बांका। सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा में जहां लाखों शिवभक्त आस्था के साथ आगे बढ़ते हैं, वहीं बिहार के बांका जिले में मानवता और सेवा की अनूठी मिसाल भी देखने को मिल रही है। इनारावरण स्थित महारानी कांवरिया सेवा संघ पिछले 15 वर्षों से कांवरियों की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। यहां श्रद्धालुओं को भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
सावन के महीने में कांवड़ पथ पर हर साल सेवा शिविर लगाया जाता है। संघ के स्वयंसेवक बिना किसी भेदभाव के हजारों शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं, ताकि लंबी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।
संघ के संस्थापक शशि शंकर सिंह उर्फ पप्पू सिंह के अनुसार, वर्ष 2009 में कांवड़ यात्रा के दौरान एक अजनबी की सलाह ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उस व्यक्ति ने कहा कि यदि स्वयं बाबा धाम की यात्रा संभव न हो, तो कांवरियों की सेवा करें, यही भगवान शिव की सच्ची पूजा है। इसी प्रेरणा से वर्ष 2010 में महारानी कांवरिया सेवा संघ की स्थापना हुई।
शिविर में स्वयंसेवक भोजन परोसने, पानी पिलाने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और विश्राम की व्यवस्था संभालते हैं। यात्रा से थके श्रद्धालु यहां कुछ समय आराम करने के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।
संघ के सदस्यों का कहना है कि उनके लिए कांवरियों की सेवा ही भगवान शिव की सबसे बड़ी आराधना है। इसी भावना के चलते हर साल अधिक लोग इस सेवा अभियान से जुड़ते जा रहे हैं और शिवभक्तों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।
बाबा धाम की राह में सेवा की मिसाल, 15 वर्षों से कांवरियों को नि:शुल्क भोजन, इलाज और विश्राम की सुविधा
बांका। सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा में जहां लाखों शिवभक्त आस्था के साथ आगे बढ़ते हैं, वहीं बिहार के बांका जिले में मानवता और सेवा की अनूठी मिसाल भी देखने को मिल रही है। इनारावरण स्थित महारानी कांवरिया सेवा संघ पिछले 15 वर्षों से कांवरियों की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। यहां श्रद्धालुओं को भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
सावन के महीने में कांवड़ पथ पर हर साल सेवा शिविर लगाया जाता है। संघ के स्वयंसेवक बिना किसी भेदभाव के हजारों शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं, ताकि लंबी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।
संघ के संस्थापक शशि शंकर सिंह उर्फ पप्पू सिंह के अनुसार, वर्ष 2009 में कांवड़ यात्रा के दौरान एक अजनबी की सलाह ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उस व्यक्ति ने कहा कि यदि स्वयं बाबा धाम की यात्रा संभव न हो, तो कांवरियों की सेवा करें, यही भगवान शिव की सच्ची पूजा है। इसी प्रेरणा से वर्ष 2010 में महारानी कांवरिया सेवा संघ की स्थापना हुई।
शिविर में स्वयंसेवक भोजन परोसने, पानी पिलाने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और विश्राम की व्यवस्था संभालते हैं। यात्रा से थके श्रद्धालु यहां कुछ समय आराम करने के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।
संघ के सदस्यों का कहना है कि उनके लिए कांवरियों की सेवा ही भगवान शिव की सबसे बड़ी आराधना है। इसी भावना के चलते हर साल अधिक लोग इस सेवा अभियान से जुड़ते जा रहे हैं और शिवभक्तों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सहरसा। बिहार के सहरसा जिले स्थित सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर सोमवार तड़के एक बड़ा रेल हादसा टल गया। समस्तीपुर से सहरसा जा रही पैसेंजर ट्रेन (संख्या 63344) के इंजन और उससे सटी एक बोगी में अचानक आग लग गई। घटना सुबह करीब 3 बजे हुई, जिससे स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इंजन से उठे धुएं के बाद भड़की आग प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन स्टेशन पर पहुंचते ही इंजन से धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पास की एक बोगी तक फैल गई। धुआं और लपटें देखकर यात्रियों में भगदड़ मच गई, लेकिन रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की मदद से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ढाई घंटे बाद आग पर पाया गया काबू घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद सुबह लगभग 5:30 बजे आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। इसके बाद सुबह 6 बजे के बाद रेल परिचालन धीरे-धीरे सामान्य हुआ। कई ट्रेनें हुईं प्रभावित आग की घटना के कारण कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। इनमें कोसी एक्सप्रेस, जानकी एक्सप्रेस, सहरसा–समस्तीपुर पैसेंजर और श्रावणी स्पेशल (सहरसा–देवघर) निर्धारित समय से देरी से चलीं। शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू रेलवे अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। बिहार के सिमरी Bakhthiyarpur स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के इंजन में भीषण आग, बड़ा हादसा टला सहरसा। बिहार के सहरसा जिले स्थित सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर सोमवार तड़के एक बड़ा रेल हादसा टल गया। समस्तीपुर से सहरसा जा रही पैसेंजर ट्रेन (संख्या 63344) के इंजन और उससे सटी एक बोगी में अचानक आग लग गई। घटना सुबह करीब 3 बजे हुई, जिससे स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इंजन से उठे धुएं के बाद भड़की आग प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन स्टेशन पर पहुंचते ही इंजन से धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पास की एक बोगी तक फैल गई। धुआं और लपटें देखकर यात्रियों में भगदड़ मच गई, लेकिन रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की मदद से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ढाई घंटे बाद आग पर पाया गया काबू घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद सुबह लगभग 5:30 बजे आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। इसके बाद सुबह 6 बजे के बाद रेल परिचालन धीरे-धीरे सामान्य हुआ। कई ट्रेनें हुईं प्रभावित शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू रेलवे अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना के विस्तार को नई दिशा देने वाली पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। यह टाउनशिप पुनपुन और नौबतपुर क्षेत्र में विकसित की जानी है। परियोजना का उद्देश्य पटना पर बढ़ते शहरी दबाव को कम करते हुए सुनियोजित आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। पुनपुन और नौबतपुर में विकसित होगी टाउनशिप पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप को पटना के आसपास नए शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना है। आधिकारिक योजना के अनुसार, यहां आवासीय क्षेत्र के साथ औद्योगिक, वाणिज्यिक और सार्वजनिक क्षेत्र विकसित किए जाने की परिकल्पना है। इस परियोजना में बेहतर सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य शहरी सुविधाओं को एक साथ विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा पटना मेट्रोपॉलिटन एरिया अथॉरिटी के अनुसार, सैटेलाइट टाउनशिप की शुरुआत औद्योगिक और आवासीय विकास से करने की योजना है। आगे चलकर यहां वाणिज्यिक और सार्वजनिक क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। परियोजना के लिए आसपास के रेल नेटवर्क, प्रस्तावित हवाई अड्डों, मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों और पर्यटन की संभावनाओं को विकास के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा गया है। आईटी केंद्र और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क विकसित करने की संभावनाएं भी आधिकारिक योजना में बताई गई हैं। जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर बदले नियम टाउनशिप क्षेत्र में जमीन से जुड़े नियमों में भी हाल में बदलाव हुआ है। बिहार सरकार ने स्वीकृत निवेश परियोजनाओं के लिए जमीन खरीद और अधिग्रहण से संबंधित अनुमति का प्रावधान किया है। वहीं, अंतिम विकास योजना तैयार होने के बाद अधिसूचित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी कुछ पाबंदियां हटाने की दिशा में भी कदम उठाया गया है। हालांकि, टाउनशिप क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों को लेकर अलग-अलग समय पर प्रशासनिक प्रतिबंध भी जारी किए गए हैं। इसलिए जमीन खरीदने या निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित सरकारी अधिसूचना की जांच करना जरूरी होगा। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से तैयार होगी योजना बिहार सरकार ने ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के सुनियोजित विकास और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी सहायता के लिए CEPT University, Ahmedabad को तकनीकी सहायता इकाई के रूप में चयन की मंजूरी दी है। सरकार की योजना पाटलिपुत्र टाउनशिप के साथ बिहार के अन्य प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को भी चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की है। इसका उद्देश्य पटना और दूसरे बड़े शहरों पर बढ़ते जनसंख्या एवं बुनियादी ढांचे के दबाव को कम कर नए नियोजित शहरी केंद्र तैयार करना है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। मौसम विभाग ने 1 अगस्त को राज्य के 6 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं 18 जिलों में आंधी के साथ आकाशीय बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। इन 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने अररिया, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), पश्चिमी चंपारण (बेतिया), कटिहार, सीवान और गोपालगंज में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में मानसूनी गतिविधियां तेज रहने और कुछ स्थानों पर मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। स्थानीय प्रशासन और लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी गई है। 18 जिलों में आंधी और वज्रपात का येलो अलर्ट मौसम विभाग ने औरंगाबाद, अरवल, भोजपुर, रोहतास, कैमूर, बक्सर, सारण, सीवान, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में आंधी और वज्रपात का येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है। पटना में हल्की से मध्यम बारिश के आसार राजधानी पटना में 1 अगस्त को आसमान में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। हालांकि पटना में भारी बारिश की संभावना कम बताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार यहां अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। वहीं गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और दरभंगा समेत कुछ अन्य जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रहने का अनुमान है। आंधी और बिजली के दौरान सावधानी बरतने की अपील मौसम विभाग ने वज्रपात के खतरे को देखते हुए लोगों से खुले मैदान, खेतों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की अपील की है। आंधी के दौरान बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। बारिश और आंधी के दौरान संभव हो तो सुरक्षित भवन के अंदर रहें और स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करें।