झारखंड

धनबाद में फिर भू-धंसान, आधा दर्जन घर जमींदोज; सामान और मोटरसाइकिल जमीन में समाई

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
Dhanbad
Dhanbad Land Subsidence

धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच एक बार फिर भू-धंसान की घटना सामने आई है। कतरास थाना क्षेत्र के सेलेक्टेड गोविंदपुर इलाके में मंगलवार रात अचानक जमीन धंसने से करीब छह घर पूरी तरह जमींदोज हो गए। भू-धंसान की चपेट में घरों में रखा सामान और एक मोटरसाइकिल भी जमीन में समा गई। घटना के समय लोगों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन समय रहते घरों से बाहर निकल जाने के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले तेज आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते जमीन धंसने लगी।

 

प्रशासन और BCCL की टीम मौके पर पहुंची, प्रभावित परिवारों को किया जाएगा शिफ्ट

 

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और BCCL के अधिकारी मौके पर पहुंचे। बाघमारा के अंचलाधिकारी गिरिजानंद किस्कू ने बताया कि भू-धंसान में छह मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं और प्रभावित परिवारों को तत्काल बेलगड़िया पुनर्वास कॉलोनी में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम को देखते हुए BCCL को विभिन्न क्षेत्रों में पहले से 20-20 क्वार्टर चिन्हित रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं के दौरान प्रभावित परिवारों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा सके। लगातार हो रही बारिश के कारण कतरास क्षेत्र में भू-धंसान की घटनाएं बढ़ने से स्थानीय लोगों में दहशत और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

झारखंड

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JPSC विवाद पर बोले सीएम हेमंत सोरेन, 'जांच रिपोर्ट आने दें, छात्रों के साथ न्याय होगा'

रांची। झारखंड में JPSC परीक्षा में कथित धांधली को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है और छात्रों को हर हाल में न्याय मिलेगा। नेमरा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, "हम कितनी गंभीरता से काम कर रहे हैं, यह सीना चीरकर नहीं दिखा सकते। जांच एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं। रिपोर्ट आने दीजिए, सरकार पूरी सच्चाई छात्रों और राज्य की जनता के सामने रखेगी।   सीएम हेमंत ने कहा    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और सभी वर्गों की चिंता करती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संवैधानिक प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस मामले को सरकार गंभीरता से लेती है, उसे अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेती है।   कल्पना सोरेन बोलीं- छात्रों की चिंता से सरकार पूरी तरह अवगत   दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं से एकजुट रहने और समाज में विभाजन फैलाने वाली ताकतों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी देश और राज्य की ताकत है, लेकिन उसे सही दिशा देना भी जरूरी है। इस मौके पर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी JPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर बेहद संवेदनशील हैं और सरकार छात्रों की चिंताओं से पूरी तरह अवगत है। उन्होंने कहा कि सरकार मामले का समाधान निकालने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।

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चतरा में मॉब लिंचिंग: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में युवक की पीट-पीटकर हत्या, आठ आरोपी गिरफ्तार

चतरा। झारखंड के चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र में मॉब लिंचिंग की सनसनीखेज घटना सामने आई है। नाबालिग लड़की के कथित अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में ग्रामीणों की भीड़ ने एक युवक को घर से बाहर निकालकर लाठी-डंडों और पत्थरों से बेरहमी से पीट दिया। गंभीर रूप से घायल युवक को पुलिस ने भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर टंडवा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे हजारीबाग रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।   परिजनों के अनुसार, एक दिन पहले शौच के लिए घर से निकली नाबालिग लड़की मंगलवार सुबह घर लौटी और उसने अपने साथ हुई कथित घटना की जानकारी दी। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण आरोपी युवक के घर पहुंच गए। आरोप है कि भीड़ ने युवक के साथ-साथ उसके पिता के साथ भी मारपीट की। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में भी युवक की पिटाई होती रही, हालांकि पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया है।   पुलिस बोली- मौके पर पहुंचने से पहले हो चुका था हमला    टंडवा के एसडीपीओ प्रभात रंजन ने बताया कि पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही भीड़ युवक पर हमला कर चुकी थी। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद घायल युवक को भीड़ से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अन्य हमलावरों की भी पहचान की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून को अपने हाथ में नहीं लेने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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देवघर में श्रावणी मेले के दौरान 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं जारी, एक दिन में 7,717 श्रद्धालुओं का इलाज

देवघर। सावन के पवित्र महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे चिकित्सा सेवाएं जारी रखी हैं। श्रावणी मेले के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए शिविरों और अस्पतालों में एक दिन में 7,717 श्रद्धालुओं का इलाज किया गया। प्रशासन की ओर से कांवड़ियों और अन्य श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।   स्वास्थ्य शिविरों में लगातार पहुंच रहे श्रद्धालु   श्रावणी मेले के दौरान देवघर में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही हो रही है। लंबी दूरी पैदल तय करने वाले कांवड़ियों को थकान, कमजोरी, चोट, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो रही हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए मेला क्षेत्र में जगह-जगह चिकित्सा केंद्र और स्वास्थ्य शिविर बनाए गए हैं, जहां डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार सेवाएं दे रहे हैं।   एक दिन में 7,717 लोगों का उपचार   स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक दिन में 7,717 श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इनमें सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा यात्रा के दौरान चोट लगने और थकान जैसी परेशानियों से जूझ रहे श्रद्धालु भी शामिल रहे। स्वास्थ्य टीमों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया है। जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था भी की गई है।   24 घंटे तैनात हैं डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी   श्रावणी मेले को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा व्यवस्था को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा है। प्रमुख भीड़ वाले क्षेत्रों और कांवड़िया मार्ग पर चिकित्सा टीमों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पर्याप्त दवाइयां, प्राथमिक उपचार सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध रखने पर भी जोर दिया है।   श्रद्धालुओं की सेहत पर प्रशासन की नजर   देवघर में सावन के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था पर भी नजर रख रहा है। श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही है कि लंबी यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीएं और तबीयत खराब होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।   श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए 24 घंटे चिकित्सा व्यवस्था आगे भी जारी रखने की तैयारी है।

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