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Stock Market: शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 750 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24 हजार के नीचे

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को बेहद कमजोर शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली के चलते बीएसई सेंसेक्स 750 अंक से अधिक टूटकर 76,700 के करीब पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई।   आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक आईटी कंपनी एक्सेंचर द्वारा अपने राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती को माना जा रहा है। इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दिखा। इंफोसिस के शेयर आठ प्रतिशत से अधिक टूट गए, जबकि टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक में भी चार से छह प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा एचडीएफसी बैंक और टाटा स्टील के शेयर भी दबाव में रहे। हालांकि, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, ट्रेंट और पावर ग्रिड जैसे शेयरों ने कुछ मजबूती दिखाई।   रुपये में मजबूती और तेल की नरम कीमतों से उम्मीद   शेयर बाजार की कमजोरी के बीच विदेशी मुद्रा बाजार से सकारात्मक संकेत मिले। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 10 पैसे मजबूत होकर 84.30 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए राहत की उम्मीद बनी हुई है।   बाजार विशेषज्ञों का क्या हैं मानना  बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते से पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है, जिसका सकारात्मक असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा। हालांकि, फिलहाल वैश्विक बाजारों की कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भारतीय बाजार पर दबाव बनाए हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकाल में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन मजबूत आर्थिक संकेतकों और स्थिर रुपये के चलते लंबी अवधि में बाजार में रिकवरी की संभावना बनी हुई है।

anjali kumari जून 19, 2026 0
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Stock Market: गिरवाट के साथ खुला शेयर बाजार

तेहरान/वाशिंगटन, एजेंसियां। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी की खबरों के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई, जिसके चलते घरेलू बाजार लाल निशान में खुला। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में नजर आए।   सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा टूटा बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 212 अंकों की गिरावट के साथ 77,631 के स्तर पर खुला। वहीं एनएसई का निफ्टी 93 अंक टूटकर 24,233 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में कोल इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में बिकवाली देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में हालात बिगड़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।   कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वहीं WTI क्रूड भी करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है।   एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी दबाव एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1.9 फीसदी गिर गया, जबकि जापान का निक्केई भी कमजोर बंद हुआ। हांगकांग के हैंग सेंग फ्यूचर्स में भी दबाव देखा गया। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए। S&P 500, Nasdaq Composite और Dow Jones Industrial Average सभी लाल निशान में बंद हुए।   निवेशकों में बढ़ी चिंता विश्लेषकों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

Unknown मई 8, 2026 0
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Stock Market: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, निफ्टी में भी बिकवाली

मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। BSE Sensex 200 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 24,050 के नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 208 अंक गिरकर 77,094 के आसपास पहुंचा, वहीं निफ्टी भी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। हालांकि बाद में बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी दिखाई और दोनों सूचकांक हल्की बढ़त के साथ ट्रेड करने लगे।   बड़े शेयरों में कमजोरी, मिडकैप-स्मॉलकैप में मजबूती बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद व्यापक बाजार में थोड़ी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई। इस दौरान State Bank of India, Axis Bank, Sun Pharmaceutical और IndiGo के शेयरों में गिरावट रही। वहीं Adani Ports, TCS, Larsen & Toubro और Mahindra & Mahindra के शेयरों में बढ़त देखी गई।   कच्चे तेल और वैश्विक तनाव का असर बाजार की गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण प्रमुख रहे। Brent Crude की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कमजोर पड़ने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों पर दबाव बना है।   एफआईआई बिकवाली और रुपये में कमजोरी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की है। इसके साथ ही भारतीय रुपया भी कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले गिरावट में रहा, जिससे बाजार की धारणा और कमजोर हुई।   आगे का आउटलुक विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार “कंसोलिडेशन” के दौर में है। आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर करेगी।

Unknown अप्रैल 28, 2026 0
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Stock Market: गिरावट के साथ खुला शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां।  हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में बाजार लाल निशान पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई।   सेंसेक्स 330 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 330 अंक गिरकर 77,334 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 93 अंक फिसलकर 24,079.75 पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में भारी गिरावट रही थी, जब सेंसेक्स 852 अंक टूटकर 77,664 पर और निफ्टी 205 अंक गिरकर 24,173 पर बंद हुआ था।   विदेशी निवेश और तेल कीमतों का दबाव बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। गुरुवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 3,254 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट का खतरा बढ़ रहा है।   रुपया भी दबाव में, लगातार कमजोरी जारी डॉलर के मुकाबले रुपये में भी गिरावट देखी जा रही है। शुरुआती कारोबार में रुपया 24 पैसे कमजोर होकर 94.25 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी पूंजी निकासी इसके प्रमुख कारण हैं।   वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिर स्थिति ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार और मुद्रा पर पड़ रहा है।   आगे क्या रहेगा रुख विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते और विदेशी निवेश की बिकवाली रुकती नहीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

Unknown अप्रैल 24, 2026 0
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Stock Market: गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में Middle East के बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन BSE Sensex 702 अंकों की गिरावट के साथ 76,847.57 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 23,842.65 पर बंद हुआ, जो करीब 208 अंकों की गिरावट दर्शाता है।   ऑटो और बैंकिंग शेयरों में दबाव बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक रहा। Eicher Motors और Maruti Suzuki जैसे प्रमुख ऑटो शेयरों में करीब 5% तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की सतर्कता के चलते कई सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।   रुपये पर भी दबाव डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 56 पैसे कमजोर होकर 93.39 के स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर मुद्रा बाजार पर भी पड़ा।

Unknown अप्रैल 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Abhishek Banerjee addressing media as he writes to Lok Sabha Speaker seeking recognition of TMC as a unified party.
राजनीति

टीएमसी के बागियों को रोकने की आखिरी कोशिश! अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, कहा- सदन में TMC को एकल पार्टी माना जाए

Deepshikha जून 15, 2026 0