नई दिल्ली: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का 1 से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच यह दौरा भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, उन्नत तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता दोनों देशों के लिए साझा चिंता का विषय बनी हुई है। दो दशक में मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी भारत और जापान के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उसी वर्ष दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' का दर्जा दिया। वर्ष 2014 में इसे और आगे बढ़ाते हुए 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' घोषित किया गया। आज दोनों देशों के बीच 70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र, 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता और रक्षा, विदेश एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े नियमित संवाद स्थापित हो चुके हैं। रक्षा और तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग इस बार की वार्ता में दोनों देश रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति', SAGAR (Security and Growth for All in the Region) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव का मेल जापान के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' विजन के साथ देखा जा रहा है। आर्थिक साझेदारी भी होगी मजबूत जापान भारत का प्रमुख निवेशक और आधिकारिक विकास सहायता (ODA) देने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा सहयोग का प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। इसके अलावा जापान भारत में सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। क्या चीन सबसे बड़ा कारण है? विश्लेषकों का मानना है कि भारत-जापान सहयोग के पीछे चीन का बढ़ता प्रभाव एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारण है। जापान पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंतित रहा है। वहीं भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक देश के प्रभुत्व के पक्ष में नहीं है। इसी कारण दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं। हालांकि दोनों देशों का दृष्टिकोण पूरी तरह समान नहीं है। जापान अमेरिका का औपचारिक सहयोगी है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देता है। क्वाड को भी मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-जापान की बढ़ती साझेदारी क्वाड (Quad) को भी और मजबूत करेगी। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और वैकल्पिक आर्थिक ढांचे को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कुछ चुनौतियां भी मौजूद हालांकि मजबूत रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। कई बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में समय और लागत दोनों बढ़ी हैं। सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में दोनों देशों की प्राथमिकताएं पूरी तरह समान नहीं हैं। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन, सुरक्षित सप्लाई चेन, नई तकनीकों के विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। यही कारण है कि जापानी प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली: पंचायती राज संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और ग्रामीण स्थानीय निकायों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए शुक्रवार से केंद्र और राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों की दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। इसमें वर्ष 2026-31 के लिए वित्त आयोग की सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में ग्रामीण स्थानीय निकाय (RLB) अनुदान की संचालन संबंधी गाइडलाइंस, अनुदान जारी करने की प्रक्रिया, वित्तीय अनुपालन, संस्थागत तैयारियों और पंचायतों द्वारा समयबद्ध एवं प्रभावी धन उपयोग जैसे मुद्दों पर मंथन किया गया। पंचायतों को मिलेगा 4.35 लाख करोड़ रुपये का अनुदान 16वें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये के आवंटन की सिफारिश की है। इसमें— 80 प्रतिशत राशि बेसिक ग्रांट के रूप में 20 प्रतिशत राशि प्रदर्शन आधारित (Performance-based) ग्रांट के रूप में दी जाएगी। यह राशि 15वें वित्त आयोग के 2.36 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 84 प्रतिशत अधिक है। पांच वर्षों में बढ़ेगा अनुदान वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार ग्रामीण स्थानीय निकायों को मिलने वाला वार्षिक आवंटन इस प्रकार होगा— 2026-27: ₹55,909 करोड़ 2027-28: ₹71,300 करोड़ 2028-29: ₹92,166 करोड़ 2029-30: ₹1,02,303 करोड़ 2030-31: ₹1,13,558 करोड़ अगर शहरी स्थानीय निकायों के लिए प्रस्तावित ₹2.90 लाख करोड़ को भी शामिल किया जाए, तो स्थानीय निकायों के लिए कुल आवंटन ₹7.91 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। बिहार और झारखंड को मिलेगा बड़ा फायदा बेसिक ग्रांट के तहत बिहार को पांच वर्षों में कुल ₹41,539 करोड़ मिलेंगे। इसमें— 2026-27: ₹6,670 करोड़ 2027-28: ₹7,404 करोड़ 2028-29: ₹8,218 करोड़ 2029-30: ₹9,122 करोड़ 2030-31: ₹10,125 करोड़ वहीं झारखंड को पांच वर्षों में ₹11,385 करोड़ का बेसिक ग्रांट मिलेगा। इसमें— 2026-27: ₹1,828 करोड़ 2027-28: ₹2,029 करोड़ 2028-29: ₹2,253 करोड़ 2029-30: ₹2,500 करोड़ 2030-31: ₹2,775 करोड़ प्रदर्शन आधारित अनुदान भी मिलेगा 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार प्रदर्शन आधारित अनुदान के तहत— बिहार को ₹10,384 करोड़ झारखंड को ₹2,846 करोड़ दिए जाएंगे। इस योजना में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकारें उपलब्ध कराएंगी। स्थानीय निकायों की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर केंद्र सरकार का उद्देश्य पंचायतों को केवल अनुदान देना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके लिए पंचायतों को स्वयं राजस्व जुटाने की क्षमता विकसित करने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विशेष बल दिया जाएगा। राज्यों के अनुभव साझा होंगे कार्यशाला की अध्यक्षता केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने की। इस दौरान विभिन्न राज्यों की सफल पंचायत मॉडल और बेहतर प्रशासनिक पहल को अन्य राज्यों के साथ साझा किया जा रहा है, ताकि पंचायतों के सुशासन, बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और समावेशी ग्रामीण विकास को नई गति मिल सके।
चंडीगढ़: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों ने पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के इनपुट पर कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों को मैड्रिड से हिरासत में लिया है। लंबे समय से फरार गोल्डी ढिल्लों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। सूत्रों के मुताबिक, विदेश में बैठकर भारत में आपराधिक नेटवर्क संचालित करने वाले गोल्डी ढिल्लों की गिरफ्तारी के बाद अब उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। चंडीगढ़ हत्याकांड का बताया जा रहा मास्टरमाइंड जांच एजेंसियों के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों 13 जून 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकी दास की हत्या की साजिश का मुख्य आरोपी है। बताया जा रहा है कि उसने विदेश में बैठकर इस वारदात की पूरी साजिश रची थी। इसके अलावा वह पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों में रंगदारी, टारगेट किलिंग और संगठित अपराध का नेटवर्क संचालित कर रहा था। भारत लाने की तैयारी शुरू स्पेन में हिरासत के बाद अब भारतीय एजेंसियां गोल्डी ढिल्लों के प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया तेज कर सकती हैं। चंडीगढ़ पुलिस भी उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर जानकी दास हत्याकांड में पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब पुलिस लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए समन्वय कर रही थी। 2022 में भारत छोड़कर हुआ था फरार गोल्डी ढिल्लों मूल रूप से पंजाब के राजपुरा का रहने वाला है। शुरुआती दौर में उसके खिलाफ मारपीट, धमकी और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हुए थे। बाद में वह रंगदारी, अवैध हथियारों और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में सक्रिय हो गया। बताया जाता है कि वर्ष 2022 में वह भारत छोड़कर विदेश भाग गया था। इसके बाद उसने विदेश से ही पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में अपना नेटवर्क मजबूत किया और कारोबारियों से रंगदारी वसूलने लगा। कनाडा की घटनाओं से भी जुड़ा नाम जांच एजेंसियों के मुताबिक, कनाडा में हुई कई फायरिंग की घटनाओं में भी गोल्डी ढिल्लों का नाम सामने आया था। उसके कुछ सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनसे पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली थीं। लॉरेंस बिश्नोई गैंग से रहा है संबंध सूत्रों के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ था। हालांकि बाद में दोनों के बीच विवाद बढ़ने के बाद उसने अलग गैंग बनाकर अपना आपराधिक नेटवर्क खड़ा कर लिया। फिलहाल उसके खिलाफ पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में हत्या, रंगदारी, अवैध हथियार और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। अब स्पेन में हुई कार्रवाई के बाद भारतीय एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण और आगे की कानूनी कार्रवाई पर काम कर रही हैं।
नई दिल्ली: देश की कई प्रमुख सुरक्षा और रणनीतिक संस्थाओं को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ईमेल मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में पुलिस ने गाजियाबाद निवासी एक संदिग्ध से पूछताछ की है। शुरुआती जांच में सभी धमकियां फर्जी पाई गई हैं, हालांकि पुलिस ईमेल भेजने के उद्देश्य और पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रही है। 29 जून को मिला था धमकी भरा ईमेल 29 जून को विभिन्न सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों को एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया था। इसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), नागरिक उड्डयन मंत्रालय और दिल्ली-न्यूयॉर्क एयर इंडिया फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। ईमेल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। संबंधित सभी कार्यालयों और परिसरों की तत्काल जांच कराई गई, लेकिन कहीं भी कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। तकनीकी जांच के बाद गाजियाबाद पहुंची पुलिस धमकी भरे ईमेल की तकनीकी जांच के आधार पर दिल्ली पुलिस गाजियाबाद के संयोग नगर स्थित बैंक कॉलोनी पहुंची। यहां 36 वर्षीय निशांत त्यागीसे पूछताछ की गई। पुलिस ने संदिग्ध के घर की तलाशी भी ली, लेकिन वहां से कोई विस्फोटक या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि संदिग्ध वर्ष 2008 से एक गंभीर बीमारी से पीड़ित है और कई प्रतिष्ठित अस्पतालों में उसका इलाज हो चुका है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमकी भरा ईमेल किस उद्देश्य से भेजा गया था और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है या नहीं। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ISRO मुख्यालय में मच गया था हड़कंप धमकी भरे ईमेल के बाद सबसे अधिक सतर्कता ISRO मुख्यालय में बरती गई। ईमेल मिलते ही अधिकारियों ने तत्काल इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर परिसर खाली कराया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। बम निरोधक दस्ता, सुरक्षा एजेंसियां और जांच टीमों ने पूरे परिसर की गहन तलाशी ली, लेकिन जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। जांच जारी दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब ईमेल की तकनीकी जांच, डिजिटल ट्रेल और संदिग्ध की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) की बैठक में करीब ₹52 हजार करोड़ के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी गई। इन प्रस्तावों को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्रदान किया गया है, जिसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की निगरानी, मारक क्षमता और रक्षा तंत्र पहले से अधिक मजबूत होगा। इन हथियारों की खरीद को मिली मंजूरी DAC ने कई अहम रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिनमें शामिल हैं— आकाश तरंग (AKASH TARANG) एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सिस्टम क्या होता है AoN? रक्षा खरीद प्रक्रिया में Acceptance of Necessity (AoN) पहला आधिकारिक चरण होता है। इसका अर्थ है कि सरकार ने संबंधित सैन्य उपकरण की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है। इसके बाद टेंडर, तकनीकी मूल्यांकन और खरीद अनुबंध जैसी प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। भारतीय सेना को मिलेगी नई तकनीकी ताकत रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आकाश तरंग प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। वहीं MPATGM पैदल सैनिकों को दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने की क्षमता देगा। MRSAM मध्यम दूरी से आने वाले लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा। V-SHORADS कम दूरी की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा, जबकि टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम एंटी-टैंक मिसाइलों से बेहतर सुरक्षा देगा। इसके अलावा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन कम लागत में अधिक प्रभावी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। नौसेना के लिए भी कई आधुनिक प्रणालियां मंजूर भारतीय नौसेना के लिए भी कई नई रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इनमें शामिल हैं— मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM) नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्रणालियां समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और नौसैनिक प्लेटफॉर्म के आधुनिकीकरण को नई मजबूती देंगी। वायुसेना को मिलेगा हाई-एल्टीट्यूड सर्विलांस सिस्टम भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड विंग हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों में वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगी। नई सैन्य नेतृत्व टीम की पहली DAC बैठक यह रक्षा खरीद परिषद की पहली बैठक थी, जिसमें नए सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और हाल ही में पदभार संभालने वाले थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ मौजूद रहे। रक्षा बजट में पहले ही हुआ है बड़ा इजाफा केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक है। इसमें ₹2.19 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, मिसाइल, तोप, स्मार्ट हथियार और विभिन्न मानव रहित प्रणालियों की खरीद पर किया जाएगा.
पणजी: दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस पर लगातार हमलावर रहने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) अब गोवा में उसी कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने संकेत दिए हैं कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्षी एकजुटता जरूरी है। गठबंधन पर अंतिम फैसला गोवा इकाई ही करेगी। केजरीवाल ने राज्य नेतृत्व को दी जिम्मेदारी गोवा दौरे पर पहुंचे AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गठबंधन के सवाल पर कहा कि इस संबंध में राज्य नेतृत्व निर्णय लेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष वाल्मिकी नाइक और उनकी टीम जो फैसला करेगी, पार्टी उसका पूरा समर्थन करेगी। केजरीवाल ने कहा कि गठबंधन से जुड़े सभी सवालों का जवाब गोवा इकाई ही देगी, क्योंकि स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को वही बेहतर तरीके से समझती है। गठबंधन वार्ता के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति AAP ने संभावित चुनावी गठबंधन पर बातचीत के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष वाल्मिकी नाइक, कार्यकारी अध्यक्ष गर्सन गोम्स और संगठन सचिव प्रशांत नाइक शामिल हैं। यह समिति कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ प्री-पोल गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा करेगी। पार्टी का कहना है कि उसकी लड़ाई किसी एक दल से नहीं, बल्कि भाजपा की नीतियों और विचारधारा के खिलाफ है। AAP ने विपक्षी दलों से व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील भी की है। कांग्रेस ने भी छोड़े बातचीत के दरवाजे खुले गोवा प्रदेश कांग्रेस ने भी गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडणकर ने कहा कि भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी वोटों का बिखराव रोकना जरूरी है और इस दिशा में बातचीत की जा सकती है। बदलते राजनीतिक समीकरणों पर नजर दिल्ली, पंजाब और गुजरात में कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक राजनीति करने वाली AAP का गोवा में बदला हुआ रुख राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस और AAP के बीच चुनावी समझौता होता है, तो 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव में विपक्ष भाजपा के सामने अधिक मजबूत चुनौती पेश कर सकता है।
बालोतरा/जोधपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (4 जुलाई) को राजस्थान दौरे पर राज्य को ₹1 लाख करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरान वे बालोतरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा जयपुर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास और जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण भी करेंगे। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से राजस्थान के औद्योगिक विकास, रोजगार, परिवहन और बुनियादी ढांचे को नई गति मिलेगी। 13 साल बाद तैयार हुई पचपदरा रिफाइनरी पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा स्थित पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को किया गया था। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपये थी, लेकिन वित्तीय मॉडल में बदलाव और अन्य कारणों से परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 79,459 करोड़ रुपये हो गई। रिफाइनरी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की 74 प्रतिशत और राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिफाइनरी की प्रमुख विशेषताएं 9 एमएमटीपीए क्षमता वाली देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता निर्माण में 16 लाख घन मीटर कंक्रीट और लगभग 3 लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग निर्माण के दौरान लगभग 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार 1 लाख से अधिक लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर राजस्थान पेट्रो जोन, प्लास्टिक पार्क और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा जयपुर मेट्रो फेज-2 का होगा शिलान्यास प्रधानमंत्री जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के फेज-2 का भी वर्चुअल शिलान्यास करेंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत 13,037 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके तहत प्रहलादपुरा से टोड़ी मोड़ तक लगभग 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर से शहर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों सीतापुरा और वीकेआईए को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। एयरपोर्ट के पास भूमिगत मेट्रो स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जिससे जयपुर का सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और मजबूत होगा। जोधपुर एयरपोर्ट को मिलेगा नया टर्मिनल प्रधानमंत्री मोदी जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन करेंगे। वे सुबह लगभग 10:30 बजे जोधपुर वायुसेना एयरपोर्ट पहुंचेंगे और पुराने टर्मिनल से ई-कार्ट के माध्यम से नए टर्मिनल भवन तक जाएंगे। नए टर्मिनल के शुरू होने से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और जोधपुर की हवाई संपर्क क्षमता में भी विस्तार होगा। राजस्थान के विकास को मिलेगी नई रफ्तार सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से राजस्थान में औद्योगिक निवेश, रोजगार, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से पचपदरा रिफाइनरी के संचालन से पश्चिमी राजस्थान को पेट्रोकेमिकल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली: देश में सामान्य से कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने लगी है। स्थिति की समीक्षा के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्षा की कमी से प्रभावित जिलों में जिला स्तर पर कंटीजेंसी प्लान (आकस्मिक योजना) को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए। बैठक में खरीफ बुवाई, मानसून की प्रगति, अल नीनो के संभावित प्रभाव, उर्वरकों की उपलब्धता, खाद्यान्न भंडारण और फसल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। खरीफ बुवाई में 25 फीसदी की कमी कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष जून तक 236.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी पिछले साल की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका असर खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर भी पड़ सकता है। मुख्यमंत्रियों के साथ होगी समीक्षा बैठक बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्षा की कमी से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अलग से बैठक कर कंटीजेंसी प्लान के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। राज्य सरकारों को संभावित सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। 210 जिले अब भी वर्षा की कमी से प्रभावित कृषि मंत्रालय के अनुसार, देशभर में वर्षा की कमी की आशंका वाले 262 संवेदनशील जिलों की पहचान की गई थी। इनमें से हाल की बारिश के बाद 52 जिलों की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन 210 जिले अब भी कमजोर मानसून की मार झेल रहे हैं। वहीं, आठ जिले पूरी तरह सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। कृषि मंत्री ने दिए सतत निगरानी के निर्देश केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अल नीनो के संभावित प्रभावों पर लगातार नजर रखी जाए और तैयार की गई कार्ययोजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर सलाह, बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। मानसून की प्रगति पर मौसम विभाग की नजर बैठक में भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जानकारी दी कि अगले दो से तीन दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ने की संभावना है। पूरे मौसम के दौरान सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान बरकरार है। जलाशयों में जलस्तर चिंता का विषय बैठक में बताया गया कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम है। महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में हाल में बारिश हुई है, लेकिन जलाशयों का स्तर अभी भी संतोषजनक नहीं माना जा रहा है। सूखे की स्थिति पर लगातार नजर कृषि मंत्रालय ने बताया कि फसल मौसम निगरानी समूह की साप्ताहिक बैठकों के माध्यम से सूखे की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। अब तक 15 राज्यों ने इस संबंध में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) की तैयारियों की समीक्षा के साथ-साथ दलहन, तिलहन, कपास, बागवानी फसलों की बुवाई, मंडी कीमतों और खाद्यान्नों के बफर स्टॉक की स्थिति का भी आकलन किया गया।
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक महिला पर अपने पति की हत्या कर शव को घर के बाथरूम के फर्श के नीचे दफनाने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी महिला ने खुद ही पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। पुलिस ने जांच के दौरान बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां से शव बरामद हुआ। गुमशुदगी की शिकायत ने खोला हत्या का राज पुलिस के मुताबिक, 45 वर्षीय सुरेंद्र शर्मा के लापता होने की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को पत्नी रूबी शर्मा के बयानों पर संदेह हुआ। पूछताछ में विरोधाभास मिलने पर पुलिस ने घर की तलाशी ली और बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां सुरेंद्र का शव दबा मिला। शव दबाकर ऊपर डाल दिया था कंक्रीट सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) अमीषा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रूबी शर्मा ने कथित तौर पर पति की हत्या करने के बाद शव को बाथरूम के फर्श के नीचे दबा दिया और ऊपर से कंक्रीट डालकर सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या के पीछे की वजह जानने के लिए उससे पूछताछ की जा रही है। शराब और घरेलू विवाद की बात सामने आई प्रारंभिक जांच और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि पति की शराब की लत और आए दिन होने वाले घरेलू विवादों से परेशान होकर उसने करीब डेढ़ महीने पहले हत्या की थी। पुलिस अभी इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। पड़ोसियों को पहले से था शक स्थानीय निवासी गौरव दीक्षित ने बताया कि सुरेंद्र शर्मा और उनकी पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते थे। सुरेंद्र मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले थे और पिछले नौ वर्षों से आगरा की रेणुका धाम कॉलोनी में परिवार के साथ रह रहे थे। पड़ोसियों के मुताबिक, जब सुरेंद्र कई दिनों तक दिखाई नहीं दिए तो उन्होंने रूबी शर्मा से कई बार उनके बारे में पूछा, लेकिन वह हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर बात टाल देती थी। इसी वजह से आसपास के लोगों को शक होने लगा था। पुलिस कर रही है मामले की विस्तृत जांच पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर हत्या के कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के मामले ने नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि बजरंग दल के संस्थापक और पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने दावा किया है कि उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की है। इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। RSS ने संयम बरतने की अपील की RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने हिंदू समाज से अपील करते हुए कहा कि मामले को लेकर धैर्य बनाए रखें और किसी भी अफवाह या भड़काऊ प्रचार से बचें। उनके अनुसार, कुछ हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी ताकतें इस विवाद का फायदा उठाकर समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर सकती हैं। 'मंदिर प्रबंधन की कमियां दूर हों' होसबाले ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रबंधन और व्यवस्था में यदि कहीं कोई कमी है तो उसे जल्द दूर किया जाना चाहिए, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे। विनय कटियार ने ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की पूर्व भाजपा सांसद और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा की है। कटियार ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उनके इस बयान पर अब तक सरकार या जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब तक आठ गिरफ्तार, दो पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत रायऔर अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। SIT कर रही है पूरे मामले की जांच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) दान प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज अयोध्या राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठनों और नेताओं के बयान सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल सभी की नजर SIT की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 के पास शनिवार सुबह अचानक गोली चलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात एक पीएसी जवान की कार्बाइन हाथ से छूटकर सड़क पर गिर गई, जिसके बाद उससे अचानक फायर हो गया। यह घटना शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है। गोली चलने की आवाज सुनते ही मंदिर परिसर और आसपास मौजूद श्रद्धालुओं में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई। तीन लोग हुए घायल प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, गोली के छर्रे लगने से तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि घटना में किसी की जान नहीं गई। हादसे के कारणों की जांच शुरू पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला कार्बाइन के अचानक गिरने के बाद अनजाने में फायर होने का प्रतीत हो रहा है। घटना की वास्तविक वजह जानने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य घटना के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य कर दी गई है और श्रद्धालुओं के दर्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल, एजेंसियां। राम मंदिर चढ़ावा और चंदा संग्रह से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा और मंदिर प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। भोपाल में महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन और ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ कार्यक्रम में शामिल हुए दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि चंदे में गड़बड़ी हुई है और इसे "आस्था के साथ धोखा" बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था और अब इस मामले में अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर करेंगे। 'आस्था के साथ हुई चोरी, कोर्ट जाऊंगा' दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके वकील ने उन्हें कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी है, क्योंकि उन्होंने भी मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि यह केवल धन की नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था की चोरी का मामला है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने घरों और मंदिरों के बाहर "चंदा चोरों से सावधान" जैसे बैनर लगाएं। महाकाल मंदिर और बीजेपी पर लगाए आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भी चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के कार्यकाल में महाकाल मंदिर की जमीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी संस्था को आवंटित की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है और मंदिर परिसर से जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस संबंध में मंदिर प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है। राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के नाम पर वर्षों से चंदा जुटाया गया, लेकिन उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाए तथा कहा कि वह इस पूरे मामले को कानूनी रूप से चुनौती देंगे। हालांकि, दिग्विजय सिंह के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी या संबंधित मंदिर ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विवाद आगे और तेज होने की संभावना है।
कोलकाता: भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के दिनों में सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर बढ़े तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच वर्षों पुरानी 'मैंगो डिप्लोमेसी' की परंपरा जारी है। बांग्लादेश सरकार ने सद्भावना के प्रतीक के रूप में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को प्रीमियम किस्म के आमों की खेप भेजी है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पहल की पुष्टि करते हुए बताया कि यह उपहार दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की परंपरा का हिस्सा है। 500 किलो आम की खेप पहुंची कोलकाता बांग्लादेश की ओर से 500 किलोग्राम प्रीमियम आम कोलकाता स्थित बांग्लादेश के उप-उच्चायोग भेजे गए। यह खेप जेसोर के बेनापोल सीमा मार्ग के जरिए भारत पहुंची। इस खेप में लोकप्रिय किस्मों हिमसागर, हरिभांगा और आम्रपाली शामिल हैं। बताया गया कि: 100 किलोग्राम आम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए भेजे गए हैं। शेष 400 किलोग्राम आम वरिष्ठ अधिकारियों, राजनयिकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को सद्भावना उपहार के रूप में वितरित किए जाएंगे। शेख हसीना के दौर से चली आ रही है परंपरा भारत और बांग्लादेश के बीच आम और हिलसा मछली का आदान-प्रदान लंबे समय से सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने कार्यकाल के दौरान हर वर्ष भारत के प्रधानमंत्री और पश्चिम बंगाल के नेतृत्व को आम भेजती थीं। हालांकि 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान इस परंपरा में कुछ समय के लिए विराम आया था। अब वर्तमान प्रशासन ने इस परंपरा को फिर से जारी रखा है। सीमा विवाद के बीच बढ़ी चर्चा इस बार आमों की यह खेप ऐसे समय आई है जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ, सीमा प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल के महीनों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' अभियान चलाने की बात कही है। उनके इस रुख को लेकर बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक नेताओं ने आपत्ति भी जताई थी। सीमा पर बढ़ा था तनाव हाल के दिनों में सीमा पार अवैध घुसपैठ और कथित डिपोर्टेशन अभियान को लेकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच भी तनाव और गतिरोध की खबरें सामने आई थीं। ऐसे माहौल में बांग्लादेश की ओर से आम भेजने की इस पहल को दोनों देशों के बीच संवाद और सद्भाव बनाए रखने की एक प्रतीकात्मक कूटनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सांस्कृतिक रिश्तों को बनाए रखने की पहल विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेदों के बावजूद सांस्कृतिक और मानवीय पहल दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संदेश देने का काम करती हैं। 'मैंगो डिप्लोमेसी' भी इसी परंपरा का हिस्सा मानी जाती है, जिसके जरिए कूटनीतिक संवाद के साथ-साथ आपसी सद्भाव को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में वर्ष 2011 की जनगणना के बाद हुए जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee on Demographic Changes - HLCDC) का गठन किया है। गृह मंत्रालय की ओर से गठित यह समिति अवैध घुसपैठ, असामान्य बसावट और जनसंख्या संरचना में आए बदलावों की जांच करेगी तथा एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती राज्यों, महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या परिवर्तन के कारणों का अध्ययन करना और आवश्यक नीति एवं कानूनी सुधारों की सिफारिश करना है। राज्यों को भेजी जाएगी विस्तृत प्रश्नावली समिति ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विस्तृत प्रश्नावली तैयार की है। इसे मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों (DGP) और संबंधित विभागों को भेजा जाएगा, ताकि दौरे से पहले आवश्यक आंकड़े और सूचनाएं जुटाई जा सकें। सरकार का मानना है कि इससे समिति को जमीनी स्तर पर तथ्यात्मक और व्यापक अध्ययन करने में मदद मिलेगी। सीमावर्ती राज्यों और बड़े शहरों पर रहेगा विशेष फोकस सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई सीमावर्ती राज्यों का दौरा करेगी। इसके अलावा समिति देश के प्रमुख महानगरों और औद्योगिक शहरों में भी जनसंख्या पैटर्न और बसावट का अध्ययन करेगी। अमित शाह ने जल्द रिपोर्ट सौंपने के दिए निर्देश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समिति को जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गृह सचिव को भी समिति के कार्य और राज्यों के दौरों के दौरान हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करने को कहा है। अवैध प्रवास पर बन सकती है नई नीति समिति अपने अध्ययन के दौरान अवैध प्रवास, असामान्य जनसंख्या वृद्धि और जनसांख्यिकीय बदलावों के संभावित कारणों का विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर समिति निम्नलिखित विषयों पर सुझाव देगी: अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया हिरासत और निष्कासन की स्थायी व्यवस्था सीमा प्रबंधन को और मजबूत बनाने के उपाय केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की रणनीति आवश्यक कानूनी और नीतिगत सुधार एक साल में सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट गृह मंत्रालय ने समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य दिया है। रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार अवैध घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और जनसंख्या प्रबंधन से जुड़ी नीतियों में बदलाव पर विचार कर सकती है। सरकार का कहना है कि इस अध्ययन का उद्देश्य देश में जनसंख्या से जुड़े बदलावों का तथ्यात्मक और वैज्ञानिक विश्लेषण करना है, ताकि भविष्य की नीतियां सटीक आंकड़ों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर तैयार की जा सकें।
गढ़वा: झारखंड के बरवाडीह को छत्तीसगढ़ के चिरमिरी और अंबिकापुर से जोड़ने वाली प्रस्तावित रेल लाइन के रूट में बदलाव को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल लाइन निर्माण संघर्ष समिति ने मांग की है कि परियोजना का निर्माण पुराने प्रस्तावित मार्ग से ही किया जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि रूट बदला गया तो क्षेत्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। बड़गड़ में हुई संघर्ष समिति की बैठक संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को गढ़वा जिले के बड़गड़ स्थित राजकीय मध्य विद्यालय परिसर में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें बड़गड़, भंडरिया और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में प्रस्तावित रेल परियोजना का मार्ग बदलने के निर्णय का सर्वसम्मति से विरोध किया गया। 'रूट बदला तो पिछड़ जाएगा पूरा इलाका' बैठक को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि पुराने सर्वेक्षण वाले मार्ग को छोड़कर नई रेल लाइन किसी अन्य रूट से बनाई गई तो बड़गड़ और भंडरिया जैसे क्षेत्र रेल संपर्क से वंचित रह जाएंगे, जिससे विकास पर गंभीर असर पड़ेगा। समिति के पदाधिकारी जयप्रकाश मिंज ने कहा कि बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल परियोजना इस आदिवासी और पिछड़े इलाके के विकास की आधारशिला है। रूट बदलने से स्थानीय लोगों के रोजगार, शिक्षा और व्यापार के अवसर प्रभावित होंगे। 'वर्षों की तैयारी को नजरअंदाज किया जा रहा' समिति के सदस्य आनंद सोनी ने कहा कि पुराने रेल मार्ग के लिए वर्षों पहले सर्वेक्षण सहित कई तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी थीं। ऐसे में अचानक नया रूट तय करना क्षेत्र की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार से पुराने प्रस्तावित मार्ग को बहाल करने की मांग की। 65 एकड़ रेलवे जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप बैठक में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से पहुंचे प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि परियोजना के तहत प्रस्तावित रेलवे जंक्शन पहले सरनाडीह गांव में बनाया जाना था। उनका दावा है कि रेलवे की करीब 65 एकड़ भूमि आज भी सरकारी रिकॉर्ड में रेलवे के नाम दर्ज है, लेकिन उस पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने कथित रूप से अवैध कब्जा कर रखा है। इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की जा चुकी है और मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी लंबित बताया गया। जनजागरण अभियान और आंदोलन की चेतावनी बैठक में निर्णय लिया गया कि पुराने प्रस्तावित रेल मार्ग को बहाल कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही रेल मंत्रालय, जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद बैठक में जिला परिषद प्रतिनिधि राधेश्याम जायसवाल, मुखिया प्रतिनिधि दिनेश लकड़ा, सत्यानंद बाखला, विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश, भाजपा मंडल अध्यक्ष बजरंग प्रसाद, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन मिंज सहित विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रेल परियोजना क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके मूल रूट में किसी भी बदलाव का वे पुरजोर विरोध करेंगे।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रस्तावित और मौजूदा 'यूजरनेम फीचर' को लेकर सख्त रुख अपनाया है। WhatsApp को नोटिस जारी करने के बाद अब सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Telegram और Signal को भी नोटिस भेजकर उनके यूजरनेम सिस्टम और उससे जुड़े सुरक्षा उपायों पर जवाब मांगा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली धोखाधड़ी, फर्जी पहचान (Impersonation) और साइबर अपराधों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं। Telegram और Signal से मांगा जवाब सरकार ने नोटिस में पूछा है कि दोनों प्लेटफॉर्म अपने यूजरनेम फीचर को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क देते हैं और यह फीचर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस तरह काम करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, Telegram को भेजे गए नोटिस में सरकार ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि उसे यूजरनेम फीचर बनाए रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि Telegram और Signal पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है, जिससे बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी यूजर्स एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं। WhatsApp को भी भेजा गया था नोटिस इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा था कि जब तक इस विषय पर विस्तृत चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च नहीं किया जाए। सरकार की चिंता है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम आधारित पहचान से ऑनलाइन ठगी, फर्जी प्रोफाइल और पहचान छिपाकर अपराध करने के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। आईटी नियमों के तहत मांगा जवाब सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि प्रस्तावित फीचर को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। नोटिस में कहा गया है कि यदि यह फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना लागू किया जाता है, तो इससे साइबर अपराध और ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है। WhatsApp ने किया फीचर का बचाव WhatsApp ने सरकार की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रस्तावित यूजरनेम फीचर में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। कंपनी का दावा है कि इसमें फर्जी पहचान, प्रतिरूपण (Impersonation) और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय पहले से शामिल किए गए हैं। भारत है सबसे बड़ा बाजार भारत WhatsApp के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। देश में WhatsApp के करीब 50 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। वहीं, Telegram और Signal के भी लाखों सक्रिय यूजर्स हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन पहचान और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एलिवेटेड रोड पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब चलती कार के अंदर अचानक एक जहरीला कोबरा सांप दिखाई दिया। घटना बुधवार सुबह की बताई जा रही है। कार चला रही महिला ने घबराने के बजाय बेहद सूझबूझ का परिचय देते हुए वाहन को सुरक्षित सड़क किनारे रोका और तुरंत ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी। समय रहते कार्रवाई होने से बड़ा हादसा टल गया। कार के अंदर दिखा कोबरा, तुरंत रोकी गाड़ी जानकारी के मुताबिक महिला नोएडा की ओर जा रही थीं। इसी दौरान उन्हें कार के अंदर एक जहरीला कोबरा दिखाई दिया। सांप को देखते ही उन्होंने घबराने के बजाय संयम बनाए रखा और सुरक्षित स्थान पर कार रोककर बाहर निकल गईं। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी गई। ट्रैफिक पुलिस और रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा सूचना मिलते ही ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास का ट्रैफिक नियंत्रित किया। बाद में रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक कार के भीतर मौजूद कोबरा को सुरक्षित बाहर निकाला। पूरी कार्रवाई के दौरान किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मी और रेस्क्यू टीम कार से कोबरा को निकालते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स महिला की हिम्मत और ट्रैफिक पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं। यूपी पुलिस से जुड़े अकाउंट ने भी किया शेयर UP POLICE NEWS @UPPOLICE_NEWS5 नाम के एक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से भी घटना का वीडियो साझा किया गया है। पोस्ट में दावा किया गया कि गाजियाबाद के एलिवेटेड रोड पर चलती कार में कोबरा निकलने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू किया और संभावित दुर्घटना को टाल दिया। सावधानी और सूझबूझ से टला बड़ा खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन चलाते समय कार में सांप दिखाई दे तो घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर गाड़ी रोकें, वाहन से बाहर निकलें और तुरंत पुलिस या वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना दें। खुद सांप को पकड़ने या हटाने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है।
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना किसी भी नागरिक को तड़ीपार (Externment) करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने मुंबई पुलिस द्वारा एसडीपीआई नेता सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ जारी तड़ीपार आदेश को रद्द करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति माधव जमदार की एकल पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना और नारे लगाना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत तड़ीपार जैसी कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती। क्या था मामला? 49 वर्षीय सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी, जो सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव हैं और लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं, ने मुंबई पुलिस के तड़ीपार आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मुंबई पुलिस ने वर्ष 2019 से 2024 के बीच उनके खिलाफ दर्ज कई एफआईआर का हवाला देते हुए उन्हें एक वर्ष के लिए मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और आसपास के क्षेत्रों से तड़ीपार कर दिया था। किन मामलों में दर्ज हुई थीं एफआईआर? सईद अहमद के खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले विभिन्न विरोध प्रदर्शनों से जुड़े थे। इनमें नागरिकता संशोधन कानून (CAA), एनआरसी, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, बाबरी मस्जिद विध्वंस, वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार और बढ़ती ईंधन कीमतों के विरोध में आयोजित प्रदर्शन शामिल थे। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता पयोशी रॉय ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कुल पांच एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें अधिकांश मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 के तहत दर्ज किए गए थे, जो सरकारी आदेश की अवहेलना से संबंधित है। कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिकों का मूल अधिकार है। अदालत ने कहा कि प्रशासन केवल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के आधार पर किसी व्यक्ति को समाज के लिए खतरा मानकर तड़ीपार नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी कार्रवाई संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के विपरीत है। फैसले का महत्व बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना या उसके फैसलों का शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध नहीं है और ऐसे मामलों में प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कानून की सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव के बीच दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में शुक्रवार देर रात एक बस को रोककर भाजपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। कार्यकर्ताओं को शक था कि बस में सवार व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय हैं। हालांकि पुलिस की जांच में यह आशंका गलत साबित हुई और मामला शांत हो गया। शक के आधार पर रोकी गई बस प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं ने सूचना मिलने के बाद बस को रोक लिया और एक यात्री से पूछताछ करते हुए उसके साथ बदसलूकी की। इस दौरान कुछ समय के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित यात्री की पहचान की जांच शुरू की। पुलिस जांच में सामने आई सच्चाई पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति को अभिषेक बनर्जी का PA समझा जा रहा था, वह सुमित रॉय नहीं बल्कि शरीफुल आलम निकला। पुलिस ने बताया कि शरीफुल आलम पहले अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस अधिकारी रह चुके हैं। वर्तमान में वह दक्षिण दिनाजपुर जिले के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (Information & Cultural Affairs) में कार्यरत हैं। पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने बस को आगे जाने की अनुमति दे दी और स्थिति सामान्य हो गई। भाजपा ने क्या कहा? गंगारामपुर नगर भाजपा अध्यक्ष वृंदावन घोष ने कहा कि स्थानीय लोगों को संदेह था कि वाहन में अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी सुमित रॉय मौजूद हैं। उन्होंने कहा, "जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, हमने पुलिस प्रशासन को सूचित किया। जांच के दौरान पता चला कि वह व्यक्ति सुमित रॉय नहीं है, बल्कि पहले अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात अधिकारी रह चुका है। गलतफहमी दूर होने के बाद पुलिस ने वाहन को जाने दिया।" तनाव के बीच हुई घटना यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी गर्म है। हाल के दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों के बीच कई टकराव और विरोध-प्रदर्शन की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे माहौल में गंगारामपुर की यह घटना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि सामने नहीं आई है और पहचान की पुष्टि होने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया।
पुणे: मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में गिरफ्तार सिया गोयल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब 15 सेकेंड के इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले की जांच में एक नया पहलू जुड़ गया है। वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नाइटक्लब में फोन पर बातचीत का वीडियो बताया जा रहा है कि यह वीडियो दिसंबर 2025 का है। वीडियो में सिया गोयल एक नाइटक्लब में दिखाई दे रही हैं। उनके हाथ में बीयर की बोतल जैसी वस्तु नजर आती है और वह मोबाइल फोन पर किसी से बात करती दिख रही हैं। वीडियो की शुरुआत में सिया फोन उठाकर "कौन?" कहती हैं। तेज संगीत के कारण वह एक कान पर हाथ रखकर कॉल सुनने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह कथित तौर पर गुस्से में कहती सुनाई देती हैं, "पहले चीट करता है, फिर मुझे ही कॉल करता है।" जांच में नया एंगल वीडियो सामने आने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि सिया गोयल उस समय किससे बात कर रही थीं। साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि उन्होंने जिस व्यक्ति पर धोखा देने का आरोप लगाया, वह कौन था और क्या उसका इस मामले से कोई संबंध है। अभी तक पुलिस ने इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही यह पुष्टि की है कि इसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। शराब पीने को लेकर भी चर्चा पिछले सप्ताह कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पुलिस हिरासत के दौरान सिया गोयल ने बीयर की मांग की थी। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस द्वारा मना किए जाने के बाद उन्होंने दोबारा ऐसी मांग नहीं की। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि उन्हें शराब पीने की आदत थी। परिवार ने आरोपों को बताया गलत सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने इन सभी दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी के शराब पीने, पार्टी करने या बीयर मांगने संबंधी बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनकी बेटी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की जांच जारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।
पुणे: केतन अग्रवाल की मौत पर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर मजाक उड़ाने वाली पोस्ट करना डॉ. मुस्कान सोनी को भारी पड़ गया। ऑल इंडिया डेंटल स्टूडेंट्स एंड सर्जन्स एसोसिएशन (AIDSA) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें संगठन की सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से पांच वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। एसोसिएशन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डॉ. मुस्कान सोनी का आचरण संगठन की आचार संहिता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के विपरीत पाया गया। इसलिए उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई है। विवादित इंस्टाग्राम पोस्ट बनी कार्रवाई की वजह AIDSA के अनुसार, केतन अग्रवाल की दर्दनाक मौत के बाद डॉ. मुस्कान सोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसे मृतक का मजाक उड़ाने वाला और असंवेदनशील माना गया। संगठन का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां न केवल पीड़ित परिवार की भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि संस्था की गरिमा और पेशेवर नैतिकता के भी खिलाफ हैं। पांच साल तक लागू रहेगा निलंबन जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में डॉ. मुस्कान सोनी संगठन की किसी भी गतिविधि, पद या सदस्यता से जुड़ी भूमिका नहीं निभा सकेंगी। सक्षम प्राधिकारी परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में इस आदेश की समीक्षा या संशोधन कर सकता है। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी इस बीच पुणे पुलिस केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां केतन के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद केतन का मोबाइल कुछ समय तक उनकी मंगेतर सिया गोयल के पास था, जिसके बाद फोन परिवार को सौंप दिया गया। अब यह जांच की जा रही है कि फोन से कोई डिजिटल साक्ष्य मिटाया गया या उसके साथ छेड़छाड़ की गई। 18 जून को हुई थी घटना पुलिस के मुताबिक, 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल को कथित रूप से खाई में धक्का दे दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। केतन और सिया की शादी इसी वर्ष नवंबर में प्रस्तावित थी। घटना के बाद पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों सहित मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। घटनास्थल पर कराया गया सीन रीक्रिएशन जांच के क्रम में पुलिस दोनों आरोपियों को अलग-अलग समय पर लोहागढ़ किले लेकर गई, जहां कथित घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (सीन रीक्रिएशन) कराया गया। पुलिस का कहना है कि इससे घटना के क्रम और दोनों आरोपियों की भूमिका को समझने में मदद मिल रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।