Narendra Modi

Coal and mineral mining operations in Jharkhand amid concerns over the Mines Bill and state revenue
Mines Bill से झारखंड को कितना नुकसान? ₹7,110 करोड़ के राजस्व पर क्यों मंडरा रहा खतरा, समझें पूरा मामला

रांची: झारखंड की खनिज संपदा एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद का बड़ा मुद्दा बन गयी है. संसद से पारित Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पुनर्विचार की मांग की है. राज्य सरकार को आशंका है कि नये प्रावधानों से झारखंड के खनिज आधारित राजस्व और राज्यों के वित्तीय अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन से होने वाली आय की बड़ी भूमिका है. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वर्ष 2024-25 में खनन राजस्व राज्य के अपने गैर-कर राजस्व का 84.9 प्रतिशत था. 2025-26 में भी इसकी हिस्सेदारी करीब 84.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. ₹7,110 करोड़ का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में Mineral Bearing Land Cess से राज्य को करीब ₹7,110 करोड़ सालाना मिलने की उम्मीद का उल्लेख किया है. राज्य सरकार का कहना है कि खनिज संपदा से मिलने वाली आय का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में किया जाता है. इसमें सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाएं शामिल हैं. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ₹7,110 करोड़ को सीधे-सीधे इस बिल से होने वाला निश्चित नुकसान नहीं कहा जा सकता. यह वह अनुमानित राजस्व है, जिसे राज्य Mineral Bearing Land Cess के माध्यम से जुटाने की उम्मीद कर रहा है. वास्तविक वित्तीय प्रभाव बिल के प्रावधानों के लागू होने और आगे बनने वाले नियमों पर निर्भर करेगा. Bill में ऐसा क्या है, जिस पर झारखंड को आपत्ति है? राज्य सरकार की मुख्य चिंता mineral rights और mineral-bearing land पर कर, cess या अन्य लेवी लगाने के अधिकार को लेकर है. नये प्रावधानों के तहत राज्यों की ओर से लगायी जाने वाली ऐसी लेवी पर कुछ सीमाएं और केंद्रीय स्तर पर तय शर्तें लागू हो सकती हैं. इससे झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों की अतिरिक्त राजस्व जुटाने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका जतायी जा रही है. राज्य सरकार का तर्क है कि जिस राज्य में खनिजों का बड़े पैमाने पर दोहन होता है, उसे उसके संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर पर्याप्त अधिकार भी मिलना चाहिए. झारखंड के लिए खनन राजस्व इतना अहम क्यों? झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है. राज्य में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, तांबा, यूरेनियम समेत कई महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार हैं. खनन गतिविधियों से राज्य को राजस्व मिलता है, लेकिन इसके साथ कई सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियां भी जुड़ी हैं. खनन प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापन, प्रदूषण, भूमि पर दबाव और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत जैसी समस्याएं सामने आती हैं. राज्य सरकार का कहना है कि इन क्षेत्रों के विकास और प्रभावित लोगों के लिए योजनाएं चलाने में खनिज आधारित राजस्व की महत्वपूर्ण भूमिका है. केंद्र सरकार का क्या तर्क है? केंद्र सरकार की ओर से इस तरह के प्रावधानों के पीछे मुख्य तर्क यह है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर, cess और लेवी होने से खनन क्षेत्र में लागत और कारोबारी अनिश्चितता बढ़ सकती है. एक समान और अधिक पूर्वानुमेय व्यवस्था से खनन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और कारोबार को आसान बनाने का तर्क दिया जा रहा है. यानी विवाद केवल राजस्व का नहीं है. असली सवाल यह है कि खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व पर राज्यों का कितना अधिकार हो और केंद्र की भूमिका कितनी हो. ₹7,110 करोड़ पर पूरा मामला क्यों नहीं टिका है? इस विवाद को केवल ₹7,110 करोड़ के नुकसान के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता. यह रकम राज्य सरकार द्वारा अनुमानित सालाना राजस्व से जुड़ी है. बिल के लागू होने के बाद वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नये प्रावधान किस तरह लागू होते हैं, राज्यों की मौजूदा लेवी पर उनका क्या असर पड़ता है और संबंधित नियमों में क्या व्यवस्था की जाती है. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि झारखंड को निश्चित रूप से ₹7,110 करोड़ का नुकसान होगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा? मुख्यमंत्री का तर्क है कि झारखंड दशकों से देश के औद्योगिक विकास और ऊर्जा जरूरतों में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है. इसके बदले राज्य को खनन का सामाजिक और पर्यावरणीय बोझ भी उठाना पड़ता है. राज्य सरकार का कहना है कि खनिज आधारित राजस्व का इस्तेमाल इन्हीं चुनौतियों से निपटने और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में किया जाता है. ऐसे में राज्य की राजस्व जुटाने की क्षमता कम होने पर इसका असर सीधे विकास योजनाओं पर पड़ सकता है. अब आगे क्या होगा? संसद से विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद झारखंड सरकार ने केंद्र के सामने अपनी आपत्ति दर्ज करायी है और इस पर पुनर्विचार की मांग की है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि नये प्रावधान लागू होने के बाद राज्यों की मौजूदा और भविष्य की खनिज आधारित लेवी पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है.  

kalpana अगस्त 17, 2026 0
Shehzad Poonawalla announces resignation from BJP and national spokesperson post citing personal and financial reasons
शहजाद पूनावाला ने बीजेपी से दिया इस्तीफा, बोले- ‘पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहा हूं, विचार और व्यक्ति नहीं’

नई दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा स्वीकार करने की अपील की है। पूनावाला के इस्तीफे के बाद बीजेपी की आंतरिक राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूनावाला के मुताबिक, उन्होंने इससे पहले 30 जुलाई 2026 को आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश की थी। उस समय पार्टी ने उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार नहीं किया था और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था। लंबी चर्चा के बाद लिया अंतिम फैसला अपने ताजा पत्र में शहजाद पूनावाला ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श और गंभीर मंथन के बाद उन्होंने अपने फैसले पर कायम रहने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं और जिन लोगों के बारे में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को जानकारी दी थी, उसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का अंतिम फैसला किया। इस तरह पूनावाला अब बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद के साथ-साथ सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से भी अलग होने की प्रक्रिया में हैं। पीएम मोदी समेत वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार इस्तीफे के पत्र में पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के प्रति उनके मन में किसी तरह की नाराजगी या आहत भावना नहीं है। पिछले पांच वर्षों में पार्टी की ओर से मिले मंच और अवसरों के लिए उन्होंने नेतृत्व का धन्यवाद किया। निजी क्षेत्र में जाने की तैयारी पूनावाला ने अपने इस्तीफे की वजह मुख्य रूप से आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को बताया है। उन्होंने कहा कि अब वह निजी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी से संगठनात्मक रूप से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के दृष्टिकोण तथा कार्यों का समर्थन करते रहेंगे। ‘व्यवस्था छोड़ रहा हूं, विचार और व्यक्ति नहीं’ शहजाद पूनावाला के इस्तीफे की सबसे अहम बात उनका यह बयान रहा कि वह “पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहे हैं, लेकिन विचार और व्यक्ति नहीं।” इस बयान से साफ है कि पूनावाला ने संगठन से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की विचारधारा के प्रति अपना समर्थन बरकरार रखने की बात कही है। अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व उनके इस्तीफे को किस तरह स्वीकार करता है और आगे पार्टी में उनकी भूमिका क्या रहती है।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Partition Horrors Remembrance Day
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पीएम मोदी ने पीड़ितों के साहस और संघर्ष को किया याद

नई दिल्ली, एजेंसियां। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1947 के भारत विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन परिवारों के साहस, संघर्ष और दृढ़ता को याद किया, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी में अपने घर, संपत्ति और अपनों को खोने के बावजूद नए सिरे से जीवन शुरू किया।   पीएम मोदी ने पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि   प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को असहनीय पीड़ा और विस्थापन का सामना करना पड़ा। उन्होंने उन सभी लोगों को नमन किया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया।   साहस और संघर्ष को किया याद   पीएम मोदी ने विभाजन से प्रभावित लोगों के धैर्य और संघर्ष को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उस कठिन दौर में चुनौतियों को अवसर में बदला और आगे बढ़कर देश के निर्माण में योगदान दिया, उनका योगदान हमेशा याद रखा जाना चाहिए।   विभाजन की पीड़ा से सीख लेने पर जोर   हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने, हिंसा झेलने और विस्थापित होने वाले लोगों की पीड़ा को याद करना है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को इतिहास से सीख लेकर देश में एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने से जोड़ने का संदेश दिया।   लाखों परिवार हुए थे विस्थापित   1947 के विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर आबादी का विस्थापन हुआ था। लाखों परिवारों को अपने पुश्तैनी घर छोड़कर नए स्थानों पर जाना पड़ा। स्मृति दिवस पर केंद्र सरकार के कई मंत्रियों ने भी विभाजन पीड़ितों के साहस और बलिदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

anjali kumari अगस्त 14, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi, Amit Shah and Rahul Gandhi attend Lok Sabha proceedings as Vande Mataram is sung
लोकसभा में पहली बार राष्ट्रगान जैसा पूर्ण सम्मान, ‘वंदे मातरम’ से हुई कार्यवाही की शुरुआत; पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी रहे मौजूद

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही बेहद संक्षिप्त रही। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गान हुआ और इसके तुरंत बाद लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई प्रमुख नेता सदन में मौजूद थे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी सदन में उपस्थित रहे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में पहुंचते ही ‘वंदे मातरम’ के गान की घोषणा की। राष्ट्रगीत के बाद सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाने के बजाय अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के आखिरी दिन नहीं हुआ लंबा कामकाज मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन में सामान्य विधायी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। कार्यवाही की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से हुई और इसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया। इससे पहले पूरे मानसून सत्र के दौरान भी संसद में कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली थी। कई मौकों पर हंगामे और विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मानसून सत्र में लोकसभा का वास्तविक कामकाज करीब 15 घंटे ही हो सका। सदन में मौजूद रहे प्रधानमंत्री और प्रमुख नेता सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी सदन में मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से राहुल गांधी समेत कई सांसद सदन में पहुंचे। ऐसे में अंतिम दिन ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गान के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया। ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व ‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गीत है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत में ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है। संसद में ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गान राष्ट्रीय महत्व की परंपरा से जुड़ा हुआ है। मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन की शुरुआत इसी राष्ट्रगीत से होना राजनीतिक और संसदीय दृष्टि से भी चर्चा का विषय बना। हंगामे की आशंका के बीच सीधे स्थगित हुई कार्यवाही सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी रही थी। ऐसे में अंतिम दिन भी हंगामे की संभावना के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को लंबा खींचने के बजाय शुरुआत में ही स्थगित करने का निर्णय लिया। इस तरह मानसून सत्र का समापन ‘वंदे मातरम’ के गान के साथ हुआ। अब संसद का अगला सत्र कब बुलाया जाएगा, इस पर सरकार की ओर से आगे कार्यक्रम तय किया जाएगा। लेकिन मानसून सत्र का कम कामकाज, लगातार राजनीतिक गतिरोध और अंतिम दिन की संक्षिप्त कार्यवाही आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का मुद्दा बनी रह सकती है।  

surbhi अगस्त 13, 2026 0
पीएम नरेंद्र मोदी से भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात
बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने पीएम मोदी से की मुलाकात, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और आपसी मुद्दों पर संवाद बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।   बांग्लादेश यात्रा के बाद पीएम मोदी से मुलाकात     दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश में अपनी हालिया बैठकों के बाद नई दिल्ली लौटकर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने बांग्लादेश में हुई बातचीत और वहां के राजनीतिक नेतृत्व से मिले संदेशों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।     द्विपक्षीय संबंधों पर हुआ विचार-विमर्श     मुलाकात के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों, दोनों देशों के बीच सहयोग और आगे की कूटनीतिक दिशा पर चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों पड़ोसी देशों के संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में हैं।     बांग्लादेश के नए नेतृत्व से बातचीत के बाद अहम मुलाकात     दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात से पहले बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से भी बातचीत की थी। इसके बाद मोदी से हुई बैठक को भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   भारत के लिए बांग्लादेश के साथ व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे अहम हैं। ऐसे में उच्चायुक्त की यह बैठक आगे की कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया
पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का किया विमोचन, ‘Triumph of the Indian Republic’ में दर्ज है जीवन का सफर

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को विज्ञान भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” का विमोचन किया। कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रेस सूचना ब्यूरो ने इसकी पुष्टि की है।   कोविंद के संघर्ष और सार्वजनिक जीवन की कहानी   यह आत्मकथा रामनाथ कोविंद के व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक पृष्ठभूमि और सार्वजनिक जीवन की यात्रा को सामने रखती है। पुस्तक में उनके संघर्षों और विभिन्न संवैधानिक पदों पर काम करने के अनुभवों को शामिल किया गया है। कोविंद ने 2017 से 2022 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की थी।   पीएम मोदी ने बताया प्रेरणादायक अनुभवों का दस्तावेज   पुस्तक के विमोचन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रामनाथ कोविंद के साथ अपने लंबे जुड़ाव और उनके अनुभवों को याद किया। उन्होंने युवाओं से कोविंद की जीवन यात्रा और आत्मकथा को पढ़ने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे जीवन अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।   लोकतांत्रिक मूल्यों और संघर्षों पर फोकस   आत्मकथा का शीर्षक ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ है। पुस्तक में कोविंद के जीवन के संघर्षों के साथ भारतीय लोकतंत्र और सार्वजनिक सेवा से जुड़े उनके अनुभवों को भी जगह दी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने पुस्तक को देश के लोकतांत्रिक अनुभवों को समझने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
Peter Navarro says Donald Trump and Narendra Modi can resolve tariff tensions amid threats of higher US duties on India.
100% टैरिफ की धमकी के बीच भारत को अमेरिका से राहत के संकेत, नवारो बोले- ट्रंप और मोदी मिलकर सुलझा लेंगे मामला

नई दिल्ली: रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों और भारी टैरिफ के बीच भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर एक अहम बयान सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका के बीच व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने भरोसा जताया है कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझा सकते हैं। नवारो का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से संबंधित विधेयक को अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्तावित कानून में भारत और चीन समेत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। ट्रंप-मोदी के रिश्तों पर नवारो को भरोसा भारत पर संभावित टैरिफ को लेकर पूछे गए सवाल पर पीटर नवारो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं और दोनों नेता इस मुद्दे को मिलकर सुलझा लेंगे। नवारो ने इस मामले में खुद हस्तक्षेप करने से भी दूरी बनाई। उनके बयान को भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक तनाव के बावजूद शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर बातचीत की गुंजाइश के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। रूस से तेल खरीदने पर क्यों बढ़ा टैरिफ का खतरा? अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए उसकी ऊर्जा अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रस्तावित प्रतिबंध कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का रास्ता तैयार किया गया है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। ऐसे में प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई का सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि रूस से मिलने वाला कच्चा तेल उसकी ऊर्जा जरूरतों और आयात लागत के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं अमेरिका रूस के साथ कारोबार करने वाले देशों पर दबाव बढ़ाकर मॉस्को की ऊर्जा आय को प्रभावित करना चाहता है। 100% टैरिफ की चर्चा, लेकिन अभी लागू नहीं हुआ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी सीनेट से विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। विधेयक को कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और अन्य कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसलिए फिलहाल इसे संभावित टैरिफ का खतरा कहना ज्यादा उचित है, न कि लागू हो चुका शुल्क। भारत और चीन समेत कई देश निशाने पर प्रस्तावित व्यवस्था का असर केवल भारत तक सीमित नहीं होगा। रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में चीन भी शामिल है। यदि अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान आगे बढ़ता है, तो इससे अमेरिका और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर व्यापक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी प्रशासन प्रस्तावित कानून को किस तरह आगे बढ़ाता है और भारत के साथ बातचीत में क्या विकल्प निकलते हैं। आगे क्या होगा? फिलहाल भारत के सामने तीन महत्वपूर्ण मोर्चे हैं—रूस से ऊर्जा आयात, अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध और संभावित अतिरिक्त टैरिफ से घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर। पीटर नवारो का बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते और टैरिफ को लेकर बातचीत पहले से ही महत्वपूर्ण दौर में है। इसलिए ट्रंप और मोदी के बीच सीधी बातचीत आने वाले समय में इस विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंध कानून अंतिम रूप में किस तरह लागू होगा और भारत पर इसका वास्तविक प्रभाव कितना होगा। इसलिए फिलहाल 100 प्रतिशत टैरिफ को संभावित जोखिम के रूप में देखना चाहिए, न कि अंतिम फैसला।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
सुप्रिया सुले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात
सुप्रिया सुले की PM मोदी से मुलाकात, NCP-SP सांसदों ने महाराष्ट्र के मुद्दे उठाए; परिसीमन पर भी चर्चा के संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात 10 अगस्त को संसद परिसर में प्रधानमंत्री के कार्यालय में हुई। प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे।   किन मुद्दों को लेकर हुई मुलाकात     NCP-SP सांसदों ने महाराष्ट्र से जुड़े कई विषयों पर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। इनमें प्रमुख रूप से महाराष्ट्र के सामाजिक सुधारकों महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, अन्नाभाऊ साठे और तुकडोजी महाराज को भारत रत्न देने की मांग शामिल रही।   सांसदों ने इन महान व्यक्तित्वों के सामाजिक सुधार, शिक्षा और वंचित वर्गों के उत्थान में योगदान का उल्लेख करते हुए केंद्र से उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने की मांग की।   परिसीमन को लेकर भी बढ़ी राजनीतिक चर्चा     सुप्रिया सुले की PM मोदी से मुलाकात ऐसे समय हुई है जब संसद में संभावित परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। इसी वजह से NCP-SP सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार को प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के लिए संसद में जरूरी समर्थन जुटाने की जरूरत होगी। हालांकि NCP-SP ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रस्तावित विधेयक पर उसका रुख विधेयक की वास्तविक सामग्री सामने आने के बाद तय होगा।   NCP-SP ने NDA में जाने की अटकलों को किया खारिज     प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में NCP-SP के NDA के करीब आने की अटकलें भी शुरू हुईं। हालांकि पार्टी ने ऐसी अटकलों को खारिज किया है।   NCP-SP अभी भी विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा है और पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात को गठबंधन बदलने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी के अनुसार महाराष्ट्र और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से मिलना एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है।   बेटी की शादी के रिसेप्शन में भी हुई PM मोदी से मुलाकात     इस मुलाकात से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के विवाह समारोह के रिसेप्शन में भी पहुंचे थे। वहां प्रधानमंत्री मोदी और NCP-SP प्रमुख शरद पवार की मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं।   लगातार हुई इन मुलाकातों के कारण महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि फिलहाल NCP-SP ने BJP या NDA के साथ किसी नए गठबंधन की घोषणा नहीं की है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
नायब सिंह सैनी का BJP और अकाली दल गठबंधन पर बयान
अकाली दल संग गठबंधन से इनकार, नायब सिंह सैनी बोले- BJP का गठबंधन पंजाब की जनता से

चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलों पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विराम लगा दिया है। सैनी ने स्पष्ट कहा कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में BJP और अकाली दल के बीच गठबंधन की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि BJP का गठबंधन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं, बल्कि पंजाब की जनता के साथ है।   मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद बढ़ी थी चर्चा   BJP और अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चा उस समय तेज हुई जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में दोनों पुराने सहयोगियों के फिर साथ आने की अटकलें लगने लगी थीं। दोनों दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में उनका गठबंधन टूट गया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़े।   नायब सैनी ने साफ किया BJP का रुख   गठबंधन की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में नायब सिंह सैनी ने कहा कि BJP का गठबंधन पंजाब की जनता के साथ है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी फिलहाल पंजाब में अपने दम पर राजनीतिक आधार मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। सैनी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा और राज्य में BJP को मजबूत विकल्प के तौर पर पेश किया।   2027 विधानसभा चुनाव से पहले गरमाई पंजाब की सियासत   पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। BJP और SAD के संभावित गठबंधन को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा चल रही थी। वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी इस संभावित राजनीतिक समीकरण पर नजर बनाए हुए हैं। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी BJP-SAD गठबंधन की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि दोनों दल साथ आएं या किसी अन्य राजनीतिक ताकत के साथ जाएं, इससे उन्हें पंजाब की जनता का समर्थन हासिल नहीं होगा।   क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल?   फिलहाल BJP की ओर से नायब सैनी का बयान दोबारा गठबंधन की संभावनाओं को कमजोर करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, पंजाब की राजनीति में चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलते रहे हैं। इसलिए अभी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में BJP और SAD के शीर्ष नेतृत्व की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक बातचीत या नया फैसला सामने आता है या नहीं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
NDA सांसदों का संसद की ओर मार्च और छात्र आंदोलन पर विरोध
NDA सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ संसद की ओर किया मार्च, छात्र आंदोलन पर बहस को लेकर टकराव बढ़ा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध मंगलवार को और बढ़ गया। NDA सांसदों ने संसद के मकर द्वार की ओर मार्च कर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। NDA सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष झारखंड में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहा है, जबकि सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के चर्चा में जवाब देने की तैयारी जताई गई है।   ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद निकला मार्च     NDA सांसदों का यह मार्च गठबंधन की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद हुआ। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।   बैठक के बाद NDA सांसद हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर संसद की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष पर छात्र आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया गया।   विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप     NDA नेताओं का कहना है कि सरकार संसद में छात्रों के प्रदर्शन और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत जवाब देने के लिए तैयार हैं।   NDA सांसदों ने इसी आधार पर विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की मांग की। उनका आरोप है कि विपक्ष लगातार हंगामा करके चर्चा और संसदीय कामकाज को बाधित कर रहा है।   विपक्ष की मांग अलग, संसद में जारी गतिरोध     दूसरी ओर विपक्ष छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहा है। विपक्षी सांसदों की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर संसद में बयान दें और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब दें।   लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी विपक्षी दलों से प्रदर्शन समाप्त कर सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। इसके बावजूद गतिरोध जारी रहा।   संसद के बाहर भी आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष     छात्र आंदोलन का मुद्दा अब संसद के अंदर की राजनीति से निकलकर संसद परिसर के विरोध-प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक ओर NDA सांसद विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विपक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है।   ऐसे में मानसून सत्र के दौरान आने वाले दिनों में भी छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और संसद में चर्चा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहने के आसार हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
NDA की मंगल मिलन बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA सांसद
NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक में PM मोदी समेत NDA सांसद जुटे, तिरंगा लहराकर लगाए ‘वंदे मातरम्’ के नारे

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के कई सांसद शामिल हुए। बैठक के दौरान सांसदों ने तिरंगा लहराया और ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाए।   संसद में जारी गतिरोध के बीच हुई बैठक     NDA की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद के मानसून सत्र में कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। ऐसे में ‘मंगल मिलन’ बैठक को NDA सांसदों के बीच समन्वय और आगामी संसदीय रणनीति पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   बैठक में सांसदों के बीच संसद की कार्यवाही को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने और सरकार के विधायी एजेंडे को लेकर चर्चा होने की संभावना रही।   PM मोदी और वरिष्ठ नेता हुए शामिल     बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह समेत NDA के वरिष्ठ नेता और विभिन्न सहयोगी दलों के सांसद मौजूद रहे। NDA संसदीय दल की ऐसी बैठकें गठबंधन के सांसदों के बीच संवाद और रणनीतिक समन्वय के लिए आयोजित की जाती हैं।     तिरंगा लहराकर ‘वंदे मातरम्’ के नारे     ‘मंगल मिलन’ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और NDA सांसदों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर उसे लहराया। इस दौरान ‘वंदे मातरम्’ के नारे भी लगाए गए। बैठक की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह कार्यक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।     मानसून सत्र के लिए रणनीति पर नजर     NDA की बैठक ऐसे वक्त हुई है जब संसद में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है और विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में गठबंधन की एकजुटता और सदन में रणनीति आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहने वाली है।   ‘मंगल मिलन’ बैठक के जरिए NDA नेतृत्व ने अपने सांसदों के बीच समन्वय मजबूत करने के साथ-साथ संसद के बाकी सत्र के लिए राजनीतिक और संसदीय रणनीति पर भी फोकस किया।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी NDA सांसदों के साथ बैठक में सलाह देते हुए
सांसदों को PM मोदी की सलाह, बोले- ‘लुटियंस दिल्ली के जाल’ में न फंसें; NDA को बताया एक परिवार

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को NDA के 45 सांसदों के साथ नाश्ते पर हुई बैठक में उन्हें संसद के बाहर भी संयम और अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे ‘लुटियंस दिल्ली के जाल’ में न फंसें और अपनी राजनीतिक पहचान को जनता तथा अपने क्षेत्र से जुड़े कामों के साथ मजबूत करें।   NDA सांसदों को एकजुट रहने की सलाह     बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने NDA को केवल राजनीतिक गठबंधन नहीं, बल्कि एक साझा परिवार के रूप में पेश किया। उन्होंने सहयोगी दलों के सांसदों के बीच बेहतर तालमेल और एकजुटता पर जोर दिया।   यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के विरोध और हंगामे के कारण कई मौकों पर कार्यवाही प्रभावित हुई है। प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसद के भीतर अनुशासन और प्रभावी तरीके से अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया।   ‘लुटियंस दिल्ली’ से दूर रहने का संदेश     PM मोदी ने सांसदों को सलाह दी कि वे दिल्ली के राजनीतिक और नौकरशाही हलकों के प्रभाव में आने के बजाय अपने निर्वाचन क्षेत्रों और जनता से जुड़े रहें। उन्होंने सांसदों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों और व्यवहार में सावधानी बरतने का संदेश दिया।     संसद में व्यवधान पर भी जताई चिंता     प्रधानमंत्री ने संसद में लगातार हो रहे व्यवधान के बीच राजनीतिक स्थिरता और प्रभावी शासन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि NDA के विस्तार और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति से अलग-अलग राज्यों की आकांक्षाओं को सरकार तक पहुंचाने में मदद मिली है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात
पीएम मोदी से मिले सुखबीर सिंह बादल, BJP-SAD गठबंधन को लेकर सियासी चर्चाएं तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। इस बैठक के बाद पंजाब की राजनीति में BJP और SAD के बीच दोबारा गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, मुलाकात के बाद दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।   करीब 20 मिनट चली मुलाकात     रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री मोदी से संसद परिसर में मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान पंजाब से जुड़े राजनीतिक और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है।   यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पंजाब में आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर विभिन्न दलों की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। ऐसे में मोदी और बादल की मुलाकात को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   गठबंधन की अटकलों को क्यों मिली हवा?     BJP और SAD लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर गठबंधन तोड़ दिया था। इसके बाद से दोनों पार्टियां अलग-अलग राजनीतिक रास्ते पर चल रही हैं।   अब दोनों नेताओं की ताजा मुलाकात के बाद पुराने गठबंधन की संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं फिर शुरू हो गई हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने गठबंधन बहाली को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।   पंजाब की राजनीति पर नजर     सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को पंजाब की आगामी राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यदि BJP और SAD के बीच दोबारा समझौता होता है तो इसका असर राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।   फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या यह मुलाकात केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में BJP-SAD गठबंधन की औपचारिक वापसी का रास्ता भी खुलेगा। पार्टी नेतृत्व की अगली बैठकों और बयानों से इस पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते एकनाथ शिंदे
एकनाथ शिंदे ने पीएम मोदी से की मुलाकात, केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। हालांकि, मुलाकात के बाद सरकार या शिवसेना की ओर से यह पुष्टि नहीं की गई कि बैठक का एजेंडा मंत्रिमंडल फेरबदल से जुड़ा था।   पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल   एकनाथ शिंदे की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। मुलाकात ऐसे समय हुई है जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। इसी वजह से शिंदे की पीएम मोदी से मुलाकात को भी इसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।   महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा संभव   शिंदे महाराष्ट्र की सत्ता में भाजपा के प्रमुख सहयोगी हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ उनकी बैठक में राज्य से जुड़े विकास कार्यों, राजनीतिक परिस्थितियों और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, बैठक में किन-किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।   क्या केंद्र में शिवसेना को मिल सकती है बड़ी भूमिका?   केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि शिवसेना को केंद्र सरकार में कोई नई जिम्मेदारी मिल सकती है या नहीं। हालांकि, फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu thanks PM Narendra Modi and reaffirms stronger India Israel strategic ties
नेतन्याहू ने पीएम मोदी को कहा ‘थैंक यू’, भारत-इजरायल रिश्ते और मजबूत करने का दिया भरोसा

तेल अवीव/नई दिल्ली: भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद किया और दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने का भरोसा जताया। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि वह भारत और इजरायल के रिश्तों को मिलकर और मजबूत करते रहेंगे। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है। पीएम मोदी से फोन पर हुई बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बताया था कि उन्हें इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का फोन आया था। दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। पीएम मोदी के अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत और विकसित हो रहे हैं। बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी दोनों नेताओं ने विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बातचीत के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई, लेकिन यह बताया गया कि दोनों नेता भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए हैं। नेतन्याहू ने जताया पीएम मोदी का आभार पीएम मोदी की पोस्ट के जवाब में नेतन्याहू ने उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताते हुए भारत और इजरायल के रिश्तों को आगे भी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेतन्याहू का यह संदेश ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी लगातार बातचीत हो रही है। भारत-इजरायल संबंध किन क्षेत्रों में मजबूत हुए? पिछले वर्षों में भारत और इजरायल के संबंध कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहरे हुए हैं। रक्षा सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख आधार रहा है। इसके अलावा टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, साइबर सुरक्षा, कृषि और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा है। भारत के लिए इजरायल पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, जबकि इजरायल भी भारत के साथ अपने संबंधों को व्यापक आर्थिक और सुरक्षा हितों के नजरिए से अहम मानता है। पश्चिम एशिया के तनाव के बीच हुई बातचीत दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत का समय भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ा तनाव भी वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। भारत की प्राथमिकता इस पूरे घटनाक्रम में अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित कूटनीतिक रुख बनाए रखना है। आगे भी संपर्क बनाए रखेंगे दोनों नेता पीएम मोदी और नेतन्याहू की बातचीत से यह संकेत साफ है कि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच दोनों नेताओं का नियमित संपर्क भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल भारत-इजरायल संबंधों में रक्षा, तकनीक और सुरक्षा सहयोग के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर कूटनीतिक संवाद जारी रहने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रम और दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Sayeoni Ghosh meets Prime Minister Narendra Modi for the first time and calls the meeting a memorable moment
पीएम मोदी से पहली मुलाकात पर सायोनी घोष का पोस्ट, बोलीं- ‘याद रखने वाला पल’; बदले सियासी समीकरणों के बीच बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सांसद सायोनी घोष की पहली मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। मुलाकात के बाद सायोनी घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा किए। उन्होंने इस मुलाकात को ‘याद रखने वाला पल’ बताया। सायोनी घोष ने अपनी पोस्ट में लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मेरी पहली मुलाकात। एक यादगार पल!” इसके साथ साझा किए गए वीडियो में वह प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करती हुई नजर आ रही हैं। यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सायोनी घोष का राजनीतिक रुख हाल के दिनों में बदला है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर 20 सांसदों वाले एक नए राजनीतिक गुट का हिस्सा बनी हैं, जिसने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जाने का ऐलान किया है। पहली मुलाकात, लेकिन राजनीतिक मायने बड़े प्रधानमंत्री मोदी और सायोनी घोष की यह पहली मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। सायोनी घोष पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ सक्रिय राजनीति में रही हैं। अब उनके नए राजनीतिक गुट के NDA के साथ काम करने की बात सामने आने के बाद प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, सिर्फ मुलाकात और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी नए राजनीतिक फैसले का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सायोनी ने अपनी पोस्ट में मुख्य रूप से मुलाकात को यादगार बताया है। 20 सांसदों वाले बागी गुट की चर्चा रिपोर्टों के मुताबिक, सायोनी घोष उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI के साथ जाने की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को दी थी। इस समूह में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, दीपक अधिकारी और जून मालिया जैसे नामों की भी चर्चा है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं। NDA के साथ काम करने की बात इस नए गुट की ओर से NDA के साथ काम करने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, गुट के कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले NDA के साथ सहयोग की बात कही है। NCPI के सांसदों के NDA की संसदीय बैठक में शामिल होने की खबरों ने भी इस राजनीतिक समीकरण को और चर्चा में ला दिया है। ऐसे में सायोनी घोष की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को विपक्षी राजनीति से अलग होकर नए राजनीतिक गठजोड़ की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। सायोनी घोष क्यों हैं अहम चेहरा? सायोनी घोष को पश्चिम बंगाल की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा माना जाता है। तृणमूल कांग्रेस के साथ उनके राजनीतिक सफर के बाद अब नए गुट में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा है। जून में सामने आई रिपोर्टों में उन्हें इस बागी गुट के प्रमुख चेहरों में गिना गया था। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ उनकी पहली मुलाकात और उसके बाद सार्वजनिक की गई तस्वीरें राजनीतिक तौर पर स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गई हैं। सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई हलचल मुलाकात के बाद सायोनी घोष का छोटा-सा सोशल मीडिया संदेश भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया। उन्होंने इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात के रूप में पेश करने के बजाय ‘यादगार पल’ बताया। अब सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट थी या बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इसके आगे भी कोई बड़ा राजनीतिक संदेश निकलता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के गुट और NDA के बीच बढ़ती नजदीकी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस गुट की भूमिका और सायोनी घोष की राजनीतिक दिशा पर नजर रहेगी।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर संसद में जानकारी
पीएम मोदी की 77 देशों की विदेश यात्राओं पर ₹557.51 करोड़ खर्च, सरकार ने संसद में दी जानकारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में खर्च का आंकड़ा साझा किया है। सरकार के अनुसार, 2021 से जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री की 77 देशों की विदेश यात्राओं पर कुल ₹557.51 करोड़ खर्च हुए हैं। यह जानकारी गुरुवार को संसद में दी गई।   2026 में अब तक ₹74.59 करोड़ खर्च     सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, 2026 में जुलाई तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर ₹74.59 करोड़ खर्च किए गए हैं। इस अवधि में प्रधानमंत्री ने 12 देशों की यात्राएं की हैं। इनमें मलेशिया, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, इटली, फ्रांस, स्लोवाकिया, सेशेल्स, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड की यात्राएं शामिल हैं।     2025 में सबसे ज्यादा खर्च     उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर करीब ₹180 करोड़ से अधिक खर्च हुआ। इस साल प्रधानमंत्री ने अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, जापान सहित कई देशों का दौरा किया था। 2021 से 2025 के बीच विदेश यात्राओं पर खर्च में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली।   सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की अवधि और चार्टर्ड विमानों पर हुए खर्च का विवरण भी उपलब्ध है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, विदेश यात्राओं का खर्च गृह मंत्रालय के बजट से वहन किया जाता है।   यात्राओं से 316 समझौते हुए     सरकार ने संसद में यह भी बताया कि 2021 के बाद प्रधानमंत्री की इन विदेश यात्राओं के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में 316 समझौते और समझौता ज्ञापन (MoU) हुए। इनका संबंध व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों से रहा है।   केंद्र सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का उद्देश्य भारत के अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना है।   विदेश यात्राओं पर खर्च को लेकर चर्चा     प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च समय-समय पर राजनीतिक बहस का विषय रहा है। सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब विदेश यात्राओं की लागत और उनसे मिलने वाले कूटनीतिक एवं आर्थिक लाभ को लेकर चर्चा चल रही है।   सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 2021 से जुलाई 2026 तक 77 देशों की यात्राओं पर ₹557.51 करोड़ खर्च हुए हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की फोन पर बातचीत
भारत-इजरायल संबंधों पर पीएम मोदी और नेतन्याहू की बातचीत, द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने पर जोर

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच गुरुवार को टेलीफोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।   विशेष रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा     बातचीत में दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और इजरायल के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत चल रहे सहयोग की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, कृषि और नवाचार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू ने आपसी हित वाले क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।     पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा     फोन वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया के मौजूदा घटनाक्रम पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। क्षेत्र में जारी सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।   दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रम पर संपर्क बनाए रखने पर भी सहमति जताई। इससे संकेत मिलता है कि नई दिल्ली और तेल अवीव के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद लगातार जारी रहेगा।   कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर     भारत और इजरायल के संबंध पिछले वर्षों में रणनीतिक साझेदारी से आगे बढ़कर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विस्तृत हुए हैं। रक्षा और सुरक्षा के अलावा कृषि, जल प्रबंधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और नवाचार में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। दोनों नेताओं की ताजा बातचीत में भी द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।     लगातार संपर्क में रहेंगे दोनों देश     बातचीत के अंत में दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर एक-दूसरे के संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों के बीच भारत-इजरायल के बीच यह उच्चस्तरीय संवाद दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
प्रधानमंत्री मोदी और Netflix Co-CEO टेड सारंडोस की मुलाकात
PM मोदी से मिले Netflix के Co-CEO टेड सारंडोस, भारत की कहानी को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर

PM मोदी से मिले Netflix के Co-CEO टेड सारंडोस, भारत की कहानी को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Netflix के Co-CEO टेड सारंडोस से मुलाकात की। इस दौरान भारत के तेजी से बढ़ते मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र, भारतीय कहानियों की वैश्विक पहुंच और देश की रचनात्मक प्रतिभाओं की क्षमता पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान भारत को वैश्विक कंटेंट निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ।   भारतीय कहानियों को वैश्विक मंच देने पर चर्चा   बैठक में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और रचनात्मक विरासत को दुनिया के सामने पेश करने के अवसरों पर जोर दिया गया। भारतीय फिल्म, वेब सीरीज, एनीमेशन और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। Netflix पहले से ही भारत में स्थानीय भाषाओं और भारतीय कहानियों पर आधारित कंटेंट का विस्तार कर रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और सारंडोस की बैठक को भारत के मनोरंजन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   Netflix ने की नई पहल की घोषणा   मुलाकात के बाद Netflix ने Netflix India Storytelling Initiative की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य भारत की अगली पीढ़ी के कहानीकारों और रचनात्मक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, साझेदारी और अवसर उपलब्ध कराना है। इस पहल के तहत भारत के प्रमुख संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी विकसित करने की योजना है। इसका दायरा कहानी कहने के साथ-साथ एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे रचनात्मक क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।   भारत को वैश्विक कंटेंट हब बनाने की दिशा में कदम   बैठक में भारत की विशाल प्रतिभा, बढ़ते मनोरंजन बाजार और तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सरकार लंबे समय से भारत को फिल्म, एनीमेशन, गेमिंग और अन्य रचनात्मक उद्योगों के लिए वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दे रही है। Netflix की नई पहल से भारतीय रचनाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने और भारतीय कहानियों को दुनिया के बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
Bihar Panchayati Raj Minister Deepak Prakash reacts after being nominated as MLC, thanking NDA leadership and pledging public service.
MLC बनने के बाद दीपक प्रकाश की पहली प्रतिक्रिया, बोले- 'SC वाली बात अब इतिहास हो चुकी'

पटना: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल द्वारा बिहार विधान परिषद (MLC) के लिए मनोनीत किए जाने के बाद उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए के वरिष्ठ नेताओं का आभार जताया और कहा कि वह पहले से अधिक समर्पण के साथ जनता की सेवा करेंगे। कई वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार दीपक प्रकाश ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, भाजपा नेतृत्व, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और एनडीए के सभी सहयोगी दलों के नेताओं का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मिली नई जिम्मेदारी उनके लिए प्रेरणा है और वह अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे। 'अब सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं' विपक्ष द्वारा पहले उठाए गए सवालों और मंत्री पद से इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक प्रकाश ने कहा कि अब सभी संवैधानिक और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। इसलिए पहले उठाए गए सवाल अब अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनका पूरा ध्यान केवल जनता की सेवा और विभागीय कार्यों पर रहेगा। 'सुप्रीम कोर्ट वाली बात अब इतिहास हो चुकी' जब उनसे उस मामले पर सवाल पूछा गया, जिसमें उनके मंत्री पद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, तो उन्होंने कहा कि वह अब बीती बात है। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट वाली बात अब इतिहास हो चुकी है। अब उन मुद्दों का कोई औचित्य नहीं है। मेरी प्राथमिकता अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करना है।" मंत्री पद पर बने रहेंगे दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया कि वह मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनता के प्रति उनकी जवाबदेही पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है और वह विकास कार्यों को गति देने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।    

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Delhi Police drops legal action against minor girl in Jantar Mantar controversy after PM Modi's appeal
जंतर-मंतर विवाद: नाबालिग लड़की को राहत, पीएम मोदी की अपील के बाद दिल्ली पुलिस नहीं बढ़ाएगी कार्रवाई

Jantar Mantar Controversy: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली पुलिस ने उसकी उम्र, माफीनामा और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए एफआईआर में आगे कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। दिल्ली पुलिस ने आगे कार्रवाई से किया इनकार जानकारी के अनुसार, नोएडा पुलिस द्वारा दर्ज जीरो एफआईआर दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित की गई थी। मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने निर्णय लिया कि नाबालिग की उम्र, उसके व्यवहार और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को देखते हुए उसके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। वीडियो जारी कर मांगी थी माफी विवाद के बाद लड़की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने बयान पर खेद जताया था। उसने खुद को 15 साल का बताते हुए कहा कि वह दोस्तों के साथ जंतर-मंतर पहुंची थी और वहां मौजूद कुछ लोगों के प्रभाव में आकर उसने आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। वीडियो में उसने कहा कि उससे गंभीर गलती हुई है, उसे अपने व्यवहार पर शर्मिंदगी है और वह पूरे देश से क्षमा मांगती है। लड़की ने इसे अपनी पहली और आखिरी गलती बताते हुए लोगों से उसे माफ करने की अपील की। पीएम मोदी ने भी की थी माफ करने की अपील इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि बच्चों से गलतियां हो जाती हैं और उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को अदालतों के चक्कर लगवाने या सजा देने से स्थिति नहीं बदलेगी। प्रधानमंत्री ने समाज से भी अपील की थी कि वे इन बच्चों को माफ करें और उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करें। क्या था मामला? पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग लड़की का वीडियो सामने आया था, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती दिखाई दी थी। वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया और शिकायत के आधार पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे बाद में जांच के लिए दिल्ली पुलिस को सौंपा गया था। अब दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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JPSC नियुक्ति घोटाला: अभय तिवारी से जुड़े सिंडिकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक, दर्जनों परीक्षाएं जांच के घेरे में

kalpana अगस्त 13, 2026 0