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Japan PM Takaichi Strengthens India Ties

India-Japan Summit: जापान की प्रधानमंत्री भारत दौरे पर क्यों? क्या चीन को लेकर बन रही नई रणनीति

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Indian Prime Minister Narendra Modi welcomes Japanese Prime Minister Sanae Takaichi during her official visit to India, highlighting stronger strategic, economic and Indo-Pacific cooperation.
Japan PM Sanae Takaichi's India Visit Strengthens Strategic Partnership

नई दिल्ली: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का 1 से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच यह दौरा भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, उन्नत तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता दोनों देशों के लिए साझा चिंता का विषय बनी हुई है।

दो दशक में मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी

भारत और जापान के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उसी वर्ष दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' का दर्जा दिया। वर्ष 2014 में इसे और आगे बढ़ाते हुए 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' घोषित किया गया।

आज दोनों देशों के बीच 70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र, 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता और रक्षा, विदेश एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े नियमित संवाद स्थापित हो चुके हैं।

रक्षा और तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग

इस बार की वार्ता में दोनों देश रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं।

भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति', SAGAR (Security and Growth for All in the Region) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव का मेल जापान के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' विजन के साथ देखा जा रहा है।

आर्थिक साझेदारी भी होगी मजबूत

जापान भारत का प्रमुख निवेशक और आधिकारिक विकास सहायता (ODA) देने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा सहयोग का प्रमुख उदाहरण मानी जाती है।

इसके अलावा जापान भारत में सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।

क्या चीन सबसे बड़ा कारण है?

विश्लेषकों का मानना है कि भारत-जापान सहयोग के पीछे चीन का बढ़ता प्रभाव एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारण है।

जापान पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंतित रहा है। वहीं भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक देश के प्रभुत्व के पक्ष में नहीं है। इसी कारण दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं।

हालांकि दोनों देशों का दृष्टिकोण पूरी तरह समान नहीं है। जापान अमेरिका का औपचारिक सहयोगी है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देता है।

क्वाड को भी मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-जापान की बढ़ती साझेदारी क्वाड (Quad) को भी और मजबूत करेगी। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और वैकल्पिक आर्थिक ढांचे को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कुछ चुनौतियां भी मौजूद

हालांकि मजबूत रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं।

  • दोनों देशों के बीच व्यापार अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है।
  • कई बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में समय और लागत दोनों बढ़ी हैं।
  • सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में दोनों देशों की प्राथमिकताएं पूरी तरह समान नहीं हैं।

विशेषज्ञों की राय

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन, सुरक्षित सप्लाई चेन, नई तकनीकों के विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।

यही कारण है कि जापानी प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के जश्न में डूबीं प्रियंका चोपड़ा, शेयर किया आतिशबाजी का वीडियो

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड और हॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस (4 जुलाई) के मौके पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए जश्न की खास झलक साझा की है। एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर देर रात का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उनके घर के बाहर आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगाता नजर आ रहा है। वीडियो में शांत माहौल के बीच रोशनी से सजा आसमान अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के उत्साह को बयां करता दिख रहा है।   इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा प्रियंका ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, "बिस्तर से 4 जुलाई की शुभकामनाएं"। उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और फैंस भी उन्हें अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दे रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी अमेरिका में 4 जुलाई को बड़े उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है और प्रियंका भी इस जश्न का हिस्सा बनीं।   प्रियंका चोपड़ा का अमेरिका से जुड़ाव काफी पुराना है। किशोरावस्था के दौरान उन्होंने मैसाचुसेट्स, आयोवा और न्यूयॉर्क के स्कूलों में पढ़ाई की थी। भारत लौटने के बाद उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई और बाद में हॉलीवुड में भी सफल करियर स्थापित किया। साल 2018 में उन्होंने अमेरिकी सिंगर और अभिनेता निक जोनास से शादी की। वर्तमान में प्रियंका अपने पति निक जोनास और बेटी मालती मैरी के साथ अमेरिका में रहती हैं।   वर्कफ्रंट की बात करें तो वर्कफ्रंट की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा जल्द ही निर्देशक एस.एस. राजामौली की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'वाराणसी' से भारतीय सिनेमा में वापसी करने जा रही हैं। इस फिल्म को लेकर पहले से ही दर्शकों में काफी उत्साह है। हाल ही में फिल्म की शूटिंग को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया था। ऐसे में प्रियंका एक बार फिर भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए तैयार हैं।

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Workers prepare a massive 408-kilogram time capsule for burial at Philadelphia's Independence National Historical Park to mark America's 250th anniversary.
अमेरिका आजादी के 250 साल पूरे होने पर दफनाएगा 408 किलो का टाइम कैप्सूल, 2276 में खुलेगा; जानिए इसकी खासियत

वॉशिंगटन: अमेरिका अपनी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक अनोखी ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया स्थित इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 408 किलोग्राम वजनी एक विशाल टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा, जिसे अब से 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा। इस टाइम कैप्सूल का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए वर्ष 2026 के अमेरिका की संस्कृति, विज्ञान, तकनीक, समाज और जीवनशैली का दस्तावेज सुरक्षित रखना है। इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि भविष्य में इसे आसानी से खोजा जा सके। क्या है टाइम कैप्सूल? टाइम कैप्सूल एक विशेष रूप से सीलबंद कंटेनर होता है, जिसमें किसी समय की महत्वपूर्ण वस्तुएं, दस्तावेज और सांस्कृतिक प्रतीक सुरक्षित रखे जाते हैं। इसे वर्षों या सदियों बाद खोला जाता है ताकि आने वाली पीढ़ियां उस दौर के इतिहास और जीवन को समझ सकें। क्या-क्या रखा गया है कैप्सूल में? इस विशेष कैप्सूल में अमेरिका के सभी 50 राज्यों और आम नागरिकों द्वारा चुनी गई कई अनूठी वस्तुएं शामिल की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से— व्हेल की हड्डी दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी भविष्यवाणियां ऐतिहासिक दस्तावेज अमेरिकी समाज और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाली कई अन्य वस्तुएं 250 साल तक सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई विशेष तकनीक वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कैप्सूल में रखी वस्तुएं ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित रहें। इसके लिए कई वर्षों के शोध के बाद विशेष तकनीक विकसित की गई। कैप्सूल की प्रमुख विशेषताएं: सिलेंडर आकार में बनाया गया है, ताकि कोनों से पानी रिसने की संभावना न रहे। इसे इंडियम धातु से पूरी तरह सील किया गया है, जो सूक्ष्म दरारों को भी बंद कर देती है। अंदर 35 प्रतिशत नियंत्रित नमी रखी गई है, जिससे कागज और अन्य सामग्री सुरक्षित बनी रहे। इसे जमीन के लगभग 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा, जहां तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। पानी और जंग से कैसे रहेगा सुरक्षित? कैप्सूल के ऊपर एक अतिरिक्त स्टील सिलेंडर लगाया जाएगा, जिससे दोनों परतों के बीच हवा का कुशन बनेगा। यह संरचना भूजल, नमी और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में भी पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी। प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला के अनुसार, "अगर इस टाइम कैप्सूल तक पानी पहुंच गया, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया लगभग छह फीट पानी में डूब चुका होगा।" टाइम कैप्सूल दफनाने का उद्देश्य क्या है? इस परियोजना का उद्देश्य केवल इतिहास को संरक्षित करना नहीं है, बल्कि वर्ष 2026 के अमेरिका की वास्तविक तस्वीर भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। संग्रहालयों की वस्तुएं समय के साथ बदली या स्थानांतरित हो सकती हैं, लेकिन टाइम कैप्सूल को तय समय से पहले नहीं खोला जाता। इससे भविष्य के लोग बिना किसी बदलाव के उस दौर की झलक देख सकेंगे। दुनिया के चर्चित टाइम कैप्सूल क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन (अमेरिका): 1936 में बनाया गया यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल में माना जाता है। इसे वर्ष 8113 में खोला जाएगा। वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल (न्यूयॉर्क): 1939 में दफनाया गया था और इसे 6939 में खोलने की योजना है। भारत का 'कलपात्र': 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने दिल्ली के लाल किले के पास टाइम कैप्सूल दफन कराया था। 1977 में सरकार बदलने के बाद इसे बाहर निकाल लिया गया। पहले खुले टाइम कैप्सूल में क्या मिला था? मैसाचुसेट्स (2015): 220 साल पुराने कैप्सूल से चांदी और तांबे के सिक्के, अखबार, पदक और ऐतिहासिक दस्तावेज मिले। नॉर्वे (2012): 100 साल पुराने पैकेट में स्थानीय इतिहास से जुड़े दस्तावेज और अखबार मिले। बोस्टन (2014): 1901 के टाइम कैप्सूल से पुराने अखबार, तस्वीरें और खेल संबंधी पत्रिकाएं बरामद हुईं। यह नया अमेरिकी टाइम कैप्सूल भविष्य की पीढ़ियों के लिए वर्ष 2026 के अमेरिका का एक ऐतिहासिक संदेश और समय की अमूल्य धरोहर बनकर सुरक्षित रहेगा।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu responds to reports alleging plans to target Iranian negotiators during US-Iran peace talks.

ईरानी वार्ताकारों की हत्या की साजिश वाली रिपोर्ट पर इजराइल का खंडन, बोला- 'यह पूरी तरह फेक न्यूज'

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खामेनेई को अंतिम विदाई: तेहरान में उमड़ा जनसैलाब, 14 महीने की नातिन के साथ 9 जुलाई को होंगे सुपुर्द-ए-खाक

तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां तेज हो गई हैं। राजधानी तेहरान में जगह-जगह बैनर लगाकर लोगों से अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की जा रही है। ईरानी सरकार का अनुमान है कि शनिवार से शुरू होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम में लाखों लोग शामिल होंगे। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह जनसैलाब वर्ष 1989 में अयातुल्ला रूहुल्ला खुमैनी के अंतिम संस्कार की याद ताजा कर सकता है। ग्रैंड मोसल्ला में रखे गए ताबूत तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अयातुल्ला अली खामेनेई का ताबूत ईरानी राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर रखा गया है। उनके साथ उन परिजनों के ताबूत भी रखे गए हैं, जिनकी हालिया संघर्ष के दौरान इजरायली हवाई हमलों में मौत हुई थी। इनमें उनके दामाद, सबसे बड़ी बेटी, 14 महीने की नातिन और नए सर्वोच्च नेता घोषित किए गए अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई की पत्नी भी शामिल हैं। श्रद्धांजलि देने पहुंचे धार्मिक और विदेशी प्रतिनिधि देश-विदेश से पहुंचे धार्मिक नेताओं, सरकारी प्रतिनिधियों और विदेशी मेहमानों ने ताबूत के पास जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सैन्य बैंड ने शोक धुन बजाई, जबकि कई श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार अपने स्कार्फ और अन्य वस्तुओं को ताबूत से स्पर्श कराकर श्रद्धा व्यक्त की। 'या हुसैन' वाला लाल झंडा बना आकर्षण खामेनेई के ताबूत पर लाल रंग का झंडा भी रखा गया है, जिस पर सफेद अक्षरों में "या हुसैन" लिखा हुआ है। शिया परंपरा में यह झंडा अन्याय के खिलाफ संघर्ष और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। सरकार के लिए शक्ति प्रदर्शन का अवसर विश्लेषकों के अनुसार, यह अंतिम संस्कार केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं बल्कि हालिया संघर्ष के बाद सरकार के लिए जनसमर्थन दिखाने का बड़ा अवसर भी है। ईरान इस समय अमेरिका के साथ युद्धविराम और शांति वार्ता के दौर से गुजर रहा है। वहीं, इजरायल के साथ तनाव भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में यह आयोजन राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैन्य नेतृत्व भी रहा मौजूद कार्यक्रम में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख जनरल अहमद वाहिदी समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सरकारी प्रतिनिधि, धार्मिक नेता और विभिन्न देशों के मेहमान शामिल हुए। मुजतबा खामेनेई की मौजूदगी पर सस्पेंस ईरान के नए सर्वोच्च नेता घोषित किए गए अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया संघर्ष के दौरान उनके घायल होने की चर्चा है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे अपने पिता के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से शामिल होंगे या नहीं। ईरान की कड़ी चेतावनी मुजतबा खामेनेई को लेकर इजरायल की ओर से सामने आई कथित धमकियों के बाद ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगियों ने ईरान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की, तो उसका "कड़ा और निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। 9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार ईरानी सरकार के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की औपचारिक शुरुआत शनिवार से होगी। उनकी पार्थिव देह को श्रद्धांजलि के लिए ईरान और पड़ोसी इराक के विभिन्न शहरों में ले जाया जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई 2026 को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें उनकी 14 महीने की नातिन समेत अन्य दिवंगत परिजनों के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Indian Prime Minister Narendra Modi welcomes Japanese Prime Minister Sanae Takaichi during her official visit to India, highlighting stronger strategic, economic and Indo-Pacific cooperation.

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