नई दिल्ली: क्या भविष्य में ऐसा कंप्यूटर आ सकता है जो बैंक, सरकार और सेना की मौजूदा डिजिटल सुरक्षा को कुछ ही सेकंड में तोड़ दे? इजराइल के वरिष्ठ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रोफेसर मेजर-जनरल आइजैक बेन-इजरायल ने इसी संभावना को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब पूरी तरह सक्षम क्वांटम कंप्यूटर विकसित हो जाएंगे, तब आज इस्तेमाल होने वाले कई पारंपरिक एन्क्रिप्शन सिस्टम सुरक्षित नहीं रहेंगे। उन्होंने यह टिप्पणी साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक पॉडकास्ट में की। क्या है क्वांटम कंप्यूटर? सामान्य कंप्यूटर बिट (0 और 1) के आधार पर काम करते हैं, जहां एक समय में केवल एक स्थिति संभव होती है। वहीं, क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट (Qubit) का उपयोग करते हैं। क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों के कारण क्यूबिट एक समय में कई संभावित अवस्थाओं में काम कर सकते हैं। इसी वजह से कुछ जटिल गणनाएं पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से की जा सकती हैं। क्यों जताई गई है चिंता? प्रोफेसर बेन-इजरायल के अनुसार, यदि भविष्य में पर्याप्त क्षमता वाले क्वांटम कंप्यूटर विकसित हो जाते हैं, तो वे आज उपयोग में आने वाले कई एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म को बहुत तेजी से तोड़ सकते हैं। इसका असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है— बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सरकारी डेटा सैन्य संचार ऑनलाइन पहचान और पासवर्ड आधारित सुरक्षा संवेदनशील व्यावसायिक जानकारी हालांकि, यह खतरा भविष्य में पूरी तरह विकसित क्वांटम कंप्यूटरों से जुड़ा है, न कि आज उपलब्ध सामान्य कंप्यूटरों से। क्या सचमुच "एक सेकंड में हर पासवर्ड" टूट जाएगा? विशेषज्ञ की टिप्पणी भविष्य की संभावित क्षमता को दर्शाती है। व्यवहार में यह कई बातों पर निर्भर करेगा, जैसे— कौन-सा एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म इस्तेमाल हो रहा है। क्वांटम कंप्यूटर की वास्तविक क्षमता कितनी है। संबंधित सिस्टम पहले से पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी अपनाते हैं या नहीं। इसलिए यह कहना कि हर पासवर्ड हर परिस्थिति में एक सेकंड में टूट जाएगा, तकनीकी रूप से एक सामान्यीकृत दावा होगा। हालांकि, मौजूदा एन्क्रिप्शन मानकों के लिए भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग एक गंभीर चुनौती मानी जा रही है। क्यों है इसकी स्पीड इतनी अलग? क्वांटम कंप्यूटर कुछ विशेष प्रकार की गणनाओं में पारंपरिक कंप्यूटरों से कहीं अधिक तेज हो सकते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक और तकनीकी कंपनियां इस तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं। इनका उपयोग भविष्य में इन क्षेत्रों में भी हो सकता है— दवा अनुसंधान जलवायु मॉडलिंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैज्ञानिक अनुसंधान जटिल वित्तीय मॉडलिंग अभी कितनी दूर है यह तकनीक? प्रोफेसर बेन-इजरायल का मानना है कि पूरी तरह सक्षम क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने में अभी कई तकनीकी चुनौतियां बाकी हैं। इनमें प्रमुख हैं— बड़ी संख्या में स्थिर क्यूबिट तैयार करना। क्वांटम त्रुटियों (Quantum Errors) को नियंत्रित करना। अत्यधिक ठंडे तापमान पर सिस्टम को संचालित करना। भारी ऊर्जा और विशेष बुनियादी ढांचे की आवश्यकता। उनके अनुसार, ऐसी मशीनें बेहद बड़ी और महंगी होंगी तथा फिलहाल केवल चुनिंदा संस्थानों या बड़ी तकनीकी कंपनियों तक ही सीमित रहने की संभावना है। दुनिया क्या कर रही है? संभावित क्वांटम खतरे को देखते हुए दुनिया भर की सरकारें और तकनीकी संस्थान पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (Post-Quantum Cryptography) पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसे नए एन्क्रिप्शन मानक विकसित करना है जो भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के सामने भी सुरक्षित रह सकें।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता उपयोग जहां बैंकिंग और भुगतान सेवाओं को अधिक कुशल बना रहा है, वहीं इससे साइबर सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए नए जोखिम भी पैदा हो रहे हैं। आईएमएफ ने कहा कि यदि AI से जुड़े जोखिमों के लिए समय रहते प्रभावी नियामकीय ढांचा नहीं बनाया गया, तो भविष्य में इसका असर पूरे वैश्विक वित्तीय तंत्र पर पड़ सकता है। बैंकिंग और भुगतान प्रणाली पर बढ़ सकता है खतरा आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, AI की मदद से साइबर हमलावर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से सुरक्षा कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े पैमाने पर हमले कर सकते हैं। बैंक, भुगतान नेटवर्क, क्लाउड सेवाएं और साझा डिजिटल अवसंरचना ऐसे हमलों से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। संस्था ने आगाह किया कि यदि एक ही तकनीकी प्लेटफॉर्म पर निर्भर कई वित्तीय संस्थानों पर एक साथ हमला हुआ, तो यह वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। वैश्विक सहयोग और कड़े नियमन पर जोर आईएमएफ ने सरकारों, केंद्रीय बैंकों और वित्तीय नियामकों से AI आधारित जोखिमों के लिए स्पष्ट नियम बनाने, साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक-निजी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के लाभ तभी सुरक्षित रहेंगे, जब इसके साथ मजबूत निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नियमन भी विकसित किया जाए।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए मालवेयर साइबर हमले की जांच के बाद की गई, जिसमें CDSL की साइबर सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं। 2022 के मालवेयर हमले के बाद हुई कार्रवाई SEBI की जांच में पाया गया कि CDSL की सुरक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं, जिनके कारण मालवेयर हमला सफल हुआ। इस साइबर हमले की वजह से डिपॉजिटरी की कई अहम सेवाएं बाधित हुईं और शेयर बाजार के सेटलमेंट सिस्टम पर भी असर पड़ा। 46 घंटे से ज्यादा प्रभावित रहीं सेवाएं नियामक के अनुसार, साइबर हमले के कारण CDSL की कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं करीब 46 घंटे तक प्रभावित रहीं, जबकि इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर जैसी सुविधाओं में भी लंबा व्यवधान आया। SEBI ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण बाजार अवसंरचना से जुड़ी संस्था के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य है। SEBI ने गिनाईं कई सुरक्षा खामियां जांच में कमजोर एक्सेस कंट्रोल, सुरक्षा अलर्ट की अपर्याप्त निगरानी, पासवर्ड प्रबंधन में लापरवाही और नियामकीय साइबर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने जैसी कमियां सामने आईं। SEBI ने कहा कि इन खामियों के कारण हमले का जोखिम बढ़ा और बाजार संचालन प्रभावित हुआ। वित्तीय संस्थानों को दिया सख्त संदेश SEBI ने स्पष्ट किया कि पूंजी बाजार से जुड़ी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। नियामक ने कहा कि डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा में लापरवाही निवेशकों के हितों और पूरे वित्तीय बाजार की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया के सबसे प्रभावशाली खुफिया गठबंधनों में से एक Five Eyes intelligence alliance ने गंभीर चेतावनी जारी की है। गठबंधन का कहना है कि AI की अगली पीढ़ी के मॉडल आने वाले कुछ ही महीनों में वैश्विक साइबर सुरक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकते हैं। इससे साइबर हमलों की रफ्तार, दायरा और जटिलता कई गुना बढ़ सकती है। फाइव आइज की निगरानी संस्था FIORC (Five Eyes Intelligence Oversight and Review Council) ने सरकारों, व्यवसायों और कॉर्पोरेट नेतृत्व से अपील की है कि वे साइबर सुरक्षा और साइबर रेजिलिएंस (Cyber Resilience) को तत्काल प्राथमिकता दें। AI बढ़ाएगा साइबर हमलों का खतरा संयुक्त बयान में कहा गया है कि "फ्रंटियर AI सिस्टम" मौजूदा उद्योग की अपेक्षाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली साबित हो सकते हैं और साइबर हमलों तथा उनके बचाव दोनों में बुनियादी बदलाव ला सकते हैं। यह बदलाव वर्षों में नहीं, बल्कि कुछ महीनों में देखने को मिल सकता है। गठबंधन के अनुसार, AI किसी डिजिटल कमजोरी की पहचान होने और साइबर अपराधियों द्वारा उसका फायदा उठाने के बीच के समय को तेजी से कम कर रहा है, जिससे साइबर खतरों का जोखिम बढ़ रहा है। अमेरिकी फैसले के बाद जारी हुई चेतावनी यह बयान उस समय आया है, जब अमेरिका ने Anthropic द्वारा विकसित कुछ उन्नत AI सिस्टम तक विदेशी नागरिकों की पहुंच सीमित करने का फैसला किया है। यह कदम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर उठाया गया है। फाइव आइज ने अपने बयान में किसी विशेष कंपनी या AI मॉडल का नाम नहीं लिया, लेकिन उसने स्पष्ट संकेत दिया कि अत्याधुनिक AI मॉडल वैश्विक साइबर सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। केवल खतरा नहीं, सुरक्षा का अवसर भी फाइव आइज ने यह भी स्वीकार किया कि AI साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शक्तिशाली उपकरण भी उपलब्ध करा सकता है। संगठन का कहना है कि यदि AI का उपयोग रणनीतिक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से किया जाए तो यह साइबर हमलों की पहचान, निगरानी और प्रतिक्रिया को पहले से अधिक प्रभावी बना सकता है। नेताओं को दी ये सलाह गठबंधन ने कंपनियों के बोर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों से कहा है कि वे: साइबर जोखिम को केवल तकनीकी समस्या न मानें। साइबर सुरक्षा को व्यापारिक जोखिम और नेतृत्व की जिम्मेदारी के रूप में देखें। सुरक्षा टीमों को पर्याप्त संसाधन और अधिकार दें। बदलते AI-आधारित खतरों के अनुसार अपनी रणनीतियों को लगातार अपडेट करें। सुरक्षा उपायों का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण करें। 'AI भविष्य नहीं, वर्तमान की चुनौती' बयान में कहा गया, "AI भविष्य की तकनीक नहीं है, यह पहले से मौजूद है। फ्रंटियर AI के तेजी से विकास का अर्थ है कि साइबर जोखिमों को लेकर हमारी धारणाएं वर्षों नहीं, बल्कि महीनों में पुरानी पड़ सकती हैं।" फाइव आइज ने चेतावनी दी कि दुनिया को बदलते साइबर खतरों का सामना करने के लिए अभी से तैयार होना होगा, क्योंकि AI आने वाले समय में वैश्विक डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नया रूप देने जा रहा है।
डिजिटल दुनिया में साइबर हमलों के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब एक नया खतरा सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का कारण बन गया है। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने “Kali365” नाम के एक खतरनाक फिशिंग प्लेटफॉर्म को लेकर चेतावनी जारी की है। यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से Microsoft 365 यूजर्स को निशाना बना रहा है और सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह पारंपरिक मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सुरक्षा को भी बायपास करने में सक्षम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस हमले को अंजाम देने के लिए किसी व्यक्ति का साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ होना भी जरूरी नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह तैयार फिशिंग टूल्स के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। क्या है Kali365? Kali365 एक “फिशिंग-एज-ए-सर्विस” (PhaaS) प्लेटफॉर्म है, जिसे साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। यह सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल पर काम करता है और हमलावरों को फिशिंग अभियान चलाने के लिए तैयार टूल्स उपलब्ध कराता है। इस प्लेटफॉर्म में कई उन्नत सुविधाएं शामिल हैं, जैसे: एआई आधारित ईमेल टेम्पलेट्स ऑटोमेटेड फिशिंग कैंपेन रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम संभावित शिकारों की निगरानी इन सुविधाओं की मदद से साइबर हमले पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावी और आसान हो गए हैं। कैसे काम करता है यह हमला? Kali365 पारंपरिक फिशिंग तकनीकों से थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। यूजर्स को ऐसा ईमेल भेजा जाता है जो किसी भरोसेमंद क्लाउड सर्विस या डॉक्यूमेंट शेयरिंग प्लेटफॉर्म जैसा दिखाई देता है। ईमेल में एक डिवाइस कोड दिया जाता है और यूजर को Microsoft लॉगिन पेज पर जाकर उसे दर्ज करने के लिए कहा जाता है। जब यूजर ऐसा करता है, तो वह अनजाने में हमलावर के डिवाइस को अपने अकाउंट तक पहुंच की अनुमति दे देता है। इसके बाद हमलावर OAuth टोकन हासिल कर लेते हैं और Outlook, Teams, OneDrive जैसी सेवाओं तक पहुंच बना सकते हैं, वह भी बिना दोबारा पासवर्ड या MFA की आवश्यकता के। MFA होने के बावजूद क्यों खतरनाक है यह हमला? आमतौर पर लोग मानते हैं कि मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन उनके अकाउंट को पूरी तरह सुरक्षित बना देता है, लेकिन Kali365 सीधे पासवर्ड चुराने की बजाय OAuth टोकन को निशाना बनाता है। इसी कारण कई मामलों में पासवर्ड बदलने के बाद भी हमलावर अकाउंट तक पहुंच बनाए रख सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे हमलों की पहचान करना पारंपरिक फिशिंग की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो सकता है। FBI ने यूजर्स को क्या सलाह दी? FBI ने Microsoft 365 उपयोगकर्ताओं और संगठनों को अपनी सुरक्षा सेटिंग्स की समीक्षा करने की सलाह दी है। एजेंसी ने कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सिफारिश की है: डिवाइस कोड आधारित ऑथेंटिकेशन को सीमित करें। Conditional Access Policy लागू करें। लॉगिन गतिविधियों की नियमित निगरानी करें। संदिग्ध ईमेल और अनजान डिवाइस लॉगिन पर नजर रखें। असामान्य अकाउंट गतिविधियों को तुरंत जांचें। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और नियमित सुरक्षा ऑडिट ही ऐसे हमलों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। साइबर अपराध का नया बिजनेस मॉडल बन रहा है PhaaS Kali365 का मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि साइबर अपराध अब एक संगठित उद्योग का रूप ले रहा है। “Phishing-as-a-Service” मॉडल के तहत जटिल हैकिंग टूल्स को आसान सब्सक्रिप्शन सेवाओं में बदला जा रहा है। इससे कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी बड़े स्तर पर साइबर हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पहचान आधारित साइबर हमलों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
आज के डिजिटल दौर में WhatsApp हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग अलर्ट से लेकर निजी बातचीत तक, लगभग हर जरूरी जानकारी इसी प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहती है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp अकाउंट हैक हो जाए, तो यह बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस की IFSO (Intelligence Fusion and Strategic Operations) यूनिट के जॉइंट सीपी रजनीश गुप्ता ने एक वीडियो के जरिए हैक हुए WhatsApp अकाउंट को वापस पाने का तरीका बताया है। क्यों जरूरी है ##21# कोड? दिल्ली पुलिस के अनुसार, अगर किसी हैकर ने कॉल या मैसेज फॉरवर्डिंग के जरिए आपके OTP अपने डिवाइस पर प्राप्त करने की व्यवस्था कर रखी है, तो सबसे पहले उस फॉरवर्डिंग को बंद करना जरूरी है। इसके लिए अपने फोन में: ##21# डायल करने की सलाह दी गई है। यह USSD कोड कई मामलों में सक्रिय कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग्स को बंद करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अलग-अलग ऑपरेटर और डिवाइस के अनुसार इसका प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए इसे सुरक्षा के अतिरिक्त कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। WhatsApp अकाउंट वापस पाने के लिए अपनाएं ये स्टेप्स 1. सबसे पहले ##21# डायल करें इससे संभावित कॉल या मैसेज फॉरवर्डिंग बंद हो सकती है और OTP गलत व्यक्ति तक पहुंचने का खतरा कम हो सकता है। 2. Meta के शिकायत फॉर्म पर जाएं WhatsApp सपोर्ट फॉर्म खोलें। 3. "Are you a law enforcement officer?" पर "No" चुनें 4. अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें देश के कोड के साथ अपना WhatsApp नंबर दो बार भरें। 5. "My account has been hacked" विकल्प चुनें 6. समस्या का विवरण लिखें बताएं कि आपका अकाउंट हैक हो गया है और आप लॉगिन नहीं कर पा रहे हैं। 7. अपना नाम और ईमेल आईडी भरें 8. Electronic Signature में अपना नाम दर्ज कर फॉर्म सबमिट करें इसके बाद क्या होगा? फॉर्म सबमिट करने के बाद Meta आपकी शिकायत की समीक्षा करेगा। सत्यापन पूरा होने पर हैकर के डिवाइस से आपका WhatsApp अकाउंट लॉगआउट किया जा सकता है। इसके बाद आप OTP की मदद से दोबारा अपने अकाउंट में लॉगिन कर सकेंगे। Facebook और Instagram के लिए भी उपलब्ध है सुविधा अगर आपका Facebook या Instagram अकाउंट हैक हो गया है, तो Meta इन प्लेटफॉर्म्स के लिए भी अलग रिकवरी फॉर्म उपलब्ध कराता है। सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान WhatsApp में टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर ऑन करें। किसी के साथ OTP साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत सतर्क हो जाएं। अपने ईमेल अकाउंट की सुरक्षा भी मजबूत रखें।
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकिंग, यूपीआई, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपने मोबाइल नंबर बदल लिया है, लेकिन अपने जरूरी अकाउंट्स में नया नंबर अपडेट नहीं किया, तो यह एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकता है। दरअसल, टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय तक बंद पड़े नंबरों को स्थायी रूप से निष्क्रिय नहीं रखतीं। निर्धारित अवधि के बाद वही नंबर किसी नए ग्राहक को जारी कर दिया जाता है। ऐसे में आपका पुराना नंबर किसी और के पास पहुंच सकता है और इससे आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। पुराना नंबर किसी और को मिलने पर क्या हो सकता है? अगर आपके बैंक खाते, ईमेल, यूपीआई ऐप या सोशल मीडिया प्रोफाइल अभी भी पुराने नंबर से जुड़े हुए हैं, तो नए नंबर धारक को आपके लिए आने वाले OTP, पासवर्ड रीसेट लिंक और अन्य महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त हो सकते हैं। इससे कोई व्यक्ति आपके अकाउंट तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है और आपकी संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी बन सकता है जोखिम अधिकांश लोग अकाउंट सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करते हैं। इसमें लॉगिन के समय मोबाइल नंबर पर एक सुरक्षा कोड भेजा जाता है। लेकिन अगर वह नंबर अब आपके पास नहीं है और किसी दूसरे व्यक्ति को जारी हो चुका है, तो वही कोड उसके मोबाइल पर पहुंच सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल SMS आधारित सुरक्षा पर निर्भर रहना अब पहले जितना सुरक्षित नहीं माना जाता। अकाउंट हैकिंग का बढ़ रहा खतरा हर साल दुनिया भर में लाखों मोबाइल नंबर दोबारा जारी किए जाते हैं। ऐसे में पुराने नंबरों से जुड़े अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास आपका पुराना नंबर पहुंच गया और उसने आपके ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की, तो जरूरी सुरक्षा संदेश उसी के फोन पर जा सकते हैं। नंबर बदलने के बाद तुरंत करें ये काम यदि आपने हाल ही में नया मोबाइल नंबर लिया है, तो इन प्लेटफॉर्म पर तुरंत नंबर अपडेट करें— बैंक खाते और नेट बैंकिंग सेवाएं यूपीआई और डिजिटल पेमेंट ऐप्स ईमेल अकाउंट व्हाट्सऐप इंस्टाग्राम फेसबुक अन्य जरूरी ऑनलाइन सेवाएं ध्यान रखें कि केवल नया नंबर जोड़ना काफी नहीं है। पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है। SMS OTP के बजाय अपनाएं सुरक्षित विकल्प साइबर विशेषज्ञ अब ऑथेंटिकेटर ऐप्स के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। ये ऐप मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं होते और डिवाइस के भीतर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं। इसके साथ ही अकाउंट रिकवरी सेटिंग्स की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि कई बार पुराना नंबर बैकअप संपर्क के रूप में सेव रह जाता है। अभी जांच करना क्यों है जरूरी? मोबाइल नंबर का दोबारा आवंटन टेलीकॉम कंपनियों की सामान्य प्रक्रिया है और यह भविष्य में भी जारी रहेगी। इसलिए अगर आपने कभी नंबर बदला है, तो एक बार सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स की जांच जरूर करें। एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खाते, निजी जानकारी और सोशल मीडिया प्रोफाइल की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।
संवेदनशील AI टूल तक पहुंच का दावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Anthropic ने अपने बेहद शक्तिशाली साइबर-सिक्योरिटी टूल “Claude Mythos” तक कथित अनधिकृत पहुंच के दावों की जांच शुरू कर दी है। कंपनी के अनुसार, यह टूल इतना एडवांस है कि इसे आम जनता के लिए जारी नहीं किया गया है। थर्ड-पार्टी सिस्टम से हुई पहुंच की आशंका रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोगों के एक छोटे समूह ने किसी थर्ड-पार्टी वेंडर के जरिए इस टूल तक पहुंच बना ली। कंपनी ने बयान में कहा कि वह “Claude Mythos Preview” तक बिना अनुमति पहुंच के दावे की गंभीरता से जांच कर रही है। हालांकि, फिलहाल इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि कंपनी के मुख्य सिस्टम से छेड़छाड़ हुई है। ‘हैक’ नहीं, एक्सेस के दुरुपयोग की संभावना साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पारंपरिक हैकिंग का मामला नहीं हो सकता, बल्कि किसी वैध एक्सेस के गलत इस्तेमाल से यह स्थिति बनी होगी। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को पहले से ही कुछ AI मॉडल देखने की अनुमति थी, जिसका फायदा उठाकर यह पहुंच संभव हुई। क्या है Claude Mythos और क्यों है खतरनाक? Claude Mythos एक उन्नत AI टूल है, जिसे सिस्टम की कमजोरियों को पहचानने और उन्हें एक्सप्लॉइट करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसी वजह से इसे सीमित कंपनियों–खासतौर पर टेक और फाइनेंस सेक्टर–को ही दिया गया है, ताकि वे अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत कर सकें। AI टूल्स: खतरा या सुरक्षा का नया हथियार? ब्रिटेन की National Cyber Security Centre के प्रमुख रिचर्ड हॉर्न ने हाल ही में कहा कि एडवांस AI टूल्स सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं तो “कुल मिलाकर फायदेमंद” साबित हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI तेजी से सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रहा है, जिससे साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी हो गया है। बढ़ती चिंता: AI कहीं गलत हाथों में न चला जाए इस घटना ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है–क्या बड़ी AI कंपनियां अपने सबसे ताकतवर टूल्स को सुरक्षित रख पाने में सक्षम हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे टूल्स गलत हाथों में चले गए, तो उनका इस्तेमाल फ्रॉड, साइबर हमलों और अन्य आपराधिक गतिविधियों में हो सकता है।
आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग डिवाइस नहीं, बल्कि हमारी बैंकिंग, सोशल मीडिया और निजी जिंदगी का पूरा केंद्र बन चुका है। लेकिन अगर आपका फोन लंबे समय से अपडेट नहीं हुआ है, तो यह आपकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। क्या होता है “Expired Smartphone”? जब किसी फोन को कंपनी सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट देना बंद कर देती है, तो उसे “Expired” माना जाता है। फोन चलता रहता है, लेकिन उसकी सुरक्षा धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है। क्यों है खतरनाक? बिना अपडेट वाले फोन में सिक्योरिटी खामियां बनी रहती हैं हैकर्स इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर फोन में घुस सकते हैं आपका डेटा, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी जोखिम में आ जाती है हैकर्स कैसे करते हैं हमला? एक बार फोन में सेंध लगने के बाद हैकर्स: सोशल मीडिया अकाउंट एक्सेस कर सकते हैं कैमरा और माइक्रोफोन कंट्रोल कर सकते हैं OTP पढ़कर बैंक अकाउंट खाली कर सकते हैं सबसे खतरनाक बात–आपको पता भी नहीं चलता और नुकसान हो जाता है। किसे ज्यादा खतरा? 3–4 साल पुराने फोन यूज करने वाले लोग जिनके फोन में लंबे समय से अपडेट नहीं आया बजट और मिड-रेंज डिवाइस यूजर्स कैसे बचें इस खतरे से? फोन का सॉफ्टवेयर नियमित अपडेट करें अगर अपडेट बंद हो गया है, तो नया फोन लेने पर विचार करें सिर्फ भरोसेमंद ऐप्स इंस्टॉल करें अनजान लिंक और फाइल्स से दूर रहें सिक्योरिटी ऐप या एंटीवायरस का इस्तेमाल करें
टेक्नोलॉजी दिग्गज Google ने अपने लोकप्रिय ईमेल प्लेटफॉर्म Gmail को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब Gmail में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) का सपोर्ट Android और iPhone दोनों पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे यूजर्स अपने ईमेल को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित तरीके से भेज और पढ़ सकेंगे। क्या है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है जिसमें ईमेल का डेटा भेजने वाले के डिवाइस पर ही एन्क्रिप्ट (कोडेड) हो जाता है और केवल प्राप्तकर्ता ही उसे डिक्रिप्ट (पढ़) कर सकता है। इसका मतलब यह है कि बीच में कोई भी–यहां तक कि सर्वर या कंपनी भी–उस ईमेल को नहीं पढ़ सकती। Gmail में यह फीचर कैसे काम करता है? नए अपडेट के बाद जब यूजर ईमेल लिखेंगे, तो उन्हें एक ‘लॉक’ आइकन दिखाई देगा। इस आइकन पर क्लिक करके एन्क्रिप्शन ऑन किया जा सकता है ईमेल भेजने से पहले ही डिवाइस पर एन्क्रिप्ट हो जाता है रिसीवर के पास पहुंचने के बाद ही यह डिक्रिप्ट होता है अगर सामने वाला व्यक्ति Gmail यूज करता है, तो उसे ईमेल सामान्य थ्रेड की तरह दिखाई देगा। वहीं, अन्य ईमेल यूजर्स इसे सुरक्षित वेब लिंक के जरिए एक्सेस कर सकते हैं। मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ा फायदा अब तक इस तरह की सिक्योरिटी के लिए अलग टूल या प्लेटफॉर्म की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब यह सुविधा सीधे मोबाइल ऐप में ही मिल रही है। इससे यूजर्स कहीं से भी अपने संवेदनशील और जरूरी ईमेल सुरक्षित तरीके से भेज और पढ़ सकते हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? फिलहाल यह फीचर Google Workspace के एंटरप्राइज यूजर्स के लिए उपलब्ध है। एडमिन को पहले इसे Admin Console से एक्टिव करना होगा इसके बाद ही यूजर्स इस सुविधा का उपयोग कर पाएंगे धीरे-धीरे इसे सभी यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा क्यों है यह अपडेट खास? डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरे और डेटा लीक के मामलों को देखते हुए यह अपडेट बेहद अहम माना जा रहा है। यह फीचर खासकर बिजनेस, प्रोफेशनल और संवेदनशील जानकारी शेयर करने वाले यूजर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
बॉलीवुड अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह इन दिनों एक साइबर सिक्योरिटी मुद्दे को लेकर चर्चा में हैं। एक्ट्रेस का X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट हैक हो गया है, जिसकी जानकारी उन्होंने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए दी। डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर हमलों के बीच यह घटना एक बार फिर से सेलेब्रिटीज की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। इंस्टाग्राम के जरिए दी जानकारी चित्रांगदा सिंह ने इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से फैंस को बताया कि उनका X अकाउंट फिलहाल उनके नियंत्रण में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टीम इस समस्या को सुलझाने में लगी हुई है और अकाउंट को जल्द से जल्द रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। एक्ट्रेस ने अपने फॉलोअर्स से खास अपील करते हुए कहा कि जब तक उनका अकाउंट सुरक्षित वापस नहीं मिल जाता, तब तक उस हैंडल से आने वाले किसी भी मैसेज, पोस्ट या गतिविधि पर भरोसा न करें। फैंस के लिए चेतावनी चित्रांगदा ने यह भी कहा कि हैक किए गए अकाउंट से किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या मैसेज आ सकते हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। यह अपील खासतौर पर उनके फैंस और फॉलोअर्स के लिए है, ताकि कोई भी गलत जानकारी या धोखाधड़ी का शिकार न हो। सलमान खान के साथ आने वाली फिल्म वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह जल्द ही फिल्म ‘मातृभूमि’ में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म का निर्देशन अपूर्वा लाखिया कर रहे हैं और बताया जा रहा है कि इसकी कहानी 2020 की गलवान घाटी की घटना से प्रेरित है। हालांकि, फिल्म की रिलीज डेट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन फैंस इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साहित हैं। साइबर सुरक्षा पर बढ़ती चिंता यह घटना दिखाती है कि बड़े से बड़े सेलेब्रिटी भी साइबर हमलों से सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक या मैसेज से बचने की जरूरत है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा कदम उठाते हुए Anthropic ने अपना अब तक का सबसे एडवांस मॉडल Claude Mythos Preview पेश किया है। लेकिन इसकी ताकत ही इसकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है-इसी वजह से कंपनी ने इसे आम यूजर्स के लिए फिलहाल लॉन्च नहीं करने का फैसला लिया है। इतना ताकतवर कि खुद कंपनी भी सतर्क Anthropic के CEO Dario Amodei के मुताबिक, Claude Mythos इतनी क्षमता रखता है कि यह हजारों “zero-day vulnerabilities” यानी ऐसी सुरक्षा खामियां ढूंढ सकता है, जिन्हें अब तक इंसान नहीं पकड़ पाए थे। यह मॉडल वेब ब्राउज़र, ऑपरेटिंग सिस्टम और सर्वर सॉफ्टवेयर में गंभीर कमजोरियां पहचान सकता है, जिससे हैकिंग का खतरा भी बढ़ सकता है। OpenBSD और Linux में मिली बड़ी खामियां Claude Mythos ने एक 27 साल पुरानी कमजोरी OpenBSD में खोजी, जो अपनी सुरक्षा के लिए जानी जाती है। इसके अलावा Linux kernel में भी कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिनसे किसी सिस्टम पर पूरा नियंत्रण हासिल किया जा सकता था। 40+ कंपनियों के साथ मिलकर होगा इस्तेमाल इस AI को सीधे जनता के लिए जारी करने की बजाय Anthropic ने इसे एक विशेष प्रोजेक्ट के तहत इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। Project Glasswing के जरिए कंपनी Apple, Google, Microsoft और Amazon Web Services समेत 40 से ज्यादा टेक कंपनियों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा कमजोरियों को ठीक करेगी। $100 मिलियन का बड़ा निवेश Anthropic ने इस प्रोजेक्ट के लिए 100 मिलियन डॉलर तक के मॉडल यूसेज क्रेडिट देने की घोषणा की है, ताकि कंपनियां बड़े स्तर पर सुरक्षा सुधार कर सकें। क्यों नहीं किया जा रहा पब्लिक रिलीज? कंपनी का मानना है कि इतनी शक्तिशाली AI को बिना सुरक्षा उपायों के सार्वजनिक करना जोखिम भरा हो सकता है। अगर गलत हाथों में पहुंचा, तो यह साइबर हमलों को और खतरनाक बना सकता है। AI का नया दौर, नई चुनौतियां Claude Mythos यह दिखाता है कि AI अब सिर्फ टेक्स्ट या कोड तक सीमित नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है। हालांकि, Anthropic का कहना है कि अगर इस तकनीक का सही इस्तेमाल किया गया, तो यह इंटरनेट को पहले से ज्यादा सुरक्षित बना सकता है। Claude Mythos AI के भविष्य की झलक है-जहां तकनीक बेहद शक्तिशाली है, लेकिन उसके इस्तेमाल के लिए उतनी ही सावधानी भी जरूरी है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि AI दुनिया को ज्यादा सुरक्षित बनाएगा या जोखिम बढ़ाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।