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AI Security Tool Access Leak

AI सुरक्षा पर सवाल: Anthropic के ‘Mythos’ टूल तक अनधिकृत पहुंच के दावे की जांच शुरू

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Cybersecurity dashboard showing AI tool breach warning and unauthorized access alert on advanced system
Claude Mythos AI Security Access Leak

 

संवेदनशील AI टूल तक पहुंच का दावा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Anthropic ने अपने बेहद शक्तिशाली साइबर-सिक्योरिटी टूल “Claude Mythos” तक कथित अनधिकृत पहुंच के दावों की जांच शुरू कर दी है।
कंपनी के अनुसार, यह टूल इतना एडवांस है कि इसे आम जनता के लिए जारी नहीं किया गया है।

थर्ड-पार्टी सिस्टम से हुई पहुंच की आशंका

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोगों के एक छोटे समूह ने किसी थर्ड-पार्टी वेंडर के जरिए इस टूल तक पहुंच बना ली। कंपनी ने बयान में कहा कि वह “Claude Mythos Preview” तक बिना अनुमति पहुंच के दावे की गंभीरता से जांच कर रही है।
हालांकि, फिलहाल इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि कंपनी के मुख्य सिस्टम से छेड़छाड़ हुई है।

‘हैक’ नहीं, एक्सेस के दुरुपयोग की संभावना

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पारंपरिक हैकिंग का मामला नहीं हो सकता, बल्कि किसी वैध एक्सेस के गलत इस्तेमाल से यह स्थिति बनी होगी।
बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को पहले से ही कुछ AI मॉडल देखने की अनुमति थी, जिसका फायदा उठाकर यह पहुंच संभव हुई।

क्या है Claude Mythos और क्यों है खतरनाक?

Claude Mythos एक उन्नत AI टूल है, जिसे सिस्टम की कमजोरियों को पहचानने और उन्हें एक्सप्लॉइट करने की क्षमता के लिए जाना जाता है।
इसी वजह से इसे सीमित कंपनियों–खासतौर पर टेक और फाइनेंस सेक्टर–को ही दिया गया है, ताकि वे अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत कर सकें।

AI टूल्स: खतरा या सुरक्षा का नया हथियार?

ब्रिटेन की National Cyber Security Centre के प्रमुख रिचर्ड हॉर्न ने हाल ही में कहा कि एडवांस AI टूल्स सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं तो “कुल मिलाकर फायदेमंद” साबित हो सकते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI तेजी से सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रहा है, जिससे साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी हो गया है।

बढ़ती चिंता: AI कहीं गलत हाथों में न चला जाए

इस घटना ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है–क्या बड़ी AI कंपनियां अपने सबसे ताकतवर टूल्स को सुरक्षित रख पाने में सक्षम हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे टूल्स गलत हाथों में चले गए, तो उनका इस्तेमाल फ्रॉड, साइबर हमलों और अन्य आपराधिक गतिविधियों में हो सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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  टिम कुक के बाद उत्तराधिकारी की चर्चा तेज टेक दिग्गज Apple में नेतृत्व बदलाव को लेकर लंबे समय से अटकलें लग रही थीं। मौजूदा CEO Tim Cook के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में कंपनी के हार्डवेयर प्रमुख John Ternus का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। करीब 25 साल से कंपनी से जुड़े टर्नस को शांत, संतुलित और भरोसेमंद लीडर के तौर पर देखा जाता है। ‘प्रोडक्ट गाइ’ की पहचान, हार्डवेयर पर रहेगा फोकस जॉन टर्नस को कंपनी के भीतर “प्रोडक्ट गाइ” कहा जाता है, यानी उनका झुकाव सीधे प्रोडक्ट डेवलपमेंट और डिजाइन पर रहता है। यह अप्रोच Steve Jobs की सोच से मिलती-जुलती मानी जा रही है, जहां इनोवेशन और यूज़र एक्सपीरियंस को प्राथमिकता दी जाती थी। हालांकि, टर्नस का स्वभाव कुक की तरह ही संयमित और रणनीतिक माना जाता है। AI सबसे बड़ी चुनौती, धीमी रणनीति पर सवाल Apple के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। कंपनी ने अब तक आक्रामक निवेश की बजाय साझेदारी का रास्ता चुना है, जिसमें OpenAI और Google जैसे खिलाड़ियों के साथ काम शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि टर्नस भी इसी “संतुलित रणनीति” को आगे बढ़ा सकते हैं, ताकि जोखिम कम रहे और निवेश सोच-समझकर किया जाए। नए प्रोडक्ट और इनोवेशन की उम्मीद Apple की पहचान हमेशा अपने इनोवेटिव प्रोडक्ट्स से रही है। iPhone ने स्मार्टफोन इंडस्ट्री को बदल दिया था, लेकिन हाल ही में लॉन्च हुआ Apple Vision Pro अपेक्षित सफलता नहीं हासिल कर पाया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या टर्नस अगला बड़ा “गेम-चेंजर” प्रोडक्ट ला पाएंगे – चाहे वह AI आधारित डिवाइस हो या रोबोटिक्स की दिशा में कोई नई पहल। राजनीतिक और वैश्विक दबाव भी बड़ी परीक्षा नई लीडरशिप के सामने सिर्फ टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और सप्लाई चेन की चुनौतियां भी होंगी। खासकर अमेरिका-चीन के रिश्तों और टैरिफ नीतियों का असर Apple के बिजनेस पर पड़ता रहा है। लीडरशिप स्टाइल: शांत या करिश्माई? जहां Steve Jobs अपने करिश्माई अंदाज के लिए जाने जाते थे, वहीं टिम कुक और जॉन टर्नस का स्टाइल ज्यादा शांत और प्रोफेशनल है। अब देखना दिलचस्प होगा कि टर्नस अपने नेतृत्व में कितना खुलापन और व्यक्तिगत पहचान दिखाते हैं, क्योंकि आज के दौर में लीडर्स से “मानवीय जुड़ाव” की भी अपेक्षा बढ़ गई है।

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  क्या होता है सिम नंबर (ICCID)? आपका सिम नंबर, जिसे ICCID (Integrated Circuit Card Identification) कहा जाता है, एक यूनिक पहचान संख्या होती है। यह आमतौर पर 19 या 20 अंकों का होता है और हर सिम कार्ड या eSIM के लिए अलग होता है। यह नंबर मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर को आपके सिम को पहचानने और नेटवर्क से जोड़ने में मदद करता है। सिम पोर्ट करने, नेटवर्क समस्या सुलझाने या नए फोन में eSIM एक्टिवेट करने के दौरान इसकी जरूरत पड़ती है। एंड्रॉइड फोन में ऐसे चेक करें सिम नंबर अगर आप अपने स्मार्टफोन में सिम नंबर देखना चाहते हैं, तो यह सबसे आसान तरीका है: सबसे पहले फोन की Settings में जाएं About Phone या About Device ऑप्शन चुनें अब Status या SIM Card Status पर क्लिक करें नीचे स्क्रॉल करने पर आपको ICCID (SIM Number) दिखाई देगा ध्यान दें कि अलग-अलग ब्रांड के फोन में ये ऑप्शन थोड़ा अलग नाम से हो सकते हैं, लेकिन प्रक्रिया लगभग समान रहती है। सिम कार्ड निकालकर भी देख सकते हैं नंबर अगर सेटिंग्स में सिम नंबर नहीं दिख रहा है, तो आप मैनुअल तरीका अपना सकते हैं: फोन को पहले स्विच ऑफ करें सिम ट्रे को इजेक्टर टूल या पिन से बाहर निकालें सिम कार्ड पर छपा ICCID नंबर ध्यान से पढ़ें यह तरीका लगभग हर फोन में काम करता है, चाहे वह एंड्रॉइड हो या iPhone। डायल कोड से भी मिल सकती है जानकारी कुछ स्मार्टफोन्स में आप डायल पैड से एक खास कोड डालकर भी सिम से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। कई बार ICCID नंबर IMEI के साथ दिखाई देता है। क्यों जरूरी है ICCID नंबर जानना? ICCID नंबर जानना कई स्थितियों में जरूरी हो सकता है– सिम पोर्ट (MNP) के दौरान eSIM एक्टिवेशन में नेटवर्क या कनेक्टिविटी समस्या सुलझाने में एक से ज्यादा सिम मैनेज करने में इसलिए बेहतर है कि आप अपने फोन में इसे एक बार जरूर चेक कर लें।  

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नई दिल्ली: Vivo ने अपने लेटेस्ट स्मार्टफोन Vivo T5 Pro 5G की भारत में पहली सेल शुरू कर दी है। कंपनी के T-सीरीज के इस नए डिवाइस को बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और पावरफुल परफॉर्मेंस के साथ पेश किया गया है। पहली सेल में ग्राहकों को ₹3000 तक का डिस्काउंट भी मिल रहा है। कीमत और ऑफर्स Vivo T5 Pro 5G तीन वेरिएंट में उपलब्ध है: 8GB + 128GB: ₹29,999 8GB + 256GB: ₹33,999 12GB + 256GB: ₹39,999 HDFC, SBI और Axis बैंक कार्ड्स के साथ: बेस वेरिएंट पर ₹2000 तक की छूट अन्य वेरिएंट्स पर ₹3000 तक का डिस्काउंट फोन की बिक्री Flipkart, Vivo की आधिकारिक वेबसाइट और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू हो चुकी है। डिस्प्ले और डिजाइन 6.8-इंच 1.5K AMOLED डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट 5000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस स्लिम डिजाइन, वजन 213 ग्राम यह सेटअप गेमिंग और वीडियो देखने के अनुभव को स्मूद बनाता है। कैमरा फीचर्स 50MP प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट) 2MP पोर्ट्रेट सेंसर 32MP फ्रंट कैमरा फ्रंट और रियर दोनों से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग परफॉर्मेंस Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर 12GB तक RAM और 256GB स्टोरेज वेपर कूलिंग सिस्टम यह फोन मल्टीटास्किंग और हैवी गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। बैटरी और चार्जिंग इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9020mAh बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट बेहतर बैटरी हेल्थ मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर Android 16 पर आधारित सिस्टम लंबे समय तक सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर अपडेट का वादा

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