नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने शनिवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने, वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। व्हाइट हाउस आने का दिया निमंत्रण बैठक के दौरान मार्को रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने और व्हाइट हाउस का दौरा करने का निमंत्रण भी दिया। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, व्यापार और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। पीएम मोदी ने जताई खुशी मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री का स्वागत कर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हो रही प्रगति और क्षेत्रीय व वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका वैश्विक भलाई के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। व्यापार, AI और रक्षा सहयोग पर फोकस भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने भी बैठक को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। उन्होंने भारत को अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार बताया। चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं रूबियो मार्को रूबियो चार दिवसीय भारत दौरे पर आए हैं। अपने दौरे के दौरान वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा वह अमेरिकी दूतावास में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।
बीजिंग, एजेंसियां। चीन के उत्तरी शांक्सी प्रांत में स्थित एक कोयला खदान में हुए भीषण गैस विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दर्दनाक हादसे में अब तक कम से कम 82 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य मजदूर अभी भी खदान के अंदर फंसे हुए हैं। हादसा शुक्रवार शाम चांगझी शहर की लिउशेन्यू कोयला खदान में हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक भूमिगत खनन कार्य में जुटे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विस्फोट इतना तेज था कि खदान के अंदर अफरा-तफरी मच गई। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने पहले आठ लोगों की मौत और कई मजदूरों के फंसे होने की जानकारी दी थी, लेकिन राहत और बचाव कार्य आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़कर 82 हो गई। बताया जा रहा है कि हादसे के समय करीब 247 मजदूर खदान के भीतर मौजूद थे। राहत और बचाव अभियान जारी हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, आपदा राहत बल और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। बचावकर्मी लगातार खदान के अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। गैस और धुएं के कारण राहत अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई मजदूरों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। हादसे की जांच शुरू चीन सरकार ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती आशंका है कि खदान के अंदर गैस रिसाव के कारण विस्फोट हुआ। प्रशासन ने खदान प्रबंधन से सुरक्षा मानकों को लेकर जवाब मांगा है। इस हादसे के बाद एक बार फिर चीन की खदानों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
Iran ने संभावित अमेरिकी सैन्य हमलों की आशंका के बीच अपना एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिया है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और रुकती कूटनीतिक बातचीत के बीच यह फैसला लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, United States ईरान के खिलाफ नए सैन्य ऑपरेशन पर विचार कर रहा है। अमेरिकी हमले की तैयारी की रिपोर्ट अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस और रक्षा विभाग के भीतर ईरान के खिलाफ संभावित नए हमलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों का दावा है कि यदि अगले 24 घंटों में कोई बड़ी कूटनीतिक सफलता नहीं मिलती, तो राष्ट्रपति Donald Trump बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दे सकते हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक किसी अंतिम फैसले की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के कई अधिकारियों ने अपनी मेमोरियल डे वीकेंड छुट्टियां रद्द कर दी हैं। ट्रंप ने रद्द किया वीकेंड कार्यक्रम तनावपूर्ण हालात के बीच राष्ट्रपति ट्रंप को न्यू जर्सी में अपना वीकेंड कार्यक्रम छोड़कर वॉशिंगटन लौटना पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मौजूदा सरकारी परिस्थितियों के कारण उनका व्हाइट हाउस में रहना ज्यादा जरूरी है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय जिम्मेदारियां प्राथमिकता हैं। ईरान-अमेरिका बातचीत फिर अटकी दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रहने के बावजूद शांति वार्ता फिलहाल ठप मानी जा रही है। विवाद की सबसे बड़ी वजह ईरान का संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम बना हुआ है। अमेरिका का कहना है कि ईरान को न केवल परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना होगा, बल्कि उसके पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम भी हटाना होगा। दूसरी ओर ईरान इस मांग को मानने के लिए तैयार नहीं है और अपने परमाणु कार्यक्रम को राष्ट्रीय अधिकार बता रहा है। सीजफायर के बावजूद कायम है तनाव अप्रैल में घोषित अस्थायी सीजफायर अब भी तकनीकी रूप से लागू है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में छिटपुट हमलों और सैन्य गतिविधियों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी वजह से मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक बातचीत विफल रहती है, तो आने वाले दिनों में क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा सकता है।
Donald Trump प्रशासन एक बार फिर ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य कदम की तैयारी में जुटा दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस, पेंटागन और खुफिया एजेंसियों में हाई अलर्ट जैसी स्थिति बना दी गई है। इसी बीच ट्रंप ने अपने निजी कार्यक्रम और छुट्टियां भी रद्द कर दी हैं, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं। बेटे की शादी में भी नहीं जाएंगे ट्रंप अमेरिका में 25 मई को मेमोरियल डे के चलते लंबा वीकेंड है। ट्रंप पहले न्यू जर्सी स्थित अपने गोल्फ क्लब में समय बिताने वाले थे, लेकिन उन्होंने अचानक कार्यक्रम बदल दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वह अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और बेटिना एंडरसन की शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने इसकी वजह “सरकारी परिस्थितियां” बताई। इसके बाद उनका काफिला वॉशिंगटन डीसी में तेजी से व्हाइट हाउस लौटता देखा गया। अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना और इंटेलिजेंस एजेंसियों के कई अधिकारियों ने भी अपनी छुट्टियां रद्द कर दी हैं। विदेशों में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए “रिकॉल रोस्टर” अपडेट किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मध्य पूर्व में मौजूद कुछ अमेरिकी सैनिकों को संवेदनशील इलाकों से हटाया भी जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका संभावित जवाबी हमले की आशंका को देखते हुए अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। ईरान के IRGC की बड़ी चेतावनी Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC ने अमेरिका और इजरायल को खुली चेतावनी दी है। IRGC ने कहा कि अगर ईरान पर फिर हमला हुआ तो जवाब सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान ने अपने पश्चिमी हवाई क्षेत्र में NOTAM जारी कर सोमवार तक उड़ानों पर रोक लगा दी है। इसे संभावित सैन्य गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका ने दिया “फाइनल ऑफर” रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान को एक “अंतिम प्रस्ताव” दिया है। कहा जा रहा है कि अगर तेहरान इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो अगले 24 घंटे में सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि “ईरान समझौता करना चाहता है” और अमेरिका हालात पर नजर बनाए हुए है। असली विवाद क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम एनरिचमेंट पूरी तरह बंद करे ईरान इस मांग को मानने को तैयार नहीं है तेहरान अपने विदेशी फ्रीज एसेट्स जारी करने और युद्ध नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर टोल व्यवस्था की भी बात कर रहा है विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ यही मुद्दे हैं। पाकिस्तान और कतर निभा रहे मध्यस्थ की भूमिका रिपोर्ट्स के अनुसार Asim Munir इस समय तेहरान में मौजूद हैं। वहीं कतर का प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंचा हुआ है। दोनों देश अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख की मुलाकात IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों से हो सकती है। फरवरी में शुरू हुआ था संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों में जवाबी कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। 8 अप्रैल को सीजफायर पर सहमति बनी, लेकिन उसके बाद भी धमकियों, प्रतिबंधों और सैन्य तैयारियों का सिलसिला जारी है। अब ट्रंप प्रशासन की गतिविधियों से यह आशंका बढ़ गई है कि हालात फिर से बड़े टकराव की ओर बढ़ सकते हैं।
बांग्लादेश में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के नाम पर रखा गया एक दुर्लभ एल्बिनो भैंसा इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ढाका के पास नारायणगंज जिले के एक एग्रो फार्म में पाले गए इस भैंसे को उसकी अनोखी हेयरस्टाइल और हल्के गुलाबी रंग की वजह से सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रियता मिली। अब यह भैंसा ईद-उल-अजहा (बकरीद) से पहले बिक चुका है और इसकी कुर्बानी दी जाएगी। हेयरस्टाइल की वजह से पड़ा ‘डोनाल्ड ट्रंप’ नाम भैंसे के मालिक जियाउद्दीन मैरदा ने बताया कि उन्होंने यह दुर्लभ एल्बिनो भैंसा करीब 10 महीने पहले राजशाही सिटी हाट से खरीदा था। इसके सिर पर मौजूद सफेद और घुंघराले बाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हेयरस्टाइल जैसे लगते थे। इसी वजह से उनके छोटे भाई ने मजाक में इसका नाम “डोनाल्ड ट्रंप” रख दिया। नाम सामने आने के बाद भैंसे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। बड़ी संख्या में लोग फार्म पर सिर्फ इस भैंसे को देखने पहुंचने लगे। फार्म मालिक का कहना है कि नाम केवल मजाक और पहचान के लिए रखा गया था। 700 किलो वजन, लाखों में हुआ सौदा चार साल के इस भैंसे का वजन करीब 700 किलोग्राम बताया गया है। इसे “लाइव वेट” यानी वजन के हिसाब से बेचा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी कीमत 550 टका प्रति किलो तय हुई। भैंसे को ओल्ड ढाका के व्यापारी मोहम्मद शोरोन ने खरीदा है। उन्होंने इसे ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के लिए खरीदा है। हालांकि, मीडिया के पहुंचने पर खरीदार ने भैंसे को सार्वजनिक रूप से दिखाने से इनकार कर दिया। सोशल मीडिया वायरल होने के बाद बढ़ी चर्चा स्थानीय लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस भैंसे को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता बढ़ गई थी। फार्म पर भीड़ जुटने लगी थी, इसलिए अब खरीदार इसे सार्वजनिक तौर पर दिखाने से बच रहे हैं। बांग्लादेश में बकरीद से पहले बड़े और दुर्लभ जानवरों की खरीद-फरोख्त हमेशा चर्चा में रहती है, लेकिन “डोनाल्ड ट्रंप” नाम के इस एल्बिनो भैंसे ने इस बार सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं।
दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट माने जाने वाले स्टारशिप के नए और अपग्रेडेड वर्जन Starship V3 का पहला टेस्ट लॉन्च सफलता और चुनौतियों का मिला-जुला उदाहरण बन गया। अमेरिकी कंपनी SpaceX ने भारतीय समयानुसार 23 मई की सुबह टेक्सास स्थित स्टारबेस लॉन्च साइट से इसका 12वां टेस्ट लॉन्च किया। लॉन्च के दौरान रॉकेट के एक इंजन में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे मिशन पर खतरा मंडराने लगा। इसके बावजूद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट लगभग एक घंटे की उड़ान के बाद हिंद महासागर में सफलतापूर्वक लैंड करने में कामयाब रहा। यह पहली बार था जब SpaceX ने अपने न्यू जनरेशन Starship V3 सिस्टम का इस्तेमाल किया। 403 फीट ऊंचा है स्टारशिप सिस्टम स्टारशिप सिस्टम दो हिस्सों से मिलकर बना है - ऊपरी हिस्सा Starship spacecraft और निचला हिस्सा Super Heavy Booster। दोनों को मिलाकर कुल ऊंचाई करीब 403 फीट है। इसे पूरी तरह reusable बनाया गया है, ताकि भविष्य में एक ही रॉकेट को कई बार इस्तेमाल किया जा सके। बूस्टर की कंट्रोल्ड लैंडिंग नहीं हो पाई लॉन्च के बाद Super Heavy Booster ने अपना “boost back burn” पूरी तरह पूरा नहीं किया। यह वही प्रक्रिया होती है जिसके जरिए बूस्टर वापस पृथ्वी पर नियंत्रित तरीके से उतरता है। तकनीकी गड़बड़ी के कारण बूस्टर समुद्र में पूरी तरह नियंत्रित तरीके से लैंड नहीं कर सका। छह में से सिर्फ पांच इंजन चालू हुए स्टेज सेपरेशन के बाद Starship spacecraft के छह इंजनों में से केवल पांच ही चालू हो पाए। एक इंजन स्टार्ट नहीं होने के कारण रॉकेट तय ऑर्बिटल पाथ तक नहीं पहुंच सका। हालांकि इसकी उड़ान “suborbital trajectory” के भीतर बनी रही, जिससे मिशन पूरी तरह विफल होने से बच गया। इंजन फेल होने की वजह से अंतरिक्ष में दोबारा इंजन स्टार्ट करने का परीक्षण भी नहीं हो सका। इसके बावजूद टीम ने स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित तरीके से हिंद महासागर में उतार लिया। क्या था इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य इस मिशन का लक्ष्य था: Starship V3 को सफलतापूर्वक लॉन्च करना Super Heavy Booster और Starship का सफल separation अंतरिक्ष में इंजन दोबारा चालू करने का परीक्षण स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतारना SpaceX का कहना है कि इस टेस्ट से मिले डेटा का इस्तेमाल भविष्य के मिशनों और मंगल अभियान की तैयारी में किया जाएगा। पिछले टेस्टों में क्या हुआ था 11वां टेस्ट: पहली बार 8 डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े गए 14 अक्टूबर 2025 को हुए इस मिशन में पहली बार Starship ने आठ Starlink simulator satellites अंतरिक्ष में छोड़े। Super Heavy Booster की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग हुई, जबकि Starship हिंद महासागर में उतरा। मिशन करीब 1 घंटे 6 मिनट तक चला। 10वां टेस्ट: सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट और इंजन टेस्ट सफल 27 अगस्त 2025 को हुए टेस्ट में Starship ने सफलतापूर्वक Starlink simulator satellites deploy किए। इस मिशन में इंजन रीस्टार्ट और स्पेसक्राफ्ट कंट्रोल सिस्टम के कई अहम परीक्षण पूरे हुए। 29 जून 2025: स्टैटिक फायर टेस्ट में ब्लास्ट 10वें टेस्ट से पहले 29 जून 2025 को स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान Starship में जोरदार विस्फोट हो गया था। टेस्ट के दौरान रॉकेट को जमीन पर खड़ा रखकर इंजन चालू किए गए थे, तभी ऊपरी हिस्से में धमाका हो गया और पूरा सिस्टम आग की लपटों में घिर गया। 9वां टेस्ट: स्पेसक्राफ्ट ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए नौवें लॉन्च के लगभग 30 मिनट बाद Starship ने कंट्रोल खो दिया था। पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश करते समय स्पेसक्राफ्ट नष्ट हो गया, हालांकि बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। 8वां टेस्ट: हवा में ही ब्लास्ट हुई Starship 7 मार्च 2025 को हुए इस मिशन में Super Heavy Booster सफलतापूर्वक लॉन्च पैड पर लौट आया था। लेकिन Starship के छह इंजनों में से चार बंद हो गए, जिससे स्पेसक्राफ्ट असंतुलित हो गया। बाद में ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने इसे हवा में ही नष्ट कर दिया। 7वां टेस्ट: ऑक्सीजन लीक से हुआ विस्फोट 17 जनवरी 2025 को Starship का सातवां टेस्ट हुआ। बूस्टर सफलतापूर्वक लॉन्च पैड पर वापस आ गया, लेकिन ऊपरी हिस्से में ऑक्सीजन लीक के कारण स्पेसक्राफ्ट हवा में ही फट गया। 6वां टेस्ट: लॉन्च पैड पर कैचिंग रद्द करनी पड़ी 20 नवंबर 2024 को हुए इस टेस्ट को देखने के लिए Donald Trump भी स्टारबेस पहुंचे थे। मिशन के दौरान सभी पैरामीटर सही न मिलने पर बूस्टर को लॉन्च पैड पर कैच करने की बजाय समुद्र में उतारा गया। वहीं Starship ने अंतरिक्ष में इंजन रीस्टार्ट टेस्ट पूरा किया। 5वां टेस्ट: पहली बार लॉन्च पैड पर बूस्टर कैच 13 अक्टूबर 2024 को SpaceX ने इतिहास रच दिया। पहली बार Super Heavy Booster को “Mechazilla” नाम की विशाल मैकेनिकल आर्म्स ने लॉन्च पैड पर पकड़ लिया। Starship ने पृथ्वी के वातावरण में री-एंट्री कर हिंद महासागर में कंट्रोल्ड लैंडिंग की। 4वां टेस्ट: री-एंट्री टेस्ट सफल रहा 6 जून 2024 को हुए चौथे टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि Starship पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के दौरान सुरक्षित रह सकता है या नहीं। कई हीट टाइल्स के नुकसान के बावजूद स्पेसक्राफ्ट ने समुद्र में सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। 3वां टेस्ट: री-एंट्री के दौरान संपर्क टूटा 14 मार्च 2024 को हुए तीसरे टेस्ट में Starship ने पहली बार payload door खोलने और बंद करने का परीक्षण किया। इसके अलावा तरल ऑक्सीजन ट्रांसफर सिस्टम भी टेस्ट किया गया। हालांकि री-एंट्री के दौरान पृथ्वी से संपर्क टूट गया। 2वां टेस्ट: स्टेज सेपरेशन सफल, लेकिन दोनों हिस्से नष्ट 18 नवंबर 2023 को हुए दूसरे टेस्ट में पहली बार “hot staging” तकनीक का इस्तेमाल किया गया। Super Heavy Booster और Starship सफलतापूर्वक अलग हुए, लेकिन कुछ ही मिनट बाद दोनों में तकनीकी खराबी आ गई और उन्हें नष्ट करना पड़ा। पहला टेस्ट: लॉन्च के 4 मिनट बाद विस्फोट 20 अप्रैल 2023 को Starship का पहला ऑर्बिटल टेस्ट लॉन्च किया गया था। उड़ान के करीब चार मिनट बाद रॉकेट में विस्फोट हो गया था। हालांकि Elon Musk ने इसे भी बड़ी सीख बताया था, क्योंकि पहली बार इतना विशाल रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च पैड से उड़ान भरने में कामयाब रहा था। मंगल मिशन के लिए अहम है Starship Elon Musk लंबे समय से Starship को मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने वाले मिशन का आधार बताते रहे हैं। NASA भी अपने Artemis Moon Mission के लिए Starship के एक modified version का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही Starship V3 का यह टेस्ट पूरी तरह सफल नहीं रहा, लेकिन इंजन फेल होने के बावजूद सुरक्षित लैंडिंग SpaceX के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी जाएगी।
Bangladesh और United States के बीच हुए नए रणनीतिक समझौतों ने दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की भू-राजनीति को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश ने अमेरिका को अपने दो अहम बंदरगाहों - Port of Chittagong और Matarbari Port - के इस्तेमाल की अनुमति देने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री रणनीतिक सहयोग बढ़ाने को लेकर भी अहम करार हुए हैं। किन बंदरगाहों तक मिलेगी पहुंच? समझौते के तहत अमेरिकी नौसेना और सैन्य जहाज: Port of Chittagong Matarbari Port का इस्तेमाल कर सकेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे अमेरिका को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि चिटगांव बंदरगाह भारत के Andaman and Nicobar Islands से लगभग 1100 किलोमीटर दूर है। अमेरिका की नजर मलक्का स्ट्रेट पर Strait of Malacca दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का: तेल व्यापार गैस सप्लाई इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक सामानों का ट्रांसपोर्ट इसी रास्ते से होता है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाकर चीन की समुद्री गतिविधियों पर करीबी नजर रखना चाहता है। बांग्लादेश-अमेरिका के 3 बड़े समझौते 1. बंदरगाह इस्तेमाल समझौता अमेरिकी सैन्य और नौसैनिक जहाजों को चिटगांव और मतारबाड़ी बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी। 2. खुफिया जानकारी साझा करना दोनों देश समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी इंटेलिजेंस साझा करेंगे। 3. रणनीतिक सहयोग बढ़ाना बंगाल की खाड़ी और मलक्का क्षेत्र में संयुक्त निगरानी और सामरिक सहयोग मजबूत किया जाएगा। चीन के लिए क्यों अहम है मलक्का? China के लिए मलक्का स्ट्रेट बेहद संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। चीन के लगभग 80% तेल आयात इसी रास्ते से गुजरते हैं। यही वजह है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति Hu Jintao ने इसे “मलक्का डिलेमा” कहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का दबाव बढ़ता है तो इसका असर सीधे चीन की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। भारत के लिए क्यों बढ़ी अहमियत? India का भी बड़ा समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत के: लगभग 55% समुद्री व्यापार ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा मलक्का मार्ग से जुड़ा है। भारत की रणनीतिक ताकत का सबसे बड़ा आधार Andaman and Nicobar Islands माने जाते हैं, जो मलक्का स्ट्रेट के पश्चिमी प्रवेश द्वार के पास स्थित हैं। INS बाज की भूमिका INS Baaz भारत का महत्वपूर्ण एयर स्टेशन है, जो समुद्री निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यहां से हिंद महासागर और मलक्का क्षेत्र की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा सकती है। क्या बढ़ेगा भारत-अमेरिका सहयोग? रणनीतिक मामलों के जानकार मानते हैं कि यदि अमेरिका बंगाल की खाड़ी और मलक्का क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाता है, तो भारत की भूमिका भी और महत्वपूर्ण हो सकती है। इस पूरे क्षेत्र में: Indonesia Malaysia जैसे देश अपनी समुद्री संप्रभुता को लेकर काफी संवेदनशील हैं। इसलिए आने वाले समय में हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति और भी दिलचस्प हो सकती है।
United States में ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया को लेकर Donald Trump प्रशासन ने बड़ा बदलाव किया है। नई गाइडलाइन के मुताबिक अब ज्यादातर प्रवासियों को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करने के लिए पहले अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना होगा। इसके बाद उन्हें वहीं से इमिग्रेंट वीजा के लिए आवेदन करना पड़ेगा। इस फैसले का असर खास तौर पर भारतीय छात्रों, H-1B वीजा कर्मचारियों और अमेरिका में रह रहे हजारों विदेशी पेशेवरों पर पड़ सकता है। क्या बदला है नए नियम में? United States Citizenship and Immigration Services (USCIS) की नई गाइडलाइन के अनुसार: अब ज्यादातर लोग अमेरिका में रहकर सीधे ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाएंगे। आवेदन करने वालों को अपने मूल देश लौटना होगा। वहीं स्थित अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया पूरी करनी होगी। केवल “विशेष परिस्थितियों” में ही अमेरिका में रहकर प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति मिल सकती है। पहले कई लोग स्टूडेंट, वर्क या अन्य अस्थायी वीजा पर रहते हुए अमेरिका में ही “स्टेटस एडजस्टमेंट” के जरिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पूरी कर लेते थे। ग्रीन कार्ड क्या होता है? ग्रीन कार्ड अमेरिका का स्थायी निवास (Permanent Residency) दस्तावेज होता है। इसके जरिए विदेशी नागरिक: अमेरिका में स्थायी रूप से रह सकते हैं नौकरी कर सकते हैं पढ़ाई कर सकते हैं देश के अंदर-बाहर यात्रा कर सकते हैं बाद में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन भी कर सकते हैं USCIS ने क्या कहा? United States Citizenship and Immigration Services के प्रवक्ता Jack Kahler ने कहा कि अब अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के लिए अपने देश लौटना होगा। उन्होंने कहा कि केवल बेहद सीमित मामलों में ही अमेरिका में रहकर आवेदन पूरा करने की छूट दी जाएगी। भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर क्यों? इस फैसले का असर विशेष रूप से भारतीय समुदाय पर पड़ सकता है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय: H-1B Visa पर अमेरिका में काम कर रहे हैं स्टूडेंट वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं भारत से जुड़े ग्रीन कार्ड बैकलॉग पहले से ही कई वर्षों लंबा है। ऐसे में अब प्रक्रिया के लिए देश छोड़ने की बाध्यता कई लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का बयान United States Department of Homeland Security ने कहा कि यह कदम अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम को “कानून के मूल ढांचे” के मुताबिक चलाने के लिए उठाया गया है। विभाग ने यह भी कहा कि अब इमिग्रेशन नियमों में मौजूद “लूपहोल” का फायदा उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति Donald Trump लंबे समय से सख्त इमिग्रेशन नीति के समर्थक रहे हैं। उनके प्रशासन ने पहले भी: वीजा नियमों को सख्त किया बॉर्डर सिक्योरिटी बढ़ाई शरण और प्रवास नीतियों में बदलाव किए अब नया ग्रीन कार्ड नियम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
Tulsi Gabbard ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गबार्ड ने कहा कि उनके पति Abraham Williams को हड्डियों के कैंसर की बेहद दुर्लभ बीमारी का पता चला है, जिसके बाद उन्होंने परिवार को प्राथमिकता देने का फैसला लिया। वह 30 जून तक डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) के पद पर बनी रहेंगी। ओवल ऑफिस में ट्रंप को दी जानकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक Tulsi Gabbard ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि इस कठिन समय में वह अपने पति के साथ रहना चाहती हैं और सार्वजनिक जीवन से कुछ समय के लिए पीछे हटना जरूरी है। पति को बताया सबसे बड़ा सहारा गबार्ड ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में उनके पति हर कठिन दौर में उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा कि सैन्य सेवा, चुनावी राजनीति और अमेरिकी खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी संभालने तक हर चुनौती में Abraham Williams उनका सबसे बड़ा सहारा रहे। इसी वजह से वह उन्हें इस मुश्किल दौर में अकेला नहीं छोड़ सकतीं। ट्रंप ने की पुष्टि, नए कार्यवाहक DNI का ऐलान Donald Trump ने भी उनके इस्तीफे की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि गबार्ड अपने पति के इलाज और देखभाल के लिए पद छोड़ रही हैं। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि अब्राहम जल्द स्वस्थ होंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि Aaron Lucas को कार्यवाहक DNI बनाया जाएगा। अमेरिकी नेताओं ने जताई संवेदना अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने गबार्ड को “सच्ची देशभक्त” बताते हुए कहा कि परिवार हमेशा पहले आता है। वहीं Lindsey Graham समेत कई नेताओं ने उनके परिवार के लिए प्रार्थना की। ईरान की प्रतिक्रिया ने खींचा ध्यान इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर हुई। Embassy of Iran in Armenia ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि तुलसी गबार्ड कई बार ईरान को लेकर ऐसी बातें कहती थीं जो ट्रंप प्रशासन को पसंद नहीं आती थीं। पोस्ट में उनके पति के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई। साथ ही दावा किया गया कि गबार्ड “कभी-कभी अमेरिका के हित में बोलती थीं, न कि इजरायल के प्रभाव में।” कौन हैं तुलसी गबार्ड? 43 वर्षीय Tulsi Gabbard अमेरिकी राजनीति की चर्चित हस्तियों में गिनी जाती हैं। वह अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली हिंदू नेता रही हैं। उनका जन्म अमेरिकन समोआ में हुआ था, लेकिन उनकी मां हिंदू धर्म से प्रभावित थीं और उन्होंने अपने बच्चों के नाम भारतीय परंपराओं से प्रेरित रखे। इसी वजह से भारत और भारतीय समुदाय के बीच तुलसी गबार्ड की खास पहचान रही है। कार्यकाल में लिए कई बड़े फैसले DNI रहते हुए गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया तंत्र में कई बड़े बदलाव किए। उन्होंने: एजेंसी का आकार कम किया कई आंतरिक ढांचागत सुधार किए DEI (डाइवर्सिटी, इक्विटी और इंक्लूजन) कार्यक्रमों को खत्म किया लाखों सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक करवाए इन दस्तावेजों में 2016 अमेरिकी चुनाव में रूस हस्तक्षेप जांच और Assassination of John F. Kennedy से जुड़ी फाइलें भी शामिल थीं। ट्रंप प्रशासन में लगातार इस्तीफे गबार्ड का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन में लगातार बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल के महीनों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे और बर्खास्तगी के बाद अब तुलसी गबार्ड का जाना भी अमेरिकी राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
Donald Trump ने एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में अमेरिकी टीवी होस्ट Stephen Colbert को कूड़ेदान में फेंकते हुए दिखाया गया है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्या है वीडियो में? वीडियो में दिखाया गया है कि जैसे ही The Late Show with Stephen Colbert के अंतिम एपिसोड में स्टीफन कोल्बर्ट दर्शकों का स्वागत करते हैं, तभी पीछे से ट्रंप आते हैं। इसके बाद ट्रंप उन्हें कॉलर से पकड़कर डस्टबिन में फेंक देते हैं और फिर डांस करने लगते हैं। बैकग्राउंड में उनके चुनावी कैंपेन की धुन जैसी म्यूजिक भी सुनाई देती है। यह वीडियो AI तकनीक से तैयार किया गया बताया जा रहा है। शो के आखिरी एपिसोड के बाद बढ़ा विवाद यह वीडियो ऐसे समय सामने आया, जब ‘The Late Show with Stephen Colbert’ का आखिरी एपिसोड हाल ही में प्रसारित हुआ। 2015 में शुरू हुआ यह शो अमेरिका के सबसे लोकप्रिय लेट-नाइट टॉक शोज में शामिल रहा। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक शो का फिनाले एपिसोड रिकॉर्ड व्यूअरशिप के साथ खत्म हुआ। ओवरनाइट नीलसन रेटिंग्स के अनुसार इसे करीब 6.74 मिलियन लोगों ने देखा, जो 2015 के पहले एपिसोड से भी ज्यादा था। फिनाले एपिसोड में कई स्टार्स पहुंचे 21 मई को प्रसारित अंतिम एपिसोड में कई सेलिब्रिटी मेहमान शामिल हुए। कोल्बर्ट ने अपने खास अंदाज में दर्शकों को अलविदा कहा। शो के दौरान अभिनेता Bryan Cranston ने सरप्राइज एंट्री भी दी। क्यों बंद हुआ शो? CBS ने जुलाई 2025 में घोषणा की थी कि 30 साल पुराने इस शो को बंद किया जा रहा है। नेटवर्क ने इसके पीछे आर्थिक कारण बताए थे और कहा था कि पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्टिंग पर बढ़ते दबाव के चलते यह फैसला लिया गया। हालांकि आलोचकों और खुद कोल्बर्ट ने संकेत दिए थे कि इसके पीछे राजनीतिक वजहें भी हो सकती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब का असर रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में लेट-नाइट टीवी शोज की लोकप्रियता में गिरावट आई है। अब बड़ी संख्या में दर्शक टीवी पर लाइव देखने के बजाय यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शो के क्लिप्स देखना पसंद करते हैं। अब फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखेंगे कोल्बर्ट ‘The Late Show’ खत्म होने के बाद Stephen Colbert अब फिल्मों की स्क्रीनराइटिंग पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह Peter Jackson और अन्य राइटर्स के साथ मिलकर The Lord of the Rings: Shadow of the Past की कहानी लिख रहे हैं।
Ivanka Trump की हत्या की कथित साजिश से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार कर अमेरिका लाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी का नाम Mohammad Baker Al-Saadi है, जिसे पहले तुर्किए में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे प्रत्यर्पित कर अमेरिका लाया गया। अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी ईरान समर्थित आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और वह Qasem Soleimani की मौत का बदला लेना चाहता था। फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा मिलने का दावा रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपी के पास Ivanka Trump और उनके पति Jared Kushner के फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा मिला था। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी सोशल मीडिया पर भी सक्रिय था और उसने फ्लोरिडा इलाके की तस्वीरें पोस्ट कर धमकी भरे संदेश लिखे थे। एक पोस्ट में कथित तौर पर लिखा गया था: “न तुम्हारे महल और न ही सीक्रेट सर्विस तुम्हें बचा पाएगी।” सुलेमानी की मौत के बाद बना बदले का प्लान अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक 2020 में बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में Qasem Soleimani के मारे जाने के बाद आरोपी ने ट्रंप परिवार को निशाना बनाने की योजना बनाई। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आरोपी खुले तौर पर बदले की बात करता था और कहता था कि ट्रंप परिवार को नुकसान पहुंचाकर जवाब दिया जाएगा। कई आतंकी संगठनों से जुड़े होने का आरोप अमेरिकी जांच एजेंसियों ने आरोपी पर कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप लगाया है। उसके संबंध: Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) Kataib Hezbollah से बताए गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस पर अमेरिका और यूरोप में कई हमलों और हमले की साजिशों में शामिल होने के आरोप भी लगाए गए हैं। IRGC ट्रेनिंग का भी दावा जांच में यह भी दावा किया गया है कि आरोपी को ईरान में IRGC से जुड़ी ट्रेनिंग मिली थी। बताया गया कि उसके पिता ईरानी सैन्य अधिकारी थे और उनकी मौत के बाद आरोपी का संपर्क सीधे ईरानी नेटवर्क से बढ़ गया। बाद में वह धार्मिक यात्राओं से जुड़ी ट्रैवल एजेंसी चलाने लगा, जिसके जरिए उसे कई देशों में आने-जाने और नेटवर्क तैयार करने का मौका मिला। फिलहाल हाई सिक्योरिटी में रखा गया रिपोर्ट्स के अनुसार Mohammad Baker Al-Saadi को फिलहाल Metropolitan Detention Center Brooklyn में हाई सिक्योरिटी निगरानी में रखा गया है। अमेरिकी एजेंसियां मामले की जांच जारी रखे हुए हैं और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मान रही हैं।
मध्य अमेरिकी देश Honduras में गुरुवार को हुई दो बड़ी हिंसक घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया। कुछ ही घंटों के अंतराल में हुए दो अलग-अलग हमलों में बंदूकधारियों ने खेतों में काम कर रहे मजदूरों और गैंग विरोधी अभियान पर निकले पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। इन हमलों में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 19 मजदूर और 6 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। खेत में घुसकर मजदूरों पर बरसाईं गोलियां पहला हमला उत्तरी होंडुरास के Trujillo इलाके में हुआ। यहां एक प्लांटेशन (खेती क्षेत्र) में काम कर रहे मजदूरों पर अज्ञात बंदूकधारियों ने अचानक हमला कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कम से कम 19 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि यह इलाका लंबे समय से जमीन विवाद, अवैध कब्जों और ड्रग तस्करी से जुड़ी हिंसा के लिए बदनाम रहा है। हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। गैंग विरोधी मिशन पर निकले पुलिसकर्मी भी बने निशाना दूसरा हमला Omoa नगर पालिका में हुआ, जो ग्वाटेमाला सीमा के पास स्थित है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गैंग विरोधी ऑपरेशन पर जा रही पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया। इस हमले में एक वरिष्ठ अधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। बताया गया कि पुलिस दल राजधानी Tegucigalpa से ऑपरेशन के लिए रवाना हुआ था, तभी रास्ते में हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया। हिंसा और ड्रग तस्करी से जूझ रहा है होंडुरास होंडुरास लंबे समय से गैंग वॉर, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और संगठित अपराध की समस्या से जूझ रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में हत्या की दर में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन हिंसा की घटनाएं अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अपराध से निपटने के लिए सरकार की सख्त सैन्य रणनीति के बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सके हैं। कई संगठनों ने सुरक्षा बलों पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए भी खतरनाक देश गैर-सरकारी संगठन Global Witness के अनुसार, होंडुरास पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में यहां पांच पर्यावरण कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 18 थी। लगातार बढ़ती हिंसा ने एक बार फिर होंडुरास की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख Maulana Fazlur Rehman ने कराची में आयोजित एक जनसभा में पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था और सेना पर तीखा हमला बोला। उनके बयान को सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir और सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती माना जा रहा है। “अगर मुझे कुछ हुआ तो जिम्मेदार एस्टैब्लिशमेंट होगी” कराची में समर्थकों को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया कि उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल और पत्र मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पाकिस्तान की “एस्टैब्लिशमेंट” जिम्मेदार होगी। उन्होंने मंच से कहा कि देश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं, बल्कि “सिविल-मिलिट्री हाइब्रिड राज” चल रहा है। उनके इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भारत, अफगानिस्तान और चीन के रिश्तों का भी किया जिक्र मौलाना ने पाकिस्तान की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण पाकिस्तान के भारत और अफगानिस्तान के साथ संबंध खराब हुए हैं, जबकि चीन का भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की नीतियां पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर रही हैं और इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। इमरान खान की तरह टकराव? पाकिस्तान में इससे पहले Imran Khan और उनकी पार्टी भी सेना पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगा चुकी है। अब मौलाना फजलुर रहमान के तेवरों को उसी तरह की नई टकराव की शुरुआत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में लंबे समय से विपक्षी दल यह आरोप लगाते रहे हैं कि देश की वास्तविक ताकत सेना के हाथ में है और सरकारें उसी के प्रभाव में काम करती हैं। देशव्यापी आंदोलन का ऐलान मौलाना फजलुर रहमान ने 22 मई से देशव्यापी विरोध आंदोलन शुरू करने की घोषणा भी की। उन्होंने बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और सरकार की नीतियों को लेकर जनता से सड़क पर उतरने की अपील की। उन्होंने गाजा युद्ध का जिक्र करते हुए मुस्लिम देशों से इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की भी मांग की। मौलाना ने दावा किया कि क्षेत्र में इजरायल का प्रभाव बढ़ रहा है और भविष्य में पाकिस्तान भी खतरे का सामना कर सकता है। पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल मौलाना के इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नया तनाव पैदा हो गया है। विपक्ष और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच टकराव की आशंका फिर बढ़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की सियासत में बड़ा विवाद बन सकता है।
भारत में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई “Cockroach Janta Party” का असर अब Pakistan तक पहुंच गया है। वहां भी कई कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स “Cockroach Awami Party” जैसे नामों से नए अकाउंट और पेज बना रहे हैं। यह ट्रेंड खासकर इंस्टाग्राम पर तेजी से फैलता दिखाई दे रहा है। भारत से प्रेरित बताई जा रही नई सोशल मीडिया लहर रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में सबसे पहले सामने आए पेजों में से एक “Cockroach Awami Party” नाम का इंस्टाग्राम अकाउंट है। इस पेज ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि उसे भारत की “Cockroach Janta Party” से प्रेरणा मिली है। पेज के बायो में लिखा गया है – “हां, हमने कॉपी किया है… लेकिन फर्क किसे पड़ता है, मकसद वही है।” खबर लिखे जाने तक इस अकाउंट के 1,600 से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके थे। लोगो और कंटेंट में भी समानता पाकिस्तान में बने इन पेजों का डिजाइन और लोगो भी भारतीय ट्रेंड से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है। हालांकि वहां के पेजों में हरे और सफेद रंग का इस्तेमाल किया गया है, जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय रंगों से मेल खाते हैं। पहली वायरल रील में लोगों से पूछा जाता है कि वे Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) या Pakistan Muslim League (N) (PML-N) में से किससे जुड़े हैं। बाद में वीडियो में जवाब आता है – “नहीं, हम तो Cockroach Awami Party से हैं।” कई फर्जी और ट्रेंड आधारित अकाउंट्स सामने आए इंस्टाग्राम पर “Cockroach Awami Party” सर्च करने पर कई नए अकाउंट दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी ज्यादातर पेजों के फॉलोअर्स काफी कम हैं और यह साफ माना जा रहा है कि इनमें से कई अकाउंट सिर्फ वायरल ट्रेंड का फायदा उठाने के लिए बनाए गए हैं। सोशल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ट्रेंड अक्सर राजनीतिक व्यंग्य, युवा असंतोष और इंटरनेट मीम कल्चर के मिश्रण से तेजी से फैलते हैं। भारत में कैसे शुरू हुआ था ट्रेंड? भारत में “Cockroach Janta Party” ट्रेंड कथित तौर पर एक विवादित बयान और सोशल मीडिया नाराजगी के बाद शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह मीम और व्यंग्य आधारित डिजिटल मूवमेंट में बदल गया। इंस्टाग्राम पर इससे जुड़े पेजों ने करोड़ों व्यूज और लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स हासिल किए, जिसके बाद यह ट्रेंड दूसरे देशों तक भी पहुंचने लगा। सोशल मीडिया पर युवाओं की नई अभिव्यक्ति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ट्रेंड यह दिखाते हैं कि दक्षिण एशिया के युवा पारंपरिक राजनीति से अलग इंटरनेट आधारित व्यंग्य और मीम संस्कृति के जरिए अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान में “Cockroach Awami Party” जैसे पेज सिर्फ मनोरंजन और मीम तक सीमित रहेंगे या आगे किसी बड़े डिजिटल अभियान का रूप लेंगे।
इस्लामाबाद, एजेंसियां। पुलवामा हमले में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की हत्या के मामले में मुजफ्फराबाद के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने अब्दुल्ला कमाल नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। अब्दुल्ला कमाल पाकिस्तान के वाह कैंट का रहने वाला है। CTD ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से हथियार भी बरामद किया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या में इसी हथियार का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। जो संदिग्ध फरार रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दौरान मौजूद दो अन्य संदिग्ध मौके से भाग निकले। सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हैं। मामले में आरोपी अब्दुल्ला कमाल की एक्सक्लूसिव फोटो भी सामने आई है। हमजा बुरहान 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शामिल था। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। हमजा सुपुर्द-ए-खाक हमजा बुरहान को आज 22 मई को इस्लामाबाद के बर्मा टाउन स्थित फातिमा स्कूल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सिर में तीन गोलियां लगने से हमजा की मौत न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक हमजा पर गुरुवार को मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन उसके सिर में लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। हमजा बुरहान जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था। वह पहले आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा था और बाद में अल बराक के लिए काम करने लगा। वह मुजफ्फराबाद के चीला बांदी इलाके में भारी सुरक्षा के बीच रह रहा था। उसके पास कमांडो सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट वाहन भी थे। भारत ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी माना जाता था। उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी करीबी संबंध थे। भारत से पाकिस्तान गया, फिर आतंकी संगठन से जुड़ा हमजा सरकार के मुताबिक, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर पुलवामा के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। 23 साल का हमजा, आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा हुआ था। अल बद्र को सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। वह कानूनी तरीके से पाकिस्तान गया था। वहां जाकर वह अल बद्र में शामिल हो गया और बाद में संगठन का सक्रिय आतंकी और कमांडर बन गया। अभी वह पाकिस्तान से ही काम कर रहा था। उस पर आरोप है कि वह युवाओं को अल बद्र में शामिल होने के लिए उकसाता था और फंडिंग भी करता था। जांच एजेंसियों के अनुसार 2020 में CRPF जवानों पर ग्रेनेड हमले और युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहा। पुलवामा अटैक में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था। श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लेथपोरा इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी SUV बसों से टकरा दी थी। धमाका इतना जबरदस्त था कि दो बसों के परखच्चे उड़ गए और 40 जवान शहीद हो गए। जांच में सामने आया कि हमले से पहले सुरक्षा एजेंसियों को कई इंटेलिजेंस इनपुट मिले थे, लेकिन आतंकी साजिश को रोका नहीं जा सका। बाद में NIA ने अपनी चार्जशीट में जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना मसूद अजहर को हमले का मास्टरमाइंड बताया था। इसके अलावा हमजा जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के काकापोरा इलाके में 18 नवंबर 2020 को हुए आतंकी हमले में भी शामिल था। तब आतंकियों ने बंकर पर ग्रेनेड हमला किया था। हालांकि ग्रेनेड अपने निशाने से चूककर सड़क पर फट गया, जिससे 12 नागरिक घायल हो गए। बुरहान वानी का करीबी था हमजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान लंबे समय से पाकिस्तान और PoK में सक्रिय था। बुरहान मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर मारा गया। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी था। बुरहान वानी 8 जुलाई 2016 को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। उसकी मौत के बाद कश्मीर में लंबे समय तक हिंसा और विरोध प्रदर्शन हुए थे। बुरहान वानी की मौत के बाद जाकिर मूसा हिजबुल का कमांडर बना था। वह 23 मई 2019 को पुलवामा जिले के त्राल इलाके में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में मारा गया था। 4 महीने में पाकिस्तान के 4 बड़े आतंकियों की मौत पाकिस्तान में पिछले 4 महीने में 4 बड़े आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इनके पीछे अज्ञात हमलावर का हाथ बताया जा रहा है, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
Donald Trump ने ईरान संकट और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अपने बेटे Donald Trump Jr. की शादी में शामिल होने को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए शादी में जाना आसान नहीं है और चाहे वह जाएं या नहीं, दोनों ही हालात में मीडिया उन्हें निशाना बनाएगा। पत्रकारों से क्या बोले ट्रंप? व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह अपने बेटे की शादी में शामिल होने की कोशिश करेंगे, लेकिन फिलहाल समय सही नहीं लग रहा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “अगर मैं शादी में जाता हूं, तो मुझे मारा जाएगा। अगर नहीं जाता हूं, तो फेक न्यूज मुझे छोड़ने वाली नहीं है।” ट्रंप ने संकेत दिया कि Iran से जुड़े मौजूदा तनाव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात उनकी प्राथमिकता बने हुए हैं। बहामास में होगी निजी शादी रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनल्ड ट्रंप जूनियर इस सप्ताहांत Bahamas में एक निजी समारोह में मॉडल और सोशलाइट Bettina Anderson के साथ शादी के बंधन में बंध सकते हैं। बताया जा रहा है कि समारोह को बेहद निजी रखा गया है और इसमें केवल करीबी परिवार के सदस्यों तथा दोस्तों को ही आमंत्रित किया गया है। सुरक्षा और राजनीति बनी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि उनकी मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक चर्चाएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि शादी में शामिल होने या न होने, दोनों स्थितियों में मीडिया आलोचना करेगा। ट्रंप ने इसे “ऐसी स्थिति जिसमें मैं जीत नहीं सकता” बताया। कैंप डेविड में हुई थी सगाई डोनल्ड ट्रंप जूनियर ने दिसंबर में अपनी सगाई का ऐलान किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों की सगाई Camp David में हुई थी। बाद में बेटिना एंडरसन ने Mar-a-Lago में एक ब्राइडल शावर कार्यक्रम भी आयोजित किया था। ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी यह डोनल्ड ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी होगी। इससे पहले उनकी शादी Vanessa Trump से हुई थी, जिनसे उनके पांच बच्चे हैं। दोनों का 2018 में तलाक हो गया था। हाल ही में वैनेसा ट्रंप ने खुलासा किया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। इसके अलावा ट्रंप जूनियर की सगाई पहले Kimberly Guilfoyle से भी हुई थी, लेकिन 2024 में दोनों का रिश्ता खत्म हो गया। ईरान संकट पर टिकी दुनिया की नजर ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति और सुरक्षा प्राथमिकताएं निजी कार्यक्रमों पर भारी पड़ सकती हैं।
Taliban सरकार द्वारा जारी नए विवाह संबंधी कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस कानून से बाल विवाह को कानूनी मान्यता मिलने का खतरा बढ़ गया है और इससे महिलाओं व लड़कियों के अधिकार और कमजोर होंगे। क्या है नया तालिबानी आदेश? अफगानिस्तान के न्याय मंत्रालय ने हाल ही में डिक्री नंबर 18 जारी की है, जिसका शीर्षक “पति-पत्नी के न्यायिक अलगाव” रखा गया है। इसमें विवाह, तलाक और वैवाहिक विवादों से जुड़े नियम तय किए गए हैं। सबसे विवादित प्रावधान यह है कि “युवावस्था” में पहुंच चुकी लड़की की चुप्पी को भी शादी के लिए उसकी सहमति माना जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि इससे कम उम्र की लड़कियों की शादी को वैधता मिल सकती है और उनकी स्वतंत्र इच्छा को नजरअंदाज किया जा सकता है। UNAMA ने क्या कहा? United Nations Assistance Mission in Afghanistan (UNAMA) ने बयान जारी कर कहा कि इस कानून में उन लड़कियों के तलाक का भी जिक्र है जो कम उम्र में शादीशुदा हैं और अब युवावस्था में पहुंच चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह संकेत देता है कि तालिबान सरकार बाल विवाह को कानूनी रूप से स्वीकार कर रही है। UNAMA ने कहा कि यह कानून “पूर्ण और स्वतंत्र सहमति” के सिद्धांत को कमजोर करता है और बच्चों के हितों की रक्षा करने में विफल है। कानून में और क्या प्रावधान हैं? तालिबानी आदेश के मुताबिक, यदि किसी पिता या दादा ने किसी नाबालिग लड़की या लड़के की शादी बिना दहेज, बहुत कम दहेज या “गलत तरीके” से कर दी हो, तो ऐसी शादी को अमान्य घोषित किया जा सकता है। कानून में यह भी कहा गया है कि अगर किसी लड़की की शादी ऐसे व्यक्ति से कर दी गई हो जो उसके साथ खराब व्यवहार करता हो या बुरे फैसलों के लिए बदनाम हो, तो लड़की युवावस्था में पहुंचने के बाद अदालत में शादी रद्द कराने की मांग कर सकती है। आलोचना उस प्रावधान को लेकर ज्यादा हो रही है जिसमें कहा गया है कि अगर कोई महिला तलाक मांगती है और पति इनकार कर देता है, तो कई मामलों में पति की बात को प्राथमिकता दी जा सकती है, क्योंकि महिला के पास गवाह जुटाना मुश्किल होगा। तालिबान ने आरोपों को किया खारिज तालिबान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि यह कानून इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप है। तालिबान का दावा है कि अफगानिस्तान में लड़कियों की जबरन शादी पहले से प्रतिबंधित है और नया आदेश केवल वैवाहिक मामलों के न्यायिक नियम तय करने के लिए लाया गया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि व्यवहारिक रूप से यह कानून पुरुष अभिभावकों और पतियों को अधिक अधिकार देता है, जबकि लड़कियों की स्वतंत्र सहमति कमजोर पड़ती है। अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति लगातार खराब Afghanistan में 2021 में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद महिलाओं और लड़कियों पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। लड़कियों की उच्च शिक्षा पर रोक, महिलाओं के कई नौकरियों में काम करने पर पाबंदी और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी सीमित करने जैसे फैसले पहले ही वैश्विक आलोचना का कारण बन चुके हैं। वर्तमान में अफगानिस्तान में महिलाओं को स्कूल, कॉलेज, कई सरकारी और निजी नौकरियों, जिम, ब्यूटी सैलून और यहां तक कि कई सार्वजनिक पार्कों तक में प्रवेश से रोका जा चुका है। मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी लड़की की “चुप्पी” को उसकी सहमति मानना बेहद खतरनाक सिद्धांत है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे परिवारों और स्थानीय दबाव के जरिए कम उम्र की लड़कियों की जबरन शादी आसान हो सकती है। उनका कहना है कि विवाह के लिए स्पष्ट और स्वतंत्र सहमति अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का मूल आधार है।
Donald Trump और Xi Jinping के बीच हालिया बातचीत और रिश्तों में नरमी की चर्चाओं के बीच अमेरिका में चीन के खिलाफ बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी संसद में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसका मकसद चीन की सेना और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी कंपनियों पर तेजी से प्रतिबंध लगाना है। इस कदम को अमेरिका की चीन के खिलाफ रणनीतिक और आर्थिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। क्या है CCP Sanctions Shot Clock Act? अमेरिका में रिपब्लिकन सांसद Rick Scott और Elise Stefanik ने ‘CCP Sanctions Shot Clock Act’ नाम का विधेयक पेश किया है। इस कानून के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को उन चीनी कंपनियों और व्यक्तियों पर एक साल के भीतर कार्रवाई करनी होगी, जिन्हें अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया है। यह विधेयक वित्त वर्ष 2026 के National Defense Authorization Act में संशोधन के रूप में लाया गया है। अब तय समय सीमा में लगेगा बैन मौजूदा व्यवस्था में अमेरिकी राष्ट्रपति हर दो साल में उन चीनी कंपनियों और नागरिकों की रिपोर्ट जारी करते हैं, जिन्हें चीन के सैन्य-औद्योगिक नेटवर्क से जुड़ा माना जाता है। लेकिन अभी तक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग पर इन संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में डालने की कोई तय समय सीमा नहीं थी। नए प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रपति की रिपोर्ट आने के बाद ट्रेजरी विभाग को एक साल के भीतर संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों को “Non-SDN Chinese Military-Industrial Complex Companies List” में शामिल करना होगा। इसके बाद इस सूची को आधिकारिक रूप से फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा। “कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन” सीनेटर रिक स्कॉट ने चीन पर बेहद सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अमेरिका के लिए सीधा खतरा है और अब कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जो संस्थाएं चीनी सैन्य हितों के लिए काम कर रही हैं, उन्हें अमेरिका में कारोबार करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन है और अब उसी हिसाब से कार्रवाई का समय आ गया है।” चीन पर आर्थिक निर्भरता घटाने की रणनीति एलिस स्टेफानिक ने कहा कि यह कानून रिपब्लिकन पार्टी की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चीन से जुड़ी आर्थिक निर्भरता कम करना है। उन्होंने कहा कि चीन के सैन्य विस्तार और दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ अमेरिका को तेजी से कार्रवाई करनी होगी। स्टेफानिक के मुताबिक, कांग्रेस पहले ही प्रशासन से ऐसी चीनी कंपनियों की रिपोर्ट मांग चुकी है, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी रही। नया कानून इसी प्रक्रिया को तेज करने के लिए लाया गया है। ट्रंप-शी रिश्तों पर पड़ सकता है असर यह विधेयक ऐसे समय पेश किया गया है जब हाल ही में ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच रिश्तों में सुधार की चर्चाएं हो रही थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह कानून पास होता है, तो अमेरिका-चीन संबंधों में फिर तनाव बढ़ सकता है। खासकर तकनीक, रक्षा, चिप निर्माण और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चीनी कंपनियों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। वैश्विक बाजार पर भी दिख सकता है असर अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती सख्ती का असर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और निवेश माहौल पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अमेरिका चीन की सैन्य और टेक कंपनियों पर और ज्यादा आर्थिक दबाव बना सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest पर इस साल नया रिकॉर्ड बन गया है। नेपाल की तरफ से एक ही दिन में करीब 275 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर इतिहास रच दिया। नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, बुधवार को बड़ी संख्या में पर्वतारोही 8,849 मीटर (29,032 फीट) ऊंची चोटी तक पहुंचे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एवरेस्ट के इतिहास में एक दिन में चोटी तक पहुंचने वालों की सबसे बड़ी संख्या हो सकती है। इस रिकॉर्ड के साथ एक नई चिंता भी सामने आई है। पर्वतारोहण विशेषज्ञों का मानना है कि एवरेस्ट पर लगातार बढ़ती भीड़ “ट्रैफिक जाम” जैसे हालात पैदा कर सकती है, जो खराब मौसम में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। नेपाल की तरफ से हुई रिकॉर्ड चढ़ाई एवरेस्ट पर चढ़ाई दो रास्तों से होती है — एक नेपाल की दक्षिणी तरफ से और दूसरा Tibet की उत्तरी तरफ से। लेकिन इस साल चीन ने तिब्बत वाला मार्ग बंद रखा है, जिसके कारण ज्यादातर पर्वतारोहियों ने नेपाल वाले रूट का इस्तेमाल किया। नेपाल पर्यटन विभाग के प्रवक्ता Himal Gautam ने बताया कि एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों का एवरेस्ट फतह करना ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अभी आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि बाकी है, क्योंकि पर्वतारोहियों की तस्वीरों, गाइडों और अभियान कंपनियों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ बनी चिंता इस सीजन में नेपाल सरकार ने एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए रिकॉर्ड 492 परमिट जारी किए हैं। पर्वतारोहियों और उनके सहयोगी स्टाफ के कारण बेस कैंप के आसपास टेंटों का पूरा शहर बस गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल के स्प्रिंग क्लाइंबिंग सीजन में अब तक करीब 600 लोग एवरेस्ट की चोटी तक पहुंच चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम अचानक खराब हुआ या चढ़ाई का समय सीमित हुआ, तो एवरेस्ट पर भीड़ गंभीर खतरा बन सकती है। पहले भी एवरेस्ट पर लंबी कतारों और ऑक्सीजन की कमी के कारण कई हादसे हो चुके हैं। 1953 से शुरू हुई एवरेस्ट विजय की कहानी एवरेस्ट पर पहली सफल चढ़ाई 1953 में Edmund Hillary और Tenzing Norgay ने की थी। उसके बाद से नेपाल में पर्वतारोहण एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित हुआ है और यह देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हर साल दुनिया भर से हजारों पर्वतारोही एवरेस्ट फतह करने नेपाल पहुंचते हैं, जिससे पर्यटन उद्योग को करोड़ों डॉलर की आय होती है। जून के पहले हफ्ते तक खत्म हो सकता है सीजन विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल का एवरेस्ट क्लाइंबिंग सीजन जून के पहले सप्ताह तक समाप्त हो सकता है। मौसम में बदलाव और ऊंचाई पर बढ़ते जोखिमों को देखते हुए आने वाले दिनों में भी एवरेस्ट पर गतिविधियां तेज बनी रहने की संभावना है।
Marco Rubio ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझीदार” बताते हुए बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक जितना ईंधन चाहिए, उतना बेचने के लिए तैयार है। रूबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। भारत दौरे को बताया बेहद अहम मार्को रूबियो 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे Kolkata, Agra, Jaipur और New Delhi का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, “भारत हमारे सबसे बेहतरीन सहयोगियों और साझीदारों में से एक है। हम उनके साथ मिलकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है।” रूबियो ने यह भी कहा कि इस दौरे के दौरान उन्हें क्वाड देशों के प्रतिनिधियों से मिलने का मौका मिलेगा, जो रणनीतिक रूप से काफी अहम है। क्वाड बैठक पर भी फोकस अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि इस साल के अंत में क्वाड देशों की एक और बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर अहम माना जाता है। वेनेजुएला के तेल पर भी नजर रूबियो ने संकेत दिए कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि Venezuela के तेल को लेकर भी कई अवसर मौजूद हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति Delcy Rodriguez अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आ सकती हैं, जहां तेल व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हो सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी रिफाइनरियों में वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान को चेतावनी रूबियो ने Iran को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण या वहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का शुल्क लगाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगा। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ओमान के साथ मिलकर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर स्थायी टोल व्यवस्था को लेकर चर्चा कर रहा है। अमेरिका ने इसे वैश्विक व्यापार और समुद्री स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है। भारत पर बढ़ते तेल संकट का असर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस से पूरा करता है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल कीमतों में उछाल का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलएनजी की कीमतों में तेजी देखी गई है। बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच भारत की तेल विपणन कंपनियों ने चार दिनों के भीतर दो बार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की। पहले 3 रुपये और बाद में 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जिससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी हो सकती है मजबूत विशेषज्ञों का मानना है कि मार्को रूबियो का बयान भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दे सकता है। अगर अमेरिका भारत को बड़े पैमाने पर तेल और गैस सप्लाई बढ़ाता है, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और मध्य पूर्व पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।
United States और Iran के बीच जारी तनाव के बीच बातचीत में कुछ नरमी के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन यूरेनियम भंडार और Strait of Hormuz को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे बने हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने हालिया वार्ता को लेकर कहा कि बातचीत में कुछ “पॉजिटिव संकेत” मिले हैं, लेकिन किसी बड़े समझौते की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। वहीं, ईरान के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच दूरी पहले से कुछ कम हुई है, लेकिन फिलहाल कोई औपचारिक सहमति नहीं बनी है। यूरेनियम भंडार सबसे बड़ी अड़चन अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) भंडार को लेकर बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कहा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल नहीं करने देगा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान के पास ऐसा यूरेनियम रहे, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सके। उन्होंने कहा, “हम ईरान को यूरेनियम रखने नहीं देंगे। जरूरत पड़ी तो उसे नष्ट भी किया जा सकता है।” ईरान का दावा- परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण दूसरी तरफ तेहरान लगातार यह दावा कर रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यूरेनियम मुद्दे पर वे पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Mojtaba Khamenei ने निर्देश दिया है कि समृद्ध यूरेनियम किसी भी स्थिति में ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा। इस रुख से साफ है कि परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव अभी खत्म होने वाला नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट पर भी टकराव तनाव की दूसरी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने ईरान की उस कोशिश का विरोध किया, जिसमें होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क या नियंत्रण बढ़ाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, “यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और इसे दुनिया के सभी जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। यहां किसी तरह का टोल या प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।” वैश्विक बाजार की बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता से तेल की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत में वृद्धि और नए सैन्य तनाव की आशंका भी बढ़ सकती है। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहना फिलहाल राहत की बात मानी जा रही है। आने वाले दिनों में वार्ता किस दिशा में जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।