बांका

Bankipur by-election
बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार पर भड़के अनंत सिंह, बोले- नीतीश कुमार को हटाना पड़ा भारी

पटना, एजेंसियां। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार को लेकर जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया जाता, तो बांकीपुर में भाजपा को हार का सामना नहीं करना पड़ता। अनंत सिंह के इस बयान के बाद बिहार एनडीए के भीतर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।   बीजेपी की हार पर अनंत सिंह ने क्या कहा?   बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह ने भाजपा की हार के पीछे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने को एक प्रमुख कारण बताया। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार को हटाने के फैसले से जनता में नाराजगी पैदा हुई और इसका असर चुनाव परिणाम में दिखाई दिया।   अनंत सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।   प्रशांत किशोर ने बीजेपी के गढ़ में मारी सेंध   बांकीपुर सीट पर जन सुराज के प्रशांत किशोर की जीत को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। भाजपा के मजबूत प्रभाव वाले क्षेत्र में जन सुराज की जीत ने एनडीए के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इस नतीजे के बाद भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक और शहरी मतदाताओं के रुझान को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है।   नीतीश कुमार को हटाने पर उठे सवाल   अनंत सिंह के बयान ने बिहार एनडीए में नेतृत्व को लेकर बहस को और हवा दे दी है। उन्होंने संकेत दिया कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने का फैसला चुनावी रूप से नुकसानदायक साबित हुआ।   हालांकि, बांकीपुर उपचुनाव के एक परिणाम के आधार पर पूरे बिहार में जनता के रुझान का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन अनंत सिंह के बयान से यह जरूर स्पष्ट है कि उपचुनाव का परिणाम अब एनडीए के भीतर भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।   प्रशांत किशोर की जीत से बदला समीकरण   बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार की राजनीति में तीसरे विकल्प की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अब भाजपा और अन्य प्रमुख दलों के सामने जन सुराज के बढ़ते प्रभाव को लेकर रणनीति बनाने की चुनौती होगी।   वहीं, अनंत सिंह के बयान के बाद आने वाले दिनों में नीतीश कुमार के नेतृत्व और एनडीए की चुनावी रणनीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

anjali kumari अगस्त 4, 2026 0
Bankipur election result
बांकीपुर जीत पर जन सुराज का जश्न, गुलाल-मिठाइयों के बीच 'जय बिहार' के नारों से गूंजा पटना

पटना। बांकीपुर विधानसभा सीट पर जीत के बाद जन सुराज समर्थकों ने राजधानी पटना में जोरदार जश्न मनाया। सड़कों पर विजय जुलूस निकाला गया, जहां समर्थकों ने गुलाल उड़ाया, मिठाइयां बांटी और 'जय बिहार' के नारों के साथ जीत की खुशी का इजहार किया। पूरे शहर में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।   खुले वाहनों पर निकला विजय जुलूस जीत की घोषणा होते ही समर्थक झंडे लेकर खुले वाहनों पर सवार होकर सड़कों पर निकल पड़े। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए जीत का उत्सव मनाया। कई समर्थक गुलाल से सराबोर नजर आए और पूरे रास्ते माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।   गुलाल और डांस से मनाई खुशी समर्थकों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी और जमकर डांस किया। कई लोगों ने इस खास पल को मोबाइल कैमरों में कैद किया, जबकि सेल्फी और वीडियो बनाने का भी सिलसिला चलता रहा।   लड्डू बांटकर कराया मुंह मीठा जीत की खुशी में बड़ी मात्रा में लड्डू तैयार किए गए। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और लोगों के बीच मिठाइयां बांटकर जीत का उत्सव मनाया।   पटना की सड़कों पर उमड़ी भीड़ जश्न में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में समर्थक पटना की सड़कों पर जुटे। जन सुराज के झंडों के साथ निकले जुलूस के दौरान पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था संभालती नजर आई। पूरे इलाके में जीत का उत्साह साफ दिखाई दिया।   महिला मतदाता ने जताई उम्मीद चुनाव परिणाम के बाद एक महिला मतदाता ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नई राजनीति जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी। आसपास मौजूद लोगों ने भी जनादेश का स्वागत करते हुए खुशी व्यक्त की।

anjali kumari अगस्त 4, 2026 0
Assembly By-Election Results
विधानसभा उपचुनाव नतीजे: बांकीपुर में प्रशांत किशोर आगे, दतिया में कांग्रेस की बढ़त; मांजलपुर में भाजपा मजबूत

नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में बांकीपुर सीट पर जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि दतिया में कांग्रेस और मांजलपुर में भाजपा आगे चल रही है।   बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बढ़त बरकरार   बिहार की बांकीपुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। पांचवें राउंड की गिनती के बाद जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर सबसे आगे चल रहे हैं। उन्हें अब तक 8971 वोट मिले हैं। वहीं, भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 6652 वोट और राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी को 1534 वोट मिले हैं।   इस सीट पर भाजपा, राजद और जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है।   दतिया में कांग्रेस ने बनाई बढ़त   मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर शुरुआती रुझानों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। तीसरे राउंड की मतगणना के बाद कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 12,432 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के आशुतोष तिवारी को 12,399 वोट मिले हैं। वहीं, आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव को 4874 वोट मिले हैं।   मांजलपुर में भाजपा को बड़ी बढ़त   गुजरात की मांजलपुर सीट पर भाजपा ने मजबूत बढ़त बना ली है। आठवें राउंड की गिनती के बाद भाजपा प्रत्याशी सतेंद्रभाई पटेल को 23,632 वोट मिले हैं। कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी 10,123 वोटों के साथ पीछे चल रहे हैं। नोटा को अब तक 914 वोट मिले हैं।   तीनों सीटों पर क्यों हुआ उपचुनाव?   बांकीपुर सीट भाजपा विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। वहीं, दतिया सीट कांग्रेस विधायक की सदस्यता रद्द होने और मांजलपुर सीट भाजपा विधायक के निधन के कारण रिक्त हुई थी। तीनों सीटों पर चुनाव परिणाम राजनीतिक दलों के लिए अहम माने जा रहे हैं।

anjali kumari अगस्त 3, 2026 0
बांका कांवरिया सेवा शिविर इनारावरण
बाबा धाम की राह में सेवा की मिसाल, 15 वर्षों से कांवरियों को नि:शुल्क भोजन, इलाज और विश्राम की सुविधा

बांका। सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा में जहां लाखों शिवभक्त आस्था के साथ आगे बढ़ते हैं, वहीं बिहार के बांका जिले में मानवता और सेवा की अनूठी मिसाल भी देखने को मिल रही है। इनारावरण स्थित महारानी कांवरिया सेवा संघ पिछले 15 वर्षों से कांवरियों की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। यहां श्रद्धालुओं को भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।   15 वर्षों से लगातार चल रहा सेवा शिविर   सावन के महीने में कांवड़ पथ पर हर साल सेवा शिविर लगाया जाता है। संघ के स्वयंसेवक बिना किसी भेदभाव के हजारों शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं, ताकि लंबी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।   एक प्रेरणा से शुरू हुई सेवा   संघ के संस्थापक शशि शंकर सिंह उर्फ पप्पू सिंह के अनुसार, वर्ष 2009 में कांवड़ यात्रा के दौरान एक अजनबी की सलाह ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उस व्यक्ति ने कहा कि यदि स्वयं बाबा धाम की यात्रा संभव न हो, तो कांवरियों की सेवा करें, यही भगवान शिव की सच्ची पूजा है। इसी प्रेरणा से वर्ष 2010 में महारानी कांवरिया सेवा संघ की स्थापना हुई।   दिन-रात जुटे रहते हैं स्वयंसेवक   शिविर में स्वयंसेवक भोजन परोसने, पानी पिलाने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और विश्राम की व्यवस्था संभालते हैं। यात्रा से थके श्रद्धालु यहां कुछ समय आराम करने के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।   'कांवरियों की सेवा ही भोलेनाथ की पूजा'   संघ के सदस्यों का कहना है कि उनके लिए कांवरियों की सेवा ही भगवान शिव की सबसे बड़ी आराधना है। इसी भावना के चलते हर साल अधिक लोग इस सेवा अभियान से जुड़ते जा रहे हैं और शिवभक्तों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।   बाबा धाम की राह में सेवा की मिसाल, 15 वर्षों से कांवरियों को नि:शुल्क भोजन, इलाज और विश्राम की सुविधा   बांका। सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा में जहां लाखों शिवभक्त आस्था के साथ आगे बढ़ते हैं, वहीं बिहार के बांका जिले में मानवता और सेवा की अनूठी मिसाल भी देखने को मिल रही है। इनारावरण स्थित महारानी कांवरिया सेवा संघ पिछले 15 वर्षों से कांवरियों की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। यहां श्रद्धालुओं को भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।   15 वर्षों से लगातार चल रहा सेवा शिविर   सावन के महीने में कांवड़ पथ पर हर साल सेवा शिविर लगाया जाता है। संघ के स्वयंसेवक बिना किसी भेदभाव के हजारों शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं, ताकि लंबी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।   एक प्रेरणा से शुरू हुई सेवा   संघ के संस्थापक शशि शंकर सिंह उर्फ पप्पू सिंह के अनुसार, वर्ष 2009 में कांवड़ यात्रा के दौरान एक अजनबी की सलाह ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उस व्यक्ति ने कहा कि यदि स्वयं बाबा धाम की यात्रा संभव न हो, तो कांवरियों की सेवा करें, यही भगवान शिव की सच्ची पूजा है। इसी प्रेरणा से वर्ष 2010 में महारानी कांवरिया सेवा संघ की स्थापना हुई।   दिन-रात जुटे रहते हैं स्वयंसेवक   शिविर में स्वयंसेवक भोजन परोसने, पानी पिलाने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और विश्राम की व्यवस्था संभालते हैं। यात्रा से थके श्रद्धालु यहां कुछ समय आराम करने के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।   'कांवरियों की सेवा ही भोलेनाथ की पूजा'   संघ के सदस्यों का कहना है कि उनके लिए कांवरियों की सेवा ही भगवान शिव की सबसे बड़ी आराधना है। इसी भावना के चलते हर साल अधिक लोग इस सेवा अभियान से जुड़ते जा रहे हैं और शिवभक्तों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
बांका के अमरपुर में राशन कार्ड की जांच और नोटिस की प्रक्रिया
बांका में राशन कार्ड फर्जीवाड़े पर बड़ी चोट: 4,025 संदिग्धों पर लटकी रद्दीकरण की तलवार

अमरपुर प्रखंड में खाद्य आपूर्ति विभाग का बड़ा एक्शन, 26 जुलाई तक खुद को सही साबित नहीं करने वालों के कटेंगे नाम   सरकारी योजनाओं का लाभ अक्सर उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि कई अपात्र लोग फर्जी तरीके से सिस्टम में सेंध लगा लेते हैं। राशन वितरण प्रणाली में इसी बड़ी खामी को दूर करने के लिए बिहार के बांका जिले में एक व्यापक शुद्धिकरण अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सस्ते अनाज का हक केवल गरीब और जरूरतमंद परिवारों को ही मिले, न कि साधन संपन्न लोगों को।   खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने बांका के अमरपुर प्रखंड में ऐसे लोगों की पहचान के लिए सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में हुई एक विभागीय जांच के बाद पूरे प्रखंड में 4,025 ऐसे राशन कार्डधारक चिह्नित किए गए हैं, जिनकी पात्रता पूरी तरह से संदिग्ध मानी जा रही है। विभाग ने बिना किसी देरी के इन सभी संदिग्ध लाभार्थियों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से उन लोगों के बीच हड़कंप का माहौल है, जो लंबे समय से अनुचित तरीके से इस योजना का लाभ ले रहे थे।   इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे अमरपुर के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) रविन्द्र शर्मा ने बताया कि सभी चिह्नित लोगों को अपना पक्ष रखने का एक आखिरी मौका दिया जा रहा है। इन सभी 4,025 कार्डधारकों को आगामी रविवार, 26 जुलाई 2026 तक हर हाल में अपनी पात्रता साबित करनी होगी। इसके लिए उन्हें कार्यालय में अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी, योजना के योग्य होने के संबंधित जरूरी दस्तावेज और एक लिखित स्पष्टीकरण जमा करना अनिवार्य किया गया है।   विभाग की ओर से यह चेतावनी स्पष्ट कर दी गई है कि 26 जुलाई की समय सीमा बीत जाने के बाद किसी भी तरह की कोई मोहलत नहीं दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति तय तारीख तक अपने दस्तावेज और स्पष्टीकरण पेश करने में विफल रहता है, तो प्रशासन स्वतः यह मान लेगा कि वह अपात्र है और उसके पास बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे सभी मामलों में बिना किसी अतिरिक्त सूचना के राशन कार्ड को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।   प्रशासन की यह सख्ती सिर्फ कार्ड रद्द करने की एक रूटीन प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक कड़ा संदेश है कि जन कल्याणकारी योजनाओं में अब धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि 26 जुलाई के बाद इन हजारों संदिग्ध कार्डों को रद्द किया जाता है, तो सरकारी कोटे का बड़ा हिस्सा बचेगा, जिससे भविष्य में उन वास्तविक और नए गरीब परिवारों को इस योजना से जोड़ने का रास्ता साफ होगा, जो अब तक इसके लाभ से वंचित थे।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
Bankipur by election
बांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी प्रत्याशी नीरज सिन्हा ने भरा नामांकन, रोड शो में NDA का शक्ति प्रदर्शन

पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नीरज सिन्हा ने भव्य रोड शो के बाद अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान एनडीए ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए अपनी चुनावी ताकत का प्रदर्शन किया। वहीं, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल कर मुकाबले को और रोचक बना दिया।   नामांकन से पहले नीरज सिन्हा पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर चुनावी अभियान की शुरुआत की। इसके बाद वह नवीन सिन्हा स्मृति पार्क पहुंचे और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन नवीन के दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान विधायक संजय गुप्ता और संजीव चौरसिया भी उनके साथ मौजूद रहे।   नीरज सिन्हा रथ पर सवार होकर रोड शो निकाले  इसके बाद भाजपा कार्यालय से नीरज सिन्हा रथ पर सवार होकर रोड शो के लिए निकले। पूरे रास्ते भाजपा और एनडीए कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। समर्थकों ने पार्टी के झंडे लहराते हुए नीरज सिन्हा के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद रविशंकर प्रसाद, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, लोजपा (रामविलास) के नेता राजू तिवारी समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।   दूसरी ओर, जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भी नामांकन के अंतिम दिन शक्ति प्रदर्शन किया। उनके समर्थकों ने पार्टी के झंडों के साथ बाइक रैली निकाली और बड़ी संख्या में नामांकन स्थल तक पहुंचे। इस दौरान प्रशांत किशोर कुछ दूरी तक पैदल भी चले और समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया।   भाजपा और जन सुराज बांकीपुर सीट पर भाजपा और जन सुराज के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। नामांकन के अंतिम दिन दोनों दलों के शक्ति प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि यह उपचुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। अब सभी की नजरें चुनाव प्रचार और मतदान पर टिकी हैं, जहां मतदाता इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले का फैसला करेंगे।

anjali kumari जुलाई 13, 2026 0
Prashant Kishor nomination
बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर ने दाखिल किया नामांकन

पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन के अंतिम दिन जन सुराज के संस्थापक और प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इससे पहले पार्टी ने पटना में भव्य बाइक रैली, रोड शो और जनसभा आयोजित कर शक्ति प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे समर्थकों ने पार्टी के झंडे और बैनर के साथ प्रशांत किशोर के समर्थन में नारे लगाए, जिससे राजधानी का राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया।   नामांकन से पहले प्रशांत किशोर पटना के स्काउट एंड गाइड मैदान पहुंचे, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इसके बाद रोड शो शुरू हुआ, जिसमें हजारों समर्थक शामिल हुए। बाइक रैली के दौरान कई जगहों पर भारी भीड़ के कारण यातायात प्रभावित रहा और कुछ समय के लिए जाम की स्थिति भी बनी। रोड शो के दौरान प्रशांत किशोर कुछ दूरी तक पैदल भी कार्यकर्ताओं के साथ चले।   प्रशांत किशोर ने कहा  इस अवसर पर प्रशांत किशोर ने कहा कि यह केवल उनका नामांकन नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर का प्रतीक है। उन्होंने दावा किया कि जनता बदलाव चाहती है और जन सुराज उसी बदलाव का विकल्प बनकर उभर रहा है। नामांकन से पहले प्रशांत किशोर ने सोनपुर स्थित प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर में पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने राज्य की सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हुए भगवान का आशीर्वाद लिया।   भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज सिन्हा उधर, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज सिन्हा ने भी नामांकन से पहले पंचरूपी हनुमान मंदिर में पूजा की और नवीन सिन्हा स्मृति पार्क जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने भी रोड शो के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा और जन सुराज के समर्थकों का आमना-सामना भी हुआ, हालांकि स्थिति शांतिपूर्ण रही।   बांकीपुर उपचुनाव में प्रमुख दलों के मैदान में उतरने के साथ मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अब सभी की नजर चुनाव प्रचार और मतदाताओं को साधने की रणनीति पर टिकी है।

anjali kumari जुलाई 13, 2026 0
Illegal sand mining
अवैध बालू खनन पर कार्रवाई करने गई पुलिस टीम पर हमला, एसआई समेत कई जवान घायल

बांका, एजेंसियां। बिहार के बांका जिले के धोरैया थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम पर कथित बालू माफियाओं ने हमला कर दिया। लाठी-डंडों, ईंट और पत्थरों से किए गए इस हमले में अवर निरीक्षक (एसआई) प्रदीप कुमार चौधरी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस ने झारखंड के गोड्डा जिले के नौ लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।   अवैध खनन की सूचना पर पहुंची थी पुलिस टीम पुलिस के अनुसार, धोरैया थाना को पसहाना बालू घाट पर अवैध बालू उठाव की सूचना मिली थी। इसके बाद अवर निरीक्षक प्रदीप कुमार चौधरी, अवर निरीक्षक सूरज कुमार वैभव, सतीश कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। वहां करीब 30 से 40 ट्रैक्टर बिहार की सीमा में कथित रूप से अवैध बालू खनन करते पाए गए। पुलिस को देखते ही अधिकांश चालक ट्रैक्टर छोड़कर भाग निकले। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक ट्रैक्टर जब्त कर लिया।   ट्रैक्टर छुड़ाने पहुंचे लोग, पुलिस पर किया हमला एफआईआर के मुताबिक, ट्रैक्टर जब्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और पुलिस टीम पर लाठी-डंडों, ईंट और पत्थरों से हमला कर दिया। हमले में एसआई प्रदीप कुमार चौधरी के सिर पर गंभीर चोट लगी, जबकि अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए। हमलावर जब्त ट्रैक्टर छुड़ाकर झारखंड की ओर फरार हो गए। घायल पुलिसकर्मियों को धोरैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया।   पुलिस ने गोड्डा जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सौर पचीसा गांव के नौ लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। धोरैया थाना पुलिस का कहना है कि झारखंड से ट्रैक्टरों के जरिए बिहार की सीमा में अवैध बालू खनन की शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी अभियान चला रही है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Bihar Banka Teacher
बिहार के बांका में 487 शिक्षकों पर शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, बिना सूचना अनुपस्थित मिलने पर जारी किया नोटिस

बांका, एजेंसियां। बिहार में गर्मी के छुट्टी के ख़त्म होने के बाद सरकारी स्कूल के खुलने के साथ ही शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। बांका जिले में निरीक्षण के दौरान 487 शिक्षक बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा स्थापना कार्यालय ने सभी शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर जवाब मांगा है।   निरीक्षण के दौरान सामने आई बड़ी लापरवाही   शिक्षा विभाग की जांच के दौरान कई स्कूलों में शिक्षक ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिले। अधिकारियों का कहना है कि बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों से निर्धारित समय के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।   प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी भी तय   विभाग ने संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी निर्देश दिया है कि वे शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें। भविष्य में इस तरह की लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।   शिक्षा व्यवस्था सुधारने की पहल   शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। शिक्षकों की उपस्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।   आगे भी जारी रहेगा अभियान   अधिकारियों के अनुसार, राज्य के अन्य जिलों में भी स्कूलों का औचक निरीक्षण जारी रहेगा। बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाने वाले कर्मचारियों और शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?