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India Tightens Crypto Tax Reporting Rules

Crypto Tax Reporting: सरकार ने क्रिप्टो लेनदेन पर बढ़ाई निगरानी, निवेशकों और टैक्सपेयर्स के लिए क्या बदलेगा?

surbhi जुलाई 28, 2026 0
Cryptocurrency coins with tax documents and a digital compliance dashboard representing India's new crypto transaction reporting rules.
India Crypto Tax Reporting Rules 2026

नई दिल्ली: भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन की निगरानी और टैक्स अनुपालन (Tax Compliance) को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने एक विस्तृत गाइडेंस नोट जारी किया है, जिसके तहत क्रिप्टो एक्सचेंज, ब्रोकर और अन्य रिपोर्टिंग क्रिप्टो-एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (RCASP) को अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को उपलब्ध करानी होगी।

हालांकि, इस गाइडेंस नोट के साथ क्रिप्टो टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अब निवेशकों द्वारा दी गई जानकारी और वास्तविक लेनदेन का मिलान (Cross Verification) पहले से अधिक सख्ती से किया जा सकेगा।

सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?

यह पहल Organisation for Economic Co-operation and Development (OECD) द्वारा विकसित Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) के अनुरूप उठाई गई है। भारत समेत कई देशों ने इस फ्रेमवर्क को अपनाने की दिशा में काम शुरू किया है।

CARF का उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच क्रिप्टो लेनदेन से जुड़ी जानकारी साझा करना और टैक्स चोरी या गलत रिपोर्टिंग की संभावनाओं को कम करना है।

निवेशकों के लिए क्या होंगे मायने?

अब तक कई निवेशक अपने सभी क्रिप्टो ट्रेड, खासकर विदेशी प्लेटफॉर्म पर किए गए लेनदेन, आयकर रिटर्न में सही तरीके से दर्ज नहीं करते थे। नए रिपोर्टिंग सिस्टम के लागू होने के बाद—

  • क्रिप्टो एक्सचेंज सीधे आयकर विभाग को लेनदेन की जानकारी देंगे।
  • निवेशकों द्वारा दी गई जानकारी का वास्तविक ट्रांजैक्शन से मिलान किया जाएगा।
  • Annual Information Statement (AIS) और अन्य टैक्स रिकॉर्ड अधिक सटीक बन सकेंगे।
  • गलत या अधूरी जानकारी देने की संभावना कम होगी।

हालांकि, सामान्य करदाताओं पर कोई नया रिपोर्टिंग दायित्व नहीं लगाया गया है, लेकिन अब सही जानकारी देना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।

क्या टैक्स नियमों में कोई बदलाव हुआ है?

CBDT के इस गाइडेंस नोट के बावजूद क्रिप्टोकरेंसी पर लागू मौजूदा टैक्स नियम पहले जैसे ही रहेंगे।

  • वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) से होने वाले लाभ पर 30% फ्लैट टैक्स लागू रहेगा।
  • क्रिप्टो ट्रेडिंग में हुए नुकसान (Loss) को किसी अन्य आय या पूंजीगत लाभ से समायोजित (Offset) नहीं किया जा सकता।
  • ऐसे नुकसान को भविष्य के वर्षों में Carry Forward करने की भी अनुमति नहीं है।
  • भारत में क्रिप्टोकरेंसी अभी भी लीगल टेंडर (Legal Tender) नहीं है।

एक्सचेंजों की क्या जिम्मेदारी होगी?

नए दिशा-निर्देशों के तहत क्रिप्टो एक्सचेंज और अन्य RCASP को—

  • ग्राहकों की KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  • टैक्स रेजिडेंसी की पुष्टि करनी होगी।
  • सभी पात्र लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा।
  • वार्षिक ट्रांजैक्शन रिपोर्ट आयकर विभाग को उपलब्ध करानी होगी।

इस व्यवस्था के बाद आयकर विभाग के लिए क्रिप्टो एक्सचेंज सूचना का प्रमुख स्रोत बन जाएंगे।

विशेषज्ञों की राय

Mudrex के CEO एडुल पटेल के अनुसार, CARF के अनुरूप रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू होने से भारत मौजूदा टैक्स ढांचे में बदलाव किए बिना क्रिप्टो एसेट्स को अधिक पारदर्शी वित्तीय रिपोर्टिंग सिस्टम में शामिल कर रहा है।

उनका मानना है कि यह कदम भविष्य में निवेशकों की सुरक्षा, बेहतर नियमन और उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Hero Vida की बिक्री में बड़ी छलांग, इलेक्ट्रिक स्कूटर ने पार किया 1 लाख यूनिट का आंकड़ा

मुंबई, एजेंसियां। Hero MotoCorp की इलेक्ट्रिक स्कूटर ब्रांड VIDA ने 2026 की पहली छमाही में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की इलेक्ट्रिक स्कूटर बिक्री 1 लाख यूनिट के पार पहुंच गई है, जिससे भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में VIDA की पकड़ मजबूत होती दिख रही है।   6 महीने में 1.02 लाख से ज्यादा स्कूटर बिके   रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच VIDA ने कुल 1,02,197 इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री दर्ज की। जून 2026 में कंपनी की बिक्री 20 हजार यूनिट से अधिक रही, जो अब तक के सबसे मजबूत महीनों में से एक रही। Hero MotoCorp की इलेक्ट्रिक रणनीति को इस बढ़ती बिक्री से मजबूती मिली है। कंपनी लगातार नए मॉडल और बेहतर बैटरी तकनीक के साथ बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।   VIDA VX2 Plus ने बढ़ाई कंपनी की उम्मीदें   Hero Vida ने हाल ही में VIDA VX2 Plus 4.4 kWh वेरिएंट पेश किया है। इस मॉडल में बड़ी बैटरी दी गई है, जिससे कंपनी के अनुसार इसकी IDC रेंज करीब 187 किलोमीटर तक है। इसमें 4.4 kWh बैटरी पैक और बेहतर परफॉर्मेंस फीचर्स दिए गए हैं। नए मॉडल के जरिए कंपनी उन ग्राहकों को आकर्षित करना चाहती है, जो ज्यादा रेंज और भरोसेमंद इलेक्ट्रिक स्कूटर की तलाश में हैं।   किफायती EV बाजार पर कंपनी की नजर   Hero MotoCorp इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए नए किफायती मॉडल लाने की तैयारी में है। कंपनी की योजना ज्यादा ग्राहकों तक इलेक्ट्रिक वाहन पहुंचाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में VIDA का विस्तार Hero MotoCorp के लिए भविष्य के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।   EV बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में Hero MotoCorp के अलावा कई बड़ी कंपनियां सक्रिय हैं। बढ़ती मांग के बीच कंपनियां ज्यादा रेंज, कम कीमत और बेहतर चार्जिंग सुविधा देकर ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। VIDA की बिक्री में आई तेजी से साफ है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में मुकाबला और तेज होने वाला है। आने वाले समय में नए मॉडल और तकनीक के साथ यह सेगमेंट और तेजी से बढ़ सकता है।

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नई दिल्ली: चीन की मेमोरी चिप निर्माता ChangXin Memory Technologies (CXMT) ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत करते हुए निवेशकों को चौंका दिया। कंपनी के शेयर लिस्टिंग के पहले ही दिन करीब 500% तक उछल गए, जिसके बाद इसका बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) 500 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। इसके साथ ही CXMT चीन की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध (Listed) कंपनी बन गई है। तुलना करें तो भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप लगभग 180 अरब डॉलर के आसपास है। यानी CXMT का बाजार मूल्य रिलायंस से करीब तीन गुना अधिक बताया जा रहा है। क्या है CXMT? ChangXin Memory Technologies (CXMT) चीन की प्रमुख DRAM (Dynamic Random Access Memory) चिप निर्माता कंपनी है। DRAM चिप्स का उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, सर्वर, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम में अस्थायी डेटा स्टोर करने के लिए किया जाता है। AI तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग ने DRAM चिप्स की वैश्विक मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिसका सबसे बड़ा फायदा CXMT जैसी कंपनियों को मिला है। IPO के बाद क्यों मची हलचल? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने IPO के जरिए करीब 8.6 अरब डॉलर जुटाए। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद निवेशकों की जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिससे कंपनी के शेयरों में करीब 500% की तेजी आ गई। यह उछाल इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन के निवेशक घरेलू सेमीकंडक्टर और चिप कंपनियों के भविष्य को लेकर काफी आशावादी हैं। AI बूम से मिला बड़ा फायदा दुनियाभर में AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी ट्रेंड का फायदा CXMT को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर के विस्तार के साथ मेमोरी चिप उद्योग में आने वाले वर्षों में भी मजबूत मांग बनी रह सकती है। चीन के लिए क्यों है रणनीतिक कंपनी? CXMT चीन की उस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विदेशी तकनीक और आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करना है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक और चिप निर्माण उपकरणों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद चीन ने घरेलू चिप उद्योग को तेजी से मजबूत करने पर जोर दिया है। ऐसे में CXMT को चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कंपनी माना जा रहा है। अभी भी हैं बड़ी चुनौतियां हालांकि CXMT दुनिया की प्रमुख DRAM कंपनियों में शामिल हो चुकी है, लेकिन अत्याधुनिक HBM (High Bandwidth Memory) चिप तकनीक में यह अभी भी पीछे मानी जाती है। HBM चिप्स AI प्रोसेसर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में फिलहाल Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। अमेरिकी प्रतिबंध भी बन सकते हैं चुनौती CXMT के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में अमेरिकी प्रतिबंध शामिल हैं। हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग ने कंपनी को चीनी सैन्य कंपनी से जुड़ी सूची में शामिल किया था। साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि अमेरिका भविष्य में इसे अपनी प्रतिबंधित सूची (Restricted List) में शामिल करने पर विचार कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो कंपनी के लिए उन्नत तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।  

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Stock market graph showing rising foreign portfolio investment in India following strong participation in the SBI Funds IPO.
SBI Funds IPO का दिखा बड़ा असर! जुलाई में FPI निवेश ₹42,000 करोड़ के करीब पहुंचा, विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में दमदार वापसी

लगातार चार महीनों तक भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाए रखने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब फिर से भारतीय बाजार की ओर लौटते नजर आ रहे हैं। जुलाई 2026 में विदेशी निवेशकों ने न केवल इक्विटी बाजार में शुद्ध खरीदारी (Net Buying) की, बल्कि डेट मार्केट में भी मजबूत निवेश जारी रखा। इसका नतीजा यह रहा कि जुलाई में सभी एसेट क्लास में कुल FPI निवेश बढ़कर करीब ₹41,796 करोड़ (लगभग 4.4 बिलियन डॉलर) पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे SBI Funds के IPO को प्रमुख वजह माना जा रहा है, जिसमें विदेशी निवेशकों ने एंकर और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) दोनों श्रेणियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चार महीने की बिकवाली के बाद बदला विदेशी निवेशकों का रुख मार्च से जून 2026 के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार भारी बिकवाली की थी। वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और जोखिम से बचने की रणनीति के चलते विदेशी फंड्स ने भारतीय बाजार से बड़ी रकम निकाली थी। हालांकि, जुलाई में तस्वीर बदलती दिखाई दी। 24 जुलाई 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब ₹14,946 करोड़ का शुद्ध निवेश किया। यह लगातार चार महीनों की बिकवाली के बाद निवेशकों के विश्वास में लौटती मजबूती का संकेत माना जा रहा है। जुलाई बना 2026 का सबसे मजबूत महीना डेट मार्केट में लगातार निवेश और इक्विटी में खरीदारी के चलते जुलाई विदेशी निवेश के लिहाज से इस वर्ष का सबसे बेहतर महीना बन गया। इससे पहले फरवरी 2026 में कुल FPI निवेश लगभग ₹37,804 करोड़ रहा था, लेकिन जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर करीब ₹41,796 करोड़ तक पहुंच गया, जिससे फरवरी का रिकॉर्ड भी टूट गया। विश्लेषकों का मानना है कि SBI Funds IPO में विदेशी संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने इस बढ़त को और गति दी। शुरुआती महीनों में हुई थी भारी बिकवाली 2026 की शुरुआत विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में चुनौतीपूर्ण रही। मार्च से जून तक लगातार चार महीनों में बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली गई। मासिक शुद्ध FPI इक्विटी निवेश इस प्रकार रहा: जनवरी: -₹35,962 करोड़ फरवरी: ₹22,615 करोड़ (शुद्ध निवेश) मार्च: -₹1,17,775 करोड़ अप्रैल: -₹60,847 करोड़ मई: -₹32,963 करोड़ जून: -₹49,340 करोड़ जुलाई (24 जुलाई तक): ₹14,946 करोड़ (शुद्ध निवेश) इन आंकड़ों से साफ है कि जुलाई में खरीदारी लौटने के बावजूद सालभर की भारी बिकवाली की पूरी भरपाई अभी नहीं हो सकी है। सालभर का घाटा अब भी बरकरार जुलाई में सुधार के बावजूद विदेशी निवेशकों का कुल वार्षिक निवेश अभी भी नकारात्मक बना हुआ है। अब तक 2026 में भारतीय इक्विटी बाजार से लगभग ₹2.59 लाख करोड़ का शुद्ध विदेशी निवेश बाहर जा चुका है। वहीं सभी एसेट क्लास को मिलाकर भी कुल FPI निवेश लगभग ₹1.7 लाख करोड़ के नेट आउटफ्लो में है। हालांकि, डेट मार्केट अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है, जहां वर्ष 2026 में अब तक करीब 9.5 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। आगे क्या रहेगा निवेशकों का फोकस? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में विदेशी निवेशकों का रुख वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन जारी रखती है और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो आने वाले महीनों में विदेशी निवेश का प्रवाह और तेज हो सकता है।  

surbhi जुलाई 27, 2026 0
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