अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। खबर है कि अमेरिका अपने गिराए गए फाइटर जेट के पायलटों की तलाश के लिए C-130 हरक्यूलिस विमान का इस्तेमाल कर रहा है। लो-फ्लाइट में दिखा हरक्यूलिस विमान सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में: C-130 हरक्यूलिस विमान ईरान के ऊपर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ता नजर आ रहा है विमान फ्लेयर छोड़ते हुए दिखाई दे रहा है फ्लेयर का इस्तेमाल आमतौर पर मिसाइल से बचाव के लिए किया जाता है। ये गर्म चिंगारियां मिसाइल को भ्रमित कर देती हैं, जिससे वह असली विमान के बजाय फ्लेयर की ओर मुड़ जाती है। एक पायलट को बचाने का दावा इजराइल के एक अधिकारी ने दावा किया है कि एक अमेरिकी पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है वहीं, दूसरे पायलट की तलाश अभी भी जारी है हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है किस जेट को मार गिराने का दावा? ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को गिराया है कुछ रिपोर्ट्स में इसे F-15E भी बताया जा रहा है इस पर भी अभी तक स्पष्टता नहीं है पायलट को पकड़ने पर इनाम ईरान ने अमेरिकी पायलट को पकड़ने पर 10 बिलियन ईरानी तोमान (करीब 55 लाख रुपये) का इनाम घोषित किया है सरकारी मीडिया के जरिए नागरिकों से पायलट को पकड़कर अधिकारियों को सौंपने की अपील की गई है बढ़ता तनाव यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव को और गंभीर बना सकता है। रेस्क्यू ऑपरेशन पायलट की तलाश इनाम की घोषणा इन सबने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
एक चौंकाने वाले खुलासे में सामने आया है कि अमेरिकी सेना का एक पूर्व सैनिक कथित तौर पर भाड़े का हत्यारा बनकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए टारगेटेड हत्याएं करता था। इस काम के बदले उसे हर महीने करोड़ों रुपये मिलते थे। क्या है पूरा मामला? एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अमेरिकी सैनिक अब्राहम गोलन पर आरोप है कि उसने 2015 में यमन में हत्या के मिशन को अंजाम दिया यह ऑपरेशन कथित तौर पर UAE के इशारे पर किया गया था लक्ष्य थे राजनीतिक विरोधी और खास लोग बनाई निजी ‘किल टीम’ गोलन ने एक पूर्व नेवी सील इसैक गिलमोर के साथ मिलकर “Spear Operations Group” नाम की प्राइवेट मिलिट्री कंपनी बनाई इस टीम में ज्यादातर पूर्व अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज के सदस्य शामिल थे कंपनी पर टारगेटेड असैसिनेशन (लक्षित हत्याओं) का कॉन्ट्रैक्ट लेने का आरोप है कितनी होती थी कमाई? रिपोर्ट्स के मुताबिक: हर महीने करीब 15 लाख डॉलर (लगभग 10 करोड़ रुपये) मिलते थे सफल मिशन पर अलग से बोनस भी दिया जाता था यमन सांसद ने लगाए गंभीर आरोप यमन के सांसद अंसाफ अली मायो ने आरोप लगाया कि: 2015 में उन्हें मारने की साजिश रची गई उनके दफ्तर में 29 दिसंबर 2015 को विस्फोटक लगाए गए धमाके से कुछ मिनट पहले ही वह बच निकले बाद में सुरक्षा कारणों से उन्हें यमन छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। कानूनी कार्रवाई की तैयारी मायो अब अमेरिका में इन पूर्व सैनिकों पर केस कर सकते हैं Alien Tort Statute कानून के तहत विदेशी नागरिक भी अमेरिकी अदालत में मुकदमा दायर कर सकते हैं मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह मामला युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध से जुड़ा हो सकता है गोलन ने कबूला था मिशन अब्राहम गोलन ने 2018 में एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था: “यमन में टारगेटेड असैसिनेशन प्रोग्राम था और मैं उसे चला रहा था।”
Iran और Israel के बीच जारी युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि जंग अभी खत्म होने वाली नहीं है। ‘आधे से ज्यादा सैन्य लक्ष्य हासिल’ नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई अपने “आधे से ज्यादा लक्ष्य” हासिल कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रगति मिशन के लिहाज से है, समयसीमा के अनुसार नहीं। उन्होंने युद्ध समाप्त करने की कोई तय समय-सीमा बताने से इनकार किया, जिससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष अभी जारी रहेगा। क्या है इजरायल की रणनीति? नेतन्याहू के अनुसार, मौजूदा ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना है। इसमें उसकी मिसाइल क्षमता, हथियार उद्योग और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान में ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों और संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया गया है। ‘ईरानी शासन अंदर से ढह सकता है’ इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि Iran का मौजूदा शासन अंदर से कमजोर हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सीधे तौर पर उनका घोषित लक्ष्य नहीं है, बल्कि मौजूदा फोकस सैन्य क्षमताओं को खत्म करने पर है। अमेरिका का रुख और दबाव इस युद्ध में United States भी इजरायल के साथ खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले कहा था कि यह जंग 4 से 6 हफ्तों तक चल सकती है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने संकेत दिया है कि यह संघर्ष कुछ और हफ्तों तक जारी रह सकता है, क्योंकि इससे तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। बढ़ती चिंता: वैश्विक असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है-खासकर ऊर्जा बाजार, कूटनीतिक रिश्तों और क्षेत्रीय स्थिरता पर।
ईस्टर से ठीक पहले यूरोप में एक अनोखी और चौंकाने वाली चोरी सामने आई है, जहां मशहूर चॉकलेट ब्रांड KitKat की करीब 12 टन खेप रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। इस पूरे मामले ने सप्लाई चेन सुरक्षा और बढ़ते कार्गो अपराधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या है पूरा मामला? स्विट्जरलैंड की दिग्गज कंपनी Nestlé ने पुष्टि की है कि 26 मार्च को इटली से पोलैंड जा रहा एक ट्रक, जिसमें लगभग 4 लाख से अधिक KitKat चॉकलेट बार लदे थे, रास्ते में चोरी हो गया। यह खेप खास तौर पर नई Formula One (F1) थीम वाली KitKat सीरीज का हिस्सा थी, जिसे रेस कार के डिजाइन में तैयार किया गया था। F1 थीम वाली खास चॉकलेट यह नई लाइन Formula One के साथ ब्रांड की साझेदारी के बाद लॉन्च की गई थी। इसे लेकर बाजार में पहले से ही काफी उत्साह था, और ईस्टर जैसे बड़े त्योहार से पहले इसकी मांग भी ज्यादा थी। कैसे हुई चोरी? ट्रक इटली के एक फैक्ट्री से निकला था गंतव्य: पोलैंड, जहां से इसे पूरे यूरोप में सप्लाई किया जाना था रास्ते में ही चोरों ने ट्रक को हाईजैक कर लिया अभी तक ट्रक और चॉकलेट दोनों का कोई पता नहीं चल सका है कंपनी के मुताबिक, इस घटना में किसी को चोट नहीं पहुंची, लेकिन यह एक संगठित और योजनाबद्ध चोरी मानी जा रही है। क्या बाजार में होगी कमी? शुरुआती आशंकाओं के बावजूद Nestlé ने साफ किया है कि: उपभोक्ताओं की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है सप्लाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा हालांकि चोरी हुई खेप अनऑफिशियल मार्केट में बिक सकती है कंपनी ने क्या कदम उठाए? KitKat ने ग्राहकों और दुकानदारों को अलर्ट करते हुए कहा है कि: बैच नंबर स्कैन करके चोरी हुई खेप की पहचान की जा सकती है संदिग्ध प्रोडक्ट मिलने पर तुरंत कंपनी को सूचित करें बढ़ता कार्गो क्राइम बना चिंता कंपनी ने इस घटना को सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि बढ़ते “कार्गो क्राइम” का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि: “चोरी के तरीके अब पहले से ज्यादा संगठित और तकनीकी हो गए हैं, जिससे बिजनेस के लिए जोखिम बढ़ गया है।”
मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच इजरायल ने लेबनान को लेकर बड़ा दावा किया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान के करीब 10% हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करेगी। लिटानी नदी तक बनेगा ‘बफर ज़ोन’ काट्ज के मुताबिक, इजरायली सेना लिटानी नदी तक इलाके को नियंत्रित करेगी और वहां एक मजबूत रक्षात्मक बफर ज़ोन तैयार किया जाएगा। यह नदी इजरायल की सीमा से लगभग 30 किलोमीटर अंदर है और यह क्षेत्र लेबनान के कुल भूभाग का करीब एक-दसवां हिस्सा माना जाता है। उन्होंने कहा, “सेना लिटानी नदी तक बचे हुए पुलों और सुरक्षा क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेगी।” काट्ज ने यह भी दावा किया कि जिन इलाकों में “आतंकवाद” मौजूद है, वहां नागरिकों को रहने की अनुमति नहीं होगी। ‘सुरक्षा सुनिश्चित होने तक वापसी नहीं’ इजरायल ने साफ किया है कि जब तक उसकी उत्तरी सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक सेना पीछे नहीं हटेगी। रक्षा मंत्री के अनुसार, दक्षिणी लेबनान से लाखों लोग पहले ही उत्तर की ओर पलायन कर चुके हैं और उनकी वापसी सुरक्षा हालात सुधरने पर ही संभव होगी। क्यों लिया गया फैसला? इजरायल का कहना है कि यह कदम हिजबुल्लाह के खतरे को खत्म करने और अपनी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इजरायली सेना पहले ही लिटानी नदी के आसपास कई पुलों को निशाना बना चुकी है, ताकि हिजबुल्लाह के लड़ाके और हथियार दक्षिणी इलाकों में न पहुंच सकें। काट्ज ने इसे “फॉरवर्ड डिफेंस लाइन” बताया। हिजबुल्लाह की चेतावनी हिजबुल्लाह ने इजरायल के इस प्लान को लेबनान के लिए “अस्तित्व का खतरा” बताया है और कहा है कि किसी भी कब्जे की कोशिश का जोरदार विरोध किया जाएगा। जंग में नया मोड़ यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिजबुल्लाह लगातार इजरायल के शहरों-हाइफा और नाहारिया-पर रॉकेट हमले कर रहा है। वहीं ईरान की ओर से भी ड्रोन हमले जारी हैं। इसके अलावा, बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर धमाकों की खबरें भी सामने आई हैं। कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिख रही हैं। इजरायल का यह बयान मिडिल ईस्ट संघर्ष को और गंभीर मोड़ दे सकता है। अगर दक्षिणी लेबनान में बफर ज़ोन बनाने की योजना आगे बढ़ती है, तो इससे क्षेत्र में जंग और लंबी तथा व्यापक हो सकती है।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई जंग मंगलवार को 25वें दिन में प्रवेश कर गई। इस बीच शांति वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विरोधाभासी दावे सामने आए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हमले लगातार जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और बड़ा समझौता हो सकता है। हालांकि, तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “झूठ” और “प्रोपेगेंडा” बताया है। ईरान बनाम अमेरिका: बातचीत या रणनीति? ट्रंप का दावा: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी, जल्द समझौते के संकेत ईरान का जवाब: बातचीत से इनकार, कहा- अमेरिका समय खरीदने की कोशिश कर रहा डेडलाइन: होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसे अब 5 दिन बढ़ाया गया ट्रंप का कदम: ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले 5 दिन के लिए टाले विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती महंगाई और घरेलू दबाव के कारण ट्रंप इस युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। ईरान के अंदर क्या हो रहा है? तेहरान समेत कई शहरों में सरकार के समर्थन में रैलियां ईरान ने साफ किया- होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर रुख नहीं बदलेगा पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति से बात कर शांति की अपील की खाड़ी देशों में बढ़ा खतरा कुवैत: एक ही रात में 7 बार मिसाइल/ड्रोन अलर्ट सऊदी अरब: 20 ड्रोन हमले नाकाम बहरीन: लगातार चेतावनी सायरन ब्रिटेन: मिडिल ईस्ट में एयर डिफेंस सिस्टम भेजे खाड़ी देशों में सरकारें और आम लोग तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। इजराइल पर हमले और सिस्टम फेल ईरान ने इजराइल के उत्तरी हिस्से पर मिसाइल दागीं “डेविड्स स्लिंग” डिफेंस सिस्टम में खराबी, 2 मिसाइलें टकराईं हमले में कई लोग घायल इजराइली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और कहा कि सैन्य बढ़त को समझौते में बदला जा सकता है। लेबनान, इराक और सीरिया में जंग का विस्तार लेबनान: बेरूत के उपनगरों पर इजराइली हमला, हिज़्बुल्लाह को निशाना इराक: अमेरिका ने ईरान समर्थित गुट पर एयरस्ट्राइक की सीरिया: सैन्य बेस पर मिसाइल हमला विशेषज्ञों का कहना है कि इराक अब “सेकेंडरी बैटलफील्ड” बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद, जिससे तेल सप्लाई पर बड़ा असर दक्षिण कोरिया: 70% से ज्यादा तेल मिडिल ईस्ट से, संकट गहराया जापान: 95% तेल इसी रास्ते से, इमरजेंसी जैसे हालात UAE: इसे “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिका के अंदर भी हलचल व्हाइट हाउस ने कहा- बातचीत को लेकर कोई फाइनल फैसला नहीं पेंटागन ने मीडिया एक्सेस में बदलाव किया मॉरिटानिया में अमेरिकी दूतावास ने आतंकी खतरे का अलर्ट जारी किया
मध्य-पूर्व में जारी ईरान-इज़राइल युद्ध लगातार उग्र होता जा रहा है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए हमले किए हैं, जबकि लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर बड़े स्तर पर स्ट्राइक की गई है। ट्रंप का दावा: ईरान के साथ “बहुत अच्छी” बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी एक अज्ञात ईरानी अधिकारी के साथ “बहुत अच्छी बातचीत” हुई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हाल ही में प्रस्तावित नए हमलों को अस्थायी रूप से टाल दिया है। हालांकि, इन दावों पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बेरूत में इज़राइल के हमले, नागरिकों को पहले चेतावनी मंगलवार सुबह बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में कई धमाके सुने गए। यह इलाका हिज़्बुल्लाह का मजबूत गढ़ माना जाता है। इज़राइली सेना ने कहा कि वह “हिज़्बुल्लाह के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रही है” और हमले से पहले नागरिकों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी गई थी। इज़राइली सेना का सख्त संदेश इज़राइली सेना के अरबी प्रवक्ता ने कहा: “हिज़्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई अभी शुरू ही हुई है।” इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है। दक्षिणी लेबनान में कार्रवाई, दो लड़ाके गिरफ्तार इज़राइली सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के दो सदस्यों को हिरासत में लिया है। इसे क्षेत्र में बढ़ती जमीनी कार्रवाई का संकेत माना जा रहा है। ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के ऊर्जा से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इससे क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। युद्ध का दायरा बढ़ा, कई मोर्चों पर तनाव मौजूदा हालात में यह संघर्ष अब सिर्फ ईरान और इज़राइल तक सीमित नहीं रहा- लेबनान में हिज़्बुल्लाह के साथ टकराव तेज अमेरिका की सैन्य और कूटनीतिक भूमिका बढ़ी हमलों के साथ-साथ बातचीत के संकेत भी
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह युद्ध उम्मीद से कहीं जल्दी समाप्त हो सकता है। नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद ईरान अब न तो यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) करने की स्थिति में है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने अपने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया। “ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई” नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियान के तहत ईरान के उन कारखानों को निशाना बनाया गया है, जहां मिसाइल और परमाणु हथियारों के पुर्जे तैयार किए जाते थे। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन क्षमता “तेजी से नष्ट” की जा रही है सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है अभियान “तेजी से लक्ष्य हासिल कर रहा है” उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है। अमेरिका की भूमिका पर क्या कहा? नेतन्याहू ने इस बात से इनकार किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध में खींचा है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले खुद लेते हैं और अमेरिका-इजरायल के बीच गहरा तालमेल है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को “महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह गठबंधन वैश्विक सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। गैस ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला नेतन्याहू ने यह भी बताया कि अमेरिका के अनुरोध पर इजरायल ने ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्रों पर आगे हमले फिलहाल रोक दिए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पहले किए गए हमले इजरायल ने “स्वतंत्र रूप से” किए थे। युद्ध का विस्तार संभव, जमीनी कार्रवाई के संकेत अब तक यह संघर्ष मुख्य रूप से हवाई हमलों तक सीमित रहा है, लेकिन नेतन्याहू ने संकेत दिए कि जमीनी कार्रवाई (Ground Operation) भी संभव है। उन्होंने कहा कि इसके कई विकल्प मौजूद हैं, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया। ईरान के अंदर अस्थिरता का दावा नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व में अंदरूनी तनाव और अस्थिरता के संकेत भी दिए। उनका कहना है कि वहां सत्ता के भीतर खींचतान बढ़ रही है और स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह स्थिति किसी बड़े जनविद्रोह में बदलेगी या नहीं। क्या जल्द खत्म होगा युद्ध? नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा सैन्य बढ़त के चलते यह युद्ध उम्मीद से जल्दी समाप्त हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हकीकत, क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक दबाव इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।
यूरोप के समुद्री क्षेत्र में एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। रूस का तेल टैंकर Arctic Metagas इटली और माल्टा के बीच भूमध्य सागर में बिना क्रू के बहता हुआ पाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह टैंकर हाल ही में हुए ड्रोन हमले का शिकार हुआ, जिसके बाद इसे खाली कर दिया गया। क्या हुआ था? सूत्रों के अनुसार, टैंकर पर संदिग्ध ड्रोन अटैक हुआ, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा। सुरक्षा कारणों से क्रू मेंबर्स को तुरंत हटा लिया गया, लेकिन जहाज को समुद्र में ही छोड़ दिया गया। अब यह टैंकर बिना किसी नियंत्रण के समुद्र में बह रहा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। क्यों खतरनाक है यह स्थिति? विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का “ghost tanker” कई बड़े जोखिम पैदा करता है: 1. तेल रिसाव का खतरा टैंकर में मौजूद ईंधन या तेल अगर लीक होता है, तो समुद्र में भारी प्रदूषण फैल सकता है। इससे समुद्री जीव-जंतुओं और पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान हो सकता है। 2. समुद्री टकराव का जोखिम बिना कंट्रोल के बहता जहाज अन्य जहाजों से टकरा सकता है, जिससे बड़े हादसे की संभावना बढ़ जाती है। 3. अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर असर इटली और माल्टा के बीच का क्षेत्र एक व्यस्त समुद्री मार्ग है। ऐसे में यह टैंकर व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बन सकता है। 4. सुरक्षा और जियोपॉलिटिकल तनाव ड्रोन हमले की घटना ने पहले ही सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि समुद्री इलाकों में इस तरह के हमले कितने खतरनाक हो सकते हैं। किस क्षेत्र में है टैंकर? यह घटना Mediterranean Sea के उस हिस्से में हुई है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पास के देश Italy और Malta इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। क्या उठाए जा रहे हैं कदम? समुद्री सुरक्षा एजेंसियां टैंकर की लोकेशन और मूवमेंट पर नजर रख रही हैं संभावित तेल रिसाव को रोकने के लिए आपात योजना तैयार की जा रही है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना की जांच की मांग उठ रही है हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि जहाज को कब और कैसे सुरक्षित किया जाएगा। बिना क्रू के समुद्र में बहता यह रूसी टैंकर सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पर्यावरण, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक राजनीति- तीनों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह एक बड़े समुद्री संकट में बदल सकता है।
सोशल मीडिया पर धुएं के वीडियो वायरल, सरकार ने दी सफाई मध्य पूर्व में जारी ईरान से जुड़े तनाव के बीच शनिवार को दुबई में कई जगह धमाकों की आवाज़ सुनाई देने की खबर सामने आई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ऊपर धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया, जिसके बाद अफवाहों का दौर शुरू हो गया। हालांकि दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किसी प्रकार की घटना नहीं हुई है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। शहर में गिरे मलबे से हुई छोटी घटना, कोई घायल नहीं सरकारी बयान के मुताबिक शहर में एक मामूली घटना उस समय हुई जब किसी हमले के मलबे का हिस्सा गिर गया। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवाई अड्डे के आसपास तेज धमाके की आवाज सुनाई दी थी, जिसके कुछ देर बाद आसमान में धुएं का गुबार दिखाई दिया। कई स्थानीय निवासियों ने भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में विस्फोट जैसी आवाजें सुनने की बात कही है। हवाई यातायात पर पड़ा असर, उड़ानों में 60 से 90 मिनट की देरी फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, दुबई के हवाई क्षेत्र में उस समय सामान्य से कम विमान दिखाई दिए। वहीं एयरपोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर कई उड़ानों के आगमन और प्रस्थान का शेड्यूल जारी रहा, लेकिन औसतन 60 से 90 मिनट की देरी दर्ज की गई। एयरलाइंस की ओर से जारी एडवाइजरी में बताया गया कि दुबई के अलावा अबू धाबी के ज़ायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, शारजाह एयरपोर्ट, अक्रोटिरी एयरपोर्ट और फुजैरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी उड़ान संचालन जारी है। इन शहरों से दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद के लिए वापसी उड़ानें भी संचालित की जा रही हैं ताकि भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट सकें। पिछले हफ्ते भी हमले से हुआ था नुकसान बीते शनिवार को भी दुबई एयरपोर्ट के एक हिस्से में हमले के कारण चार कर्मचारियों के घायल होने और एक कॉनकोर्स के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की ओर से किए गए हमलों में पाम जुमेराह और बुर्ज अल अरब जैसे प्रमुख इलाकों को भी निशाना बनाया गया था। वहीं मंगलवार को ड्रोन के मलबे से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास परिसर में आग लगने की घटना भी सामने आई थी। ईरान-इजरायल संघर्ष में बढ़ता तनाव इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान में भी शनिवार सुबह कई विस्फोटों की खबर आई। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं। अमेरिका ने भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल को 151 मिलियन डॉलर के नए हथियार सौदे को मंजूरी दे दी है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने कहा है कि देश अपनी रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। ऐसे में मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।