Content Creator Tools

AI music generation tools create songs and background tracks quickly while copyright and licensing rules remain important
AI से म्यूजिक बनाना हुआ बेहद आसान, इन टूल्स से मिनटों में तैयार करें गाना; कॉपीराइट नियम नहीं समझे तो हो सकती है परेशानी

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने म्यूजिक बनाने का तरीका भी काफी हद तक बदल दिया है। अब गाना तैयार करने के लिए महंगे स्टूडियो, म्यूजिक प्रोडक्शन सॉफ्टवेयर या बड़ी टीम की जरूरत जरूरी नहीं रह गई है। AI आधारित टूल्स की मदद से कुछ ही मिनटों में बैकग्राउंड म्यूजिक, जिंगल, इंस्ट्रूमेंटल ट्रैक और यहां तक कि पूरा गाना भी तैयार किया जा सकता है। सोशल मीडिया क्रिएटर्स, YouTubers, पॉडकास्टर्स और डिजिटल मार्केटर्स के बीच Soundverse AI और Suno AI जैसे प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन टूल्स में यूजर सिर्फ टेक्स्ट में अपनी जरूरत बताकर म्यूजिक तैयार कर सकता है। हालांकि, AI से म्यूजिक बनाना आसान है, लेकिन उसके इस्तेमाल से जुड़े कॉपीराइट और लाइसेंस नियम उतने ही महत्वपूर्ण हैं। अगर आपने AI से कोई ट्रैक तैयार किया है और उसे YouTube, Instagram, विज्ञापन, पॉडकास्ट या किसी दूसरे कमर्शियल प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पहले यह समझना जरूरी है कि उस म्यूजिक के इस्तेमाल की आपको अनुमति है या नहीं। AI म्यूजिक टूल्स इतने लोकप्रिय क्यों हो रहे हैं? कंटेंट क्रिएटर्स के लिए सही बैकग्राउंड म्यूजिक ढूंढना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। मनचाहा ट्रैक मिलने के बावजूद उसके कॉपीराइट या लाइसेंस की शर्तें कंटेंट के कमर्शियल इस्तेमाल में बाधा बन सकती हैं। AI म्यूजिक टूल्स इस प्रक्रिया को काफी आसान बना रहे हैं। यूजर टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के जरिए म्यूजिक की अपनी जरूरत बता सकता है। उदाहरण के लिए रोमांटिक, मोटिवेशनल, लो-फाई, सिनेमैटिक या EDM जैसी शैली चुनी जा सकती है। कई टूल्स में मूड, इंस्ट्रूमेंट, ट्रैक की अवधि और म्यूजिक के दूसरे पहलुओं को भी कस्टमाइज करने की सुविधा मिलती है। यही वजह है कि छोटे क्रिएटर्स से लेकर डिजिटल मीडिया प्रोड्यूसर्स तक इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है। Soundverse AI से कैसे बनाएं म्यूजिक? Soundverse AI एक AI आधारित म्यूजिक क्रिएशन प्लेटफॉर्म है, जिसकी मदद से टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के जरिए इंस्ट्रूमेंटल और बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए सामान्य तौर पर यूजर को प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाकर लॉगिन करना होता है। इसके बाद उपलब्ध Text to Music या AI Music Generator जैसे विकल्पों के जरिए अपनी जरूरत के अनुसार प्रॉम्प्ट दिया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर आप लिख सकते हैं कि आपको किसी ट्रैवल वीडियो के लिए शांत और सिनेमैटिक बैकग्राउंड म्यूजिक चाहिए या किसी मोटिवेशनल वीडियो के लिए एनर्जेटिक ट्रैक चाहिए। प्रॉम्प्ट के आधार पर AI म्यूजिक तैयार करता है। जरूरत के मुताबिक इसे एडिट करने के बाद उपलब्ध विकल्पों के अनुसार सेव या डाउनलोड किया जा सकता है। Suno AI से बनाएं पूरा गाना अगर आपका उद्देश्य केवल बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार करना नहीं, बल्कि वोकल, लिरिक्स और इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक के साथ पूरा गाना बनाना है, तो Suno AI जैसे प्लेटफॉर्म उपयोगी हो सकते हैं। यूजर इसमें अपनी पसंद के गाने का विवरण टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के रूप में दे सकता है। कुछ मामलों में अपने लिरिक्स भी जोड़े जा सकते हैं। इसके बाद AI उस इनपुट के आधार पर गाना तैयार करता है। इस तरह बिना पारंपरिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो के भी एक शुरुआती म्यूजिक आइडिया या डेमो तैयार किया जा सकता है। क्या AI से बना हर गाना कॉपीराइट-फ्री होता है? नहीं। यह मान लेना सही नहीं है कि AI से तैयार हुआ हर म्यूजिक अपने आप कॉपीराइट-फ्री हो जाता है। यही वह बिंदु है जिसे कंटेंट क्रिएटर्स को सबसे ज्यादा ध्यान में रखना चाहिए। AI प्लेटफॉर्म की अपनी-अपनी लाइसेंस पॉलिसी और Terms of Use हो सकती हैं। किसी प्लान में तैयार किए गए म्यूजिक के अधिकार और दूसरे प्लान में तैयार किए गए म्यूजिक के उपयोग की अनुमति अलग हो सकती है। कुछ सेवाएं पेड प्लान के तहत कमर्शियल इस्तेमाल की अनुमति दे सकती हैं, जबकि फ्री प्लान में ऐसी अनुमति सीमित हो सकती है। इसलिए केवल AI से गाना जनरेट कर लेना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसे हर जगह व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। YouTube या विज्ञापन में इस्तेमाल से पहले क्या देखें? अगर AI से बनाया गया म्यूजिक किसी कमर्शियल वीडियो, YouTube चैनल, विज्ञापन, पॉडकास्ट, ऐप या ब्रांड कैंपेन में इस्तेमाल करना है, तो कुछ महत्वपूर्ण चीजों की जांच जरूर करें। जिस AI प्लेटफॉर्म से म्यूजिक बनाया है, उसकी मौजूदा लाइसेंस पॉलिसी पढ़ें। देखें कि आपका प्लान कमर्शियल इस्तेमाल की अनुमति देता है या नहीं। फ्री और पेड प्लान के अधिकारों में अंतर जरूर जांचें। अगर आपने खुद के लिरिक्स इस्तेमाल किए हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि उन पर आपके अधिकार हैं। किसी दूसरे कलाकार के गाने, लिरिक्स या पहचानने योग्य म्यूजिक स्टाइल की नकल करने से बचें। लाइसेंस या उपयोग की शर्तों का रिकॉर्ड संभालकर रखें। AI म्यूजिक के साथ सबसे बड़ी सावधानी AI म्यूजिक का सबसे बड़ा फायदा इसकी स्पीड और आसान इस्तेमाल है। कुछ मिनटों में वह ट्रैक तैयार हो सकता है, जिसके लिए पहले घंटों या दिनों की म्यूजिक प्रोडक्शन प्रक्रिया की जरूरत पड़ती थी। लेकिन सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी आती है। यह सोचकर किसी AI-generated ट्रैक को सीधे प्रकाशित करना कि "AI ने बनाया है, इसलिए इस पर कोई कॉपीराइट नहीं होगा", भविष्य में समस्या पैदा कर सकता है। किसी भी ट्रैक को पब्लिश या कमर्शियल इस्तेमाल करने से पहले लाइसेंस, Terms of Use और प्लेटफॉर्म की मौजूदा कॉपीराइट पॉलिसी जरूर जांचें। नियम समय के साथ बदल भी सकते हैं, इसलिए पुराने स्क्रीनशॉट या इंटरनेट पर मिली जानकारी के बजाय आधिकारिक और मौजूदा शर्तों को प्राथमिकता देना बेहतर है। AI म्यूजिक का भविष्य कितना बड़ा? AI म्यूजिक टूल्स ने म्यूजिक क्रिएशन को आम यूजर्स तक पहुंचाने का काम किया है। अब किसी वीडियो के लिए खास बैकग्राउंड स्कोर तैयार करना हो या किसी नए गाने का डेमो बनाना हो, शुरुआती स्तर पर AI काफी समय बचा सकता है। हालांकि, प्रोफेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री में इसकी भूमिका सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है। कॉपीराइट, कलाकारों के अधिकार, लाइसेंसिंग और AI-generated कंटेंट की कानूनी स्थिति जैसे सवाल भी लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। इसलिए AI से म्यूजिक बनाना जितना आसान हो गया है, उसका सही और कानूनी तरीके से इस्तेमाल करना उतना ही जरूरी है।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Meta AI Creator Assistant
Meta ने Facebook पर लॉन्च किया AI ‘क्रिएटर असिस्टेंट’, रील्स डबिंग के लिए जुड़ेंगी 5 नई भाषाएं

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा कदम उठाते हुए Meta ने Facebook के लिए नया AI-पावर्ड फीचर ‘क्रिएटर असिस्टेंट’ लॉन्च किया है। यह टूल कंटेंट क्रिएटर्स को उनकी ऑडियंस को बेहतर ढंग से समझने, कंटेंट की परफॉर्मेंस का विश्लेषण करने और नए क्रिएटिव आइडिया विकसित करने में सहायता करेगा। कंपनी का कहना है कि यह फीचर क्रिएटर्स के लिए एक डिजिटल सलाहकार की तरह काम करेगा।   क्रिएटर डैशबोर्ड में मिलेगा नया फीचर क्रिएटर असिस्टेंट को सीधे फेसबुक  के क्रिएटर डैशबोर्ड में जोड़ा गया है। यह टूल ऑडियंस के व्यवहार, एंगेजमेंट ट्रेंड्स और कंटेंट प्रदर्शन का विश्लेषण कर उपयोगी सुझाव देता है। क्रिएटर इससे बातचीत के अंदाज में सवाल पूछ सकते हैं, जैसे किसी रील को अधिक व्यूज क्यों मिले या समय के साथ उनकी ऑडियंस में क्या बदलाव आया। AI आधारित यह सिस्टम जटिल आंकड़ों को सरल भाषा में समझाकर कंटेंट रणनीति को बेहतर बनाने में मदद करेगा। इससे क्रिएटर्स को अलग-अलग रिपोर्ट और चार्ट देखने की जरूरत कम होगी।   रचनात्मक रुकावट दूर करने में भी मदद Meta के अनुसार, यह टूल केवल आंकड़ों का विश्लेषण नहीं करेगा बल्कि क्रिएटिव ब्लॉक की स्थिति में नए कंटेंट आइडिया भी सुझाएगा। ट्रेंडिंग ऑडियो, लोकप्रिय कंटेंट फॉर्मेट और मौजूदा सांस्कृतिक ट्रेंड्स के आधार पर यह क्रिएटर्स को समयानुकूल सुझाव देगा। साथ ही, यह हर क्रिएटर के लक्ष्य—जैसे ऑडियंस बढ़ाना, एंगेजमेंट बढ़ाना या कमाई करना।    रील्स ट्रांसलेशन में जुड़ेंगी 5 नई भाषाएं क्रिएटर असिस्टेंट के साथ Meta ने Facebook Reels के AI-पावर्ड ट्रांसलेशन फीचर का भी विस्तार किया है। अब इस सुविधा में अरबी, बहासा इंडोनेशियाई, फ्रेंच, थाई और वियतनामी भाषाएं जोड़ी जाएंगी। यह तकनीक वीडियो की मूल आवाज और टोन को बनाए रखते हुए डबिंग और लिप-सिंकिंग की सुविधा प्रदान करती है।   फिलहाल ‘क्रिएटर असिस्टेंट’ को अमेरिका, कनाडा और भारत में चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है। आने वाले महीनों में इसे वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा और इसमें नए फीचर भी जोड़े जाएंगे। इससे दुनिया भर के कंटेंट क्रिएटर्स को अपने दर्शकों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Unknown जून 6, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0