Exam Reform Task Force: देश में लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए 6 सदस्यीय हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार नंदन नीलेकणी करेंगे। सरकार का कहना है कि समिति परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को अधिक मजबूत बनाने के लिए सुझाव देगी। नंदन नीलेकणी को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी डिजिटल गवर्नेंस और बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट्स का लंबा अनुभव रखने वाले नंदन नीलेकणी इस टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे। आधार जैसी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना को सफलतापूर्वक लागू करने का अनुभव उनके पास है। सरकार चाहती है कि भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान, परीक्षा संचालन, डेटा सुरक्षा और परिणाम प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों का अधिक उपयोग किया जाए, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। समिति में शामिल हैं देश के शीर्ष विशेषज्ञ सरकार ने इस टास्क फोर्स में तकनीक, सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासन से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया है। समिति के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं— नंदन नीलेकणी – अध्यक्ष, इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख। डॉ. एस. सोमनाथ – इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष, जिन्हें बड़े तकनीकी और वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स का व्यापक अनुभव है। तपन डेका – पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) निदेशक, जो परीक्षा सुरक्षा और पेपर लीक रोकने के उपायों पर सुझाव देंगे। प्रो. वी. कामकोटी – निदेशक, IIT मद्रास, जो साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर सिस्टम के विशेषज्ञ हैं। अनीता करवाल – पूर्व CBSE अध्यक्ष और पूर्व स्कूल शिक्षा सचिव, जिन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमृत लाल मीणा – वरिष्ठ IAS अधिकारी और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव, जिन्हें बड़े प्रशासनिक ढांचे के संचालन का लंबा अनुभव है। क्या होंगे टास्क फोर्स के प्रमुख कार्य? सरकार के अनुसार यह समिति परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक, प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों पर काम करेगी। टास्क फोर्स निम्नलिखित पहलुओं पर अपनी सिफारिशें देगी— प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को और मजबूत बनाना। पेपर लीक रोकने के लिए नई तकनीकों का उपयोग। उम्मीदवारों की डिजिटल पहचान सत्यापन प्रणाली विकसित करना। परीक्षा संचालन को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना। साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के मानकों को मजबूत करना। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार और संस्थागत क्षमता बढ़ाना। परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर सुझाव देना। पेपर लीक के बाद सरकार की बड़ी पहल पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़े असर को देखते हुए सरकार अब परीक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक और संस्थागत सुधार लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से इतना मजबूत बनाना होगा कि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, डिजिटल सुरक्षा और परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम हो। भविष्य की परीक्षा प्रणाली तय करेगी समिति सरकार ने संकेत दिए हैं कि टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर भविष्य की परीक्षा प्रणाली, सुरक्षा मानकों और संचालन से जुड़े नए नियम तैयार किए जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद NTA सहित देश की प्रमुख परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकिंग, यूपीआई, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपने मोबाइल नंबर बदल लिया है, लेकिन अपने जरूरी अकाउंट्स में नया नंबर अपडेट नहीं किया, तो यह एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकता है। दरअसल, टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय तक बंद पड़े नंबरों को स्थायी रूप से निष्क्रिय नहीं रखतीं। निर्धारित अवधि के बाद वही नंबर किसी नए ग्राहक को जारी कर दिया जाता है। ऐसे में आपका पुराना नंबर किसी और के पास पहुंच सकता है और इससे आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। पुराना नंबर किसी और को मिलने पर क्या हो सकता है? अगर आपके बैंक खाते, ईमेल, यूपीआई ऐप या सोशल मीडिया प्रोफाइल अभी भी पुराने नंबर से जुड़े हुए हैं, तो नए नंबर धारक को आपके लिए आने वाले OTP, पासवर्ड रीसेट लिंक और अन्य महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त हो सकते हैं। इससे कोई व्यक्ति आपके अकाउंट तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है और आपकी संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी बन सकता है जोखिम अधिकांश लोग अकाउंट सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करते हैं। इसमें लॉगिन के समय मोबाइल नंबर पर एक सुरक्षा कोड भेजा जाता है। लेकिन अगर वह नंबर अब आपके पास नहीं है और किसी दूसरे व्यक्ति को जारी हो चुका है, तो वही कोड उसके मोबाइल पर पहुंच सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल SMS आधारित सुरक्षा पर निर्भर रहना अब पहले जितना सुरक्षित नहीं माना जाता। अकाउंट हैकिंग का बढ़ रहा खतरा हर साल दुनिया भर में लाखों मोबाइल नंबर दोबारा जारी किए जाते हैं। ऐसे में पुराने नंबरों से जुड़े अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास आपका पुराना नंबर पहुंच गया और उसने आपके ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की, तो जरूरी सुरक्षा संदेश उसी के फोन पर जा सकते हैं। नंबर बदलने के बाद तुरंत करें ये काम यदि आपने हाल ही में नया मोबाइल नंबर लिया है, तो इन प्लेटफॉर्म पर तुरंत नंबर अपडेट करें— बैंक खाते और नेट बैंकिंग सेवाएं यूपीआई और डिजिटल पेमेंट ऐप्स ईमेल अकाउंट व्हाट्सऐप इंस्टाग्राम फेसबुक अन्य जरूरी ऑनलाइन सेवाएं ध्यान रखें कि केवल नया नंबर जोड़ना काफी नहीं है। पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है। SMS OTP के बजाय अपनाएं सुरक्षित विकल्प साइबर विशेषज्ञ अब ऑथेंटिकेटर ऐप्स के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। ये ऐप मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं होते और डिवाइस के भीतर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं। इसके साथ ही अकाउंट रिकवरी सेटिंग्स की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि कई बार पुराना नंबर बैकअप संपर्क के रूप में सेव रह जाता है। अभी जांच करना क्यों है जरूरी? मोबाइल नंबर का दोबारा आवंटन टेलीकॉम कंपनियों की सामान्य प्रक्रिया है और यह भविष्य में भी जारी रहेगी। इसलिए अगर आपने कभी नंबर बदला है, तो एक बार सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स की जांच जरूर करें। एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खाते, निजी जानकारी और सोशल मीडिया प्रोफाइल की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक अवसर मिला है। अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने अपने अत्याधुनिक और बेहद गोपनीय साइबर सुरक्षा मॉडल ‘मायथॉस’ (Mythos) की टेस्टिंग के लिए भारत को चुना है। खास बात यह है कि इस परियोजना में शामिल 15 देशों में भारत एकमात्र ऐसा देश है जो अमेरिका का औपचारिक सैन्य संधि सहयोगी नहीं है, जबकि चीन को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इस फैसले को लेकर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ इसे भारत की तकनीकी ताकत और वैश्विक भरोसे का प्रमाण मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे भारत को एक बड़े टेस्टिंग ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बता रहे हैं। क्या है प्रोजेक्ट ग्लासविंग? मायथॉस को एंथ्रोपिक की महत्वाकांक्षी पहल ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ के तहत विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम में मौजूद कमजोरियों और सुरक्षा खामियों को साइबर अपराधियों से पहले पहचानना है। दावा किया जा रहा है कि मायथॉस जटिल सॉफ्टवेयर सिस्टम में छिपी कमियों को इंसानी विशेषज्ञों की तुलना में कहीं अधिक तेजी और सटीकता से खोज सकता है। शुरुआती परीक्षणों में इस AI ने कई प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजरों में मौजूद सुरक्षा खामियों की पहचान की है। क्यों खास है मायथॉस? मायथॉस को सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसकी पहुंच केवल— सरकारी संस्थानों बड़ी तकनीकी कंपनियों प्रमुख वित्तीय संस्थानों तक सीमित रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित बना सकती है। हालांकि दूसरी ओर यह चिंता भी जताई जा रही है कि यदि ऐसी तकनीक गलत हाथों में पहुंच जाए तो इसका दुरुपयोग भी संभव है। किन देशों को मिला टेस्टिंग का मौका? भारत के अलावा जिन देशों को मायथॉस की टेस्टिंग में शामिल किया गया है, उनमें शामिल हैं— फ्रांस जर्मनी इटली स्विट्जरलैंड नीदरलैंड स्पेन बेल्जियम स्वीडन कनाडा जापान दक्षिण कोरिया ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड इनमें अधिकांश देश अमेरिका के औपचारिक सुरक्षा सहयोगी हैं। ऐसे में भारत का इस सूची में शामिल होना विशेष महत्व रखता है। भारत को क्यों चुना गया? विशेषज्ञों के अनुसार भारत के चयन के पीछे कई बड़े कारण हैं— दुनिया का विशाल सॉफ्टवेयर टैलेंट पूल तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल भुगतान नेटवर्क बड़ा बैंकिंग और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर विशाल डिजिटल उपभोक्ता आधार भारत में मिलने वाला व्यावहारिक अनुभव वैश्विक स्तर पर AI मॉडल को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों की दो अलग-अलग राय इस फैसले पर तकनीकी जगत दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। पहला पक्ष: भारत के लिए बड़ी उपलब्धि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की सबसे उन्नत AI और साइबर सुरक्षा परियोजनाओं में शामिल होना भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और वैश्विक भरोसे को दर्शाता है। उनका कहना है कि इससे भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों को अत्याधुनिक AI सिस्टम के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। दूसरा पक्ष: क्या भारत सिर्फ टेस्टिंग ग्राउंड है? दूसरी ओर कुछ आलोचकों का मानना है कि एंथ्रोपिक भारत के विशाल डिजिटल इकोसिस्टम और डेटा वातावरण का उपयोग अपने AI मॉडल को और बेहतर बनाने के लिए कर सकता है। उनके अनुसार भारत को केवल एक परीक्षण बाजार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे तकनीक के विकास और स्वामित्व में भी अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए। एंथ्रोपिक में भारतीय प्रतिभा की बड़ी भूमिका भारत और एंथ्रोपिक के संबंध केवल इस परियोजना तक सीमित नहीं हैं। कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) Rahul Patil भारतीय मूल के हैं। कंपनी ने टोक्यो के बाद अपना दूसरा वैश्विक कार्यालय Bengaluru में स्थापित किया है। एंथ्रोपिक के सीईओ Dario Amodei ने पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर विभिन्न क्षेत्रों में AI के उपयोग पर चर्चा की थी। हाल के महीनों में भारत में डेवलपर्स के बीच Claude Code जैसे AI टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। क्या मायथॉस भारत के लिए अवसर है या चुनौती? मायथॉस की टेस्टिंग में भारत की भागीदारी निश्चित रूप से देश की तकनीकी क्षमता और वैश्विक महत्व को दर्शाती है। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, तकनीकी स्वायत्तता और विदेशी AI कंपनियों की भूमिका जैसे सवाल भी जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस अवसर को केवल टेस्टिंग तक सीमित रखता है या इसे अपनी AI रणनीति को मजबूत बनाने के लिए इस्तेमाल करता है।
रांची। आजकल के डिजिटल ज़माने में WhatsApp सिर्फ chatting app नहीं, बल्कि personal chats, photos, documents और banking OTP तक का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp account hack हो जाए, तो privacy और security दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। सवाल यह है कि WhatsApp hack हुआ है या नहीं, इसका पता कैसे लगाएं? आइए आसान भाषा में इसे समझते हैं। WhatsApp Account Hack होने के क्या संकेत हैं? 1. Unknown Devices Logged In दिखना अगर WhatsApp Web या linked devices में कोई अनजान device दिखाई दे, तो यह एक warning sign हो सकता है। 2. OTP Message बिना वजह आना अगर बार-बार आपको verification code या OTP message आ रहे हैं, तो इससे यह पता चलता है कि कोई आपका account access करने की कोशिश कर रहा है। 3. Messages अपने आप Read या Send होना अगर आपने message नहीं भेजा लेकिन chat में activity दिख रही है, तो account compromise हो सकता है। 4. अचानक Logout हो जाना WhatsApp अगर बार-बार logout हो रहा है या re-login मांग रहा है, तो सावधानी बरतने की जरूरत है। 5. Unknown Status या Profile Changes Profile photo, about section या status अपने आप बदलना suspicious activity का एक संकेत हो सकता है। WhatsApp Account Hack हुआ है तो क्या करें? तुरंत सभी linked devices logout करें Two-step verification ON करें WhatsApp PIN सेट करें Password और email security check करें Suspicious apps uninstall करें Account access वापस पाने के लिए re-verify करें Linked Devices कैसे Check करें? WhatsApp खोलें → Settings → Linked Devices → Unknown devices remove करें। Two-Step Verification क्यों जरूरी है? यह extra security layer जोड़ता है, जिससे सिर्फ OTP मिलने से account access करना मुश्किल हो जाता है। WhatsApp Account को Hack होने से कैसे बचायें ? OTP किसी अंजान व्यक्ति से share न करें Unknown links पर click न करें Fake APK files install न करें Public Wi-Fi पर login करने से बचे App को regularly update करें
Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने साइबर अपराधों से निपटने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 195 पदों पर भर्ती निकाली है। खास बात यह है कि इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तारीख अब बढ़ाकर 19 मई 2026 कर दी गई है। डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन सेवाओं के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में यह भर्ती युवाओं के लिए बड़ा अवसर मानी जा रही है। यह वैकेंसी खास तौर पर उन उम्मीदवारों के लिए फायदेमंद हो सकती है, जो साइबर सिक्योरिटी, आईटी, कम्युनिकेशन और मीडिया सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं। गृह मंत्रालय के तहत होगी नियुक्ति Indian Cyber Crime Coordination Centre गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, यह भर्ती कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर की जाएगी और चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति तीन साल के कार्यकाल के लिए होगी। उम्मीदवारों की पोस्टिंग नई दिल्ली और असम में की जा सकती है। किन पदों पर होगी भर्ती? I4C द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, भर्ती टेक्निकल और मीडिया प्रोफेशनल्स समेत कई पदों के लिए की जा रही है। कुल 195 रिक्तियां उपलब्ध हैं। इन पदों का उद्देश्य साइबर क्राइम की रोकथाम, डिजिटल सुरक्षा और जागरूकता अभियानों को मजबूत करना है। क्या होगा काम? चयनित उम्मीदवारों को साइबर अपराधों की निगरानी, डिजिटल सुरक्षा से जुड़े अभियानों, टेक्निकल सपोर्ट, कम्युनिकेशन और आउटरीच गतिविधियों में काम करना होगा। मीडिया प्रोफेशनल्स की जिम्मेदारी जागरूकता अभियान और जनसंपर्क गतिविधियों को संभालना हो सकती है। आवेदन कैसे करें? इच्छुक उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक भर्ती पोर्टल पर जाकर फॉर्म भरना होगा। क्यों खास है यह भर्ती? साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग गृह मंत्रालय के तहत काम करने का अवसर टेक्निकल और मीडिया दोनों क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए मौके डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध नियंत्रण में योगदान का मौका
देश के बैंकिंग सेक्टर की साइबर सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर Anthropic के अत्याधुनिक AI मॉडल Claude Mythos से उत्पन्न संभावित खतरों पर चर्चा की। क्या है Claude Mythos? Anthropic द्वारा विकसित Claude Mythos को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली AI मॉडल माना जा रहा है। दावा है कि यह हजारों ऐसी सुरक्षा खामियों का पता लगा सकता है, जिन्हें मानव विशेषज्ञ भी नहीं खोज पाए। इसकी क्षमताओं को देखते हुए कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं कराया है। क्यों बढ़ी चिंता? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ अनधिकृत यूजर्स Claude Mythos तक पहुंच बनाने में सफल रहे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इसका दुरुपयोग कर साइबर अपराधी बैंकिंग नेटवर्क, वित्तीय संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम को निशाना बना सकते हैं। वित्त मंत्री ने क्या कहा? बैठक में निर्मला सीतारमण ने कहा कि Claude Mythos से उत्पन्न खतरा अभूतपूर्व है और इससे निपटने के लिए उच्च स्तर की सतर्कता, तैयारी और समन्वय आवश्यक है। उन्होंने बैंकों को अपने आईटी सिस्टम मजबूत करने और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस पर जोर वित्त मंत्रालय ने बैंकों, Indian Computer Emergency Response Team और अन्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस साझा करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की सलाह दी है। इससे किसी भी संभावित साइबर हमले का तेजी से पता लगाया जा सकेगा। RBI और IBA भी सक्रिय भारतीय रिजर्व बैंक और Indian Banks' Association को भी इस जोखिम का आकलन करने को कहा गया है। साथ ही, IBA को सभी बैंकों के लिए एक समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। वैश्विक स्तर पर भी चिंता Claude Mythos को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका समेत कई देशों में भी चिंता बढ़ी है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन और वॉल स्ट्रीट के बड़े बैंक भी इस AI मॉडल से जुड़े जोखिमों का आकलन कर रहे हैं।
टेक दिग्गज Meta Platforms ने अपने प्लेटफॉर्म्स Facebook और Instagram पर एक नया AI Support Assistant रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस नए फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अकाउंट से जुड़ी समस्याओं, कंटेंट मॉडरेशन और सिक्योरिटी मामलों में तुरंत सहायता देना है। 5 सेकंड में जवाब, 24x7 सपोर्ट Meta के अनुसार, यह AI असिस्टेंट यूजर्स के सवालों का जवाब 5 सेकंड से भी कम समय में दे सकता है और 24 घंटे उपलब्ध रहेगा। इसे मोबाइल (Android, iOS) और डेस्कटॉप-दोनों प्लेटफॉर्म्स पर हेल्प सेंटर में इंटीग्रेट किया गया है। क्या-क्या कर सकेगा AI Assistant? Meta AI Support Assistant यूजर्स के लिए कई महत्वपूर्ण काम कर सकता है: स्कैम या फर्जी अकाउंट रिपोर्ट करना कंटेंट हटाए जाने की वजह समझाना पोस्ट हटने पर अपील में मदद पासवर्ड बदलना और प्राइवेसी सेटिंग्स मैनेज करना प्रोफाइल एडिट करना फिलहाल ये फीचर्स Facebook पर पूरी तरह सक्रिय हैं, जबकि Instagram पर भी जल्द इन्हें लागू किया जाएगा। स्कैम और फर्जीवाड़े पर सख्ती Meta ने बताया कि उसके नए AI सिस्टम अब पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं। रोजाना लगभग 5,000 स्कैम प्रयासों को पहचानने में सक्षम सेलिब्रिटी इम्पर्सोनेशन (नकली अकाउंट) में 80% तक कमी आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान में दोगुनी क्षमता मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट यह AI असिस्टेंट उन भाषाओं में काम कर सकता है, जिन्हें दुनिया के 98% इंटरनेट यूजर्स इस्तेमाल करते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर यूजर्स को बेहतर और तेज सहायता मिलेगी। AI के साथ मानव निगरानी भी जरूरी Meta ने साफ किया है कि भले ही AI को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है, लेकिन संवेदनशील और जटिल मामलों में मानव हस्तक्षेप जारी रहेगा। कंपनी का मानना है कि AI बड़े स्तर पर काम को तेज कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय में इंसानी समझ जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।