पूजा-पाठ में भगवान को फल अर्पित करना सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या बीज वाले फल भगवान को चढ़ाए जा सकते हैं या नहीं। खासकर आम, तरबूज, लीची या अन्य बड़े बीज वाले फलों को लेकर लोगों में अलग-अलग धारणाएं देखने को मिलती हैं। आइए जानते हैं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विषय में क्या माना जाता है और भोग लगाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए। क्या भगवान को बीज वाले फल चढ़ा सकते हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान को बीज वाले फल अर्पित करना पूरी तरह स्वीकार्य माना जाता है। फल को सात्विक और पवित्र भोग माना गया है तथा मौसमी फलों का भोग विशेष शुभ माना जाता है। हालांकि, यदि फल में बड़ा बीज हो, जैसे आम, तरबूज या अन्य ऐसे फल, तो भोग लगाने से पहले उसका बीज निकाल देना उचित माना जाता है। मान्यता है कि भगवान को वही स्वरूप में भोग अर्पित करना चाहिए, जैसा भोजन सामान्य रूप से ग्रहण किया जाता है। भोग लगाने से पहले इन नियमों का रखें ध्यान भगवान को फल अर्पित करते समय केवल फल का चयन ही नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता और प्रस्तुत करने का तरीका भी महत्वपूर्ण माना गया है। भोग में शामिल किए जाने वाले फलों को पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। पूजा से काफी पहले फल काटकर न रखें। भोग से ठीक पहले ही फल धोकर या काटकर अर्पित करें। यदि फल बड़ा है तो उसे स्वच्छ चाकू से काटकर भगवान के सामने रखें। भोग में संभव हो तो तुलसी दल भी शामिल करें, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। भोग लगाते समय मन शांत रखें और पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान का स्मरण करें। श्रद्धा को सबसे अधिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान के लिए सबसे महत्वपूर्ण भक्त की सच्ची भावना और श्रद्धा होती है। भोग कितना बड़ा या महंगा है, इससे अधिक महत्व उसे अर्पित करने के भाव का माना गया है। इसलिए पूजा के दौरान अहंकार छोड़कर पूर्ण विश्वास और भक्ति के साथ भगवान को भोग अर्पित करना चाहिए। बड़े बीज वाले फलों के लिए क्या करें? यदि किसी फल में बड़ा और कठोर बीज हो, तो उसे निकालकर फल भगवान को अर्पित करना बेहतर माना जाता है। वहीं छोटे बीज वाले फलों को सामान्य रूप से भी चढ़ाया जा सकता है। उद्देश्य यह माना जाता है कि भगवान को वही भोजन प्रेमपूर्वक अर्पित किया जाए, जिसे आसानी से ग्रहण किया जा सके। ध्यान रखें धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं में विभिन्न क्षेत्रों और संप्रदायों के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। ऐसे में यदि आपके परिवार या गुरु द्वारा बताए गए विशेष पूजा-विधान हैं, तो उनका पालन करना अधिक उचित माना जाता है। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा, पवित्रता और सच्ची आस्था ही मानी जाती है।
नई दिल्ली: भारत और पोलैंड के रिश्ते नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। भारत दौरे पर आए पोलैंड के विदेश मंत्रालय के सचिव व्लादिस्लाव तेओफिल बार्तोशेव्स्की ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति की भी सराहना की और कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर लगातार मजबूत भूमिका निभा रहा है। अक्टूबर में भारत आएंगे पोलैंड के प्रधानमंत्री पोलैंड के विदेश मंत्रालय के सचिव ने बताया कि पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क अक्टूबर में भारत की यात्रा करेंगे। इस दौरे की तैयारियों को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग बार्तोशेव्स्की ने कहा कि भारत और पोलैंड रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पोलैंड पहले ही भारत में ड्रोन निर्माण शुरू कर चुका है। अब दोनों देश संयुक्त रक्षा उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करता है और भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए तैयार है। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते से बढ़ेगा कारोबार पोलैंड के अधिकारी ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत और पोलैंड के बीच करीब 6 अरब यूरो का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसे आने वाले वर्षों में और बढ़ाने की बड़ी संभावना है। भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना बार्तोशेव्स्की ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने उल्लेखनीय आर्थिक और तकनीकी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का भारत का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन देश उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत की खाद्यान्न उत्पादन क्षमता, तकनीकी विकास और आर्थिक सुधारों की भी प्रशंसा की। वैश्विक मुद्दों पर भारत के रुख का समर्थन पोलैंड के अधिकारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम का विरोध किया और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर भारत के संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण की सराहना की। रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि पोलैंड की भी आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है। इन क्षेत्रों में भी बढ़ेगा सहयोग पोलैंड ने भारत के साथ निम्न क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है- रक्षा और संयुक्त सैन्य उत्पादन ऊर्जा और हरित ऊर्जा स्वच्छ जल प्रबंधन अंतरिक्ष और सैटेलाइट तकनीक ड्रोन निर्माण तकनीकी नवाचार व्यापार और निवेश दोनों देशों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में और अधिक मजबूत होगी।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तेजी से मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों, रणनीतिक साझेदारी और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी। भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर हुई विस्तृत चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत जनसंपर्क और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार, शिक्षा, रक्षा, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होगी। रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, तकनीकी विकास और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई दिशा मिलेगी। 'मेलबर्न मीट्स मोदी' बना मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का सबसे चर्चित कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम को लेकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रवासी भारतीयों को देंगे विशेष संदेश प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन में विकसित भारत के विजन, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, प्रवासी भारतीयों के योगदान और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के भविष्य पर अपने विचार रखेंगे। माना जा रहा है कि उनका संबोधन दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इससे व्यापार, निवेश, ग्रीन एनर्जी, शिक्षा, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच नए अवसर खुलने की संभावना है। भारत और ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती दे सकती है.
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। रक्षा साझेदारी को मिलेगा नया आयाम शिखर वार्ता के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की है। इसके तहत रक्षा संबंधों को और व्यावहारिक बनाया जाएगा तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। समझौते के तहत नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा मामलों पर रणनीतिक परामर्श और दोनों सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी (साझा संचालन क्षमता) को मजबूत करने पर सहमति बनी है। परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ेगा सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है। दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन के विकास पर मिलकर काम करेंगे। दोनों नेताओं ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन भविष्य की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ होंगे। समुद्री सुरक्षा और साइबर क्षेत्र पर भी जोर बैठक में हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंथनी अल्बनीज ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में नई साझेदारियों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद, सहयोग और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाकर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता को नई दिशा दी जा सकती है।
हाल ही में आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया— "Reverse Ageing With Your Breath!"। इसके बाद सुदर्शन क्रिया (Sudarshan Kriya) एक बार फिर चर्चा में आ गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उम्र को वास्तव में पीछे नहीं ले जाती, लेकिन तनाव कम करके स्वस्थ जीवन और बेहतर उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) में सहायक हो सकती है। क्या है सुदर्शन क्रिया? सुदर्शन क्रिया एक विशेष लयबद्ध श्वास (Rhythmic Breathing) तकनीक है, जिसे श्री श्री रविशंकर ने वर्ष 1981 में विकसित किया था। इस अभ्यास में धीमी, मध्यम और तेज गति से सांस लेने की निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस तकनीक को प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा सिखाया जाता है और इसका उद्देश्य शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करना माना जाता है। सांस और भावनाओं का क्या है संबंध? श्री श्री रविशंकर के अनुसार, हर भावना का संबंध सांस लेने के तरीके से होता है। तनाव, चिंता और गुस्से की स्थिति में सांस तेज और छोटी हो जाती है, जबकि शांत मन की अवस्था में सांस स्वतः गहरी और धीमी होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर माना जाता है कि यदि सांसों की गति को नियंत्रित किया जाए, तो मानसिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तनाव का उम्र बढ़ने से क्या संबंध है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला तनाव (Chronic Stress) केवल मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लगातार तनाव रहने से— नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है। शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है। उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ सकता है। हृदय और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। शरीर की जैविक उम्र (Biological Ageing) पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में तनाव कम करने वाली तकनीकें शरीर को बेहतर तरीके से रिकवर करने में मदद कर सकती हैं। शोध क्या कहते हैं? अब तक हुए कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सुदर्शन क्रिया से: तनाव और चिंता कम हो सकती है। मूड बेहतर हो सकता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। भावनात्मक संतुलन मजबूत हो सकता है। समग्र मानसिक स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके दीर्घकालिक प्रभावों को पूरी तरह समझने के लिए बड़े स्तर पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। क्या सुदर्शन क्रिया वास्तव में उम्र कम कर सकती है? विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि सुदर्शन क्रिया या कोई भी ब्रीदिंग तकनीक वास्तविक (Chronological) उम्र को कम या उल्टा कर सकती है। लेकिन नियमित श्वास अभ्यास तनाव कम करने, मानसिक शांति बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मददगार हो सकता है। यही कारण है कि इसे स्वस्थ उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) का एक सहायक अभ्यास माना जा रहा है। बेहतर उम्रदराज़ी के लिए क्या जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए केवल ब्रीदिंग एक्सरसाइज ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ इन बातों का पालन भी जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक भोजन नियमित व्यायाम पर्याप्त और अच्छी नींद तनाव का प्रभावी प्रबंधन सकारात्मक सामाजिक संबंध नियमित स्वास्थ्य जांच सुदर्शन क्रिया इन आदतों के साथ मिलकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक भूमिका निभा सकती है।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के तहत ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंच गए हैं, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने एयरपोर्ट पर उनका अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगे अहम मुद्दों पर मंथन मेलबर्न में प्रधानमंत्री मोदी भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, निवेश, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच कई नए समझौतों और सहयोगी परियोजनाओं पर भी सहमति बनने की संभावना है। 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम रहेगा खास आकर्षण दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय समुदाय के लिए आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए भारत की वैश्विक भूमिका, भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी और दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों पर अपने विचार साझा करेंगे। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा और कौशल विकास कृषि एवं खाद्य सुरक्षा पर्यटन ग्रीन एनर्जी और सप्लाई चेन इन क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और नई परियोजनाओं के जरिए दोनों देश आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी। स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी नई पहल की उम्मीद है। रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत भारत और ऑस्ट्रेलिया पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से करीब आए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और आपसी रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई दिशा विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊर्जा देगा। व्यापार, निवेश, शिक्षा, ग्रीन एनर्जी और रक्षा सहयोग में बढ़ती साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।
जकार्ता: भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल भुगतान, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति Prabowo Subianto के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2018 में शुरू हुई भारत-इंडोनेशिया की व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नए दौर में प्रवेश कर रही है और दोनों देश रक्षा, अर्थव्यवस्था तथा तकनीक जैसे क्षेत्रों में मिलकर आगे बढ़ेंगे। ब्रह्मोस मिसाइल पर बनी सहमति दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई मजबूती देते हुए इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली उपलब्ध कराने पर सहमति बनाई है। हालांकि, मिसाइलों की संख्या और डील से जुड़े अन्य विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसके अलावा रक्षा उत्पादन, सैन्य आदान-प्रदान, रक्षा उद्योग सहयोग और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी है। महत्वपूर्ण खनिज और स्टील सेक्टर में निवेश भारत और इंडोनेशिया ने महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए संयुक्त निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश इस्पात, बिलेट और दुर्लभ स्थायी चुंबकों (रेयर अर्थ मैग्नेट) के निर्माण में सहयोग करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए यह साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। UPI और इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली होगी आपस में जुड़ी बैठक में भारत के डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI को इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जोड़ने पर भी सहमति बनी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा तथा यात्रियों और कारोबारियों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान होगी। सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास पर सहमति भारत और इंडोनेशिया ने रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास पर भी सहमति जताई। मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह बंदरगाह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के समुद्री सहयोग और रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करेगा। वैश्विक मुद्दों पर भी हुई चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने फलस्तीन मुद्दे पर भारत की दो-राष्ट्र समाधान की नीति और स्थायी शांति के समर्थन को भी दोहराया। साझेदारी का नया अध्याय बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध अब नए और मजबूत दौर में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा।
जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने हवाई अड्डे पर स्वयं मौजूद रहकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री के विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा घेरे में लेकर एयर एस्कॉर्ट भी प्रदान किया। यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने किया व्यक्तिगत स्वागत जकार्ता एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनसे मुलाकात की और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया। पीएम मोदी ने जताया आभार इंडोनेशिया पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि जकार्ता पहुंचकर उन्हें बेहद खुशी हुई और एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत से वह प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचाया था, जिसका लाभ दोनों देशों के नागरिकों को मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से— व्यापार एवं निवेश रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा डिजिटल अर्थव्यवस्था ऊर्जा सहयोग शिक्षा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रम्बानन मंदिर परिसर का करेंगे दौरा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी जोर देंगे। भारतीय समुदाय से भी करेंगे मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रवासी भारतीयों से मिलने को लेकर उत्साहित हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम का लिया आनंद हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की पारंपरिक कला और संस्कृति पर आधारित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया। कार्यक्रम के माध्यम से दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को प्रदर्शित किया गया। 6 से 8 जुलाई तक रहेगा दौरा प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2018 में उनकी पहली इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया था और अब उसी साझेदारी को आगे बढ़ाने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह यात्रा जनवरी 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत यात्रा के बाद दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय मुलाकात है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के भारत स्थित हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को नई मजबूती देगा। तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया जाएंगे पीएम मोदी एएनआई के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान मेलबर्न में भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' में भी शामिल होंगे। फिलिप ग्रीन ने बताया कि प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा होगा। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस फिलिप ग्रीन ने बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा कृषि एवं खाद्य क्षेत्र पर्यटन ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि दोनों देश इन क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी सहयोग और व्यापार को बढ़ाने के लिए नए रोडमैप पर काम कर रहे हैं। व्यापारिक संबंधों में तेज़ी हाई कमिश्नर के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत के कुल वैश्विक निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात करीब 200 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से मजबूत सहयोग है। कोयला, डीजल, एविएशन फ्यूल और एलएनजी जैसे ऊर्जा संसाधनों के व्यापार के अलावा अब स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन सप्लाई चेन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। रक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा फिलिप ग्रीन ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का अवसर होगा। व्यापक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा ऑस्ट्रेलियाई हाई कमिश्नर ने विश्वास जताया कि यह दौरा केवल रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के बीच संपर्क को भी नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पेप्सिको की सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ी कंपनियों में शामिल वरुण बेवरेजेज लिमिटेड ने पूर्वी अफ्रीका में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई VBL Industries (Kenya) Limited ने देवयानी फूड इंडस्ट्रीज़ (केन्या) के वैल्यू-ऐडेड डेयरी बेवरेज, जूस और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर कारोबार का 32 मिलियन डॉलर (करीब ₹305 करोड़) में अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह सौदा 1 अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। पूर्वी अफ्रीका में बढ़ेगी कंपनी की पकड़ कंपनी के अनुसार, इस अधिग्रहण से केन्या और पूरे पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्र में उसकी उत्पादन क्षमता और वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। अधिग्रहित कारोबार में 52 एकड़ में फैली आधुनिक विनिर्माण इकाई भी शामिल है, जहां डेयरी पेय, जूस और पैकेज्ड पानी का उत्पादन होता है। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का भी होगा विस्तार वरुण बेवरेजेज ने कहा कि इस अधिग्रहण के बाद कंपनी केन्या में अपने कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक पोर्टफोलियो का भी विस्तार करेगी। इससे अफ्रीकी बाजार में कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को नई गति मिलने की उम्मीद है।
Benjamin Netanyahu on India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र ताकतवर सहयोगी है। 'भारत से मिल रहा है जबरदस्त समर्थन' फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के कई मित्र देश हैं और भारत उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के अलावा हमारे और भी दोस्त हैं। भारत भी उनमें से एक है। 1.4 अरब आबादी वाले इस देश से हमें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।" नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया, विशेष रूप से फेसबुक पर भारतीयों का व्यापक समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत से बड़ी संख्या में समर्थक जुड़े हुए हैं। भारत-इजरायल संबंधों का किया जिक्र इजरायली प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी अच्छे संबंध हैं। इसी वर्ष नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना "पर्सनल फ्रेंड" बताया था और भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति (Global Power) कहा था। जेडी वेंस ने क्या कहा था? नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इस समय ऐसे नेता हैं, जो पूरी मजबूती से इजरायल के साथ खड़े हैं। वेंस ने कहा था कि यदि वह इजरायल की सरकार में होते, तो अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में इजरायल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अधिकांश हथियार अमेरिका में बने हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं के पैसे से उठाया गया है। पीएम मोदी के इजरायल दौरे का भी किया जिक्र रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में इजरायल का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजरायल के साथ खड़ा है। यह बयान ऐसे समय आया था, जब कुछ दिनों बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग और सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं। नेतन्याहू का ताजा बयान दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों की एक और पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर इंडोनेशिया रवाना हो गए। इस दौरे के दौरान वह इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है। इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ के ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम के संभावित रक्षा समझौते को माना जा रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रम्बानन हिंदू मंदिर का भी दौरा करेंगे। ब्रह्मोस मिसाइल सौदे पर रहेगी नजर सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की बैठक में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की खरीद को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यदि यह समझौता होता है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी देश बन जाएगा। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात को नई मजबूती देने के साथ इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा क्षमता को भी बढ़ाएगा। ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के डीआरडीओ (DRDO) और रूस की एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा किया गया है। इसे दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल किया जाता है। रणनीतिक सहयोग पर होगी चर्चा द्विपक्षीय बैठक में दोनों देश कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे, जिनमें शामिल हैं— रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा व्यापार एवं निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था कनेक्टिविटी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी बैठक के दौरान कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है। मोदी का तीसरा इंडोनेशिया दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले मई 2018 और सितंबर 2023 में इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं। 2018 की यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने अपने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया था। उस समय रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समेत 15 से अधिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी। वहीं 2023 में प्रधानमंत्री मोदी जकार्ता में आयोजित आसियान-भारत और ईस्ट एशिया समिट में शामिल हुए थे। साबंग पोर्ट पर भी रहेगा फोकस इस यात्रा में इंडोनेशिया के साबंग पोर्ट को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के निकट स्थित यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत और इंडोनेशिया पहले ही साबंग पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और नौसैनिक सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जता चुके हैं। प्रम्बानन मंदिर का करेंगे दर्शन प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान मध्य जावा स्थित प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे। यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है और भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है। करीब 240 मंदिरों वाले इस परिसर में भगवान शिव का मंदिर सबसे ऊंचा और प्रमुख है। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। हालांकि इंडोनेशिया दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है, फिर भी वहां की सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू और बौद्ध सभ्यताओं का गहरा प्रभाव आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
नई दिल्ली: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का 1 से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच यह दौरा भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, उन्नत तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता दोनों देशों के लिए साझा चिंता का विषय बनी हुई है। दो दशक में मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी भारत और जापान के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उसी वर्ष दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' का दर्जा दिया। वर्ष 2014 में इसे और आगे बढ़ाते हुए 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' घोषित किया गया। आज दोनों देशों के बीच 70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र, 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता और रक्षा, विदेश एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े नियमित संवाद स्थापित हो चुके हैं। रक्षा और तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग इस बार की वार्ता में दोनों देश रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति', SAGAR (Security and Growth for All in the Region) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव का मेल जापान के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' विजन के साथ देखा जा रहा है। आर्थिक साझेदारी भी होगी मजबूत जापान भारत का प्रमुख निवेशक और आधिकारिक विकास सहायता (ODA) देने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा सहयोग का प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। इसके अलावा जापान भारत में सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। क्या चीन सबसे बड़ा कारण है? विश्लेषकों का मानना है कि भारत-जापान सहयोग के पीछे चीन का बढ़ता प्रभाव एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारण है। जापान पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंतित रहा है। वहीं भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक देश के प्रभुत्व के पक्ष में नहीं है। इसी कारण दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं। हालांकि दोनों देशों का दृष्टिकोण पूरी तरह समान नहीं है। जापान अमेरिका का औपचारिक सहयोगी है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देता है। क्वाड को भी मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-जापान की बढ़ती साझेदारी क्वाड (Quad) को भी और मजबूत करेगी। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और वैकल्पिक आर्थिक ढांचे को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कुछ चुनौतियां भी मौजूद हालांकि मजबूत रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। कई बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में समय और लागत दोनों बढ़ी हैं। सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में दोनों देशों की प्राथमिकताएं पूरी तरह समान नहीं हैं। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन, सुरक्षित सप्लाई चेन, नई तकनीकों के विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। यही कारण है कि जापानी प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली: Sanae Takaichi बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचीं। नई दिल्ली के पालम टेक्निकल एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने भारत सरकार की ओर से उनका स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से जापानी प्रधानमंत्री का स्वागत करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने इस यात्रा को भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगी शामिल अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री तकाइची 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। बैठक में दोनों नेता व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा करेंगे। साथ ही दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की रूपरेखा पर भी विचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली भारत यात्रा भारत पहुंचने के बाद जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है और व्यक्तिगत रूप से भी वह पहली बार भारत आई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक में वैश्विक और द्विपक्षीय महत्व के कई मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी तथा दोनों देशों के सहयोग को नई दिशा देने पर जोर रहेगा। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति भारत और जापान के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त एवं समावेशी समुद्री व्यवस्था और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नई दिल्ली/विक्टोरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, कृषि और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 19 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद इन समझौतों की घोषणा की गई। इनका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग, यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली, एक्जिम बैंक के माध्यम से व्यापक ऋण सुविधा, और सेशेल्स के नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से जुड़े समझौतों पर सहमति बनी है। सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा को मिलेगा भारत का सहयोग भारत ने सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। भारत सेशेल्स को एक तेज गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel) उपहार में देगा। इसके अलावा सेशेल्स रक्षा बल को 10 यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल श्रेणी की नौकाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। भारत ने यह भी घोषणा की कि सेशेल्स कोस्ट गार्ड के पोत पीएस जोरोस्टर के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही सेशेल्स के लिए उपलब्ध कराए गए डोर्नियर विमान को आधुनिक ग्लास कॉकपिट प्रणाली से अपग्रेड किया जाएगा। विकास परियोजनाओं को भी मिला बढ़ावा भारत ने विकास सहयोग के तहत सेशेल्स को छह एंबुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट भी सौंपा। इसके साथ ही भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक स्मारक लोगो जारी किया गया। दोनों देशों ने व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा केंद्र की आधारशिला का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन भी किया। सेशेल्स में लागू होगी UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली डिजिटल सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत सेशेल्स में भारत की यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को लागू किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। जन औषधि योजना के तहत मिलेंगी सस्ती भारतीय दवाएं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुए समझौते के तहत जन औषधि योजना के माध्यम से सेशेल्स के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती भारतीय दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों को लेकर भी समझौता हुआ है। शिक्षा, कृषि और अंतरिक्ष सहयोग का होगा विस्तार भारत और सेशेल्स ने विदेश सेवा प्रशिक्षण, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता तथा बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उसके शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण को नई गति मिलेगी। 50 वर्षों की दोस्ती को मिली नई दिशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन 19 समझौतों के बाद भारत और सेशेल्स के संबंध केवल विकास सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और डिजिटल कनेक्टिविटी के नए दौर की शुरुआत भी करेंगे।
ब्रातिस्लावा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक स्लोवाकिया यात्रा के दौरान भारत और स्लोवाकिया ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और शिक्षा समेत 11 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली स्लोवाकिया यात्रा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों ने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' (Comprehensive Partnership) के स्तर तक ले जाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारे संबंध साझा मूल्यों, साझा प्राथमिकताओं और साझा भविष्य पर आधारित हैं। यह व्यापक साझेदारी दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा करेगी और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगी।" उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल, रेलवे, उन्नत विनिर्माण और हरित प्रौद्योगिकी ऐसे क्षेत्र हैं, जहां दोनों देशों के बीच अपार संभावनाएं मौजूद हैं। ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए परमाणु ऊर्जा और भूतापीय (Geothermal) ऊर्जा सहित विभिन्न ऊर्जा स्रोतों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को भविष्य की साझेदारी का अहम स्तंभ बताया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और रॉबर्ट फिको ने भारत-यूरोपीय संघ (India-EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द लागू करने की दिशा में काम करने पर भी सहमति जताई। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति मिलेगी। रक्षा सहयोग को मिला नया आयाम भारत और स्लोवाकिया ने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' (Letter of Intent) को अंतिम रूप दिया। दोनों पक्षों ने माना कि रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक तालमेल का प्रतीक है। भारत और स्लोवाकिया के बीच हुए 11 बड़े समझौते 1. श्रम प्रवासन (Labour Migration) कुशल पेशेवरों की सुरक्षित, व्यवस्थित और कानूनी आवाजाही को आसान बनाने के लिए समझौता। 2. रक्षा सहयोग (Defence Cooperation) रक्षा उद्योगों और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर सहमति। 3. डिजिटल प्रौद्योगिकी (Digital Technology) डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सहयोग और तकनीकी विकास में साझेदारी। 4. क्वांटम कम्युनिकेशन (Quantum Communication) भविष्य की उन्नत संचार तकनीकों के विकास के लिए संयुक्त सहयोग। 5. उच्च शिक्षा (Higher Education) विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच आदान-प्रदान और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा। 6. परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए परमाणु क्षेत्र में सहयोग। 7. भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) हरित ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास में साझेदारी। 8. ऑटोमोबाइल क्षेत्र (Automobile Sector) वाहन निर्माण, नई तकनीकों और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना। 9. रेलवे (Railways) रेलवे बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और तकनीकी सहयोग पर सहमति। 10. उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing) आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों, औद्योगिक नवाचार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहयोग। 11. हरित प्रौद्योगिकी (Green Technology) सतत विकास और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयास। संबंधों को मिलेगी नई दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह ऐतिहासिक यात्रा भारत और स्लोवाकिया के संबंधों को नई ऊंचाई दे सकती है। व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी नया आयाम प्रदान करेगा
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।