दुनिया

Security forces inspect crime scenes after deadly shootings killed workers and police officers in Honduras
होंडुरास में खूनी गुरुवार: मजदूरों और पुलिसकर्मियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग, 25 लोगों की मौत

मध्य अमेरिकी देश Honduras में गुरुवार को हुई दो बड़ी हिंसक घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया। कुछ ही घंटों के अंतराल में हुए दो अलग-अलग हमलों में बंदूकधारियों ने खेतों में काम कर रहे मजदूरों और गैंग विरोधी अभियान पर निकले पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। इन हमलों में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 19 मजदूर और 6 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। खेत में घुसकर मजदूरों पर बरसाईं गोलियां पहला हमला उत्तरी होंडुरास के Trujillo इलाके में हुआ। यहां एक प्लांटेशन (खेती क्षेत्र) में काम कर रहे मजदूरों पर अज्ञात बंदूकधारियों ने अचानक हमला कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कम से कम 19 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि यह इलाका लंबे समय से जमीन विवाद, अवैध कब्जों और ड्रग तस्करी से जुड़ी हिंसा के लिए बदनाम रहा है। हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। गैंग विरोधी मिशन पर निकले पुलिसकर्मी भी बने निशाना दूसरा हमला Omoa नगर पालिका में हुआ, जो ग्वाटेमाला सीमा के पास स्थित है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गैंग विरोधी ऑपरेशन पर जा रही पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया। इस हमले में एक वरिष्ठ अधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। बताया गया कि पुलिस दल राजधानी Tegucigalpa से ऑपरेशन के लिए रवाना हुआ था, तभी रास्ते में हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया। हिंसा और ड्रग तस्करी से जूझ रहा है होंडुरास होंडुरास लंबे समय से गैंग वॉर, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और संगठित अपराध की समस्या से जूझ रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में हत्या की दर में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन हिंसा की घटनाएं अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अपराध से निपटने के लिए सरकार की सख्त सैन्य रणनीति के बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सके हैं। कई संगठनों ने सुरक्षा बलों पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए भी खतरनाक देश गैर-सरकारी संगठन Global Witness के अनुसार, होंडुरास पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में यहां पांच पर्यावरण कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 18 थी। लगातार बढ़ती हिंसा ने एक बार फिर होंडुरास की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Maulana Fazlur Rehman criticizes Pakistan’s military establishment and Army Chief Asim Munir during Karachi rally
पाकिस्तान में फिर गरमाई सियासत, मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर और सत्ता प्रतिष्ठान पर साधा निशाना

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख Maulana Fazlur Rehman ने कराची में आयोजित एक जनसभा में पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था और सेना पर तीखा हमला बोला। उनके बयान को सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir और सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती माना जा रहा है। “अगर मुझे कुछ हुआ तो जिम्मेदार एस्टैब्लिशमेंट होगी” कराची में समर्थकों को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया कि उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल और पत्र मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पाकिस्तान की “एस्टैब्लिशमेंट” जिम्मेदार होगी। उन्होंने मंच से कहा कि देश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं, बल्कि “सिविल-मिलिट्री हाइब्रिड राज” चल रहा है। उनके इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भारत, अफगानिस्तान और चीन के रिश्तों का भी किया जिक्र मौलाना ने पाकिस्तान की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण पाकिस्तान के भारत और अफगानिस्तान के साथ संबंध खराब हुए हैं, जबकि चीन का भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की नीतियां पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर रही हैं और इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। इमरान खान की तरह टकराव? पाकिस्तान में इससे पहले Imran Khan और उनकी पार्टी भी सेना पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगा चुकी है। अब मौलाना फजलुर रहमान के तेवरों को उसी तरह की नई टकराव की शुरुआत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में लंबे समय से विपक्षी दल यह आरोप लगाते रहे हैं कि देश की वास्तविक ताकत सेना के हाथ में है और सरकारें उसी के प्रभाव में काम करती हैं। देशव्यापी आंदोलन का ऐलान मौलाना फजलुर रहमान ने 22 मई से देशव्यापी विरोध आंदोलन शुरू करने की घोषणा भी की। उन्होंने बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और सरकार की नीतियों को लेकर जनता से सड़क पर उतरने की अपील की। उन्होंने गाजा युद्ध का जिक्र करते हुए मुस्लिम देशों से इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की भी मांग की। मौलाना ने दावा किया कि क्षेत्र में इजरायल का प्रभाव बढ़ रहा है और भविष्य में पाकिस्तान भी खतरे का सामना कर सकता है। पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल मौलाना के इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नया तनाव पैदा हो गया है। विपक्ष और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच टकराव की आशंका फिर बढ़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की सियासत में बड़ा विवाद बन सकता है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Pakistan social media users create Cockroach Awami Party pages inspired by India’s viral Cockroach Janta Party trend
पाकिस्तान में भी ‘कॉकरोच’ ट्रेंड का असर, सोशल मीडिया पर बनने लगे नए पेज

भारत में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई “Cockroach Janta Party” का असर अब Pakistan तक पहुंच गया है। वहां भी कई कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स “Cockroach Awami Party” जैसे नामों से नए अकाउंट और पेज बना रहे हैं। यह ट्रेंड खासकर इंस्टाग्राम पर तेजी से फैलता दिखाई दे रहा है। भारत से प्रेरित बताई जा रही नई सोशल मीडिया लहर रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में सबसे पहले सामने आए पेजों में से एक “Cockroach Awami Party” नाम का इंस्टाग्राम अकाउंट है। इस पेज ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि उसे भारत की “Cockroach Janta Party” से प्रेरणा मिली है। पेज के बायो में लिखा गया है – “हां, हमने कॉपी किया है… लेकिन फर्क किसे पड़ता है, मकसद वही है।” खबर लिखे जाने तक इस अकाउंट के 1,600 से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके थे। लोगो और कंटेंट में भी समानता पाकिस्तान में बने इन पेजों का डिजाइन और लोगो भी भारतीय ट्रेंड से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है। हालांकि वहां के पेजों में हरे और सफेद रंग का इस्तेमाल किया गया है, जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय रंगों से मेल खाते हैं। पहली वायरल रील में लोगों से पूछा जाता है कि वे Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) या Pakistan Muslim League (N) (PML-N) में से किससे जुड़े हैं। बाद में वीडियो में जवाब आता है – “नहीं, हम तो Cockroach Awami Party से हैं।” कई फर्जी और ट्रेंड आधारित अकाउंट्स सामने आए इंस्टाग्राम पर “Cockroach Awami Party” सर्च करने पर कई नए अकाउंट दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी ज्यादातर पेजों के फॉलोअर्स काफी कम हैं और यह साफ माना जा रहा है कि इनमें से कई अकाउंट सिर्फ वायरल ट्रेंड का फायदा उठाने के लिए बनाए गए हैं। सोशल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ट्रेंड अक्सर राजनीतिक व्यंग्य, युवा असंतोष और इंटरनेट मीम कल्चर के मिश्रण से तेजी से फैलते हैं। भारत में कैसे शुरू हुआ था ट्रेंड? भारत में “Cockroach Janta Party” ट्रेंड कथित तौर पर एक विवादित बयान और सोशल मीडिया नाराजगी के बाद शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह मीम और व्यंग्य आधारित डिजिटल मूवमेंट में बदल गया। इंस्टाग्राम पर इससे जुड़े पेजों ने करोड़ों व्यूज और लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स हासिल किए, जिसके बाद यह ट्रेंड दूसरे देशों तक भी पहुंचने लगा। सोशल मीडिया पर युवाओं की नई अभिव्यक्ति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ट्रेंड यह दिखाते हैं कि दक्षिण एशिया के युवा पारंपरिक राजनीति से अलग इंटरनेट आधारित व्यंग्य और मीम संस्कृति के जरिए अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान में “Cockroach Awami Party” जैसे पेज सिर्फ मनोरंजन और मीम तक सीमित रहेंगे या आगे किसी बड़े डिजिटल अभियान का रूप लेंगे।  

surbhi मई 22, 2026 0
Pulwama attack
आतंकी हमजा बुरहान की हत्या का आरोपी हथियार समेत गिरफ्तार, 2 संदिग्ध फरार  पुलवामा हमले में शामिल था बुरहान

इस्लामाबाद, एजेंसियां। पुलवामा हमले में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की हत्या के मामले में मुजफ्फराबाद के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने अब्दुल्ला कमाल नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। अब्दुल्ला कमाल पाकिस्तान के वाह कैंट का रहने वाला है। CTD ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से हथियार भी बरामद किया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या में इसी हथियार का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।   जो संदिग्ध फरार रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दौरान मौजूद दो अन्य संदिग्ध मौके से भाग निकले। सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हैं। मामले में आरोपी अब्दुल्ला कमाल की एक्सक्लूसिव फोटो भी सामने आई है। हमजा बुरहान 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शामिल था। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। हमजा सुपुर्द-ए-खाक हमजा बुरहान को आज 22 मई को इस्लामाबाद के बर्मा टाउन स्थित फातिमा स्कूल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सिर में तीन गोलियां लगने से हमजा की मौत न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक हमजा पर गुरुवार को मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन उसके सिर में लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। हमजा बुरहान जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था। वह पहले आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा था और बाद में अल बराक के लिए काम करने लगा। वह मुजफ्फराबाद के चीला बांदी इलाके में भारी सुरक्षा के बीच रह रहा था। उसके पास कमांडो सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट वाहन भी थे। भारत ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी माना जाता था। उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी करीबी संबंध थे। भारत से पाकिस्तान गया, फिर आतंकी संगठन से जुड़ा हमजा सरकार के मुताबिक, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर पुलवामा के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। 23 साल का हमजा, आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा हुआ था। अल बद्र को सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। वह कानूनी तरीके से पाकिस्तान गया था। वहां जाकर वह अल बद्र में शामिल हो गया और बाद में संगठन का सक्रिय आतंकी और कमांडर बन गया। अभी वह पाकिस्तान से ही काम कर रहा था। उस पर आरोप है कि वह युवाओं को अल बद्र में शामिल होने के लिए उकसाता था और फंडिंग भी करता था। जांच एजेंसियों के अनुसार 2020 में CRPF जवानों पर ग्रेनेड हमले और युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहा। पुलवामा अटैक में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था। श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लेथपोरा इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी SUV बसों से टकरा दी थी। धमाका इतना जबरदस्त था कि दो बसों के परखच्चे उड़ गए और 40 जवान शहीद हो गए। जांच में सामने आया कि हमले से पहले सुरक्षा एजेंसियों को कई इंटेलिजेंस इनपुट मिले थे, लेकिन आतंकी साजिश को रोका नहीं जा सका। बाद में NIA ने अपनी चार्जशीट में जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना मसूद अजहर को हमले का मास्टरमाइंड बताया था। इसके अलावा हमजा जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के काकापोरा इलाके में 18 नवंबर 2020 को हुए आतंकी हमले में भी शामिल था। तब आतंकियों ने बंकर पर ग्रेनेड हमला किया था। हालांकि ग्रेनेड अपने निशाने से चूककर सड़क पर फट गया, जिससे 12 नागरिक घायल हो गए। बुरहान वानी का करीबी था हमजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान लंबे समय से पाकिस्तान और PoK में सक्रिय था। बुरहान मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर मारा गया। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी था। बुरहान वानी 8 जुलाई 2016 को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। उसकी मौत के बाद कश्मीर में लंबे समय तक हिंसा और विरोध प्रदर्शन हुए थे। बुरहान वानी की मौत के बाद जाकिर मूसा हिजबुल का कमांडर बना था। वह 23 मई 2019 को पुलवामा जिले के त्राल इलाके में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में मारा गया था। 4 महीने में पाकिस्तान के 4 बड़े आतंकियों की मौत पाकिस्तान में पिछले 4 महीने में 4 बड़े आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इनके पीछे अज्ञात हमलावर का हाथ बताया जा रहा है, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

Anjali Kumari मई 22, 2026 0
Donald Trump speaks about missing his son’s wedding amid rising Iran tensions and global security concerns
क्या बेटे की शादी में शामिल नहीं होंगे ट्रंप? ईरान तनाव के बीच दिया बड़ा बयान

Donald Trump ने ईरान संकट और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अपने बेटे Donald Trump Jr. की शादी में शामिल होने को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए शादी में जाना आसान नहीं है और चाहे वह जाएं या नहीं, दोनों ही हालात में मीडिया उन्हें निशाना बनाएगा। पत्रकारों से क्या बोले ट्रंप? व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह अपने बेटे की शादी में शामिल होने की कोशिश करेंगे, लेकिन फिलहाल समय सही नहीं लग रहा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “अगर मैं शादी में जाता हूं, तो मुझे मारा जाएगा। अगर नहीं जाता हूं, तो फेक न्यूज मुझे छोड़ने वाली नहीं है।” ट्रंप ने संकेत दिया कि Iran से जुड़े मौजूदा तनाव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात उनकी प्राथमिकता बने हुए हैं। बहामास में होगी निजी शादी रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनल्ड ट्रंप जूनियर इस सप्ताहांत Bahamas में एक निजी समारोह में मॉडल और सोशलाइट Bettina Anderson के साथ शादी के बंधन में बंध सकते हैं। बताया जा रहा है कि समारोह को बेहद निजी रखा गया है और इसमें केवल करीबी परिवार के सदस्यों तथा दोस्तों को ही आमंत्रित किया गया है। सुरक्षा और राजनीति बनी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि उनकी मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक चर्चाएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि शादी में शामिल होने या न होने, दोनों स्थितियों में मीडिया आलोचना करेगा। ट्रंप ने इसे “ऐसी स्थिति जिसमें मैं जीत नहीं सकता” बताया। कैंप डेविड में हुई थी सगाई डोनल्ड ट्रंप जूनियर ने दिसंबर में अपनी सगाई का ऐलान किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों की सगाई Camp David में हुई थी। बाद में बेटिना एंडरसन ने Mar-a-Lago में एक ब्राइडल शावर कार्यक्रम भी आयोजित किया था। ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी यह डोनल्ड ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी होगी। इससे पहले उनकी शादी Vanessa Trump से हुई थी, जिनसे उनके पांच बच्चे हैं। दोनों का 2018 में तलाक हो गया था। हाल ही में वैनेसा ट्रंप ने खुलासा किया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। इसके अलावा ट्रंप जूनियर की सगाई पहले Kimberly Guilfoyle से भी हुई थी, लेकिन 2024 में दोनों का रिश्ता खत्म हो गया। ईरान संकट पर टिकी दुनिया की नजर ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति और सुरक्षा प्राथमिकताएं निजी कार्यक्रमों पर भारी पड़ सकती हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Taliban faces global criticism after Afghanistan introduces controversial marriage law affecting girls and women
अफगानिस्तान में तालिबान का नया विवाह कानून विवादों में, UN ने जताई ‘गंभीर चिंता’

Taliban सरकार द्वारा जारी नए विवाह संबंधी कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस कानून से बाल विवाह को कानूनी मान्यता मिलने का खतरा बढ़ गया है और इससे महिलाओं व लड़कियों के अधिकार और कमजोर होंगे। क्या है नया तालिबानी आदेश? अफगानिस्तान के न्याय मंत्रालय ने हाल ही में डिक्री नंबर 18 जारी की है, जिसका शीर्षक “पति-पत्नी के न्यायिक अलगाव” रखा गया है। इसमें विवाह, तलाक और वैवाहिक विवादों से जुड़े नियम तय किए गए हैं। सबसे विवादित प्रावधान यह है कि “युवावस्था” में पहुंच चुकी लड़की की चुप्पी को भी शादी के लिए उसकी सहमति माना जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि इससे कम उम्र की लड़कियों की शादी को वैधता मिल सकती है और उनकी स्वतंत्र इच्छा को नजरअंदाज किया जा सकता है। UNAMA ने क्या कहा? United Nations Assistance Mission in Afghanistan (UNAMA) ने बयान जारी कर कहा कि इस कानून में उन लड़कियों के तलाक का भी जिक्र है जो कम उम्र में शादीशुदा हैं और अब युवावस्था में पहुंच चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह संकेत देता है कि तालिबान सरकार बाल विवाह को कानूनी रूप से स्वीकार कर रही है। UNAMA ने कहा कि यह कानून “पूर्ण और स्वतंत्र सहमति” के सिद्धांत को कमजोर करता है और बच्चों के हितों की रक्षा करने में विफल है। कानून में और क्या प्रावधान हैं? तालिबानी आदेश के मुताबिक, यदि किसी पिता या दादा ने किसी नाबालिग लड़की या लड़के की शादी बिना दहेज, बहुत कम दहेज या “गलत तरीके” से कर दी हो, तो ऐसी शादी को अमान्य घोषित किया जा सकता है। कानून में यह भी कहा गया है कि अगर किसी लड़की की शादी ऐसे व्यक्ति से कर दी गई हो जो उसके साथ खराब व्यवहार करता हो या बुरे फैसलों के लिए बदनाम हो, तो लड़की युवावस्था में पहुंचने के बाद अदालत में शादी रद्द कराने की मांग कर सकती है। आलोचना उस प्रावधान को लेकर ज्यादा हो रही है जिसमें कहा गया है कि अगर कोई महिला तलाक मांगती है और पति इनकार कर देता है, तो कई मामलों में पति की बात को प्राथमिकता दी जा सकती है, क्योंकि महिला के पास गवाह जुटाना मुश्किल होगा। तालिबान ने आरोपों को किया खारिज तालिबान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि यह कानून इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप है। तालिबान का दावा है कि अफगानिस्तान में लड़कियों की जबरन शादी पहले से प्रतिबंधित है और नया आदेश केवल वैवाहिक मामलों के न्यायिक नियम तय करने के लिए लाया गया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि व्यवहारिक रूप से यह कानून पुरुष अभिभावकों और पतियों को अधिक अधिकार देता है, जबकि लड़कियों की स्वतंत्र सहमति कमजोर पड़ती है। अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति लगातार खराब Afghanistan में 2021 में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद महिलाओं और लड़कियों पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। लड़कियों की उच्च शिक्षा पर रोक, महिलाओं के कई नौकरियों में काम करने पर पाबंदी और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी सीमित करने जैसे फैसले पहले ही वैश्विक आलोचना का कारण बन चुके हैं। वर्तमान में अफगानिस्तान में महिलाओं को स्कूल, कॉलेज, कई सरकारी और निजी नौकरियों, जिम, ब्यूटी सैलून और यहां तक कि कई सार्वजनिक पार्कों तक में प्रवेश से रोका जा चुका है। मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी लड़की की “चुप्पी” को उसकी सहमति मानना बेहद खतरनाक सिद्धांत है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे परिवारों और स्थानीय दबाव के जरिए कम उम्र की लड़कियों की जबरन शादी आसान हो सकती है। उनका कहना है कि विवाह के लिए स्पष्ट और स्वतंत्र सहमति अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का मूल आधार है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Donald Trump faces renewed US-China tensions as lawmakers push sanctions on CCP-linked companies
ट्रंप की नई चाल से भड़केगा चीन: CCP से जुड़ी कंपनियों पर सख्त प्रतिबंध लाने की तैयारी

Donald Trump और Xi Jinping के बीच हालिया बातचीत और रिश्तों में नरमी की चर्चाओं के बीच अमेरिका में चीन के खिलाफ बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी संसद में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसका मकसद चीन की सेना और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी कंपनियों पर तेजी से प्रतिबंध लगाना है। इस कदम को अमेरिका की चीन के खिलाफ रणनीतिक और आर्थिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। क्या है CCP Sanctions Shot Clock Act? अमेरिका में रिपब्लिकन सांसद Rick Scott और Elise Stefanik ने ‘CCP Sanctions Shot Clock Act’ नाम का विधेयक पेश किया है। इस कानून के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को उन चीनी कंपनियों और व्यक्तियों पर एक साल के भीतर कार्रवाई करनी होगी, जिन्हें अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया है। यह विधेयक वित्त वर्ष 2026 के National Defense Authorization Act में संशोधन के रूप में लाया गया है। अब तय समय सीमा में लगेगा बैन मौजूदा व्यवस्था में अमेरिकी राष्ट्रपति हर दो साल में उन चीनी कंपनियों और नागरिकों की रिपोर्ट जारी करते हैं, जिन्हें चीन के सैन्य-औद्योगिक नेटवर्क से जुड़ा माना जाता है। लेकिन अभी तक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग पर इन संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में डालने की कोई तय समय सीमा नहीं थी। नए प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रपति की रिपोर्ट आने के बाद ट्रेजरी विभाग को एक साल के भीतर संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों को “Non-SDN Chinese Military-Industrial Complex Companies List” में शामिल करना होगा। इसके बाद इस सूची को आधिकारिक रूप से फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा। “कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन” सीनेटर रिक स्कॉट ने चीन पर बेहद सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अमेरिका के लिए सीधा खतरा है और अब कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जो संस्थाएं चीनी सैन्य हितों के लिए काम कर रही हैं, उन्हें अमेरिका में कारोबार करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन है और अब उसी हिसाब से कार्रवाई का समय आ गया है।” चीन पर आर्थिक निर्भरता घटाने की रणनीति एलिस स्टेफानिक ने कहा कि यह कानून रिपब्लिकन पार्टी की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चीन से जुड़ी आर्थिक निर्भरता कम करना है। उन्होंने कहा कि चीन के सैन्य विस्तार और दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ अमेरिका को तेजी से कार्रवाई करनी होगी। स्टेफानिक के मुताबिक, कांग्रेस पहले ही प्रशासन से ऐसी चीनी कंपनियों की रिपोर्ट मांग चुकी है, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी रही। नया कानून इसी प्रक्रिया को तेज करने के लिए लाया गया है। ट्रंप-शी रिश्तों पर पड़ सकता है असर यह विधेयक ऐसे समय पेश किया गया है जब हाल ही में ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच रिश्तों में सुधार की चर्चाएं हो रही थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह कानून पास होता है, तो अमेरिका-चीन संबंधों में फिर तनाव बढ़ सकता है। खासकर तकनीक, रक्षा, चिप निर्माण और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चीनी कंपनियों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। वैश्विक बाजार पर भी दिख सकता है असर अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती सख्ती का असर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और निवेश माहौल पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अमेरिका चीन की सैन्य और टेक कंपनियों पर और ज्यादा आर्थिक दबाव बना सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Hundreds of climbers summit Mount Everest in a single day, setting a new record in Nepal
माउंट एवरेस्ट पर बना नया रिकॉर्ड, एक ही दिन में 275 पर्वतारोहियों ने फतह की दुनिया की सबसे ऊंची चोटी

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest पर इस साल नया रिकॉर्ड बन गया है। नेपाल की तरफ से एक ही दिन में करीब 275 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर इतिहास रच दिया। नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, बुधवार को बड़ी संख्या में पर्वतारोही 8,849 मीटर (29,032 फीट) ऊंची चोटी तक पहुंचे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एवरेस्ट के इतिहास में एक दिन में चोटी तक पहुंचने वालों की सबसे बड़ी संख्या हो सकती है। इस रिकॉर्ड के साथ एक नई चिंता भी सामने आई है। पर्वतारोहण विशेषज्ञों का मानना है कि एवरेस्ट पर लगातार बढ़ती भीड़ “ट्रैफिक जाम” जैसे हालात पैदा कर सकती है, जो खराब मौसम में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। नेपाल की तरफ से हुई रिकॉर्ड चढ़ाई एवरेस्ट पर चढ़ाई दो रास्तों से होती है — एक नेपाल की दक्षिणी तरफ से और दूसरा Tibet की उत्तरी तरफ से। लेकिन इस साल चीन ने तिब्बत वाला मार्ग बंद रखा है, जिसके कारण ज्यादातर पर्वतारोहियों ने नेपाल वाले रूट का इस्तेमाल किया। नेपाल पर्यटन विभाग के प्रवक्ता Himal Gautam ने बताया कि एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों का एवरेस्ट फतह करना ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अभी आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि बाकी है, क्योंकि पर्वतारोहियों की तस्वीरों, गाइडों और अभियान कंपनियों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ बनी चिंता इस सीजन में नेपाल सरकार ने एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए रिकॉर्ड 492 परमिट जारी किए हैं। पर्वतारोहियों और उनके सहयोगी स्टाफ के कारण बेस कैंप के आसपास टेंटों का पूरा शहर बस गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल के स्प्रिंग क्लाइंबिंग सीजन में अब तक करीब 600 लोग एवरेस्ट की चोटी तक पहुंच चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम अचानक खराब हुआ या चढ़ाई का समय सीमित हुआ, तो एवरेस्ट पर भीड़ गंभीर खतरा बन सकती है। पहले भी एवरेस्ट पर लंबी कतारों और ऑक्सीजन की कमी के कारण कई हादसे हो चुके हैं। 1953 से शुरू हुई एवरेस्ट विजय की कहानी एवरेस्ट पर पहली सफल चढ़ाई 1953 में Edmund Hillary और Tenzing Norgay ने की थी। उसके बाद से नेपाल में पर्वतारोहण एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित हुआ है और यह देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हर साल दुनिया भर से हजारों पर्वतारोही एवरेस्ट फतह करने नेपाल पहुंचते हैं, जिससे पर्यटन उद्योग को करोड़ों डॉलर की आय होती है। जून के पहले हफ्ते तक खत्म हो सकता है सीजन विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल का एवरेस्ट क्लाइंबिंग सीजन जून के पहले सप्ताह तक समाप्त हो सकता है। मौसम में बदलाव और ऊंचाई पर बढ़ते जोखिमों को देखते हुए आने वाले दिनों में भी एवरेस्ट पर गतिविधियां तेज बनी रहने की संभावना है।  

surbhi मई 22, 2026 0
US Secretary Marco Rubio speaks on India-US energy partnership amid rising global oil tensions
‘भारत हमारा बेहतरीन दोस्त’, मार्को रूबियो बोले- जितना तेल चाहिए, अमेरिका देने को तैयार

Marco Rubio ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझीदार” बताते हुए बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक जितना ईंधन चाहिए, उतना बेचने के लिए तैयार है। रूबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। भारत दौरे को बताया बेहद अहम मार्को रूबियो 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे Kolkata, Agra, Jaipur और New Delhi का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, “भारत हमारे सबसे बेहतरीन सहयोगियों और साझीदारों में से एक है। हम उनके साथ मिलकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है।” रूबियो ने यह भी कहा कि इस दौरे के दौरान उन्हें क्वाड देशों के प्रतिनिधियों से मिलने का मौका मिलेगा, जो रणनीतिक रूप से काफी अहम है। क्वाड बैठक पर भी फोकस अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि इस साल के अंत में क्वाड देशों की एक और बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर अहम माना जाता है। वेनेजुएला के तेल पर भी नजर रूबियो ने संकेत दिए कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि Venezuela के तेल को लेकर भी कई अवसर मौजूद हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति Delcy Rodriguez अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आ सकती हैं, जहां तेल व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हो सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी रिफाइनरियों में वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान को चेतावनी रूबियो ने Iran को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण या वहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का शुल्क लगाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगा। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ओमान के साथ मिलकर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर स्थायी टोल व्यवस्था को लेकर चर्चा कर रहा है। अमेरिका ने इसे वैश्विक व्यापार और समुद्री स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है। भारत पर बढ़ते तेल संकट का असर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस से पूरा करता है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल कीमतों में उछाल का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलएनजी की कीमतों में तेजी देखी गई है। बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच भारत की तेल विपणन कंपनियों ने चार दिनों के भीतर दो बार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की। पहले 3 रुपये और बाद में 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जिससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी हो सकती है मजबूत विशेषज्ञों का मानना है कि मार्को रूबियो का बयान भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दे सकता है। अगर अमेरिका भारत को बड़े पैमाने पर तेल और गैस सप्लाई बढ़ाता है, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और मध्य पूर्व पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।  

surbhi मई 22, 2026 0
US and Iran officials continue talks amid tensions over uranium stockpile and Strait of Hormuz dispute
US-Iran बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट पर अब भी टकराव

United States और Iran के बीच जारी तनाव के बीच बातचीत में कुछ नरमी के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन यूरेनियम भंडार और Strait of Hormuz को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे बने हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने हालिया वार्ता को लेकर कहा कि बातचीत में कुछ “पॉजिटिव संकेत” मिले हैं, लेकिन किसी बड़े समझौते की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। वहीं, ईरान के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच दूरी पहले से कुछ कम हुई है, लेकिन फिलहाल कोई औपचारिक सहमति नहीं बनी है। यूरेनियम भंडार सबसे बड़ी अड़चन अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) भंडार को लेकर बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कहा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल नहीं करने देगा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान के पास ऐसा यूरेनियम रहे, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सके। उन्होंने कहा, “हम ईरान को यूरेनियम रखने नहीं देंगे। जरूरत पड़ी तो उसे नष्ट भी किया जा सकता है।” ईरान का दावा- परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण दूसरी तरफ तेहरान लगातार यह दावा कर रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यूरेनियम मुद्दे पर वे पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Mojtaba Khamenei ने निर्देश दिया है कि समृद्ध यूरेनियम किसी भी स्थिति में ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा। इस रुख से साफ है कि परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव अभी खत्म होने वाला नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट पर भी टकराव तनाव की दूसरी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने ईरान की उस कोशिश का विरोध किया, जिसमें होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क या नियंत्रण बढ़ाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, “यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और इसे दुनिया के सभी जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। यहां किसी तरह का टोल या प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।” वैश्विक बाजार की बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता से तेल की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत में वृद्धि और नए सैन्य तनाव की आशंका भी बढ़ सकती है। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहना फिलहाल राहत की बात मानी जा रही है। आने वाले दिनों में वार्ता किस दिशा में जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni speaking Hindi with Narendra Modi during Italy meeting
पीएम मोदी के सामने हिंदी बोलने लगीं मेलोनी, ‘परिश्रम’ वाले बयान का वीडियो वायरल

Giorgia Meloni ने Narendra Modi की मौजूदगी में हिंदी बोलकर सभी का ध्यान खींच लिया। इटली दौरे के दौरान मेलोनी ने हिंदी में कहा— “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मेलोनी ने हिंदी में क्या कहा? इटली की प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भारतीय शब्द है जो भारत और इटली के रिश्तों को बहुत अच्छी तरह व्यक्त करता है— “परिश्रम”। उन्होंने कहा: “परिश्रम का अर्थ है कड़ी मेहनत। भारत में एक लोकप्रिय कहावत है— परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। यानी मेहनत ही सफलता का रास्ता बनाती है।” मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली अपने संबंधों को इसी सोच और सहयोग के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। भारत-इटली रिश्तों को मिली नई दिशा भारत और इटली के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नई तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। पीएम मोदी ने क्या कहा? संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में रोम पहुंचे थे। मेलोनी से मुलाकात के दौरान उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मिले मोदी अपने इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी ने Sergio Mattarella से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने: व्यापार प्रौद्योगिकी स्वच्छ ऊर्जा संस्कृति और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। तेजी से बढ़ा भारत-इटली व्यापार इटली में भारतीय दूतावास के मुताबिक, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। साल 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार लगभग 14.25 अरब यूरो तक पहुंच गया। इसमें: भारत का निर्यात: 8.55 अरब यूरो इटली का भारत को निर्यात: 5.70 अरब यूरो रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो मेलोनी का हिंदी बोलने वाला वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे भारत-इटली संबंधों की बढ़ती नजदीकी का प्रतीक बताया है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Indian software engineers affected by US tech layoffs and H-1B visa uncertainty in Silicon Valley
अमेरिका में H-1B वीजा धारकों पर संकट, नौकरी जाने के बाद 60 दिन में ढूंढनी होगी नई जॉब

अमेरिका के टेक सेक्टर में जारी बड़े पैमाने की छंटनी ने हजारों भारतीय पेशेवरों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। Meta, Amazon और LinkedIn जैसी कंपनियों में लगातार हो रही layoffs का सबसे ज्यादा असर H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स पर पड़ रहा है। नौकरी जाने के बाद इन पेशेवरों के पास अमेरिका में बने रहने के लिए बेहद सीमित समय बचता है। अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार, H-1B वीजा धारकों को नई नौकरी ढूंढने के लिए सिर्फ 60 दिनों का समय मिलता है। ऐसा न होने पर उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है। H-1B वीजा धारकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स H-1B वीजा पर काम करते हैं। यह वीजा सीधे कंपनी से जुड़ा होता है। यानी नौकरी खत्म होते ही कर्मचारी का इमिग्रेशन स्टेटस भी प्रभावित होने लगता है। ऐसे में सिर्फ नई नौकरी ढूंढना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि परिवार, बच्चों की पढ़ाई, होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस और भविष्य की पूरी योजना पर असर पड़ता है। क्या है 60 दिनों का नियम? US Citizenship and Immigration Services (USCIS) के नियमों के अनुसार, नौकरी छूटने के बाद H-1B कर्मचारी को 60 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलता है। यह अवधि कर्मचारी के आखिरी कार्य दिवस से शुरू होती है, न कि अंतिम वेतन मिलने की तारीख से। इस दौरान कर्मचारी: नई कंपनी में नौकरी ढूंढ सकता है H-1B ट्रांसफर करा सकता है किसी अन्य वीजा कैटेगरी के लिए आवेदन कर सकता है या फिर अमेरिका छोड़ने की तैयारी कर सकता है मौजूदा आर्थिक माहौल और धीमी hiring के कारण यह समय बहुत कम साबित हो रहा है। B-2 वीजा विकल्प पर भी बढ़ी सख्ती कई कर्मचारी समय बढ़ाने के लिए अस्थायी रूप से B-2 टूरिस्ट वीजा में स्विच करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी अब ऐसे आवेदनों की ज्यादा सख्ती से जांच कर रहे हैं और अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। सिलिकॉन वैली में तेज हुई छंटनी Layoffs.fyi के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक टेक इंडस्ट्री में 1.1 लाख से ज्यादा कर्मचारी नौकरी गंवा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीयों की है। वित्तीय वर्ष 2025 के अमेरिकी आंकड़े बताते हैं कि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही। कंपनियां दे रहीं पैकेज, लेकिन चिंता बरकरार कुछ बड़ी कंपनियां कर्मचारियों को severance package भी दे रही हैं। उदाहरण के तौर पर Meta प्रभावित कर्मचारियों को: 16 सप्ताह का मूल वेतन हर साल की सेवा पर अतिरिक्त दो सप्ताह का वेतन और 18 महीने तक हेल्थकेयर कवरेज दे रही है। लेकिन इसके बावजूद वीजा को लेकर अनिश्चितता और मानसिक दबाव बना हुआ है। बदल रहा है “अमेरिकन ड्रीम” कभी भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका करियर ग्रोथ और स्थिर भविष्य का प्रतीक माना जाता था। लेकिन लगातार छंटनी, सख्त इमिग्रेशन नियम और AI आधारित बदलावों ने अब इस सोच को बदलना शुरू कर दिया है। हालिया सर्वे के अनुसार, अमेरिका में रह रहे लगभग आधे भारतीय पेशेवर नौकरी जाने की स्थिति में भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग कनाडा और यूरोप जैसे विकल्पों की ओर भी देख रहे हैं। AI से बदल रहा टेक सेक्टर विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अस्थायी मंदी नहीं है, बल्कि टेक इंडस्ट्री के ढांचे में बड़ा बदलाव है। कंपनियां अब पारंपरिक कोडिंग और सपोर्ट रोल्स कम करके AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा निवेश कर रही हैं। Meta अकेले इस साल AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर 100 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर सकती है। इससे कर्मचारियों के बीच यह डर बढ़ रहा है कि आने वाले समय में सामान्य सॉफ्टवेयर और रूटीन इंजीनियरिंग नौकरियां लगातार कम हो सकती हैं।  

surbhi मई 21, 2026 0
Indian diplomat addresses UNSC while criticizing Pakistan over terrorism and Afghanistan violence allegations
UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, अफगानिस्तान में हिंसा और आतंकवाद पर उठाए सवाल

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को आतंकवाद, सीमा पार हिंसा और अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों को लेकर कड़ी फटकार लगाई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास “नरसंहार और हिंसा से कलंकित” रहा है और उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। UNSC की खुली बहस में भारत का कड़ा बयान सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित UNSC की वार्षिक खुली बहस में बोलते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संघर्ष के दौरान नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और नागरिकों की मौत, विस्थापन, अस्पतालों व स्कूलों पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। ड्रोन और नई तकनीकों के दुरुपयोग पर चिंता हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि शहरी इलाकों में मिसाइलों, बमों और विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। भारत ने कहा कि AI और स्वायत्त सैन्य तकनीकों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के दायरे में होना चाहिए। पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को समर्थन देते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और किसी भी बहाने से नागरिकों पर हमलों को सही नहीं ठहराया जा सकता। अफगानिस्तान में हिंसा का मुद्दा उठाया पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि यह विडंबना है कि हिंसा और नरसंहार के आरोपों से घिरा देश भारत पर टिप्पणी कर रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में पाकिस्तान की सीमा पार कार्रवाई में अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए। भारतीय दूत के अनुसार, UNAMA दस्तावेजों में दर्ज 95 घटनाओं में से 94 घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार बताया गया है। अस्पताल पर हमले का भी जिक्र भारत ने आरोप लगाया कि रमजान के दौरान काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर पाकिस्तान ने हवाई हमला किया था। भारत के मुताबिक, इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 घायल हुए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अस्पताल को किसी भी स्थिति में सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता। 1971 के घटनाक्रम की दिलाई याद भारत ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान की सेना पर लगे अत्याचारों का भी जिक्र किया। हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन हुए थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड उसकी आंतरिक विफलताओं और हिंसक नीतियों को दर्शाता है। नागरिकों की सुरक्षा पर भारत का जोर अपने संबोधन के अंत में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। भारत ने कहा कि वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई जरूरी है।  

surbhi मई 21, 2026 0
US forces inspect Iranian oil tanker near Strait of Hormuz amid escalating regional tensions
ईरानी जहाज पर चढ़ी US नेवी, ट्रंप के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बातचीत और संभावित समझौते की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने चेतावनी दी है कि कूटनीति का रास्ता बहुत जल्द बंद हो सकता है। इसी बीच अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी झंडे वाले एक तेल टैंकर की जांच किए जाने से हालात और संवेदनशील हो गए हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में शांति समझौता होगा या फिर मध्य पूर्व में नया सैन्य टकराव शुरू होगा। ट्रंप बोले- “फैसला बेहद करीब” वॉशिंगटन के पास जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत “अंतिम चरण” में है। उन्होंने कहा, “मामला बिल्कुल आखिरी मोड़ पर है। अगर हमें सही जवाब नहीं मिले तो हालात बहुत तेजी से बदलेंगे। हम पूरी तरह तैयार हैं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि समझौता “बहुत जल्दी” या “कुछ दिनों में” हो सकता है, लेकिन इसके लिए तेहरान को “100 प्रतिशत सही जवाब” देना होगा। ईरान ने कहा- अमेरिकी प्रस्ताव की जांच जारी इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान को अमेरिका की ओर से नए प्रस्ताव मिले हैं और तेहरान उनके सभी पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि ईरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए विदेशी फंड जारी किए जाएं और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी हटाई जाए। इससे पहले ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर युद्ध फिर शुरू करने की तैयारी का आरोप लगाया था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हमला हुआ तो ईरान “कड़ा जवाब” देगा। ईरानी जहाज पर चढ़ी अमेरिकी सेना यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, बुधवार को ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैनिकों ने हेलीकॉप्टर के जरिए ईरानी झंडे वाले एक तेल टैंकर पर चढ़कर जांच की। अमेरिका को शक था कि जहाज प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है। तलाशी के बाद जहाज को छोड़ दिया गया, लेकिन उसका रास्ता बदलने का आदेश दिया गया। CENTCOM ने दावा किया कि नाकेबंदी शुरू होने के बाद अमेरिकी सेना अब तक 91 व्यावसायिक जहाजों का मार्ग बदलवा चुकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने पिछले 24 घंटों में 26 जहाजों को सुरक्षा देते हुए होर्मुज से गुजरने दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहा तो दुनिया भर में तेल, गैस, खाद और खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका पर भी बढ़ रहा आर्थिक दबाव अमेरिका में बढ़ती तेल और गैस कीमतों की वजह से ट्रंप प्रशासन पर घरेलू राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यही कारण है कि वॉशिंगटन एक तरफ सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ समझौते की संभावना भी खुली रखना चाहता है। फिलहाल दुनिया की नजर आने वाले कुछ दिनों पर टिकी है, क्योंकि यही तय करेगा कि मध्य पूर्व में शांति कायम होगी या नया संघर्ष शुरू होगा।  

surbhi मई 21, 2026 0
USS Nimitz carrier group and surveillance aircraft near Cuba amid rising US-Cuba tensions
क्या क्यूबा पर हमला कर सकता है अमेरिका? बढ़ते तनाव के बीच कई संकेतों ने बढ़ाई चिंता

क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव को लेकर नई अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिकी गतिविधियों और हालिया राजनीतिक बयानों के बाद यह चर्चा बढ़ गई है कि वॉशिंगटन क्यूबा पर दबाव बढ़ा सकता है या वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर सकता है। अमेरिका की ओर से किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। राउल कास्त्रो पर हत्या का मामला अमेरिका में राउल कास्त्रो के खिलाफ हत्या से जुड़ा मामला दर्ज किए जाने की खबरों ने तनाव बढ़ा दिया है। उन पर 1996 में दो नागरिक विमानों को गिराने के मामले में आरोप लगाए गए हैं। इन विमानों को कथित तौर पर कास्त्रो विरोधी पायलट उड़ा रहे थे। राउल कास्त्रो, क्यूबा की 1959 की कम्युनिस्ट क्रांति के नेता फिदेल कास्त्रो के छोटे भाई हैं और आज भी क्यूबा की राजनीति में प्रभावशाली माने जाते हैं। ट्रंप का बयान बना चर्चा का केंद्र डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका “क्यूबा को आजाद करा रहा है” और वहां के लोगों की मदद करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को क्यूबा के हालात की पूरी जानकारी है और वहां अमेरिकी खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी सोशल मीडिया पर ट्रंप के बयान को साझा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान क्यूबा सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। कैरेबियन सागर में पहुंचा USS Nimitz अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक युद्धपोत USS Nimitz और उसका स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन क्षेत्र में पहुंच चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समूह में F/A-18E सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान, EA-18G ग्रोलर विमान और अन्य सैन्य जहाज शामिल हैं। अमेरिकी साउदर्न कमांड ने इसकी पुष्टि की है। अमेरिका ने इसे नियमित सैन्य तैनाती बताया है, लेकिन समय को देखते हुए इसे क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। क्यूबा के आसपास जासूसी विमानों की उड़ान रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी नौसेना के P-8A Poseidon निगरानी विमान लगातार क्यूबा के आसपास उड़ान भर रहे हैं। कुछ विमान क्यूबा से करीब 80 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गए। Flightradar24 और BBC Verify की रिपोर्टों में कहा गया है कि इन विमानों की गतिविधियां समुद्री और सैन्य मूवमेंट पर नजर रखने से जुड़ी हो सकती हैं। अमेरिकी ड्रोन गतिविधियों में बढ़ोतरी इसके अलावा MQ-4C Triton निगरानी ड्रोन भी क्यूबा के आसपास सक्रिय देखे गए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन ड्रोन और निगरानी विमानों की उड़ानें क्षेत्रीय समुद्री गतिविधियों की गहन निगरानी का संकेत देती हैं। Center for Strategic and International Studies से जुड़े रक्षा विशेषज्ञ मार्क कैंशियन ने कहा कि अमेरिका संभवतः क्यूबा के आसपास आने-जाने वाले जहाजों और सैन्य गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहा है। क्या वाकई सैन्य कार्रवाई संभव है? विशेषज्ञों का मानना है कि अभी तक किसी संभावित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनाव और प्रतिबंध जारी हैं, लेकिन सैन्य कार्रवाई जैसा कदम बेहद गंभीर माना जाएगा। फिलहाल इन घटनाक्रमों को बढ़ते रणनीतिक दबाव, निगरानी और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कैरेबियन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Donald Trump and Iran leadership amid rising tensions over nuclear talks and possible military action
समझौता होगा या हमला? ट्रंप के बयान से बढ़ा सस्पेंस, ईरान ने कहा- बातचीत के रास्ते खुले

ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच युद्ध टालने को लेकर बातचीत तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी अटकलें जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने इस संकट को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत “निर्णायक मोड़” पर पहुंच चुकी है और अगले कुछ दिन बेहद अहम होंगे। ईरान ने कहा- बातचीत के विकल्प खुले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि तेहरान की ओर से बातचीत के सभी रास्ते अब भी खुले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरान ने हमेशा अपने वादों का सम्मान किया है और युद्ध टालने के लिए हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दबाव बनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उनके मुताबिक, समस्या का समाधान केवल सम्मानजनक बातचीत से ही निकल सकता है। परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत और प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति नहीं बन पाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अपने प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी शर्तें रखीं, जिन्हें तेहरान ने खारिज कर दिया। इसके बाद ईरान ने पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को 14 बिंदुओं वाला नया प्रस्ताव भेजा। वॉशिंगटन इस प्रस्ताव से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव और अनिश्चितता अभी बनी हुई है। ट्रंप ने टाला सैन्य हमला ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया है। उनके अनुसार सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने बातचीत को मौका देने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को उम्मीद है कि जल्द कोई समझौता हो सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ किया कि किसी भी समझौते की स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। “जरूरत पड़ी तो बड़ा हमला करेंगे” अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका “एक और बड़ा हमला” करने के लिए तैयार है। ट्रंप के मुताबिक, सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला अगले कुछ दिनों में लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार, शनिवार, रविवार या अगले सप्ताह की शुरुआत तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। दुनिया की नजर मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो क्षेत्र में बड़ा सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है। वहीं कई अरब देश दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर हालात को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।  

surbhi मई 21, 2026 0
Donald Trump and Benjamin Netanyahu discussing Iran strategy amid rising Middle East tensions
ईरान मुद्दे पर अमेरिका-इजराइल में मतभेद, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच तीखी बातचीत की रिपोर्ट

डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान को लेकर रणनीति पर मतभेद सामने आने की खबर है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत काफी तनावपूर्ण रही और ईरान पर आगे की कार्रवाई को लेकर दोनों की राय अलग-अलग नजर आई। रिपोर्ट के अनुसार, जहां इजराइल ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य अभियान शुरू करने के पक्ष में है, वहीं अमेरिका फिलहाल बातचीत और संभावित समझौते के रास्ते पर जोर देता दिखाई दे रहा है। ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट में बड़ा दावा अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू “बेहद नाराज” थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइली नेतृत्व ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करने तथा उसके अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर दबाव बढ़ाने के पक्ष में है। बताया गया कि नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा हालात में सैन्य दबाव कम करना इजराइल की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। ट्रंप ने टाली हमले की योजना ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान पर प्रस्तावित हमले की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई अरब देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि वह अब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना देख रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि बातचीत असफल रहती है तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने के लिए तैयार रहेगा। नया शांति प्रस्ताव तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और कतर सहित कुछ क्षेत्रीय मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से नया शांति प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव का मकसद दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करना और संभावित सैन्य टकराव को टालना है। हालांकि नेतन्याहू इस प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं बताए जा रहे हैं। “समझौते और युद्ध के बीच खड़ी है दुनिया” ट्रंप ने बुधवार को कनेक्टिकट स्थित कोस्ट गार्ड अकादमी में संबोधन के दौरान कहा कि अमेरिका और ईरान फिलहाल “समझौते और युद्ध के बीच की सीमा” पर खड़े हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “स्थिति बेहद निर्णायक मोड़ पर है। अगर हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिले तो हालात तेजी से बदल सकते हैं। हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं।” क्षेत्रीय तनाव पर बढ़ी वैश्विक नजर ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो मध्य पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है। वहीं अरब देशों की कोशिश है कि बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखा जाए।  

surbhi मई 21, 2026 0
Mahmoud Ahmadinejad amid reports of alleged US-Israel plan for regime change in Iran
ईरान में सत्ता परिवर्तन की बड़ी साजिश  रिपोर्ट में दावा- अहमदीनेजाद को दोबारा लाना चाहते थे अमेरिका और इजरायल

Iran को लेकर एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। दावा किया गया है कि United States और Israel का सैन्य अभियान केवल ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को निशाना बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे तेहरान में सत्ता परिवर्तन की बड़ी रणनीति भी शामिल थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति Mahmoud Ahmadinejad को दोबारा सत्ता में लाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि एक हमले और बाद की घटनाओं ने इस पूरी रणनीति को कमजोर कर दिया। क्या था कथित प्लान? The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने कथित “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के जरिए ईरान के शीर्ष नेतृत्व को कमजोर करने की योजना बनाई थी। दावा किया गया कि इस ऑपरेशन के मुख्य उद्देश्य थे: ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को नुकसान पहुंचाना शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना वैकल्पिक सत्ता व्यवस्था तैयार करना रिपोर्ट में कहा गया कि सार्वजनिक तौर पर अमेरिका केवल परमाणु खतरे की बात करता रहा, लेकिन इजरायल इससे कहीं बड़े राजनीतिक बदलाव की तैयारी में था। खामेनेई की मौत से बढ़ा संकट रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हमलों में मारे गए। खामेनेई करीब 37 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे थे। उनकी मौत के बाद देशभर में 40 दिनों का शोक घोषित किया गया और सत्ता को लेकर अस्थिरता बढ़ गई। अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी कि नेतृत्व हटते ही ईरानी सत्ता ढांचा बिखर जाएगा, लेकिन ऐसा पूरी तरह नहीं हुआ। अहमदीनेजाद को “मुक्त” कराने की कोशिश? रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के पूर्वी हिस्से में एक गुप्त अभियान चलाया गया, जहां महमूद अहमदीनेजाद कथित तौर पर नजरबंद थे। बताया गया कि हमला सीधे उनके घर पर नहीं, बल्कि उस सुरक्षा चौकी पर किया गया जहां Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के जवान तैनात थे। सैटेलाइट तस्वीरों में सुरक्षा चौकी तबाह दिखाई गई, जबकि अहमदीनेजाद का घर सुरक्षित बताया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में अहमदीनेजाद घायल हुए लेकिन बच गए। क्यों अहम थे अहमदीनेजाद? महमूद अहमदीनेजाद 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे। अपने कार्यकाल में वह पश्चिम विरोधी बयानों, परमाणु कार्यक्रम और इजरायल पर तीखे रुख को लेकर चर्चा में रहे। हालांकि बाद के वर्षों में उनका टकराव खामेनेई समर्थक सत्ता प्रतिष्ठान से बढ़ गया था। उन्होंने ईरानी शासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और बाद में उन्हें चुनाव लड़ने से भी रोका गया। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि मौजूदा सत्ता से उनकी दूरी उन्हें “संक्रमणकालीन नेतृत्व” के लिए उपयोगी बना सकती है। हमला फेल हुआ तो बिखर गई रणनीति रिपोर्ट में दावा किया गया कि हमले के बाद अहमदीनेजाद सार्वजनिक जीवन से अचानक गायब हो गए। उनके पीछे हटने से सत्ता परिवर्तन की पूरी योजना कमजोर पड़ गई। इसके अलावा: ईरान में बड़े पैमाने पर जनविद्रोह नहीं हुआ राजनीतिक ढांचा पूरी तरह नहीं टूटा कुर्द समूहों ने अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई वैकल्पिक नेतृत्व उभर नहीं पाया इन वजहों से कथित योजना अधूरी रह गई। ट्रंप और नेतन्याहू के बयान भी चर्चा में रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu दोनों ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ईरान में बदलाव “अंदर से” आना चाहिए। हालांकि रिपोर्ट का दावा है कि पर्दे के पीछे कहीं बड़ी रणनीति पर काम हो रहा था। सिर्फ एयरस्ट्राइक नहीं, ‘इन्फ्लुएंस ऑपरेशन’ भी रिपोर्ट के मुताबिक, योजना में केवल हवाई हमले ही नहीं बल्कि: साइकोलॉजिकल ऑपरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना सोशल अस्थिरता बढ़ाना कुर्द लड़ाकों को सक्रिय करना जैसी रणनीतियां भी शामिल थीं, ताकि जनता में यह संदेश जाए कि ईरानी शासन नियंत्रण खो चुका है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की राजनीति और ईरान में संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।  

surbhi मई 20, 2026 0
PM Modi Italy visit
पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दिया यह खास गिफ्ट

रोम, एजेंसियां। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच खास दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। रोम में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान एक दिलचस्प पल तब सामने आया, जब पीएम मोदी ने मेलोनी को भारत की मशहूर ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की। इस खास तोहफे को लेकर मेलोनी ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में धन्यवाद कहा और लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए “बहुत, बहुत अच्छी टॉफी” लेकर आए। सोशल मीडिया पर मेलोनी का यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों ने इसे भारत-इटली के मजबूत होते रिश्तों और दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री का प्रतीक बताया।   डिनर टेबल पर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा रोम में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने बताया कि भारत और इटली के संबंध अब नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुके हैं। बातचीत में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे। डिनर के बाद दोनों नेताओं ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का भी दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब साझा किए जा रहे हैं।   ‘इंडो-मेडिटेरेनियन’ साझेदारी को नई दिशा भारत और इटली ने अपने रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” बताते हुए एक साझा विजन भी पेश किया है। “इटली एंड इंडिया: ए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर द इंडो-मेडिटेरेनियन” शीर्षक से जारी संयुक्त लेख में दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। रक्षा, एयरोस्पेस, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई गई है। यह दौरा भारत-इटली संबंधों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

Anjali Kumari मई 20, 2026 0
Fighter jets and military drones amid reports of heavy US losses in alleged Iran conflict
ईरान युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान: 42 विमान तबाह होने के दावे से मचा हड़कंप

Iran और United States के बीच कथित युद्ध को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी संसद से जुड़ी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि ईरान पर 40 दिनों तक चले सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका के 42 विमान या तो नष्ट हो गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इस दावे के बाद वैश्विक स्तर पर अमेरिका की सैन्य क्षमता, युद्ध रणनीति और अभियान की वास्तविक कीमत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। क्या कहा गया रिपोर्ट में? रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और Israel ने मिलकर ईरान के खिलाफ कथित “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” चलाया था। इस अभियान के तहत हवाई, समुद्री और मिसाइल हमले किए गए। बताया गया कि इस संघर्ष में अमेरिका को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में जिन सैन्य संसाधनों के नुकसान का दावा किया गया, उनमें शामिल हैं: चार F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान, एक F-35A लाइटनिंग द्वितीय लड़ाकू विमान, एक ए-10 थंडरबोल्ट द्वितीय हमला विमान, सात KC-135 स्ट्रैटोटैंकर ईंधन भरने वाले विमान, एक E-3 सेंट्री एडब्ल्यूएसीएस विमान, दो एमसी-130जे कमांडो द्वितीय विशेष अभियान विमान, एक एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन द्वितीय हेलीकॉप्टर, 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एक एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन शामिल हैं.  रिपोर्ट में कहा गया कि आंकड़े आगे बदल सकते हैं क्योंकि कई सूचनाएं अब भी गोपनीय हैं। 29 अरब डॉलर तक पहुंची युद्ध लागत रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग की सुनवाई में पेंटागन के कार्यवाहक कंट्रोलर Jules W. Hurst III ने कहा कि ईरान में सैन्य अभियान की लागत लगभग 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई। ईरान ने क्या कहा? ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने इस रिपोर्ट को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने खुद अपने भारी नुकसान को स्वीकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि: “ईरान की सेना दुनिया की पहली सेना बनी जिसने F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया।” अराघची ने दावा किया कि ईरान ने इस युद्ध से कई रणनीतिक सबक सीखे हैं और भविष्य में दुनिया को “और बड़े सरप्राइज” देखने को मिल सकते हैं। F-35 को गिराने का दावा कितना बड़ा? F-35 Lightning II को दुनिया के सबसे उन्नत स्टेल्थ फाइटर जेट्स में गिना जाता है। यदि किसी देश द्वारा इसे मार गिराने का दावा सही साबित होता है, तो यह आधुनिक सैन्य इतिहास की बड़ी घटनाओं में शामिल हो सकता है। हालांकि अमेरिका की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी नुकसान की विस्तृत पुष्टि नहीं की गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही हैं, तो यह मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और आधुनिक हवाई युद्ध की रणनीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है।  

surbhi मई 20, 2026 0
PM Narendra Modi gifts Melody toffee to Italy PM Giorgia Meloni during Rome visit
भारत-इटली रिश्तों में घुली मिठास, पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को गिफ्ट की ‘मेलोडी’ टॉफी

Narendra Modi और Giorgia Meloni के बीच बढ़ती दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो गई। मेलोनी ने इस खास गिफ्ट के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह मुस्कुराते हुए कहती नजर आईं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें “बहुत बढ़िया टॉफी” गिफ्ट की है। इटली दौरे पर पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंचे हैं। यह यात्रा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर हो रही है। भारत और इटली इस समय “जॉइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029” के तहत अपने संबंधों को नई मजबूती देने पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कोलोसियम में साथ दिखे मोदी और मेलोनी रोम पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी के साथ मशहूर Colosseum का दौरा भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि रोम पहुंचने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर किया और फिर ऐतिहासिक कोलोसियम घूमने गए। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए। भारत-इटली सहयोग पर होगी अहम बातचीत बुधवार को पीएम मोदी और मेलोनी के बीच औपचारिक वार्ता होने वाली है। इसमें: व्यापार और निवेश रक्षा सहयोग क्लीन एनर्जी इनोवेशन साइंस और टेक्नोलॉजी सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हाल के वर्षों में भारत और इटली के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। रोम में दिखी काशी की झलक पीएम मोदी ने अपने दौरे के दौरान यह भी बताया कि इटालियन कलाकार Giampaolo Tomassetti ने उन्हें वाराणसी की एक खूबसूरत पेंटिंग भेंट की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति टोमासेटी का लगाव चार दशक से भी ज्यादा पुराना है। उन्होंने वैदिक संस्कृति और Mahabharata से जुड़ी कई कलाकृतियों पर काम किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘मेलोडी डिप्लोमेसी’ पीएम मोदी द्वारा मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने को सोशल media पर लोग “मेलोडी डिप्लोमेसी” कहकर भी चर्चा कर रहे हैं। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुर्खियां बटोर चुकी है।   

surbhi मई 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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