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Madhuri Dixit’s ₹4.85 Crore Property Deal

माधुरी दीक्षित ने ₹4.85 करोड़ में बेचा मुंबई का ऑफिस, 18 साल में 824% मुनाफा; जानिए 4 बड़ी प्रॉपर्टी डील

surbhi अगस्त 5, 2026 0
Madhuri Dixit sells Mumbai office for ₹4.85 crore after 18 years, highlighting her major real estate deals
Madhuri Dixit Mumbai Real Estate Deals

मुंबई: बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री माधुरी दीक्षित सिर्फ अपनी शानदार अदाकारी के लिए ही नहीं, बल्कि रियल एस्टेट निवेश को लेकर भी सुर्खियों में रहती हैं। अब उनकी एक कमर्शियल प्रॉपर्टी डील सामने आई है, जिसमें उन्होंने मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित अपना ऑफिस स्पेस 4.85 करोड़ रुपये में बेच दिया। खास बात यह है कि इस प्रॉपर्टी को उन्होंने करीब 18 साल पहले महज 52.5 लाख रुपये में खरीदा था।

यानी लंबे समय तक इस प्रॉपर्टी को अपने पास रखने के बाद इसकी कीमत में करीब 824 प्रतिशत का उछाल आया। यह डील ऐसे समय में सामने आई है, जब मुंबई के प्रीमियम इलाकों में कमर्शियल और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट में सेलिब्रिटीज की दिलचस्पी लगातार चर्चा में है।

52.5 लाख की प्रॉपर्टी 4.85 करोड़ में बेची

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक माधुरी दीक्षित ने यह ऑफिस स्पेस 14 मई 2008 को हुए एग्रीमेंट के जरिए 52.5 लाख रुपये में खरीदा था। अब इसे 4.85 करोड़ रुपये में बेचा गया है।

यह ऑफिस अंधेरी वेस्ट में लिंक रोड के पास ओशिवारा स्थित मोरया लैंडमार्क-II प्रेमिसेस कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड की चौथी मंजिल पर है। इसका कारपेट एरिया करीब 1,594.24 वर्ग फुट है और डील में तीन कार पार्किंग स्पेस भी शामिल हैं।

इस बिक्री के लिए करीब 29.10 लाख रुपये की स्टाम्प ड्यूटी चुकाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक प्रॉपर्टी खरीदने वाली कंपनी फ्रेम्स प्रोडक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड है और इसका एग्रीमेंट 23 जून को रजिस्टर हुआ।

मार्च 2026 में लिया नया ऑफिस स्पेस लीज पर

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ माधुरी ने अपना पुराना ऑफिस बेचा, तो दूसरी तरफ इसी साल मार्च में उन्होंने मुंबई के लोअर परेल में एक नया ऑफिस स्पेस पांच साल के लिए लीज पर लिया।

करीब 731 वर्ग फुट के इस ऑफिस में एक कार पार्किंग स्पेस भी है। पांच साल के लीज एग्रीमेंट की कुल किराये की राशि करीब 2.81 करोड़ रुपये बताई गई है। पहले साल का किराया 4.25 लाख रुपये और दूसरे साल में 5 प्रतिशत बढ़कर करीब 4.46 लाख रुपये होने की जानकारी सामने आई है।

जुहू का अपार्टमेंट भी बेच चुकी हैं माधुरी

माधुरी दीक्षित की रियल एस्टेट गतिविधियां सिर्फ ऑफिस स्पेस तक सीमित नहीं हैं। दिसंबर 2025 में उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित अपना एक अपार्टमेंट करीब 3.9 करोड़ रुपये में बेचा था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस अपार्टमेंट को माधुरी और उनके पति ने करीब 1.95 करोड़ रुपये में खरीदा था। यानी इस सौदे में भी संपत्ति की कीमत लगभग दोगुनी हुई।

इसी सोसाइटी में उन्होंने एक अन्य फ्लैट से जुड़ी पार्किंग स्पेस भी करीब 15 लाख रुपये में बेची थी।

2022 में खरीदा था 48 करोड़ का लग्जरी अपार्टमेंट

माधुरी दीक्षित ने साल 2022 में मुंबई के लोअर परेल इलाके में करीब 48 करोड़ रुपये का एक लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा था। यह डील उनके रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में सबसे बड़ी खरीद में से एक मानी जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक अभिनेत्री के पास मुंबई के अलावा अमेरिका के डेनवर में भी एक लग्जरी बंगला है। इसके अलावा लोखंडवाला, जुहू और मलाड में भी उनकी प्रॉपर्टीज का जिक्र सामने आया है।

फिल्मों और रियलिटी शो से भी होती है बड़ी कमाई

माधुरी दीक्षित की कमाई का प्रमुख स्रोत सिर्फ रियल एस्टेट नहीं है। रिपोर्ट में उनकी अनुमानित नेट वर्थ करीब 250 करोड़ रुपये बताई गई है।

फिल्मों के लिए उनकी फीस करीब 4 से 5 करोड़ रुपये बताई जाती है, जबकि ब्रांड एंडोर्समेंट से भी वह अच्छी कमाई करती हैं। वह ऑनलाइन डांस स्कूल के जरिए भी कमाई करती हैं।

रियलिटी शो में जज के तौर पर नजर आने पर उनकी फीस 10 से 20 करोड़ रुपये तक होने का दावा किया गया है। हालांकि सेलिब्रिटी की फीस और नेट वर्थ से जुड़े आंकड़े अक्सर मीडिया रिपोर्टों और अनुमान पर आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

बॉलीवुड में रियल एस्टेट निवेश का बढ़ता ट्रेंड

माधुरी दीक्षित अकेली बॉलीवुड हस्ती नहीं हैं, जिन्होंने प्रॉपर्टी को निवेश के तौर पर इस्तेमाल किया है। ऋतिक रोशन, कार्तिक आर्यन और सैफ अली खान जैसे सितारे भी ऑफिस और अन्य रियल एस्टेट संपत्तियों में निवेश को लेकर चर्चा में रहे हैं।

माधुरी की हालिया डील खास इसलिए है क्योंकि 2008 में खरीदी गई 52.5 लाख रुपये की कमर्शियल प्रॉपर्टी करीब 18 साल बाद 4.85 करोड़ रुपये में बिकी। यह सौदा मुंबई के प्रीमियम रियल एस्टेट बाजार में लंबी अवधि के निवेश की संभावनाओं को भी सामने रखता है।

हालांकि, किसी भी प्रॉपर्टी निवेश से मिलने वाला रिटर्न इलाके, संपत्ति की स्थिति, बाजार की परिस्थितियों, टैक्स और अन्य खर्चों पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ किसी सेलिब्रिटी की डील देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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तृषा पर डबल मीनिंग टिप्पणी से घिरे उदयनिधि स्टालिन, कंगना और चिन्मयी ने जताई नाराजगी; महिला सम्मान पर उठे सवाल

नई दिल्ली: तमिलनाडु में डीएमके नेता और पूर्व अभिनेता उदयनिधि स्टालिन की अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर की गई कथित डबल मीनिंग टिप्पणी पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बयान को लेकर राजनीतिक और फिल्मी जगत से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत तथा गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने भी स्टालिन की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है। विवाद की शुरुआत 3 अगस्त को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक रैली के दौरान हुई। कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान भीड़ की ओर से अभिनेत्री तृषा कृष्णन के नाम के नारे लगाए गए। आरोप है कि इसके बाद स्टालिन ने ऐसा तंज किया, जिसे सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में डबल मीनिंग टिप्पणी के तौर पर देखा गया। स्टालिन ने बाद में अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनका संदर्भ कावेरी नदी के पानी से था। हालांकि, उनकी सफाई के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आया और महिला सम्मान तथा राजनीतिक बहस में निजी टिप्पणियों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे। कंगना रनौत ने जताई कड़ी आपत्ति अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने उदयनिधि स्टालिन की हिरासत को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों पर अश्लील या भद्दे मजाक को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना था कि किसी सभ्य समाज में सार्वजनिक तौर पर गाली-गलौज या डबल मीनिंग और अश्लील मजाक स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए। कंगना ने स्टालिन की हिरासत और बाद में जमानत पर रिहाई का जिक्र करते हुए इसे एक ऐसा उदाहरण बताया, जिससे सार्वजनिक जीवन में भाषा और व्यवहार को लेकर संदेश जाना चाहिए। चिन्मयी श्रीपदा ने राजनीति में महिलाओं को घसीटने पर उठाया सवाल गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने भी सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने राजनीतिक बहस में महिलाओं को घसीटे जाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताओं को महिलाओं को राजनीतिक मुद्दों के बीच लाने के बजाय वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। चिन्मयी ने अपने पोस्ट में तमिलनाडु की राजनीति में पहले सामने आए कुछ विवादित बयानों का भी संदर्भ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक मंचों पर महिलाओं के बारे में भद्दी भाषा का इस्तेमाल पहले भी होता रहा है और ऐसी भाषा को लंबे समय तक सामान्य मानने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब किसी बयान के दो अर्थ निकाले जा सकते हों, तो बाद में पूरी जिम्मेदारी सुनने वालों की समझ पर डाल देना कितना उचित है। चिन्मयी ने जयललिता के संदर्भ का भी किया जिक्र चिन्मयी ने अपने बयान में तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि पुरानी राजनीतिक पीढ़ी में महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल के कई उदाहरण रहे हैं और ऐसे बयानों को राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक नई पीढ़ी के नेताओं से अपेक्षा की जानी चाहिए कि वे सार्वजनिक संवाद का स्तर बेहतर करें, न कि पुरानी राजनीतिक भाषा को दोहराएं। खुशबू सुंदर भी पहले जता चुकी हैं नाराजगी इस विवाद पर अभिनेत्री और बीजेपी नेता खुशबू सुंदर भी पहले प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। उन्होंने कथित टिप्पणी को बेहद घटिया और शर्मनाक बताते हुए कहा था कि राजनीतिक मतभेदों के नाम पर महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। खुशबू सुंदर ने इस तरह की भाषा को लेकर राजनीतिक संस्कृति पर भी सवाल उठाए थे। अब कंगना रनौत और चिन्मयी श्रीपदा की प्रतिक्रिया आने के बाद यह विवाद और व्यापक हो गया है। क्या कहा था उदयनिधि स्टालिन ने? मामला 3 अगस्त को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित रैली से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टालिन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान भीड़ से तृषा कृष्णन के नाम के नारे लगाए गए। इसके बाद स्टालिन ने पानी से जुड़ा एक तंज किया, जिसे आलोचकों ने अभिनेत्री तृषा को लेकर डबल मीनिंग टिप्पणी के रूप में देखा। हालांकि, स्टालिन की ओर से बाद में सफाई दी गई कि उनका इशारा कावेरी के पानी से संबंधित था। यही सफाई अब विवाद के केंद्र में है। एक पक्ष इसे राजनीतिक भाषण में कावेरी जल विवाद का संदर्भ बता रहा है, जबकि आलोचक इसे अभिनेत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी मान रहे हैं। पुलिस कार्रवाई और जमानत से भी बढ़ा विवाद विवाद बढ़ने के बाद उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने हिरासत में लिया और उनके खिलाफ छह धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की बात सामने आई। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी भी दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई से पहले ही उन्हें हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। फिलहाल इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—राजनीतिक मंचों पर नेताओं की भाषा की मर्यादा क्या होनी चाहिए और क्या राजनीतिक विरोध के दौरान किसी महिला अभिनेता या सार्वजनिक हस्ती को निजी टिप्पणियों का निशाना बनाया जाना उचित है? यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है। इसके केंद्र में सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के सम्मान, राजनीतिक संवाद की भाषा और नेताओं की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी आ गए हैं।  

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सलमान खान ने जेल में बिताए दिनों को किया याद
सलमान खान ने याद किए जेल के दिन, बोले- ‘वहां हर दिन एक सबक जैसा था’

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने अपने जीवन के उस दौर को याद किया है, जब उन्हें जेल में समय बिताना पड़ा था। अभिनेता ने जेल में बिताए दिनों और वहां मिले अनुभवों को याद करते हुए बताया कि वह समय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उस दौर ने उन्हें कई चीजें समझने और सीखने का मौका दिया।   जेल में बिताया वक्त रहा चुनौतीपूर्ण     सलमान खान के जीवन में जेल से जुड़ा अध्याय काफी चर्चा में रहा है। अभिनेता को 1998 के काले हिरण शिकार मामले में जेल जाना पड़ा था। उस दौरान उन्हें जेल में समय बिताना पड़ा और यह अनुभव उनके लिए बेहद मुश्किल रहा।   अभिनेता ने अलग-अलग मौकों पर अपने जेल के अनुभवों का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि जेल की जिंदगी फिल्मों में दिखाई जाने वाली सामान्य जिंदगी से बिल्कुल अलग होती है। वहां व्यक्ति को सीमित सुविधाओं के बीच समय बिताना पड़ता है और अपने विचारों के साथ रहने का काफी समय मिलता है।   मुश्किल दौर ने सिखाई कई बातें     सलमान खान ने अपने जेल के दिनों को याद करते हुए संकेत दिया कि उस समय ने उन्हें जिंदगी को एक अलग नजरिए से देखने का मौका दिया। जेल में बिताया समय उनके लिए मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन इसी दौरान उन्हें धैर्य और परिस्थितियों का सामना करने की सीख मिली।   अभिनेता के मुताबिक, मुश्किल परिस्थितियां इंसान को अपने जीवन और फैसलों के बारे में सोचने का मौका देती हैं। उनके जेल के अनुभव भी उनके जीवन के ऐसे ही अध्यायों में शामिल रहे हैं, जिन्हें वह आज पीछे मुड़कर देखते हैं।   सलमान के करियर पर भी पड़ा असर     जेल से जुड़े विवादों के बावजूद सलमान खान ने बॉलीवुड में अपना दबदबा कायम रखा। उनकी फिल्मों और स्टारडम ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल रखा है।   पिछले कई वर्षों में सलमान खान ने अपने निजी जीवन से जुड़े मुश्किल दौर पर कई बार खुलकर बात की है। उनके प्रशंसक भी उनकी जिंदगी के इन अनुभवों में काफी दिलचस्पी दिखाते रहे हैं। जेल के दिनों की उनकी बातें सामने आने पर एक बार फिर अभिनेता के पुराने दौर और उससे जुड़े विवाद चर्चा में आ जाते हैं।

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‘लॉक अप 2’ से हर्षद चोपड़ा हुए बाहर, शिवांगी जोशी के साथ दोस्ती ने बटोरी खूब सुर्खियां

मुंबई, एजेंसियां। रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सज़ा’ के दूसरे सीजन में टीवी अभिनेता हर्षद चोपड़ा का सफर खत्म हो गया। उनके बाहर होने की खबर ने शो के दर्शकों को चौंका दिया। हर्षद को शो में मजबूत और शांत स्वभाव वाले प्रतियोगियों में गिना जा रहा था, ऐसे में उनका एविक्शन कई प्रशंसकों के लिए निराशाजनक रहा।   शिवांगी जोशी के साथ रिश्ते ने खींचा ध्यान   ‘लॉक अप 2’ में हर्षद चोपड़ा और शिवांगी जोशी की दोस्ती लगातार चर्चा में रही। दोनों की नजदीकियों को लेकर शो के अंदर और बाहर कई तरह की बातें हुईं। शिल्पा शिंदे ने दोनों को कई बार ‘लवबर्ड्स’ तक कहा, जिसके बाद हर्षद और शिवांगी ने इस तरह की बातों पर आपत्ति जताई थी। दोनों ने अपने रिश्ते को दोस्ती बताया।   शो में एक मौके पर शिवांगी और हर्षद के बीच मुकाबला भी देखने को मिला। शिवांगी ने हर्षद को हराकर खुद को सुरक्षित किया, लेकिन इसके बाद वह भावुक हो गईं और हर्षद से माफी मांगती नजर आईं। इस घटना ने दोनों की बॉन्डिंग को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।   हर्षद के बाहर होने से फैंस निराश   हर्षद चोपड़ा के एविक्शन के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने निराशा जाहिर की। कई दर्शकों को उम्मीद थी कि वह शो में आगे तक जाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रशंसकों ने उनके निष्कासन को अनुचित भी बताया और माना कि अभिनेता को प्रतियोगिता में और समय मिलना चाहिए था।   हर्षद के बाहर होने के बाद शिवांगी जोशी भी भावुक नजर आईं। बाद की रिपोर्टों में बताया गया कि हर्षद के जाने के बाद शिवांगी को उनकी कमी महसूस हुई और वह उनके बिस्तर की चादर का इस्तेमाल करती दिखाई दीं। इस घटना पर सोशल मीडिया पर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं।   हर्षद-शिवांगी की जोड़ी बनी शो की चर्चा   ‘लॉक अप 2’ में हर्षद और शिवांगी की जोड़ी शो की चर्चित जोड़ियों में शामिल रही। दोनों इससे पहले ‘बड़े अच्छे लगते हैं 4’ में भी साथ काम कर चुके हैं। शो के दौरान उनकी दोस्ती और एक-दूसरे के प्रति समर्थन ने दर्शकों का ध्यान खींचा।   हर्षद के एविक्शन के बाद भी दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चा थमी नहीं। डांस रियलिटी और टेलीविजन जगत से जुड़े कई लोगों की टिप्पणियों के बीच उनकी दोस्ती को लेकर सोशल मीडिया पर अटकलें भी चलती रहीं। हालांकि, दोनों कलाकारों ने अपने रिश्ते को लेकर सार्वजनिक तौर पर किसी रोमांटिक रिश्ते की पुष्टि नहीं की है।

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