दुनिया

US President Donald Trump meeting Iraqi Prime Minister Ali Al-Zaidi at the White House
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप से मिले इराकी पीएम अली अल-जैदी, कूटनीतिक संतुलन पर टिकी नजर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी का अमेरिका दौरा चर्चा का विषय बन गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद जैदी ने वाशिंगटन पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, इसलिए इसे इराक की संतुलित कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी दबाव के बावजूद अमेरिका पहुंचे? मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने इराकी प्रधानमंत्री और उनकी टीम से अमेरिका की यात्रा टालने का आग्रह किया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, जैदी ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए वाशिंगटन जाने का फैसला बरकरार रखा। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इसे इराक की स्वतंत्र विदेश नीति और "इराक फर्स्ट" दृष्टिकोण का संकेत बताया है। ट्रंप ने की इराकी प्रधानमंत्री की सराहना ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अली अल-जैदी का स्वागत करते हुए उनकी प्रशंसा की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान ट्रंप ने उनके सम्मान में आधिकारिक लंच का भी आयोजन किया। आर्थिक सहयोग और सुरक्षा पर रही चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, इराकी प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान ईरान से जुड़े विवादों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और इराक से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती इराक लंबे समय से अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में मौजूदा हालात में बगदाद के लिए दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ संवाद बढ़ाने का अर्थ यह नहीं है कि इराक ने ईरान से दूरी बना ली है। फिलहाल इराक दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
US President Donald Trump and White House briefing on Iran and Strait of Hormuz tensions
व्हाइट हाउस का ईरान पर बड़ा आरोप, ट्रंप बोले- समझौता तोड़ने की कीमत चुकानी होगी

व्हाइट हाउस ने ईरान पर समझौता ज्ञापन (MoU) का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा। "ईरान बातचीत चाहता है" एएनआई के अनुसार, कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान लगातार अमेरिका से संपर्क कर तनाव कम करने और बातचीत की इच्छा जता रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी चर्चा हुई है। हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। MoU तोड़ने का लगाया आरोप व्हाइट हाउस का कहना है कि 7 जुलाई को हुए कथित हमले दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन हैं। लेविट के अनुसार, समझौते में यह स्पष्ट था कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को निशाना नहीं बनाएगा, लेकिन उसने इस प्रतिबद्धता का पालन नहीं किया। ट्रंप की चेतावनी प्रेस सचिव ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप समुद्री सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे और व्यापारिक जहाजों पर हमलों को गंभीरता से लेते हैं। उनके अनुसार, अमेरिका इन घटनाओं को आतंकवाद की श्रेणी में देखता है और ईरान को इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा है। वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सख्त रुख के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। वहीं, अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर ईरान की प्रतिक्रिया और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी है।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
US President Donald Trump speaking about election security and voter data
ट्रंप ने चीन पर लगाया 22 करोड़ मतदाताओं का डेटा चुराने का आरोप, चुनाव सुरक्षा पर उठाए कई सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव सुरक्षा पर दिए अपने प्राइमटाइम संबोधन में चीन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान करीब 22 करोड़ मतदाताओं का व्यक्तिगत डेटा चोरी किया गया था। ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा चुनावी डेटा उल्लंघन बताया। हालांकि, ट्रंप के इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने अपने भाषण में  कोई सार्वजनिक तकनीकी या न्यायिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। डेटा में क्या-क्या होने का दावा? ट्रंप के अनुसार, कथित तौर पर लीक हुए डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक दल से जुड़ी जानकारी और अन्य व्यक्तिगत विवरण शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने इस उद्देश्य के लिए विशेष डेटा संग्रह इकाई बनाई थी। रूस, चीन और उत्तर कोरिया का भी लिया नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के चुनावी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखने वाले देशों में चीन, रूस और उत्तर कोरिया सहित कई विदेशी समूह शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया आकलनों में भी विदेशी हस्तक्षेप को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर फिर उठाए सवाल ट्रंप ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये प्रणालियां साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं और अमेरिका को कागजी मतपत्र (Paper Ballot) प्रणाली की ओर लौटने पर विचार करना चाहिए। एफबीआई और न्याय विभाग पर भी लगाए आरोप ट्रंप ने आरोप लगाया कि एफबीआई और अमेरिकी न्याय विभाग ने वर्ष 2020 के चुनाव के दौरान मिशिगन में कथित मतदाता धोखाधड़ी से जुड़े मामले की जांच को दबा दिया था। उन्होंने दावा किया कि यह व्यापक स्तर पर तथ्यों को छिपाने का प्रयास था। गैर-नागरिक मतदाताओं का भी किया जिक्र ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) की जांच में संघीय चुनावों के लिए राज्य की मतदाता सूची में लगभग 2.78 लाख गैर-नागरिकों के पंजीकरण की पहचान हुई है। उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। चुनावी दस्तावेज सार्वजनिक करने का दावा राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि व्हाइट हाउस ने चुनाव संबंधी खुफिया दस्तावेजों के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों में चुनाव प्रणाली की कमजोरियों और जांच से जुड़े निष्कर्ष शामिल हैं। उन्होंने लोगों से इन दस्तावेजों को देखने की अपील भी की। मेल-इन वोटिंग का फिर किया विरोध अपने करीब 23 मिनट के भाषण के अंत में ट्रंप ने डाक (मेल-इन) से मतदान का एक बार फिर विरोध किया। उन्होंने इसे "स्वाभाविक रूप से भ्रष्ट" व्यवस्था बताया और कहा कि इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होती है। हालांकि, अमेरिकी अदालतों, चुनाव अधिकारियों और कई स्वतंत्र जांचों में अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि मेल-इन वोटिंग के कारण व्यापक स्तर पर चुनावी धोखाधड़ी हुई या चुनाव परिणाम प्रभावित हुए थे।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
Rohingya refugee boats in the Bay of Bengal amid rough sea conditions
बंगाल की खाड़ी में बड़ा नाव हादसा, 500 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों के लापता होने की आशंका

बंगाल की खाड़ी में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़ा एक बड़ा समुद्री हादसा सामने आया है। म्यांमार से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों की ओर जा रही दो नावों के खराब मौसम में लापता होने के बाद करीब 500 लोगों के डूबने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) के संयुक्त बयान के अनुसार, जून के अंतिम सप्ताह में दोनों नावें म्यांमार से रवाना हुई थीं। इनमें कुल 500 से अधिक लोग सवार थे, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल सका है। खराब मौसम बना हादसे की वजह संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के मुताबिक, एक नाव पर लगभग 250 लोग सवार थे, जिससे समुद्र में अचानक संपर्क टूट गया। वहीं दूसरी नाव, जिसमें करीब 280 लोग सवार थे, 8 जुलाई को म्यांमार के अयायारवाड़ी तट के पास तेज लहरों और खराब मौसम के बीच डूब गई। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सभी यात्रियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है और राहत व जांच की प्रक्रिया जारी है। 12 लाख से अधिक रोहिंग्या रह रहे हैं शिविरों में संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वर्तमान में करीब 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के राहत शिविरों में रह रहे हैं। सीमित संसाधनों और कठिन जीवन परिस्थितियों के कारण कई लोग बेहतर भविष्य की उम्मीद में समुद्री रास्तों से दूसरे देशों की ओर जाने का जोखिम उठाते हैं। खतरनाक समुद्री सफर बना मजबूरी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि सुरक्षित और स्थायी समाधान नहीं मिलने के कारण रोहिंग्या शरणार्थी लगातार समुद्र के खतरनाक मार्गों का सहारा ले रहे हैं। खराब मौसम और मानव तस्करी के नेटवर्क के चलते ऐसे सफर अक्सर जानलेवा साबित होते हैं। जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार आईओएम और यूएनएचसीआर ने इस संभावित समुद्री त्रासदी पर गहरी चिंता जताते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक मृतकों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की गई है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी ऐसे ही समुद्री हादसों में 900 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों की मौत हो गई थी या वे लापता हो गए थे।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
Smoke rising after US airstrikes near Bandar Abbas in southern Iran
ईरान पर अमेरिका के लगातार छठे दिन हवाई हमले, 4 लोगों की मौत, बंदर अब्बास में बिजली व्यवस्था प्रभावित

अमेरिका ने शुक्रवार को लगातार छठी रात ईरान पर सैन्य कार्रवाई जारी रखी। ताजा हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद कूटनीतिक बातचीत की संभावना अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में ईरान की सैन्य क्षमताओं और उससे जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को और कमजोर करना है। बंदर अब्बास और आसपास के इलाकों को बनाया निशाना ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, अमेरिकी मिसाइलों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और उसके आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाया। यह रणनीतिक शहर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के पास स्थित है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हमलों में 4 लोगों की मौत, 17 घायल ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हुई है, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। होर्मोजगान प्रांत में तीन लोगों की मौत और नौ लोग घायल हुए। बंदर अब्बास में एक व्यक्ति की जान गई, जबकि आठ अन्य घायल बताए गए हैं। बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त, कई इलाकों में ब्लैकआउट ईरान के जनसंपर्क विभाग के प्रमुख होसैन मोगिमी ने बताया कि हमलों में कई बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बाद में कुछ क्षेत्रों में बिजली बहाल की गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे एसी और अन्य अधिक बिजली खपत वाले उपकरणों का सीमित उपयोग करें, ताकि बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। हवाई अड्डे पर भी हमला सरकारी मीडिया के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी प्रांत स्थित ईरानशहर हवाई अड्डे के परिसर में एक मिसाइल गिरने से आग लग गई। इस घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ है। हमले के बाद हवाई अड्डे की बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई, जिससे संचालन प्रभावित हुआ। बातचीत के संकेत भी बरकरार लगातार सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान बातचीत के लिए आगे आता है तो कूटनीतिक समाधान का रास्ता अब भी खुला है। वहीं, क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
IRAN US WAR
अमेरिका की एयरस्ट्राइक से दहला ईरान, भारत के चाबहार पोर्ट पर मिसाइल अटैक

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां।  अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार छठी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में लड़ाकू विमानों, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल करते हुए तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।   चाबहार पोर्ट भी बना निशाना ईरानी मीडिया के अनुसार, हमलों के दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट के मैरिटाइम कंट्रोल टावर को भी निशाना बनाया गया। बताया गया कि पिछले एक सप्ताह में इस टावर पर यह तीसरा हमला है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने कंट्रोल टावर को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जबकि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर टावर की तस्वीर साझा की है।   ईरान की चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जमीनी हमला किया गया तो अमेरिकी सैनिकों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने के लिए तैयार रहने का संकेत दिए जाने की भी खबरें हैं। उधर, कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों की भी जानकारी सामने आई है।   तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। एहतियात के तौर पर भारत ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती फिलहाल रोक दी है।   इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान में अमेरिका महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर रहा है। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हालिया हमलों में 40 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव से पश्चिम एशिया में अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक चिंताएं और गहरा गई हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
India UNSC Seat
UNSC में भारत की दावेदारी पर क्या चीन देगा साथ? विदेश मंत्री वांग यी के बयान से बढ़ीं उम्मीदें

बीजिंग, एजेंसियां। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता को लेकर भारत की दावेदारी एक बार फिर चर्चा में है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के हालिया बयान के बाद इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि चीन ने भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन नहीं किया है, लेकिन उसने संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सुधार प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही है।   भारत की भूमिका को बताया अहम   वांग यी ने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण की एक महत्वपूर्ण आवाज है और अंतरराष्ट्रीय मामलों में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार समय की मांग है और इस प्रक्रिया में विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।   स्थायी सदस्यता पर अब भी स्पष्ट समर्थन नहीं   हालांकि चीन ने UNSC सुधारों का समर्थन दोहराया, लेकिन भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर कोई स्पष्ट या औपचारिक समर्थन नहीं दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि बीजिंग का रुख पहले जैसा ही बना हुआ है और वह सुरक्षा परिषद में किसी भी बदलाव को व्यापक सहमति के आधार पर आगे बढ़ाने की बात करता है।   भारत लंबे समय से कर रहा है दावेदारी   भारत पिछले कई वर्षों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। भारत का तर्क है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक शांति अभियानों में सक्रिय योगदान को देखते हुए उसे स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए। अमेरिका, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन समेत कई देश भारत की दावेदारी का समर्थन कर चुके हैं।   चीन के रुख पर टिकी दुनिया की नजर   विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए चीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहेगी, क्योंकि वह मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों में से एक है और उसके पास वीटो शक्ति भी है। ऐसे में आने वाले समय में UNSC सुधारों को लेकर चीन का अंतिम रुख भारत की दावेदारी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
China AI Conference
चीन ने शंघाई AI सम्मेलन में वैश्विक AI सहयोग का दिया संदेश, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साझा किया नया विज़न

शंघाई, एजेंसियां। चीन के शंघाई में आयोजित वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्रेंस (WAIC 2026) में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक AI सहयोग को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दुनिया के विकास का नया इंजन बन सकता है, लेकिन इसके लिए सभी देशों को मिलकर सुरक्षित, पारदर्शी और समावेशी AI व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि AI तकनीक का लाभ केवल कुछ विकसित देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरी दुनिया को इसका फायदा मिलना चाहिए।   वैश्विक AI गवर्नेंस पर दिया जोर   अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने AI के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा नियम और मानक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि AI के विकास के साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नैतिक मानकों का पालन भी उतना ही जरूरी है। चीन इस दिशा में सभी देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।   चीनी कंपनियों ने दिखाई नई तकनीक   सम्मेलन में Huawei, Alibaba, Tencent, Baidu समेत कई प्रमुख चीनी कंपनियों ने अपने नए AI मॉडल, क्लाउड प्लेटफॉर्म, रोबोटिक्स तकनीक और स्मार्ट कंप्यूटिंग सिस्टम पेश किए। कई कंपनियों ने जनरेटिव AI, औद्योगिक ऑटोमेशन और हेल्थकेयर से जुड़े नए समाधान भी प्रदर्शित किए, जिन्हें भविष्य की तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।   अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच अहम संदेश   विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब AI तकनीक को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में चीन ने वैश्विक सहयोग की बात करके यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह केवल तकनीकी नेतृत्व ही नहीं, बल्कि AI गवर्नेंस में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है।   दुनियाभर के प्रतिनिधियों ने की भागीदारी   सम्मेलन में कई देशों के नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, टेक कंपनियों और उद्योग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस दौरान AI के सुरक्षित उपयोग, साइबर सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और भविष्य की तकनीकों पर व्यापक चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इस सम्मेलन से AI क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा मिल सकती है और आने वाले समय में कई नई वैश्विक साझेदारियों का रास्ता भी खुल सकता है।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
Ukraine Defense Minister
यूक्रेन के रक्षा मंत्री को हटाने पर बवाल, कीव में हजारों लोगों का प्रदर्शन; ज़ेलेंस्की सरकार पर बढ़ा दबाव

कीव, एजेंसियां। यूक्रेन की राजधानी कीव में रक्षा मंत्री को पद से हटाए जाने के फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे ऐसे समय का गलत कदम बताया, जब देश रूस के साथ जारी युद्ध का सामना कर रहा है। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।   सरकार के फैसले पर उठे सवाल   प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि युद्ध के दौरान रक्षा मंत्रालय में बड़े बदलाव सेना के मनोबल और सैन्य रणनीति पर असर डाल सकते हैं। विपक्षी नेताओं ने भी सरकार से इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकार ने इतना बड़ा फैसला बिना पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी दिए लिया।   कीव की सड़कों पर उमड़ी भीड़   राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में लोगों ने रैलियां निकालीं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पुलिस की भारी तैनाती के बीच प्रदर्शन अधिकांश स्थानों पर शांतिपूर्ण रहा, हालांकि कुछ जगह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हल्की झड़प की भी खबरें सामने आईं।   ज़ेलेंस्की सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव   रक्षा मंत्री की बर्खास्तगी को लेकर देश के राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि सरकार को अब इस फैसले को लेकर संसद और जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना होगा। वहीं, विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने का बड़ा मुद्दा बना रहा है।   युद्ध के बीच फैसले पर दुनिया की नजर   रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुए इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन का असर यूक्रेन की सैन्य रणनीति और पश्चिमी देशों के साथ रक्षा सहयोग पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की अगली रणनीति और नए रक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
Russia Petrol Crisis
रूस ने भारत से लगाई पेट्रोल की गुहार, यूक्रेनी हमलों के बाद ईंधन संकट गहराया

मॉस्को, एजेंसियां। रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में गिना जाता है, अब पेट्रोल की कमी से जूझ रहा है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों में कई रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचने के बाद रूसी ऊर्जा कंपनियों ने भारत से अतिरिक्त पेट्रोल की आपूर्ति का अनुरोध किया है। यह वैश्विक ऊर्जा कारोबार में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।   यूक्रेनी हमलों से प्रभावित हुई रिफाइनरियां   रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस की रिफाइनिंग क्षमता का बड़ा हिस्सा अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल की कमी और कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।   भारतीय कंपनियों से किया गया संपर्क   सूत्रों के मुताबिक, रूस की प्रमुख ऊर्जा कंपनियों ने भारत की कुछ रिफाइनिंग कंपनियों से अतिरिक्त पेट्रोल उपलब्ध कराने को लेकर संपर्क किया है। हालांकि, भारतीय सरकारी तेल कंपनियों के पास फिलहाल निर्यात के लिए सीमित अतिरिक्त उपलब्धता बताई जा रही है।   ऊर्जा व्यापार में बदली तस्वीर   अब तक भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है और उसे रिफाइन कर विभिन्न देशों को निर्यात करता है। मौजूदा हालात में पहली बार रूस को ही भारत से पेट्रोल की जरूरत पड़ रही है, जिसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।   आगे डीजल की मांग भी बढ़ सकती है   ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस की रिफाइनरियों पर हमलों का असर जारी रहा, तो आने वाले समय में रूस भारत सहित अन्य देशों से डीजल आयात करने पर भी विचार कर सकता है। फिलहाल रूसी प्रशासन ईंधन आपूर्ति सामान्य करने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Indus Waters Treaty
सिंधु जल संधि पर भारत के एक्शन से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता, विश्व बैंक के रुख ने बढ़ाई मुश्किलें

इस्लामाबाद, एजेंसियां। सिंधु जल संधि को लेकर भारत के हालिया कदमों के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान ने इस मामले में विश्व बैंक से हस्तक्षेप की अपील की, लेकिन विश्व बैंक ने साफ कर दिया कि उसकी भूमिका केवल संधि के तहत तय प्रक्रियाओं तक सीमित है और वह भारत या पाकिस्तान को कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता।    विश्व बैंक ने क्या कहा?   विश्व बैंक ने दोहराया कि वह सिंधु जल संधि का पक्षकार नहीं है, बल्कि केवल एक 'फैसिलिटेटर' की भूमिका निभाता है। बैंक ने कहा कि संधि से जुड़े विवादों का समाधान दोनों देशों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही करना होगा।   भारत ने अपनाया सख्त रुख   भारत ने हाल के महीनों में सुरक्षा चिंताओं और सीमा पार आतंकवाद का हवाला देते हुए सिंधु जल संधि की समीक्षा और उसके कुछ प्रावधानों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। भारत का कहना है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।   पाकिस्तान ने जताई चिंता   पाकिस्तान का कहना है कि भारत के फैसलों का असर उसकी कृषि और जल आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी को लेकर उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला उठाने की कोशिश की है और विश्व बैंक से हस्तक्षेप की मांग की।   दोनों देशों के बीच बना हुआ है गतिरोध   सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ सकती हैं।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Israeli Airstrikes
इजराइल के हमलों से गाजा में कोहराम, कई लोगों की मौत; युद्धविराम पर फिर मंडराया संकट

गाजा सिटी, एजेंसियां। गाजा पट्टी में इजराइल के ताजा हवाई हमलों के बाद हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग इलाकों में हुए हमलों में कई लोगों की मौत हुई है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है।   रिहायशी इलाकों में हुए हमले   रिपोर्टों के मुताबिक, मध्य गाजा के दीर अल-बलाह और गाजा सिटी के कुछ हिस्सों में हुए हवाई हमलों से कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाकों के बाद कई परिवार मलबे में फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए राहत टीमें मौके पर पहुंचीं।   इजराइली सेना ने बताई कार्रवाई की वजह   इजराइली सेना का कहना है कि हमले हमास से जुड़े लक्ष्यों को निशाना बनाकर किए गए। सेना के अनुसार, जिन ठिकानों पर कार्रवाई हुई, उनका इस्तेमाल उग्रवादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। वहीं, हमास और स्थानीय अधिकारियों ने नागरिकों के हताहत होने का दावा किया है।   युद्धविराम वार्ता पर बढ़ी अनिश्चितता   इन हमलों के बीच मिस्र की राजधानी काहिरा में चल रही युद्धविराम वार्ता की प्रगति भी प्रभावित होती दिखाई दे रही है। दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है, जिससे स्थायी शांति की कोशिशों को झटका लगा है।   मानवीय संकट और गहराया   संयुक्त राष्ट्र और राहत एजेंसियों ने गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति पर चिंता जताई है। लगातार हमलों और विस्थापन के कारण बड़ी संख्या में लोगों को भोजन, दवा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Fuel Crisis in Cuba
क्यूबा में ईंधन संकट गहराया, देशभर में फिर लगा ब्लैकआउट; लाखों लोग बिजली संकट से प्रभावित

हवाना, एजेंसियां। क्यूबा एक बार फिर गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। ईंधन की कमी और बिजली उत्पादन में गिरावट के चलते देश के कई हिस्सों में व्यापक ब्लैकआउट की स्थिति बन गई है। लगातार बिजली कटौती से लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि उद्योगों और आवश्यक सेवाओं पर भी इसका असर पड़ रहा है।    ईंधन की कमी बनी मुख्य वजह   क्यूबा सरकार के अनुसार, डीजल और अन्य ईंधनों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण कई थर्मल पावर प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा कुछ बिजली संयंत्रों में तकनीकी खराबी ने भी संकट को और बढ़ा दिया है।   लाखों लोग घंटों बिजली कटौती झेलने को मजबूर   देश के कई प्रांतों में लोगों को रोजाना कई घंटों तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बिजली नहीं होने से पेयजल आपूर्ति, इंटरनेट सेवा, व्यापारिक गतिविधियों और अस्पतालों के संचालन पर भी असर पड़ा है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से बिजली की खपत कम करने की अपील की है।   सरकार ने संकट से निपटने के लिए उठाए कदम   सरकार ने अतिरिक्त ईंधन की व्यवस्था करने और खराब पड़े बिजली संयंत्रों की मरम्मत तेज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिजली आपूर्ति को जल्द सामान्य करने के लिए आपातकालीन उपाय लागू किए जा रहे हैं।   आर्थिक संकट ने बढ़ाई मुश्किलें   विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से चल रहे आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और ईंधन आयात में आने वाली दिक्कतों के कारण क्यूबा का ऊर्जा क्षेत्र लगातार दबाव में है। इससे देश में बिजली संकट बार-बार गहराता जा रहा है।   हालात पर दुनिया की नजर   लगातार बिगड़ते ऊर्जा संकट को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी क्यूबा के हालात पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ईंधन आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गंभीर हो सकता है।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
A fuel station in Nepal displays E10 ethanol-blended petrol as the government prepares to introduce ethanol-mixed fuel under new quality and production standards.
भारत में E20 के बाद अब नेपाल में E10 पेट्रोल की तैयारी, सरकार ने जारी किया नया ड्राफ्ट

काठमांडू: भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब नेपाल भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E10) लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए नेपाल ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड मेट्रोलॉजी (NBSM) ने नया ड्राफ्ट स्टैंडर्ड जारी किया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, बिक्री और मूल्य निर्धारण से जुड़े विस्तृत नियम तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि कैबिनेट आवश्यकता के अनुसार भविष्य में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने या घटाने का फैसला भी कर सकेगी। E10 पेट्रोल के लिए तैयार किए गए नए नियम नेपाली अखबार द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ड्राफ्ट स्टैंडर्ड में इथेनॉल उत्पादन के स्रोत और तकनीकों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसके साथ ही स्टोरेज, लेबलिंग और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार: इथेनॉल को केवल सुरक्षित, सूखे और लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखा जाएगा। हर कंटेनर पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इथेनॉल पूरी तरह साफ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें कोई ठोस कण नहीं होना चाहिए। पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी चाहिए। इन रसायनों के इस्तेमाल पर रोक नेपाल सरकार ने मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे रसायनों को डीनेचुरेंट के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का मानना है कि ऐसे रसायन वाहनों के इंजन, रबर पाइप और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थानीय उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा यह पहल नेपाल सरकार के 5 जनवरी 2026 के कैबिनेट फैसले के बाद शुरू की गई है। इसके तहत "इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपयोग आदेश-2026"को मंजूरी दी गई थी, जो 12 मार्च 2026 को नेपाल गजट में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी हो गया। सरकार का उद्देश्य है कि देश में उपलब्ध संसाधनों से इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाया जाए, रोजगार के अवसर पैदा हों और आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम की जा सके। खाद्यान्न की कमी न हो, इसलिए लगाया प्रतिबंध नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न संकट पैदा नहीं होना चाहिए। इसलिए खाने योग्य अनाज का उपयोग इथेनॉल बनाने में नहीं किया जाएगा। ड्राफ्ट के अनुसार इथेनॉल उत्पादन के लिए इन कच्चे माल का उपयोग किया जाएगा: चीनी मिलों से निकलने वाला शीरा (मोलासेस) नेपियर घास कृषि एवं वन अपशिष्ट धान का पुआल मक्के के डंठल गेहूं की भूसी खाने योग्य नहीं रहने वाला खराब अनाज कसावा यीस्ट और अन्य आवश्यक रसायन पर्यावरण अनुकूल उत्पादन पर जोर सरकार ने निर्देश दिया है कि इथेनॉल का उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों से किया जाएगा। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) को ही बेचा जा सकेगा। इथेनॉल की कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। नई दर लागू होने तक पुरानी कीमतें प्रभावी रहेंगी। संशोधित कीमतें हर वर्ष जुलाई के मध्य से लागू की जाएंगी। भारत की तरह स्वच्छ ईंधन की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल का E10 कार्यक्रम भारत की इथेनॉल मिश्रण नीति की तर्ज पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने, स्थानीय कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
India-UK trade officials discuss bilateral economic cooperation as both countries reaffirm that their strategic partnership will remain strong despite possible political changes in the United Kingdom.
ब्रिटेन में नेतृत्व बदलेगा, लेकिन भारत से रिश्ते नहीं; ट्रेड कमिश्नर हरजिंदर कंग का बड़ा भरोसा

India-UK Relations: ब्रिटेन में संभावित राजनीतिक बदलाव के बावजूद भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के संबंध मजबूत बने रहेंगे। दक्षिण एशिया के लिए ब्रिटेन के ट्रेड कमिश्नर और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के मुख्य वार्ताकार हरजिंदर कंग ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी किसी एक सरकार या प्रधानमंत्री पर निर्भर नहीं है, बल्कि साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक हितों पर आधारित है। नेतृत्व बदलने से नहीं बदलेगा भारत-यूके संबंध न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में हरजिंदर कंग ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। इसके अलावा लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानूनी ढांचा, अंग्रेजी भाषा और ब्रिटेन में रह रहे बड़े भारतीय समुदाय ने इन संबंधों को और मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन होने पर भी भारत के साथ रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी प्रभावित होने की संभावना नहीं है। एंडी बर्नहैम को बताया भारत का समर्थक हरजिंदर कंग ने कहा कि ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम, जिन्हें भविष्य में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है, भारत के साथ मजबूत संबंधों के पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में एंडी बर्नहैम के साथ उनकी बातचीत हुई थी। बर्नहैम भारत का दौरा कर व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के इच्छुक थे। उनका लक्ष्य ग्रेटर मैनचेस्टर और भारत के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देना है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था पर ब्रिटेन की नजर ट्रेड कमिश्नर ने कहा कि ब्रिटेन के प्रमुख राजनीतिक दल भारत को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक शक्तियों में से एक मानते हैं। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। ऐसे में ब्रिटेन भारत के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि चाहे कीर स्टार्मर हों या ऋषि सुनक, सभी नेताओं की सोच भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को लेकर सकारात्मक रही है। वर्षों की बातचीत के बाद हुआ FTA हरजिंदर कंग ने स्पष्ट किया कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किसी वैश्विक व्यापारिक तनाव या अमेरिकी टैरिफ के कारण नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई वर्षों तक चली विस्तृत बातचीत और आपसी सहमति का परिणाम है। उनके मुताबिक, जब दोनों देशों को लगा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, तब इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। आइसक्रीम खाते हुए बनी अंतिम सहमति कंग ने बातचीत का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और उस समय के ब्रिटिश ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने लंदन के एक पार्क में टहलते हुए और आइसक्रीम खाते-खाते अंतिम मुद्दों पर सहमति बनाई। इसके बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर समझौते को अंतिम रूप दिया। CETA लागू होने से दोनों देशों को होंगे बड़े फायदे भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई से लागू हो चुका है। इस समझौते पर जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Protesters gather in Muzaffarabad in Pakistan-administered Kashmir as the Joint Awami Action Committee calls for a long march against the administration.
PoK में आज JAAC का लॉन्ग मार्च, मुजफ्फराबाद में हाई अलर्ट; पाक सेना की भारी तैनाती

PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बुधवार को मुजफ्फराबाद तक 'लॉन्ग मार्च' का आह्वान किया है। संभावित प्रदर्शन को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सरकार के खिलाफ जारी है आंदोलन JAAC लंबे समय से अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोकने, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बहाल करने तथा बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता जैसी मांगों को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन का कहना है कि सरकार को पहले ही अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई जिलों से मुजफ्फराबाद पहुंचेंगे प्रदर्शनकारी सूत्रों के मुताबिक रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग मुजफ्फराबाद पहुंच सकते हैं। प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहने और कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की भी संभावना जताई गई है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की है। प्रमुख मार्गों और सरकारी प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर है। JAAC की प्रमुख मांगें गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर रोक इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं की बहाली बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता शासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सुधार आंदोलन और तेज होने की चेतावनी JAAC ने कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन का दावा है कि मौजूदा आंदोलन केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक सुधारों की मांग भी प्रमुख मुद्दा बनेगी। राजनीतिक असर पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होता है, तो इससे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की सख्ती या बल प्रयोग की स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी.  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
The U.S. Capitol building in Washington, D.C., symbolizing a proposed sanctions bill that could impose tariffs on countries continuing to import Russian oil.
भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव, रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी संसद में नया प्रतिबंध बिल

वॉशिंगटन: अमेरिका में रूस पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया प्रतिबंध (Sanctions) विधेयक पेश किया गया है। प्रस्तावित बिल में भारत समेत पांच देशों पर रूस से तेल खरीद जारी रखने की स्थिति में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह अभी केवल एक प्रस्तावित विधेयक है और कानून बनने से पहले इसे अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना बाकी है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर निशाना रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित विधेयक में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रहने से मॉस्को को आर्थिक समर्थन मिल रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध जारी रखने में उसे मदद मिलती है। पहले 500% टैरिफ का प्रस्ताव था इससे पहले पेश किए गए एक प्रस्ताव में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। हालांकि, उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। नए विधेयक में अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे अपेक्षाकृत व्यावहारिक माना जा रहा है। अंतिम निर्णय USTR करेगा प्रस्ताव के अनुसार, किसी देश पर कितना टैरिफ लगाया जाएगा, इसका अंतिम फैसला अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) करेगा। आवश्यकता पड़ने पर टैरिफ की दर कम भी की जा सकती है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी संसद को सूचना देना अनिवार्य होगा। अगस्त से पहले पारित कराने की कोशिश विधेयक में रूस के ऊर्जा, रक्षा, वित्त और औद्योगिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है। अमेरिकी सांसदों का लक्ष्य इसे अगस्त से पहले संसद से पारित कराना है, हालांकि इसकी प्रक्रिया अभी जारी है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है? यदि यह विधेयक कानून बनता है और भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका को निर्यात होने वाले कई भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसका असर विशेष रूप से इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है— ज्वेलरी और रत्न उद्योग टेक्सटाइल एवं परिधान इंजीनियरिंग उत्पाद अन्य निर्यात आधारित उद्योग टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता अमेरिकी बाजार में प्रभावित हो सकती है। रूस से तेल आयात बना अहम मुद्दा भारत पिछले कुछ वर्षों से रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्तावित अमेरिकी कदम का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को सीमित करना और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर वैकल्पिक स्रोत अपनाने का दबाव बनाना है। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित बिल है। इसके कानून बनने, अंतिम स्वरूप और संभावित प्रभाव को लेकर आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद की प्रक्रिया और प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Young protesters gather in Kathmandu demanding accountability, employment opportunities and an independent investigation after the death of a ride-share driver.
नेपाल में फिर भड़का Gen Z आंदोलन, बेरोजगारी और पुलिस कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर उतरे युवा

काठमांडू: नेपाल में एक बार फिर जेन-जी (Gen Z) युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। राजधानी काठमांडू समेत कई इलाकों में युवा बेरोजगारी, पुलिस कार्रवाई, कथित प्रशासनिक ज्यादती और सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के मेयर बालेन शाह के इस्तीफे की मांग भी तेज कर दी है। यह आंदोलन एक राइड-शेयर चालक की मौत के बाद और उग्र हो गया है। युवाओं का कहना है कि सरकार रोजगार, सुशासन और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर विफल रही है। राइड-शेयर चालक की मौत के बाद भड़का आंदोलन जानकारी के अनुसार, 25 वर्षीय राइड-शेयर चालक गणेश नेपाली ने नगर निगम पुलिस के साथ कथित विवाद के बाद खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी। गंभीर रूप से झुलसे गणेश की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई और लगातार प्रशासनिक दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। घटना के बाद युवाओं में भारी नाराजगी फैल गई और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गए। झुग्गी हटाने की कार्रवाई पर भी नाराजगी विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा कारण काठमांडू में चलाया जा रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान भी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के नदी किनारे बनी झुग्गी बस्तियों को हटाया, जिससे हजारों परिवार बेघर हो गए। युवाओं का कहना है कि गरीबों के पुनर्वास के बिना की गई कार्रवाई मानवीय दृष्टि से गलत है और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज, बल प्रयोग और हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। विभिन्न छात्र और युवा संगठनों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। राजधानी के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने में जुटी हुई है। बालेन शाह पर बढ़ा दबाव काठमांडू के मेयर बालेन शाह को पिछले वर्षों में युवाओं का व्यापक समर्थन मिला था, लेकिन अब वही युवा उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन जनता की समस्याओं का समाधान करने में असफल रहा है और युवाओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। युवाओं ने मेयर बालेन शाह से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। रोजगार और पारदर्शिता की मांग राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल के युवा रोजगार, पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, इन मुद्दों पर अपेक्षित प्रगति नहीं होने से असंतोष लगातार बढ़ता गया। सरकार ने आत्मदाह की घटना की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि केवल जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Nohkalikai Falls cascading through lush green hills and mist during Meghalaya's monsoon season.
मानसून में जरूर जाएं मेघालय का नोहकलिकाई फॉल्स, जहां बादल बनाते हैं जादुई नजारा, जानिए वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यता

Nohkalikai Falls Meghalaya: मानसून के मौसम में अगर आप प्रकृति का सबसे खूबसूरत रूप देखना चाहते हैं, तो मेघालय का नोहकलिकाई फॉल्स बेहतरीन विकल्प हो सकता है। करीब 340 मीटर ऊंचा यह झरना अपनी रहस्यमयी कहानी, प्राकृतिक सुंदरता और बादलों के बीच बनने वाले अद्भुत दृश्य के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। मानसून में क्यों खास है नोहकलिकाई फॉल्स? भारत में मानसून के दौरान घूमने के लिए कई खूबसूरत जगहें हैं, लेकिन मेघालय के चेरापूंजी (सोहरा) में स्थित नोहकलिकाई फॉल्स सबसे अलग अनुभव देता है। बारिश के मौसम में यहां का झरना अपने पूरे वेग से बहता है और चारों ओर फैले घने बादल, हरी-भरी पहाड़ियां और धुंध ऐसा दृश्य बनाते हैं, जिसे देखकर हर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाता है। करीब 340 मीटर (1,115 फीट) की ऊंचाई से गिरने वाला यह झरना भारत के सबसे ऊंचे प्लंज वॉटरफॉल्स में गिना जाता है। क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक तथ्य? विशेषज्ञों के अनुसार, चेरापूंजी दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं खासी पहाड़ियों से टकराती हैं, जिससे ओरोग्राफिक वर्षा (Orographic Rainfall) होती है। यही कारण है कि मानसून में नोहकलिकाई फॉल्स का जलप्रवाह कई गुना बढ़ जाता है और यहां लगातार बादल और धुंध का अनोखा नजारा देखने को मिलता है। क्या है इस जगह से जुड़ी रहस्यमयी और धार्मिक मान्यता? स्थानीय खासी जनजाति की लोककथा के अनुसार, इस झरने का नाम 'नोह का लिकाई' से पड़ा है, जिसका अर्थ है "लिकाई की छलांग"। मान्यता है कि लिकाई नाम की एक महिला ने दुखद परिस्थितियों में इसी चट्टान से छलांग लगा दी थी। तभी से यह स्थान स्थानीय लोगों के लिए भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। हालांकि, यह कथा लोकविश्वास पर आधारित है और इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून (जून से सितंबर): झरना अपने सबसे भव्य रूप में दिखाई देता है। अक्टूबर से नवंबर: मौसम साफ रहता है और फोटोग्राफी के लिए शानदार समय माना जाता है। कैसे पहुंचे? निकटतम एयरपोर्ट: शिलांग (उमरोई) और गुवाहाटी एयरपोर्ट निकटतम रेलवे स्टेशन: गुवाहाटी सड़क मार्ग: शिलांग से लगभग 55 किलोमीटर और गुवाहाटी से करीब 150 किलोमीटर अनुमानित यात्रा बजट (प्रति व्यक्ति) गुवाहाटी/शिलांग से टैक्सी या साझा कैब: ₹800–₹2,500 होटल (1 रात): ₹1,500–₹4,000 भोजन: ₹500–₹1,000 एंट्री टिकट व अन्य खर्च: ₹100–₹300 कुल अनुमानित बजट: ₹3,500–₹8,000 (2 दिन की यात्रा) यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान बारिश से बचने के लिए रेनकोट और वाटरप्रूफ जूते साथ रखें। फिसलन वाले रास्तों पर सावधानी से चलें। मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। प्राकृतिक स्थल को स्वच्छ रखने में सहयोग करें। ध्यान दें: नोहकलिकाई फॉल्स से जुड़ी लोककथा स्थानीय मान्यताओं पर आधारित है। वहीं वैज्ञानिक तथ्य इस क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और भारी वर्षा से जुड़े हैं।  

anmol जुलाई 15, 2026 0
Yulia Svyrydenko
यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको ने दिया इस्तीफा, जेलेंस्की सरकार में बड़े फेरबदल की तैयारी

कीव, एजेंसियां। यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को यूक्रेनी संसद ने उनके इस्तीफे को मंजूरी दे दी, जिसके साथ ही पूरे मंत्रिमंडल का कार्यकाल समाप्त हो गया। यह फैसला राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की द्वारा प्रस्तावित बड़े सरकारी फेरबदल का हिस्सा माना जा रहा है।   एक साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा   40 वर्षीय अर्थशास्त्री यूलिया स्विरिडेंको ने लगभग एक वर्ष तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। अपने विदाई संबोधन में उन्होंने कहा कि युद्धकाल में सरकार चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा और आने वाले महीनों में रूस की ओर से ऊर्जा ढांचे पर हमलों की आशंका के बीच सर्दियों की तैयारी नई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।   जेलेंस्की के फैसले पर उठे सवाल   हालांकि राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सरकार में बदलाव की जरूरत बताई है, लेकिन विपक्षी दलों और कई सांसदों ने इस फेरबदल के उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार बदलने के पीछे स्पष्ट कारण नहीं बताए गए हैं और केवल चेहरों के बदलाव से युद्धकालीन चुनौतियों का समाधान नहीं होगा।   नए प्रधानमंत्री के नाम पर जल्द फैसला   इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अब यूक्रेन में नए प्रधानमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी सेरही कोरेट्स्की को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। संसद जल्द ही नए प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल पर मतदान कर सकती है।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
NASA astronaut Anil Menon and two Russian cosmonauts arrive aboard the Soyuz MS-29 spacecraft at the International Space Station, where they are welcomed by the Expedition crew.
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे अनिल मेनन, ISS पर हुआ शानदार स्वागत

वॉशिंगटन: नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और रूस के दो कॉस्मोनॉट सफलतापूर्वक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से करीब साढ़े तीन घंटे की यात्रा पूरी करने के बाद तीनों का स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों ने शानदार स्वागत किया। इस ऐतिहासिक पल का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ISS पर उनके स्वागत की झलक दिखाई दे रही है। बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से भरी थी उड़ान नासा के अनुसार, सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान ने मंगलवार को भारतीय समयानुसार रात 8:17 बजे कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरी थी। यह मिशन नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के संयुक्त सहयोग के तहत संचालित किया जा रहा है। अनिल मेनन के साथ रूसी कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन का हिस्सा हैं। अनिल मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा नासा ने बताया कि यह अनिल मेनन का पहला अंतरिक्ष मिशन है। वहीं, प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना दूसरी बार अंतरिक्ष यात्रा पर गए हैं। ISS पहुंचने के बाद तीनों अंतरिक्ष यात्री वहां पहले से मौजूद अंतरराष्ट्रीय दल के साथ जुड़ गए हैं। इस दल में नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और रोस्कोस्मोस के कई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। आठ महीने तक करेंगे वैज्ञानिक शोध यह मिशन लगभग आठ महीने तक चलेगा। इस दौरान अनिल मेनन और उनकी टीम अंतरिक्ष में कई वैज्ञानिक प्रयोग, जैविक अनुसंधान और नई तकनीकों का परीक्षण करेंगे। इन प्रयोगों का उद्देश्य भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना है। साथ ही, अंतरिक्ष में किए जाने वाले शोध से चिकित्सा, विज्ञान और नई तकनीकों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है, जिनका लाभ धरती पर भी लोगों को मिल सकता है। अप्रैल 2027 में होगी वापसी नासा के कार्यक्रम के अनुसार, अनिल मेनन, प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना की पृथ्वी पर वापसी अप्रैल 2027 में निर्धारित है। मिशन के दौरान वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर विभिन्न वैज्ञानिक परियोजनाओं और तकनीकी परीक्षणों में भाग लेंगे।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जुलाई 11, 2026 0

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