मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात को लेकर नए दावे सामने आए हैं। आंदोलन से जुड़े जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने कथित तौर पर भारत से मानवीय सहायता की अपील की है। भारत से मानवीय सहायता की मांग सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सरदार अमन खान कथित रूप से कहते दिखाई दे रहे हैं कि क्षेत्र में राशन और आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है तथा लोगों को मदद की जरूरत है। उन्होंने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (LoC) पर राहत के लिए व्यवस्था करने की अपील की। उनका यह भी दावा है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत आने का विकल्प मिलना चाहिए। आर्थिक नाकेबंदी का आरोप अमन खान का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, जिससे खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईदगाह मैदान में हुई सभा रावलाकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक सभा के दौरान अमन खान ने कथित तौर पर लोगों से पूछा कि क्या उन्हें नियंत्रण रेखा (LoC) की ओर बढ़ना चाहिए। वायरल वीडियो में भीड़ की ओर से समर्थन में नारे सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें किए गए सभी दावों का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। कई सप्ताह से जारी हैं प्रदर्शन PoK में पिछले महीने से विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन पर नागरिक अधिकारों के हनन, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और आर्थिक समस्याओं को लेकर आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय संगठनों का कहना है कि आंदोलन तब और तेज हुआ जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा कार्रवाई की गई। वहीं, पाकिस्तान प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जाती रही है। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और भारत से मदद की अपील संबंधी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें सत्यापित तथ्य के बजाय संबंधित पक्ष के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया जारी है। अंतिम यात्रा के तहत उनका पार्थिव शरीर ईरान से इराक ले जाया जाएगा, जहां शिया समुदाय के दो सबसे पवित्र शहर नजफ और कर्बला में धार्मिक श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद उनके पैतृक शहर मशहद में अंतिम संस्कार किए जाने की योजना है। यह यात्रा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ईरान और इराक के बीच 1980 से 1988 तक आठ वर्षों तक भीषण युद्ध हुआ था। कोम में उमड़ी श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ सोमवार देर रात ईरान के धार्मिक शहर कोम स्थित जमकरण मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सरकारी मीडिया के अनुसार, मंगलवार को भी वहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम जारी रहेगा। इससे पहले राजधानी तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। कई लोगों ने शोक जुलूस में अमेरिका विरोधी नारे लगाए। इराक क्यों ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर? रिपोर्टों के अनुसार, 8 जुलाई को खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक ले जाया जाएगा। वहां नजफ और कर्बला में शिया धर्मगुरु और श्रद्धालु उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देंगे। इन दोनों शहरों का शिया मुस्लिम समुदाय में अत्यंत धार्मिक महत्व है, इसलिए वहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 8 साल तक चला था ईरान-इराक युद्ध ईरान और इराक के बीच 1980 से 1988 तक लंबा और विनाशकारी युद्ध चला था। युद्ध की शुरुआत तब हुई जब इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने 1980 में ईरान पर हमला किया। माना जाता है कि 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति के प्रभाव के इराक के शिया बहुल क्षेत्रों तक फैलने की आशंका भी इस संघर्ष का एक प्रमुख कारण थी। इस युद्ध में दोनों देशों को भारी जन और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। मशहद में होगा अंतिम संस्कार इराक में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद खामेनेई का पार्थिव शरीर वापस ईरान लाया जाएगा। 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की योजना है। जुलूस के दौरान अमेरिका विरोधी प्रदर्शन अंतिम यात्रा के दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर के खिलाफ प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में पोस्टरों पर पत्थर फेंकते लोग दिखाई दिए। इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मनामा: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को बहरीन की राजधानी मनामा में बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा से मुलाकात कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं एवं संदेश सौंपा। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-बहरीन संबंधों को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब हाल के सप्ताहों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के दौरान बहरीन भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आया था। शाह हमद से मुलाकात, भारतीय समुदाय का जताया आभार विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा और युवराज एवं प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से मुलाकात कर खुशी हुई। उन्होंने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं और बहरीन में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने के लिए शाह का आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने कहा कि भारत, बहरीन के नेतृत्व द्वारा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को दिए जा रहे निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन को अत्यंत महत्व देता है। बहरीन के विदेश मंत्री से भी हुई अहम बैठक जयशंकर ने बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। खाड़ी देशों के दौरे पर हैं जयशंकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर 5 से 10 जुलाई तक खाड़ी क्षेत्र के चार देशों के दौरे पर हैं। इस यात्रा में कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और खाड़ी देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा, निवेश, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है। कतर में भी हुई थी अहम बैठक बहरीन पहुंचने से पहले जयशंकर ने कतर का दौरा किया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। क्यों अहम है यह दौरा? जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हालिया संघर्ष के दौरान बहरीन पर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले भी हुए थे। इसके अलावा कतर और ओमान अमेरिका-ईरान के बीच संभावित अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में भारत का खाड़ी देशों के साथ लगातार उच्चस्तरीय संवाद क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के हितों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे का कार्यक्रम खाड़ी देशों का दौरा पूरा करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क पहुंचेंगे, जहां वह 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद 14-15 जुलाई को वह ब्रसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेंगे।
इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने कहा है कि देश को मिलने वाले पानी के "वैध हिस्से" की रक्षा के लिए पाकिस्तान हर आवश्यक कदम उठाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर तनाव बना हुआ है। कोर कमांडर्स सम्मेलन में लिया गया फैसला पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर की अध्यक्षता में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में जल सुरक्षा समेत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि सरकार के निर्देशों और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पाकिस्तान अपने हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। एनएससी के पुराने फैसले का दोहराया गया जिक्र बैठक में 24 अप्रैल 2025 को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) के फैसले का भी उल्लेख किया गया। उस बैठक में पाकिस्तान ने कहा था कि यदि उसके हिस्से का पानी रोका गया या उसका प्रवाह बदला गया, तो इसे "युद्ध जैसी कार्रवाई" माना जाएगा। हालांकि, भारत की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं में 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय भी शामिल था। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती रही है। भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्थाएं प्रभावित होना स्वाभाविक है। अफगानिस्तान को लेकर भी जताई चिंता कोर कमांडर्स सम्मेलन में अफगानिस्तान की स्थिति पर भी चर्चा हुई। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि अफगान तालिबान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों का इस्तेमाल आतंकी संगठन पाकिस्तान में हमलों के लिए कर रहे हैं और इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। क्षेत्रीय तनाव बरकरार विश्लेषकों का मानना है कि सिंधु जल संधि और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव फिलहाल कम होने के संकेत नहीं हैं। दोनों देशों के बयानों से यह स्पष्ट है कि जल, सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में बने रह सकते हैं।
बीजिंग/वॉशिंगटन: चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बी (Nuclear Submarine) से बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के बाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। चीन ने इसे अपनी नियमित सैन्य अभ्यास गतिविधि का हिस्सा बताया है। परमाणु पनडुब्बी से हुआ मिसाइल परीक्षण चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नेवी ने स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे परमाणु पनडुब्बी से एक रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया। चीनी सेना का दावा है कि मिसाइल में डमी (बिना विस्फोटक) वारहेड लगाया गया था और उसने प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पर सफलतापूर्वक निशाना साधा। चीन का कहना है कि यह उसकी वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों का हिस्सा था और संबंधित देशों को इसकी पूर्व सूचना दे दी गई थी। अमेरिका ने जताई गंभीर चिंता अमेरिकी विदेश विभाग ने परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन के इस कदम पर उसकी करीबी नजर थी। अमेरिका ने कहा कि जब दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रयास कर रही है, तब चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि बीजिंग का बिना पर्याप्त पारदर्शिता के परमाणु क्षमताओं का विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी उठाए सवाल जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के मिसाइल परीक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां एशिया-प्रशांत की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती हैं। न्यूजीलैंड ने भी चीन से अधिक पारदर्शिता बरतने और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सैन्य कदमों पर स्पष्ट जानकारी साझा करने की अपील की है। हथियार नियंत्रण वार्ता की अपील अमेरिका ने चीन से परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने का आग्रह किया है। साथ ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की नियमित जानकारी साझा करने की व्यवस्था अपनाने की भी मांग की है। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने रक्षा दायित्वों का पालन करता रहेगा। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रणनीतिक मिसाइल परीक्षण अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकते हैं। दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। टाटा समूह ने नेतृत्व परिवर्तन और डिजिटल विस्तार की रणनीति के तहत नई पीढ़ी को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपने की दिशा में अहम कदम उठाया है। समूह की फैशन रिटेल कंपनी ट्रेंट की प्रमुख ब्रांड ‘वेस्टसाइड’ के ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग की कमान अब नोएल टाटा की बेटी माया टाटा संभालेंगी। हालांकि कंपनी की ओर से इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन इसे टाटा समूह की दीर्घकालिक उत्तराधिकार योजना और डिजिटल कारोबार को मजबूत करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। डिजिटल कारोबार को मिलेगी नई दिशा 37 वर्षीय माया टाटा ने अपने करियर की शुरुआत टाटा कैपिटल से की थी। इसके बाद उन्होंने टाटा डिजिटल में काम करते हुए ई-कॉमर्स, ऑनलाइन रिटेल, ग्राहक अधिग्रहण और डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालन का व्यापक अनुभव हासिल किया। टाटा नियो, बिगबास्केट, क्रोमा और टाटा 1एमजी जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने का अनुभव उन्हें वेस्टसाइड की ओमनीचैनल और ई-कॉमर्स रणनीति का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बनाता है। उनका मुख्य लक्ष्य वेस्टसाइड की ऑनलाइन मौजूदगी को मजबूत करना और ब्रांड का वैश्विक विस्तार करना होगा। नई पीढ़ी को मिल रही बड़ी जिम्मेदारियां नोएल टाटा वर्तमान में ट्रेंट के चेयरमैन हैं और नवंबर 2026 में इस पद से हटने की संभावना है। माना जा रहा है कि वे माया के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। वहीं उनके बेटे नेविल टाटा पहले से ट्रेंट के स्टार बाजार हाइपरमार्केट डिवीजन की कमान संभाल रहे हैं, जबकि बेटी लिआ टाटा इंडियन होटल्स कंपनी (ताज) में वाइस प्रेसिडेंट हैं। तीनों भाई-बहन टाटा ट्रस्ट्स से जुड़ी संस्थाओं के बोर्ड का भी हिस्सा हैं। वेस्टसाइड का तेजी से विस्तार ट्रेंट की कुल आय में लगभग 40 प्रतिशत योगदान वेस्टसाइड का है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का राजस्व करीब 19,700 करोड़ रुपये रहा। कंपनी हर साल लगभग 50 नए स्टोर खोलने की योजना पर काम कर रही है और उसके स्टोरों की संख्या बढ़कर 321 शहरों में 1,286 हो चुकी है। माया टाटा की नियुक्ति से संकेत मिलते हैं कि टाटा समूह आने वाले वर्षों में ई-कॉमर्स, डिजिटल इंटीग्रेशन और भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक पहचान दिलाने पर विशेष जोर देगा।
बीजिंग: चीन के पश्चिमी गांसू प्रांत में मंगलवार को हुए भीषण भूस्खलन में 33 लोग मलबे में दब गए। सरकारी मीडिया के अनुसार, राहत एवं बचाव दल अब तक 17 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रहे हैं, जबकि 16 लोगों की तलाश जारी है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और बचाव दलों को तत्काल मौके पर भेजा गया है। मलबा हटाने और लापता लोगों की खोज के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दिए राहत कार्य तेज करने के निर्देश चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जाए। उन्होंने प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने और राहत कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया। हुबेई में तूफान ने मचाई तबाही उधर, मध्य चीन के हुबेई प्रांत में सोमवार रात आए तेज तूफान और भारी बारिश ने व्यापक नुकसान पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 275 लोग घायल हुए हैं। एक व्यक्ति अब भी लापता बताया जा रहा है। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए, बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई और यातायात बाधित हो गया। 149 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार 149 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई। अगले 24 घंटों के दौरान कुछ इलाकों में 260 मिमी तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के कारण कई पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सुपर टाइफून 'बावी' को लेकर भी अलर्ट चीन के मौसम विभाग ने प्रशांत महासागर में सक्रिय सुपर टाइफून 'बावी' को लेकर भी हाई अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, यह शक्तिशाली तूफान 290 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली हवाओं के साथ ताइवान की दिशा में बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं, भारी वर्षा और ऊंची समुद्री लहरें उठने की आशंका है। लोगों से सतर्क रहने की अपील प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और संभावित आपदा को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। राहत एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बचाव दल तैनात किए जा रहे हैं।
जकार्ता/वॉशिंगटन: अमेरिका में पहले से धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। एक अंतरराष्ट्रीय खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि श्रीवास्तव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का विश्वास हासिल किया और रक्षा सौदों के नाम पर करीब 425 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी को अंजाम दिया। OCCRP और टेम्पो की रिपोर्ट में बड़ा दावा ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) और इंडोनेशियाई पत्रिका Tempo की संयुक्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित फर्जीवाड़ा वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुआ। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशियाई सेना को 36 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और आधुनिक सैन्य कमांड सिस्टम उपलब्ध कराने का दावा किया था। फर्जी कंपनियों के जरिए लिया गया कर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के एक कथित "गोपनीय सरकारी कार्यक्रम" का हवाला दिया और रक्षा परियोजनाओं के नाम पर करीब 425 करोड़ रुपये का कथित फर्जी कर्ज मंजूर कराया। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इसी धन का इस्तेमाल लॉस एंजिलिस में लगभग 208 करोड़ रुपये की कीमत वाला एक आलीशान बंगला खरीदने के लिए किया गया। राष्ट्रपति का भरोसा जीतने का आरोप रिपोर्ट के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का इतना विश्वास जीत लिया था कि वे उन्हें "मिस्टर G" कहकर संबोधित करते थे। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी ऐसी जानकारियों का इस्तेमाल किया, जो केवल करीबी लोगों को ही मालूम थीं। इनमें यह जानकारी भी शामिल थी कि प्रबोवो अपने घर में मकड़ी के जालों को प्रकृति का हिस्सा मानते हैं और उन्हें हटवाना पसंद नहीं करते। किए कई बड़े दावे रिपोर्ट के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने: वर्ष 2002 के बाली बम धमाकों के आरोपियों को पकड़वाने में भूमिका निभाई। राष्ट्रपति प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में मदद की। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इंडोनेशियाई सरकार का बयान इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत ने कहा कि जिन रक्षा परियोजनाओं पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम समझौते तक नहीं पहुंचीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी रक्षा सौदे को अंतिम मंजूरी नहीं मिली थी, इसलिए सरकार को कोई प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। जांच जारी यह मामला सामने आने के बाद गौरव श्रीवास्तव की गतिविधियां एक बार फिर जांच के दायरे में आ गई हैं। अमेरिकी और इंडोनेशियाई एजेंसियां रिपोर्ट में किए गए दावों की जांच कर रही हैं। फिलहाल इन आरोपों पर गौरव श्रीवास्तव की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दुबई: होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सोमवार को होर्मुज से गुजर रहे दो वाणिज्यिक जहाजों पर कम से कम दो मिसाइलें दागीं। हमले में दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के हताहत होने की तत्काल सूचना नहीं है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री हमलों को रोकने के लिए बना अस्थायी युद्धविराम समझौता समाप्त हुआ है। दो जहाज बने निशाना रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल हमले होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो कमर्शियल जहाजों पर किए गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार जहाजों को क्षति पहुंची है, लेकिन चालक दल सुरक्षित बताया जा रहा है। घटना के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। तेल टैंकर में लगी भीषण आग ब्रिटेन के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि मंगलवार सुबह ओमान के लीमाह तट के पास एक तेल टैंकर पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। हमला जहाज के बाईं ओर हुआ, जिसके बाद टैंकर में आग लग गई। उस समय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहा था। ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। ट्रंप के बयान के बाद बढ़ी चर्चा हमलों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए अस्थायी समझौते पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अमेरिका ने ईरान को "अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की छुट्टी" दी थी। ट्रंप का यह बयान ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार के संदर्भ में माना गया, जिनकी इस वर्ष अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मौत हुई थी। समझौते पर उठे सवाल हालिया घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में हमले रोकने के उद्देश्य से हुए समझौते की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर तनाव लगातार बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज स्ट्रेट होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि या हमले से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल संबंधित देशों की नौसेनाएं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और हमलों की विस्तृत जांच जारी है।
जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने हवाई अड्डे पर स्वयं मौजूद रहकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री के विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा घेरे में लेकर एयर एस्कॉर्ट भी प्रदान किया। यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने किया व्यक्तिगत स्वागत जकार्ता एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनसे मुलाकात की और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया। पीएम मोदी ने जताया आभार इंडोनेशिया पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि जकार्ता पहुंचकर उन्हें बेहद खुशी हुई और एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत से वह प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचाया था, जिसका लाभ दोनों देशों के नागरिकों को मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से— व्यापार एवं निवेश रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा डिजिटल अर्थव्यवस्था ऊर्जा सहयोग शिक्षा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रम्बानन मंदिर परिसर का करेंगे दौरा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी जोर देंगे। भारतीय समुदाय से भी करेंगे मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रवासी भारतीयों से मिलने को लेकर उत्साहित हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम का लिया आनंद हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की पारंपरिक कला और संस्कृति पर आधारित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया। कार्यक्रम के माध्यम से दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को प्रदर्शित किया गया। 6 से 8 जुलाई तक रहेगा दौरा प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2018 में उनकी पहली इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया था और अब उसी साझेदारी को आगे बढ़ाने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह यात्रा जनवरी 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत यात्रा के बाद दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय मुलाकात है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के भारत स्थित हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को नई मजबूती देगा। तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया जाएंगे पीएम मोदी एएनआई के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान मेलबर्न में भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' में भी शामिल होंगे। फिलिप ग्रीन ने बताया कि प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा होगा। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस फिलिप ग्रीन ने बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा कृषि एवं खाद्य क्षेत्र पर्यटन ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि दोनों देश इन क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी सहयोग और व्यापार को बढ़ाने के लिए नए रोडमैप पर काम कर रहे हैं। व्यापारिक संबंधों में तेज़ी हाई कमिश्नर के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत के कुल वैश्विक निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात करीब 200 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से मजबूत सहयोग है। कोयला, डीजल, एविएशन फ्यूल और एलएनजी जैसे ऊर्जा संसाधनों के व्यापार के अलावा अब स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन सप्लाई चेन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। रक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा फिलिप ग्रीन ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का अवसर होगा। व्यापक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा ऑस्ट्रेलियाई हाई कमिश्नर ने विश्वास जताया कि यह दौरा केवल रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के बीच संपर्क को भी नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पेप्सिको की सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ी कंपनियों में शामिल वरुण बेवरेजेज लिमिटेड ने पूर्वी अफ्रीका में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई VBL Industries (Kenya) Limited ने देवयानी फूड इंडस्ट्रीज़ (केन्या) के वैल्यू-ऐडेड डेयरी बेवरेज, जूस और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर कारोबार का 32 मिलियन डॉलर (करीब ₹305 करोड़) में अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह सौदा 1 अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। पूर्वी अफ्रीका में बढ़ेगी कंपनी की पकड़ कंपनी के अनुसार, इस अधिग्रहण से केन्या और पूरे पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्र में उसकी उत्पादन क्षमता और वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। अधिग्रहित कारोबार में 52 एकड़ में फैली आधुनिक विनिर्माण इकाई भी शामिल है, जहां डेयरी पेय, जूस और पैकेज्ड पानी का उत्पादन होता है। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का भी होगा विस्तार वरुण बेवरेजेज ने कहा कि इस अधिग्रहण के बाद कंपनी केन्या में अपने कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक पोर्टफोलियो का भी विस्तार करेगी। इससे अफ्रीकी बाजार में कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को नई गति मिलने की उम्मीद है।
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। ट्रंप ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को विवादित तरीके से दिखाया गया है। तस्वीर में अरबी शब्द "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन से पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ओबामा की AI तस्वीर पर विवाद ट्रंप द्वारा साझा की गई AI-जनरेटेड तस्वीर में बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान की सीढ़ियों पर मुस्कुराते और हाथ हिलाते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में विमान पर "Yes We Can", "Obama", "BLM" (Black Lives Matter) जैसे शब्दों के साथ अरबी भाषा में "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा हुआ दिखाई देता है। इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने ट्रंप पर नस्लीय और सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की AI तस्वीरें राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। पहले भी विवादों में रह चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओबामा को लेकर विवादित पोस्ट साझा किया हो। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर AI और एडिटेड तस्वीरों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं। ट्रंप पर पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर झूठे दावे फैलाने और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी कई पोस्टों की दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की थी। मेलोनी पर भी शेयर किया मीम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया। इस पोस्ट में हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन की तस्वीर के साथ लिखा था— "Restraining Order Needed" (रोक लगाने वाले आदेश की जरूरत है)। हालांकि पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे मेलोनी पर तंज के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इटली की प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने वाला पोस्ट बताया। G7 बैठक के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया था। अब नए मीम के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। AI पोस्ट को लेकर बढ़ रही चिंता हाल के महीनों में ट्रंप लगातार AI से तैयार तस्वीरों और मीम्स का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक इन्हें व्यंग्य बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट भ्रामक जानकारी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ट्रंप के ताजा पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, हालांकि इस पर व्हाइट हाउस या बराक ओबामा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कीव: तुर्की में मंगलवार से शुरू होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया। सोमवार तड़के हुए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई इलाकों में आग लगने और भारी नुकसान की खबर है। यह एक सप्ताह से भी कम समय में कीव पर दूसरा बड़ा हमला है। ऐसे समय में यह हमला हुआ है जब NATO समिट में रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें शामिल होने वाले हैं। बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से किया गया हमला यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने राजधानी कीव पर एक साथ बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन दागे। तड़के सुबह शहर में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि हमले से कुछ देर पहले पूरे शहर में एयर रेड सायरन बजने लगे थे। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के कम से कम दो जिलों में मिसाइलों के मलबे गिरने और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। जेलेंस्की ने पहले ही दी थी चेतावनी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक दिन पहले ही बड़े रूसी हमले की आशंका जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि रूस एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस NATO शिखर सम्मेलन से पहले अधिक से अधिक तबाही मचाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति का हिस्सा है। पिछले सप्ताह भी हुआ था घातक हमला यह हमला पिछले गुरुवार को कीव पर हुए बड़े रूसी हमले के कुछ ही दिनों बाद हुआ है। उस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी और इसे युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी पर सबसे घातक हमलों में से एक माना गया था। लगातार हो रहे हमलों ने राजधानी की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। NATO समिट में युद्ध रहेगा मुख्य मुद्दा तुर्की में मंगलवार से शुरू हो रहे NATO शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख एजेंडा रहेगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता यूक्रेन को सैन्य सहायता, यूरोप की सुरक्षा और रूस पर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस बीच रूस पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर रहा है। वहीं यूक्रेन भी रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बढ़ा रहा है। ट्रंप-पुतिन की हालिया बातचीत भी चर्चा में NATO समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 4 जुलाई को लगभग 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी। हालांकि, ताजा रूसी हमले के बाद युद्ध को लेकर तनाव और बढ़ गया है तथा NATO देशों की आगे की रणनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। जून महीने में कमजोर रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 11 जुलाई तक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके साथ ही तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी तट तक बारिश का असर आईएमडी के मुताबिक, अगले तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जून में मॉनसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने से बारिश में कमी आई थी, लेकिन अब इसके दोबारा सक्रिय होने से बारिश का दौर तेज होगा। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में भारी बारिश के कारण अलकनंदा नदी चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गई है। मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत में भी भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़, पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, कोंकण-गोवा, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ में 6 और 7 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। कम समय में अत्यधिक बारिश से बाढ़ और लंबे समय तक बारिश की कमी से सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
लंदन: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में रविवार को हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों के साथ-साथ बलोच और पश्तून समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की सेना पर आम नागरिकों के अधिकारों के दमन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के आरोप लगाए। लंदन कश्मीर मिलियन मार्च में उमड़ी भीड़ जानकारी के अनुसार, लंदन में आयोजित "कश्मीर मिलियन मार्च" संसद परिसर (Parliament Square) से शुरू होकर पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला गया। आयोजकों का दावा है कि मार्च में करीब 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई और गिरफ्तार राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आजादी के समर्थन में नारे लगाए और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख शौकत नवाज मीर समेत अन्य नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया। बलोच और पश्तून समुदाय ने भी जताई एकजुटता इस मार्च में बलोच और पश्तून समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना उनके क्षेत्रों में भी नागरिकों के अधिकारों का हनन कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा—तीनों क्षेत्रों में आम लोगों को दमन और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान सेना पर गंभीर आरोप प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक राजनीतिक कार्यकर्ता महमूद कश्मीरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने टट्टापानी, सेंहसा और कोटली जैसे इलाकों में आम लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में रहने वाले कश्मीरी अब इन घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि पाकिस्तान को अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करना चाहिए और क्षेत्र के लोगों को उनके अधिकार देने चाहिए। गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक नेताओं की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि सभी गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए। इसके साथ ही प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हिरासत में लिए गए युवाओं के शव उनके परिजनों को सौंपने और गिरफ्तार नागरिकों की रिहाई की भी मांग की। PoK में जारी है विरोध प्रदर्शन लंदन में हुआ यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है और इसके बाद अनेक राजनीतिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिसके विरोध में विदेशों में रहने वाले कश्मीरी, बलोच और पश्तून समुदाय भी अब खुलकर आवाज उठा रहे हैं.
तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा का सबसे अहम चरण सोमवार से शुरू हो गया है। राजधानी तेहरान में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जुटने की संभावना जताई गई है। प्रशासन का अनुमान है कि अंतिम यात्रा में एक करोड़ से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दी गई है, ताकि 1989 में देश के पहले सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के दौरान हुई भगदड़ जैसी घटना दोबारा न हो। सुबह से शुरू हुई अंतिम यात्रा दो दिनों तक तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में अंतिम दर्शन के लिए रखे गए अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को सोमवार सुबह करीब 6 बजे अंतिम यात्रा के लिए रवाना किया गया। आयोजकों के अनुसार यह यात्रा पूरे शहर में 10 से 12 घंटे तक चलेगी। पिछले दो दिनों से हजारों लोग मस्जिद पहुंचकर खामेनेई और उनके परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। सोमवार को सबसे बड़ी भीड़ उमड़ने की संभावना के चलते पूरे तेहरान में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। 1989 जैसी त्रासदी दोहराने से बचने की तैयारी ईरानी प्रशासन इस बार विशेष सतर्कता बरत रहा है। वर्ष 1989 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में करीब एक करोड़ लोग पहुंचे थे। उस दौरान भीड़ बेकाबू हो गई थी, जिसमें 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इतना ही नहीं, भीड़ शव वाहन तक पहुंच गई थी, जिससे कफन फट गया और पार्थिव शरीर जमीन पर गिर गया था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी थी। कंक्रीट बैरियर और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था इस बार ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने अंतिम दर्शन स्थल पर ताबूत और श्रद्धालुओं के बीच बड़े-बड़े कंक्रीट बैरियर लगाए थे। अंतिम यात्रा के दौरान भी सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं और लोगों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। कई शहरों में होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा के बाद मंगलवार को धार्मिक शहर क़ोम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके बाद बुधवार को इराक के पवित्र शहर नजफ़ और कर्बला में भी विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। अंतिम चरण में गुरुवार को अली खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मोजतबा खामेनेई अब भी सार्वजनिक रूप से नहीं आए रविवार को अली खामेनेई के तीन बेटे पहली बार अंतिम संस्कार कार्यक्रम में दिखाई दिए, लेकिन उनके उत्तराधिकारी बनाए गए मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी को हुए हवाई हमलों में मोजतबा भी घायल हुए थे। हालांकि उनकी चोटों की गंभीरता को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। युद्ध के बाद एकजुटता दिखाने का प्रयास अली खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ईरान की राष्ट्रीय एकजुटता और राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ हालिया संघर्ष के बाद ईरानी नेतृत्व इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि देश अब भी एकजुट और मजबूत है।
Benjamin Netanyahu on India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र ताकतवर सहयोगी है। 'भारत से मिल रहा है जबरदस्त समर्थन' फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के कई मित्र देश हैं और भारत उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के अलावा हमारे और भी दोस्त हैं। भारत भी उनमें से एक है। 1.4 अरब आबादी वाले इस देश से हमें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।" नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया, विशेष रूप से फेसबुक पर भारतीयों का व्यापक समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत से बड़ी संख्या में समर्थक जुड़े हुए हैं। भारत-इजरायल संबंधों का किया जिक्र इजरायली प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी अच्छे संबंध हैं। इसी वर्ष नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना "पर्सनल फ्रेंड" बताया था और भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति (Global Power) कहा था। जेडी वेंस ने क्या कहा था? नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इस समय ऐसे नेता हैं, जो पूरी मजबूती से इजरायल के साथ खड़े हैं। वेंस ने कहा था कि यदि वह इजरायल की सरकार में होते, तो अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में इजरायल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अधिकांश हथियार अमेरिका में बने हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं के पैसे से उठाया गया है। पीएम मोदी के इजरायल दौरे का भी किया जिक्र रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में इजरायल का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजरायल के साथ खड़ा है। यह बयान ऐसे समय आया था, जब कुछ दिनों बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग और सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं। नेतन्याहू का ताजा बयान दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों की एक और पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है।
Super Typhoon Bavi: अमेरिका के प्रशांत क्षेत्र की ओर बढ़ रहा सुपर टाइफून 'बावी' (Bavi) बेहद खतरनाक रूप ले चुका है। तूफान को लेकर गुआम (Guam) और उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह (Northern Mariana Islands) में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह तूफान सीधे रोटा (Rota) द्वीप से टकराता है, तो कई सप्ताह या महीनों तक बिजली व्यवस्था ठप हो सकती है। 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाएं जॉइंट टाइफून वार्निंग सेंटर (JTWC) के अनुसार, सुपर टाइफून बावी में लगातार 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, जबकि हवा के झोंकों की गति 333 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही है। इसकी ताकत कैटेगरी-5 हरिकेन के बराबर बताई जा रही है, जिसे अत्यंत विनाशकारी माना जाता है। राष्ट्रीय मौसम सेवा ने जारी की गंभीर चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) ने कहा है कि सोमवार सुबह तूफान के गुजरने के दौरान उसके आईवॉल (Eyewall) वाले इलाकों में अत्यधिक तेज हवाएं, समुद्र में ऊंची लहरें और खतरनाक तूफानी ज्वार (Storm Surge) देखने को मिल सकते हैं। एजेंसी ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। गुआम और उत्तरी मारियाना में दिखने लगा असर रविवार से ही गुआम और उत्तरी मारियाना द्वीपों में तेज हवाओं और भारी बारिश का असर दिखाई देने लगा। संभावित खतरे को देखते हुए लोगों ने अपने घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सुरक्षित करने की तैयारी शुरू कर दी है। करीब 2.1 लाख आबादी वाले इन द्वीपों पर सड़कें लगभग खाली नजर आईं। पुलिस लगातार गश्त कर लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रही है। रोटा द्वीप के पास से गुजरेगा तूफान मौसम विभाग के अनुसार, सुपर टाइफून बावी सोमवार सुबह स्थानीय समयानुसार करीब 8 बजे उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह के सबसे दक्षिणी द्वीप रोटा के बेहद करीब से गुजर सकता है। इस दौरान भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरों का गंभीर खतरा बना रहेगा। लंबे समय तक बिजली गुल रहने की आशंका विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तूफान सीधे रोटा द्वीप से टकराता है तो बिजली आपूर्ति को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में कई इलाकों में हफ्तों या महीनों तक बिजली बाधित रहने की संभावना है। इस आशंका को देखते हुए लोग भोजन, पानी, ईंधन और अन्य जरूरी सामान का भंडारण कर रहे हैं। सुरक्षा तैयारियों में जुटे लोग तूफान की चेतावनी के बाद स्थानीय निवासी अपने घरों और दुकानों की खिड़कियों पर प्लाईवुड लगा रहे हैं ताकि तेज हवाओं से नुकसान कम हो सके। प्रशासन ने राहत और बचाव दलों को भी अलर्ट पर रखा है। हालांकि, प्रशासन की लगातार चेतावनियों के बावजूद गुआम के तालोफोफो बे (Talofofo Bay) में कुछ सर्फर ऊंची लहरों का आनंद लेते भी दिखाई दिए, जिसे अधिकारियों ने बेहद जोखिम भरा कदम बताया है। प्रशासन की अपील स्थानीय प्रशासन और मौसम एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे आधिकारिक निर्देशों का पालन करें, समुद्र तटों से दूर रहें और तूफान के पूरी तरह गुजरने तक सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। अधिकारियों का कहना है कि अगले 24 घंटे हालात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन राजधानी तेहरान में लाखों लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरे समारोह के दौरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ तीखे नारे लगे और शोकसभा प्रतिरोध तथा राष्ट्रीय एकजुटता के प्रदर्शन में बदलती नजर आई। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिवालय ने बताया कि अंतिम नमाज के दौरान मौजूद लोगों ने अमेरिका और इजरायल को खामेनेई की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए "दुश्मनों से प्रतिशोध" और "शहीद नेता के खून का बदला" जैसे नारे लगाए। तेहरान की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब रविवार को अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों के लिए सार्वजनिक अंतिम नमाज अदा की गई। इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला और उसके आसपास के इलाकों में लाखों लोगों की भीड़ जमा हुई। शनिवार से ही खामेनेई का पार्थिव शरीर आम लोगों के अंतिम दर्शन और आधिकारिक श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था। ईरान के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हुई थी। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया। हालांकि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और बातचीत आगे बढ़ाने के लिए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) पर सहमति बनी थी, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने दिया एकजुटता का संदेश सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अपने संदेश में कहा कि ईरानी जनता अपने दिवंगत नेता को विदाई देते हुए उनके आदर्शों और सिद्धांतों पर आगे बढ़ने का संकल्प ले रही है। संदेश में कहा गया कि, "पिछले कुछ दिनों से ईरान को देखिए, यही वह देश है जिसे कुछ ही दिनों में हराने का दावा किया गया था।" परिषद ने इसे राष्ट्रीय एकता, धैर्य और प्रतिरोध की भावना का प्रतीक बताया। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई समारोह से रहे दूर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों और इजरायल से मिली कथित धमकियों के चलते वह तेहरान में चल रहे छह दिवसीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं। संसद अध्यक्ष बोले- देश नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि पूरे देश के लोग अपने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए एकजुट हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का संकेत है कि ईरान की जनता अपने नेतृत्व और राष्ट्रीय आदर्शों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि देशभर में लोगों ने एक स्वर में अपने नेता को श्रद्धांजलि दी और उन्हें शहीद के रूप में याद किया। फिलहाल अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम जारी हैं और 9 जुलाई को खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
नई दिल्ली: लाल सागर (Red Sea) में यमन के तट के पास रविवार को एक मालवाहक जहाज (Cargo Ship) पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। इस घटना की पुष्टि ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने की है। फिलहाल हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। यमन के होदेइदा तट के पास हुआ हमला ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, हमला यमन के तटीय शहर होदेइदा से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम में हुआ। होदेइदा पर वर्तमान में ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों का नियंत्रण है। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के चालक दल ने अज्ञात हथियारबंद हमलावरों द्वारा निशाना बनाए जाने की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को दी। जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर दोबारा हमले करने की चेतावनी दी थी। फिलहाल इस घटना को लेकर हूती संगठन की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पहले भी निशाने पर रहे हैं जहाज गाजा युद्ध के दौरान हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले कई वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर का रास्ता छोड़कर अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबी दूरी तय करनी शुरू कर दी थी, जिससे वैश्विक व्यापार और शिपिंग लागत पर असर पड़ा। सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ीं लाल सागर और अदन की खाड़ी में हाल के दिनों में सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। 1 जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह बलहाफ से करीब 76 समुद्री मील (140 किलोमीटर) दक्षिण में एक संदिग्ध समुद्री डकैती की घटना सामने आई थी। उस दौरान चार हथियारबंद हमलावरों ने एक छोटी नाव के जरिए एक जहाज के ब्रिज पर हमला किया था, जिससे मामूली नुकसान हुआ था। जांच जारी यूकेएमटीओ और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ताजा हमले के पीछे कौन-सा संगठन या समूह शामिल था। लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।