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Bulldozers remove barricades and temporary structures outside Pakistan High Commission in New Delhi
दिल्ली में पाक हाई कमीशन के बाहर चला बुलडोजर, बैरिकेड्स हटाए गए; इस्लामाबाद की कार्रवाई के बाद भारत का जवाब

नई दिल्ली: दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर गुरुवार को अधिकारियों ने कई अस्थायी ढांचे और बैरिकेड्स हटा दिए। अधिकारियों के मुताबिक, ये संरचनाएं स्वीकृत सीमा से बाहर सड़क के हिस्से में बनाई गई थीं। कार्रवाई के दौरान बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया और वीजा सेक्शन के पास बनाए गए कतार प्रबंधन ढांचों को भी हटाया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे सुरक्षा बैरिकेड्स और पार्किंग पोल्स को हटा दिया था। इसी वजह से दिल्ली में हुई कार्रवाई को दोनों देशों के बीच tit-for-tat यानी जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। पाक हाई कमीशन के बाहर क्या-क्या हटाया गया? अधिकारियों ने पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर सड़क किनारे बनाए गए कई ढांचों और बैरिकेड्स को ध्वस्त किया। इनमें वीजा सेक्शन के पास लोगों की कतार व्यवस्थित करने के लिए लगाए गए इंतजाम भी शामिल थे। मौके की तस्वीरों में टूटे हुए लोहे के बैरिकेड्स, गेट, ईंटें, कंक्रीट और निर्माण सामग्री बिखरी दिखाई दी। कुछ हिस्सों में टिन की छत और सफेद धातु की बाड़ भी हटाई गई। हालांकि, पाकिस्तान हाई कमीशन का मुख्य प्रवेश द्वार और मुख्य इमारत सुरक्षित रही। क्यों हुई कार्रवाई? आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जांच में पाया गया कि हाई कमीशन के बाहर बनाए गए कुछ ढांचे स्वीकृत सीमा से बाहर थे। इसी आधार पर उन्हें हटाया गया। पाकिस्तान हाई कमीशन दक्षिण दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित डिप्लोमैटिक एन्क्लेव में है। वीजा सेक्शन के बाहर बनाए गए कुछ कतार प्रबंधन ढांचे भी इसी कार्रवाई के दायरे में आए। तीन दिन पहले इस्लामाबाद में भी हुई थी कार्रवाई दिल्ली की कार्रवाई को पाकिस्तान में हुई हालिया कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। करीब तीन दिन पहले इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाई कमीशन के बाहर पाकिस्तान ने सुरक्षा बैरिकेड्स और पार्किंग पोल्स हटा दिए थे। इसके बाद अब दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर मौजूद ऐसे ढांचों पर कार्रवाई हुई है, जिन्हें अधिकारियों ने स्वीकृत सीमा से बाहर बताया है। दोनों घटनाओं के बीच समानता के कारण इसे दोनों देशों के बीच जवाबी कदम माना जा रहा है। जम्मू-कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी भी चर्चा में इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई हालिया टिप्पणी भी चर्चा में है। श्रीनगर दौरे के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। हालांकि, दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर हुई कार्रवाई का उनकी टिप्पणी से कोई सीधा संबंध नहीं बताया गया है। पाकिस्तान ने गोर की टिप्पणी के बाद अमेरिकी राजनयिक को तलब किया था। अब बढ़ी दोनों देशों के बीच हलचल पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर ढांचे हटाए जाने के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल मुख्य इमारत और प्रवेश द्वार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि सड़क की ओर बने अतिरिक्त ढांचों और बैरिकेड्स को हटा दिया गया है। दोनों देशों के राजनयिक परिसरों के बाहर हाल के दिनों में हुई इन कार्रवाइयों ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव को चर्चा में ला दिया है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
जिम्बाब्वे की करिबा झील में पलटी यात्रियों से भरी फेरी
जिम्बाब्वे में बड़ा नौका हादसा: करिबा झील में फेरी पलटी, 44 लोगों की मौत; 67 से ज्यादा यात्रियों को बचाया गया

हरारे, एजेंसियां। जिम्बाब्वे की करिबा झील में यात्रियों से भरी एक फेरी पलटने के बाद बड़ा हादसा हो गया। हादसे में कम से कम 44 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच फेरी पलटी। बचाव अभियान अभी भी जारी है।   क्षमता से ज्यादा यात्री थे सवार     रिपोर्टों के मुताबिक, फेरी की क्षमता करीब 90 यात्रियों की थी, लेकिन हादसे के समय उसमें क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे। पुलिस के अनुसार नाव में 120 से ज्यादा लोग हो सकते थे। शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों में 114 वयस्क यात्रियों और पांच चालक दल के सदस्यों का उल्लेख किया गया था।     तेज लहरों के बीच पलटी फेरी     हादसा उस समय हुआ जब फेरी करिबा शहर से झील के द्वीपों और मछली पकड़ने वाले इलाकों की ओर जा रही थी। खराब मौसम और तेज लहरों के कारण नाव में पानी भरने लगा और इसके बाद वह पलट गई। एक जीवित बचे यात्री के अनुसार, कुछ यात्रियों ने चालक से खराब मौसम के कारण वापस लौटने की अपील भी की थी।     67 से ज्यादा लोगों को बचाया गया     बचाव अभियान में अब तक 67 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। राहत दल झील में लापता यात्रियों और शवों की तलाश कर रहे हैं। मृतकों की संख्या शुरुआती 15 से बढ़कर 44 हो गई है और अधिकारियों को आशंका है कि तलाशी अभियान आगे बढ़ने पर आंकड़ा और बदल सकता है।     सरकार ने हादसे को घोषित किया आपदा     हादसे के बाद जिम्बाब्वे सरकार ने इसे गंभीर आपदा माना है और राहत-बचाव अभियान तेज किया गया है। करिबा झील जिम्बाब्वे और जाम्बिया की सीमा पर स्थित है और ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए यह फेरी परिवहन का महत्वपूर्ण साधन थी।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
इंडोनेशिया में यात्री फेरी KM Putri Yasmin में लगी भीषण आग
इंडोनेशिया में यात्री फेरी में भीषण आग, एक महिला की मौत; 200 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

जकार्ता, एजेंसियां। इंडोनेशिया में बाली से लोम्बोक जा रही यात्री फेरी KM Putri Yasmin में भीषण आग लगने से अफरातफरी मच गई। हादसा बुधवार सुबह लोम्बोक जलडमरूमध्य में हुआ। हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया।   बाली से लोम्बोक जा रही थी फेरी   KM Putri Yasmin फेरी ने बाली के पादांगबाई बंदरगाह से लोम्बोक के लेम्बर बंदरगाह के लिए यात्रा शुरू की थी। समुद्र में सफर के दौरान अचानक फेरी में आग लग गई। आग लगते ही यात्रियों में दहशत फैल गई और बचाव अभियान शुरू किया गया।   एक महिला की मौत, 200 से ज्यादा सुरक्षित   बचाव अभियान में 212 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि एक महिला यात्री की मौत हुई है। कुछ रिपोर्टों में 172 लोगों के बचाए जाने का शुरुआती आंकड़ा भी दिया गया है, इसलिए बचाव अभियान के आंकड़ों में अपडेट के साथ अंतर दिखाई दे रहा है।   तेज लहरों के बीच चला रेस्क्यू ऑपरेशन   हादसे के समय समुद्र में तेज लहरें थीं, जिससे राहत और बचाव अभियान मुश्किल हो गया। 200 से ज्यादा बचावकर्मियों और कई बचाव नौकाओं को अभियान में लगाया गया। फेरी में आग लगने की वास्तविक वजह की जांच अभी जारी है।   यात्रियों की संख्या को लेकर भी सवाल   हादसे के बाद फेरी के यात्री मैनिफेस्ट को लेकर भी सवाल उठे हैं। अधिकारियों के मुताबिक मैनिफेस्ट में 114 यात्री और 17 चालक दल के सदस्य दर्ज थे, जबकि बचाए गए लोगों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। इस विसंगति की भी जांच की जा रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
Donald Trump reportedly used a secret military flight from Turkey to Britain amid security concerns linked to a potential Iranian threat.
ईरानी खतरे के बीच ट्रंप की तुर्की से गुप्त निकासी, कैटरिंग वाहन से बदला विमान; पत्रकारों को भी नहीं लगी भनक

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर अमेरिकी एजेंसियों ने बेहद गोपनीय ऑपरेशन चलाया। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान से राष्ट्रपति के विमान को संभावित खतरे की खुफिया जानकारी मिलने के बाद ट्रंप को तुर्की से ब्रिटेन ले जाने की योजना में बड़ा बदलाव किया गया। खास बात यह रही कि ट्रंप को जिस विमान से रवाना होते हुए सार्वजनिक रूप से दिखाया गया, उन्होंने वास्तव में उसी विमान से यात्रा नहीं की। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप को एक कैटरिंग वाहन के जरिए एक अलग सैन्य विमान तक पहुंचाया गया और इसके बाद उन्हें चुपचाप ब्रिटेन रवाना किया गया। इस पूरे ऑपरेशन का मकसद राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को गोपनीय रखना और संभावित खतरे से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना था। कैमरों के सामने पुराने एयर फोर्स वन में सवार हुए ट्रंप रिपोर्ट के मुताबिक, NATO शिखर सम्मेलन के लिए ट्रंप जुलाई की शुरुआत में तुर्की के अंकारा पहुंचे थे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कतर की ओर से उपलब्ध कराए गए नए बोइंग विमान का इस्तेमाल किया था। सम्मेलन के बाद उन्हें तुर्की से ब्रिटेन जाना था। इसी दौरान अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को राष्ट्रपति के विमान और उनकी यात्रा से जुड़े संभावित ईरानी खतरे की जानकारी मिली। इसके बाद ट्रंप की तुर्की से सुरक्षित निकासी के लिए वैकल्पिक योजना तैयार की गई। सार्वजनिक रूप से यह दिखाया गया कि ट्रंप पुराने एयर फोर्स वन विमान में सवार होकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो रहे हैं। इससे मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया को भी यही लगा कि राष्ट्रपति उसी विमान से यात्रा कर रहे हैं। कैटरिंग वाहन के जरिए बदला गया विमान रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप वास्तव में पुराने एयर फोर्स वन से रवाना नहीं हुए। उन्हें विमान के नीचे मौजूद एक कैटरिंग वाहन के जरिए सुरक्षित तरीके से दूसरे स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद उन्हें एक तीसरे विमान तक पहुंचाया गया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में इस विमान की पहचान अमेरिकी वायु सेना के C-32A के रूप में की गई है। यह बोइंग 757 का सैन्य संस्करण है और इसका इस्तेमाल अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की आधिकारिक यात्राओं में किया जाता है। ट्रंप को इसी विमान से गुप्त रूप से ब्रिटेन ले जाया गया। प्रेस को भी रखा गया भ्रम में इस ऑपरेशन का एक अहम पहलू यह था कि ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे प्रेस सदस्यों को भी उनकी वास्तविक यात्रा की जानकारी नहीं थी। पत्रकारों को लेकर चल रहा एयर फोर्स वन बाद में ब्रिटेन पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य विमान पहले ब्रिटेन में उतरा और उसके कुछ मिनट बाद पत्रकारों को लेकर चल रहा एयर फोर्स वन भी वहां पहुंचा। इससे ट्रंप की वास्तविक यात्रा और उनके विमान को लेकर भ्रम बना रहा। ईरान से खतरे की आशंका बनी वजह अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति की यात्रा में यह बदलाव ईरान से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरे के कारण किया गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में खतरे की पूरी प्रकृति या खुफिया इनपुट की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए यात्रा कार्यक्रम, विमान और वास्तविक लोकेशन को गोपनीय रखना सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह सुरक्षा ऑपरेशन? राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा के दौरान विमान और रूट की जानकारी संभावित हमले या निगरानी का लक्ष्य बन सकती है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से एक विमान की गतिविधि दिखाकर वास्तविक यात्रा को दूसरे सैन्य विमान से संचालित करना सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ट्रंप की तुर्की से ब्रिटेन तक हुई यह कथित गुप्त निकासी बताती है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था किस स्तर तक गोपनीय और बहुस्तरीय हो सकती है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी कई परिचालन जानकारियां अभी सार्वजनिक नहीं हैं। इसलिए उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और आधिकारिक रूप से सामने आई जानकारी के आधार पर ही इस घटना को समझना उचित होगा।  

surbhi अगस्त 11, 2026 0
Donald Trump claims Hamas disarmament and phased Israeli troop withdrawal under proposed Gaza ceasefire deal.
गाजा युद्ध खत्म होने की ओर? ट्रंप का दावा- हमास करेगा निशस्त्रीकरण, चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना

Gaza Ceasefire Deal: गाजा युद्ध को लेकर बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हमास के निशस्त्रीकरण (Disarmament) और गाजा से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। हालांकि, इस समझौते पर अभी सभी पक्षों की औपचारिक मंजूरी और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। ट्रंप ने किया समझौते का दावा डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह समझौता गाजा में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, सभी पक्षों की औपचारिक मंजूरी मिलने के 14 दिनों के भीतर समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि हमास के हथियार छोड़ने के साथ-साथ इजरायली सेना भी गाजा से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना शुरू करेगी। समझौते की प्रमुख बातें प्रस्तावित समझौते के अनुसार— हमास चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार सौंपेगा। निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया पूरी होने में 200 से 300 दिन लग सकते हैं। गाजा में बने सुरंगों के नेटवर्क को निष्क्रिय किया जाएगा। हमास के पूर्ण निशस्त्रीकरण के बाद इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से गाजा से हटेगी। करीब 5,000 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल सुरक्षा व्यवस्था संभालेगा। इस बल की निगरानी एक अमेरिकी जनरल करेंगे। नई फिलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गाजा में नई फिलिस्तीनी सरकार के गठन की भी योजना है। हमास ने क्या कहा? रिपोर्टों के मुताबिक, हमास ने इस रोडमैप पर सिद्धांततः सहमति जताई है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि समझौते को लागू करने से पहले इजरायल को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी और गाजा से सेना हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। नई सरकार संभालेगी प्रशासन समझौते के तहत गाजा में एक नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल नई पुलिस व्यवस्था को प्रशिक्षित करेगा और सुरक्षा व्यवस्था स्थापित होने के बाद प्रशासन स्थानीय सरकार को सौंप दिया जाएगा। अभी आधिकारिक मंजूरी बाकी हालांकि ट्रंप ने समझौते का दावा किया है, लेकिन अभी तक सभी संबंधित पक्षों की ओर से इसकी आधिकारिक और संयुक्त पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस योजना के लागू होने की अंतिम स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। फिलहाल इसे गाजा युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक संभावित कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
US fighter jets and Iran military facilities amid rising tensions between Washington and Tehran
ईरान पर बड़े अमेरिकी हमले की तैयारी? रिपोर्ट में एयर स्ट्राइक का दावा, ट्रंप ने अभी नहीं दी अंतिम मंजूरी

Iran-US Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अहम ठिकानों पर बड़े हवाई हमले (Air Strike) के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस सैन्य अभियान को अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है। एयर स्ट्राइक की तैयारी का दावा Axios की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के बीच ईरान के ऊर्जा और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना पर लगातार चर्चा चल रही है। प्रस्तावित कार्रवाई का उद्देश्य तेहरान पर सैन्य दबाव बढ़ाकर उसे अमेरिका की ओर से प्रस्तावित युद्धविराम शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करना बताया गया है। वहीं, एएनआई ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन सेना को संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रहने के संकेत दिए गए हैं। इजरायल भी हो सकता है शामिल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संभावित सैन्य अभियान में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो हालिया तनाव के दौरान यह पहला मौका होगा जब दोनों देश ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में ईरान इजरायल पर मिसाइल हमले तेज कर सकता है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है। किन ठिकानों को बनाया जा सकता है निशाना? CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अहम प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सकता है। इनमें शामिल हैं— पेट्रोलियम रिफाइनरी पावर प्लांट ऊर्जा उत्पादन और वितरण से जुड़े प्रमुख प्रतिष्ठान हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस के भीतर इस कार्रवाई को लेकर मतभेद भी हैं और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने सैन्य विकल्प पर आपत्ति जताई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल का भी दावा The Wall Street Journal ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की तैयारी के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि अंतिम मंजूरी मिलती है तो कार्रवाई की शुरुआत जल्द हो सकती है। ट्रंप का कड़ा बयान कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, "हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे और एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।" इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रहे, तो अमेरिका ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा। पांच महीनों से जारी है तनाव ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच पिछले कई महीनों से सैन्य और कूटनीतिक तनाव बना हुआ है। एक ओर क्षेत्र में जवाबी सैन्य कार्रवाइयों का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर युद्धविराम और बातचीत के प्रयास भी चल रहे हैं। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Travelers at Dhaka airport after the US lowers its travel advisory for Bangladesh to Level 2
Bangladesh Travel Advisory: अमेरिका ने बांग्लादेश के लिए ट्रैवल एडवाइजरी में दी राहत, सुरक्षा हालात में सुधार का जताया भरोसा

Bangladesh Travel Advisory: अमेरिका ने बांग्लादेश के लिए अपनी यात्रा सलाह (Travel Advisory) में अहम बदलाव करते हुए इसे Level-3 (यात्रा पर पुनर्विचार करें) से घटाकर Level-2 (अधिक सावधानी बरतें) कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत सर्जियो गोर की ढाका यात्रा के दौरान लिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि बांग्लादेश में सुरक्षा स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है, हालांकि कुछ संवेदनशील इलाकों में अब भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। Level-2 एडवाइजरी का क्या मतलब है? अमेरिकी विदेश विभाग की ट्रैवल एडवाइजरी चार स्तरों में जारी की जाती है। Level-2 का अर्थ है कि यात्री सामान्य यात्रा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। इससे पहले बांग्लादेश Level-3 श्रेणी में था, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को यात्रा करने से पहले दोबारा विचार करने की सलाह दी जाती थी। नई एडवाइजरी को बांग्लादेश के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ढाका बैठक के बाद हुआ फैसला बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ढाका में विदेश मामलों के सलाहकार खलीलुर रहमान और अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर के बीच हुई बैठक सकारात्मक रही। बैठक के बाद गोर ने विदेश मंत्रालय को ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव की जानकारी दी। इस दौरान प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर भी मौजूद रहे। सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी लिखा कि बांग्लादेश में सुरक्षा हालात स्थिर हुए हैं, इसलिए यात्रा सलाह को Level-2 तक कम किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ क्षेत्रों में अब भी अतिरिक्त प्रतिबंध लागू हैं और वहां यात्रा से बचने की सलाह बरकरार है। बांग्लादेश सरकार ने किया फैसले का स्वागत बांग्लादेश सरकार ने अमेरिकी फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था में हुए सुधार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता बताया। सरकार का कहना है कि पिछले छह महीनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, कानून-व्यवस्था सुधारने और विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है। पर्यटन, व्यापार और निवेश को मिल सकता है बढ़ावा बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय का मानना है कि अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी में यह बदलाव दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास का संकेत है। इससे पर्यटन, व्यापार, विदेशी निवेश और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलने की संभावना है। वहीं, बांग्लादेश में अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन ने कहा कि सर्जियो गोर की यात्रा केवल ट्रैवल एडवाइजरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अमेरिका और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को भी मजबूत करना है। कुछ इलाकों में अब भी सतर्क रहने की सलाह हालांकि अमेरिका ने यात्रा सलाह को नरम किया है, लेकिन उसने यह भी स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी जोखिम अब भी बने हुए हैं। ऐसे इलाकों में यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन और अमेरिकी विदेश विभाग की नवीनतम सलाह का पालन करने की सिफारिश की गई है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
New operation theatre at Rapti Eye Hospital in Nepal's Dang district built with Indian assistance
India-Nepal Relations: नेपाल के डांग में भारत की मदद से बना नया ऑपरेशन थिएटर शुरू, आंखों के इलाज की सुविधा होगी बेहतर

India Nepal Relations: भारत और नेपाल के बीच विकास सहयोग को एक और मजबूती मिली है। भारत सरकार की आर्थिक सहायता से नेपाल के लुंबिनी प्रांत के डांग जिले में स्थित राप्ती आई हॉस्पिटल के नए ऑपरेशन थिएटर भवन का उद्घाटन किया गया। इस दो मंजिला भवन का निर्माण हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (HICDP) के तहत किया गया है, जिससे क्षेत्र में नेत्र चिकित्सा सेवाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना का उद्घाटन नेपाल में भारत के दूतावास की काउंसलर गीतांजलि ब्रैंडन और तुलसीपुर उप-महानगरपालिका के मेयर टीकाराम खड़का ने संयुक्त रूप से किया। समारोह में अस्पताल प्रबंधन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। आंखों के इलाज की सुविधाओं में होगा विस्तार अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि नए ऑपरेशन थिएटर के शुरू होने से डांग जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के हजारों मरीजों को आधुनिक और बेहतर नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। इससे जटिल आंखों के ऑपरेशन स्थानीय स्तर पर ही किए जा सकेंगे और मरीजों को दूर-दराज के शहरों में जाने की जरूरत कम होगी। यह परियोजना डांग जिले में भारत की सहायता से पूरी हुई सातवीं HICDP परियोजना है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत विकास साझेदारी को दर्शाती है। नेपाल में भारत के लगभग 600 विकास प्रोजेक्ट नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, HICDP कार्यक्रम के तहत भारत सरकार अब तक नेपाल के सभी सात प्रांतों में करीब 600 विकास परियोजनाएं पूरी कर चुकी है। इनमें 66 परियोजनाएं लुंबिनी प्रांत में पूरी हुई हैं, जबकि अकेले डांग जिले में अब तक सात परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। भारत ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी नेपाल को लगातार सहयोग दिया है। लुंबिनी प्रांत को अब तक 169 एंबुलेंस और 59 स्कूल बसें प्रदान की जा चुकी हैं। वहीं, डांग जिले को 19 एंबुलेंस और 8 स्कूल बसें मिली हैं। इससे पहले जनवरी 2022 में राप्ती आई हॉस्पिटल को भी भारत की ओर से एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी। भारत-नेपाल विकास साझेदारी को मिला नया बल भारतीय दूतावास ने कहा कि भारत और नेपाल केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि विकास के भरोसेमंद साझेदार भी हैं। दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (HICDP) नेपाल के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने और स्थानीय विकास को गति देने की भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं। नई परियोजना से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि भारत-नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों को भी नई मजबूती मिलेगी।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Israeli military vehicles near Gaza as diplomatic efforts intensify to end the Israel-Hamas war
Gaza War: क्या जल्द खत्म होगा गाजा युद्ध? ट्रंप का दावा- हमास छोड़ेगा हथियार, चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना

Israel-Hamas War: गाजा में महीनों से जारी युद्ध को लेकर एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हमास और गाजा में सक्रिय अन्य हथियारबंद संगठनों के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत हमास चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार छोड़ेगा, जबकि इसके बदले इजरायल भी धीरे-धीरे गाजा से अपनी सेना हटाएगा। हालांकि, इस दावे पर हमास की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप ने किया बड़े समझौते का दावा डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह समझौता "Board of Peace" की मध्यस्थता में तैयार किया गया है। उन्होंने इसे गाजा में लंबे समय से जारी हिंसा को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। ट्रंप के मुताबिक, यदि सभी पक्ष इस समझौते को लागू करते हैं तो इससे न केवल युद्ध खत्म होने का रास्ता खुलेगा, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिशों को भी मजबूती मिलेगी। हथियार छोड़ने के साथ हटेगी इजरायली सेना प्रस्तावित योजना के अनुसार, जैसे-जैसे हमास अपने हथियार सौंपेगा, इजरायल भी गाजा से अपनी सैन्य मौजूदगी को चरणबद्ध तरीके से कम करेगा। इसके बाद गाजा की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल और नई फिलिस्तीनी पुलिस के हाथों में सौंपी जाएगी। अमेरिका का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य दोहरा होगा—एक ओर इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी ओर गाजा को भविष्य में किसी भी सैन्य गतिविधि या हमले के लिए इस्तेमाल होने से रोकना। नई फिलिस्तीनी सरकार बनाने की तैयारी ट्रंप ने बताया कि इस योजना के तहत आगे चलकर गाजा में एक नई फिलिस्तीनी सरकार गठित की जाएगी, जो बोर्ड ऑफ पीस और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर प्रशासन संभालेगी। उन्होंने कहा कि यह उनकी 20-पॉइंट शांति योजना का अहम हिस्सा है, जिसका लक्ष्य गाजा में स्थायी शांति और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना है। उन्होंने इस पहल में सहयोग के लिए मिस्र, कतर और तुर्किये का भी धन्यवाद किया और कहा कि इन देशों ने बातचीत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिका ने इसे बताया बड़ा कदम अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि हमास वास्तव में हथियार छोड़ने और गाजा के प्रशासन से अलग होने पर सहमत होता है, तो यह युद्ध शुरू होने के बाद अब तक की सबसे महत्वपूर्ण प्रगति मानी जाएगी। गुरुवार को जारी मसौदा योजना के मुताबिक, सभी पक्षों की मंजूरी मिलने के 14 दिनों के भीतर इस प्रक्रिया की शुरुआत की जा सकती है। अभी आधिकारिक सहमति का इंतजार हालांकि ट्रंप ने समझौते का दावा किया है, लेकिन हमास, इजरायल या अन्य संबंधित पक्षों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रस्तावित योजना पर सभी पक्ष सहमत होते हैं या नहीं। यदि यह समझौता लागू होता है, तो यह गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि साबित हो सकता है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
India objects to New York Times for referring to Pakistan-occupied Kashmir as 'Pakistani Kashmir'
PoK को 'Pakistani Kashmir' लिखने पर भारत का कड़ा ऐतराज, न्यूयॉर्क टाइम्स को दिया जवाब

Pakistan Occupied Kashmir: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर भारत ने अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अखबार द्वारा अपनी रिपोर्ट में PoK को 'Pakistani Kashmir' लिखे जाने पर भारत ने इसे भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट कहा कि "कोई पाकिस्तानी कश्मीर नहीं है, केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan Occupied Kashmir - PoK) है।" भारतीय दूतावास ने क्या कहा? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में भारतीय दूतावास ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और हमेशा रहेंगे। दूतावास ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा कर रखा है और वहां रहने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा तथा दमन की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। भारत ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सही और आधिकारिक शब्दावली का इस्तेमाल करना चाहिए। किस रिपोर्ट पर उठा विवाद? दरअसल, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हालिया चुनाव और हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में मीरपुर में सुरक्षा बलों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प का उल्लेख किया गया था। अखबार ने बताया कि इस घटना में कम से कम दो लोगों की मौत हुई, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, रिपोर्ट में JAAC की ओर से पुलिस कार्रवाई में कई लोगों के मारे जाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने का भी उल्लेख किया गया था। भारत ने दोहराया अपना पुराना रुख भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है, जबकि पाकिस्तान कुछ क्षेत्रों पर अवैध कब्जा किए हुए है। इसी नीति के तहत भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों से अपेक्षा की है कि वे इस क्षेत्र का उल्लेख करते समय 'Pakistan Occupied Kashmir (PoK)' जैसी मान्य और तथ्यात्मक शब्दावली का ही उपयोग करें। भारत का कहना है कि गलत भौगोलिक शब्दों का इस्तेमाल न केवल तथ्यों को विकृत करता है, बल्कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भ्रम भी पैदा करता है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

US Saudi Iraq Strike: इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उत्तरी इराक के दियाला प्रांत में रातभर चली बमबारी में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कम से कम चार सदस्यों के मारे जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईरानी मीडिया ने 4 IRGC सदस्यों की मौत का किया दावा रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में मारे गए IRGC सदस्यों की पहचान अली असगर अस्तानेह, अबोलफजल मोताकी, मुर्तजा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफोरूश के रूप में की गई है। बताया गया कि सभी ईरान के काशान शहर के रहने वाले थे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे इराक में किस मिशन पर तैनात थे। अमेरिका का दावा- 20 ईरानी सलाहकार भी मारे गए अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि इस सैन्य कार्रवाई में करीब 20 ईरानी सैन्य सलाहकार, तकनीकी विशेषज्ञ और IRGC से जुड़े सदस्य भी मारे गए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जिन ठिकानों पर हमला किया गया वहां ईरान समर्थित समूहों के मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन संचालित किए जा रहे थे। उनका कहना है कि इन ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान समर्थित मिलिशिया की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की कोशिश की गई। PMF ने भी 20 लड़ाकों की मौत की पुष्टि की इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) ने बयान जारी कर कहा कि हमलों में उसके 20 लड़ाके मारे गए, जबकि 32 अन्य घायल हुए हैं। संगठन के अनुसार, हमले बगदाद, दियाला, किरकुक और बसरा समेत सात प्रांतों में किए गए। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि कार्रवाई के दौरान पूर्वी इराक में स्थित लॉजिस्टिक और हथियारों से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि पिछले 72 घंटों में उसकी सेना और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमले हुए थे, जिनके पीछे ईरान समर्थित समूहों का हाथ था। सऊदी ने ड्रोन हमलों को बताया कार्रवाई की वजह सैन्य अभियान से पहले सऊदी अरब ने आरोप लगाया था कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने पूर्वी प्रांत में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर भेजे गए कई ड्रोन मार गिराए थे। सऊदी सरकार ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित संगठनों को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई की। इराक ने बताया संप्रभुता का उल्लंघन इस पूरे घटनाक्रम पर इराक सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अमेरिका और सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई को "अस्वीकार्य आक्रमण" बताते हुए कहा कि यह देश की संप्रभुता का उल्लंघन है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह कार्रवाई इराकी अधिकारियों के समन्वय से की गई थी, लेकिन बगदाद ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसने इस तरह की किसी सैन्य कार्रवाई की अनुमति नहीं दी और देश की संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। लगातार बढ़ते सैन्य टकराव के बीच पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति और अस्थिर होती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं हुए तो क्षेत्रीय तनाव और व्यापक संघर्ष में बदल सकता है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Telegram founder Pavel Durov faces terrorism-related allegations after being placed on Russia's international wanted list
Russia vs Telegram: रूस ने Pavel Durov को इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाला, आतंकवाद में मदद का आरोप

Russia Telegram News: मैसेजिंग ऐप Telegram के संस्थापक Pavel Durov की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) ने उन पर आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने का आरोप लगाते हुए इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में शामिल कर दिया है। रूसी एजेंसी का दावा है कि टेलीग्राम ने ऐसे कई चैनल, चैट और बॉट नहीं हटाए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर यूक्रेनी खुफिया एजेंसियां और चरमपंथी संगठन रूस के खिलाफ कर रहे थे। FSB ने क्या लगाए आरोप? रूस की सुरक्षा एजेंसी FSB के मुताबिक, टेलीग्राम पर मौजूद कुछ चैनल और बॉट का इस्तेमाल कथित तौर पर रूस में तोड़फोड़, आतंकवादी हमलों की साजिश, साइबर धोखाधड़ी और हिंसक गतिविधियों के समन्वय के लिए किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इन गतिविधियों में यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों और आतंकवादी संगठनों की भूमिका रही, लेकिन टेलीग्राम ने ऐसे अकाउंट्स और चैनलों को हटाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, यदि रूस में इन आरोपों में ड्यूरोव दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें उम्रकैद तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है। डेटिंग चैटबॉट को लेकर भी गंभीर दावा FSB ने यह भी दावा किया है कि टेलीग्राम पर मौजूद एक लोकप्रिय डेटिंग चैटबॉट का इस्तेमाल कथित तौर पर यूक्रेनी सुरक्षा एजेंसियों ने रूस के युवाओं को तोड़फोड़ और आतंकवादी गतिविधियों के लिए भर्ती करने में किया। एजेंसी के अनुसार, जुलाई 2025 से अब तक इस मामले में 12 से 22 वर्ष की आयु के 46 लोगों को हिरासत में लिया गया है। Telegram पर रूस की बढ़ती सख्ती रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से मॉस्को ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना नियंत्रण लगातार बढ़ाया है। रूस में Facebook, Instagram और X पर पहले ही प्रतिबंध या कड़े प्रतिबंधात्मक कदम लागू किए जा चुके हैं। YouTube की स्पीड सीमित की गई है, जबकि Signal और Viber जैसे मैसेजिंग ऐप भी ब्लॉक किए जा चुके हैं। अब Telegram और WhatsApp पर भी निगरानी और सख्ती बढ़ाई जा रही है। कौन हैं Pavel Durov? Pavel Durov ने वर्ष 2013 में Telegram की स्थापना की थी। कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म के दुनिया भर में 1 अरब से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इससे पहले उन्होंने रूस के लोकप्रिय सोशल नेटवर्क VKontakte (VK) की भी स्थापना की थी। हालांकि 2014 में रूसी अधिकारियों के साथ विवाद के बाद उन्होंने कंपनी छोड़ दी और विदेश चले गए। वर्तमान में उनके पास फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की नागरिकता है। पहले भी कानूनी जांच का सामना कर चुके हैं यह पहला मौका नहीं है जब पावेल ड्यूरोव कानूनी विवादों में घिरे हैं। 2024 में फ्रांस में उन्हें उन आरोपों की जांच के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था, जिनमें टेलीग्राम के जरिए कथित आपराधिक गतिविधियों, ड्रग तस्करी, बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री के प्रसार को रोकने में विफल रहने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पर्याप्त सहयोग न करने के आरोप शामिल थे। रूस की इस ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर वैश्विक बहस तेज कर दी है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
रूस ने यूक्रेन के ओडेसा और चोर्नोमोर्स्क बंदरगाहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए
रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों और नौसैनिक ठिकानों पर नए हमले किए, कई इलाकों में हवाई हमले का अलर्ट

मॉस्को/कीव, एजेंसियां। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच रूस ने एक बार फिर यूक्रेन के प्रमुख ओडेसा और चोर्नोमोर्स्क बंदरगाहों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि इन हमलों में बंदरगाहों की सैन्य अवसंरचना, ईंधन भंडारण केंद्र और यूक्रेनी सेना के लिए सामान ले जा रहे जहाजों को निशाना बनाया गया। हालांकि यूक्रेन ने कई हमलों को नाकाम करने का दावा किया है, जबकि स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।   ओडेसा और चोर्नोमोर्स्क रहे हमलों का मुख्य निशाना   रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर माल उतार रहे एक कार्गो जहाज, सैन्य सामग्री के गोदाम और ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया गया। वहीं ओडेसा में बंदरगाह के लोडिंग टर्मिनल, गोदामों और यूक्रेनी सेना के लिए सामान लेकर पहुंच रहे जहाजों को निशाना बनाया गया। रूस ने यह भी दावा किया कि ड्रोन हमलों में यूक्रेनी सैन्य ड्रोन रखने वाले कई गोदाम नष्ट किए गए।   यूक्रेन में कई क्षेत्रों में एयर रेड अलर्ट   हमलों के बाद यूक्रेन के दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में हवाई हमले का अलर्ट जारी कर दिया गया। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से बंकरों और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। कई शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सक्रिय कर दिया गया।   काला सागर में बढ़ा तनाव, समुद्री व्यापार प्रभावित   लगातार हो रहे हमलों का असर काला सागर (Black Sea) के समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। दुनिया की प्रमुख शिपिंग कंपनी Maersk ने सुरक्षा कारणों से चोर्नोमोर्स्क फिशिंग पोर्ट के जरिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। कई जहाजों का मार्ग बदलकर रोमानिया के कॉन्स्टांटा बंदरगाह की ओर किया जा रहा है।   दोनों देशों ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां   करीब साढ़े चार साल से जारी युद्ध के दौरान हाल के दिनों में रूस और यूक्रेन दोनों ने काला सागर और आज़ोव सागर क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के बंदरगाहों, जहाजों और सैन्य रसद व्यवस्था को निशाना बना रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अनाज निर्यात पर भी असर पड़ रहा है।   अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता   लगातार बढ़ते हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि काला सागर क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो वैश्विक खाद्यान्न आपूर्ति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
Cargo ship MV Golden Leo after the missile attack near Ukraine's Odesa port
यूक्रेन में कार्गो जहाज पर मिसाइल हमला, 4 भारतीयों की मौत; भारत ने जताया कड़ा विरोध

Ukraine Ship Attack: यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए कार्गो जहाज MV Golden Leo पर हुए मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रूस के राजदूत को तलब किया और कहा कि व्यापारिक जहाजों तथा निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह हमला 19 जुलाई की शाम उस समय हुआ जब गिनी-बिसाऊ के झंडे वाला यह मालवाहक जहाज ओडेसा पोर्ट से मक्का लेकर रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 17 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे। हमले में चार भारतीयों की मौत हो गई, जबकि एक घायल भारतीय का अस्पताल में इलाज चल रहा है। यूक्रेन का दावा- रूसी क्रूज मिसाइलों से किया गया हमला यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, जहाज बंदरगाह से निकलने के कुछ ही समय बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने बताया कि मिसाइल लगने के बाद जहाज में भीषण आग लग गई। पूरी रात सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में कुल 10 लोगों की मौत हुई है। भारत सरकार ने जताया कड़ा विरोध भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि व्यापारिक जहाजों, निर्दोष नागरिकों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीयों तथा उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। भारत ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह के हमले वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे हमलों से बचा जाना चाहिए। ब्लैक सी में लगातार बढ़ रहा है खतरा रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। हाल के महीनों में रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों और कार्गो जहाजों पर हमले बढ़ाए हैं, जबकि यूक्रेन भी रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातकों में शामिल है और वैश्विक गेहूं तथा मक्का आपूर्ति में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक सी में बढ़ते सैन्य हमलों से अनाज निर्यात प्रभावित हो सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार और समुद्री व्यापार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है। वहीं रूस को भी सी ऑफ एजोव के जरिए होने वाले अपने अनाज निर्यात में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Southern Iran Blasts
दक्षिणी ईरान में धमाकों के बाद बढ़ा तनाव, अमेरिका ने किसी भी भूमिका से किया इनकार; कूटनीतिक प्रयास तेज

तेहरान/वॉशिंगटन, एजेंसियां। दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में हुए रहस्यमय धमाकों के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। धमाके बुशेहर और अन्य सैन्य क्षेत्रों के आसपास हुए, जिसके बाद अमेरिका ने स्पष्ट किया कि इन घटनाओं में उसकी सेना की कोई भूमिका नहीं है। वहीं, ईरान ने हालात को देखते हुए क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क तेज कर दिए हैं।   अमेरिका ने हमलों में शामिल होने से किया इनकार   अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर कोई नया हमला नहीं किया है। उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें अमेरिका की भूमिका होने का दावा किया गया था।   ईरान में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर   ईरानी अधिकारियों के अनुसार, धमाकों के बाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बल और राहत एजेंसियां तैनात कर दी गई हैं। घटनाओं के कारणों की जांच जारी है। हालांकि, अभी तक किसी देश या संगठन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी नहीं ली है।   कूटनीतिक प्रयास हुए तेज   तनाव बढ़ने के बीच ईरान ने क्षेत्रीय देशों और मध्यस्थ देशों के साथ बातचीत तेज कर दी है। ओमान समेत कई देशों के जरिए तनाव कम करने और आगे किसी बड़े सैन्य टकराव से बचने की कोशिशें जारी हैं।   वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी नजर   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए दुनिया भर की निगाहें अब क्षेत्र के अगले घटनाक्रम और कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
Israel Gaza Conflict
गाजा में इजरायली हमले जारी, कई लोगों की मौत; संघर्ष विराम पर अनिश्चितता के बीच फिर बढ़ा तनाव

यरुशलम/गाजा, एजेंसियां। गाजा पट्टी में संघर्ष विराम को लेकर चल रही कोशिशों के बावजूद इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी है। ताजा हमलों में कई लोगों के मारे जाने और अनेक के घायल होने की खबर है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, हमले गाजा के विभिन्न इलाकों में हुए, जबकि इजरायली सेना का कहना है कि उसने आतंकवादी ठिकानों और संदिग्ध लड़ाकों को निशाना बनाया।   संघर्ष विराम के बीच भी जारी हमले   हाल के दिनों में अमेरिका और अन्य मध्यस्थ देशों की ओर से संघर्ष विराम को बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर हिंसा पूरी तरह नहीं थमी है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जिससे हालात फिर तनावपूर्ण बने हुए हैं।   नागरिक इलाकों पर बढ़ी चिंता   रिपोर्टों के अनुसार, कुछ हमले रिहायशी और विस्थापित लोगों के शिविरों के आसपास भी हुए। मानवीय संगठनों ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और राहत कार्यों में बाधा न डालने की अपील की है।   मानवीय संकट और गहराया   लगातार जारी हिंसा के कारण गाजा में खाद्य सामग्री, दवाओं और अन्य जरूरी सामान की उपलब्धता पहले से ही प्रभावित है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है।   कूटनीतिक प्रयास जारी   संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। विभिन्न देशों और संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थायी संघर्ष विराम की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
Indian and Indonesian leaders during the BrahMos missile defence agreement announcement.
भारत-इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल समझौता, रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा क्षेत्र में बड़ा समझौता हुआ है। दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में संपन्न हुआ। इंडोनेशिया खरीदेगा Astra मिसाइल भी समझौते के तहत इंडोनेशिया भारत में विकसित Astra एयर-टू-एयर मिसाइल का भी आयात करेगा। यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है। Astra एक Beyond Visual Range (BVR) मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी से दुश्मन के अत्यधिक गतिशील लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। ब्रह्मोस की अतिरिक्त बैटरियां भी मिल सकती हैं रिपोर्ट के अनुसार, भारत भविष्य में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध करा सकता है। माना जा रहा है कि हालिया सैन्य अभियानों में ब्रह्मोस और Astra जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी विश्वसनीयता और मांग बढ़ी है। समुद्री सुरक्षा सहयोग पर भी बनी सहमति दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और समुद्री संरक्षा (Maritime Safety and Security) को लेकर भी एक व्यापक सहयोग ढांचा तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को नई मजबूती दे रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनाई है। स्वास्थ्य और औद्योगिक सहयोग भी होगा मजबूत प्रधानमंत्री ने कहा कि नए समझौतों के बाद भारत की उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती दवाएं इंडोनेशिया के नागरिकों तक अधिक आसानी से पहुंच सकेंगी। साथ ही, भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा। क्रिटिकल मिनरल्स पर भी हुआ समझौता भारत और इंडोनेशिया ने स्टील सप्लाई चेन से जुड़े महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और तकनीकों पर भी समझौता किया है। इसका उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। चुनाव तकनीक में भी सहयोग की संभावना सूत्रों के मुताबिक, भारत इंडोनेशिया के लिए वहां की आवश्यकताओं के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में भी सहयोग कर सकता है। इसे भारत की चुनाव प्रबंधन तकनीक पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास का संकेत माना जा रहा है।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Denmark government plans nationwide ban on loudspeaker Azaan from mosques
इस्लामाबाद बनने का डर... डेनमार्क में मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर अजान रोकने की तैयारी, मंत्री बोले- बिल्कुल आवाज नहीं आनी चाहिए

  Denmark Azaan Ban: डेनमार्क सरकार देशभर में मस्जिदों से लाउडस्पीकर के जरिए अजान के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि यह कदम सामाजिक एकीकरण को मजबूत करने और सार्वजनिक जीवन में बढ़ते 'इस्लामीकरण' को लेकर उठाई जा रही चिंताओं के मद्देनजर प्रस्तावित किया जा रहा है। इमिग्रेशन एवं इंटीग्रेशन मंत्री मोर्टेन बॉडस्कोव ने कहा कि डेनमार्क की पहचान स्पष्ट रहनी चाहिए और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी दूसरे देश के माहौल में रह रहे हैं। देशभर में लागू हो सकता है नया कानून डेनमार्क सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर के जरिए होने वाली अजान पर रोक लगाने के लिए कानूनी ढांचे की समीक्षा फिर से शुरू करने जा रही है। फिलहाल इस तरह के प्रसारण स्थानीय शोर नियंत्रण नियमों के दायरे में आते हैं, लेकिन सरकार अब पूरे देश के लिए एक समान कानून लाने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि प्रस्ताव का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में समान नियम लागू करना और सामाजिक एकीकरण को मजबूत करना है। मंत्री बोले- डेनमार्क की पहचान बनी रहनी चाहिए इमिग्रेशन एवं इंटीग्रेशन मंत्री मोर्टेन बॉडस्कोव ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के जरिए होने वाली धार्मिक घोषणाएं डेनमार्क के सामाजिक वातावरण के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश के कुछ इलाकों को लेकर लोगों में ऐसी भावना नहीं बननी चाहिए कि वे डेनमार्क में नहीं, बल्कि किसी दूसरे देश के माहौल में रह रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि डेनमार्क की छतों पर नमाज की आवाज सुनाई नहीं देनी चाहिए। संसद में पेश होगा प्रस्ताव सरकार संसद में ऐसा प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के जरिए अजान या अन्य धार्मिक घोषणाओं के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान होगा। सरकार के मुताबिक यह धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक लगाने का प्रयास नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक एकीकरण से जुड़ी व्यापक नीति का हिस्सा है। पहले भी उठ चुके हैं ऐसे प्रस्ताव करीब 60 लाख आबादी वाले डेनमार्क में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत है। देश में लगभग 100 मस्जिदें हैं। इससे पहले वर्ष 2020 और 2025 में भी इसी तरह के प्रस्ताव सामने आए थे, लेकिन वे संसद से पारित नहीं हो सके। अब सरकार तीसरी बार इस दिशा में पहल कर रही है। कोपेनहेगन में पहले से लागू हैं नियम राजधानी कोपेनहेगन में शोर नियंत्रण संबंधी नियमों के कारण मस्जिदों को खुले लाउडस्पीकर से अजान प्रसारित करने की अनुमति नहीं है। इसी वजह से शहर की प्रमुख मस्जिदों में बाहरी लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाता। आव्रजन और धार्मिक नियमों पर पहले भी रही सख्ती प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के नेतृत्व वाली सरकार यूरोप की सबसे सख्त आव्रजन नीतियों में गिनी जाती है। डेनमार्क ने वर्ष 2018 में सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने वाले कपड़ों, जैसे बुर्का और नकाब, पर प्रतिबंध लगाया था। अब सरकार इस प्रतिबंध को स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। कुरान जलाने की घटनाओं के बाद बदला था कानून वर्ष 2023 में सार्वजनिक रूप से कुरान की प्रतियां जलाने की घटनाओं के बाद कई मुस्लिम देशों ने डेनमार्क की आलोचना की थी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सरकार ने धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने और उन्हें जलाने पर रोक लगाने वाला कानून लागू किया था। अभी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं फिलहाल लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध का प्रस्ताव विचाराधीन है। सरकार कानूनी समीक्षा कर रही है और किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले उसे संसद की मंजूरी लेनी होगी।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
U.S. President Donald Trump reacts after the Senate blocks a proposal to limit presidential military powers on Iran
ट्रंप को सीनेट में बड़ी राहत: ईरान पर राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियां सीमित करने वाला प्रस्ताव गिरा, दो रिपब्लिकन सांसदों ने बदला रुख

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान नीति के मोर्चे पर बड़ी राजनीतिक जीत मिली है। अमेरिकी सीनेट ने उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की शक्तियों पर कांग्रेस का नियंत्रण बढ़ाना था। मतदान के दौरान दो रिपब्लिकन सीनेटरों के अंतिम समय में रुख बदलने से ट्रंप प्रशासन को राहत मिल गई। प्रस्ताव के रुकने के बाद ट्रंप ने इसे ईरान के लिए "कड़ा संदेश" बताया और अपने सहयोगी सांसदों का धन्यवाद किया। ट्रंप ने जताई खुशी, बोले- ईरान के लिए चेतावनी सीनेट में मतदान के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "वाह! सीनेट ने ईरान पर अपना वोट बदल दिया। रैंड पॉल और बिल कैसिडी ने अपना रुख बदला। नेता जॉन थ्यून, लिंडसे ग्राहम, बर्नी मोरेनो और सभी का धन्यवाद। यह वोट ईरान के लिए एक चेतावनी है।" ट्रंप का कहना है कि राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव अमेरिका की कूटनीतिक और रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता था। राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर लगाम लगाने की कोशिश नाकाम सीनेट में पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी आवश्यक हो। सीनेट ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और इस तरह राष्ट्रपति की मौजूदा युद्ध शक्तियों को सीमित करने की कोशिश फिलहाल विफल हो गई। दो रिपब्लिकन सांसदों ने बदला फैसला इस मतदान का सबसे बड़ा मोड़ दो रिपब्लिकन सांसदों के रुख बदलने से आया। सीनेटर रैंड पॉल ने इस बार 'प्रेजेंट' वोट किया, यानी उन्होंने पक्ष या विपक्ष में मतदान नहीं किया। सीनेटर बिल कैसिडी ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के खिलाफ मतदान किया। अंतिम मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका और परिणाम 47-50-1 रहा। रैंड पॉल बोले- शांति वार्ता के लिए दिया राष्ट्रपति को मौका मतदान से पहले रैंड पॉल ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी युद्ध शक्तियों को लेकर राय नहीं बदली है। उन्होंने लिखा कि उनका 'प्रेजेंट' वोट राष्ट्रपति को स्थायी शांति के लिए बातचीत करने की अधिक गुंजाइश देने के उद्देश्य से है। बिल कैसिडी ने पहले उठाए सवाल, फिर बदला रुख सीनेटर बिल कैसिडी ने पहले ट्रंप प्रशासन से ईरान संघर्ष को लेकर कई सवाल पूछे थे। उनका कहना था कि सांसदों और जनता को युद्ध की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। बाद में उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने उन्हें विस्तृत जानकारी दी, जिससे उनकी कई चिंताएं दूर हो गईं। इसके बाद उन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। कुछ रिपब्लिकन ने किया समर्थन, डेमोक्रेट में भी दिखी अलग राय रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स और लिसा मुर्कोव्स्की ने राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव का विरोध किया। इससे साफ हुआ कि ईरान नीति को लेकर मतभेद केवल पार्टी लाइनों तक सीमित नहीं हैं। राष्ट्रपति की शक्तियों पर बहस जारी अमेरिका में राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों का तर्क है कि यदि कोई फैसला अमेरिका को बड़े सैन्य संघर्ष की ओर ले जा सकता है, तो उसमें कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी अनिवार्य होनी चाहिए। वहीं ट्रंप समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय राष्ट्रपति के पास त्वरित निर्णय लेने की पर्याप्त संवैधानिक शक्तियां बनी रहनी चाहिए। ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच सीनेट का यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत माना जा रहा है, जबकि राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में बहस आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Bangladesh PM Tarique Rahman meets Chinese officials in Beijing to discuss Teesta River project near India's Siliguri Corridor
भारत के ‘चिकन नेक’ के करीब बढ़ी चीन की दस्तक! तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश-चीन की नई डील से बढ़ी रणनीतिक चिंता

  ढाका/बीजिंग: भारत की सुरक्षा और सामरिक हितों से जुड़े संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के करीब स्थित तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग और गहरा होने जा रहा है। बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने तीस्ता समेत अन्य नदियों के जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और नदी पुनरुद्धार परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन से तीस्ता परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता मांगी, जिस पर बीजिंग ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। यह घटनाक्रम भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि तीस्ता नदी परियोजना भारत के अत्यंत संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक स्थित है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा भू-मार्ग है। बीजिंग में हुई अहम बैठक बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस (Bangladesh Sangbad Sangstha) के अनुसार, चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने बीजिंग में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने तीस्ता और अन्य साझा नदियों के बेहतर प्रबंधन को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह तारिक रहमान का दूसरा विदेश दौरा है। इससे पहले उन्होंने मलेशिया की यात्रा की थी। चीन दौरे के दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी चिनफिंग, प्रधानमंत्री ली च्यांग और अन्य वरिष्ठ चीनी नेताओं से भी प्रस्तावित है। बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन में चीन से मांगी मदद बैठक के दौरान तारिक रहमान ने कहा कि उनकी सरकार देशभर में नदी पुनरुद्धार और खुदाई अभियान चला रही है ताकि बाढ़ की समस्या कम हो, पर्यावरण संरक्षण हो सके और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने चीन से— नदी किनारों के कटाव को रोकने, सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने, अंतर्देशीय जल परिवहन मजबूत करने, तथा तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता की मांग की। चीन ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा चीनी जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने कहा कि चीन जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में बांग्लादेश को हरसंभव सहयोग देगा। उन्होंने वर्ष 2005 के दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) और हाल के वर्षों में चीनी विशेषज्ञों की यात्राओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों का सहयोग शोध और तकनीकी आधार पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों और अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए चीन आने का भी निमंत्रण दिया। भारत के लिए क्यों अहम है तीस्ता परियोजना? तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम, पश्चिम बंगाल और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। बांग्लादेश में यह सिंचाई और कृषि के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। रणनीतिक दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी अहमियत यह है कि प्रस्तावित तीस्ता परियोजना भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब स्थित है। लगभग 20-22 किलोमीटर चौड़ा यह गलियारा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है। ऐसे में इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी को भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। भारत की पेशकश ठुकरा चुका है बांग्लादेश भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। वर्ष 2024 में भारत ने तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी विकास में सहयोग देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बांग्लादेश ने इस दिशा में आगे बढ़ने के बजाय चीन के साथ सहयोग का रास्ता चुना। पिछले महीने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भी बीजिंग दौरे के दौरान औपचारिक रूप से चीन से तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना में सहयोग का अनुरोध किया था। गंगा जल संधि पर भी टिकी हैं निगाहें भारत और बांग्लादेश के बीच जल साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण मुद्दा 1996 की गंगा जल संधि है, जिसकी 30 वर्षीय अवधि इस वर्ष पूरी हो रही है। यदि दोनों देश इसे आगे बढ़ाने पर सहमत नहीं होते, तो यह समझौता समाप्त हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तीस्ता परियोजना और गंगा जल बंटवारा दोनों ही भारत-बांग्लादेश संबंधों के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक और कूटनीतिक मुद्दों में शामिल रहेंगे।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
US President Donald Trump addresses questions about the Minab school missile strike during a media briefing.
150 बच्चों की मौत पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- 'सबूत नहीं कि मिनाब स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल से हुआ हमला'

  Washington: ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि स्कूल पर हमला अमेरिकी मिसाइल से किया गया था। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान कई पक्षों की ओर से लगातार मिसाइलें दागी जा रही थीं, इसलिए हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान करना आसान नहीं है। 'हमारी मिसाइल थी, इसका कोई प्रमाण नहीं' हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि कुछ लोगों ने दावा किया कि मिनाब स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल से हमला हुआ, लेकिन उनके पास इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा, "युद्ध के दौरान हर दिशा से मिसाइलें दागी जा रही थीं। ऐसे में यह तय करना बेहद मुश्किल है कि किस मिसाइल ने हमला किया। मुझे ऐसा कोई सबूत नहीं दिखा जिससे यह कहा जा सके कि वह हमारी मिसाइल थी।" 28 फरवरी को हुआ था भीषण हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष के पहले दिन यानी 28 फरवरी को मिनाब स्थित एक स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्राएं शामिल थीं। घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और हमले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी। अमेरिका पर लगे थे गंभीर आरोप हमले के तुरंत बाद कई मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषकों ने आशंका जताई थी कि इसके पीछे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हो सकती है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी होने की बात कही है। ट्रंप ने जांच पर भी जताया संदेह डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इतने बड़े सैन्य संघर्ष के दौरान यह तय करना बेहद कठिन है कि किसी विशेष हमले के लिए कौन जिम्मेदार था। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि इस मामले की पूरी सच्चाई कभी सामने ही न आ सके। उनके मुताबिक, युद्ध क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों और अलग-अलग पक्षों की सैन्य गतिविधियों के कारण जांच एजेंसियों के सामने भी बड़ी चुनौती है। दुनिया की नजर जांच रिपोर्ट पर मिनाब स्कूल पर हुआ हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष की सबसे दर्दनाक घटनाओं में गिना जा रहा है। बड़ी संख्या में बच्चों और नागरिकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान कर पाती हैं या नहीं।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh अगस्त 14, 2026 0