नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात 10 अगस्त को संसद परिसर में प्रधानमंत्री के कार्यालय में हुई। प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे।
NCP-SP सांसदों ने महाराष्ट्र से जुड़े कई विषयों पर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। इनमें प्रमुख रूप से महाराष्ट्र के सामाजिक सुधारकों महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, अन्नाभाऊ साठे और तुकडोजी महाराज को भारत रत्न देने की मांग शामिल रही।
सांसदों ने इन महान व्यक्तित्वों के सामाजिक सुधार, शिक्षा और वंचित वर्गों के उत्थान में योगदान का उल्लेख करते हुए केंद्र से उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने की मांग की।
सुप्रिया सुले की PM मोदी से मुलाकात ऐसे समय हुई है जब संसद में संभावित परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। इसी वजह से NCP-SP सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार को प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के लिए संसद में जरूरी समर्थन जुटाने की जरूरत होगी। हालांकि NCP-SP ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रस्तावित विधेयक पर उसका रुख विधेयक की वास्तविक सामग्री सामने आने के बाद तय होगा।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में NCP-SP के NDA के करीब आने की अटकलें भी शुरू हुईं। हालांकि पार्टी ने ऐसी अटकलों को खारिज किया है।
NCP-SP अभी भी विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा है और पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात को गठबंधन बदलने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी के अनुसार महाराष्ट्र और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से मिलना एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है।
इस मुलाकात से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के विवाह समारोह के रिसेप्शन में भी पहुंचे थे। वहां प्रधानमंत्री मोदी और NCP-SP प्रमुख शरद पवार की मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं।
लगातार हुई इन मुलाकातों के कारण महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि फिलहाल NCP-SP ने BJP या NDA के साथ किसी नए गठबंधन की घोषणा नहीं की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात 10 अगस्त को संसद परिसर में प्रधानमंत्री के कार्यालय में हुई। प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे। किन मुद्दों को लेकर हुई मुलाकात NCP-SP सांसदों ने महाराष्ट्र से जुड़े कई विषयों पर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। इनमें प्रमुख रूप से महाराष्ट्र के सामाजिक सुधारकों महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, अन्नाभाऊ साठे और तुकडोजी महाराज को भारत रत्न देने की मांग शामिल रही। सांसदों ने इन महान व्यक्तित्वों के सामाजिक सुधार, शिक्षा और वंचित वर्गों के उत्थान में योगदान का उल्लेख करते हुए केंद्र से उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने की मांग की। परिसीमन को लेकर भी बढ़ी राजनीतिक चर्चा सुप्रिया सुले की PM मोदी से मुलाकात ऐसे समय हुई है जब संसद में संभावित परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। इसी वजह से NCP-SP सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार को प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के लिए संसद में जरूरी समर्थन जुटाने की जरूरत होगी। हालांकि NCP-SP ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रस्तावित विधेयक पर उसका रुख विधेयक की वास्तविक सामग्री सामने आने के बाद तय होगा। NCP-SP ने NDA में जाने की अटकलों को किया खारिज प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में NCP-SP के NDA के करीब आने की अटकलें भी शुरू हुईं। हालांकि पार्टी ने ऐसी अटकलों को खारिज किया है। NCP-SP अभी भी विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा है और पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात को गठबंधन बदलने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी के अनुसार महाराष्ट्र और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से मिलना एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है। बेटी की शादी के रिसेप्शन में भी हुई PM मोदी से मुलाकात इस मुलाकात से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के विवाह समारोह के रिसेप्शन में भी पहुंचे थे। वहां प्रधानमंत्री मोदी और NCP-SP प्रमुख शरद पवार की मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। लगातार हुई इन मुलाकातों के कारण महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि फिलहाल NCP-SP ने BJP या NDA के साथ किसी नए गठबंधन की घोषणा नहीं की है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने की कार्यवाही समाप्त कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए मनमोहन सिंह की ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की। क्या है पूरा मामला मामला तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा है। यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया को लेकर कई आवंटनों को रद्द कर दिया था। इसके बाद CBI ने मामले की जांच की। दिल्ली की विशेष अदालत ने 2015 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मामले में आरोपी के तौर पर समन जारी किया था। मनमोहन सिंह ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने CBI की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही मनमोहन सिंह के खिलाफ पहले जारी किए गए समन से संबंधित कार्यवाही को भी समाप्त कर दिया गया। अदालत का फैसला आने के बाद इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं चलेगी। यह फैसला मनमोहन सिंह के निधन के बाद आया है। सोनिया गांधी ने फैसले का किया स्वागत सोनिया गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह की ईमानदारी और जवाबदेही पर लगाए गए आरोप निराधार साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास उन्हें एक शांत, विनम्र और बेहद प्रभावशाली प्रधानमंत्री के रूप में याद करेगा। सोनिया गांधी ने इस मामले को लेकर पहले हुई राजनीतिक आलोचनाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि मनमोहन सिंह के खिलाफ लंबे समय तक चलाया गया अभियान अब खत्म हो गया है। फैसले के बाद फिर चर्चा में मनमोहन सिंह की विरासत सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल, उनकी आर्थिक नीतियों और सार्वजनिक जीवन में उनकी छवि को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। कांग्रेस ने फैसले को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना है, जबकि कोयला आवंटन से जुड़े व्यापक विवाद पर राजनीतिक बहस अलग-अलग स्तर पर जारी रही है। अदालत का ताजा फैसला विशेष रूप से तालाबीरा-II मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट और मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही से संबंधित है।
पटना, एजेंसियां। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अभिनेत्री मल्लिका शेरावत के साथ अपना नया वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। वीडियो सामने आने के बाद दोनों के किसी नए प्रोजेक्ट में साथ नजर आने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी प्रोजेक्ट की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। तेज प्रताप ने बढ़ाया सस्पेंस वीडियो में तेज प्रताप यादव सूट-बूट में नजर आ रहे हैं और मल्लिका शेरावत के साथ दिखाई दे रहे हैं। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि दोनों जल्द ही कुछ नया लेकर आने वाले हैं। तेज प्रताप ने अपने पोस्ट में लोगों से “दिल थामकर बैठिए” कहते हुए कुछ दिन इंतजार करने का संकेत दिया है। उन्होंने यह भी लिखा कि आने वाला नया काम पूरे देश और एशिया में देखने को मिल सकता है। क्या है नया प्रोजेक्ट? तेज प्रताप यादव ने अभी यह साफ नहीं किया है कि मल्लिका शेरावत के साथ उनका यह नया प्रोजेक्ट फिल्म, म्यूजिक वीडियो, शो या किसी अन्य मनोरंजन प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इससे पहले भी दोनों का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें तेज प्रताप मल्लिका शेरावत के साथ बातचीत करते और अपने मोबाइल पर कुछ दिखाते नजर आए थे। इसके बाद से ही उनके साथ आने को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। राजनीति से मनोरंजन तक चर्चा तेज प्रताप यादव राजनीतिक गतिविधियों के अलावा मनोरंजन से जुड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। मल्लिका शेरावत के साथ लगातार सामने आ रहे वीडियो ने उनके नए प्रोजेक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर उत्सुकता बढ़ा दी है। फिलहाल दोनों के नए प्रोजेक्ट का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। तेज प्रताप के संकेत के मुताबिक, आने वाले दिनों में इसका राज खुल सकता है।