वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पॉलीसिलिकॉन के आयात पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। पॉलीसिलिकॉन सोलर पैनल और सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण कच्चा माल है। प्रस्तावित कदम का उद्देश्य चीन के बढ़ते दबदबे के बीच अमेरिकी विनिर्माण को मजबूत करना और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। पॉलीसिलिकॉन के साथ सोलर उत्पादों पर भी असर अमेरिकी प्रशासन की प्रस्तावित नीति केवल कच्चे पॉलीसिलिकॉन तक सीमित नहीं है। इसके तहत पॉलीसिलिकॉन से जुड़े उत्पादों पर भी न्यूनतम आयात मूल्य लागू करने की योजना है। इनमें वेफर्स, सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों की चिंता है कि चीन में भारी उत्पादन और सरकारी सब्सिडी के कारण वैश्विक बाजार में कीमतें काफी नीचे आई हैं। अमेरिका का मानना है कि इससे घरेलू कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है। चीन की आपूर्ति पर निर्भरता घटाने की कोशिश पॉलीसिलिकॉन सोलर पैनल और सेमीकंडक्टर दोनों की आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमेरिका इस क्षेत्र में चीन की मजबूत स्थिति को कम करना चाहता है और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। प्रस्तावित टैरिफ और न्यूनतम आयात मूल्य को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने पॉलीसिलिकॉन बाजार की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच भी की थी, जिसके बाद इन व्यापारिक उपायों पर विचार किया गया। सोलर और सेमीकंडक्टर उद्योग पर क्या होगा असर नई व्यापार नीति से अमेरिकी पॉलीसिलिकॉन निर्माताओं को फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि विदेशी उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है। हालांकि, दूसरी ओर सोलर पैनल और सेमीकंडक्टर से जुड़े कारोबारियों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ने का जोखिम भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि टैरिफ के साथ न्यूनतम आयात मूल्य भी लागू किया जाता है तो इसका असर केवल पॉलीसिलिकॉन आयात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोलर सेल और मॉड्यूल की कीमतों तथा अमेरिकी सौर परियोजनाओं की लागत पर भी पड़ सकता है। टैरिफ से पहले न्यूनतम आयात मूल्य की योजना प्रस्तावित व्यवस्था में अमेरिकी प्रशासन पॉलीसिलिकॉन और उससे बने उत्पादों के लिए न्यूनतम आयात कीमत तय करने पर भी विचार कर रहा है। इसका मकसद बेहद कम कीमत पर आयात होने वाले उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने से रोकना है।
नई दिल्ली: चीन की मेमोरी चिप निर्माता ChangXin Memory Technologies (CXMT) ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत करते हुए निवेशकों को चौंका दिया। कंपनी के शेयर लिस्टिंग के पहले ही दिन करीब 500% तक उछल गए, जिसके बाद इसका बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) 500 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। इसके साथ ही CXMT चीन की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध (Listed) कंपनी बन गई है। तुलना करें तो भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप लगभग 180 अरब डॉलर के आसपास है। यानी CXMT का बाजार मूल्य रिलायंस से करीब तीन गुना अधिक बताया जा रहा है। क्या है CXMT? ChangXin Memory Technologies (CXMT) चीन की प्रमुख DRAM (Dynamic Random Access Memory) चिप निर्माता कंपनी है। DRAM चिप्स का उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, सर्वर, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम में अस्थायी डेटा स्टोर करने के लिए किया जाता है। AI तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग ने DRAM चिप्स की वैश्विक मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिसका सबसे बड़ा फायदा CXMT जैसी कंपनियों को मिला है। IPO के बाद क्यों मची हलचल? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने IPO के जरिए करीब 8.6 अरब डॉलर जुटाए। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद निवेशकों की जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिससे कंपनी के शेयरों में करीब 500% की तेजी आ गई। यह उछाल इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन के निवेशक घरेलू सेमीकंडक्टर और चिप कंपनियों के भविष्य को लेकर काफी आशावादी हैं। AI बूम से मिला बड़ा फायदा दुनियाभर में AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी ट्रेंड का फायदा CXMT को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर के विस्तार के साथ मेमोरी चिप उद्योग में आने वाले वर्षों में भी मजबूत मांग बनी रह सकती है। चीन के लिए क्यों है रणनीतिक कंपनी? CXMT चीन की उस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विदेशी तकनीक और आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करना है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक और चिप निर्माण उपकरणों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद चीन ने घरेलू चिप उद्योग को तेजी से मजबूत करने पर जोर दिया है। ऐसे में CXMT को चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कंपनी माना जा रहा है। अभी भी हैं बड़ी चुनौतियां हालांकि CXMT दुनिया की प्रमुख DRAM कंपनियों में शामिल हो चुकी है, लेकिन अत्याधुनिक HBM (High Bandwidth Memory) चिप तकनीक में यह अभी भी पीछे मानी जाती है। HBM चिप्स AI प्रोसेसर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में फिलहाल Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। अमेरिकी प्रतिबंध भी बन सकते हैं चुनौती CXMT के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में अमेरिकी प्रतिबंध शामिल हैं। हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग ने कंपनी को चीनी सैन्य कंपनी से जुड़ी सूची में शामिल किया था। साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि अमेरिका भविष्य में इसे अपनी प्रतिबंधित सूची (Restricted List) में शामिल करने पर विचार कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो कंपनी के लिए उन्नत तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (Semicon 2.0) को मंजूरी देते हुए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस नई योजना का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, रिसर्च, पैकेजिंग, मशीनरी, कच्चे माल और कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेगी। सेमिकॉन 1.0 के बाद अब दूसरा बड़ा कदम दिसंबर 2021 में शुरू किए गए Semicon 1.0 के तहत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की नींव रखने का प्रयास किया था। इस चरण में सिलिकॉन फैब, पैकेजिंग यूनिट और चिप डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दिए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिली, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें सिलिकॉन फैब्रिकेशन प्लांट, कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और कई पैकेजिंग परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा कई भारतीय स्टार्टअप और एमएसएमई को चिप डिजाइन विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता और अत्याधुनिक डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए गए। Semicon 2.0 किन क्षेत्रों पर करेगा फोकस? नई योजना को छह प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है, जिनके जरिए भारत पूरे सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को विकसित करना चाहता है। इनमें शामिल हैं– चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर आईपी मशीनरी, उपकरण और कच्चा माल नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट एटीएमपी (ATMP) और ओसैट (OSAT) यूनिट अनुसंधान एवं विकास (R&D) कुशल मानव संसाधन और प्रशिक्षण सरकार का लक्ष्य केवल चिप बनाना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर उत्पादन और पैकेजिंग तक पूरी प्रक्रिया को भारत में विकसित करना है। रिसर्च और नई तकनीक पर रहेगा विशेष जोर Semicon 2.0 के तहत अत्याधुनिक चिप तकनीकों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भविष्य की उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम करने के साथ-साथ भारतीय इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग उपलब्ध कराना है। युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर नई योजना के तहत कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में सेमीकंडक्टर डिजाइन एवं निर्माण से जुड़ी ट्रेनिंग को और मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा क्लीनरूम ऑपरेशन, फैब निर्माण, चिप डिजाइन और अन्य विशेष तकनीकी क्षेत्रों में उद्योग आधारित प्रशिक्षण भी बढ़ाया जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। आयात पर निर्भरता होगी कम विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी तक चिप निर्माण के लिए गैस, केमिकल, मशीनरी और कई अन्य जरूरी संसाधनों के लिए विदेशों पर निर्भर है। Semicon 2.0 के तहत इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे आयात कम होगा और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा और औद्योगिक उपकरण जैसे क्षेत्रों को स्थिर आपूर्ति मिल सकेगी। वैश्विक निवेश आकर्षित करने की तैयारी सरकार को उम्मीद है कि नई नीति के बाद अमेरिका, यूरोप, जापान, सिंगापुर, नीदरलैंड और जर्मनी सहित कई देशों की प्रमुख टेक कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो भारत आने वाले वर्षों में केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली हब ही नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजाइन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना सकता है। लंबी अवधि की रणनीति पर आधारित है योजना सेमीकंडक्टर उद्योग में किसी भी परियोजना को पूरी तरह विकसित होने में कई वर्ष लगते हैं। ऐसे में Semicon 2.0 को दीर्घकालिक रणनीति के तहत तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के वास्तविक परिणाम अगले कुछ वर्षों में दिखाई देंगे। यदि निवेश, अनुसंधान और निजी क्षेत्र की भागीदारी लगातार बढ़ती रही, तो भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है।
नई दिल्ली: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का 1 से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच यह दौरा भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, उन्नत तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता दोनों देशों के लिए साझा चिंता का विषय बनी हुई है। दो दशक में मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी भारत और जापान के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उसी वर्ष दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' का दर्जा दिया। वर्ष 2014 में इसे और आगे बढ़ाते हुए 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' घोषित किया गया। आज दोनों देशों के बीच 70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र, 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता और रक्षा, विदेश एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े नियमित संवाद स्थापित हो चुके हैं। रक्षा और तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग इस बार की वार्ता में दोनों देश रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति', SAGAR (Security and Growth for All in the Region) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव का मेल जापान के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' विजन के साथ देखा जा रहा है। आर्थिक साझेदारी भी होगी मजबूत जापान भारत का प्रमुख निवेशक और आधिकारिक विकास सहायता (ODA) देने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा सहयोग का प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। इसके अलावा जापान भारत में सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। क्या चीन सबसे बड़ा कारण है? विश्लेषकों का मानना है कि भारत-जापान सहयोग के पीछे चीन का बढ़ता प्रभाव एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारण है। जापान पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंतित रहा है। वहीं भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक देश के प्रभुत्व के पक्ष में नहीं है। इसी कारण दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं। हालांकि दोनों देशों का दृष्टिकोण पूरी तरह समान नहीं है। जापान अमेरिका का औपचारिक सहयोगी है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देता है। क्वाड को भी मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-जापान की बढ़ती साझेदारी क्वाड (Quad) को भी और मजबूत करेगी। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और वैकल्पिक आर्थिक ढांचे को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कुछ चुनौतियां भी मौजूद हालांकि मजबूत रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। कई बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में समय और लागत दोनों बढ़ी हैं। सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में दोनों देशों की प्राथमिकताएं पूरी तरह समान नहीं हैं। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन, सुरक्षित सप्लाई चेन, नई तकनीकों के विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। यही कारण है कि जापानी प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi नौ साल बाद Netherlands दौरे पर पहुंचे हैं। यह यात्रा भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात नीदरलैंड के प्रधानमंत्री Rob Jetten से होगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, रक्षा, ग्रीन एनर्जी और हाई-टेक सेक्टर से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर सेक्टर पर सबसे ज्यादा जोर इस दौरे का सबसे अहम केंद्र सेमीकंडक्टर और हाई-टेक इंडस्ट्री को माना जा रहा है। भारत इस समय घरेलू चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में नीदरलैंड की टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ साझेदारी भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासतौर पर ASML पर भारत की नजर है। ASML दुनिया की सबसे बड़ी और उन्नत चिप मशीन बनाने वाली कंपनियों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में चिप निर्माण और एडवांस टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। व्यापार और निवेश बढ़ाने की तैयारी भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। नीदरलैंड भारत में निवेश करने वाले प्रमुख यूरोपीय देशों में शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस यात्रा में नई निवेश योजनाओं और व्यापारिक समझौतों पर भी चर्चा हो सकती है। बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी सेक्टरों में सहयोग बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। वाटर मैनेजमेंट और खेती तकनीक में सहयोग नीदरलैंड को आधुनिक खेती और वाटर मैनेजमेंट तकनीक के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। भारत इन क्षेत्रों में डच विशेषज्ञता का फायदा उठाना चाहता है, खासकर जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और स्मार्ट एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में। नीदरलैंड के राजा और रानी से भी होगी मुलाकात पीएम मोदी की मुलाकात नीदरलैंड के राजा Willem-Alexander और रानी Máxima से भी होने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री के सम्मान में आधिकारिक कार्यक्रम और राजकीय भोज का आयोजन भी किया जाएगा। यूरोप में भारत की नई रणनीति विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा सिर्फ औपचारिक विदेश यात्रा नहीं, बल्कि यूरोप में भारत की नई रणनीतिक नीति का हिस्सा है। Russia-Ukraine War और वैश्विक सप्लाई चेन संकट के बाद भारत यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक और तकनीकी संबंधों को तेजी से मजबूत कर रहा है। नीदरलैंड को यूरोप का बड़ा व्यापारिक केंद्र माना जाता है। खासतौर पर Port of Rotterdam पूरे यूरोप के लिए प्रमुख व्यापारिक गेटवे के रूप में जाना जाता है। ऐसे में भारत के लिए नीदरलैंड की रणनीतिक और आर्थिक अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।