Japan News

5.8 magnitude earthquake strikes Aomori Prefecture in northern Japan
जापान में फिर आया 5.8 तीव्रता का भूकंप, आओमोरी प्रांत में महसूस हुए झटके; सुनामी का खतरा नहीं

Japan Earthquake: जापान में एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। शनिवार सुबह उत्तरी जापान के आओमोरी (Aomori) प्रांत के पास 5.8 तीव्रता का भूकंप आया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई और फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। आओमोरी के तट के पास आया भूकंप जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 11:48 बजे आया। इसका केंद्र आओमोरी के प्रशांत तट से लगभग 80 किलोमीटर की गहराई में था। जापानी 7-पॉइंट भूकंप तीव्रता पैमाने पर इसकी तीव्रता लेवल-4 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र 41.3 डिग्री उत्तर अक्षांश और 142.0 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था। सुनामी की चेतावनी जारी नहीं जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। कुछ दिन पहले आए भीषण भूकंप में 35 लोगों की हुई थी मौत इससे पहले कुमामोटो प्रांत में आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। अधिकारियों के मुताबिक, उस आपदा में 35 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन अभी भी कुछ मौतों के वास्तविक कारणों की जांच कर रहा है। प्रभावित इलाकों में अब भी मुश्किल हालात कुमामोटो के यात्सुशिरो और उकी शहरों में भूकंप के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हो सके हैं। कई प्रमुख सड़कों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में ट्रैफिक सिग्नल बंद हैं और ईंधन की कमी के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं। कई लोग ईंधन का इंतजार करते हुए अपनी गाड़ियों में रात बिताने को मजबूर हैं। राहत शिविरों में रह रहे सैकड़ों परिवार उकी शहर के ओगावा क्षेत्र में एक नागरिक केंद्र को अस्थायी राहत शिविर में बदला गया है, जहां 500 से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। राहत शिविरों में भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं। जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है और यहां लगातार भूकंपीय गतिविधियां दर्ज होती रहती हैं। फिलहाल नए भूकंप के बाद प्रशासन स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Rescue teams search through collapsed buildings after a powerful 7.1-magnitude earthquake in Japan's Kumamoto Prefecture
Japan Earthquake: जापान में 7.1 तीव्रता के भूकंप से 18 की मौत, मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

Japan Earthquake: जापान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कुमामोतो प्रांत में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 62 लोग घायल हुए हैं। घायलों में छह की हालत गंभीर बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी भूकंप के बाद सेना, दमकल विभाग और आपदा राहत दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। कई मकान पूरी तरह ढह गए हैं, जबकि कई इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने बताया कि अभी भी कुछ लोगों के लापता होने की आशंका है और उनकी तलाश जारी है। हजारों घरों में बिजली-पानी ठप भूकंप के कारण करीब 34,900 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है, जबकि लगभग 15,000 घरों में पानी की सप्लाई बंद है। हालात को देखते हुए 8,800 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जो फिलहाल 400 से ज्यादा राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रशासन प्रभावित इलाकों में भोजन, पानी और अन्य जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है। मॉल और फैक्ट्री हादसे में बढ़ा नुकसान कुमामोतो के काशिमा शहर स्थित एयॉन मॉल में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा, जहां चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं यत्सुशिरो में स्थित निप्पॉन पेपर इंडस्ट्रीज की फैक्ट्री की चिमनी गिरने से पांच कर्मचारियों की मौत हो गई। सात कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि चार अन्य के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। प्रधानमंत्री ने बचाव अभियान तेज करने के दिए निर्देश जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि कई लोग अब भी मलबे में फंसे हैं और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण है। उन्होंने राहत एवं बचाव एजेंसियों को अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। सरकार प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए लोगों से गर्म मौसम के बीच स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की। 2016 के भूकंप की यादें फिर हुईं ताजा भूकंप के बाद बुलेट ट्रेन सेवाओं को एहतियातन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है, जबकि आसो कुमामोतो हवाई अड्डे से सीमित उड़ान सेवाएं दोबारा शुरू कर दी गई हैं। गौरतलब है कि 2016 में भी कुमामोतो प्रांत विनाशकारी भूकंप की चपेट में आया था, जिसमें 50 से अधिक लोगों की जान गई थी। ताजा भूकंप ने एक बार फिर जापान की भूकंपीय संवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन की बड़ी चुनौती को सामने ला दिया है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Buildings in Japan withstand a strong earthquake due to advanced earthquake-resistant engineering and early warning systems
जापान में 7.1 तीव्रता का भूकंप, फिर भी क्यों नहीं हुई बड़ी तबाही? जानिए दुनिया के सबसे तैयार देश का सीक्रेट

Japan Earthquake Preparedness: जापान में 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बावजूद बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। भूकंप के झटकों से इमारतें हिलीं, कुछ समय के लिए ट्रेनों की सेवाएं प्रभावित हुईं और कई इलाकों में एहतियातन अलर्ट जारी किया गया, लेकिन हालात जल्द सामान्य हो गए। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी तीव्रता के भूकंप के बाद भी जापान हर बार बड़े नुकसान से कैसे बच जाता है। दरअसल, जापान दशकों से भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के साथ जीने की तैयारी करता आया है। यहां सिर्फ आधुनिक तकनीक ही नहीं, बल्कि मजबूत कानून, वैज्ञानिक योजना, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिकों की जागरूकता मिलकर आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देती है। भूकंप नहीं रोक सकता, लेकिन नुकसान जरूर कम कर देता है जापान जापान प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं। हर साल हजारों छोटे-बड़े झटके महसूस किए जाते हैं। इसी वजह से देश ने अपने भवन निर्माण नियमों को बेहद सख्त बनाया है। नई इमारतों में बेस आइसोलेशन, शॉक एब्जॉर्बर और फ्लेक्सिबल स्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे तेज भूकंप के दौरान भी इमारतें गिरने की बजाय केवल झूलती हैं और लोगों को बाहर निकलने का समय मिल जाता है। पुराने भवनों को भी समय-समय पर भूकंपरोधी मानकों के अनुसार मजबूत किया जाता है। कुछ सेकंड पहले मिल जाती है चेतावनी जापान की सबसे बड़ी ताकत उसका अर्ली अर्थक्वेक वार्निंग सिस्टम है। देशभर में लगे हजारों सेंसर जमीन की हलचल पर लगातार नजर रखते हैं। जैसे ही शुरुआती भूकंपीय तरंगें दर्ज होती हैं, कुछ ही सेकंड में मोबाइल फोन, टीवी, रेडियो और सार्वजनिक अलर्ट सिस्टम के जरिए लोगों तक चेतावनी पहुंच जाती है। इसी दौरान शिंकानसेन (बुलेट ट्रेन) स्वतः रुक जाती है, गैस सप्लाई बंद कर दी जाती है, परमाणु संयंत्र सुरक्षा मोड में चले जाते हैं और लिफ्टें नजदीकी मंजिल पर रुक जाती हैं। ये कुछ सेकंड हजारों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। तकनीक के साथ लोगों की तैयारी भी है सबसे बड़ी ताकत जापान में आपदा प्रबंधन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं माना जाता। स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों और आवासीय इलाकों में नियमित रूप से मॉक ड्रिल कराई जाती है। बच्चों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि भूकंप आने पर कैसे सुरक्षित रहना है। ज्यादातर परिवार अपने घरों में पहले से इमरजेंसी किट रखते हैं, जिसमें पीने का पानी, दवाइयां, टॉर्च, बैटरी, जरूरी दस्तावेज और अन्य आवश्यक सामान शामिल होता है। यही तैयारी आपदा के समय घबराहट को कम करती है और राहत कार्यों को आसान बनाती है। भारत के लिए क्या है सीख? भारत का बड़ा हिस्सा भी भूकंप संवेदनशील क्षेत्रों में आता है। हिमालयी राज्य, दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और पूर्वोत्तर में बड़े भूकंप का खतरा बना रहता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में इमारतें भूकंपरोधी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जापान की तरह सख्त बिल्डिंग कोड, अर्ली वार्निंग सिस्टम, नियमित मॉक ड्रिल और जनजागरूकता अभियान पर जोर दिया जाए तो भविष्य में भूकंप से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जापान की तैयारी एक नजर में दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप क्षेत्र 'रिंग ऑफ फायर' में स्थित देश। हर साल हजारों छोटे-बड़े भूकंप दर्ज होते हैं। दुनिया के सबसे सख्त भूकंपरोधी भवन निर्माण नियम। पूरे देश में आधुनिक अर्ली अर्थक्वेक वार्निंग सिस्टम सक्रिय। बुलेट ट्रेन, गैस सप्लाई और परमाणु संयंत्र स्वतः सुरक्षा मोड में चले जाते हैं। स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक संस्थानों में नियमित मॉक ड्रिल। अधिकांश परिवारों के पास पहले से तैयार इमरजेंसी किट उपलब्ध। जापान ने यह साबित कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन वैज्ञानिक योजना, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिकों की तैयारी के दम पर उनके असर को काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है। यही वजह है कि 7.1 तीव्रता जैसे शक्तिशाली भूकंप के बाद भी वहां बड़े पैमाने पर तबाही देखने को नहीं मिली।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Indian Prime Minister Narendra Modi welcomes Japanese Prime Minister Sanae Takaichi during her official visit to India, highlighting stronger strategic, economic and Indo-Pacific cooperation.
India-Japan Summit: जापान की प्रधानमंत्री भारत दौरे पर क्यों? क्या चीन को लेकर बन रही नई रणनीति

नई दिल्ली: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का 1 से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच यह दौरा भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, उन्नत तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता दोनों देशों के लिए साझा चिंता का विषय बनी हुई है। दो दशक में मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी भारत और जापान के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उसी वर्ष दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' का दर्जा दिया। वर्ष 2014 में इसे और आगे बढ़ाते हुए 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' घोषित किया गया। आज दोनों देशों के बीच 70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र, 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता और रक्षा, विदेश एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े नियमित संवाद स्थापित हो चुके हैं। रक्षा और तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग इस बार की वार्ता में दोनों देश रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति', SAGAR (Security and Growth for All in the Region) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव का मेल जापान के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' विजन के साथ देखा जा रहा है। आर्थिक साझेदारी भी होगी मजबूत जापान भारत का प्रमुख निवेशक और आधिकारिक विकास सहायता (ODA) देने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा सहयोग का प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। इसके अलावा जापान भारत में सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। क्या चीन सबसे बड़ा कारण है? विश्लेषकों का मानना है कि भारत-जापान सहयोग के पीछे चीन का बढ़ता प्रभाव एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारण है। जापान पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंतित रहा है। वहीं भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक देश के प्रभुत्व के पक्ष में नहीं है। इसी कारण दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं। हालांकि दोनों देशों का दृष्टिकोण पूरी तरह समान नहीं है। जापान अमेरिका का औपचारिक सहयोगी है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देता है। क्वाड को भी मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-जापान की बढ़ती साझेदारी क्वाड (Quad) को भी और मजबूत करेगी। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और वैकल्पिक आर्थिक ढांचे को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कुछ चुनौतियां भी मौजूद हालांकि मजबूत रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। कई बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में समय और लागत दोनों बढ़ी हैं। सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में दोनों देशों की प्राथमिकताएं पूरी तरह समान नहीं हैं। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन, सुरक्षित सप्लाई चेन, नई तकनीकों के विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। यही कारण है कि जापानी प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
People evacuate buildings after a strong earthquake strikes off Japan’s Iwate coast, shaking northern regions.
वेनेजुएला के बाद जापान में जोरदार भूकंप, 7.0 तीव्रता से कांपी धरती; सुनामी का खतरा नहीं

  टोक्यो: वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप के कुछ ही घंटों बाद जापान में भी धरती जोरदार झटकों से कांप उठी। गुरुवार सुबह उत्तरी जापान के इवाते प्रांत के तट के पास आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने कई इलाकों में दहशत फैला दी। भूकंप के झटके आओमोरी प्रांत के हाशिकामी शहर समेत आसपास के क्षेत्रों में सबसे अधिक महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि जापानी अधिकारियों ने भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं बताया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की भी कोई सूचना नहीं मिली है। टोक्यो तक महसूस हुए भूकंप के झटके स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी टोक्यो में भी हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप के बाद लोग कुछ समय के लिए घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। सरकारी प्रसारक एनएचके द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य यातायात चलता हुआ दिखाई दिया और सार्वजनिक सेवाएं भी सुचारू रूप से संचालित होती नजर आईं। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। भूकंप की तीव्रता को लेकर अलग-अलग आंकड़े भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.0 दर्ज की गई। वहीं जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने इसकी तीव्रता 6.9 बताई है। एजेंसी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र इवाते प्रांत के निकट समुद्र में था और इसकी गहराई लगभग 50 किलोमीटर थी। अपेक्षाकृत  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0