नरेंद्र मोदी

राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी के राजनीतिक दौर को लेकर बड़ा दावा किया
राहुल गांधी का बड़ा दावा, बोले- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक दौर अंतिम चरण में

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की भाजपा सरकार को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया। समाचार एजेंसी ANI के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी का राजनीतिक दौर अंतिम चरण में है और उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है।   मोदी सरकार पर राहुल गांधी का हमला     CWC बैठक में राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा कि मोदी सरकार राजनीतिक रूप से पीछे चल रही है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सरकार के खिलाफ अधिक आक्रामक राजनीतिक रणनीति अपनाने की अपील भी की।     उत्तराधिकारी की तलाश का किया दावा     राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह राहुल गांधी का राजनीतिक दावा है, न कि भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से घोषित कोई आधिकारिक प्रक्रिया।     CWC बैठक में राजनीतिक रणनीति पर मंथन     कांग्रेस की बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संसद के हालिया मानसून सत्र और आगे की पार्टी रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने और युवाओं व छात्रों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार किया।     22 अगस्त को पुणे में राहुल गांधी का कार्यक्रम     राहुल गांधी 22 अगस्त को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों के बीच सीधा संवाद बढ़ाने की रणनीति के तहत यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
केंद्रीय मंत्रियों के सोशल मीडिया प्रदर्शन की समीक्षा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे
केंद्रीय कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को मिला सोशल मीडिया प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड, PM मोदी रहे सबसे आगे

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय मंत्रिमंडल की 19 अगस्त 2026 को हुई बैठक में केंद्रीय मंत्रियों के सोशल मीडिया प्रदर्शन की समीक्षा की गई और उन्हें डिजिटल प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड दिया गया। रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर मंत्रियों की सक्रियता, पोस्ट की संख्या, लोगों की प्रतिक्रिया, लाइक्स और फॉलोअर्स समेत कई मानकों का आकलन किया गया। इस आकलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे रहे।   1 मई से 15 अगस्त तक के प्रदर्शन का आकलन   रिपोर्ट के लिए 1 मई से 15 अगस्त 2026 तक की सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। इसमें मंत्रियों के Facebook, X और Instagram जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शन को देखा गया। पोस्ट की औसत संख्या, कुल एंगेजमेंट, प्रति पोस्ट औसत एंगेजमेंट, लाइक्स और फॉलोअर्स जैसे आंकड़ों को मूल्यांकन में शामिल किया गया।   युवाओं से जुड़ने पर जोर   प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों से सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी और जनता से सीधे संवाद को और मजबूत करने को कहा। खास तौर पर Gen Z और Gen Alpha जैसे युवा वर्ग तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा मंत्रियों को विश्वविद्यालयों और सरकारी स्कूलों में जाकर युवाओं से संवाद करने का निर्देश भी दिया गया।   केवल फॉलोअर्स नहीं, एंगेजमेंट भी महत्वपूर्ण   रिपोर्ट कार्ड में सिर्फ फॉलोअर्स की संख्या को आधार नहीं बनाया गया। मंत्रियों के पोस्ट पर लोगों की वास्तविक भागीदारी और प्रतिक्रिया को भी महत्वपूर्ण मानदंड बनाया गया। सरकार की डिजिटल रणनीति का उद्देश्य सोशल मीडिया को जनता और खासकर युवा मतदाताओं से संवाद का प्रभावी माध्यम बनाना है।   PM मोदी सोशल मीडिया पहुंच में शीर्ष पर   रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों के बीच सोशल मीडिया पहुंच के मामले में पहला स्थान हासिल किया। यह समीक्षा ऐसे समय हुई है जब सरकार युवाओं के साथ डिजिटल माध्यमों से संवाद बढ़ाने और सोशल मीडिया पर अपनी पहुंच मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
P. Chidambaram
पी. चिदंबरम का पीएम मोदी पर पलटवार, ‘दिमागी नक्सली’ कहे जाने पर बोले- मुझे गर्व है

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर रविवार को राजनीतिक विवाद तेज हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पीएम मोदी पर पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है।   पीएम मोदी ने लाल किले से क्या कहा?   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद काफी कमजोर हुआ है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता अभी भी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने ऐसी विचारधारा को पहचानने और उससे सावधान रहने की बात कही।   पीएम मोदी के मुताबिक, माओवादी हिंसा के खिलाफ सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास कार्यों के जरिए भी इस चुनौती से निपटा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि हथियारबंद नक्सलवाद कमजोर होने के बावजूद वैचारिक स्तर पर सक्रिय तत्वों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।   चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर दिया जवाब   पी. चिदंबरम ने 16 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बेहद संक्षिप्त लेकिन तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि “I am proud to be a dimagi naxal!” यानी उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है। यह प्रतिक्रिया पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के एक दिन बाद सामने आई। चिदंबरम की इस टिप्पणी को प्रधानमंत्री के बयान के खिलाफ राजनीतिक और वैचारिक पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है।   कांग्रेस ने भी पीएम के बयान पर उठाए सवाल   इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान की आलोचना की थी। उन्होंने ‘अर्बन नक्सल’ शब्द के पुराने राजनीतिक इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद में सरकार से इसकी परिभाषा पूछे जाने पर गृह मंत्री ने कहा था कि ‘अर्बन नक्सल’ जैसी कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है।   वहीं, सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने पीएम मोदी के बयान का समर्थन किया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बिहार के नेता जीतन राम मांझी ने वैचारिक नक्सलवाद के खतरे को लेकर प्रधानमंत्री की बात का समर्थन किया।   बयान से बढ़ी राजनीतिक बहस   पीएम मोदी और पी. चिदंबरम के बीच यह जुबानी टकराव ऐसे समय हुआ है जब स्वतंत्रता दिवस के भाषण के बाद नक्सलवाद, वैचारिक असहमति और राजनीतिक विरोध को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है। चिदंबरम की टिप्पणी के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में भी प्रमुख मुद्दा बन गया है।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
Central Government Decision
केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी घोषणा की। 15 अगस्त 2026 को लाल किले से अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात कही। इसके साथ ही अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य भी घोषित किया गया।   महंगी कोचिंग से राहत देने की कोशिश   पीएम मोदी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। सरकार डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और उपलब्ध शिक्षण संसाधनों का इस्तेमाल करके युवाओं तक मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग पहुंचाने की दिशा में काम करेगी। इससे छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए दूसरे शहरों में जाकर महंगे कोचिंग संस्थानों में रहने और पढ़ने की जरूरत कम हो सकती है।   किन परीक्षाओं की तैयारी होगी, अभी स्पष्ट नहीं   सरकार की घोषणा में ‘विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं’ के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि शुरुआत में UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग, JEE, NEET या अन्य किन परीक्षाओं को इस योजना में शामिल किया जाएगा।   इसी तरह आवेदन प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, कक्षाओं का प्लेटफॉर्म और मुफ्त कोचिंग शुरू होने की तारीख को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आना बाकी है। इसलिए फिलहाल इसे घोषित पहल के रूप में देखना उचित होगा।   एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण   प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए तैयार करना और AI के क्षेत्र में भारत की युवा प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। AI प्रशिक्षण के तहत युवाओं को किस स्तर और किन विशेष पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।   युवाओं के लिए रोजगार और कौशल पर जोर   स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री ने युवाओं को AI, स्टार्टअप, हरित अर्थव्यवस्था, रचनात्मक उद्योग, विनिर्माण और अन्य उभरते क्षेत्रों से जोड़ने पर जोर दिया। मुफ्त प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग और बड़े पैमाने पर AI प्रशिक्षण की घोषणाओं को इसी व्यापक युवा-केंद्रित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
Narendra Modi
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने महिला आरक्षण कानून को आगे बढ़ाने की अपील, सभी दलों से मांगा समर्थन

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से महिला आरक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मिलकर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की अपील की। पीएम मोदी ने इसे मौजूदा समय की बड़ी जरूरत बताते हुए कहा कि महिलाओं को देश की नीतियां बनाने में और अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए।   सभी दलों से साथ आने की अपील   अपने संबोधन में पीएम मोदी ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे महिला आरक्षण के मुद्दे पर साथ आएं और इसका श्रेय लेने के बजाय महिलाओं को उनका अधिकार देने की दिशा में काम करें। उन्होंने पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों में महिलाओं के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाएं स्थानीय स्तर पर प्रभावी नेतृत्व कर रही हैं।   प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी सोच के तहत संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था और अब लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाया जाना चाहिए।   2029 से लागू करने की कोशिश को लगा था झटका   महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में 2026 में सरकार को बड़ा झटका लगा था। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। 17 अप्रैल को हुए मतदान में 528 सांसदों ने वोट दिया, जिनमें 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध किया। संवैधानिक संशोधन के लिए 352 वोटों की जरूरत थी।   यह विधेयक मौजूदा महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने और परिसीमन के बाद लोकसभा तथा विधानसभा सीटों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का रास्ता तैयार करने से जुड़ा था। सरकार की कोशिश इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की बताई गई थी।   विपक्ष ने उठाए सवाल   पीएम मोदी की अपील के बाद विपक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल किया कि जब महिला आरक्षण कानून पहले ही संसद से पारित हो चुका है, तो इसके क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की अपील को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को पहले से पारित प्रावधान को लागू करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।   महिला राजनीतिक भागीदारी पर फिर तेज हुई बहस   प्रधानमंत्री की स्वतंत्रता दिवस की अपील के बाद 33 प्रतिशत महिला आरक्षण एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। फिलहाल इस मुद्दे पर सरकार को संवैधानिक संशोधन के लिए व्यापक राजनीतिक समर्थन जुटाना होगा।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
Independence Day Celebration
लाल किले से पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम्’, 150वीं वर्षगांठ पर ऐतिहासिक आयोजन

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2026 को लाल किले पर आयोजित समारोह में ‘वंदे मातरम्’ पहली बार आधिकारिक रूप से गूंजा। इस ऐतिहासिक क्षण का विशेष महत्व इसलिए भी रहा क्योंकि वर्ष 2026 में इस राष्ट्रीय गीत की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पहुंचने के बाद सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी, जिसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।   पहली बार बदली लाल किले की परंपरा   स्वतंत्रता दिवस के लाल किला समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ को कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। प्रस्तुति के दौरान मौजूद लोगों ने सम्मान में खड़े होकर राष्ट्रीय गीत सुना। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने तिरंगा फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया।   150 साल पुराना है ‘वंदे मातरम्’   ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इसे पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित किया गया था। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।   समारोह में युवाशक्ति पर भी रहा जोर   इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम ‘युवा शक्ति फॉर विकसित भारत@2047’ रखी गई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के साथ देश के विकास में युवाओं की भूमिका को भी समारोह में प्रमुखता दी गई। करीब 2,500 एनसीसी कैडेट और माई भारत स्वयंसेवकों ने ज्ञान पथ पर ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाई।   सेना के बैंड ने दी प्रस्तुति   लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति सेना के बैंड ने दी। समारोह में इस ऐतिहासिक गीत के पूरे छह अंतरों की प्रस्तुति भी की गई। इस आयोजन के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ की भूमिका और इसके 150 वर्षों के सफर को याद किया गया।   यह आयोजन स्वतंत्रता दिवस समारोह के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में दर्ज हुआ, क्योंकि लाल किले से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति हुई और उसी वर्ष इसके 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी आया।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
Atal Bihari Vajpayee's Death Anniversary
पीएम मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, ‘राष्ट्र प्रथम’ के योगदान को किया याद

नई दिल्ली, एजेंसियां। पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मृति स्थल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ नेताओं ने भी वाजपेयी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।   पीएम मोदी ने वाजपेयी के योगदान को किया याद   प्रधानमंत्री मोदी ने वाजपेयी को एक असाधारण राजनेता और अद्वितीय दूरदृष्टि वाला नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। मोदी ने उनके नेतृत्व, विचारों और सुशासन की विरासत को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।   ‘सदैव अटल’ पर हुई प्रार्थना सभा   वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर ‘सदैव अटल’ पर विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी।   गृह मंत्री अमित शाह ने वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध के दौरान भारत की मजबूती का उल्लेख किया। उन्होंने वाजपेयी की मूल्य आधारित राजनीति, अंत्योदय और सुशासन की सोच को भी याद किया।   ‘राष्ट्र प्रथम’ था वाजपेयी की राजनीति का आधार   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वाजपेयी ने अपने विचारों और कार्यों से भारतीय लोकतंत्र को समृद्ध किया। उनके मुताबिक, ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना वाजपेयी की राजनीति और जनसेवा के केंद्र में रही।   अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ था। वह तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे और 2015 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
Marco Rubio Narendra Modi
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई, कहा- US-India संबंध पहले से ज्यादा मजबूत

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीयों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और इस समय पहले से ज्यादा मजबूत हैं। रुबियो ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण बताया।   रक्षा से लेकर AI और अंतरिक्ष तक सहयोग   मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका साझेदारी के कई प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। इनमें रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष सहयोग और व्यापार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के साथ-साथ व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र को भी अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाने में मदद कर रहा है।   ट्रंप-मोदी के व्यक्तिगत संबंधों को बताया अहम   रुबियो ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंधों को भी द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच संबंधों से भारत-अमेरिका साझेदारी को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।   लोगों के बीच संबंधों पर भी जोर   अमेरिकी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच दोस्ती और पारिवारिक रिश्तों को साझेदारी की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका आने वाले समय में भारत के साथ मिलकर ऐसा भविष्य बनाने की दिशा में काम करना चाहता है, जिससे दोनों देशों को लाभ मिले।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
पीएम नरेंद्र मोदी से भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात
बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने पीएम मोदी से की मुलाकात, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और आपसी मुद्दों पर संवाद बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।   बांग्लादेश यात्रा के बाद पीएम मोदी से मुलाकात     दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश में अपनी हालिया बैठकों के बाद नई दिल्ली लौटकर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने बांग्लादेश में हुई बातचीत और वहां के राजनीतिक नेतृत्व से मिले संदेशों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।     द्विपक्षीय संबंधों पर हुआ विचार-विमर्श     मुलाकात के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों, दोनों देशों के बीच सहयोग और आगे की कूटनीतिक दिशा पर चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों पड़ोसी देशों के संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में हैं।     बांग्लादेश के नए नेतृत्व से बातचीत के बाद अहम मुलाकात     दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात से पहले बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से भी बातचीत की थी। इसके बाद मोदी से हुई बैठक को भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   भारत के लिए बांग्लादेश के साथ व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे अहम हैं। ऐसे में उच्चायुक्त की यह बैठक आगे की कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया
पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का किया विमोचन, ‘Triumph of the Indian Republic’ में दर्ज है जीवन का सफर

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को विज्ञान भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” का विमोचन किया। कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रेस सूचना ब्यूरो ने इसकी पुष्टि की है।   कोविंद के संघर्ष और सार्वजनिक जीवन की कहानी   यह आत्मकथा रामनाथ कोविंद के व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक पृष्ठभूमि और सार्वजनिक जीवन की यात्रा को सामने रखती है। पुस्तक में उनके संघर्षों और विभिन्न संवैधानिक पदों पर काम करने के अनुभवों को शामिल किया गया है। कोविंद ने 2017 से 2022 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की थी।   पीएम मोदी ने बताया प्रेरणादायक अनुभवों का दस्तावेज   पुस्तक के विमोचन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रामनाथ कोविंद के साथ अपने लंबे जुड़ाव और उनके अनुभवों को याद किया। उन्होंने युवाओं से कोविंद की जीवन यात्रा और आत्मकथा को पढ़ने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे जीवन अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।   लोकतांत्रिक मूल्यों और संघर्षों पर फोकस   आत्मकथा का शीर्षक ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ है। पुस्तक में कोविंद के जीवन के संघर्षों के साथ भारतीय लोकतंत्र और सार्वजनिक सेवा से जुड़े उनके अनुभवों को भी जगह दी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने पुस्तक को देश के लोकतांत्रिक अनुभवों को समझने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
सुप्रिया सुले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात
सुप्रिया सुले की PM मोदी से मुलाकात, NCP-SP सांसदों ने महाराष्ट्र के मुद्दे उठाए; परिसीमन पर भी चर्चा के संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात 10 अगस्त को संसद परिसर में प्रधानमंत्री के कार्यालय में हुई। प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे।   किन मुद्दों को लेकर हुई मुलाकात     NCP-SP सांसदों ने महाराष्ट्र से जुड़े कई विषयों पर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। इनमें प्रमुख रूप से महाराष्ट्र के सामाजिक सुधारकों महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, अन्नाभाऊ साठे और तुकडोजी महाराज को भारत रत्न देने की मांग शामिल रही।   सांसदों ने इन महान व्यक्तित्वों के सामाजिक सुधार, शिक्षा और वंचित वर्गों के उत्थान में योगदान का उल्लेख करते हुए केंद्र से उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने की मांग की।   परिसीमन को लेकर भी बढ़ी राजनीतिक चर्चा     सुप्रिया सुले की PM मोदी से मुलाकात ऐसे समय हुई है जब संसद में संभावित परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। इसी वजह से NCP-SP सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार को प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के लिए संसद में जरूरी समर्थन जुटाने की जरूरत होगी। हालांकि NCP-SP ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रस्तावित विधेयक पर उसका रुख विधेयक की वास्तविक सामग्री सामने आने के बाद तय होगा।   NCP-SP ने NDA में जाने की अटकलों को किया खारिज     प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में NCP-SP के NDA के करीब आने की अटकलें भी शुरू हुईं। हालांकि पार्टी ने ऐसी अटकलों को खारिज किया है।   NCP-SP अभी भी विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा है और पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात को गठबंधन बदलने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी के अनुसार महाराष्ट्र और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से मिलना एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है।   बेटी की शादी के रिसेप्शन में भी हुई PM मोदी से मुलाकात     इस मुलाकात से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के विवाह समारोह के रिसेप्शन में भी पहुंचे थे। वहां प्रधानमंत्री मोदी और NCP-SP प्रमुख शरद पवार की मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं।   लगातार हुई इन मुलाकातों के कारण महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि फिलहाल NCP-SP ने BJP या NDA के साथ किसी नए गठबंधन की घोषणा नहीं की है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
नायब सिंह सैनी का BJP और अकाली दल गठबंधन पर बयान
अकाली दल संग गठबंधन से इनकार, नायब सिंह सैनी बोले- BJP का गठबंधन पंजाब की जनता से

चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलों पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विराम लगा दिया है। सैनी ने स्पष्ट कहा कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में BJP और अकाली दल के बीच गठबंधन की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि BJP का गठबंधन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं, बल्कि पंजाब की जनता के साथ है।   मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद बढ़ी थी चर्चा   BJP और अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चा उस समय तेज हुई जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में दोनों पुराने सहयोगियों के फिर साथ आने की अटकलें लगने लगी थीं। दोनों दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में उनका गठबंधन टूट गया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़े।   नायब सैनी ने साफ किया BJP का रुख   गठबंधन की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में नायब सिंह सैनी ने कहा कि BJP का गठबंधन पंजाब की जनता के साथ है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी फिलहाल पंजाब में अपने दम पर राजनीतिक आधार मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। सैनी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा और राज्य में BJP को मजबूत विकल्प के तौर पर पेश किया।   2027 विधानसभा चुनाव से पहले गरमाई पंजाब की सियासत   पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। BJP और SAD के संभावित गठबंधन को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा चल रही थी। वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी इस संभावित राजनीतिक समीकरण पर नजर बनाए हुए हैं। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी BJP-SAD गठबंधन की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि दोनों दल साथ आएं या किसी अन्य राजनीतिक ताकत के साथ जाएं, इससे उन्हें पंजाब की जनता का समर्थन हासिल नहीं होगा।   क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल?   फिलहाल BJP की ओर से नायब सैनी का बयान दोबारा गठबंधन की संभावनाओं को कमजोर करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, पंजाब की राजनीति में चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलते रहे हैं। इसलिए अभी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में BJP और SAD के शीर्ष नेतृत्व की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक बातचीत या नया फैसला सामने आता है या नहीं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
NDA सांसदों का संसद की ओर मार्च और छात्र आंदोलन पर विरोध
NDA सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ संसद की ओर किया मार्च, छात्र आंदोलन पर बहस को लेकर टकराव बढ़ा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध मंगलवार को और बढ़ गया। NDA सांसदों ने संसद के मकर द्वार की ओर मार्च कर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। NDA सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष झारखंड में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहा है, जबकि सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के चर्चा में जवाब देने की तैयारी जताई गई है।   ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद निकला मार्च     NDA सांसदों का यह मार्च गठबंधन की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद हुआ। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।   बैठक के बाद NDA सांसद हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर संसद की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष पर छात्र आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया गया।   विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप     NDA नेताओं का कहना है कि सरकार संसद में छात्रों के प्रदर्शन और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत जवाब देने के लिए तैयार हैं।   NDA सांसदों ने इसी आधार पर विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की मांग की। उनका आरोप है कि विपक्ष लगातार हंगामा करके चर्चा और संसदीय कामकाज को बाधित कर रहा है।   विपक्ष की मांग अलग, संसद में जारी गतिरोध     दूसरी ओर विपक्ष छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहा है। विपक्षी सांसदों की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर संसद में बयान दें और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब दें।   लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी विपक्षी दलों से प्रदर्शन समाप्त कर सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। इसके बावजूद गतिरोध जारी रहा।   संसद के बाहर भी आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष     छात्र आंदोलन का मुद्दा अब संसद के अंदर की राजनीति से निकलकर संसद परिसर के विरोध-प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक ओर NDA सांसद विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विपक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है।   ऐसे में मानसून सत्र के दौरान आने वाले दिनों में भी छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और संसद में चर्चा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहने के आसार हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
NDA की मंगल मिलन बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA सांसद
NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक में PM मोदी समेत NDA सांसद जुटे, तिरंगा लहराकर लगाए ‘वंदे मातरम्’ के नारे

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के कई सांसद शामिल हुए। बैठक के दौरान सांसदों ने तिरंगा लहराया और ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाए।   संसद में जारी गतिरोध के बीच हुई बैठक     NDA की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद के मानसून सत्र में कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। ऐसे में ‘मंगल मिलन’ बैठक को NDA सांसदों के बीच समन्वय और आगामी संसदीय रणनीति पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   बैठक में सांसदों के बीच संसद की कार्यवाही को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने और सरकार के विधायी एजेंडे को लेकर चर्चा होने की संभावना रही।   PM मोदी और वरिष्ठ नेता हुए शामिल     बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह समेत NDA के वरिष्ठ नेता और विभिन्न सहयोगी दलों के सांसद मौजूद रहे। NDA संसदीय दल की ऐसी बैठकें गठबंधन के सांसदों के बीच संवाद और रणनीतिक समन्वय के लिए आयोजित की जाती हैं।     तिरंगा लहराकर ‘वंदे मातरम्’ के नारे     ‘मंगल मिलन’ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और NDA सांसदों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर उसे लहराया। इस दौरान ‘वंदे मातरम्’ के नारे भी लगाए गए। बैठक की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह कार्यक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।     मानसून सत्र के लिए रणनीति पर नजर     NDA की बैठक ऐसे वक्त हुई है जब संसद में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है और विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में गठबंधन की एकजुटता और सदन में रणनीति आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहने वाली है।   ‘मंगल मिलन’ बैठक के जरिए NDA नेतृत्व ने अपने सांसदों के बीच समन्वय मजबूत करने के साथ-साथ संसद के बाकी सत्र के लिए राजनीतिक और संसदीय रणनीति पर भी फोकस किया।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
PM MODI Appeal
हर घर तिरंगा अभियान को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की देशवासियों से खास अपील, 13 से 15 अगस्त तक तिरंगा लगाने का आग्रह

नई दिल्ली, एजेंसियां। 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक शामिल होने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने लोगों से 13 से 15 अगस्त के बीच अपने घरों पर तिरंगा फहराने और इस अभियान को जनभागीदारी का उत्सव बनाने का आग्रह किया है।   पीएम मोदी ने क्या अपील की   प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से कहा कि वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों पर तिरंगा फहराएं और अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने लोगों से तिरंगे के साथ सेल्फी लेकर उसे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े मंच पर साझा करने का भी आग्रह किया है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों के मन में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति व्यक्तिगत जुड़ाव और देश के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करना है।   9 से 17 अगस्त तक चलेगा अभियान   ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान 9 से 17 अगस्त तक देशभर में चलाया जा रहा है। अभियान की शुरुआत ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत हुई थी और अब यह व्यापक जनभागीदारी वाले राष्ट्रीय अभियान का रूप ले चुका है। सरकार की ओर से लोगों को घरों के अलावा तिरंगा यात्राओं, रैलियों और अन्य देशभक्ति कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।   इस साल ‘वंदे मातरम्’ का भी खास महत्व   इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। देशभर में इसके सामूहिक गायन सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भी मनाया जाएगा, जबकि 15 अगस्त को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा।   सोशल मीडिया पर भी तिरंगे से जुड़ने की अपील   प्रधानमंत्री की अपील के बाद देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। लोगों को तिरंगा फहराने के साथ अपनी तस्वीरें और सेल्फी साझा कर अभियान की जनभागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।   सरकार का उद्देश्य इस अभियान के जरिए स्वतंत्रता दिवस को केवल एक सरकारी समारोह तक सीमित न रखते हुए हर परिवार और हर नागरिक की भागीदारी वाला राष्ट्रीय उत्सव बनाना है।

abhishek singh अगस्त 11, 2026 0
Narendra Berwal
भारतीय मुक्केबाज ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान के बॉक्सर का मजेदार किस्सा, बोले- ‘मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है’

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में रजत पदक जीतने वाले भारतीय मुक्केबाज नरेंद्र बेड़वाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के एक बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा सुनाया। बेड़वाल ने 2015 के वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में पाकिस्तान के मुक्केबाज के साथ हुए मुकाबले और उसके बाद हुई बातचीत का जिक्र किया। किस्सा सुनते ही प्रधानमंत्री मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।   पाकिस्तान के बॉक्सर ने कहा- ‘नरेंद्र नाम से नफरत हो गई’   नरेंद्र बेड़वाल ने बताया कि 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में उनका मुकाबला पाकिस्तान के एक मुक्केबाज से हुआ था। मुकाबला काफी कड़ा रहा और दोनों खिलाड़ियों को चोटें भी आईं। मुकाबले के बाद पाकिस्तानी मुक्केबाज ने मजाकिया अंदाज में बेड़वाल से कहा कि उसे अब ‘नरेंद्र’ नाम से ही नफरत हो गई है।   बेड़वाल ने बताया कि इसके पीछे वजह भी काफी दिलचस्प थी। उनका नाम नरेंद्र था और उनके कोच का नाम भी नरेंद्र था। यानी मुकाबले के दौरान पाकिस्तानी खिलाड़ी के सामने बार-बार नरेंद्र नाम ही आ रहा था।   प्रधानमंत्री मोदी का नाम सुनकर और बढ़ा मजाक   किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ। बेड़वाल ने बताया कि जब पाकिस्तानी बॉक्सर को यह पता चला कि भारत के प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है, तो उसने मजाक में कहा कि उसके सामने हर तरफ नरेंद्र ही नरेंद्र हैं।   यही बात बेड़वाल ने प्रधानमंत्री मोदी को सुनाई। अपने नाम से जुड़ा यह मजेदार किस्सा सुनकर पीएम मोदी भी हंस पड़े। इस बातचीत ने खिलाड़ियों और प्रधानमंत्री के बीच मुलाकात के माहौल को हल्का-फुल्का और खुशनुमा बना दिया।   राष्ट्रमंडल खेलों में बेड़वाल ने जीता रजत पदक   नरेंद्र बेड़वाल ने 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 90 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में रजत पदक जीता है। खेलों से लौटने के बाद भारतीय दल के पदक विजेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जहां खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा किए। बेड़वाल का यह किस्सा इसी मुलाकात के दौरान सामने आया और प्रधानमंत्री के साथ उनकी बातचीत का खास हिस्सा बन गया।   खेल के मैदान से निकली यादगार कहानी   भारत-पाकिस्तान के खिलाड़ियों के मुकाबले आमतौर पर काफी चर्चा में रहते हैं, लेकिन बेड़वाल द्वारा सुनाया गया यह किस्सा मुकाबले के बाद खिलाड़ियों के बीच होने वाली हल्की-फुल्की बातचीत का एक अलग पहलू दिखाता है।   प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात में बेड़वाल ने इस पुराने अनुभव को याद किया और बताया कि उस मुकाबले के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी ने किस तरह ‘नरेंद्र’ नाम को लेकर मजाक किया था। किस्सा सुनकर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई।

abhishek singh अगस्त 11, 2026 0
ED डायरेक्टर राहुल नवीन को एक साल के सेवा विस्तार की खबर
ED डायरेक्टर राहुल नवीन को एक साल का सेवा विस्तार, अब 13 अगस्त 2027 तक संभालेंगे पद

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक राहुल नवीन का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनके कार्यकाल में विस्तार को मंजूरी दे दी है। सरकारी आदेश के मुताबिक राहुल नवीन अब 13 अगस्त 2027 तक ED निदेशक के पद पर बने रहेंगे। हालांकि, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनका सेवा विस्तार उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 31 जुलाई 2027 के बाद या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, उसी के अनुसार प्रभावी रहेगा।   पहली बार मिला सेवा विस्तार     1993 बैच के इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारी राहुल नवीन सितंबर 2023 से ED का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें 15 सितंबर 2023 को ED निदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इसके बाद 14 अगस्त 2024 को उन्हें पूर्णकालिक ED निदेशक नियुक्त किया गया।   अब यह उनका पहला सेवा विस्तार है।   ED में 2019 में शामिल हुए थे राहुल नवीन     राहुल नवीन नवंबर 2019 में प्रवर्तन निदेशालय में स्पेशल डायरेक्टर (OSD) के तौर पर शामिल हुए थे। उस समय उन्हें Financial Action Task Force (FATF) के साथ भारत के आपसी मूल्यांकन से जुड़े एजेंसी के काम की जिम्मेदारी दी गई थी।   ED देश में वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच करता है। एजेंसी Prevention of Money Laundering Act (PMLA), Foreign Exchange Management Act (FEMA) और Fugitive Economic Offenders Act (FEOA) समेत विभिन्न कानूनों के तहत कार्रवाई करती है।   कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच     राहुल नवीन के कार्यकाल में ED ने कई चर्चित मामलों में जांच शुरू की या आगे बढ़ाई। इनमें I-PAC, रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप और ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों से जुड़े मामले शामिल हैं।   एजेंसी ने रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामलों में भी कार्रवाई की और PMLA के तहत जब्त संपत्तियों के जरिए पीड़ितों को राहत पहुंचाने की प्रक्रिया पर जोर दिया।   अंतरराष्ट्रीय टैक्सेशन में विशेषज्ञता     बिहार से ताल्लुक रखने वाले राहुल नवीन ने आयकर विभाग में करीब 30 वर्षों तक सेवा की है। उन्हें अंतरराष्ट्रीय टैक्सेशन, ट्रांसफर प्राइसिंग और डायरेक्ट टैक्सेशन से जुड़े मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है।   उन्होंने IIT कानपुर से B.Tech और M.Tech की पढ़ाई की है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की Swinburne University of Technology से MBA किया है। उन्होंने प्रत्यक्ष कराधान और अंतरराष्ट्रीय टैक्सेशन से जुड़े विभिन्न विषयों पर किताबों, जर्नल और लेखों में भी योगदान दिया है।   ED निदेशक का कार्यकाल     मौजूदा नियमों के तहत ED निदेशक की नियुक्ति शुरुआती तौर पर दो साल के लिए की जा सकती है। इसके बाद कार्यकाल को अधिकतम तीन बार एक-एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। राहुल नवीन को अब इसी व्यवस्था के तहत एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
Yogi Adityanath
दिल्ली पहुंचे CM योगी आदित्यनाथ, PM मोदी से की मुलाकात; यूपी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात को लेकर आधिकारिक तौर पर इसे सौहार्दपूर्ण बैठक बताया गया है।   PM मोदी से हुई मुलाकात   सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे का प्रमुख कार्यक्रम रही।योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘न्यू इंडिया’ का विजन देने वाला नेता बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन उन्हें सुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।   BJP अध्यक्ष से भी मुलाकात   दिल्ली दौरे के दौरान योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। इन बैठकों को उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
PM MODI
पीएम मोदी ने भारत छोड़ो आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन, देशवासियों से प्रेरणा लेने की अपील

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर भारत छोड़ो आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों और देश की आजादी के लिए अपना योगदान देने वाले वीरों को नमन किया। उन्होंने देशवासियों से स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के त्याग, साहस और संकल्प से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।   9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ था आंदोलन   भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त 1942 को हुई थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संघर्ष को निर्णायक दिशा दी। इसी वजह से 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में याद किया जाता है। आंदोलन का उद्देश्य भारत से ब्रिटिश शासन को समाप्त कर देश को स्वतंत्र कराना था। इसमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों, युवाओं और स्वतंत्रता सेनानियों ने हिस्सा लिया।   स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को किया याद   प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का साहस और त्याग आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के उन महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल है, जिसने देश की आजादी के संकल्प को और मजबूत किया।   देशवासियों से संकल्प लेने की अपील   अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को याद करते हुए देशवासियों से राष्ट्रहित में योगदान देने और देश के विकास के लिए मिलकर काम करने की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आजादी के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके आदर्शों और संकल्प से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
JD Vance PM Modi
जेडी वेंस ने पीएम मोदी को किया फोन, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।   व्यापार और रक्षा सहयोग पर हुई चर्चा   आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी और जेडी वेंस ने दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।   क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत   फोन कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार साझा किए। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।   पीएम मोदी ने जेडी वेंस को दी बधाई   बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस को हाल ही में बेटे के जन्म पर बधाई दी और परिवार के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए जारी उच्चस्तरीय संपर्क का हिस्सा है।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
Dharmendra Pradhan
Gen Z को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: धर्मेंद्र प्रधान, युवाओं की आकांक्षाओं को बताया अहम

भुवनेश्वर, एजेंसियां। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने Gen Z यानी नई युवा पीढ़ी की बढ़ती भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। भुवनेश्वर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि Gen Z ऐसी ताकत है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं और उनके संकल्प को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।   युवाओं की आकांक्षाओं पर जोर   धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश के युवाओं की महत्वाकांक्षाएं और उनका दृढ़ संकल्प बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ युवाओं की भूमिका और उनकी आकांक्षाओं से जुड़े इस दृष्टिकोण को साझा किया है।   उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में Gen Z की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को लेकर चर्चा तेज है। हाल के महीनों में युवा आंदोलन और डिजिटल माध्यमों से युवाओं की सक्रियता ने भी इस पीढ़ी की भूमिका को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाया है।   शिक्षा व्यवस्था और नई पीढ़ी   प्रधान के बयान को शिक्षा व्यवस्था में नई पीढ़ी की जरूरतों और आकांक्षाओं को अधिक महत्व देने की व्यापक बहस से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आज के युवा डिजिटल तकनीक, AI, रोजगार और कौशल आधारित शिक्षा को लेकर पहले की तुलना में अलग अपेक्षाएं रखते हैं।   नई शिक्षा नीति के तहत भी कौशल, बहुविषयक शिक्षा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। ऐसे में Gen Z की बदलती जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को विकसित करना महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।   धर्मेंद्र प्रधान अब पूर्व शिक्षा मंत्री   यहां यह तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि धर्मेंद्र प्रधान अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री नहीं हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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