तुलना करें तो भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप लगभग 180 अरब डॉलर के आसपास है। यानी CXMT का बाजार मूल्य रिलायंस से करीब तीन गुना अधिक बताया जा रहा है।
ChangXin Memory Technologies (CXMT) चीन की प्रमुख DRAM (Dynamic Random Access Memory) चिप निर्माता कंपनी है। DRAM चिप्स का उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, सर्वर, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम में अस्थायी डेटा स्टोर करने के लिए किया जाता है।
AI तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग ने DRAM चिप्स की वैश्विक मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिसका सबसे बड़ा फायदा CXMT जैसी कंपनियों को मिला है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने IPO के जरिए करीब 8.6 अरब डॉलर जुटाए। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद निवेशकों की जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिससे कंपनी के शेयरों में करीब 500% की तेजी आ गई।
यह उछाल इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन के निवेशक घरेलू सेमीकंडक्टर और चिप कंपनियों के भविष्य को लेकर काफी आशावादी हैं।
दुनियाभर में AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी ट्रेंड का फायदा CXMT को मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर के विस्तार के साथ मेमोरी चिप उद्योग में आने वाले वर्षों में भी मजबूत मांग बनी रह सकती है।
CXMT चीन की उस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विदेशी तकनीक और आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करना है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक और चिप निर्माण उपकरणों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद चीन ने घरेलू चिप उद्योग को तेजी से मजबूत करने पर जोर दिया है। ऐसे में CXMT को चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कंपनी माना जा रहा है।
हालांकि CXMT दुनिया की प्रमुख DRAM कंपनियों में शामिल हो चुकी है, लेकिन अत्याधुनिक HBM (High Bandwidth Memory) चिप तकनीक में यह अभी भी पीछे मानी जाती है।
HBM चिप्स AI प्रोसेसर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में फिलहाल Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है।
CXMT के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में अमेरिकी प्रतिबंध शामिल हैं। हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग ने कंपनी को चीनी सैन्य कंपनी से जुड़ी सूची में शामिल किया था। साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि अमेरिका भविष्य में इसे अपनी प्रतिबंधित सूची (Restricted List) में शामिल करने पर विचार कर सकता है।
यदि ऐसा होता है, तो कंपनी के लिए उन्नत तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। Hero MotoCorp की इलेक्ट्रिक स्कूटर ब्रांड VIDA ने 2026 की पहली छमाही में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की इलेक्ट्रिक स्कूटर बिक्री 1 लाख यूनिट के पार पहुंच गई है, जिससे भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में VIDA की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। 6 महीने में 1.02 लाख से ज्यादा स्कूटर बिके रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच VIDA ने कुल 1,02,197 इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री दर्ज की। जून 2026 में कंपनी की बिक्री 20 हजार यूनिट से अधिक रही, जो अब तक के सबसे मजबूत महीनों में से एक रही। Hero MotoCorp की इलेक्ट्रिक रणनीति को इस बढ़ती बिक्री से मजबूती मिली है। कंपनी लगातार नए मॉडल और बेहतर बैटरी तकनीक के साथ बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। VIDA VX2 Plus ने बढ़ाई कंपनी की उम्मीदें Hero Vida ने हाल ही में VIDA VX2 Plus 4.4 kWh वेरिएंट पेश किया है। इस मॉडल में बड़ी बैटरी दी गई है, जिससे कंपनी के अनुसार इसकी IDC रेंज करीब 187 किलोमीटर तक है। इसमें 4.4 kWh बैटरी पैक और बेहतर परफॉर्मेंस फीचर्स दिए गए हैं। नए मॉडल के जरिए कंपनी उन ग्राहकों को आकर्षित करना चाहती है, जो ज्यादा रेंज और भरोसेमंद इलेक्ट्रिक स्कूटर की तलाश में हैं। किफायती EV बाजार पर कंपनी की नजर Hero MotoCorp इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए नए किफायती मॉडल लाने की तैयारी में है। कंपनी की योजना ज्यादा ग्राहकों तक इलेक्ट्रिक वाहन पहुंचाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में VIDA का विस्तार Hero MotoCorp के लिए भविष्य के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। EV बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में Hero MotoCorp के अलावा कई बड़ी कंपनियां सक्रिय हैं। बढ़ती मांग के बीच कंपनियां ज्यादा रेंज, कम कीमत और बेहतर चार्जिंग सुविधा देकर ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। VIDA की बिक्री में आई तेजी से साफ है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में मुकाबला और तेज होने वाला है। आने वाले समय में नए मॉडल और तकनीक के साथ यह सेगमेंट और तेजी से बढ़ सकता है।
नई दिल्ली: चीन की मेमोरी चिप निर्माता ChangXin Memory Technologies (CXMT) ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत करते हुए निवेशकों को चौंका दिया। कंपनी के शेयर लिस्टिंग के पहले ही दिन करीब 500% तक उछल गए, जिसके बाद इसका बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) 500 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। इसके साथ ही CXMT चीन की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध (Listed) कंपनी बन गई है। तुलना करें तो भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप लगभग 180 अरब डॉलर के आसपास है। यानी CXMT का बाजार मूल्य रिलायंस से करीब तीन गुना अधिक बताया जा रहा है। क्या है CXMT? ChangXin Memory Technologies (CXMT) चीन की प्रमुख DRAM (Dynamic Random Access Memory) चिप निर्माता कंपनी है। DRAM चिप्स का उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, सर्वर, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम में अस्थायी डेटा स्टोर करने के लिए किया जाता है। AI तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग ने DRAM चिप्स की वैश्विक मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिसका सबसे बड़ा फायदा CXMT जैसी कंपनियों को मिला है। IPO के बाद क्यों मची हलचल? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने IPO के जरिए करीब 8.6 अरब डॉलर जुटाए। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद निवेशकों की जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिससे कंपनी के शेयरों में करीब 500% की तेजी आ गई। यह उछाल इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन के निवेशक घरेलू सेमीकंडक्टर और चिप कंपनियों के भविष्य को लेकर काफी आशावादी हैं। AI बूम से मिला बड़ा फायदा दुनियाभर में AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी ट्रेंड का फायदा CXMT को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर के विस्तार के साथ मेमोरी चिप उद्योग में आने वाले वर्षों में भी मजबूत मांग बनी रह सकती है। चीन के लिए क्यों है रणनीतिक कंपनी? CXMT चीन की उस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विदेशी तकनीक और आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करना है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक और चिप निर्माण उपकरणों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद चीन ने घरेलू चिप उद्योग को तेजी से मजबूत करने पर जोर दिया है। ऐसे में CXMT को चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कंपनी माना जा रहा है। अभी भी हैं बड़ी चुनौतियां हालांकि CXMT दुनिया की प्रमुख DRAM कंपनियों में शामिल हो चुकी है, लेकिन अत्याधुनिक HBM (High Bandwidth Memory) चिप तकनीक में यह अभी भी पीछे मानी जाती है। HBM चिप्स AI प्रोसेसर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में फिलहाल Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। अमेरिकी प्रतिबंध भी बन सकते हैं चुनौती CXMT के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में अमेरिकी प्रतिबंध शामिल हैं। हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग ने कंपनी को चीनी सैन्य कंपनी से जुड़ी सूची में शामिल किया था। साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि अमेरिका भविष्य में इसे अपनी प्रतिबंधित सूची (Restricted List) में शामिल करने पर विचार कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो कंपनी के लिए उन्नत तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
लगातार चार महीनों तक भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाए रखने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब फिर से भारतीय बाजार की ओर लौटते नजर आ रहे हैं। जुलाई 2026 में विदेशी निवेशकों ने न केवल इक्विटी बाजार में शुद्ध खरीदारी (Net Buying) की, बल्कि डेट मार्केट में भी मजबूत निवेश जारी रखा। इसका नतीजा यह रहा कि जुलाई में सभी एसेट क्लास में कुल FPI निवेश बढ़कर करीब ₹41,796 करोड़ (लगभग 4.4 बिलियन डॉलर) पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे SBI Funds के IPO को प्रमुख वजह माना जा रहा है, जिसमें विदेशी निवेशकों ने एंकर और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) दोनों श्रेणियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चार महीने की बिकवाली के बाद बदला विदेशी निवेशकों का रुख मार्च से जून 2026 के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार भारी बिकवाली की थी। वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और जोखिम से बचने की रणनीति के चलते विदेशी फंड्स ने भारतीय बाजार से बड़ी रकम निकाली थी। हालांकि, जुलाई में तस्वीर बदलती दिखाई दी। 24 जुलाई 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब ₹14,946 करोड़ का शुद्ध निवेश किया। यह लगातार चार महीनों की बिकवाली के बाद निवेशकों के विश्वास में लौटती मजबूती का संकेत माना जा रहा है। जुलाई बना 2026 का सबसे मजबूत महीना डेट मार्केट में लगातार निवेश और इक्विटी में खरीदारी के चलते जुलाई विदेशी निवेश के लिहाज से इस वर्ष का सबसे बेहतर महीना बन गया। इससे पहले फरवरी 2026 में कुल FPI निवेश लगभग ₹37,804 करोड़ रहा था, लेकिन जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर करीब ₹41,796 करोड़ तक पहुंच गया, जिससे फरवरी का रिकॉर्ड भी टूट गया। विश्लेषकों का मानना है कि SBI Funds IPO में विदेशी संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने इस बढ़त को और गति दी। शुरुआती महीनों में हुई थी भारी बिकवाली 2026 की शुरुआत विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में चुनौतीपूर्ण रही। मार्च से जून तक लगातार चार महीनों में बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली गई। मासिक शुद्ध FPI इक्विटी निवेश इस प्रकार रहा: जनवरी: -₹35,962 करोड़ फरवरी: ₹22,615 करोड़ (शुद्ध निवेश) मार्च: -₹1,17,775 करोड़ अप्रैल: -₹60,847 करोड़ मई: -₹32,963 करोड़ जून: -₹49,340 करोड़ जुलाई (24 जुलाई तक): ₹14,946 करोड़ (शुद्ध निवेश) इन आंकड़ों से साफ है कि जुलाई में खरीदारी लौटने के बावजूद सालभर की भारी बिकवाली की पूरी भरपाई अभी नहीं हो सकी है। सालभर का घाटा अब भी बरकरार जुलाई में सुधार के बावजूद विदेशी निवेशकों का कुल वार्षिक निवेश अभी भी नकारात्मक बना हुआ है। अब तक 2026 में भारतीय इक्विटी बाजार से लगभग ₹2.59 लाख करोड़ का शुद्ध विदेशी निवेश बाहर जा चुका है। वहीं सभी एसेट क्लास को मिलाकर भी कुल FPI निवेश लगभग ₹1.7 लाख करोड़ के नेट आउटफ्लो में है। हालांकि, डेट मार्केट अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है, जहां वर्ष 2026 में अब तक करीब 9.5 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। आगे क्या रहेगा निवेशकों का फोकस? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में विदेशी निवेशकों का रुख वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन जारी रखती है और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो आने वाले महीनों में विदेशी निवेश का प्रवाह और तेज हो सकता है।