पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख Maulana Fazlur Rehman ने कराची में आयोजित एक जनसभा में पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था और सेना पर तीखा हमला बोला। उनके बयान को सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir और सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती माना जा रहा है।
कराची में समर्थकों को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया कि उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल और पत्र मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पाकिस्तान की “एस्टैब्लिशमेंट” जिम्मेदार होगी।
उन्होंने मंच से कहा कि देश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं, बल्कि “सिविल-मिलिट्री हाइब्रिड राज” चल रहा है। उनके इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
मौलाना ने पाकिस्तान की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण पाकिस्तान के भारत और अफगानिस्तान के साथ संबंध खराब हुए हैं, जबकि चीन का भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश की नीतियां पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर रही हैं और इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
पाकिस्तान में इससे पहले Imran Khan और उनकी पार्टी भी सेना पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगा चुकी है। अब मौलाना फजलुर रहमान के तेवरों को उसी तरह की नई टकराव की शुरुआत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में लंबे समय से विपक्षी दल यह आरोप लगाते रहे हैं कि देश की वास्तविक ताकत सेना के हाथ में है और सरकारें उसी के प्रभाव में काम करती हैं।
मौलाना फजलुर रहमान ने 22 मई से देशव्यापी विरोध आंदोलन शुरू करने की घोषणा भी की। उन्होंने बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और सरकार की नीतियों को लेकर जनता से सड़क पर उतरने की अपील की।
उन्होंने गाजा युद्ध का जिक्र करते हुए मुस्लिम देशों से इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की भी मांग की। मौलाना ने दावा किया कि क्षेत्र में इजरायल का प्रभाव बढ़ रहा है और भविष्य में पाकिस्तान भी खतरे का सामना कर सकता है।
मौलाना के इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नया तनाव पैदा हो गया है। विपक्ष और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच टकराव की आशंका फिर बढ़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की सियासत में बड़ा विवाद बन सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात को लेकर नए दावे सामने आए हैं। आंदोलन से जुड़े जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने कथित तौर पर भारत से मानवीय सहायता की अपील की है। भारत से मानवीय सहायता की मांग सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सरदार अमन खान कथित रूप से कहते दिखाई दे रहे हैं कि क्षेत्र में राशन और आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है तथा लोगों को मदद की जरूरत है। उन्होंने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (LoC) पर राहत के लिए व्यवस्था करने की अपील की। उनका यह भी दावा है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत आने का विकल्प मिलना चाहिए। आर्थिक नाकेबंदी का आरोप अमन खान का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, जिससे खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईदगाह मैदान में हुई सभा रावलाकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक सभा के दौरान अमन खान ने कथित तौर पर लोगों से पूछा कि क्या उन्हें नियंत्रण रेखा (LoC) की ओर बढ़ना चाहिए। वायरल वीडियो में भीड़ की ओर से समर्थन में नारे सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें किए गए सभी दावों का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। कई सप्ताह से जारी हैं प्रदर्शन PoK में पिछले महीने से विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन पर नागरिक अधिकारों के हनन, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और आर्थिक समस्याओं को लेकर आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय संगठनों का कहना है कि आंदोलन तब और तेज हुआ जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा कार्रवाई की गई। वहीं, पाकिस्तान प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जाती रही है। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और भारत से मदद की अपील संबंधी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें सत्यापित तथ्य के बजाय संबंधित पक्ष के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
बीजिंग/वॉशिंगटन: चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बी (Nuclear Submarine) से बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के बाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। चीन ने इसे अपनी नियमित सैन्य अभ्यास गतिविधि का हिस्सा बताया है। परमाणु पनडुब्बी से हुआ मिसाइल परीक्षण चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नेवी ने स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे परमाणु पनडुब्बी से एक रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया। चीनी सेना का दावा है कि मिसाइल में डमी (बिना विस्फोटक) वारहेड लगाया गया था और उसने प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पर सफलतापूर्वक निशाना साधा। चीन का कहना है कि यह उसकी वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों का हिस्सा था और संबंधित देशों को इसकी पूर्व सूचना दे दी गई थी। अमेरिका ने जताई गंभीर चिंता अमेरिकी विदेश विभाग ने परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन के इस कदम पर उसकी करीबी नजर थी। अमेरिका ने कहा कि जब दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रयास कर रही है, तब चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि बीजिंग का बिना पर्याप्त पारदर्शिता के परमाणु क्षमताओं का विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी उठाए सवाल जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के मिसाइल परीक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां एशिया-प्रशांत की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती हैं। न्यूजीलैंड ने भी चीन से अधिक पारदर्शिता बरतने और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सैन्य कदमों पर स्पष्ट जानकारी साझा करने की अपील की है। हथियार नियंत्रण वार्ता की अपील अमेरिका ने चीन से परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने का आग्रह किया है। साथ ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की नियमित जानकारी साझा करने की व्यवस्था अपनाने की भी मांग की है। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने रक्षा दायित्वों का पालन करता रहेगा। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रणनीतिक मिसाइल परीक्षण अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकते हैं। दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।
वॉशिंगटन/सिएटल: फीफा विश्व कप 2026 के बीच अमेरिका के स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को मिले रेड कार्ड को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फैसले पर सवाल उठाने के बाद फीफा ने रेड कार्ड की समीक्षा की और उसे वापस ले लिया। अब बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेल सकेंगे। ट्रंप ने फैसले को बताया अन्यायपूर्ण डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि फोलारिन बालोगुन अमेरिकी टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं और उन्हें अगले मैच से बाहर करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में उन्हें रेड कार्ड के नियमों की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब पता चला कि इसके कारण खिलाड़ी अगले मैच में नहीं खेल सकता, तो उन्हें यह फैसला अनुचित लगा। उन्होंने कहा कि मैदान पर यह जानबूझकर किया गया फाउल नहीं था, बल्कि दोनों खिलाड़ी तेज रफ्तार में एक-दूसरे से टकरा गए थे। फीफा से की फैसले की समीक्षा की मांग ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर फीफा अधिकारियों से संपर्क किया और रेड कार्ड की समीक्षा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी को उस मैच के लिए दंडित करना उचित नहीं है, जो अभी खेला ही नहीं गया। उनके अनुसार, ऐसा निर्णय खेल भावना के अनुरूप नहीं है। फीफा ने हटाया निलंबन फीफा द्वारा मामले की समीक्षा के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही उन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध भी समाप्त हो गया है। अब 25 वर्षीय स्ट्राइकर सोमवार को सिएटल में बेल्जियम के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अमेरिकी टीम का हिस्सा होंगे। अमेरिका के लिए अहम खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन इस विश्व कप में अमेरिका के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अब तक तीन गोल किए हैं और टीम के आक्रमण की सबसे मजबूत कड़ी माने जा रहे हैं। उनकी वापसी अमेरिकी मुख्य कोच मौरिसियो पोचेटिनो के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने जताई आपत्ति फीफा के फैसले पर बेल्जियम फुटबॉल संघ (RBFA) ने नाराजगी व्यक्त की है। संघ ने कहा कि अमेरिका-बेल्जियम मुकाबले से ठीक पहले रेड कार्ड हटाए जाने का फैसला हैरान करने वाला है और वह अपने हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा। टेड क्रूज ने किया ट्रंप का समर्थन अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज ने भी ट्रंप के रुख का समर्थन किया। उन्होंने रेड कार्ड को "बेतुका फैसला" बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अमेरिकी टीम और उसके खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए सही कदम उठाया। खेल के साथ राजनीति पर भी छिड़ी बहस फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड को रद्द किए जाने के बाद विश्व कप के बीच खेल और राजनीति के संबंधों पर नई बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का मानना है कि इस फैसले ने रेफरी के निर्णयों की स्वतंत्रता और खेल प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया के जरिए एक गलत निर्णय को सुधारा गया है।