सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के दान विवाद की जांच, महाराष्ट्र सरकार ने मांगी रिपोर्ट मुंबई, एजेंसियां। मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के दान में कथित गड़बड़ी को लेकर विवाद बढ़ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा मंदिर के दान से जुड़े गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले में रिपोर्ट मांगी है। इस विवाद ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। राज ठाकरे ने लगाए करोड़ों रुपये के आरोप राज ठाकरे ने आरोप लगाया है कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है और इसमें से करीब 18 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष गायब होने का दावा किया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा फिलहाल आरोप के रूप में सामने आया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर सफाई भी सामने आई है और दान से जुड़े रिकॉर्ड तथा व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। सरकार ने मांगी रिपोर्ट विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले से संबंधित रिपोर्ट तलब की है। सरकार की ओर से तथ्यों और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई है. इस बीच भाजपा नेता राम कदम ने राज ठाकरे से उनके आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की है। वहीं शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने मामले की जांच की मांग की है। दान और सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में मामले के बीच मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक ताजा रिपोर्ट में मंदिर में सीसीटीवी व्यवस्था और दान से जुड़ी गतिविधियों को लेकर कई सवाल सामने आने की बात कही गई है। फिलहाल दान की रकम में कथित चोरी या गड़बड़ी के आरोप साबित नहीं हुए हैं। सरकारी रिपोर्ट और आगे होने वाली जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय होती है।
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र के पुणे से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने केवल एक अक्षर बदलकर एक इंजीनियरिंग कंपनी से 10.45 लाख रुपये की ठगी कर ली। इस घटना ने न केवल कंपनी, बल्कि पुलिस को भी हैरान कर दिया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इस तरह की धोखाधड़ी को बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज (BEC) या मैन-इन-द-मिडल (MITM) हमला मानते हैं। पुलिस के अनुसार पुलिस के अनुसार, कालेपडल के हांडेवाड़ी रोड स्थित एक इंजीनियरिंग कंपनी चीन की एक सप्लायर कंपनी से नियमित रूप से कच्चा माल आयात करती है। दोनों कंपनियों के बीच ऑर्डर और भुगतान से जुड़ा पूरा पत्राचार ईमेल के माध्यम से होता था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने चीनी कंपनी की ईमेल आईडी से मिलता-जुलता एक फर्जी डोमेन तैयार किया। उन्होंने असली '.com' डोमेन की जगह '.cam' का इस्तेमाल किया, जो पहली नजर में बिल्कुल असली जैसा दिखाई देता था। फर्जी ईमेल में दावा किया गया कि सप्लायर कंपनी के नियमित बैंक खाते का ऑडिट चल रहा है, इसलिए इस बार भुगतान दुबई स्थित दूसरे बैंक खाते में किया जाए। कंपनी के 25 वर्षीय अकाउंट्स एग्जीक्यूटिव ने ईमेल को असली मानते हुए बिना अतिरिक्त सत्यापन किए 10.45 लाख रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। कुछ सप्ताह बाद असली चीनी सप्लायर ने भुगतान न मिलने की जानकारी मांगी। जब पुणे की कंपनी ने दुबई वाले खाते में रकम भेजने की बात बताई, तब पता चला कि ऐसा कोई निर्देश कभी जारी ही नहीं किया गया था। इसके बाद कंपनी को ठगी का एहसास हुआ और तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। कालेपडल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज पुणे के कालेपडल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस तकनीकी जांच के जरिए फर्जी ईमेल बनाने वाले साइबर अपराधियों और रकम पहुंचने वाले बैंक खातों का पता लगाने में जुटी है। विशेषज्ञों ने कंपनियों को सलाह दी है कि बैंक खाते या भुगतान संबंधी किसी भी बदलाव की पुष्टि हमेशा फोन या आधिकारिक माध्यम से अवश्य करें, ताकि इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सके।
पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के लिए दो बच्चों की सीमा तय करने वाले कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। महाराष्ट्र सरकार की उस नीति की सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब देश में जन्म दर लगातार घट रही है, तो दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को चुनाव लड़ने से वंचित रखने का औचित्य क्या है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि इस विषय पर पहले दिए गए अपने फैसले पर भी दोबारा विचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है। पूर्व सरपंच की अयोग्यता को दी गई है चुनौती यह मामला महाराष्ट्र के काकोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव से जुड़ा है। उन्हें महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत तीसरे बच्चे के जन्म के बाद पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। यह प्रावधान 13 सितंबर 2000 से लागू है, जिसके अनुसार दो से अधिक जीवित बच्चे होने पर कोई व्यक्ति पंचायत और अन्य स्थानीय निकायों का चुनाव नहीं लड़ सकता। पुराने फैसले पर पुनर्विचार के संकेत सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2003 के जावेद बनाम हरियाणा सरकार मामले का भी उल्लेख किया। उस फैसले में अदालत ने हरियाणा के दो-बच्चे संबंधी कानून को संवैधानिक माना था। हालांकि, मौजूदा सुनवाई में अदालत ने कहा कि वर्तमान सामाजिक और जनसंख्या संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए उस निर्णय की दोबारा समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है। घटती जन्म दर पर अदालत की टिप्पणी सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में जन्म दर लगातार कम हो रही है। ऐसे में यह विचार करना जरूरी है कि दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून आज भी प्रासंगिक और संवैधानिक हैं या नहीं। अदालत ने संकेत दिया कि बदलती जनसंख्या परिस्थितियों के मद्देनजर इस नीति का नए सिरे से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। सात राज्यों के कानूनों का होगा अध्ययन सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई करने का फैसला किया है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रुक्मिणी बोबडे को एमिकस क्यूरी (अदालत की सहायता करने वाली वकील) नियुक्त किया है। उन्हें उन सात राज्यों के कानूनों का अध्ययन करने का निर्देश दिया गया है, जहां दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लागू है। इसके साथ ही न्यायालय ने भारत में घटती जन्म दर से संबंधित अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और उपलब्ध आंकड़ों का भी अध्ययन करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई में इन सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
पुणे, एजेंसियां। महाराष्ट्र के पुणे जिले के मोशी स्थित पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में हुए दर्दनाक इमारत हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। लगभग 84 घंटे तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद मलबे और कचरे के ढेर से आखिरी लापता कर्मचारी का शव बरामद कर लिया गया। इसके साथ ही प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन समाप्त करने की घोषणा की। कचरे का पहाड़ गिरने से ढही थी तीन मंजिला इमारत यह हादसा 8 जुलाई को उस समय हुआ, जब भारी बारिश के बीच मोशी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के पास जमा कचरे का विशाल ढेर अचानक खिसककर तीन मंजिला प्रशासनिक भवन पर आ गिरा। इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया और अंदर काम कर रहे कई कर्मचारी मलबे में दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तत्काल राहत अभियान शुरू किया गया। NDRF, सेना और दमकल ने चलाया संयुक्त अभियान बचाव कार्य में NDRF, भारतीय सेना, दमकल विभाग, पुलिस और नगर निगम की टीमें लगातार चार दिनों तक जुटी रहीं। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाया गया। अभियान के दौरान कुल 23 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से 9 की जान बच गई, जबकि 9 लोगों की मौत हो गई। कई घंटों तक अस्थिर मलबे और कचरे के कारण रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। हादसे की जांच शुरू महाराष्ट्र सरकार और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती जांच में लगातार बारिश और कचरे के विशाल ढेर के खिसकने को दुर्घटना की प्रमुख वजह माना जा रहा है। हालांकि यह भी जांच की जाएगी कि सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले के मोशी इलाके में तीन मंजिला इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के करीब 30 घंटे बाद भी एनडीआरएफ, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं। अब तक नौ लोगों को सुरक्षित बचाया गया है, जबकि एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। अब भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका एनडीआरएफ अधिकारियों के अनुसार, मलबे में अभी भी तीन से चार लोगों के दबे होने की आशंका है। बचाव दल हर संभावित स्थान पर सावधानीपूर्वक तलाशी अभियान चला रहा है। अस्थिर इमारत बनी सबसे बड़ी चुनौती एनडीआरएफ के सेकंड-इन-कमांड (ऑपरेशन्स) दीपक तिवारी ने बताया कि इमारत का ढांचा आगे की ओर झुक गया है और कैंटिलीवर जैसी स्थिति में है। इससे पूरी संरचना बेहद अस्थिर हो गई है, जिसके कारण राहत कार्य जोखिम भरा हो गया है। उन्होंने बताया कि मलबे के बीच जमा भारी मलबा और कचरा भी बचाव अभियान को मुश्किल बना रहा है। फिलहाल भारी मशीनों और मैन्युअल तरीके से मलबा हटाया जा रहा है। डॉग स्क्वॉड और तकनीक की मदद से चल रहा सर्च ऑपरेशन बचाव अभियान में आधुनिक तकनीकी उपकरणों के साथ डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली जा रही है। एनडीआरएफ ने पूरी इमारत का तकनीकी सर्वे किया है और अब मलबा हटाकर अंदर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरी सावधानी के साथ चलाया जा रहा है ताकि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। भवन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल मोशी की यह घटना महाराष्ट्र में पहले हो चुके घाटकोपर, ठाणे, भिवंडी और पुणे के अन्य इमारत हादसों की याद दिलाती है। इन मामलों में भी कमजोर निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही को प्रमुख कारण माना गया था। हर बड़े हादसे के बाद जांच और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं भवन निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। जांच के साथ जारी है राहत कार्य फिलहाल घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रशासन ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया है और इमारत गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है, जबकि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच बाद में की जाएगी।
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले दो दिनों में बारिश और तेज हवाओं से जुड़े हादसों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 अन्य घायल हुए हैं। भारी वर्षा के कारण राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। हालात को देखते हुए मुंबई में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं और मौसम विभाग ने शहर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार, भारी बारिश से करीब 100 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। लोनावला में पिछले 48 घंटों के दौरान 625 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि रायगढ़, ठाणे, रत्नागिरी, पालघर और मुंबई के कई इलाकों में भी अत्यधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश से उल्हास, कालू, पिंजल, अंबा, सावित्री, कुंडलिका और पातालगंगा जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इसके चलते बदलापुर, मोहाने और जांभुलपाड़ा सहित कई इलाकों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है। बारिश के कारण कई दर्दनाक हादसे हो रहे है बारिश के कारण कई दर्दनाक हादसे भी सामने आए हैं। मुंबई के मानखुर्द में इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि ठाणे में भवन का हिस्सा ढहने से दो लोग घायल हुए। सतारा में भूस्खलन और पालघर व सिंधुदुर्ग में डूबने की घटनाओं में भी लोगों की जान गई। सिंधुदुर्ग में तेज हवाओं से 30 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। भूस्खलन के बढ़ते खतरे को देखते हुए माथेरान, लोनावला, खोपोली और लोहागढ़ जैसे पहाड़ी पर्यटन स्थलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। एनडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगातार जुटी हुई हैं। मावल और रायगढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि मुंबई-गोवा हाईवे और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित रहा। इस बीच, दक्षिण गुजरात के कई जिलों में भी भारी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने सूरत, नवसारी, वलसाड, डांग, तापी और अन्य जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश तथा तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
पुणे: राष्ट्रीय एकात्मता को समर्पित संस्था भारत भारती का पंचम राष्ट्रीय अधिवेशन पुणे में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तीन दिवसीय यह आयोजन 26 से 28 जुलाई 2026 तक पुणे स्थित नाजोश्री जैन भवन में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अधिवेशन में कश्मीर से कन्याकुमारी तक और कच्छ से कामरूप तक देश के विभिन्न हिस्सों का प्रतिनिधित्व देखने को मिला। पहली बार लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड से भी प्रतिनिधियों की भागीदारी दर्ज की गई, जिससे आयोजन की व्यापकता और अधिक बढ़ गई। राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता पर जोर अधिवेशन के दौरान राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर विशेष चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने भारत की विविधता में एकता को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। झारखंड सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ कार्यक्रम में भाग लेकर आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया। इसरो पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने किया उद्घाटन 26 जुलाई को अधिवेशन का उद्घाटन इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने दीप प्रज्वलन कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं और वैज्ञानिक सोच के बीच गहरा सामंजस्य है और आने वाले समय में भारत वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने विकास के साथ विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सांस्कृतिक और वैचारिक सत्रों में विविध विषयों पर चर्चा दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरसंघचालक रामदत्त चक्रधर ने संबोधित किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति, एकता और राष्ट्रभावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विभिन्न सत्रों के दौरान भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। चावल-मिट्टी संग्रह और भारत माता आरती रहा आकर्षण अधिवेशन की विशेष परंपरा के तहत प्रतिभागियों से उनके घर से एक मुट्ठी चावल और एक मुट्ठी मिट्टी लाने का आग्रह किया गया था। इन्हें मिलाकर अंतिम दिन सामूहिक रूप से खीर तैयार की गई, जो एकता का प्रतीक बनी। साथ ही एकत्रित मिट्टी को भविष्य में भारत माता मंदिर निर्माण में उपयोग किए जाने की योजना है। अंतिम दिन 400 से अधिक प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से भारत माता की आरती की, जिसका दृश्य ड्रोन कैमरे से भी रिकॉर्ड किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम और राष्ट्रभक्ति का माहौल तीन दिनों तक चले इस अधिवेशन में महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। पूरे आयोजन स्थल पर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से वातावरण गूंजता रहा। कार्यक्रम में सरदार वल्लभभाई पटेल, भगवान बिरसा मुंडा, छत्रपति शिवाजी महाराज और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसी महान विभूतियों को भी स्मरण किया गया। अगले अधिवेशन की जिम्मेदारी जयपुर को कार्यक्रम के समापन पर अगले राष्ट्रीय अधिवेशन की जिम्मेदारी जयपुर को सौंपी गई। साथ ही आगामी कार्यकारिणी बैठक और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई।
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र के पुणे में प्रॉपर्टी डीलर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस वारदात के पीछे प्रेम संबंध, परिवार द्वारा तय की गई शादी और पूर्व नियोजित साजिश की अहम भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी सिया गोयल सह-आरोपी चेतन चौधरी से प्रेम करती थी, लेकिन परिवार ने उसकी शादी आर्थिक रूप से संपन्न अग्रवाल परिवार में तय कर दी थी। परिवार को पहले से थी रिश्ते की जानकारी पुलिस जांच में सामने आया है कि जनवरी में आयोजित एक कम्युनिटी क्रिकेट मैच के दौरान सिया और चेतन की नजदीकियों की जानकारी परिवार के कुछ सदस्यों को मिल गई थी। हालांकि, दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति में अंतर होने के कारण सिया की भावनाओं को नजरअंदाज कर उसकी सगाई केतन अग्रवाल से करा दी गई। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि सिया के भाई साहिल गोयल ने यह जानकारी परिवार के अन्य लोगों से साझा की थी या नहीं। इस संबंध में उससे करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई। चैट डिलीट, 2,004 कॉल और फोरेंसिक जांच जांच में यह भी पता चला है कि घटना से पहले और बाद में सिया और चेतन ने अपने मोबाइल फोन से चैट डिलीट कर दी थी। डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने के लिए दोनों के मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं। पुलिस के मुताबिक, पिछले छह महीनों में दोनों के बीच 2,004 कॉल हुईं, जिनकी कुल अवधि लगभग 238 घंटे रही। वारदात वाले दिन दोनों एक कैफे में मिले थे, जहां कथित तौर पर हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया गया। हत्या की साजिश का दावा, जांच जारी पुलिस का दावा है कि लोहागढ़ किले पर पहले से तय इशारे के बाद चेतन चौधरी ने पीछे से केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दे दिया। हालांकि, सिया की मां ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनकी बेटी ट्रेकिंग पर जाना ही नहीं चाहती थी और उसे केतन व उसके परिवार के कहने पर वहां जाना पड़ा। पुलिस फिलहाल सभी डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच कर रही है।
850 सीटों वाली संसद की तैयारी, दो-तिहाई बहुमत के लिए ब्लूप्रिंट तैयार, 44 सांसदों की जरूरत मुंबई, एजेंसियां। मानसून सत्र से पहले लोकसभा में संख्या बल बढ़ाने की राजनीतिक कवायद तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में DMK को अगला लक्ष्य माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मकसद दो-तिहाई बहुमत जुटाकर परिसीमन (850 सीटें करने), महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान करना है। बताया जा रहा है कि पिछले सत्र में परिसीमन समेत अहम बिलों पर जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संख्या बल बढ़ाने की रणनीति बनाई है। चर्चा है कि TMC और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं। लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है इससे लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि अगर सरकार दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई, तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर भी परिसीमन बिल पारित कराया जा सकता है। उद्धव गुट की शिवसेना ने बैठक में सभी सांसदों को बुलाया शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर गुरुवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। पार्टी की ओर से 16 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विभिन्न संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक गुरुवार सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित संसदीय दल के कार्यालय में होगी। 6 सांसदों ने बगावत कर दी है यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब यूबीटी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। स्पीकर को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजने की चर्चा यूबीटी के बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। संजय ने बुधवार सुबह ही पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था। संजय राउत ने बागियों को गाली दी इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के 9 में से सिर्फ 3 सांसद, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत मौजूद रहे। राउत ने कहा कि बाकी सांसदों को खुद सामने आकर अटकलों का खंडन करना चाहिए। शिवसेना में दूसरी टूट शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था।
CCTV में कैद हुई दिल दहला देने वाली घटना महाराष्ट्र के नासिक में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां सर्जरी विभाग में कार्यरत 50 वर्षीय संविदाकर्मी ज्योति शिवाजी आहिरे की लिफ्ट में सिर फंसने से मौत हो गई। यह पूरी घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। सर्जिकल उपकरण ले जाने वाली लिफ्ट बनी मौत का कारण जानकारी के अनुसार, ज्योति आहिरे सर्जरी विभाग में काम कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने सर्जिकल उपकरण ढोने के लिए इस्तेमाल होने वाली फ्रेट लिफ्ट में झांकने की कोशिश की। तभी लिफ्ट अचानक चल पड़ी और उनका सिर उसमें फंस गया। हादसे के तुरंत बाद वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। कई मिनट तक फंसी रहीं सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि घटना के बाद कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन महिला का सिर तुरंत नहीं निकाला जा सका। वह कई मिनट तक लिफ्ट में फंसी रहीं। कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला गया और तत्काल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का केस मृतका के बेटे की शिकायत पर पुलिस ने डॉ. वसंतराव पवार मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया है। पुलिस अब हादसे के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अस्पताल ने दी सफाई अस्पताल प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि यह सामान्य यात्री लिफ्ट नहीं थी, बल्कि सर्जिकल उपकरणों के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली होइस्ट ट्रॉली थी। प्रशासन के मुताबिक, सरकारी विद्युत अभियंता ने जांच में किसी तकनीकी खराबी या यांत्रिक दोष की पुष्टि नहीं की है। सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का दावा अस्पताल का कहना है कि महिला ने निर्धारित सुरक्षा रेखा पार कर ट्रॉली के मार्ग में झांका, जिससे यह दुखद हादसा हुआ। हालांकि, पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।