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8th Pass Entrepreneur Built ₹17K Cr Bikaji Brand

Success Story: 8वीं पास शिव रतन अग्रवाल ने खड़ा किया 17,282 करोड़ का साम्राज्य, बीकानेर से दुनिया तक बनाया ब्रांड

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Shiv Ratan Agarwal with Bikaji products showcasing success from Bikaner to global food brand
Shiv Ratan Agarwal Bikaji Success Story

भारतीय उद्योग जगत में कुछ कहानियां सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि प्रेरणा की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है Shiv Ratan Agarwal की, जिन्होंने सीमित पढ़ाई के बावजूद अपने दम पर एक ग्लोबल फूड ब्रांड खड़ा किया।

बीकानेर की गलियों से निकलकर उन्होंने Bikaji Foods International को उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां आज इसका मार्केट कैप 17,282 करोड़ रुपये है और यह 50 से ज्यादा देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है।

विरासत छोड़कर चुना अपना रास्ता

शिव रतन अग्रवाल का परिवार दशकों से स्नैक्स कारोबार से जुड़ा रहा है। उनके दादा गंगाबिशन अग्रवाल ने मशहूर Haldiram's की नींव रखी थी।

जहां उनके भाई पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ा रहे थे, वहीं शिव रतन ने अलग पहचान बनाने का फैसला किया। 1993 में उन्होंने ‘बीकाजी’ ब्रांड की शुरुआत की–एक ऐसा कदम जिसने उन्हें अलग मुकाम दिलाया।

सिर्फ 8वीं तक पढ़ाई, लेकिन बड़ा विजन

शिव रतन अग्रवाल ने सिर्फ 8वीं तक ही पढ़ाई की थी। लेकिन उन्होंने किताबों से ज्यादा अनुभव को महत्व दिया। कम उम्र में ही वह भुजिया बनाने की कला में माहिर हो गए थे।

1986 में उन्होंने ‘शिवदीप प्रोडक्ट्स’ शुरू किया, जो बाद में ‘बीकाजी’ के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने इस ब्रांड का नाम बीकानेर के संस्थापक राव बीकाजी के सम्मान में रखा।

मार्केटिंग से बनाई अलग पहचान

बीकाजी को घर-घर तक पहुंचाने में उनकी मार्केटिंग रणनीति ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बॉलीवुड के महानायक Amitabh Bachchan को ब्रांड एंबेसडर बनाया, जिससे ब्रांड की पहचान तेजी से बढ़ी।

आज बीकाजी न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बड़ी कंपनियों को चुनौती दे रहा है।

शेयर बाजार में मजबूत पकड़

बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल 2022 में लिस्ट हुई और आज BSE और NSE दोनों पर मजबूती से ट्रेड कर रही है।

23 अप्रैल 2026 तक कंपनी का मार्केट कैप 17,282 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो इसकी लगातार बढ़ती सफलता को दर्शाता है।

प्रेरणा बन गया सफर

74 वर्ष की उम्र में शिव रतन अग्रवाल का निधन हो गया, लेकिन उनका सफर आज भी लाखों युवाओं को प्रेरित करता है। सीमित संसाधनों और कम पढ़ाई के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि विजन, मेहनत और जोखिम लेने का साहस किसी भी व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Success Story: 8वीं पास शिव रतन अग्रवाल ने खड़ा किया 17,282 करोड़ का साम्राज्य, बीकानेर से दुनिया तक बनाया ब्रांड

भारतीय उद्योग जगत में कुछ कहानियां सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि प्रेरणा की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है Shiv Ratan Agarwal की, जिन्होंने सीमित पढ़ाई के बावजूद अपने दम पर एक ग्लोबल फूड ब्रांड खड़ा किया। बीकानेर की गलियों से निकलकर उन्होंने Bikaji Foods International को उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां आज इसका मार्केट कैप 17,282 करोड़ रुपये है और यह 50 से ज्यादा देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। विरासत छोड़कर चुना अपना रास्ता शिव रतन अग्रवाल का परिवार दशकों से स्नैक्स कारोबार से जुड़ा रहा है। उनके दादा गंगाबिशन अग्रवाल ने मशहूर Haldiram's की नींव रखी थी। जहां उनके भाई पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ा रहे थे, वहीं शिव रतन ने अलग पहचान बनाने का फैसला किया। 1993 में उन्होंने ‘बीकाजी’ ब्रांड की शुरुआत की–एक ऐसा कदम जिसने उन्हें अलग मुकाम दिलाया। सिर्फ 8वीं तक पढ़ाई, लेकिन बड़ा विजन शिव रतन अग्रवाल ने सिर्फ 8वीं तक ही पढ़ाई की थी। लेकिन उन्होंने किताबों से ज्यादा अनुभव को महत्व दिया। कम उम्र में ही वह भुजिया बनाने की कला में माहिर हो गए थे। 1986 में उन्होंने ‘शिवदीप प्रोडक्ट्स’ शुरू किया, जो बाद में ‘बीकाजी’ के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने इस ब्रांड का नाम बीकानेर के संस्थापक राव बीकाजी के सम्मान में रखा। मार्केटिंग से बनाई अलग पहचान बीकाजी को घर-घर तक पहुंचाने में उनकी मार्केटिंग रणनीति ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बॉलीवुड के महानायक Amitabh Bachchan को ब्रांड एंबेसडर बनाया, जिससे ब्रांड की पहचान तेजी से बढ़ी। आज बीकाजी न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बड़ी कंपनियों को चुनौती दे रहा है। शेयर बाजार में मजबूत पकड़ बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल 2022 में लिस्ट हुई और आज BSE और NSE दोनों पर मजबूती से ट्रेड कर रही है। 23 अप्रैल 2026 तक कंपनी का मार्केट कैप 17,282 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो इसकी लगातार बढ़ती सफलता को दर्शाता है। प्रेरणा बन गया सफर 74 वर्ष की उम्र में शिव रतन अग्रवाल का निधन हो गया, लेकिन उनका सफर आज भी लाखों युवाओं को प्रेरित करता है। सीमित संसाधनों और कम पढ़ाई के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि विजन, मेहनत और जोखिम लेने का साहस किसी भी व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।  

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RBI का मेगा G-Sec ऑक्शन: 32,000 करोड़ जुटाने की तैयारी, आज लगेगी सरकारी बॉन्ड्स की बोली

देश की अर्थव्यवस्था में तरलता बनाए रखने और बाजार से कर्ज जुटाने के लिए Reserve Bank of India ने 24 अप्रैल 2026 को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) की बड़ी नीलामी का ऐलान किया है। इस मेगा ऑक्शन के जरिए सरकार कुल 32,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर काम कर रही है। यह नीलामी वित्तीय बाजारों के लिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे सरकार की उधारी रणनीति और निवेशकों की रुचि दोनों का संकेत मिलेगा। चार हिस्सों में होगी बॉन्ड्स की नीलामी RBI द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस ऑक्शन को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है: 6.03% GS 2029 – 11,000 करोड़ रुपये 6.68% GS 2033 – 11,000 करोड़ रुपये 7.24% GS 2055 – 5,000 करोड़ रुपये New GOI SGrB 2056 (ग्रीन बॉन्ड्स) – 5,000 करोड़ रुपये इन सभी को मिलाकर कुल 32,000 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई जाएगी। इसमें नए बॉन्ड्स के साथ कुछ मौजूदा सिक्योरिटीज को दोबारा जारी (re-issue) भी किया जाएगा। प्राइमरी डीलर्स की अहम भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में ‘प्राइमरी डीलर्स’ (PDs) की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। RBI ने इनके लिए न्यूनतम अंडरराइटिंग कमिटमेंट (MUC) तय किया है। 2029 और 2033 बॉन्ड्स के लिए: प्रति डीलर 262 करोड़ रुपये 2055 और 2056 बॉन्ड्स के लिए: प्रति डीलर 120 करोड़ रुपये सरल भाषा में, ये डीलर्स यह सुनिश्चित करते हैं कि नीलामी सफलतापूर्वक पूरी हो और पर्याप्त मांग बनी रहे। डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगी नीलामी यह पूरी प्रक्रिया RBI के e-Kuber सिस्टम के जरिए डिजिटल रूप में संपन्न होगी। बोली लगाने का समय सुबह 09:00 बजे से 09:30 बजे तक तय किया गया है। इस दौरान सभी प्रतिभागियों को अपनी बिड सबमिट करनी होगी। यह ‘मल्टीपल प्राइस-बेस्ड मेथड’ पर आधारित होगी, जिसमें अलग-अलग निवेशक अलग-अलग कीमतों पर बोली लगा सकते हैं। डीलर्स को मिलेगा कमीशन नीलामी में भाग लेने वाले प्राइमरी डीलर्स को ‘अंडरराइटिंग कमीशन’ दिया जाएगा। RBI के अनुसार, यह राशि सीधे उनके चालू खाते में उसी दिन ट्रांसफर कर दी जाएगी, जिस दिन सिक्योरिटीज जारी की जाएंगी। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और बाजार में नकदी का प्रवाह भी सुचारू रहता है।  

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मुंबई, एजेंसियां।  गुरुवार, 23 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा और अंततः प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।   सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट BSE Sensex 852.49 अंक यानी 1.09% गिरकर 77,664 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 205 अंक (0.84%) लुढ़ककर 24,173 पर आ गया। इस गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए और बाजार में नकारात्मक माहौल बन गया।   गिरावट के पीछे मुख्य कारण विशेषज्ञों के मुताबिक, गिरावट की सबसे बड़ी वजह Brent Crude Oil की कीमतों में उछाल है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचकर करीब 103 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और Iran-United States के बीच शांति वार्ता में रुकावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी खबरों ने भी बाजार पर दबाव डाला।   सेक्टरवार प्रदर्शन बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट देखने को मिली। ऑटो और PSU बैंक सेक्टर में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। आईटी और रियल्टी सेक्टर भी कमजोर रहे। हालांकि इस गिरावट के बीच फार्मा सेक्टर ने मजबूती दिखाई और करीब 2% की बढ़त के साथ बंद हुआ।   कमोडिटी और एशियाई बाजारों का हाल कमोडिटी बाजार में भी उतार-चढ़ाव रहा। सोने की कीमत हल्की गिरावट के साथ 1,51,870 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि चांदी 2.53% गिरकर 2,42,072 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही, जहां जापान, हांगकांग और सिंगापुर के प्रमुख सूचकांक गिरावट में रहे, जबकि दक्षिण कोरिया का बाजार बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।

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surbhi अप्रैल 18, 2026 0

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