है। देश में 5G नेटवर्क अब लगभग पूरे भारत तक पहुंच चुका है और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों को भी 4G कनेक्टिविटी से जोड़ने का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2026 तक देश के 99.9% जिलों में 5G सेवाएं उपलब्ध हो चुकी हैं, जबकि 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशनों (BTS) की संख्या बढ़कर 5,62,971 हो गई है। तीन साल में चार गुना बढ़ा 5G नेटवर्क मार्च 2023 में देशभर में 5G BTS स्टेशनों की संख्या 1,40,623 थी। वहीं जून 2026 तक यह बढ़कर 5.62 लाख से अधिक हो गई। यह वृद्धि दिखाती है कि भारत ने बेहद कम समय में हाई-स्पीड इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया है, जिससे करोड़ों लोगों को तेज और बेहतर डिजिटल सेवाएं मिल रही हैं। गांव-गांव तक पहुंचा 4G डिजिटल भारत अभियान के तहत जून 2026 तक देशभर में करीब 24,000 नए 4G मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। इन टावरों का उद्देश्य उन ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना है, जहां पहले कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं तक ग्रामीण आबादी की पहुंच और मजबूत हुई है। 6G की तैयारी भी तेज भारत सिर्फ 5G तक सीमित नहीं है, बल्कि अगली पीढ़ी की तकनीक 6G की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। सरकार के Telecom Technology Development Fund (TTDF) के तहत 30 जून 2026 तक 136 अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 6G, क्वांटम कम्युनिकेशन, सैटेलाइट नेटवर्क, ऑप्टिकल सिस्टम, स्वदेशी 5G कोर और टेलीकॉम साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा, मार्च 2023 में जारी भारत 6G विजन के तहत देश को अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक में वैश्विक नेतृत्व दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही, घरेलू टेलीकॉम उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने के लिए Production Linked Incentive (PLI) योजना भी लागू की गई है। डिजिटल इंडिया को मिल रही नई रफ्तार 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों तक 4G पहुंचने से भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। इससे ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, स्मार्ट उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगला बड़ा लक्ष्य सिर्फ नेटवर्क का विस्तार नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, साइबर सुरक्षा और सभी नागरिकों के लिए किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा।
अगर आप Samsung Galaxy स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और अभी तक सिर्फ मैसेज टाइप करने के लिए ही डिफॉल्ट Samsung Keyboard का उपयोग कर रहे हैं, तो शायद आप इसके कई शानदार फीचर्स से अनजान हैं। सैमसंग ने अपने कीबोर्ड में ऐसे कई स्मार्ट टूल्स दिए हैं, जो टाइपिंग को तेज, आसान और अधिक सुविधाजनक बनाते हैं। चाहे लंबा ईमेल लिखना हो, अलग भाषा में चैट करनी हो या बिना ऐप बदले YouTube वीडियो शेयर करना हो, Samsung Keyboard के ये फीचर्स आपके रोजमर्रा के अनुभव को बेहतर बना सकते हैं। 1. स्पेसबार से करें Cursor Control लंबे मैसेज या ईमेल में किसी शब्द को एडिट करने के लिए बार-बार स्क्रीन पर टैप करना पड़ता है। Samsung Keyboard में यह काम बेहद आसान हो जाता है। बस स्पेसबार को दबाकर रखें और उंगली को दाएं या बाएं स्वाइप करें। इससे कर्सर आसानी से मूव होगा और आप बिल्कुल लैपटॉप के ट्रैकपैड की तरह टेक्स्ट एडिट कर सकेंगे। फायदा तेजी से टेक्स्ट एडिटिंग गलतियों को तुरंत सुधारना लंबी चैट या ईमेल में आसान नेविगेशन 2. इन-बिल्ट Translator से करें रियल-टाइम ट्रांसलेशन अगर आप किसी दूसरी भाषा बोलने वाले व्यक्ति से बातचीत कर रहे हैं, तो अलग से ट्रांसलेशन ऐप खोलने की जरूरत नहीं है। Samsung Keyboard में मौजूद Translate फीचर आपके लिखे हुए टेक्स्ट को रियल-टाइम में दूसरी भाषा में बदल देता है। कैसे करें इस्तेमाल? कीबोर्ड के ऊपर दिए गए Three Dots (⋮) पर टैप करें। Translate विकल्प चुनें। अपनी पसंद की भाषा सिलेक्ट करें। अब जो भी टाइप करेंगे, वह चुनी गई भाषा में ट्रांसलेट होकर भेजा जा सकेगा। 3. अपनी सुविधा के अनुसार बदलें Keyboard का Size हर व्यक्ति के हाथ और टाइपिंग का तरीका अलग होता है। Samsung Keyboard आपको कीबोर्ड का आकार और लेआउट बदलने की सुविधा भी देता है। आप चाहें तो कीबोर्ड को छोटा, बड़ा या स्क्रीन पर ऊपर-नीचे एडजस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा One-Handed Mode ऑन करके एक हाथ से भी आराम से टाइपिंग की जा सकती है। फायदा बड़े फोन में आसान टाइपिंग एक हाथ से आरामदायक इस्तेमाल बेहतर यूजर एक्सपीरियंस 4. चैट के दौरान सीधे शेयर करें YouTube और Spotify लिंक दोस्तों के साथ बातचीत करते समय अगर कोई वीडियो या गाना शेयर करना हो, तो ऐप बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। Samsung Keyboard के टूलबार में मौजूद YouTube और Spotify आइकन की मदद से आप सीधे कीबोर्ड के अंदर ही कंटेंट सर्च करके चैट में शेयर कर सकते हैं। फायदा ऐप बदलने की जरूरत नहीं तेजी से वीडियो और गाने शेयर करें चैटिंग का अनुभव होगा और आसान 5. Swipe Delete से एक झटके में हटाएं पूरा टेक्स्ट अगर आपने गलती से लंबा वाक्य या पूरा पैराग्राफ टाइप कर दिया है, तो Backspace को बार-बार दबाने की जरूरत नहीं है। Samsung Keyboard में Swipe Delete फीचर की मदद से आप जेस्चर का इस्तेमाल करके तेजी से टेक्स्ट डिलीट कर सकते हैं। इसके लिए: Settings → Swipe, Touch and Feedback → Cursor Control / Backspace (Delete) विकल्प को सक्रिय करें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन कंपनी OnePlus अपने नए बजट स्मार्टफोन OnePlus N6x को भारतीय बाजार में लॉन्च करने की तैयारी में है। कंपनी ने इस फोन की लॉन्च तारीख की घोषणा कर दी है। यह स्मार्टफोन 31 जुलाई 2026 को भारत में पेश किया जाएगा और इसकी सबसे बड़ी खासियत 7000mAh की बड़ी बैटरी होगी। 31 जुलाई को होगा लॉन्च, बैटरी पर कंपनी का फोकस OnePlus N6x को कंपनी अपने बजट स्मार्टफोन लाइनअप के विस्तार के तौर पर पेश कर रही है। OnePlus के अनुसार, फोन में 7000mAh बैटरी दी जाएगी, जो लंबे समय तक इस्तेमाल का दावा करती है। कंपनी ने टेस्टिंग के आधार पर इसमें करीब 2.5 दिन तक बैटरी बैकअप मिलने की बात कही है। बड़ी बैटरी के साथ यह फोन उन यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। Nord सीरीज जैसा डिजाइन, बजट सेगमेंट में मुकाबला रिपोर्ट्स के मुताबिक, OnePlus N6x का डिजाइन कंपनी के Nord सीरीज के स्मार्टफोन्स से मिलता-जुलता हो सकता है। फोन में नए कलर ऑप्शन और प्रीमियम लुक देने की कोशिश की गई है। कंपनी इस फोन के जरिए ₹15 हजार से ₹20 हजार रुपये वाले स्मार्टफोन बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जहां पहले से ही कई कंपनियां दमदार बैटरी और 5G फीचर्स के साथ मौजूद हैं। कैमरा और अन्य फीचर्स पर भी नजर OnePlus ने लॉन्च से पहले फोन की बैटरी को मुख्य आकर्षण बनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें डुअल रियर कैमरा सेटअप और 3.5mm हेडफोन जैक जैसे फीचर्स मिलने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने अभी पूरी स्पेसिफिकेशन और कीमत का खुलासा नहीं किया है। फोन की कीमत और प्रोसेसर से जुड़ी जानकारी लॉन्च इवेंट में सामने आने की संभावना है। बजट 5G स्मार्टफोन बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में बजट 5G स्मार्टफोन की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी बैटरी, बेहतर डिस्प्ले और AI फीचर्स के साथ कंपनियां इस सेगमेंट में नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं। OnePlus N6x की एंट्री के बाद इसका मुकाबला अन्य बजट 5G स्मार्टफोन्स से होगा। अब ग्राहकों की नजर इसकी कीमत, कैमरा और परफॉर्मेंस पर टिकी हुई है।