टेक्नोलॉजी

AI Music Tools: Create Songs and Understand Copyright

AI से म्यूजिक बनाना हुआ बेहद आसान, इन टूल्स से मिनटों में तैयार करें गाना; कॉपीराइट नियम नहीं समझे तो हो सकती है परेशानी

surbhi अगस्त 3, 2026 0
AI music generation tools create songs and background tracks quickly while copyright and licensing rules remain important
AI Music Generator Tools and Copyright Rules

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने म्यूजिक बनाने का तरीका भी काफी हद तक बदल दिया है। अब गाना तैयार करने के लिए महंगे स्टूडियो, म्यूजिक प्रोडक्शन सॉफ्टवेयर या बड़ी टीम की जरूरत जरूरी नहीं रह गई है। AI आधारित टूल्स की मदद से कुछ ही मिनटों में बैकग्राउंड म्यूजिक, जिंगल, इंस्ट्रूमेंटल ट्रैक और यहां तक कि पूरा गाना भी तैयार किया जा सकता है।

सोशल मीडिया क्रिएटर्स, YouTubers, पॉडकास्टर्स और डिजिटल मार्केटर्स के बीच Soundverse AI और Suno AI जैसे प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन टूल्स में यूजर सिर्फ टेक्स्ट में अपनी जरूरत बताकर म्यूजिक तैयार कर सकता है। हालांकि, AI से म्यूजिक बनाना आसान है, लेकिन उसके इस्तेमाल से जुड़े कॉपीराइट और लाइसेंस नियम उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

अगर आपने AI से कोई ट्रैक तैयार किया है और उसे YouTube, Instagram, विज्ञापन, पॉडकास्ट या किसी दूसरे कमर्शियल प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पहले यह समझना जरूरी है कि उस म्यूजिक के इस्तेमाल की आपको अनुमति है या नहीं।

AI म्यूजिक टूल्स इतने लोकप्रिय क्यों हो रहे हैं?

कंटेंट क्रिएटर्स के लिए सही बैकग्राउंड म्यूजिक ढूंढना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। मनचाहा ट्रैक मिलने के बावजूद उसके कॉपीराइट या लाइसेंस की शर्तें कंटेंट के कमर्शियल इस्तेमाल में बाधा बन सकती हैं।

AI म्यूजिक टूल्स इस प्रक्रिया को काफी आसान बना रहे हैं। यूजर टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के जरिए म्यूजिक की अपनी जरूरत बता सकता है। उदाहरण के लिए रोमांटिक, मोटिवेशनल, लो-फाई, सिनेमैटिक या EDM जैसी शैली चुनी जा सकती है।

कई टूल्स में मूड, इंस्ट्रूमेंट, ट्रैक की अवधि और म्यूजिक के दूसरे पहलुओं को भी कस्टमाइज करने की सुविधा मिलती है। यही वजह है कि छोटे क्रिएटर्स से लेकर डिजिटल मीडिया प्रोड्यूसर्स तक इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है।

Soundverse AI से कैसे बनाएं म्यूजिक?

Soundverse AI एक AI आधारित म्यूजिक क्रिएशन प्लेटफॉर्म है, जिसकी मदद से टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के जरिए इंस्ट्रूमेंटल और बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार किया जा सकता है।

इसका इस्तेमाल करने के लिए सामान्य तौर पर यूजर को प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाकर लॉगिन करना होता है। इसके बाद उपलब्ध Text to Music या AI Music Generator जैसे विकल्पों के जरिए अपनी जरूरत के अनुसार प्रॉम्प्ट दिया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर आप लिख सकते हैं कि आपको किसी ट्रैवल वीडियो के लिए शांत और सिनेमैटिक बैकग्राउंड म्यूजिक चाहिए या किसी मोटिवेशनल वीडियो के लिए एनर्जेटिक ट्रैक चाहिए।

प्रॉम्प्ट के आधार पर AI म्यूजिक तैयार करता है। जरूरत के मुताबिक इसे एडिट करने के बाद उपलब्ध विकल्पों के अनुसार सेव या डाउनलोड किया जा सकता है।

Suno AI से बनाएं पूरा गाना

अगर आपका उद्देश्य केवल बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार करना नहीं, बल्कि वोकल, लिरिक्स और इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक के साथ पूरा गाना बनाना है, तो Suno AI जैसे प्लेटफॉर्म उपयोगी हो सकते हैं।

यूजर इसमें अपनी पसंद के गाने का विवरण टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के रूप में दे सकता है। कुछ मामलों में अपने लिरिक्स भी जोड़े जा सकते हैं। इसके बाद AI उस इनपुट के आधार पर गाना तैयार करता है।

इस तरह बिना पारंपरिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो के भी एक शुरुआती म्यूजिक आइडिया या डेमो तैयार किया जा सकता है।

क्या AI से बना हर गाना कॉपीराइट-फ्री होता है?

नहीं। यह मान लेना सही नहीं है कि AI से तैयार हुआ हर म्यूजिक अपने आप कॉपीराइट-फ्री हो जाता है।

यही वह बिंदु है जिसे कंटेंट क्रिएटर्स को सबसे ज्यादा ध्यान में रखना चाहिए। AI प्लेटफॉर्म की अपनी-अपनी लाइसेंस पॉलिसी और Terms of Use हो सकती हैं। किसी प्लान में तैयार किए गए म्यूजिक के अधिकार और दूसरे प्लान में तैयार किए गए म्यूजिक के उपयोग की अनुमति अलग हो सकती है।

कुछ सेवाएं पेड प्लान के तहत कमर्शियल इस्तेमाल की अनुमति दे सकती हैं, जबकि फ्री प्लान में ऐसी अनुमति सीमित हो सकती है। इसलिए केवल AI से गाना जनरेट कर लेना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसे हर जगह व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।

YouTube या विज्ञापन में इस्तेमाल से पहले क्या देखें?

अगर AI से बनाया गया म्यूजिक किसी कमर्शियल वीडियो, YouTube चैनल, विज्ञापन, पॉडकास्ट, ऐप या ब्रांड कैंपेन में इस्तेमाल करना है, तो कुछ महत्वपूर्ण चीजों की जांच जरूर करें।

  • जिस AI प्लेटफॉर्म से म्यूजिक बनाया है, उसकी मौजूदा लाइसेंस पॉलिसी पढ़ें।
  • देखें कि आपका प्लान कमर्शियल इस्तेमाल की अनुमति देता है या नहीं।
  • फ्री और पेड प्लान के अधिकारों में अंतर जरूर जांचें।
  • अगर आपने खुद के लिरिक्स इस्तेमाल किए हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि उन पर आपके अधिकार हैं।
  • किसी दूसरे कलाकार के गाने, लिरिक्स या पहचानने योग्य म्यूजिक स्टाइल की नकल करने से बचें।
  • लाइसेंस या उपयोग की शर्तों का रिकॉर्ड संभालकर रखें।

AI म्यूजिक के साथ सबसे बड़ी सावधानी

AI म्यूजिक का सबसे बड़ा फायदा इसकी स्पीड और आसान इस्तेमाल है। कुछ मिनटों में वह ट्रैक तैयार हो सकता है, जिसके लिए पहले घंटों या दिनों की म्यूजिक प्रोडक्शन प्रक्रिया की जरूरत पड़ती थी।

लेकिन सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी आती है। यह सोचकर किसी AI-generated ट्रैक को सीधे प्रकाशित करना कि "AI ने बनाया है, इसलिए इस पर कोई कॉपीराइट नहीं होगा", भविष्य में समस्या पैदा कर सकता है।

किसी भी ट्रैक को पब्लिश या कमर्शियल इस्तेमाल करने से पहले लाइसेंस, Terms of Use और प्लेटफॉर्म की मौजूदा कॉपीराइट पॉलिसी जरूर जांचें। नियम समय के साथ बदल भी सकते हैं, इसलिए पुराने स्क्रीनशॉट या इंटरनेट पर मिली जानकारी के बजाय आधिकारिक और मौजूदा शर्तों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

AI म्यूजिक का भविष्य कितना बड़ा?

AI म्यूजिक टूल्स ने म्यूजिक क्रिएशन को आम यूजर्स तक पहुंचाने का काम किया है। अब किसी वीडियो के लिए खास बैकग्राउंड स्कोर तैयार करना हो या किसी नए गाने का डेमो बनाना हो, शुरुआती स्तर पर AI काफी समय बचा सकता है।

हालांकि, प्रोफेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री में इसकी भूमिका सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है। कॉपीराइट, कलाकारों के अधिकार, लाइसेंसिंग और AI-generated कंटेंट की कानूनी स्थिति जैसे सवाल भी लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

इसलिए AI से म्यूजिक बनाना जितना आसान हो गया है, उसका सही और कानूनी तरीके से इस्तेमाल करना उतना ही जरूरी है।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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साइबर सुरक्षा सरकारी डेटा सेंटर
सरकारी डेटा सेंटर पर साइबर खतरा, 'शेप-शिफ्टिंग' वायरस की एंट्री से बढ़ी चिंता

देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर एक बार फिर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। इस बार अधिकारियों को एक कथित 'बहरूपिया वायरस' (Shape-Shifting Malware) के जरिए सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में एक बड़े चीनी हैकर समूह की संभावित संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच जारी है।   कई विभागों के डेटा पर खतरे की आशंका   प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मैलवेयर सिस्टम में प्रवेश करने के बाद अपना स्वरूप बदल लेता है, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। आशंका है कि खाद्य आपूर्ति, जीएसटी, पर्यटन और आम नागरिकों से जुड़े अन्य विभागों के डेटा को निशाना बनाया गया हो। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कोई संवेदनशील डेटा चोरी हुआ है या नहीं।   2024 के रैनसमवेयर हमले के बाद फिर चुनौती   बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में सरकारी डेटा सेंटर पर हुए Makop Ransomware हमले से उबरने के बाद अब यह नया साइबर खतरा सामने आया है। इस बार अब तक किसी तरह की फिरौती या अन्य मांग सामने नहीं आई है, लेकिन साइबर सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।   सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल   मामले के सामने आने के बाद डेटा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के समय फायरवॉल सक्रिय नहीं थी और कुछ खरीदे गए साइबर सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को लेकर भी जांच की जा रही है।   जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार   आईटीडीए (ITDA) और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटी हैं। फिलहाल किसी भी डेटा चोरी या विदेशी हैकर समूह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।   सरकारी डेटा सेंटर पर साइबर खतरा, 'शेप-शिफ्टिंग' वायरस की एंट्री से बढ़ी चिंता   देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर एक बार फिर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। इस बार अधिकारियों को एक कथित 'बहरूपिया वायरस' (Shape-Shifting Malware) के जरिए सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में एक बड़े चीनी हैकर समूह की संभावित संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच जारी है।   कई विभागों के डेटा पर खतरे की आशंका   प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मैलवेयर सिस्टम में प्रवेश करने के बाद अपना स्वरूप बदल लेता है, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। आशंका है कि खाद्य आपूर्ति, जीएसटी, पर्यटन और आम नागरिकों से जुड़े अन्य विभागों के डेटा को निशाना बनाया गया हो। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कोई संवेदनशील डेटा चोरी हुआ है या नहीं।   2024 के रैनसमवेयर हमले के बाद फिर चुनौती   बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में सरकारी डेटा सेंटर पर हुए Makop Ransomware हमले से उबरने के बाद अब यह नया साइबर खतरा सामने आया है। इस बार अब तक किसी तरह की फिरौती या अन्य मांग सामने नहीं आई है, लेकिन साइबर सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।   सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल   मामले के सामने आने के बाद डेटा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के समय फायरवॉल सक्रिय नहीं थी और कुछ खरीदे गए साइबर सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को लेकर भी जांच की जा रही है।   जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार   आईटीडीए (ITDA) और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटी हैं। फिलहाल किसी भी डेटा चोरी या विदेशी हैकर समूह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
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Xiaomi 18 Series
Xiaomi 18 सीरीज का ग्लोबल लॉन्च करीब, EEC सर्टिफिकेशन में दिखे दो मॉडल

बीजिंग, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता Xiaomi की अगली फ्लैगशिप सीरीज Xiaomi 18 को लेकर नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी की नई सीरीज के दो मॉडल EEC (यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन) सर्टिफिकेशन में दिखाई दिए हैं। इस सर्टिफिकेशन के बाद माना जा रहा है कि Xiaomi 18 सीरीज का ग्लोबल लॉन्च जल्द हो सकता है।   Xiaomi 18 और Xiaomi 18 Pro को मिला सर्टिफिकेशन   रिपोर्ट के अनुसार, Xiaomi 18 और Xiaomi 18 Pro मॉडल EEC डेटाबेस में दिखाई दिए हैं। सर्टिफिकेशन में सामने आए मॉडल नंबर ग्लोबल मार्केट में लॉन्च की ओर इशारा कर रहे हैं। इससे संकेत मिलते हैं कि कंपनी इस बार चीन के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी फ्लैगशिप सीरीज को तेजी से पेश कर सकती है।   Snapdragon चिप और 200MP कैमरा की चर्चा   लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Xiaomi 18 सीरीज में Qualcomm का नया फ्लैगशिप प्रोसेसर Snapdragon 8 Elite Gen 6 मिलने की उम्मीद है। वहीं कैमरा सेक्शन में बड़े अपग्रेड की चर्चा है, जिसमें 200MP सेंसर और बेहतर टेलीफोटो कैमरा शामिल हो सकते हैं। Xiaomi इस सीरीज को प्रीमियम फोटोग्राफी और परफॉर्मेंस के लिए तैयार कर रही है।   बड़ी बैटरी और नए डिजाइन के साथ आ सकती है सीरीज   रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 Pro में बड़ी बैटरी, हाई-रेजोल्यूशन डिस्प्ले और बेहतर चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना है। कुछ लीक में 7,000mAh तक की बैटरी और नए डिजाइन एलिमेंट्स का दावा किया गया है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।   सितंबर में चीन लॉन्च, ग्लोबल मार्केट में जल्द एंट्री की उम्मीद   मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 सीरीज को पहले चीन में लॉन्च किया जा सकता है, जिसके बाद ग्लोबल बाजारों में इसकी एंट्री होगी। भारत लॉन्च को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं और कुछ रिपोर्ट्स में दिसंबर 2026 के आसपास भारत में लॉन्च की संभावना जताई गई है।   फ्लैगशिप स्मार्टफोन बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   Xiaomi 18 सीरीज के आने के बाद प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में मुकाबला और तेज होने की उम्मीद है। कंपनी इस सीरीज के जरिए Samsung और Apple जैसे ब्रांड्स को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। हालांकि कीमत और लॉन्च डेट की आधिकारिक घोषणा Xiaomi की ओर से अभी बाकी है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
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