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Stock Market: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, निफ्टी में भी बिकवाली

Anjali Kumari अप्रैल 28, 2026 0
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मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। BSE Sensex 200 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 24,050 के नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 208 अंक गिरकर 77,094 के आसपास पहुंचा, वहीं निफ्टी भी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। हालांकि बाद में बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी दिखाई और दोनों सूचकांक हल्की बढ़त के साथ ट्रेड करने लगे।

 

बड़े शेयरों में कमजोरी, मिडकैप-स्मॉलकैप में मजबूती


बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद व्यापक बाजार में थोड़ी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई। इस दौरान State Bank of India, Axis Bank, Sun Pharmaceutical और IndiGo के शेयरों में गिरावट रही। वहीं Adani Ports, TCS, Larsen & Toubro और Mahindra & Mahindra के शेयरों में बढ़त देखी गई।

 

कच्चे तेल और वैश्विक तनाव का असर


बाजार की गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण प्रमुख रहे। Brent Crude की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कमजोर पड़ने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों पर दबाव बना है।

 

एफआईआई बिकवाली और रुपये में कमजोरी


विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की है। इसके साथ ही भारतीय रुपया भी कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले गिरावट में रहा, जिससे बाजार की धारणा और कमजोर हुई।

 

आगे का आउटलुक


विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार “कंसोलिडेशन” के दौर में है। आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर करेगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भारत पर ‘ट्रिपल अटैक’ का खतरा: महंगा क्रूड, भीषण गर्मी और कमजोर मानसून से बढ़ी आर्थिक चिंता

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक साथ कई मोर्चों पर दबाव झेलती नजर आ रही है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच अब भीषण गर्मी और कमजोर मानसून के संकेतों ने महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। महंगे क्रूड से बढ़ा दबाव वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर सीधा असर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका असर हर वस्तु की कीमत पर पड़ता है। भीषण गर्मी ने बढ़ाई बिजली मांग देश के कई हिस्सों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और कूलर के इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। हाल ही में देश में पावर डिमांड 256 गीगावाट तक पहुंच गई, जो एक नया रिकॉर्ड है। कमजोर मानसून से खेती पर खतरा जून से सितंबर के बीच आने वाला मानसून भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस बार सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। महंगाई बढ़ने का खतरा Reserve Bank of India ने जहां महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान जताया था, वहीं अब विशेषज्ञ इसे 5% से ऊपर जाने की आशंका जता रहे हैं। अगर मानसून कमजोर रहता है, तो यह आंकड़ा 5.8% तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है, बल्कि दरें बढ़ाने का दबाव भी बन सकता है। ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ जैसी स्थिति का खतरा ANZ Bank के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, ऊंची ऊर्जा कीमतें, भीषण गर्मी और कमजोर मानसून मिलकर “परफेक्ट स्टॉर्म” यानी गंभीर आर्थिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। खासकर खाद्य महंगाई सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभर रही है। आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं किसानों की आय पर असर पड़ सकता है ग्रामीण इलाकों में मांग घट सकती है खेती की लागत बढ़ने से महंगाई और तेज हो सकती है कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 37% है, इसलिए खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर हर घर के बजट पर पड़ेगा। क्या है राहत की उम्मीद? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पूरी तरह बिगड़ेगी नहीं। Nomura Holdings के अनुसार, भारत के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही बेहतर सिंचाई और जलवायु-प्रतिरोधी बीजों के कारण खेती पर असर पहले के मुकाबले कुछ कम हो सकता है।  

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Stock Market: हरे निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद सोमवार को मजबूत वापसी देखने को मिली। BSE Sensex 639 अंकों की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ, जबकि Nifty 50 24,050 के स्तर को पार कर गया। इस तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बना दिया।   RIL और IT शेयरों में तेजी से बाजार को सहारा दिनभर के कारोबार में Reliance Industries और Wipro के शेयरों में करीब 3% तक की बढ़त दर्ज की गई, जिसने बाजार को मजबूती प्रदान की। आईटी सेक्टर में कुछ कमजोर नतीजों के बावजूद आकर्षक वैल्युएशन के कारण निवेशकों की रुचि बनी रही।   मजबूत तिमाही नतीजों से लौटा निवेशकों का भरोसा विशेषज्ञों के अनुसार, चौथी तिमाही के बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक संकेतों में सुधार से बाजार को समर्थन मिला। अमेरिका-ईरान वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद ने भी निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाया। बैंकिंग, एफएमसीजी, कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे घरेलू सेक्टरों ने बाजार की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई।   कच्चे तेल और महंगाई बनी चिंता हालांकि बाजार में तेजी के बावजूद कुछ जोखिम बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती हैं। निवेशक अब Federal Reserve की आगामी ब्याज दर नीति पर नजर बनाए हुए हैं।   आगे की राह पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं, तो बाजार में आगे भी सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है। फिलहाल, निवेशकों के लिए यह राहत की खबर है कि गिरावट का सिलसिला टूट गया है और बाजार ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है।

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भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए Reserve Bank of India (RBI) ने Paytm Payments Bank Limited (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह फैसला 24 अप्रैल 2026 की शाम से प्रभावी हो गया, जिसके बाद बैंक की सभी बैंकिंग गतिविधियों पर पूर्ण रोक लग गई है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही नियामकीय जांच और बार-बार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने के चलते की गई है। RBI ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? RBI के अनुसार, Paytm Payments Bank का संचालन जमाकर्ताओं के हित में नहीं पाया गया। बैंक निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करने में विफल रहा मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं हुआ इसी आधार पर बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 22(4) के तहत लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया। अब बैंक का क्या होगा? लाइसेंस रद्द होने के बाद: बैंक किसी भी प्रकार की नई बैंकिंग सेवा नहीं दे सकेगा नए ग्राहक जोड़ना और ट्रांजैक्शन पूरी तरह बंद RBI अब बैंक को बंद (Winding Up) करने की प्रक्रिया शुरू करेगा इसके लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया जाएगा सरल शब्दों में, बैंक अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। क्या ग्राहकों का पैसा सुरक्षित है? RBI ने ग्राहकों को राहत देते हुए कहा है कि: बैंक के पास पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है सभी जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस किया जाएगा रिफंड प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी हालांकि, ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक अपडेट्स पर नजर बनाए रखें और निर्देशों का पालन करें। क्या यह फैसला अचानक लिया गया? यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम है: मार्च 2022: नए ग्राहक जोड़ने पर रोक जनवरी–फरवरी 2024: डिपॉजिट, वॉलेट टॉप-अप और क्रेडिट ट्रांजैक्शन पर प्रतिबंध लगातार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने पर अंतिम कार्रवाई ग्राहकों के लिए क्या करें? अपने खाते और बैलेंस की जानकारी नियमित रूप से जांचें RBI और बैंक की आधिकारिक घोषणाओं को फॉलो करें किसी भी अफवाह से बचें रिफंड प्रक्रिया शुरू होते ही आवश्यक कार्रवाई करें

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