Adani Group Airline Update: हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि गौतम अडानी के नेतृत्व वाला अडानी ग्रुप भारत में अपनी नई एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि समूह ने इसके लिए सरकार से नियमों में बदलाव का अनुरोध किया है। हालांकि अब अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि एयरलाइन कारोबार में उतरने से जुड़ी सभी खबरें पूरी तरह निराधार, भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि फिलहाल समूह एयरलाइन व्यवसाय में प्रवेश करने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहा है। क्या था पूरा मामला? हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अडानी ग्रुप अपनी एयरलाइन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, समूह ने सरकार से उस नियम में बदलाव की मांग की थी, जो दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों के ऑपरेटरों को किसी निर्धारित (Scheduled) एयरलाइन में 10% से अधिक हिस्सेदारी रखने से रोकता है। चूंकि अडानी ग्रुप देश का सबसे बड़ा निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर है, इसलिए इन खबरों ने एविएशन सेक्टर में हलचल पैदा कर दी थी। अडानी एंटरप्राइजेज ने क्या कहा? स्टॉक एक्सचेंज को भेजी गई सूचना में अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा कि— एयरलाइन शुरू करने की खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। कंपनी एयरलाइन बिजनेस में प्रवेश करने की किसी योजना पर विचार नहीं कर रही है। मीडिया में चल रही अटकलों का कोई आधार नहीं है। कंपनी के इस स्पष्टीकरण के बाद एयरलाइन लॉन्च को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। क्यों उठी थी नियम बदलने की चर्चा? मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सरकार उस नियम की समीक्षा कर सकती है, जो एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी रखने से रोकता है। कयास लगाए जा रहे थे कि यदि नियमों में बदलाव होता है तो इससे भारतीय एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और एयर इंडिया तथा इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइनों के वर्चस्व को चुनौती मिल सकती है। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। एयरलाइन कंपनियों ने जताई थी आपत्ति इस संभावित बदलाव का कई एयरलाइन कंपनियों ने विरोध भी किया था। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कहा कि यदि एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन का मालिक बनने की अनुमति दी जाती है, तो इससे हितों का टकराव (Conflict of Interest) पैदा हो सकता है और इसका नुकसान यात्रियों को उठाना पड़ सकता है। हालांकि सरकारी अधिकारियों का कहना था कि यदि भविष्य में किसी प्रकार का बदलाव किया जाता है, तो उसमें आवश्यक सुरक्षा और नियामकीय प्रावधान शामिल किए जाएंगे। एविएशन सेक्टर में अडानी ग्रुप की मजबूत मौजूदगी भले ही अडानी ग्रुप ने एयरलाइन शुरू करने की खबरों का खंडन किया हो, लेकिन एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में उसकी मौजूदगी लगातार मजबूत होती जा रही है। वर्तमान में समूह— भारत का सबसे बड़ा निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर है। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत आठ हवाई अड्डों का संचालन करता है। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास भी कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में एविएशन वैल्यू चेन में लगातार निवेश बढ़ा चुका है। फिलहाल एयरलाइन लॉन्च की कोई योजना नहीं अडानी ग्रुप के आधिकारिक बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल कंपनी नई एयरलाइन शुरू करने की तैयारी नहीं कर रही है। हालांकि एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में उसका विस्तार जारी है, लेकिन एयरलाइन संचालन में उतरने की खबरों को कंपनी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
Stock Market Today: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत समेत 17 देशों के कुछ आयातित सामान पर 10% टैरिफ लगाने के फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुक्रवार को घरेलू बाजार लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 850 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 23,700 के नीचे फिसल गया। इस भारी बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (Market Cap) में करीब 3 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में बाजार पर भारी दबाव सुबह करीब 10:15 बजे: सेंसेक्स 876.06 अंक (1.15%) टूटकर 75,515.33 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 258.80 अंक (1.08%) गिरकर 23,610.80 पर पहुंच गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 473 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह लगातार पांचवां कारोबारी दिन है जब भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। रुपये पर भी दिखा दबाव शेयर बाजार में कमजोरी के साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.06% कमजोर होकर 96.63 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.5725 पर बंद हुआ था। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे अधिक दबाव इन शेयरों पर रहा— इंफोसिस भारती एयरटेल इंडिगो इटरनल टाटा स्टील बजाज फाइनेंस अल्ट्राटेक सीमेंट बजाज फिनसर्व एचडीएफसी बैंक एशियन पेंट्स मारुति सुजुकी लार्सन एंड टुब्रो ट्रेंट अडानी पोर्ट्स वहीं एचसीएल टेक शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहा। सेक्टरवार कैसा रहा हाल? ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप लगभग 0.63% कमजोर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप करीब 0.62% नीचे कारोबार करता दिखा। सबसे ज्यादा गिरावट इन सेक्टरों में रही— रियल्टी ऑटो मेटल जबकि फार्मा और आईटी सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार क्यों टूटा? बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा भारत सहित 17 देशों के कुछ आयातित सामान पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा मानी जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि ये देश जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक लगाने में विफल रहे हैं। यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत हुई जांच के बाद लिया गया है। भारत के अलावा जिन देशों पर यह टैरिफ लगाया गया है, उनमें शामिल हैं— पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका कंबोडिया यूनाइटेड किंगडम (यूके) और अन्य देश इस फैसले ने वैश्विक व्यापार को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। महंगा हुआ कच्चा तेल भी बना चिंता का कारण बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। रिपोर्टों के मुताबिक, रेड सी में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत जैसे आयातक देशों पर महंगाई और चालू खाते के घाटे का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। निवेशकों के लिए आगे क्या? विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर तीन प्रमुख कारकों पर रहेगी— अमेरिका की व्यापार नीति और टैरिफ से जुड़े अगले फैसले। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव। कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर। यदि वैश्विक हालात में सुधार नहीं होता, तो घरेलू शेयर बाजार में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
BPCL LPG News: सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 अगस्त 2026 तक 24 राज्यों के 100 शहरों में 10 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छोटे परिवारों, अकेले रहने वाले लोगों और कम गैस खपत वाले उपभोक्ताओं को अधिक सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराना है। कंपनी ने यह जानकारी जून तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल में दी। इसके साथ ही बीपीसीएल ने कच्चे तेल की खरीद रणनीति में किए गए बदलाव और अपने वित्तीय प्रदर्शन की भी जानकारी साझा की। 15 अगस्त तक क्या बदलेगा? बीपीसीएल के मुताबिक, 10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर का नेटवर्क तेजी से बढ़ाया जा रहा है। मुख्य बातें: 15 अगस्त तक 24 राज्यों के 100 शहरों में 10 किलो LPG सिलेंडर उपलब्ध होगा। छोटे परिवारों और कम गैस उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को नया विकल्प मिलेगा। किराए के मकानों में रहने वाले, छात्र, नौकरीपेशा और अकेले रहने वाले लोगों के लिए यह सिलेंडर अधिक सुविधाजनक साबित हो सकता है। इससे ग्राहकों को कम लागत में एलपीजी खरीदने का विकल्प मिलेगा। क्रूड ऑयल खरीद की रणनीति में बदलाव जून तिमाही के दौरान बीपीसीएल ने कच्चे तेल की खरीद में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए। कुल क्रूड खरीद में रूस की हिस्सेदारी 38% रही। स्पॉट कार्गो के जरिए खरीद बढ़कर 69% हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 44% थी। कंपनी ने वेनेजुएला और अंगोला से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। फिलहाल बीपीसीएल के पास 38 लाख टन (3.8 मिलियन टन) कच्चे तेल का भंडार मौजूद है, जो लगभग 35 दिनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में बीपीसीएल को 3,962 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ। पिछली तिमाही में कंपनी ने 3,919 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। हालांकि, यह घाटा बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम रहा। ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार कंपनी को लगभग 12,632 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता था। प्रमुख वित्तीय आंकड़े नेट लॉस: 3,962 करोड़ रुपये कुल राजस्व: 1.51 लाख करोड़ रुपये EBITDA: 4,077 करोड़ रुपये का घाटा इसके अलावा कंपनी ने बताया कि उसका मोजाम्बिक LNG प्रोजेक्ट वित्त वर्ष 2029 (FY29) में शुरू होने की उम्मीद है। ब्रोकरेज हाउस का क्या है नजरिया? कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद कई वैश्विक ब्रोकरेज हाउस बीपीसीएल के शेयर को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। Citi ने कंपनी पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए 350 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद कंपनी का संचालन मजबूत बना हुआ है और यह ऑयल मार्केटिंग सेक्टर में उसकी पसंदीदा कंपनियों में शामिल है। वहीं Macquarie ने भी 'Outperform' रेटिंग कायम रखते हुए 370 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसके अनुसार मार्केटिंग कारोबार कमजोर रहा, लेकिन रिफाइनिंग बिजनेस ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, उसने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव भविष्य में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की कमाई को प्रभावित कर सकता है। शेयर बाजार में कैसी रही चाल? जून तिमाही के नतीजों के बाद कारोबार के दौरान बीपीसीएल का शेयर करीब 0.49% की गिरावट के साथ 312.95 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया। इसी दौरान बीएसई सेंसेक्स भी लगभग 0.27% कमजोर रहा। ग्राहकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला? 10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ने से उन उपभोक्ताओं को सबसे अधिक फायदा होगा, जिन्हें 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की पूरी क्षमता की जरूरत नहीं पड़ती। इससे गैस पर होने वाला शुरुआती खर्च कम होगा और उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार सिलेंडर चुनने की सुविधा मिलेगी।
Brent Crude Oil Price Today: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई, जिससे निवेशकों और वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। 100 डॉलर के पार क्यों पहुंचा ब्रेंट क्रूड? कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता सैन्य तनाव है। रिपोर्टों के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने रेड सी में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इस घटना के बाद वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भी निवेशकों की चिंताओं को गहरा कर दिया है। लगातार सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण ट्रेडर्स ने तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम को शामिल करना शुरू कर दिया है। क्यों अहम हैं रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? वैश्विक तेल व्यापार के लिए दो समुद्री मार्ग सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले करीब 25% कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट: यह रेड सी को गल्फ ऑफ एडन से जोड़ता है। दुनिया के लगभग 12% वैश्विक व्यापार और हर साल करीब 4.1 अरब बैरल तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। यदि इन दोनों समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। भारत पर क्या होगा असर? भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो इसके संभावित प्रभाव हो सकते हैं— पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना। परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव। हवाई यात्रा और लॉजिस्टिक्स खर्च में इजाफा। सरकार पर ईंधन कर और सब्सिडी को लेकर अतिरिक्त दबाव। आयात बिल बढ़ने से चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर असर। वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता तेल की कीमतों में उछाल का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। महंगा कच्चा तेल दुनियाभर में महंगाई बढ़ा सकता है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसले लेना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा शेयर बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहती है। आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर? फिलहाल निवेशकों की निगाहें मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हैं। खासकर यह देखा जाएगा कि रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल की सप्लाई सामान्य बनी रहती है या नहीं। यदि तनाव और बढ़ता है या समुद्री मार्गों पर बाधा आती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम ही तय करेंगे कि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर टिकता है या कीमतों में कुछ राहत देखने को मिलती है।
Petrol Diesel Price Today, 23 July 2026: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। जियोपॉलिटिकल जोखिम बढ़ने से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 3% से अधिक उछल गई, लेकिन राहत की बात यह है कि भारत में 23 जुलाई 2026 को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार 58वें दिन ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। होर्मुज संकट से क्यों बढ़ी कच्चे तेल की कीमत? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल पर फिर से Geopolitical Risk Premium जुड़ गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। गुरुवार सुबह: Brent Crude: 3.36% की बढ़त के साथ 94.07 डॉलर प्रति बैरल WTI Crude: 1.15% की तेजी के साथ 87.83 डॉलर प्रति बैरल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं जारी रहती हैं, तो वर्ष की चौथी तिमाही तक ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकता है। 58 दिनों से नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी तेल कंपनियों ने 25 मई 2026 के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले मई में सिर्फ 11 दिनों के भीतर चार बार कीमतें बढ़ाई गई थीं: 15 मई: पेट्रोल ₹3.00 और डीजल ₹3.29 प्रति लीटर महंगा 19 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 महंगा 23 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 महंगा 25 मई: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा 23 जुलाई 2026: प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट शहर पेट्रोल (₹/लीटर) डीजल (₹/लीटर) दिल्ली 102.12 95.20 मुंबई 111.21 97.83 कोलकाता 113.51 99.82 चेन्नई 107.77 99.55 नोएडा 102.12 97.56 चंडीगढ़ 101.51 89.47 लखनऊ 101.89 95.36 पटना 113.37 99.36 रांची 105.26 100.49 भोपाल 114.57 99.64 ऐसे चेक करें अपने शहर का पेट्रोल-डीजल रेट अगर आप अपने शहर का ताजा ईंधन मूल्य जानना चाहते हैं, तो SMS के जरिए भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। Indian Oil: RSP <City Code> लिखकर 9224992249 पर भेजें। BPCL: RSP <City Code> लिखकर 9223112222 पर भेजें। HPCL: HPPRICE <City Code> लिखकर 9222201122 पर भेजें। क्या आगे बढ़ सकते हैं दाम? अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बनाए हुए हैं।
Petrol-Diesel News: पश्चिम एशिया में युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल का असर अब सरकारी तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों में साफ दिखाई दे रहा है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारी घाटा दर्ज किया है। इसकी सबसे बड़ी वजह लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में बदलाव नहीं करना रही। कच्चे तेल की कीमतों में 70% तक उछाल पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 70% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम तुरंत नहीं बढ़ाए गए, जिससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर लागत का दबाव बढ़ गया। HPCL और BPCL को कितना हुआ नुकसान? HPCL अप्रैल-जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा। पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। घरेलू एलपीजी पर 3,607 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। BPCL पहली तिमाही में 1,873 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा। पिछले वर्ष इसी अवधि में 6,839 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। एलपीजी बिक्री पर 3,485 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी हुई। घाटे की मुख्य वजह क्या रही? विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, तब सरकारी कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी नहीं की। बाद में सरकार ने: पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए। 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 89 रुपये की बढ़ोतरी की। लेकिन यह बढ़ोतरी बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं थी। राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद घाटा दिलचस्प बात यह है कि दोनों कंपनियों का कारोबार बढ़ा, लेकिन बढ़ी हुई लागत ने मुनाफे को नुकसान पहुंचाया। HPCL ऑपरेशन से राजस्व 1.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये (करीब 21% वृद्धि) पहुंच गया। BPCL राजस्व 1.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। HPCL ने अपने बयान में कहा कि पश्चिम एशिया संकट का असर वित्तीय नतीजों पर पड़ा, हालांकि कंपनी के रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशन मजबूत बने रहे। आगे क्या हो सकता है? यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों और सरकारी नीतियों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
Share Market Opening: घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार चौथे कारोबारी दिन भी जारी रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई दिया। गुरुवार सुबह कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 350 अंक से अधिक फिसल गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,900 के नीचे पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल सुबह 9:28 बजे तक: बीएसई सेंसेक्स 296.65 अंक (0.39%) गिरकर 76,458.40 पर कारोबार कर रहा था। एनएसई निफ्टी 50 69.15 अंक (0.29%) टूटकर 23,927.10 पर पहुंच गया। वहीं, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.1% मजबूत होकर 96.49 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.5650 पर बंद हुआ था। सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के अधिकांश शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: इंडिगो अल्ट्राटेक सीमेंट सन फार्मा एशियन पेंट्स भारती एयरटेल बजाज फिनसर्व पावरग्रिड इंफोसिस रिलायंस इंडस्ट्रीज महिंद्रा एंड महिंद्रा बढ़त वाले प्रमुख शेयर: इटरनल टाटा स्टील अडानी पोर्ट्स बजाज फाइनेंस मारुति सुजुकी सेक्टोरल इंडेक्स का प्रदर्शन ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप लगभग 0.54% फिसला। निफ्टी स्मॉलकैप करीब 0.75% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। सबसे कमजोर सेक्टर: निफ्टी फार्मा निफ्टी रियल्टी निफ्टी हेल्थकेयर बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर: निफ्टी एफएमसीजी निफ्टी ऑटो बाजार पर दबाव की वजह विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं।
Gold Silver Smuggling: देश में सोने और चांदी की तस्करी के मामलों में अचानक बड़ी तेजी देखने को मिली है। केंद्र सरकार द्वारा 12 मई को सोने और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने के बाद तस्करी के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार ने विदेशी मुद्रा की बचत और आयात पर नियंत्रण के उद्देश्य से यह फैसला लिया था, लेकिन इसके बाद तस्करी के आंकड़ों में तेज उछाल सामने आया है। आयात शुल्क बढ़ने के बाद क्यों बढ़ी तस्करी? भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है और अपनी अधिकांश जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने से इनकी कानूनी खरीद महंगी हो गई। ऐसे में अवैध तरीके से कम कीमत पर सोना और चांदी लाने की कोशिशें बढ़ गईं, जिससे तस्करी के मामलों में तेजी आई। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने करीब 72 अरब डॉलर का सोना और 12 अरब डॉलर की चांदी आयात की थी। सोने की तस्करी में 186% की बढ़ोतरी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जानकारी दी कि: 13 मई से 30 जून के बीच सोने की तस्करी के 287 मामले दर्ज किए गए। इस अवधि में 160.91 टन सोना बरामद किया गया। 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके मुकाबले 1 अप्रैल से 12 मई के बीच: 165 मामले सामने आए थे। 86.16 टन सोना जब्त हुआ था। 67 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। यानी आयात शुल्क बढ़ने के बाद बरामद सोने की मात्रा में करीब 186% की वृद्धि दर्ज की गई। चांदी की तस्करी 10 गुना से ज्यादा बढ़ी चांदी के मामले में भी स्थिति चिंताजनक रही। 13 मई से 30 जून के बीच 16 मामले दर्ज हुए। 535.92 टन चांदी बरामद की गई। 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जबकि 1 अप्रैल से 12 मई के बीच केवल 49.53 टन चांदी बरामद हुई थी। यानी चांदी की जब्ती 10 गुना से अधिक बढ़ गई। किन देशों से होती है सबसे ज्यादा तस्करी? भारत में सोने की तस्करी मुख्य रूप से उन देशों से होती है जहां इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम होती है। इनमें प्रमुख हैं: दुबई (UAE) थाईलैंड सिंगापुर बैंकॉक खाड़ी देश अफ्रीकी देश इन देशों से सोना अवैध रूप से भारत लाकर ऊंचे दाम पर बेचने की कोशिश की जाती है। सरकार ने पहले घटाई थी ड्यूटी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024 के बजट में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 15% से घटाकर 6% कर दिया था, ताकि तस्करी पर रोक लग सके। लेकिन मई 2026 में बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए सरकार ने फिर से ड्यूटी बढ़ाकर 15% कर दी। क्या है इसका असर? विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने से कानूनी आयात महंगा हो जाता है, जिससे अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलने का जोखिम बढ़ जाता है। आने वाले समय में सरकार के लिए तस्करी पर नियंत्रण और वैध आयात के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में खुदरा (रिटेल) कारोबार तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। बढ़ती उपभोक्ता मांग, शहरीकरण और छोटे शहरों में बढ़ते बाजार को देखते हुए टाटा समूह, डीमार्ट (Avenue Supermarts), रिलायंस रिटेल, शॉपर्स स्टॉप और अन्य प्रमुख रिटेल कंपनियां नए स्टोर खोलने और अपने नेटवर्क का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में रिटेल सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश देखने को मिल सकता है। छोटे शहरों पर कंपनियों का बढ़ा फोकस रिटेल कंपनियां अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती आय, बेहतर बुनियादी ढांचे और उपभोक्ताओं की बदलती खरीदारी की आदतों को देखते हुए कंपनियां नए स्टोर खोलने की योजना बना रही हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। सुपरमार्केट और फैशन स्टोर के विस्तार पर जोर डीमार्ट, रिलायंस रिटेल और टाटा समूह अपने सुपरमार्केट, हाइपरमार्केट और फैशन स्टोर के नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कंपनियां ग्राहकों को एक ही स्थान पर किराना, फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और दैनिक उपयोग का सामान उपलब्ध कराने के लिए बड़े प्रारूप पर भी निवेश बढ़ा रही हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार का होगा बेहतर तालमेल विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अब ओम्नी-चैनल रणनीति पर जोर दे रही हैं, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों को एक साथ जोड़ा जा रहा है। ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर देकर नजदीकी स्टोर से सामान प्राप्त कर सकेंगे, जिससे डिलीवरी समय कम होगा और खरीदारी का अनुभव बेहतर बनेगा। रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा रिटेल सेक्टर के विस्तार से हजारों नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। नए स्टोर खुलने से बिक्री, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस, सप्लाई चेन और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और छोटे कारोबारियों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। खपत बढ़ने से रिटेल सेक्टर को मिल रहा सहारा विश्लेषकों के अनुसार, भारत में बढ़ती उपभोक्ता मांग, संगठित रिटेल की हिस्सेदारी में वृद्धि और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग से रिटेल उद्योग को लगातार मजबूती मिल रही है। इसी कारण बड़ी कंपनियां भविष्य की मांग को देखते हुए अपने स्टोर नेटवर्क और निवेश योजनाओं का विस्तार कर रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी जारी है। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड में भी मजबूती देखी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, लाल सागर में समुद्री सुरक्षा संबंधी चिंताओं और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में दबाव बढ़ गया है। पश्चिम एशिया का तनाव बना प्रमुख वजह विश्लेषकों के अनुसार, ईरान-इज़राइल तनाव, लाल सागर में जहाजों पर हमलों की घटनाएं और ओपेक+ देशों की उत्पादन नीति ने कच्चे तेल की कीमतों को लगातार ऊपर बनाए रखा है। निवेशकों को आशंका है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत समेत आयातक देशों पर बढ़ेगा असर भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से पेट्रोलियम कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों, महंगाई और चालू खाते के घाटे पर भी पड़ सकता है। वैश्विक शेयर बाजारों में सतर्कता ऊर्जा कीमतों में तेजी के बीच दुनिया भर के शेयर बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। एयरलाइंस, परिवहन और पेट्रोकेमिकल कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखा जा रहा है, जबकि तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों को इसका लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। आगे क्या रह सकती है स्थिति? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, ओपेक+ की उत्पादन नीति और वैश्विक मांग के रुझान कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो ब्रेंट क्रूड में और तेजी देखने को मिल सकती है।
नई दिल्ली: देश की प्रमुख डिजिटल भुगतान कंपनी पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के शानदार नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 79 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ 220 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) दर्ज किया है। मजबूत भुगतान कारोबार और वित्तीय सेवाओं में तेज वृद्धि के दम पर कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक एबिटा (EBITDA) भी हासिल किया। 79% बढ़ा कंपनी का मुनाफा जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन कई प्रमुख मोर्चों पर मजबूत रहा। शुद्ध लाभ (Net Profit): 220 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि: 79 प्रतिशत कंपनी का कहना है कि यह वृद्धि डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के कारोबार में लगातार बढ़ती मांग का परिणाम है। आय में भी शानदार बढ़ोतरी जून तिमाही में कंपनी की कुल आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। कुल आय: 2,630 करोड़ रुपये पिछले वर्ष समान तिमाही: 2,159 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि: 22 प्रतिशत वहीं, परिचालन से होने वाला राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर 2,448 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा एबिटा पेटीएम ने इस तिमाही में अपने इतिहास का सबसे अधिक एबिटा दर्ज किया। एबिटा (EBITDA): 203 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि: 182 प्रतिशत एबिटा मार्जिन: 8 प्रतिशत कंपनी के लिए यह अब तक का सबसे मजबूत परिचालन प्रदर्शन माना जा रहा है। भुगतान कारोबार में लगातार मजबूती डिजिटल भुगतान कारोबार भी तेजी से बढ़ा। मर्चेंट पेमेंट वॉल्यूम (GMV) में वृद्धि: 31 प्रतिशत कुल जीएमवी: 7.1 लाख करोड़ रुपये इसके अलावा— नेट पेमेंट रेवेन्यू: 601 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि: 25 प्रतिशत वित्तीय सेवाओं से कमाई में 45% उछाल पेटीएम की वित्तीय सेवाओं का कारोबार भी मजबूत गति से आगे बढ़ा। फाइनेंशियल सर्विसेज से आय: 45 प्रतिशत की सालाना वृद्धि यह कारोबार कंपनी की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। शेयर बाजार में कैसा रहा प्रदर्शन? मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद सोमवार को शेयर बाजार में कमजोरी के बीच पेटीएम के शेयर में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। बीएसई बंद भाव: ₹1,348 दिन की शुरुआत: ₹1,355 दिन का उच्च स्तर: ₹1,357.15 दिन का निचला स्तर: ₹1,335.10 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर: ₹1,407
नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक दिग्गज Google ने भारत में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'ATL Saathi' AI प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत देशभर के शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल लर्निंग टूल्स का बेहतर प्रशिक्षण और उपयोग उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षकों को मिलेगा AI का प्रशिक्षण Google के अनुसार, प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षकों को AI आधारित कंटेंट तैयार करने, स्मार्ट क्लासरूम चलाने और छात्रों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग अनुभव विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे डिजिटल शिक्षा को नई गति मिलने की उम्मीद है। क्लाउड और AI टूल्स हुए अपग्रेड कंपनी ने 'ATL Saathi' में कई नए AI फीचर्स और Google Cloud आधारित सेवाएं जोड़ी हैं। इनकी मदद से शिक्षक लेसन प्लान तैयार करने, क्विज़ बनाने, असाइनमेंट तैयार करने और छात्रों की प्रगति का बेहतर विश्लेषण कर सकेंगे। अटल टिंकरिंग लैब्स को मिलेगा फायदा यह पहल अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के तहत संचालित अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) से जुड़े स्कूलों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाएगी। Google का लक्ष्य छात्रों में AI, रोबोटिक्स, कोडिंग और नवाचार से जुड़ी कौशल विकसित करना है। डिजिटल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म के विस्तार से भारत के स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इससे शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और छात्रों को आधुनिक तकनीकों के साथ सीखने का अवसर मिलेगा। नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल Google ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के अनुरूप है और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से छात्रों को AI एवं डिजिटल स्किल्स से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी मजबूती देखने को मिली। एशियाई बाजारों में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 250 अंक से अधिक उछल गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 24,150 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मामूली मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बाजार की स्थिति सुबह करीब 9:24 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 242.70 अंक (0.31%) की बढ़त के साथ 77,428.13 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 62.35 अंक (0.26%) की तेजी के साथ 24,140.85 अंक पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 130.49 अंक और निफ्टी 26.45 अंक की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा था। रुपये में भी मामूली मजबूती शेयर बाजार की तेजी के बीच भारतीय मुद्रा में भी हल्की मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1 पैसे मजबूत होकर 96.24 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स के इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार के दौरान 20 कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा तेजी एचसीएल टेक में देखने को मिली, जिसके शेयर करीब 2.6% तक उछल गए। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाइटन, मारुति सुजुकी, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर बैंकिंग और कुछ अन्य सेक्टर के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। एक्सिस बैंक, अडानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और एनटीपीसी के शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निफ्टी में आईटी शेयरों का दबदबा निफ्टी 50 इंडेक्स में एचसीएल टेक, मारुति सुजुकी और विप्रो सबसे अधिक बढ़त वाले शेयर रहे। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे अच्छी तेजी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर दबाव में रहा और इसमें सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बढ़त ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निवेशकों का रुझान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.02% जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.34% की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों की नजर आगे किन बातों पर रहेगी? विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर बनी रहेगी। यदि आईटी और ऑटो सेक्टर में खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को आगे भी मजबूती मिल सकती है।
Mouni Roy Viral Video: अभिनेत्री मौनी रॉय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पपाराजी पर नाराज़ होती दिखाई दे रही हैं। घटना उस समय हुई जब मौनी रॉय अभिनेत्री अनुषा दांडेकर के साथ मुंबई के एक रेस्टोरेंट से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठ रही थीं। इसी दौरान पपाराजी लगातार उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते रहे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कार के अंदर तक पहुंची रिकॉर्डिंग, नाराज़ हुईं मौनी वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले अनुषा दांडेकर कार में बैठती हैं और उसके बाद मौनी रॉय वहां पहुंचती हैं। चारों ओर मौजूद फोटोग्राफर लगातार कैमरे उनकी ओर किए हुए थे। वीडियो के अनुसार, रिकॉर्डिंग कार के काफी करीब तक जारी रही, जिससे मौनी स्पष्ट रूप से असहज नजर आईं। शुरुआत में उन्होंने खुद को शांत रखने की कोशिश की, लेकिन जब रिकॉर्डिंग नहीं रुकी तो उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा, "बंद करो... बंद करो इसे।" उनके चेहरे पर गुस्सा और असहजता साफ दिखाई दे रही थी। अनुषा दांडेकर ने शांत कराया माहौल स्थिति बिगड़ती देख अनुषा दांडेकर ने बीच-बचाव किया। उन्होंने पपाराजी से रिकॉर्डिंग रोकने का इशारा किया और साथ ही मौनी रॉय को भी शांत करने की कोशिश की। इसके बाद मामला धीरे-धीरे सामान्य हुआ और दोनों वहां से रवाना हो गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि निजी स्पेस का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि कुछ लोगों ने मौनी के गुस्से पर अलग-अलग राय व्यक्त की है। हालांकि, वीडियो के आधार पर उनकी नाराज़गी के पीछे किसी व्यक्तिगत कारण की पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। हाल ही में निजी जिंदगी भी रही चर्चा में हाल के दिनों में मौनी रॉय अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। उनके और पति सूरज नांबियार के अलग होने की खबरों ने काफी चर्चा बटोरी थी। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में अपने बारे में फैली कुछ अफवाहों पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि उनके बारे में कई गलत बातें कही गईं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। प्राइवेसी बनाम पपाराजी कल्चर पर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद एक बार फिर सेलिब्रिटीज़ की निजता और पपाराजी कल्चर को लेकर बहस तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर कवरेज की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या कलाकारों की निजी जगह का सम्मान किया जाना चाहिए। यह चर्चा सोशल मीडिया पर लगातार जारी है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कंपनियों से वसूले गए करीब 81 अरब डॉलर (लगभग 6.7 लाख करोड़ रुपये) वापस करने पड़े हैं। अदालत ने ट्रंप प्रशासन की विवादित टैरिफ व्यवस्था को कानून के अनुरूप नहीं माना था। मई-जून में लौटाए गए 71 अरब डॉलर मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिकी सरकार ने मई और जून के दौरान लगभग 71 अरब डॉलर कंपनियों को वापस कर दिए हैं। शेष राशि का भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। क्यों लगा था टैरिफ? राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत, चीन, यूरोप सहित कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। सरकार का तर्क था कि इससे विदेशी सामान महंगे होंगे, अमेरिकी उत्पादों की मांग बढ़ेगी और घरेलू उद्योग को लाभ मिलेगा। हालांकि, कई बड़ी कंपनियों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष फरवरी में सुनाए गए फैसले में कहा कि संबंधित टैरिफ नियम कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद सरकार को कंपनियों से वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया गया। नए टैरिफ की तैयारी में ट्रंप अदालती फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन नए आयात शुल्क लागू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा टैरिफ व्यवस्था समाप्त होने के बाद कई देशों के आयात पर 10% से 12.5% तक नया शुल्क लगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसका असर भारत, चीन, जापान, ब्रिटेन और ताइवान जैसे देशों के निर्यात पर पड़ सकता है। ब्राजील और यूरोप को भी चेतावनी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ब्राजील पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि यदि यूरोपीय देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर नए कर लागू करते हैं, तो अमेरिका उनके उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका नई टैरिफ नीति लागू करता है, तो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
नई दिल्ली: अगर आप शादी, त्योहार या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी से पहले ताजा कीमत जरूर जान लें। 15 जुलाई 2026 को घरेलू बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि गिरावट बहुत कम है, लेकिन बड़े निवेश या खरीदारी से पहले बाजार भाव की जानकारी होना हमेशा फायदेमंद रहता है। आज का सोने का भाव आज 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत में प्रति ग्राम ₹1 की हल्की गिरावट दर्ज की गई। प्रति ग्राम सोने का रेट कैरेट आज का भाव कल का भाव बदलाव 24 कैरेट ₹14,279 ₹14,280 -₹1 22 कैरेट ₹13,089 ₹13,090 -₹1 18 कैरेट ₹10,709 ₹10,710 -₹1 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत: ₹1,42,790 जुलाई की शुरुआत में 24 कैरेट सोना ₹14,078 प्रति ग्राम था, जो अब बढ़कर ₹14,279 प्रति ग्राम हो गया है। यानी महीने की शुरुआत की तुलना में सोना अभी भी लगभग 1.43% महंगा है। प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव (प्रति ग्राम) पटना – ₹14,284 लखनऊ – ₹14,294 रांची – ₹14,279 दिल्ली – ₹14,294 मुंबई – ₹14,279 कोलकाता – ₹14,279 चेन्नई – ₹14,345 बेंगलुरु – ₹14,279 आज चांदी का ताजा भाव चांदी की कीमतों में भी हल्की नरमी देखने को मिली। यूनिट आज का भाव कल का भाव बदलाव 1 ग्राम ₹234.90 ₹235.00 -₹0.10 1 किलो ₹2,34,900 ₹2,35,000 -₹100 जुलाई की शुरुआत में चांदी का भाव ₹2,40,000 प्रति किलो था। इसके मुकाबले अब कीमत में लगभग 2.12% की गिरावट आ चुकी है। प्रमुख शहरों में चांदी का भाव (प्रति किलो) पटना – ₹2,34,900 लखनऊ – ₹2,34,900 रांची – ₹2,34,900 दिल्ली – ₹2,34,900 मुंबई – ₹2,34,900 कोलकाता – ₹2,34,900 चेन्नई – ₹2,34,900 बेंगलुरु – ₹2,34,900 अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्यों आई गिरावट? वैश्विक बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में रहे। COMEX Gold Futures: 0.59% गिरकर 4,045.80 डॉलर प्रति औंस COMEX Silver Futures: 0.46% गिरकर 58.83 डॉलर प्रति औंस विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका से आए महंगाई के ताजा आंकड़े उम्मीद से कम रहे। इससे निवेशकों को संकेत मिला कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं कर सकता। इसके बाद निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश (Safe Haven) जैसे सोना-चांदी से हटकर शेयर बाजार की ओर बढ़ा। इसके अलावा डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रही। आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर? विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें इन कारकों से प्रभावित हो सकती हैं: अमेरिकी कंपनियों के तिमाही नतीजे नए आर्थिक आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति यदि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।
मुंबई: पिछले कारोबारी सत्र की बड़ी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को जोरदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 24,200 के करीब पहुंच गया। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते घरेलू बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटता दिखा। सुबह करीब 9:25 बजे सेंसेक्स 500.85 अंक (0.65%) की बढ़त के साथ 77,555.79 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 141.75 अंक (0.59%) चढ़कर 24,193.80 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में आई थी बड़ी गिरावट मंगलवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। उस दौरान: सेंसेक्स 561.46 अंक गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ था। निफ्टी 158.95 अंक टूटकर 24,052.05 पर बंद हुआ था। आज की तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत जरूर दी है। इन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के 30 शेयरों में से अधिकांश हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा बढ़त वाले प्रमुख शेयर: बजाज फाइनेंस (+2.33%) एक्सिस बैंक (+1.92%) इंडिगो (+1.75%) इटरनल (+1.64%) अल्ट्राटेक सीमेंट (+1.47%) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ICICI बैंक एशियन पेंट्स रिलायंस इंडस्ट्रीज HDFC बैंक बजाज फिनसर्व अडानी पोर्ट्स बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, सीमेंट और एविएशन सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव बाजार में तेजी के बावजूद आईटी सेक्टर के कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी बनी रही। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: TCS इंफोसिस टेक महिंद्रा पावर ग्रिड NTPC हिंदुस्तान यूनिलीवर टाटा स्टील आईटी इंडेक्स अन्य सेक्टरों की तुलना में कमजोर बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती केवल लार्जकैप ही नहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स लगभग 0.39% चढ़ा। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 0.39% की तेजी दर्ज की गई। सेक्टरवार प्रदर्शन में आईटी को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर सकारात्मक दायरे में कारोबार करते नजर आए। वैश्विक संकेतों का मिला सहारा बाजार को वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिले। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% ट्रांजिट शुल्क नहीं लगाया जाएगा, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही और ब्रेंट क्रूड लगभग 1.16% बढ़कर 85.71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। रुपये की चाल भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर रहा। रुपया 96.1725 प्रति डॉलर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.20 पर बंद हुआ था। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कॉर्पोरेट नतीजों पर नजर बनाए हुए है। यदि बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी जारी रहती है, तो बाजार में आगे भी सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।
कोलकाता: कोलकाता में इस्कॉन (ISKCON) की 55वीं ऐतिहासिक रथयात्रा बुधवार, 16 जुलाई को भव्य रूप से निकाली जाएगी। इस वर्ष पहली बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। वहीं, इस्कॉन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री करेंगे रथयात्रा का शुभारंभ इस्कॉन के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सुबह करीब 11:45 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। वह भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के दर्शन करने के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। नई सरकार बनने के बाद यह पहला अवसर होगा, जब मुख्यमंत्री इस्कॉन की कोलकाता रथयात्रा में शामिल होंगे। 55वें वर्ष में प्रवेश कर रही रथयात्रा इस्कॉन कोलकाता द्वारा आयोजित यह रथयात्रा पिछले 54 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है। इस वर्ष का मुख्य विषय "भारत-मंदिर संस्कृति की विरासत" रखा गया है। आयोजकों के अनुसार चीन, रूस, यूक्रेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं। इस मार्ग से गुजरेगी रथयात्रा रथयात्रा की शुरुआत इस्कॉन मंदिर, 3सी अल्बर्ट रोड से होगी। इसके बाद यात्रा सरत बोस रोड, एक्साइड चौराहा, हंगरफोर्ड स्ट्रीट, एजेसी बोस रोड, हाजरा रोड, श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड, जवाहरलाल नेहरू रोड और आउटराम रोड से होते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड स्थित मौसी बाड़ी पहुंचेगी, जहां परंपरा के अनुसार भगवान का रथ ठहरेगा। 24 जुलाई को निकलेगी बहुदा यात्रा भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा यानी बहुदा (उल्टा) रथयात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। यह यात्रा ब्रिगेड परेड ग्राउंड से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः इस्कॉन मंदिर पहुंचेगी। 17 से 23 जुलाई तक लगेगा श्री जगन्नाथ महामेला रथयात्रा के अगले दिन से 17 जुलाई से 23 जुलाई तक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में श्री जगन्नाथ महामेला आयोजित किया जाएगा। यहां तिरुपति बालाजी मंदिर की स्थापत्य शैली पर आधारित गुंडिचा मंदिर की प्रतिकृति बनाई जाएगी, जहां सात दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। शांति और सद्भाव का संदेश देगी रथयात्रा आयोजकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और संघर्ष के दौर में इस वर्ष की रथयात्रा शांति, प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देने का प्रयास करेगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए हैं।
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement - CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। एक ओर भारत में कई ब्रिटिश उत्पाद पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे, वहीं दूसरी ओर भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना सीमा शुल्क (Zero Duty) के प्रवेश का लाभ मिलेगा। भारतीय ग्राहकों को किन चीजों में मिलेगी राहत? नए व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाले कई लोकप्रिय उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी आएगी। इसका सीधा असर इन वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: स्कॉच व्हिस्की जिन चॉकलेट बिस्किट कॉस्मेटिक और ब्यूटी प्रोडक्ट्स कुछ प्रीमियम फूड और लाइफस्टाइल उत्पाद हालांकि कीमतों में वास्तविक कमी इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आयातक और कंपनियां शुल्क में मिली राहत का कितना लाभ ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेंगे नए अवसर इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय उद्योगों और निर्यातकों को मिलने की संभावना है। अब कई भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन में बिना किसी आयात शुल्क के भेजा जा सकेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इन क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है: वस्त्र एवं रेडीमेड गारमेंट्स हस्तशिल्प कालीन चमड़ा और फुटवियर रत्न एवं आभूषण इंजीनियरिंग उत्पाद कृषि एवं खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। व्यापार और निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन भारत और ब्रिटेन के बीच यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। इससे निवेश, सप्लाई चेन, विनिर्माण और विभिन्न उद्योगों के बीच सहयोग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह समझौता भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उपभोक्ताओं और उद्योगों पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटिश उत्पादों की कीमतों में धीरे-धीरे कमी देखने को मिल सकती है, जबकि भारतीय निर्यातकों को बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। इससे घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। इसके अलावा, निर्यात बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, एमएसएमई और कृषि आधारित उद्योगों को भी लाभ मिल सकता है। भारत-यूके व्यापार संबंधों में नया अध्याय करीब एक वर्ष पहले हस्ताक्षरित भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता अब औपचारिक रूप से लागू हो रहा है। इसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह समझौता भारतीय निर्यात, विदेशी निवेश और आर्थिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने एलन मस्क और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के बीच हुए समझौते को मंजूरी दे दी है। हालांकि अदालत ने इस समझौते को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए और कहा कि इसमें कुछ "रेड फ्लैग" यानी चिंताजनक पहलू दिखाई देते हैं। यह मामला 2022 में Twitter (अब X) के शेयरों की खरीद से जुड़ा है, जिसमें मस्क पर अपनी हिस्सेदारी की जानकारी तय समय से देर से सार्वजनिक करने का आरोप था। क्या था पूरा मामला? SEC के अनुसार, एलन मस्क ने मार्च और अप्रैल 2022 में Twitter के शेयर खरीदे थे, लेकिन नियमानुसार जानकारी देने में 11 दिनों की देरी की। नियामक का दावा था कि इस देरी के कारण मस्क निवेशकों को जानकारी मिलने से पहले कम कीमत पर शेयर खरीदते रहे, जिससे उन्हें लगभग 150 मिलियन डॉलर का वित्तीय लाभ हुआ। बाद में मस्क ने अक्टूबर 2022 में करीब 44 अरब डॉलर में Twitter का अधिग्रहण किया और इसका नाम बदलकर X कर दिया। समझौते के तहत कितना देना होगा जुर्माना? समझौते के अनुसार, एलन मस्क के नाम से जुड़े एक ट्रस्ट की ओर से 15 लाख डॉलर (1.5 मिलियन डॉलर) का भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही SEC द्वारा लगाए गए इस मामले के दावों का निपटारा हो जाएगा। मस्क का कहना है कि जानकारी देने में हुई देरी जानबूझकर नहीं, बल्कि अनजाने में हुई थी। जज ने SEC की कार्रवाई पर उठाए सवाल मामले की सुनवाई करने वाली अमेरिकी जिला अदालत की जज स्पार्कल सूकनानन ने कहा कि अदालत का काम केवल यह देखना है कि समझौता कानूनी रूप से उचित और निष्पक्ष है या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि SEC ने मस्क से कथित आर्थिक लाभ की वसूली (Disgorgement) की मांग क्यों छोड़ दी। जज ने यह भी पूछा कि आखिर समझौता सीधे मस्क की बजाय उनके ट्रस्ट के साथ क्यों किया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि इससे यह धारणा बन सकती है कि मस्क सार्वजनिक रूप से खुद को पूरी तरह निर्दोष बता सकें। SEC ने समझौते का किया बचाव SEC ने अदालत में कहा कि यह समझौता किसी तरह की मिलीभगत का परिणाम नहीं है। आयोग के अनुसार, 1.5 मिलियन डॉलर का जुर्माना इस तरह के मामलों में अब तक की सबसे बड़ी सिविल पेनल्टी है। नियामक ने यह भी कहा कि समझौते के तहत जारी आदेश भविष्य में मस्क पर भी लागू रहेगा, भले ही वे अपने ट्रस्ट के माध्यम से निवेश करें। राजनीतिक पहलू भी आया चर्चा में अपने आदेश में जज ने यह भी टिप्पणी की कि यह तय करना जनता का अधिकार है कि क्या सरकार ने इस मामले में एलन मस्क की पर्याप्त जवाबदेही तय की या नहीं। एलन मस्क पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार रह चुके हैं। वहीं इस मामले की सुनवाई करने वाली जज की नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में हुई थी। क्या होगा आगे? अदालत की मंजूरी के साथ यह मामला फिलहाल समाप्त हो गया है, लेकिन फैसले में की गई टिप्पणियों ने SEC की कार्यप्रणाली और हाई-प्रोफाइल मामलों में नियामकीय पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
नई पीढ़ी के हाथों में कॉर्पोरेट नेतृत्व की कमान भारत के कॉर्पोरेट जगत में नेतृत्व की तस्वीर तेजी से बदल रही है। प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म LinkedIn की नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के 55% C-suite (शीर्ष प्रबंधन) पदों पर अब मिलेनियल्स (Millennials) का कब्जा है। पिछले सात वर्षों में इस वर्ग की भागीदारी में लगभग 14.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह भारत के वरिष्ठ कॉर्पोरेट नेतृत्व का सबसे बड़ा समूह बन गया है। रिपोर्ट बताती है कि आज के दौर में केवल एक ही उद्योग में लंबे समय तक काम करने के बजाय अलग-अलग सेक्टर और विभिन्न भूमिकाओं का अनुभव रखने वाले पेशेवर तेजी से शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच रहे हैं। पारंपरिक करियर मॉडल बदल रहा है कुछ साल पहले तक अधिकांश शीर्ष अधिकारी एक ही उद्योग में लंबे समय तक काम करने के बाद C-suite तक पहुंचते थे। लेकिन अब यह ट्रेंड बदल रहा है। LinkedIn के मुताबिक, एक ही इंडस्ट्री का अनुभव रखने वाले C-suite अधिकारियों की हिस्सेदारी करीब 80% से घटकर 58% रह गई है। इसका मतलब है कि कंपनियां अब ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास विविध उद्योगों, अलग-अलग कंपनियों और कई प्रकार की जिम्मेदारियों का अनुभव हो। AI बना बिजनेस फैसलों का अहम हिस्सा रिपोर्ट के अनुसार, 84% भारतीय C-suite अधिकारी मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी कंपनियों में नई नौकरियां और नई भूमिकाएं तैयार कर रहा है। सबसे अधिक भरोसा Chief Marketing Officers (CMOs) में देखा गया, जहां 94% अधिकारियों ने AI को नए अवसरों का प्रमुख स्रोत माना। इतना ही नहीं, 84% वरिष्ठ अधिकारी यह भी स्वीकार करते हैं कि अब बिजनेस से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में AI टूल्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। AI अपनाने की बढ़ती चुनौती हालांकि कंपनियां तेजी से AI को अपना रही हैं, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के सामने इसकी रफ्तार बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80% भारतीय C-suite नेताओं का कहना है कि उन पर AI को तेजी से लागू करने का दबाव है, जबकि उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। यह दबाव सबसे ज्यादा Chief Marketing Officers (82%) और Chief Technology Officers (81%) पर देखा गया। अनिश्चित माहौल में तेज फैसले लेना सबसे बड़ी चुनौती आज के कारोबारी माहौल में तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच सही समय पर निर्णय लेना भी वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 39% भारतीय C-suite नेताओं ने लगातार बदलते माहौल में तेज और सही फैसले लेना अपनी सबसे बड़ी नेतृत्व चुनौती बताया। यह चिंता विशेष रूप से CEOs और CMOs में अधिक देखने को मिली। वर्कफोर्स प्लानिंग अब केवल HR की जिम्मेदारी नहीं रिपोर्ट बताती है कि भविष्य में किन स्किल्स और किन भूमिकाओं की जरूरत होगी, इसे लेकर भी कंपनियों में स्पष्टता की कमी है। 51% भारतीय C-suite अधिकारी मानते हैं कि उनकी कंपनियों को भविष्य के टैलेंट और आवश्यक स्किल्स की सही समझ नहीं है। अब कर्मचारियों की योजना बनाना केवल HR विभाग का काम नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे नेतृत्व की साझा जिम्मेदारी बन चुकी है, क्योंकि इसका सीधा असर बिजनेस ग्रोथ, टेक्नोलॉजी अपनाने और ग्राहक रणनीति पर पड़ता है। AI से सबसे बड़ी उम्मीद इनोवेशन की भारतीय कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए AI का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल काम की गति बढ़ाना नहीं, बल्कि नए अवसर तैयार करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 90% भारतीय C-suite नेता AI निवेश से सबसे ज्यादा इनोवेशन की उम्मीद करते हैं। इनमें CMOs, CEOs और CTOs सबसे आगे हैं। उनका मानना है कि AI की मदद से नए उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं, ग्राहकों का अनुभव बेहतर बनाया जा सकता है और कंपनियां बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मजबूत कर सकती हैं। AI स्किल्स बन रही हैं भविष्य के नेताओं की पहचान LinkedIn रिपोर्ट के अनुसार, भारत में C-suite स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली पांच प्रमुख स्किल्स में से चार AI से जुड़ी हैं। इनमें AI Agents, AI Productivity, Retrieval-Augmented Generation (RAG) और AI Strategy शामिल हैं। सबसे तेज वृद्धि AI Agents स्किल में दर्ज की गई, जिसमें 18.6% सालाना वृद्धि हुई। वहीं, 2020 के बाद से AI और अन्य तकनीकी विशेषज्ञताओं की मांग में 10.9% की बढ़ोतरी देखी गई है। बदलते दौर में AI और विविध अनुभव बने सफलता की कुंजी LinkedIn की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत में कॉर्पोरेट नेतृत्व तेजी से बदल रहा है। मिलेनियल्स अब शीर्ष पदों पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं, जबकि AI केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि नेतृत्व, भर्ती, निर्णय प्रक्रिया और बिजनेस रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले वर्षों में AI की समझ और बहु-क्षेत्रीय अनुभव रखने वाले नेताओं की मांग और तेज़ी से बढ़ने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।