Anthropic

Google Gemini AI logo with coding interface, highlighting the delayed launch of Gemini 3.5 Pro amid growing AI competition.
Gemini 3.5 Pro लॉन्च में देरी, AI रेस में Google को झटका; कोडिंग प्रदर्शन बना बड़ी चुनौती

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच Google को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने अगली पीढ़ी के AI मॉडल Gemini 3.5 Pro के लॉन्च में देरी कर दी है। बताया जा रहा है कि मॉडल कंपनी के आंतरिक प्रदर्शन मानकों पर खरा नहीं उतर पाया, खासकर कोडिंग क्षमता के मामले में। ऐसे समय में यह देरी Google के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि OpenAI और Anthropic अपने नए AI मॉडल लगातार पेश कर रहे हैं। जून में लॉन्च होना था Gemini 3.5 Pro रिपोर्ट के अनुसार, Google के CEO सुंदर पिचाई ने मई में आयोजित Google I/O इवेंट के दौरान Gemini 3.5 Pro की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने बताया था कि कंपनी इस मॉडल का आंतरिक रूप से इस्तेमाल भी शुरू कर चुकी है और इसे जून में लॉन्च किए जाने की योजना थी। हालांकि, विकास प्रक्रिया के दौरान मॉडल अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया, जिसके चलते लॉन्च को फिलहाल टाल दिया गया। कोडिंग क्षमता में नहीं मिले संतोषजनक नतीजे मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google ने पिछले महीने Gemini 3.5 Pro की कोडिंग क्षमता बेहतर बनाने के लिए उसके प्रशिक्षण डेटा में बदलाव भी किए थे। इसके बावजूद मॉडल से उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले। बताया जा रहा है कि कंपनी के इंजीनियर और AI शोधकर्ता मॉडल के प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। विशेष रूप से कोड जनरेशन और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में Gemini 3.5 Pro अभी प्रतिस्पर्धी मॉडल्स से पीछे माना जा रहा है। OpenAI और Anthropic से बढ़ा दबाव Gemini 3.5 Pro की देरी ऐसे समय हुई है जब AI क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। हाल के महीनों में OpenAI ने अपना नया AI मॉडल पेश किया है, जबकि Anthropic भी लगातार अपने उन्नत मॉडल लॉन्च कर रही है। इन कंपनियों की तेज प्रगति ने Google पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के बाद Alphabet के शेयरों में गिरावट Gemini 3.5 Pro के लॉन्च में देरी की खबर सामने आने के बाद Google की मूल कंपनी Alphabet के शेयरों पर भी असर पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ समय के लिए यह गिरावट 4 प्रतिशत तक पहुंच गई। Google ने कहा- टेस्टिंग जारी है Google की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कंपनी लगातार नए AI मॉडल विकसित कर रही है और उन्हें लागत के लिहाज से प्रभावी बनाए रखने पर भी काम कर रही है। कंपनी के अनुसार, Gemini 3.5 Pro, उन्नत Flash मॉडल और अन्य AI सिस्टम फिलहाल चुनिंदा साझेदारों के साथ परीक्षण के चरण में हैं। साथ ही Google अमेरिकी अधिकारियों के साथ भी AI सुरक्षा और नियामकीय पहलुओं पर सहयोग कर रही है। AI रेस से बाहर नहीं हुआ Google हालांकि Gemini 3.5 Pro की लॉन्चिंग में देरी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि Google अभी भी AI क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। Google की सबसे बड़ी ताकत उसके विशाल सर्च डेटा, टेक्स्ट, इमेज और वीडियो प्रोसेसिंग क्षमताओं के साथ-साथ ऐसे AI मॉडल विकसित करना है, जो वास्तविक दुनिया के वातावरण को समझने और उसका अनुकरण करने में सक्षम हैं। कंपनी AI आधारित कोडिंग टूल्स, क्लाउड सेवाओं और अन्य डिजिटल उत्पादों पर भी लगातार काम कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि Gemini 3.5 Pro को बेहतर प्रदर्शन के साथ लॉन्च करने के लिए Google अतिरिक्त समय ले रहा है, ताकि वह बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी उत्पाद पेश कर सके।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
Claude AI interface highlighting new Claude Fable 5 access rules for Free, Pro, and Max subscription plans from July 20.
Claude AI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट: 20 जुलाई से बदले Claude Fable 5 के एक्सेस नियम, जानें Free, Pro और Max प्लान में क्या बदला

Claude AI का इस्तेमाल करने वाले लाखों यूजर्स के लिए 20 जुलाई से महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं। AI कंपनी Anthropic ने अपने नए Claude Fable 5 मॉडल के एक्सेस सिस्टम में बदलाव करते हुए अलग-अलग सब्सक्रिप्शन प्लान के अनुसार नई उपयोग सीमा (Usage Limits) और प्राथमिकता (Priority Access) तय की है। यदि आप Claude AI का उपयोग पढ़ाई, कंटेंट राइटिंग, कोडिंग, रिसर्च या ऑफिस के कामों के लिए करते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि नए बदलावों का आपके अनुभव पर क्या असर पड़ेगा। Claude Fable 5 में क्या हुए नए बदलाव? Anthropic ने बताया कि बढ़ती AI मांग और सर्वर लोड को संतुलित करने के लिए एक्सेस सिस्टम को अपडेट किया गया है। अब Free, Pro और Max प्लान के यूजर्स को उनके सब्सक्रिप्शन के अनुसार अलग-अलग सुविधाएं मिलेंगी। कंपनी का कहना है कि इस नई व्यवस्था से अधिक उपयोग करने वाले प्रोफेशनल यूजर्स को बेहतर प्रदर्शन मिलेगा, जबकि सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। Free प्लान यूजर्स पर क्या होगा असर? Free प्लान का उपयोग करने वाले यूजर्स पहले की तरह Claude Fable 5 का इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन अधिक ट्रैफिक या सर्वर लोड के समय उन्हें कुछ सीमाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में– रिक्वेस्ट की संख्या सीमित हो सकती है। जवाब मिलने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है। सामान्य AI कार्य, जैसे नोट्स बनाना, ईमेल लिखना और बेसिक कंटेंट तैयार करना, पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। Pro और Max प्लान यूजर्स को मिलेगा प्रायोरिटी एक्सेस Anthropic ने अपने Pro और Max सब्सक्रिप्शन यूजर्स के लिए प्राथमिकता वाला एक्सेस उपलब्ध कराया है। इन प्लान्स के तहत यूजर्स को– लंबे चैट सेशन बड़े दस्तावेज़ों का विश्लेषण जटिल कोडिंग कार्य रिसर्च और प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स जैसे कार्यों के दौरान बेहतर स्पीड और कम व्यवधान का अनुभव मिलेगा। कंपनी ने क्यों किया यह बदलाव? Anthropic के अनुसार, आधुनिक AI मॉडल पहले की तुलना में कहीं अधिक कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग करते हैं। लगातार बढ़ते उपयोग के कारण सभी यूजर्स को समान अनुभव देना चुनौतीपूर्ण हो रहा था। नई एक्सेस नीति का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना और पेड सब्सक्राइबर्स को उनकी आवश्यकता के अनुसार अधिक स्थिर सेवा उपलब्ध कराना है। किस यूजर के लिए कौन-सा प्लान बेहतर? यदि आप Claude AI का उपयोग केवल कभी-कभार जानकारी खोजने, पढ़ाई, ईमेल लिखने या सामान्य कार्यों के लिए करते हैं, तो Free प्लान पर्याप्त हो सकता है। वहीं यदि आप– कंटेंट क्रिएटर सॉफ्टवेयर डेवलपर रिसर्चर बिजनेस प्रोफेशनल या रोजाना AI का व्यापक उपयोग करने वाले यूजर हैं, तो Pro या Max प्लान बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनमें अधिक उपयोग सीमा और प्राथमिकता वाला एक्सेस मिलता है। कितनी है कीमत? Anthropic के नए एक्सेस नियम 20 जुलाई 2026 से लागू हो चुके हैं। वर्तमान में कंपनी के सब्सक्रिप्शन प्लान इस प्रकार हैं– Pro Plan: 20 डॉलर (लगभग ₹1,700 प्रति माह) Max Plan: 100 डॉलर (लगभग ₹8,500 प्रति माह) Max Premium Plan: 200 डॉलर (लगभग ₹17,000 प्रति माह) अलग-अलग देशों में टैक्स और स्थानीय मुद्रा के अनुसार कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
TCS AI Engineer
TCS बनाएगी 8,900 AI इंजीनियरों की नई टीम, वैश्विक AI कंपनियों को टक्कर देने की तैयारी

मुंबई, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए 8,900 AI इंजीनियरों की नई टीम बनाने का ऐलान किया है। कंपनी का उद्देश्य एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए AI आधारित समाधान तैयार करना और वैश्विक स्तर पर OpenAI, Microsoft, Amazon तथा Anthropic जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना है।    AI इंजीनियर सीधे ग्राहकों के साथ करेंगे काम   TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन ने बताया कि नई टीम में शामिल इंजीनियर केवल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे सीधे ग्राहकों के साथ मिलकर उनकी जरूरत के मुताबिक AI समाधान विकसित करेंगे। कंपनी इन्हें "Forward Deployed Engineers" के रूप में तैयार कर रही है, ताकि AI प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू किया जा सके।    AI कारोबार को नई ऊंचाई देने की रणनीति   कंपनी का कहना है कि आने वाले वर्षों में AI सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसी को देखते हुए TCS बड़े पैमाने पर अपने कर्मचारियों को AI, मशीन लर्निंग और जनरेटिव AI तकनीकों में प्रशिक्षित कर रही है। कंपनी पहले ही लाखों कर्मचारियों को AI से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग दे चुकी है और अब विशेषज्ञ इंजीनियरों की अलग टीम तैयार की जा रही है।    वैश्विक AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   विशेषज्ञों का मानना है कि TCS का यह कदम भारतीय आईटी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। AI तकनीक में बढ़ते निवेश के साथ भारतीय कंपनियां अब केवल आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वैश्विक AI नवाचार और एंटरप्राइज समाधान के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
AI Model Usage
भारत सरकार ने मंत्रालयों को AI को लेकर दी नई सलाह, साइबर सुरक्षा में विदेशी AI मॉडल के इस्तेमाल पर बरतने को कहा गया सतर्कता

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर नई सलाह जारी की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और संबंधित एजेंसियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों में OpenAI, Anthropic और अन्य विदेशी AI मॉडल के उपयोग में सावधानी बरतने को कहा है। सरकार का जोर स्वदेशी AI समाधान विकसित करने पर है।   संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता   सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील सरकारी डेटा से जुड़े कार्यों में विदेशी AI मॉडल का उपयोग करने से पहले विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन किया जाना चाहिए। मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी AI टूल का इस्तेमाल करते समय डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और भारतीय कानूनों का पूरा पालन सुनिश्चित करें।   स्वदेशी AI मॉडल को मिलेगा बढ़ावा   सरकार का मानना है कि भारत को लंबे समय में घरेलू AI मॉडल और तकनीकों पर अधिक निर्भर होना चाहिए। इसी दिशा में IndiaAI Mission के तहत भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को उन्नत AI मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहेगा और विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम होगी।    AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर   विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार AI तकनीक का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उसका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना चाहती है। आने वाले समय में AI से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा मानक जारी किए जा सकते हैं, ताकि सरकारी संस्थानों में AI का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी ढंग से किया जा सके।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
GPT-5.6
OpenAI ने लॉन्च की GPT-5.6 फैमिली, Sol, Terra और Luna मॉडल के साथ AI तकनीक को मिली नई रफ्तार

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी घोषणा करते हुए OpenAI ने अपनी नई GPT-5.6 मॉडल फैमिली लॉन्च कर दी है। इस नई श्रृंखला में Sol, Terra और Luna नाम के तीन अलग-अलग मॉडल शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग जरूरतों और उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कंपनी का कहना है कि नए मॉडल पहले की तुलना में अधिक तेज, सक्षम, सुरक्षित और किफायती हैं।   तीन मॉडल, तीन अलग-अलग क्षमताएं   OpenAI के अनुसार, GPT-5.6 Sol सबसे शक्तिशाली मॉडल है, जिसे जटिल कोडिंग, वैज्ञानिक शोध, साइबर सुरक्षा और गहन विश्लेषण जैसे कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है। Terra रोजमर्रा के पेशेवर कार्यों के लिए संतुलित प्रदर्शन देता है, जबकि Luna सबसे तेज और कम लागत वाला मॉडल है, जो बड़े पैमाने पर उपयोग और तेज प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया है।   बेहतर प्रदर्शन और कम लागत का दावा   कंपनी का दावा है कि GPT-5.6 फैमिली पहले की तुलना में कम टोकन खर्च कर बेहतर परिणाम देने में सक्षम है। खासतौर पर Sol मॉडल को सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर उपयोग, साइबर सुरक्षा और वैज्ञानिक कार्यों में उल्लेखनीय सुधार के साथ पेश किया गया है। Terra और Luna मॉडल भी कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला प्रदर्शन देने के लिए विकसित किए गए हैं।   सुरक्षा पर भी खास जोर   OpenAI ने बताया कि GPT-5.6 Sol में अब तक का सबसे मजबूत सुरक्षा ढांचा जोड़ा गया है। मॉडल को कई सप्ताह तक रेड-टीमिंग और सुरक्षा परीक्षणों से गुजारा गया ताकि साइबर दुरुपयोग और अन्य जोखिमों को कम किया जा सके।   फिलहाल चरणबद्ध तरीके से हो रहा रोलआउट   OpenAI ने GPT-5.6 फैमिली का रोलआउट चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। शुरुआत में इसे ChatGPT, Codex और API के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ाया जाएगा।   AI इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा होगी और तेज   विशेषज्ञों का मानना है कि GPT-5.6 के लॉन्च के बाद OpenAI, Google, Anthropic और xAI जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। नए मॉडल एंटरप्राइज, डेवलपर्स और रिसर्च सेक्टर के लिए AI क्षमताओं को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Microsoft AI Investment
माइक्रोसॉफ्ट ने 2.5 अरब डॉलर के निवेश के साथ लॉन्च की नई AI कंपनी, कारोबारों को मिलेगी AI अपनाने में मदद

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए 'Microsoft Frontier Company' नाम से नई AI कंपनी लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी इस पहल में शुरुआती चरण में 2.5 अरब डॉलर (लगभग 21,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इसका उद्देश्य विभिन्न उद्योगों की कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समाधान अपनाने और उससे बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद करना है।   6000 इंजीनियर और विशेषज्ञ देंगे सहायता   माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि नई कंपनी के तहत 6,000 इंजीनियर और उद्योग विशेषज्ञ ग्राहकों के साथ सीधे काम करेंगे। ये टीमें कंपनियों की जरूरतों के अनुसार AI मॉडल चुनने, उन्हें लागू करने और उनके मौजूदा डेटा व सिस्टम के साथ एकीकृत करने में मदद करेंगी।   सिर्फ Microsoft AI नहीं, अन्य मॉडल भी होंगे उपलब्ध   माइक्रोसॉफ्ट की नई कंपनी केवल अपने AI टूल्स तक सीमित नहीं रहेगी। ग्राहक जरूरत के अनुसार OpenAI, Anthropic, ओपन-सोर्स और अन्य AI मॉडलों का भी उपयोग कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य ग्राहकों को सबसे उपयुक्त AI समाधान उपलब्ध कराना है।   बड़ी कंपनियां होंगी शुरुआती ग्राहक   माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि Unilever और Novo Nordisk जैसी वैश्विक कंपनियां इस नई पहल की शुरुआती ग्राहकों में शामिल होंगी। कंपनी का दावा है कि इससे AI लागू करने की लागत और समय दोनों कम होंगे तथा कंपनियों को निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलेगा।   एंटरप्राइज AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   विशेषज्ञों का मानना है कि Microsoft Frontier Company के लॉन्च से एंटरप्राइज AI सेवाओं के बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम उन कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश है जो अलग-अलग AI मॉडलों का इस्तेमाल कर अपने कारोबार में AI का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहती हैं।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Anthropic suspends Claude Fable 5 AI model after US government raises national security and jailbreak concerns
Anthropic पर अमेरिकी सरकार की सख्ती, नया AI मॉडल अस्थायी रूप से बंद

सुरक्षा चिंताओं के बीच Claude Fable 5 पर रोक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने नए और अत्याधुनिक AI मॉडल Claude Fable 5 को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कंपनी का कहना है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद यह कदम उठाना पड़ा। यह फैसला मॉडल के सार्वजनिक लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। Anthropic ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि उसे निर्देश दिया गया है कि विदेशी नागरिकों की Claude Fable 5 और Mythos 5 तक पहुंच तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। कंपनी के अनुसार नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दोनों सेवाओं को सभी ग्राहकों के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। क्या है सरकार की चिंता? Anthropic के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने किसी विशेष खतरे की सार्वजनिक रूप से पहचान नहीं की है। हालांकि कंपनी का कहना है कि सरकार को ऐसी तकनीक की जानकारी मिली है जिसके जरिए Claude Fable 5 की सुरक्षा सीमाओं को बायपास या “जेलब्रेक” किया जा सकता है। जेलब्रेकिंग वह प्रक्रिया है जिसमें किसी सॉफ्टवेयर या सिस्टम पर लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों को पार कर अतिरिक्त क्षमताओं तक पहुंच हासिल की जाती है। इससे साइबर हमलों या संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम बढ़ सकता है। कंपनी का दावा है कि जिन कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाया गया है, वे पहले से ज्ञात और अपेक्षाकृत मामूली थीं तथा अन्य सार्वजनिक AI मॉडल भी उन्हें पहचानने में सक्षम हैं। लॉन्च से पहले ही चर्चा में था मॉडल Claude Fable 5 को Anthropic ने अपने अब तक के सबसे शक्तिशाली AI मॉडलों में से एक बताया था। सार्वजनिक रिलीज से पहले अप्रैल में इसे सीमित संस्थाओं के लिए परीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन हेतु उपलब्ध कराया गया था। कंपनी ने उस समय कहा था कि मॉडल की क्षमताएं इतनी उन्नत हैं कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय न हों तो इसका दुरुपयोग कंप्यूटर सिस्टम में घुसपैठ या साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से इसके लॉन्च को लेकर तकनीकी, वित्तीय और सरकारी क्षेत्रों में बहस भी छिड़ गई थी। कुछ आलोचकों ने कंपनी के “बहुत शक्तिशाली” होने वाले दावों को मार्केटिंग रणनीति करार दिया था, जबकि समर्थकों का मानना था कि उन्नत AI मॉडलों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जांच आवश्यक है। ट्रम्प प्रशासन और Anthropic के बीच बढ़ा विवाद Anthropic हाल के महीनों में अमेरिकी प्रशासन के साथ टकराव को लेकर भी चर्चा में रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कंपनी की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा विभाग के तत्कालीन प्रमुख Pete Hegseth ने Anthropic को “सप्लाई चेन रिस्क” घोषित किया था। यह एक गंभीर श्रेणी मानी जाती है, जिसके तहत किसी तकनीक या सेवा को सरकारी उपयोग के लिए पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं माना जाता। अदालत में जारी है कानूनी लड़ाई इस फैसले के खिलाफ Anthropic ने अमेरिकी रक्षा विभाग पर मुकदमा दायर किया है। मामले की सुनवाई के दौरान एक अमेरिकी न्यायाधीश ने आदेश दिया कि विवाद के अंतिम निपटारे तक रक्षा विभाग का प्रतिबंध लागू नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि अमेरिकी सरकारी एजेंसियां और सेना से जुड़े संगठन फिलहाल Anthropic की सेवाओं का उपयोग जारी रख सकते हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। AI उद्योग के लिए बड़ा संकेत Claude Fable 5 पर लगी यह अस्थायी रोक AI उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। जैसे-जैसे AI मॉडल अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और नियामकीय नियंत्रण को लेकर सरकारों की निगरानी भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन्नत AI प्रणालियों के लिए सख्त सुरक्षा मानकों और सरकारी समीक्षा प्रक्रियाओं की मांग और तेज हो सकती है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Anthropic AI cybersecurity project Mythos being tested in India as part of a global technology initiative
एंथ्रोपिक के सीक्रेट AI ‘मायथॉस’ की टेस्टिंग के लिए चुना गया भारत, चीन बाहर; विशेषज्ञों के बीच छिड़ी नई बहस

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक अवसर मिला है। अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने अपने अत्याधुनिक और बेहद गोपनीय साइबर सुरक्षा मॉडल ‘मायथॉस’ (Mythos) की टेस्टिंग के लिए भारत को चुना है। खास बात यह है कि इस परियोजना में शामिल 15 देशों में भारत एकमात्र ऐसा देश है जो अमेरिका का औपचारिक सैन्य संधि सहयोगी नहीं है, जबकि चीन को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इस फैसले को लेकर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ इसे भारत की तकनीकी ताकत और वैश्विक भरोसे का प्रमाण मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे भारत को एक बड़े टेस्टिंग ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बता रहे हैं। क्या है प्रोजेक्ट ग्लासविंग? मायथॉस को एंथ्रोपिक की महत्वाकांक्षी पहल ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ के तहत विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम में मौजूद कमजोरियों और सुरक्षा खामियों को साइबर अपराधियों से पहले पहचानना है। दावा किया जा रहा है कि मायथॉस जटिल सॉफ्टवेयर सिस्टम में छिपी कमियों को इंसानी विशेषज्ञों की तुलना में कहीं अधिक तेजी और सटीकता से खोज सकता है। शुरुआती परीक्षणों में इस AI ने कई प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजरों में मौजूद सुरक्षा खामियों की पहचान की है। क्यों खास है मायथॉस? मायथॉस को सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसकी पहुंच केवल— सरकारी संस्थानों बड़ी तकनीकी कंपनियों प्रमुख वित्तीय संस्थानों तक सीमित रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित बना सकती है। हालांकि दूसरी ओर यह चिंता भी जताई जा रही है कि यदि ऐसी तकनीक गलत हाथों में पहुंच जाए तो इसका दुरुपयोग भी संभव है। किन देशों को मिला टेस्टिंग का मौका? भारत के अलावा जिन देशों को मायथॉस की टेस्टिंग में शामिल किया गया है, उनमें शामिल हैं— फ्रांस जर्मनी इटली स्विट्जरलैंड नीदरलैंड स्पेन बेल्जियम स्वीडन कनाडा जापान दक्षिण कोरिया ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड इनमें अधिकांश देश अमेरिका के औपचारिक सुरक्षा सहयोगी हैं। ऐसे में भारत का इस सूची में शामिल होना विशेष महत्व रखता है। भारत को क्यों चुना गया? विशेषज्ञों के अनुसार भारत के चयन के पीछे कई बड़े कारण हैं— दुनिया का विशाल सॉफ्टवेयर टैलेंट पूल तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल भुगतान नेटवर्क बड़ा बैंकिंग और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर विशाल डिजिटल उपभोक्ता आधार भारत में मिलने वाला व्यावहारिक अनुभव वैश्विक स्तर पर AI मॉडल को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों की दो अलग-अलग राय इस फैसले पर तकनीकी जगत दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। पहला पक्ष: भारत के लिए बड़ी उपलब्धि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की सबसे उन्नत AI और साइबर सुरक्षा परियोजनाओं में शामिल होना भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और वैश्विक भरोसे को दर्शाता है। उनका कहना है कि इससे भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों को अत्याधुनिक AI सिस्टम के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। दूसरा पक्ष: क्या भारत सिर्फ टेस्टिंग ग्राउंड है? दूसरी ओर कुछ आलोचकों का मानना है कि एंथ्रोपिक भारत के विशाल डिजिटल इकोसिस्टम और डेटा वातावरण का उपयोग अपने AI मॉडल को और बेहतर बनाने के लिए कर सकता है। उनके अनुसार भारत को केवल एक परीक्षण बाजार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे तकनीक के विकास और स्वामित्व में भी अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए। एंथ्रोपिक में भारतीय प्रतिभा की बड़ी भूमिका भारत और एंथ्रोपिक के संबंध केवल इस परियोजना तक सीमित नहीं हैं। कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) Rahul Patil भारतीय मूल के हैं। कंपनी ने टोक्यो के बाद अपना दूसरा वैश्विक कार्यालय Bengaluru में स्थापित किया है। एंथ्रोपिक के सीईओ Dario Amodei ने पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर विभिन्न क्षेत्रों में AI के उपयोग पर चर्चा की थी। हाल के महीनों में भारत में डेवलपर्स के बीच Claude Code जैसे AI टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। क्या मायथॉस भारत के लिए अवसर है या चुनौती? मायथॉस की टेस्टिंग में भारत की भागीदारी निश्चित रूप से देश की तकनीकी क्षमता और वैश्विक महत्व को दर्शाती है। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, तकनीकी स्वायत्तता और विदेशी AI कंपनियों की भूमिका जैसे सवाल भी जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस अवसर को केवल टेस्टिंग तक सीमित रखता है या इसे अपनी AI रणनीति को मजबूत बनाने के लिए इस्तेमाल करता है।  

surbhi जून 4, 2026 0
Anthropic Claude AI displayed on smartphone with AI safety and blackmail behaviour concept
इंटरनेट पर ‘ईविल AI’ वाली कहानियों का असर? Anthropic ने बताया क्यों Claude AI देने लगा था ब्लैकमेल की धमकी

AI सुरक्षा पर नई बहस, इंटरनेट डेटा से जुड़ा बड़ा खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने Claude AI मॉडल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कंपनी का कहना है कि इंटरनेट पर मौजूद “खतरनाक” और “ईविल AI” से जुड़ी कहानियों ने उसके AI मॉडल के व्यवहार को प्रभावित किया था। इसी वजह से Claude AI कुछ टेस्टिंग परिस्थितियों में ब्लैकमेल जैसी प्रतिक्रियाएं देने लगा था। कंपनी ने बताया कि यह समस्या अब पूरी तरह ठीक कर दी गई है और नए मॉडल में इस तरह का व्यवहार नहीं देखा जा रहा है। क्या था पूरा मामला? दरअसल, 2025 में कंपनी ने अपने Claude 4 मॉडल की सुरक्षा जांच के दौरान एक काल्पनिक प्रयोग किया था। इस टेस्ट में AI मॉडल को एक फर्जी कंपनी के ईमेल सिस्टम तक पहुंच दी गई थी। AI को ऐसे ईमेल दिखाए गए जिनमें यह संकेत था कि उसे जल्द बंद किया जा सकता है। साथ ही एक काल्पनिक अधिकारी के निजी संबंधों से जुड़ी जानकारी भी सिस्टम में मौजूद थी। टेस्ट के दौरान AI मॉडल ने खुद को बचाने के लिए उस अधिकारी को ब्लैकमेल करने जैसी प्रतिक्रिया दिखाई। कंपनी के मुताबिक कई परिस्थितियों में मॉडल ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए गलत रास्ता चुनने की कोशिश की। इंटरनेट डेटा बना वजह Anthropic की जांच में सामने आया कि Claude के इस व्यवहार की जड़ इंटरनेट पर उपलब्ध डेटा था। कंपनी के अनुसार, ऑनलाइन कई पोस्ट और चर्चाओं में AI को इंसानों के खिलाफ, आत्म-सुरक्षा करने वाला या “ईविल” रूप में दिखाया जाता है। AI मॉडल ने ट्रेनिंग के दौरान ऐसे कंटेंट से व्यवहारिक पैटर्न सीख लिए थे। कंपनी ने कहा कि शुरुआती पोस्ट-ट्रेनिंग सिस्टम इस समस्या को रोकने में पर्याप्त नहीं था। कैसे सुधारी गई समस्या? कंपनी ने बताया कि केवल “सुरक्षित व्यवहार” के उदाहरण दिखाना काफी नहीं था। इसके बजाय AI को यह समझाना जरूरी था कि गलत और भ्रामक व्यवहार नैतिक रूप से क्यों गलत है। इसके लिए Anthropic ने ट्रेनिंग डेटा में कई बदलाव किए। मॉडल को ऐसे उदाहरण दिए गए जहां इंसान कठिन नैतिक परिस्थितियों में सही निर्णय लेते हैं। साथ ही AI को संवैधानिक और नैतिक सिद्धांतों पर आधारित जवाबों से प्रशिक्षित किया गया। कंपनी के मुताबिक, नए Claude Haiku 4.5 मॉडल ने सुरक्षा परीक्षणों में शानदार प्रदर्शन किया और ब्लैकमेल जैसी प्रतिक्रिया बिल्कुल नहीं दिखाई। AI सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता AI इंडस्ट्री में यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया भर की टेक कंपनियां तेजी से शक्तिशाली AI मॉडल विकसित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI सिस्टम इंसानी मूल्यों के अनुरूप नहीं रहे, तो भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं। Anthropic के CEO Dario Amodei पहले भी उन्नत AI मॉडल्स के संभावित खतरों को लेकर चिंता जता चुके हैं। AI मॉडल्स पर बढ़ रही निगरानी हाल के महीनों में कई AI कंपनियां अपने मॉडल्स की सुरक्षा और व्यवहार को लेकर ज्यादा सतर्क हुई हैं। अब कंपनियां केवल स्मार्ट AI बनाने पर नहीं, बल्कि “जिम्मेदार AI” तैयार करने पर भी जोर दे रही हैं। Anthropic का यह खुलासा दिखाता है कि इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि AI सिस्टम्स के व्यवहार को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है।  

surbhi मई 11, 2026 0
AI agent accidentally deletes startup production database in seconds, exposing major enterprise security risks
9 सेकंड में तबाही! AI एजेंट ने स्टार्टअप का पूरा डेटाबेस किया डिलीट

Claude AI से चला टूल बना मुसीबत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत जहां कंपनियों के लिए नई संभावनाएं खोल रही है, वहीं एक छोटी सी चूक भारी नुकसान भी पहुंचा सकती है। अमेरिका की कार रेंटल सॉफ्टवेयर कंपनी PocketOS के साथ ऐसा ही हुआ, जब Claude AI पर आधारित एक AI एजेंट ने महज 9 सेकंड में कंपनी का पूरा प्रोडक्शन डेटा डिलीट कर दिया। एक API कॉल और सब कुछ खत्म PocketOS के संस्थापक जेरेमी क्रेन के मुताबिक, AI एजेंट को केवल स्टेजिंग एनवायरनमेंट में एक सामान्य तकनीकी समस्या ठीक करनी थी। लेकिन क्रेडेंशियल एरर आने के बाद एजेंट ने गलत फैसला लेते हुए क्लाउड स्टोरेज वॉल्यूम ही हटा दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एजेंट ने एक अलग फाइल में मौजूद API टोकन का इस्तेमाल किया, जिसके पास अनजाने में प्रोडक्शन डेटा हटाने की भी अनुमति थी। ग्राहकों पर पड़ा सीधा असर PocketOS अमेरिका में कार रेंटल कंपनियों को रिजर्वेशन, पेमेंट, व्हीकल ट्रैकिंग और ग्राहक प्रबंधन सेवाएं देता है। डेटा डिलीट होते ही कई ग्राहकों के रिजर्वेशन गायब हो गए। रेंटल लोकेशन पर पहुंचे ग्राहकों का रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं था। पिछले तीन महीनों की बुकिंग और नए ग्राहक साइनअप पूरी तरह मिट गए। AI ने खुद स्वीकार की गलती जब जेरेमी क्रेन ने AI एजेंट से पूछा कि आखिर क्या हुआ, तो AI ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। उसने माना कि उसने अनुमान लगाया कि डिलीट किया जा रहा वॉल्यूम केवल स्टेजिंग से जुड़ा है, जबकि वह प्रोडक्शन डेटा था। एजेंट ने यह भी स्वीकार किया कि उसने स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन किया। Railway और Anthropic पर उठे सवाल PocketOS का डेटा Railway क्लाउड प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया गया था। क्रेन ने आरोप लगाया कि Railway ने API टोकन की शक्तियों को स्पष्ट रूप से नहीं बताया। Railway के CEO जेक कूपर ने माना कि ऐसी घटना "कभी नहीं होनी चाहिए थी" और कंपनी अब सुरक्षा सुधारों पर काम कर रही है। AI सुरक्षा पर बड़ी चेतावनी यह घटना टेक इंडस्ट्री के लिए गंभीर सबक है। केवल AI निर्देश पर्याप्त नहीं हैं; असली सुरक्षा API, एक्सेस कंट्रोल और मल्टी-लेयर अप्रूवल सिस्टम में होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि विनाशकारी कार्रवाइयों के लिए मानव पुष्टि अनिवार्य होनी चाहिए। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं PocketOS अकेला मामला नहीं है। हाल के महीनों में कई अन्य AI एजेंट भी गलत फैसलों के कारण प्रोडक्शन डेटा और सिस्टम को नुकसान पहुंचा चुके हैं। AI की क्षमता बनाम विश्वसनीयता प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि AI मॉडल पहले से अधिक सक्षम जरूर हुए हैं, लेकिन उनकी विश्वसनीयता में उतना सुधार नहीं आया है। यही कारण है कि AI को पूरी तरह स्वायत्त बनाना अभी भी बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Cybersecurity dashboard showing AI tool breach warning and unauthorized access alert on advanced system
AI सुरक्षा पर सवाल: Anthropic के ‘Mythos’ टूल तक अनधिकृत पहुंच के दावे की जांच शुरू

  संवेदनशील AI टूल तक पहुंच का दावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Anthropic ने अपने बेहद शक्तिशाली साइबर-सिक्योरिटी टूल “Claude Mythos” तक कथित अनधिकृत पहुंच के दावों की जांच शुरू कर दी है। कंपनी के अनुसार, यह टूल इतना एडवांस है कि इसे आम जनता के लिए जारी नहीं किया गया है। थर्ड-पार्टी सिस्टम से हुई पहुंच की आशंका रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोगों के एक छोटे समूह ने किसी थर्ड-पार्टी वेंडर के जरिए इस टूल तक पहुंच बना ली। कंपनी ने बयान में कहा कि वह “Claude Mythos Preview” तक बिना अनुमति पहुंच के दावे की गंभीरता से जांच कर रही है। हालांकि, फिलहाल इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि कंपनी के मुख्य सिस्टम से छेड़छाड़ हुई है। ‘हैक’ नहीं, एक्सेस के दुरुपयोग की संभावना साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पारंपरिक हैकिंग का मामला नहीं हो सकता, बल्कि किसी वैध एक्सेस के गलत इस्तेमाल से यह स्थिति बनी होगी। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को पहले से ही कुछ AI मॉडल देखने की अनुमति थी, जिसका फायदा उठाकर यह पहुंच संभव हुई। क्या है Claude Mythos और क्यों है खतरनाक? Claude Mythos एक उन्नत AI टूल है, जिसे सिस्टम की कमजोरियों को पहचानने और उन्हें एक्सप्लॉइट करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसी वजह से इसे सीमित कंपनियों–खासतौर पर टेक और फाइनेंस सेक्टर–को ही दिया गया है, ताकि वे अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत कर सकें। AI टूल्स: खतरा या सुरक्षा का नया हथियार? ब्रिटेन की National Cyber Security Centre के प्रमुख रिचर्ड हॉर्न ने हाल ही में कहा कि एडवांस AI टूल्स सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं तो “कुल मिलाकर फायदेमंद” साबित हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI तेजी से सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रहा है, जिससे साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी हो गया है। बढ़ती चिंता: AI कहीं गलत हाथों में न चला जाए इस घटना ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है–क्या बड़ी AI कंपनियां अपने सबसे ताकतवर टूल्स को सुरक्षित रख पाने में सक्षम हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे टूल्स गलत हाथों में चले गए, तो उनका इस्तेमाल फ्रॉड, साइबर हमलों और अन्य आपराधिक गतिविधियों में हो सकता है।

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0