हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता Bharat Kapoor का सोमवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ज्यादा खराब बताई जा रही थी। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है।
अभिनेता Avtar Gill ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भरत कपूर का अंतिम संस्कार सोमवार शाम 6 बजे संपन्न हुआ, जिसमें परिवार के सदस्य, करीबी मित्र और Indian People's Theatre Association से जुड़े कुछ लोग शामिल हुए।
उनकी प्रार्थना सभा 30 अप्रैल को शाम 5 से 7 बजे के बीच उनके निवास पर आयोजित की जाएगी।
भरत कपूर ने 1970 के दशक में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और करीब चार दशकों तक फिल्मों, टेलीविजन और थिएटर में सक्रिय रहे।
उन्होंने Noorie, Ram Balram, Love Story, Bazaar, Ghulami, Aakhree Raasta, Satyamev Jayate, Swarg, Khuda Gawah और Saajan Chale Sasural जैसी कई चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
खासतौर पर उनके खलनायक किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे।
फिल्ममेकर Ashoke Pandit ने भरत कपूर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे एक शानदार अभिनेता होने के साथ-साथ बेहद अच्छे इंसान भी थे।
पंडित के अनुसार, एक कलाकार के रूप में उनकी याददाश्त असाधारण थी और वे अपने संवादों को पूरी सटीकता के साथ याद रखते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि भरत कपूर कैमरे के सामने हमेशा चौंकाने वाला प्रदर्शन देते थे। असल जिंदगी में शांत स्वभाव के होने के बावजूद, स्क्रीन पर वे अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को प्रभावित कर देते थे।
भरत कपूर अपने पीछे पत्नी लोपा, बेटे राहुल और सागर को छोड़ गए हैं। उनकी बेटी कविता का कुछ वर्ष पहले ही निधन हो चुका था।
उनका जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चेन्नई, एजेंसियां। साउथ सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री Samantha Ruth Prabhu ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता Vijay से खास मुलाकात की है। यह मुलाकात चेन्नई में मुख्यमंत्री आवास पर हुई, जिसकी तस्वीरें सामंथा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा कीं। इस मुलाकात ने फैंस के बीच चर्चा तेज कर दी है। फिल्मी को-स्टार्स से लेकर राजनीतिक मुलाकात तक सामंथा और विजय ने पहले भी तमिल सिनेमा की सुपरहिट फिल्मों ‘कथी’ (2014), ‘थेरी’ (2016) और ‘मर्सल’ (2017) में साथ काम किया है। लंबे समय बाद दोनों की यह मुलाकात फिल्म सेट से बाहर एक अलग माहौल में हुई, जहां सामंथा ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। विजय के लिए लिखा भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए सामंथा ने लिखा कि विजय सिर्फ पर्दे पर हीरो नहीं, बल्कि उससे कहीं बड़े विजन वाले इंसान हैं। उन्होंने कहा कि उनकी ऊर्जा, लोकप्रियता और लोगों से जुड़ने की क्षमता हमेशा प्रेरित करती रही है। सामंथा ने अपने नोट में यह भी लिखा कि किसी स्थापित करियर को छोड़कर नए क्षेत्र में कदम रखना और बड़े बदलाव लाने की कोशिश करना साहस की बात है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा मोड़ आता है जब उसे अपने से आगे बढ़कर समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलती है, लेकिन बहुत कम लोग उस राह पर चल पाते हैं। विजय के लिए शुभकामनाएं अभिनेत्री ने विजय के लिए सफलता और शक्ति की कामना करते हुए कहा कि वे अपने इरादों और मेहनत से लोगों को और भी ज्यादा प्रेरित करेंगे। उन्होंने युवाओं के लिए भी संदेश दिया कि जिंदगी केवल सपनों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उससे कहीं आगे बढ़कर अवसर दे सकती है। वर्कफ्रंट पर सामंथा की वापसी वर्कफ्रंट की बात करें तो सामंथा जल्द ही अपनी फिल्म ‘मा इंटी बंगरम’ से बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही हैं। यह फिल्म उनके पति और निर्देशक राज निदिमोरू द्वारा निर्देशित है और इसे ट्रलाला मूविंग पिक्चर्स के बैनर तले बनाया जा रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में अपनी दमदार अदाकारी से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री Adah Sharma अब मराठी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। उनकी पहली मराठी फिल्म Gajra का आधिकारिक एलान कर दिया गया है। फिल्म का पहला पोस्टर भी जारी कर दिया गया है, जिसने दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। इस फिल्म का निर्देशन Shreyas Jadhav करेंगे, जबकि निर्माता Amol Borkar हैं। फिल्म साल 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फैंस से मांगा प्यार और आशीर्वाद अदा शर्मा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए लिखा कि यह उनकी पहली मराठी फिल्म है और इसके लिए उन्हें दर्शकों के प्यार और आशीर्वाद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि '1920', 'द केरल स्टोरी', 'कमांडो', 'सनफ्लावर', 'बस्तर', 'रीता सान्याल' और अपनी साउथ फिल्मों को जिस तरह दर्शकों का प्यार मिला, उसी तरह वह अपने मराठी डेब्यू के लिए भी सभी का समर्थन चाहती हैं। अभिनेत्री ने उम्मीद जताई कि वह दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरी उतरेंगी। सच्ची घटना से प्रेरित होगी फिल्म की कहानी फिल्म 'गजरा' का पहला पोस्टर काफी रहस्यमयी और गंभीर माहौल का एहसास कराता है। पोस्टर से संकेत मिलता है कि यह एक डार्क और भावनात्मक कहानी होगी, जो किसी सच्ची घटना से प्रेरित है। अदा शर्मा ने भी अपने पोस्ट में पुष्टि की है कि फिल्म वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। हालांकि, कहानी से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी साझा नहीं की गई है। देवदत्त मनीषा बाजी संभालेंगे संगीत फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी प्रसिद्ध मराठी संगीतकार Devdatt Manisha Baji को सौंपी गई है। वे मराठी सिनेमा में लोक और ऐतिहासिक संगीत के लिए जाने जाते हैं। फिल्म को गणराज स्टूडियोज प्रस्तुत कर रहा है, जबकि यह जिग जैग प्रोडक्शन्स की पहली फिल्म होगी। मराठी सिनेमा में अदा शर्मा का यह नया सफर दर्शकों के बीच खासा उत्साह पैदा कर रहा है।
आलिया भट्ट की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'अल्फा' का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है। यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की इस फिल्म में पहली बार महिला जासूसों की कहानी को केंद्र में रखा गया है। ट्रेलर में एक्शन, इमोशन और बड़े ट्विस्ट की भरमार देखने को मिली है, वहीं ऋतिक रोशन की झलक ने फैंस की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। ट्रेलर की शुरुआत से ही दिखा दमदार अंदाज ट्रेलर की शुरुआत बॉबी देओल के किरदार से होती है, जो छोटी बच्ची के रूप में आलिया भट्ट का परिचय कराते हुए कहते हैं कि उसकी मां का नाम जानकी था और वह उसे "सीता" बनाएंगे। इसके बाद बड़ी होकर आलिया एक ऐसी कहानी सुनाती हैं जो रामायण की प्रतीकात्मक झलक पेश करती है। आलिया कहती हैं: "एक राक्षस था, घमंड उसका शस्त्र था। वह झूठ और धोखे से राज करता था। एक दिन वह एक राजकुमारी को अपने घर ले गया। इतिहास जानता है कि उस कहानी का अंत कैसे हुआ, लेकिन इस बार सीता आज लंका खुद जलाने आई है।" यह संवाद ट्रेलर का सबसे चर्चित हिस्सा बन चुका है। बॉबी देओल के किरदार में बड़ा ट्विस्ट ट्रेलर में खुलासा होता है कि बॉबी देओल वास्तव में आलिया के पिता नहीं हैं। उन्होंने अपने गुप्त मिशन "अल्फा" के लिए बचपन में उसका अपहरण किया था और उसे बेहद कठोर ट्रेनिंग देकर एक खतरनाक एजेंट बनाया। बॉबी देओल फिल्म में फतेह नाम के किरदार में नजर आएंगे। उनका संवाद— "इंडिया ने अल्फा की कद्र नहीं की, अब इंडिया अल्फा से डरेगा" फिल्म के बड़े संघर्ष की ओर इशारा करता है। शरवरी वाघ और अनिल कपूर की अहम भूमिका फिल्म में शरवरी वाघ भी जबरदस्त एक्शन अवतार में दिखाई दे रही हैं। वहीं अनिल कपूर की मौजूदगी कहानी को और मजबूत बनाती नजर आती है। ट्रेलर में दोनों के किरदारों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है, जिससे सस्पेंस बरकरार है। ऋतिक रोशन की एंट्री ने बढ़ाई एक्साइटमेंट ट्रेलर के अंतिम हिस्से में ऋतिक रोशन की एक झलक दिखाई गई है। हालांकि उनका किरदार अभी भी रहस्य बना हुआ है। माना जा रहा है कि वह स्पाई यूनिवर्स के अपने लोकप्रिय किरदार कबीर के रूप में नजर आ सकते हैं, लेकिन फिल्म रिलीज से पहले मेकर्स ने इस राज से पर्दा नहीं उठाया है। कब रिलीज होगी 'अल्फा'? शिव रवैल के निर्देशन में बनी 'अल्फा' यशराज स्पाई यूनिवर्स की सातवीं फिल्म है और इस यूनिवर्स की पहली फीमेल-लीड स्पाई फिल्म भी है। मुख्य कलाकार: आलिया भट्ट शरवरी वाघ बॉबी देओल अनिल कपूर विशेष भूमिका में ऋतिक रोशन यह फिल्म 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।