Reliance Industries

Anant Ambani announces the donation of 25 electric buses to Tirumala Tirupati Devasthanams (TTD) to promote green mobility and sustainable transportation.
अनंत अंबानी का TTD को बड़ा तोहफा, 25 इलेक्ट्रिक बसें दान; ड्राइवरों के वेतन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी खर्च उठाएंगे

  रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को 25 इलेक्ट्रिक बसें दान करने की घोषणा की है। यह पहल करीब 27.5 करोड़ रुपये की लागत वाली है और इसका उद्देश्य तिरुमला क्षेत्र में ग्रीन और सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत केवल बसें ही नहीं दी जाएंगी, बल्कि उनके संचालन से जुड़ी अहम जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखा जाएगा। ड्राइवरों के वेतन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भी जिम्मेदारी रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज इन इलेक्ट्रिक बसों के लिए: 50 ड्राइवरों के वेतन का खर्च वहन करेगी आधुनिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी बसों के सुचारू संचालन के लिए तकनीकी सहयोग भी देगी इस कदम से TTD की परिवहन व्यवस्था और अधिक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनने की उम्मीद है। तिरुमला मंदिर में किए भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन इस पहल से पहले अनंत अंबानी ने रविवार सुबह तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने पारंपरिक सफेद धोती और शॉल पहनकर मंदिर की प्रातःकालीन सुप्रभात सेवा में हिस्सा लिया। दर्शन के बाद उन्होंने परंपरा के अनुसार अपने बाल भी भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित किए, जो श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। गोशाला के आधुनिकीकरण में भी सहयोग का संकल्प अनंत अंबानी ने इस दौरान TTD की गोशाला के आधुनिकीकरण में सहयोग देने का भी संकल्प लिया। यह पहल उनकी वनतारा (Vantara) परियोजना की तर्ज पर की जाएगी, जिसका उद्देश्य पशु संरक्षण और बेहतर देखभाल सुविधाएं विकसित करना है। इससे गोशाला में आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में अहम कदम इलेक्ट्रिक बसों की यह पहल न केवल धार्मिक पर्यटन को बेहतर बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Reliance Industries
मुकेश अंबानी ने तय किया रिलायंस का उत्तराधिकार, बच्चों को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

मुंबई, एजेंसियां। रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आम बैठक (AGM) में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी के उत्तराधिकार (सक्सेशन) को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने बताया कि रिलायंस के दैनिक संचालन की जिम्मेदारियां उनके तीनों बच्चे आकाश अंबानी, ईशा अंबानी और अनंत अंबानी को सौंपने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि कंपनी का भविष्य सुरक्षित हाथों में है और नई पीढ़ी रिलायंस को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।   तीनों बच्चों को मिली अलग-अलग जिम्मेदारी मुकेश अंबानी ने बताया कि तीनों बच्चे पिछले तीन वर्षों से रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ईशा अंबानी कंपनी के कंज्यूमर और रिटेल कारोबार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, जबकि आकाश अंबानी टेलीकॉम और डिजिटल टेक्नोलॉजी बिजनेस का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं अनंत अंबानी ऊर्जा क्षेत्र और नए एनर्जी प्रोजेक्ट्स की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीनों अलग-अलग क्षेत्रों का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य रिलायंस के समग्र विकास को आगे बढ़ाना है।   परिवार के पुराने विवाद से लिया सबक मुकेश अंबानी ने भले ही अपने संबोधन में पारिवारिक विवाद का सीधा उल्लेख नहीं किया, लेकिन रिलायंस में उत्तराधिकार की स्पष्ट व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया। धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद वसीयत नहीं होने के कारण कंपनी के नियंत्रण को लेकर दोनों भाइयों के बीच लंबा विवाद हुआ था। माना जा रहा है कि उसी अनुभव से सीख लेते हुए मुकेश अंबानी ने समय रहते अगली पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपने और कारोबारी ढांचे को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया पूरी की है।   500 युवा नेताओं पर भी भरोसा मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस सिर्फ परिवार पर निर्भर नहीं है, बल्कि कंपनी ने 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग के करीब 500 युवा नेताओं की भी मजबूत टीम तैयार की है। ये युवा तकनीक, नवाचार और आधुनिक कारोबारी सोच के साथ कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अनंत अंबानी की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा, "बहुत बढ़िया अनंत।" अंबानी का कहना था कि अगली पीढ़ी और युवा नेतृत्व मिलकर रिलायंस के भविष्य को और मजबूत बनाएंगे।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Share Market
लाल निशान पर बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स 607 अंक टूटा, निफ्टी 154 अंक फिसला

मुंबई, एजेंसियां। पिछले पांच कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर शुक्रवार को विराम लग गया। वैश्विक संकेतों और आईटी सेक्टर में तेज बिकवाली के चलते भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ। BSE Sensex 607.08 अंक यानी 0.78 फीसदी की गिरावट के साथ 76,802.90 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 154.90 अंक यानी 0.64 फीसदी फिसलकर 24,013.10 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट से निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा और बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली।   आईटी सेक्टर बना गिरावट की सबसे बड़ी वजह बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव आईटी शेयरों की बिकवाली से आया। वैश्विक आईटी कंपनी Accenture द्वारा राजस्व वृद्धि का अनुमान घटाकर 3-4 फीसदी किए जाने के बाद भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.5 फीसदी से अधिक टूट गया। Infosys के शेयर करीब 8 फीसदी और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयर लगभग 6 फीसदी तक लुढ़क गए, जिससे पूरे बाजार पर दबाव बना रहा।   रिलायंस की AGM पर रही नजर, रुपया हुआ मजबूत दिनभर निवेशकों की नजर Reliance Industries की 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) पर भी रही। कंपनी ने Jio Platforms के आईपीओ के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने की घोषणा की, हालांकि इसके बावजूद रिलायंस का शेयर हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया।   शेयर बाजार में कमजोरी के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार से राहत मिली। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 94.33 (अनंतिम) पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम है। यदि यह स्तर टूटता है तो अगले सप्ताह बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को वैश्विक संकेतों और आईटी कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Stock market screen showing Sensex and Nifty gains with Reliance Industries leading the rally.
Share Market Update: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला, रिलायंस में सबसे ज्यादा बढ़त

नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज सकारात्मक शुरुआत देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंक से अधिक की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 23,300 के स्तर को पार कर गया। सुबह करीब 9:45 बजे सेंसेक्स 430.61 अंक यानी 0.58 फीसदी की बढ़त के साथ 74,349.37 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 114.45 अंक या 0.49 फीसदी चढ़कर 23,356.55 अंक पर पहुंच गया। इस बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.2 फीसदी कमजोर होकर 95.54 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.35 के स्तर पर बंद हुआ था। रिलायंस इंडस्ट्रीज में सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 शेयर हरे निशान में खुले। सबसे ज्यादा बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में दर्ज की गई, जो करीब 1.5 फीसदी मजबूत हुए। इसके अलावा इन शेयरों में भी तेजी रही: हिंदुस्तान यूनिलीवर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) इन्फोसिस ट्रेंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) लार्सन एंड टुब्रो (L&T) एचडीएफसी बैंक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) इन शेयरों में रही कमजोरी दूसरी ओर कुछ प्रमुख शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली। इनमें शामिल हैं: बजाज फिनसर्व पावरग्रिड टेक महिंद्रा एचसीएल टेक महिंद्रा एंड महिंद्रा सन फार्मा मारुति सुजुकी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन ब्रॉडर मार्केट में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.01 फीसदी की बढ़त रही। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.25 फीसदी मजबूत हुआ। सेक्टरवार प्रदर्शन आज के कारोबार में FMCG सेक्टर सबसे मजबूत रहा। निफ्टी FMCG इंडेक्स में लगभग 1 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा: आईटी सेक्टर में खरीदारी प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में मजबूती ऑयल एंड गैस सेक्टर में बढ़त वहीं, मेटल और ऑटो सेक्टर में दबाव देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड 0.65 फीसदी बढ़कर 92.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट की कीमत 1.31 फीसदी बढ़कर 97.19 डॉलर प्रति बैरल हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।  

surbhi जून 10, 2026 0
Gautam Adani and Mukesh Ambani amid rising stock market interest and changing foreign investor strategy in India.
Ambani vs Adani: विदेशी निवेशकों का बदला मूड, अडानी ग्रुप पर बढ़ा भरोसा

भारत के दो बड़े उद्योगपति Gautam Adani और Mukesh Ambani के बीच कारोबारी मुकाबला एक बार फिर चर्चा में है। हाल के महीनों में शेयर बाजार में आई तेजी और विदेशी निवेशकों की बदलती रणनीति ने Adani Group को मजबूत बढ़त दिलाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की दिग्गज निवेश कंपनी Capital Group ने हाल में अडानी ग्रुप की कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जबकि Reliance Industries में अपनी हिस्सेदारी कम की है। अडानी ग्रुप की कंपनियों में बढ़ा निवेश ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Capital Group ने हाल में अडानी ग्रुप की तीन कंपनियों में 2 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। बताया जा रहा है कि: Adani Ports and Special Economic Zone में करीब 2% हिस्सेदारी खरीदी गई Adani Power में 1.5% से 2% तक निवेश बढ़ाया गया Adani Green Energy में भी हिस्सेदारी खरीदी गई 5 मई को अडानी पोर्ट्स में लगभग 74.86 अरब रुपये की हिस्सेदारी खुले बाजार से खरीदी गई थी। रिलायंस में कम हुई होल्डिंग दूसरी ओर Reliance Industries में कैपिटल ग्रुप की हिस्सेदारी लगातार कम होती दिख रही है। मार्च 2026 तक ग्रुप के पास रिलायंस के करीब 142 मिलियन शेयर थे छह साल पहले यह आंकड़ा लगभग 500 मिलियन था मार्च 2017 में यह करीब 755 मिलियन शेयर तक पहुंचा था इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि विदेशी निवेशकों का फोकस धीरे-धीरे अडानी ग्रुप की ओर बढ़ रहा है। शेयर बाजार में किसका प्रदर्शन बेहतर? पिछले एक साल में अडानी ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। अडानी ग्रुप के शेयरों का प्रदर्शन Adani Power : लगभग 94% की तेजी Adani Green Energy : करीब 35% की बढ़त Adani Ports and Special Economic Zone : लगभग 25% की तेजी वहीं Reliance Industries के शेयर में पिछले एक साल में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में क्या हैं मौजूदा भाव? फिलहाल: Adani Ports and Special Economic Zone का शेयर लगभग 1786 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है Adani Power करीब 220 रुपये पर कारोबार कर रहा है Adani Green Energy में भी तेजी बनी हुई है Reliance Industries का शेयर करीब 1355 रुपये के स्तर पर है क्यों बदल रहा है निवेशकों का नजरिया? विशेषज्ञों का मानना है कि: अडानी ग्रुप ने इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर में तेजी से विस्तार किया है विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है ग्रीन एनर्जी और पोर्ट बिजनेस में ग्रुप की मजबूत मौजूदगी निवेशकों को आकर्षित कर रही है वहीं रिलायंस के शेयरों में हालिया सुस्ती और निवेशकों की मुनाफावसूली भी इसकी एक वजह मानी जा रही है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Traders monitor falling Sensex and Nifty screens amid crude oil surge and market selloff
शेयर बाजार में भारी गिरावट, Sensex 1000 अंक टूटा; कच्चे तेल और PM मोदी के बयान से बढ़ी चिंता

शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।  

surbhi मई 11, 2026 0
satellite communication concept showing LEO satellites and global internet connectivity network
रिलायंस का बड़ा दांव: सैटेलाइट कम्युनिकेशन में अरबों डॉलर निवेश की तैयारी, खुद लीड कर रहे Mukesh Ambani

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Reliance Industries अब सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में बड़ा कदम रखने जा रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां फिलहाल Elon Musk की कंपनी Starlink का दबदबा है। लेकिन अब रिलायंस इस गेम को बदलने की तैयारी में है–और इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कमान खुद मुकेश अंबानी ने संभाल रखी है। क्या है रिलायंस का प्लान? सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस सैटकॉम सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। यह प्रोजेक्ट Jio Platforms के तहत संचालित होगा, जो कंपनी के टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस को संभालती है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कंपनी ने छह अलग-अलग टीमें बनाई हैं, जो इन क्षेत्रों पर काम कर रही हैं: सैटेलाइट डिजाइन लॉन्च सिस्टम पेलोड यूजर टर्मिनल नेटवर्क इंटीग्रेशन लो अर्थ ऑर्बिट पर फोकस रिलायंस की नजर खासतौर पर Low Earth Orbit (LEO) सेगमेंट पर है, जहां कम ऊंचाई पर सैटेलाइट तैनात कर हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं दी जाती हैं। यही वह क्षेत्र है जहां स्टारलिंक और अन्य वैश्विक कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं। सरकार और ग्लोबल रेस भारत सरकार भी चाहती है कि देश सैटकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर बने, ताकि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम हो सके। इसी के तहत रिलायंस International Telecommunication Union (ITU) में ऑर्बिटल स्लॉट और रेडियो फ्रीक्वेंसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया में जुटी है। मुकाबले में कौन-कौन? इस सेक्टर में पहले से कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं: Starlink (एलन मस्क) Amazon Kuiper (अमेजन) Eutelsat OneWeb AST SpaceMobile Sateliot भारत की तरफ से Sunil Mittal के भारती ग्रुप की भी Eutelsat में बड़ी हिस्सेदारी है। पार्टनरशिप और रणनीति रिलायंस पहले ही मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट कंपनी SES के साथ साझेदारी कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी इनऑर्गेनिक ग्रोथ–यानी किसी मौजूदा सैटेलाइट कंपनी के अधिग्रहण–पर भी विचार कर रही है, ताकि तेजी से इस सेक्टर में प्रवेश किया जा सके। भारत के लिए क्या मायने? अगर रिलायंस का यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो: भारत को अपना स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क मिल सकता है ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बेहतर होगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से विदेशी निर्भरता कम होगी क्या संकेत देता है यह कदम? यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में इंटरनेट और टेलीकॉम की लड़ाई अब जमीन से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। रिलायंस का यह कदम न सिर्फ बिजनेस, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकता है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Stock market screen showing Sensex crash with red indicators and falling shares amid global tensions
Share Market Fall: तीसरे दिन भी बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 800 अंक टूटा, रिलायंस पर टिकी नजर

घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 800 अंक लुढ़क गया, जबकि Nifty 50 में भी 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। तीन दिनों में सेंसेक्स करीब 2,400 अंक टूट चुका है, जो बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत देता है। क्यों टूट रहा है बाजार? विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसका बड़ा कारण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजारों पर दबाव बना हुआ है और इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिख रहा है। आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव आज के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। HCL Technologies और Infosys के शेयरों में 2% से अधिक गिरावट आई। इसके अलावा Tata Consultancy Services, Sun Pharmaceutical, ICICI Bank और Bharti Airtel जैसे दिग्गज शेयर भी दबाव में रहे। हालांकि, कुछ शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की। State Bank of India, Mahindra & Mahindra, Hindustan Unilever और IndiGo में हल्की तेजी देखने को मिली। रिलायंस पर निवेशकों की नजर देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी Reliance Industries आज अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है। रिजल्ट से पहले कंपनी के शेयरों में हल्की गिरावट देखी गई। बीएसई पर रिलायंस का शेयर करीब 0.5% गिरकर 1334 रुपये तक आ गया। गौर करने वाली बात यह है कि यह स्टॉक जनवरी के अपने उच्च स्तर से करीब 15% नीचे आ चुका है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है। रुपये में भी कमजोरी शेयर बाजार की गिरावट के साथ-साथ भारतीय रुपया भी दबाव में नजर आया। डॉलर के मुकाबले रुपया हल्की गिरावट के साथ 94.21 के स्तर पर खुला, जो विदेशी निवेशकों के रुझान और वैश्विक परिस्थितियों को दर्शाता है। आगे क्या संकेत? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Gautam Adani and Mukesh Ambani
गौतम अडानी बने एशिया के सबसे बड़े रईस, मुकेश अंबानी को छोड़ा पीछे

नई दिल्ली: भारत के उद्योग जगत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Gautam Adani ने Mukesh Ambani को पछाड़ते हुए एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब हासिल कर लिया है। Bloomberg Billionaires Index के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अडानी की कुल संपत्ति अब 92.6 अरब डॉलर पहुंच गई है। नेटवर्थ में तेज उछाल इस साल गौतम अडानी की संपत्ति में करीब 8.10 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे वे दुनिया के अमीरों की सूची में 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं, मुकेश अंबानी की नेटवर्थ घटकर 90.8 अरब डॉलर रह गई है। इस साल उनकी संपत्ति में 16.9 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वे एशिया में दूसरे और वैश्विक स्तर पर 20वें स्थान पर पहुंच गए हैं। शेयर बाजार का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में हल्की गिरावट देखने को मिली, जहां सेंसेक्स 123 अंक नीचे बंद हुआ। इसके बावजूद अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी बनी रही, जिससे उनकी संपत्ति में एक दिन में 3.56 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर लगभग स्थिर रहे, जिससे अंबानी की नेटवर्थ में मामूली 76.7 मिलियन डॉलर की बढ़त हुई। किन दिग्गजों की घटी संपत्ति? इस साल दुनिया के टॉप 20 अमीरों में से कई दिग्गजों की संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई है। Bernard Arnault ने सबसे ज्यादा करीब 44 अरब डॉलर गंवाए हैं। इसके अलावा Bill Gates, Warren Buffett, Larry Ellison, Amancio Ortega और Steve Ballmer जैसे नाम भी इस सूची में शामिल हैं। दुनिया के टॉप 10 अमीर कौन? वैश्विक स्तर पर Elon Musk अब भी पहले स्थान पर काबिज हैं, जिनकी नेटवर्थ 656 अरब डॉलर बताई गई है। टॉप 10 में शामिल अन्य प्रमुख नाम: Larry Page Jeff Bezos Sergey Brin Mark Zuckerberg Michael Dell Jensen Huang Jim Walton क्या संकेत देता है यह बदलाव? गौतम अडानी का एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बनना यह दर्शाता है कि भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में तेजी से बदलाव हो रहा है। शेयर बाजार की चाल, सेक्टरल ग्रोथ और निवेशकों का भरोसा किसी भी कारोबारी की संपत्ति को तेजी से ऊपर या नीचे ले जा सकता है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Indian government boosts LPG and crude oil supply through alternative global routes amid Hormuz tensions.
LPG संकट से राहत की कोशिश: नए रास्तों से तेल-गैस की आपूर्ति बढ़ाने में जुटी सरकार

  नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है। खासतौर पर रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित होने के बाद भारत सरकार एक्शन मोड में आ गई है। रसोई गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति में किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए सरकार और भारतीय ऊर्जा कंपनियां नए वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों की तलाश में जुट गई हैं। दरअसल, भारत खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करता रहा है। लेकिन ईरान-इजरायल तनाव के चलते इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही बाधित होने की आशंका के बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया, रूस, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाने की रणनीति तैयार की है।   रूस बना बड़ा वैकल्पिक स्रोत ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च के पहले 11 दिनों में रूस से भारत का तेल आयात करीब 50% बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जबकि फरवरी में यह लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन था। भारतीय कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation और Reliance Industries ने रूस से करीब 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल के सौदे किए हैं। हालांकि अब रूस तेल पर पहले जैसी छूट नहीं दे रहा है। इस बीच अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद के लिए भारत को अस्थायी छूट भी दी है।   अमेरिका से भी बढ़ी खरीद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने के लिए अमेरिका से भी तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी GAIL India ने अमेरिकी कंपनियों के साथ एलएनजी (LNG) की बड़ी डील की है, ताकि घरेलू बाजार में गैस की संभावित कमी को पूरा किया जा सके।   लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से भी आयात भारत अब ऐसे रास्तों से तेल मंगा रहा है जो Strait of Hormuz पर निर्भर नहीं हैं। पहली बार भारत ने दक्षिण अमेरिकी देश Guyana से सीधे कच्चे तेल की खरीद शुरू की है। बताया जा रहा है कि Indian Oil Corporation और Hindustan Petroleum ने वहां से करीब 40 लाख बैरल तेल मंगवाया है। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका के Nigeria और Angola से भी अतिरिक्त तेल की खेप मंगाई जा रही है।   प्राकृतिक गैस के नए स्रोत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 25% तक की कमी को देखते हुए भारत ने कई नए देशों से संपर्क किया है। सरकार ने Algeria, Norway और Canada से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के लिए बातचीत शुरू की है। बताया जा रहा है कि नए स्रोतों से खरीदे गए दो बड़े एलएनजी कार्गो इस समय भारत की ओर आ रहे हैं।   होर्मुज पर निर्भरता घटाने की रणनीति भारत अब अपनी तेल जरूरतों का लगभग 70% हिस्सा ऐसे समुद्री मार्गों से मंगाने लगा है जो होर्मुज के बाहर हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा करीब 55% था। देश फिलहाल करीब 40 अलग-अलग देशों से तेल खरीद रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र, खासकर मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम की जा सके। साथ ही सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी की कमी न हो, इसके लिए रिफाइनरियों को गैस उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं।   भारत की ऊर्जा जरूरतें भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी लगभग 88% तेल जरूरतें विदेशों से पूरी करता है। देश में प्रतिदिन करीब 5.8 मिलियन बैरल तेल की खपत होती है। इसमें से लगभग 25 से 27 लाख बैरल तेल सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देशों से Strait of Hormuz के रास्ते आता रहा है। इसके अलावा भारत अपनी करीब 55% एलपीजी और लगभग 30% एलएनजी भी आयात करता है, जिसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, सीएनजी और घरेलू रसोई गैस के रूप में होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट के बीच भारत द्वारा ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण भविष्य में आपूर्ति सुरक्षा के लिहाज से एक अहम रणनीतिक कदम साबित हो सकता है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Donald Trump announcing $300 billion Texas oil refinery project with Reliance partnership strengthening India-US energy cooperation
भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी मजबूत: टेक्सास में 300 अरब डॉलर की रिफाइनरी डील, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को कहा ‘धन्यवाद’

  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास में लगभग 300 अरब डॉलर की विशाल तेल रिफाइनरी परियोजना की घोषणा करते हुए भारत और भारतीय कंपनी रिलायंस का आभार जताया है। ट्रंप ने कहा कि यह निवेश अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम है और करीब 50 वर्षों में देश में स्थापित होने वाली पहली नई तेल रिफाइनरी होगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह रिफाइनरी टेक्सास के ब्राउनस्विल (Brownsville) में स्थापित की जाएगी। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल अमेरिका के ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ आर्थिक संबंधों को भी नई दिशा देगी।   भारत और रिलायंस को दिया धन्यवाद परियोजना की घोषणा करते हुए ट्रंप ने भारत और उसकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक निवेश में भारत के सहयोग से अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी। ट्रंप ने लिखा, “भारत में हमारे साझेदारों और उनकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस को इस जबरदस्त निवेश के लिए धन्यवाद। यह अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र और दक्षिण टेक्सास के लोगों के लिए बड़ी जीत है।” हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रिफाइनरी भारत के साथ किसी व्यापक आर्थिक समझौते का हिस्सा है या नहीं, लेकिन इस घोषणा को दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।   50 वर्षों में पहली नई अमेरिकी रिफाइनरी ट्रंप ने इस परियोजना को अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, यह रिफाइनरी पिछले पांच दशकों में अमेरिका में बनने वाली पहली नई बड़ी तेल रिफाइनरी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक बार फिर ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप के शब्दों में, “अमेरिका ‘रियल एनर्जी सेक्टर’ में अपना प्रभुत्व फिर से स्थापित कर रहा है। टेक्सास के ब्राउनस्विल में बनने वाली यह रिफाइनरी अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में से एक होगी।”   ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का असर ट्रंप ने इस निवेश को अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति, परमिट प्रक्रिया को सरल बनाने और करों में कटौती से जुड़ा परिणाम बताया। उनके मुताबिक इन नीतियों के कारण ही अरबों डॉलर का निवेश अमेरिका की ओर आकर्षित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ब्राउनस्विल पोर्ट पर बनने वाली यह नई रिफाइनरी न केवल अमेरिकी बाजार को ऊर्जा उपलब्ध कराएगी, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।   रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा ट्रंप के अनुसार यह परियोजना दक्षिण टेक्सास के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह दुनिया की सबसे आधुनिक और स्वच्छ रिफाइनरियों में से एक होगी, जो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा निर्यात को भी बढ़ावा देगी।   वैश्विक परिस्थितियों के बीच अहम घोषणा यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में अमेरिका में नई रिफाइनरी की स्थापना को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे न केवल अमेरिका के ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी भी और मजबूत हो सकती है।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Russian crude oil tankers carrying millions of barrels waiting in Arabian Sea amid Hormuz crisis
समंदर में फंसा करोड़ों बैरल रूसी तेल, भारत की ओर बढ़ रहे कई टैंकर; होर्मुज़ संकट से वैश्विक सप्लाई पर असर

  वैश्विक तेल बाजार में इन दिनों बड़ी हलचल देखी जा रही है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में रूसी कच्चे तेल से भरे कई टैंकर मौजूद हैं, जो जल्द ही भारत की ओर पहुंच सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार समुद्र में करीब 1.5 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों पर लदा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 1 करोड़ बैरल से अधिक तेल की खरीद पहले ही की जा चुकी है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौजूद टैंकरों के अलावा करीब 70 लाख बैरल तेल लेकर कुछ जहाज सिंगापुर के पास खड़े हैं, जो एक सप्ताह के भीतर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। जानकारी के अनुसार भूमध्य सागर और स्वेज नहर से भी कई तेल टैंकर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ रहे हैं। जहाज ट्रैकिंग कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक यूराल्स ग्रेड का तेल लेकर कम से कम 18 जहाज भारत की ओर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की सरकारी रिफाइनरी कंपनियां जैसे Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited फिर से रूसी तेल खरीदने के लिए सक्रिय हो गई हैं। वहीं निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी Reliance Industries Limited भी अपने घरेलू ईंधन उत्पादन संयंत्र के लिए रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रही है। हालांकि निर्यात केंद्रित प्लांट के लिए कंपनी पहले की तरह गैर-रूसी कच्चे तेल का उपयोग कर सकती है।   होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट का असर इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है। Strait of Hormuz दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, लेकिन सुरक्षा खतरे के कारण यह लगभग बंद स्थिति में पहुंच गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने इस मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए समुद्री मार्गों और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दिल्ली में 50 लाख की रंगदारी की साजिश का खुलासा, कारोबारी की पत्नी निकली मास्टरमाइंड

abhishek singh जून 30, 2026 0