US Iran War Cost: अमेरिका और ईरान के बीच 108 दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों ने अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव फिलहाल थमता नजर आ रहा है। हालांकि इस युद्ध की कीमत दोनों देशों को भारी चुकानी पड़ी है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर अमेरिका को भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू होकर 16 जून तक चले इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने केवल सैन्य अभियानों पर ही लगभग 113 अरब डॉलर खर्च किए। वहीं कई विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आर्थिक प्रभावों को जोड़ने पर कुल नुकसान 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक युद्ध के शुरुआती छह दिनों में ही करीब 11.3 अरब डॉलर खर्च हो चुके थे। इसके बाद प्रतिदिन औसतन लगभग 1 अरब डॉलर (करीब ₹94,475 करोड़) का खर्च दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सैन्य अभियानों का अनुमानित खर्च है। वास्तविक आर्थिक बोझ इससे कहीं अधिक हो सकता है।
युद्ध के शुरुआती चरण में अमेरिका ने मिसाइलों, गोला-बारूद और रक्षा उपकरणों पर लगभग 25 अरब डॉलर खर्च किए।
अर्थशास्त्रियों और कई अमेरिकी नेताओं का मानना है कि युद्ध का असर केवल रक्षा बजट तक सीमित नहीं रहा।
युद्ध के कारण:
कुछ अनुमानों के मुताबिक अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर कुल प्रभाव 630 अरब डॉलर से लेकर 1 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकता है।
युद्ध में ईरान के कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, तेल रिफाइनरियां और पावर ग्रिड प्रभावित हुए। इनके पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने इस पुनर्निर्माण प्रक्रिया में सहयोग करने पर सहमति जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस फंडिंग में खाड़ी देशों की भी भूमिका रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ा। अनुमान है कि केवल ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के कारण अमेरिकी नागरिकों को 40 अरब डॉलर से अधिक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ा।
हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद बढ़त के साथ सत्र समाप्त किया। सेंसेक्स करीब 152 अंक चढ़कर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी मामूली बढ़त के साथ 24,620 के ऊपर रहा। बाजार में दिनभर खरीदारी और बिकवाली के बीच उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी की क्लोजिंग कारोबार के अंत में सेंसेक्स लगभग 152 अंक की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा। निफ्टी 50 भी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा और 24,620 के ऊपर बंद हुआ। इन शेयरों में रही तेजी आज के कारोबार में हिंडाल्को और NTPC प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। वहीं बाजार की चाल पर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू निवेशकों की गतिविधियों का असर देखने को मिला। बाजार में क्यों रहा उतार-चढ़ाव? कारोबार के दौरान निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव भी बना। आईटी, रियल्टी और एफएमसीजी जैसे क्षेत्रों में कमजोरी की खबरें भी सामने आईं। निवेशकों की नजर अब अगले सत्र पर आज की बढ़त के बाद निवेशकों की नजर अब अगले कारोबारी सत्र में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख कंपनियों के शेयरों की चाल पर रहेगी। बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना हुआ है, इसलिए निवेशकों के लिए सेक्टर और स्टॉक स्तर पर सावधानी महत्वपूर्ण रहेगी।
मुंबई, एजेंसियां। Ardee Industries ने अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से पहले एंकर निवेशकों से ₹127.75 करोड़ जुटाए हैं। कंपनी ने एंकर निवेशकों को ₹53 प्रति शेयर की कीमत पर कुल 2,41,05,584 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। इसके बाद कंपनी का करीब ₹426 करोड़ का IPO आज, 5 अगस्त 2026 से आम निवेशकों के लिए खुल गया है। इन निवेशकों ने लिया हिस्सा एंकर बुक में Bank of India Small Cap Fund, Bengal Finance & Investment Pvt Ltd, Winro Commercial (India) Limited, Bharat Value Fund और India Max Investment Fund Limited समेत कई संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया। एंकर निवेशकों से मिली मजबूत प्रतिक्रिया को कंपनी के IPO से पहले संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ₹426 करोड़ का है IPO Ardee Industries का IPO करीब ₹425.87 करोड़ का है। इसमें ₹320 करोड़ का फ्रेश इश्यू और प्रमोटर शेयरधारकों की ओर से करीब ₹105.87 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। IPO का प्राइस बैंड ₹50 से ₹53 प्रति शेयर तय किया गया है और निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट साइज 281 शेयर है। पब्लिक इश्यू 5 अगस्त से 7 अगस्त तक खुला रहेगा। जुटाई गई रकम का इस्तेमाल फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम में से ₹220 करोड़ कंपनी की अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। वहीं करीब ₹20 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाए जाएंगे। शेष रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जाएगी। Ardee Industries एंड-ऑफ-लाइफ एनर्जी स्टोरेज उत्पादों और नॉन-फेरस स्क्रैप की रिसाइक्लिंग तथा संसाधन रिकवरी के कारोबार में सक्रिय है। कंपनी से मिलने वाली एंकर बुक की मजबूत प्रतिक्रिया के बाद अब बाजार की नजर IPO के वास्तविक सब्सक्रिप्शन आंकड़ों पर रहेगी।
मुंबई, एजेंसियां। JioBlackRock Mutual Fund ने अपना पहला एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) JioBlackRock Nifty 50 ETF लॉन्च कर दिया है। इसके साथ कंपनी ने भारतीय ETF बाजार में औपचारिक रूप से कदम रखा है। नया ETF Nifty 50 Index को ट्रैक करेगा और इसके जरिए निवेशकों को देश की 50 प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों में एक साथ निवेश का अवसर मिलेगा। 11 अगस्त तक खुला है NFO JioBlackRock Nifty 50 ETF का न्यू फंड ऑफर (NFO) 4 अगस्त को खुला और 11 अगस्त 2026 को बंद होगा। इसके बाद आवंटन की प्रक्रिया 14 अगस्त को निर्धारित है। योजना का उद्देश्य Nifty 50 Index की संरचना को दोहराते हुए इक्विटी और इक्विटी से संबंधित प्रतिभूतियों में निवेश करना है। Nifty 50 की 50 बड़ी कंपनियों में निवेश यह ETF निष्क्रिय निवेश रणनीति पर आधारित है। इसका प्रदर्शन Nifty 50 Index के प्रदर्शन के अनुरूप रहने का लक्ष्य है, हालांकि ट्रैकिंग एरर के कारण वास्तविक रिटर्न इंडेक्स से थोड़ा अलग हो सकता है। निवेशकों को एक ही उत्पाद के जरिए Nifty 50 में शामिल प्रमुख कंपनियों का एक्सपोजर मिलेगा। JioBlackRock की ETF बाजार में एंट्री JioBlackRock Mutual Fund, Jio Financial Services और BlackRock के संयुक्त उपक्रम के रूप में भारतीय निवेश बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। Nifty 50 ETF का लॉन्च कंपनी की पैसिव इन्वेस्टमेंट उत्पादों के विस्तार की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी के अनुसार ETF का उद्देश्य निवेश को अधिक सरल और व्यापक निवेशक वर्ग के लिए सुलभ बनाना है। JioBlackRock के फंड मैनेजरों में तन्वी कचेरिया, हर्ष मेहता और आनंद शाह शामिल हैं।